July 4, 2022
Alwar, Rajasthan, India
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अलंकार किसे कहते हैं? | भेद व प्रकार – उदाहरण सहित

अलंकार किसे कहते हैं? | भेद व प्रकार – उदाहरण सहित

अलंकार किसे कहते हैं काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्दों को अलंकार कहा जाता है | अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार । यहाँ पर अलम का अर्थ होता है ‘ आभूषण है’ क्योंकि मानव समाज बहुत ही सौन्दर्योपासक है उसकी प्रवर्ती  बढ़ाने के लिए अलंकारों को जन्म दिया गया है । जिस तरह से एक नारी अपनी सुन्दरता को बढ़ाने के लिए शरीर पर आभूषण ग्रहण करती हैं उसी प्रकार भाषा  को सुन्दर बनाने के लिए अलंकारों  का भी इस्तेमाल में लाया जाता है ।

अलंकार किसे कहते हैं? भेद व प्रकार,अलंकार कितने प्रकार के होते है, उनके नाम व उद्धरण की पूरी जानकारी 

यदि आप भी अलंकारों के विषय में जानना चाहते है, तो यहाँ पर आपको अलंकार किसे कहते हैं, परिभाषा , अलंकार कितने प्रकार के होते है, उनके नाम व उद्धरण की पूरी जानकारी प्रदान की जा रही है | यह विषय आईएएस परीक्षा के लिए भी सामान रूप से महत्वपूर्ण है तथा यूपीएससी परीक्षा   में अनिवार्य विषय हिंदी में अलंकार के विषय में विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते है | यह लेख पूर्ण रूप से पढने पर आप अलंकार के विषय में इतना जान जायेंगे कि आप इसका वर्णन स्वयं ऊधारण सहित कर सकते है |

अलंकार का सामान्य अर्थ

अलंकार का सामान्य अर्थ है आभूषण या गहना। जिस प्रकार आभूषण से शरीर की शोभा बढ़ती है, उसी प्रकार_अलंकार से काव्य की शोभ बढ़ती है। अलंकार_शब्द का अर्थ है– वह वस्तु जो सुन्दर बनाए या सुन्दर बनाने का साधन हो। साधारण बोलचाल मे आभूषण को अलंकार कहते हैं। जिस प्रकार आभूषण धारण करने से नारी के शरीर की शोभ बढ़ती है वैसे ही अलंकार के प्रयोग से कविता की शोभा बढ़ती है।

अलंकार की विशेषताएं या लक्षण 

1. कथन के असाधारण या चमत्कार पूर्ण प्रकारों क़ो अलंकार कहते हैं।


2. शब्द और अर्थ का वैचित्र्य अलंकार है।


3. काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्मों को अलंकार कहते है।


4.वास्तव मे अलंकार काव्य मे शोभा उत्पन्न न करके वर्तमान शोभा को ही बढ़ाते हैं।


5.अलंकार की परिभाषा आचार्य विश्वनाथ के शब्दों में ” अलंकार शब्द अर्थ-स्वरूप काव्य के

अस्थिर धर्म है और ये भावों रसों का उत्कर्ष करते हुए वैसे ही काव्य की शोभा बढ़ाते हैं जैसे हार आदि आभूषण नारी की सुन्दरता मे चार-चांद लगा देते हैं।

अलंकार के प्रकार

अलंकार को तीन भागों में बांटा गया है।

  • शब्दालंकार

  • अर्थालंकार

  • उभयालंकार

अलंकार के भेद या प्रकार इस प्रकार से है—

1. शब्दालंकार

ऐसे शब्द जो काव्य में चमत्कार केवल शब्द पर ही आश्रित रहते हैं। अर्थात, जब शब्दों के बदलने पर चमत्कार नष्ट हो जाता है या कम हो जाता है। वह शब्द अलंकार कहलाता है।

शब्द अलंकार के मुख्यतः तीन भागों में बांटा गया है।

1 . अनुप्रास अलंकार

2 . यमक अलंकार

3 . श्लेष अलंकार

इसके अलावा शब्दालंकार की और चार भेद होते हैं।

4 . पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार

5 . पुनरुक्तावदाभास अलंकार

6 . वीप्सा अलंकार

7 . वक्रोक्ति अलंकार

1 . अनुप्रास अलंकार (anupras alankar in Hindi)

अनुप्रास अलंकार ऐसी शब्द होती है जिसमें कोई कोई वाक्य या छंद एक ही वर्ण में बार-बार आते हैं या अनेक बार आते हैं। तो वर्णों की आवृत्ति को अनुप्रास अलंकार कहा जाता है।

जैसे: वामन में बागन में बगरयो बसन्त है।

यहां पर ब, न, वर्णों की बार-बार आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार में परिवर्तन हो रहा है।

2 . यमक अलंकार (yamak alankar in Hindi)

यमक अलंकार ऐसी अलंकार हैं जिसमें एक ही शब्द को बार बार प्रयोग करके उन शब्दों का अर्थ अलग किया जाता है। उन्हें कहते यमक अलंकार हैं।

 जैसे:

जीवन दायक है धन सम
जीवन जीवन में धनश्याम।

यहां हम जीवन का अर्थ जल से कर रहा है तथा दूसरा और तीसरा जीवन का अर्थ किसी मनुष्य के प्राण से हैं। इसलिए यहां यमक अलंकार का प्रयोग किया जा रहा है।

3 . श्लेष अलंकार (shlesh alankar Hindi mein)

अलंकार अलंकार है जो एक ही शब्दों में अनेक अर्थ का बोध करता हो। ऐसे अलंकार को श्लेष अलंकार कहते हैं।

जैसे:

सुवरन को खोजत फिरत
कवि व्यभिचारी चोर।

यहां पर सुवरन का तीन अर्थ निकलता है जैसे कि: सुंदर वर्ण, सुंदर शरीर, तथा सोना है। यह श्लेष अलंकार का परिभाषा को बता रहा है।

4 . पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार (punrukti Prakash alankar in Hindi)

 पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार ऐसी शब्द हैं जो दो या दो से अधिक होने पर अर्थ का सौंदर्य और भी बढ़ जाता है। वहां पर पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार कहलाते हैं।

जैसे:

धीरे-धीरे वाहन करके तू उन्हीं को उड़ा ला

5 . पुनरुक्तावदाभास अलंकार (punruktavdabhas alankar in Hindi)

जब कोई शब्द भिन्न-भिन्न लेकिन एक समान अर्थ के साथ एक साथ प्रयोग होते हैं। और उनके में प्रयुक्त होना भी वास्तव में इस ढंग से प्रयुक्त ना हो। तब वह शब्द पुनरुक्त आवर आभास अलंकार कहलाते हैं।

6 . विवीप्सा अलंकार (vipsa alankar in Hindi)

पुनरुक्ति प्रकाश के समान ही इनकार में भी शब्दों का प्रयोग बार-बार किया जाता है परंतु वह अपने आवेशों घृणा आदर आश्चर्य आदि को प्रस्तुत करता रहता है।

 जैसे कि:

राम कहत चलु, राम कहत चलु, राम कहत चल भाई

यहां पर राम शब्द का प्रयोग भक्ति के आवेग को स्पष्ट करने के लिए उद्देश्य से दिया गया है।

7 . वक्रोक्ति अलंकार (vakrokti alankar in Hindi)

वक्रोक्ति अलंकार ऐसे अलंकार है जो किसी बात पर वक्ता और श्रोता की युक्ति के संबंध में अर्थ की कल्पना में विभिन्नता का आभास डालता है। वह वक्रोक्ति अलंकार कहलाता है।

वक्रोक्ति अलंकार के दो भेद हैं।

क) श्लेष वक्रोक्ति अलंकार


ख) काकुवक्रोक्ति अलंकार

क) श्लेष वक्रोक्ति अलंकार:

श्लेष वक्रोक्ति अलंकार ऐसे अलंकार हैं, जो कभी-कभी एक शब्द होने के कारण वक्ता, श्रोता दूसरा अर्थ निकालने लगता है। वह श्लेष वक्रोक्ति अलंकार कहलाता है।

जैसे कि: कहां भिखारी गयौ यहां ते, करै जो तुव पति पालो।

यहां भिखारी शब्द का अर्थ होता है भगवान शंकर को बोला गया।

ख) काकुवक्रोक्ति अलंकार:

काकू वक्रोक्ति अलंकार कभी कंठ धनिया फिर अन्य किसी प्रकार से कहे गए वाक्यों का दूसरा अर्थ है का मालूम होना ही काकू वक्रोक्ति अलंकार कहलाता है।

जैसे कि: मैं सुकुमारी नाथ जोगी।



2. अर्थालंकार

अर्थ अलंकार ऐसे अलंकार है, जो चमत्कारी धर्म या काव्य का काव्यगत अर्थ को अलंकृत करने का कार्य करता हो, जहां काव्यगत चमत्कार अर्थ पर आधारित हो वह का अर्थ अलंकार कहलाता है। 

अर्थालंकार के चार भेद होते हैं।

i) उपमा अलंकार


ii) रूपक अलंकार


iii) उत्प्रेक्षा अलंकार


iv) अतिशयोक्ति अलंकार

i) उपमा अलंकार (upma alankar in Hindi):

उपमा अलंकार ऐसे अलंकार है, जब दो वस्तुओं में समान गुण हों या फिर विशेषता का आभास कराता हो या उनकी तुलना कर आती है। तब वहां पर उपमा अलंकार होता है।

उपमा अलंकार के अंग:

उपमा अलंकार के निम्नलिखित अंग है।

  • उपमेय,

  • उपमान

  • समता वाचक शब्द

  • अर्थ

  • उपमेय: जिसका वर्णन हो या फिर किसी की उपमा दी जाती हो ऐसे शब्द को ही उप में कहते हैं।

  • उपमान: ऐसे शब्द जिसमें तुलना किया जाता हो।

  • समानता वाचक शब्द: ज्यों, सम, सा, सी, तुल्य, आदि।

  • समान धर्म: उपमेय और उपमान के समान धर्म को व्यक्त करने वाला शब्द ही उपमान धन कहलाता है !

  • जैसे कि:

  • बढ़ते नदशा वह लहर गया। यहां राणा प्रताप का घोड़ा चेतक हो उसमें गया गया है। बढ़ता हुआ नद सा उपमान सा समानता वाचक शब्द लहर गया समान धर्म।

ii) रूपक अलंकार(rupak alankar in Hindi):

यह ऐसे अलंकार है जहां अपमान और अपने के भेद को समाप्त करने का कार्य करता है। उन्हें एक कर दिया जाए वहां रूपक अलंकार का कार्य होता है। इसके लिए कुछ बातों का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है।

जैसे कि:

  • उपमेय को उपमान का रूप देना।

  • वाचक शब्द का लोप होना।

  • उपमेय का भी साथ में वर्णन।

उदित उदयगिरि मंच पर रघुवर बाल पतंग। विगसे संत-सरोज सब हरषे लोचन भृंग।।

iii) उत्प्रेक्षा अलंकार (utpreksha alankar In Hindi):

 उत्प्रेक्षा अलंकार अलंकार है, जो प्रस्तुत उपमेय में कल्पित उपमान की संभावना को दिखाता हो, उसे उत्प्रेक्षा अलंकार कहते हैं।

जैसे कि: मुख्य मानव चंद्रमा है।

iv) अतिशयोक्ति अलंकार (atishyokti alankar in Hindi):

 अतिशयोक्ति अलंकार ही ऐसी अलंकार है, जहां किसी वस्तु यहां व्यक्ति का वर्णन बहुत बड़ा चढ़ाकर किया जाता है। वैसे अलंकार को अतिशयोक्ति अलंकार कहते हैं।

 जैसे कि: संदेश अनी मधुबन कूट भरी।

उभया अलंकार

उभया अलंकार यह अहंकार है जो कि अलंकार के माध्यम से शब्द और अर्थ दोनों का ही पता लगा लेता है या जिसमें शब्द अलंकार और अलंकार दोनों ही सम्मिलित होते हैं। वैसे अलंकार को भी अलंकार कहते हैं।

इस लेख में आपने जाना अलंकार किसे कहते हैं (alankar kise kahate Hain) और अलंकार के कितने भेद होते हैं। उसके साथ आप लोगों ने अलंकार के कुछ उदाहरण भी देखें। जिससे कि आपको समझ में आ गया होगा, यह कितने प्रकार के होते हैं और किस तरह से अलंकार शब्द मिलकर किसी वाक्य को परिवर्तित कर देते हैं। अलंकार, परिभाषा, भेद और उदाहरण आदि सभी की जानकारी इस लेख में दी गई है।

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