अंतर्राष्ट्रीय राजनीति- शीतयुद्ध International Politics-Cold war

इतिहास अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर शीत-युद्ध का प्रभाव द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के काल में संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत रूस के बीच उत्पन्न तनाव की स्थिति को शीत युद्ध के नाम से जाना जाता है। … किन्तु युद्ध समाप्त होते ही, एक ओर ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका तथा दूसरी ओर सोवियत संघ में तीव्र मतभेद उत्पन्न होने लगा।

शीत युद्ध का इतिहास,उत्पत्ति के कारण, और राजनीतिक प्रभाव

शीतयुद्ध

शीतयुद्ध नामक शब्द का प्रयोग ‘बर्नार्ड बारूच’ ने किया, जिसे वॉल्टर लिपमैन’ ने लोकप्रिय बनाया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दो महाशक्तियों अमेरिका और सोवियत संघ का उदय हुआ। इन … Read the rest

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लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण Democratic Decentralization

लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण से तात्पर्य लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का अर्थ है कि शासन-सत्ता को एक स्थान पर केंद्रित करने के बजाय उसे स्थानीय स्तरों पर विभाजित किया जाए, ताकि आम आदमी की सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित हो सके और वह अपने हितों व आवश्यकताओं के अनुरूप शासन-संचालन में अपना योगदान दे सके।

लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण

लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण

भारत में स्वायत शासन का उल्लेख सबसे पहले प्राचीन भारत में मौर्यकाल एवं पुन: पुरात्तवीय प्रमाण के चोल काल में उत्तरमेरू अभिलेख (परांतक प्रथम 919 से 921 ई0 के) में मिलता है
आधुनिक भारत में प्रथम भारत सरकार के एक प्रस्ताव से 1864 में मिलता है … Read the rest

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राजनीतिक सिद्धान्त Political theories Traditional and Modern

राजनीति के विविध पक्षों के अस्तित्व एवं वैज्ञानिक अध्ययन को राजनीतिक सिद्धान्त कहा जाता है। … इस अर्थ में राजनीति नगर-राज्य तथा उसके प्रशासन का व्यवहारिक एवं दार्शनिक धरातल पर अध्ययन प्रस्तुत करती है। राजनीति को Polis नाम प्रसिद्ध ग्रीक विचारक अरस्तू द्वारा दिया गया है। अतः उन्हें ‘राजनीति विज्ञान का पिता‘ कहा जाता है।

Political theories ( Traditional and Modern ) राजनीतिक सिद्धान्त

राजनीतिक सिद्धान्त के विविध पक्षों के अस्तित्व एवं वैज्ञानिक अध्ययन को राजनीतिक सिद्धान्त कहा जाता है। 

राजनीति के लिए प्रयुक्त अंग्रेजी शब्द पॉलिटिक्स (politics) की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के तीन शब्दों ‘Polis'(नगर-राज्य), ‘Polity'(शासन) तथा … Read the rest

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राज्य की उत्पत्ति के सिद्धांत State Origin Principles

राज्य की उत्पत्ति के सिद्धान्त

राज्य की उत्पत्ति के विषय में व्यक्त किए गए मुख्य सिद्धांत निम्न है ।देवी उत्पत्ति का सिद्धांत ?? 

इस सिद्धांत के अनुसार राज्य की उत्पत्ति ईश्वर के द्वारा की गई है राधा को ईश्वर द्वारा राज्य को संचालित करने के लिए भेजा गया है। प्रजा का कर्तव्य है कि राजा का विरोध ना करें क्योंकि वह ईश्वर का प्रतिनिधि है।

मातृ एवं पितृ प्रधान सिद्धांत??

मातृ सत्तात्मक सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति का कारण स्थाई वैवाहिक संबंधों के अभाव को मानता है परिवार का मुखिया पिता न होकर माता को मानता है संतानों को मां के … Read the rest

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संप्रभुता क्या है??? What is Sovereignty

संप्रभुता का अर्थ होता एक देश के ऊपर शासन करने का पूरा अधिकार उसी देश की सरकार के पास होना और सरकार चुनने से लेकर देश को चलाने के सारे निर्णय लेने का पूरा अधिकार उसी देश की सरकार के पास होना और इस में किसी भी बाहरी तत्व का कोई हस्तक्षेप न होने देना ।

संप्रभुता

संप्रभुता को अंग्रेजी में (sovereignty) कहते हैं soveregnty शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के superanus शब्द से हुई है । जिसका अर्थ है सर्वोच्च सत्ता।

जैसा कि डॉ.गारनर मैं संप्रभुता को राज्य का महत्वपूर्ण तत्व माना है । संप्रभुता किसी राज्य की सर्वोच्च … Read the rest

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बहुलवाद क्या है व इसके कार्य?? Pluralism

बहुलवाद वह सिद्धान्त है जिसके अनुसार समाज मे आज्ञापालन कराने की शक्ति एक ही जगह केंद्रित नही होती,बल्कि वह अनेक समूहों में बिखर जाती है। ये समूह मानव की भिन्न भिन्न आवश्यकताए पूरी करने का दावा करते हैं।

Pluralism बहुलवाद

20 वी शताब्दी में बहुलवाद का उदय सम्प्रभुता के एकलवादी सिद्धान्त के विरूद्ध प्रतिक्रियास्वरूप हुआ। बहुलवाद एक प्रतिकियास्वरूप सिद्धान्त है। बहुलवाद वह सिद्धान्त है जिसके अनुसार समाज मे आज्ञापालन कराने की शक्ति एक ही जगह केंद्रित नही होती,बल्कि वह अनेक समूहों में बिखर जाती है।ये समूह मानव की भिन्न भिन्न आवश्यकताए पूरी करने का दावा करते हैं।

बहुलवाद को विचारधारा … Read the rest

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Government’s Part: सरकार के अंग क्या क्या है ?

Government’s Part

Government’s Part (कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्यायपालिका)

व्यवस्थापिका

सरकार राज्य का एक अनिवार्य तत्व है।सरकार के रूप में ही राज्य एवं उसकी प्रभुत्व शक्ति को मूर्त रूप मिलता है। इसे राज्य की आत्मा कहा जाता है। सरकार राज्य का वह यन्त्र है जिसके ऊपर राज्य के कानून बनाने ,उन्हें क्रियान्वित करने तथा उसकी व्याख्या करने का दायित्व है।

गार्नर का कथन है- “सरकार एक ऐसा संगठन है जिसके द्वारा राज्य अपनी इच्छा को प्रकट करता है, अपने आदेशो को जारी करता है तथा अपने कार्यो को करता है ।”

  • कानून बनाना –व्यवस्थापिका
  • कानून को लागू करना–कार्यपालिका
  • कानून की
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Separation of powers: शक्ति पृथक्करण, नियंत्रण एवं संतुलन PSCB

Separation of powers

Separation of powers (शक्ति पृथक्करण, नियंत्रण एवं संतुलन)

शक्ति पृथक्करण सिद्धांत का अर्थ

सरकार के तीन अंग होते हैं व्यवस्थापिका जो कानून निर्माण का काम करती है कार्यपालिका दो विधियों को लागू करती हैं न्यायपालिका जो कानून की व्याख्या वह विवादों का निर्णय करती है
सरकार के तीनों अंगों में पारस्परिक संबंधों को निर्धारित करने के लिए मॉन्टेस्क्यू ने शक्ति पृथक्करण सिद्धांत का प्रतिपादन किया।

शक्ति पृथक्करण की आवश्यकता

विभिन्न राजनीतिक विद्वानों जैसे जॉन लॉक मॉन्टेस्क्यू Cf स्ट्रांग ला पांलोबरा आदि ने शक्ति पृथक्करण के महत्व को प्रतिपादित किया। इस सिद्धांत की उपयोगिता के निम्नलिखित तर्क दिए … Read the rest

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Types of Government: सरकार के प्रकार

Types of Government

Types of Government (सरकार के प्रकार)

लोकतंत्र, अधिनायकतंत्र, संसदात्मक, अध्यक्षात्मक, एकात्मक एव संघात्मक

1. लोकतंत्र(Democracy)

डेमोक्रेसी सब्द की उतपति ,ग्रीक भाषा के शब्द डेमोस ओर क्रेशिया से हुई है। डेमोस का अर्थ है, लोग तथा क्रेशिया का अर्थ ,शासन से है।अतः लोकतंत्र का आशय लोगो के शासन से है। अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अपने ‘गेटिसबर्ग’भाषण में लोकतंत्र को “जनता का शासन ,जनता के द्वारा,जनता के लिए “रूप में परिभाषित किया ।

लोकतंत्र की परिभाषा

  • सिले के अनुसार,‘लोकतंत्र, ऐसी सरकार है, जिसमे सभी का हिस्सा होता है।’
  • ब्राइस के अनुसार, ‘लोकतंत्र, लोगो का शासन है, जिसमे
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