July 4, 2022
Alwar, Rajasthan, India
Psychology

Education Planning Unit शिक्षण की योजना व दैनिक पाठ योजना

Education Planning Unit

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Education Planning Unit (शिक्षण की योजना, इकाई व दैनिक पाठ योजना)

रमन बिहारी लाल के अनुसार- ” किसी 1 घंटे के लिए निश्चित अंश को प्रारंभ करने के पहले हम उनके लिए निश्चित पाठ्य वस्तु का विश्लेषण कर उसके शिक्षण के लिए एक योजना बनाते हैं इसी को दैनिक पाठ योजना कहते हैं।”

दैनिक पाठ योजना का महत्व ( Importance of daily text plan )–

दैनिक पाठ योजना द्वारा शिक्षण को उद्देश्यनिष्ठ बनाया जा सकता है पाठ योजना द्वारा शिक्षक के सफल शिक्षण के लिए पूर्व विचार एवं चिंतन का अवसर मिलता है इसके द्वारा स्थाई ज्ञान की प्राप्ति होती है

पाठ योजना बनाते समय अध्यापक विभिन्न शैक्षिक उद्देश्यों को ध्यान में रखता है छात्रों के व्यवहारों को अभिप्रेरित एवं नियंत्रित करने में सहायता करती हैं शिक्षक विश्वास दृढ़ता एवं क्रमबद्ध रूप से शिक्षण करता है

पाठ योजना विषय वस्तु को प्रभावी एवं मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत करने में सहायक होती है प्रदत्त ज्ञान का मूल्यांकन किया जा सकता है।

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ईकाई योजना ( Unit plan )

इकाई योजना का मुख्य फायदा यह हैं कि इससे अधिगम -प्रबंधन मे आसानी होती हैं। चूँकि इसमे सभी अधिगम-क्रियाओं की अनुसूची दी जाती हैं और उन क्रियाओं से संम्बंन्धित प्रयोग मे आने वाली पठनीय सामग्री का उल्लेख होता हैं

इसलिए कार्य योजना तैयार करने का कार्य भी अपेक्षाकृत सरल हो जाता हैं। जब नियोजन अध्याय विषयक होता हैं तो हो सकता हैं कि विद्दाथिर्यो को उत्पत्ति या वास्तविक उपलब्धि जैसी भावना का अनुभव न हो

ईकाई योजना एवं पाठयोजना मे साम्य एवं वैषभ्य ईकाई योजना और पाठ योजना मे कई प्रकार की साम्यताएं दिखाई पड़ती हैं

पाठ योजना के प्रकार  ( Types of lesson plan )

  1. वार्षिक पाठ योजना ( Yearly lesson plan )
  2. इकाई पाठ योजना ( Unit lesson plan )
  3. दैनिक पाठ योजना ( Daily lesson plans )

वार्षिक पाठ योजना ( Yearly lesson plan )

एक शिक्षक द्वारा एक शैक्षिक सत्र में कराए जाने वाले कार्य की रूपरेखा जिसे वह अपनी डायरी में तैयार करता है उसे वार्षिक योजना कहा जाता है, वार्षिक योजना निर्धारण करते समय विद्यालय की स्थिति, कार्यक्षमता ,पाठ्यक्रम, समय सीमा, विद्यालय में उपलब्ध साधनों का ध्यान रखा जाना चाहिए, वार्षिक योजना के अंतर्गत संपूर्ण पाठ्यक्रम को विभिन्न मासिक योजनाओं में विभक्त कर दिया जाता है,

इसके बाद वर्ष के शिक्षण कार्य दिवसों की संख्या ज्ञात कर तथा माह के आधार पर प्रकरण निर्धारित किए जाते हैं इस प्रकार एक विस्तृत रूप रेखा तैयार कर ली जाती है जिससे शिक्षको यह ज्ञात हो जाता है की कौन से माह में कौन सा पाठ का, कौन सा प्रकरण पढ़ाना है

इसके आधार पर वह अपनी कार्य योजना पर पाठ योजना तैयार कर लेता है वार्षिक योजना का निर्धारण होने के पश्चात शिक्षक को अध्यापक कार्य की प्रगति और कमियों का पता चल जाता है जिसका सही समय पर निराकरण कर लिया जाता है

इकाई पाठ योजना ( Unit lesson plan )

इकाई अर्थ ( Unit meaning )

इकाई_का तात्पर्य ज्ञान के अनुभव के अधिकृत रूप से है, यह पाठ्यक्रम का वह संगठित अंश है जो ज्ञान के किसी महत्वपूर्ण क्षेत्र पर केंद्रित होता है प्रत्येक इकाई की अपनी सरंचना होती है जिसका ज्ञान होने पर उस में निहित विभिन्न प्रकरणों का परस्पर संबंध स्पष्ट हो जाता है

इकाई योजना का आधार गेस्टाल्ट_मनोवैज्ञानिक है गेस्टाल्टवाद के अनुसार संपूर्ण विभिन्न अंशों का मात्र योग नहीं होता ,परंतु अंशो के योग से भी कुछ अधिक होता है

शिक्षा के क्षेत्र में इकाई शब्द देने का श्रेय हरबर्ट स्पेंसर को दिया जाता है इकाई शब्द का अर्थ है ज्ञान या अनुभव को एक सूत्र में पिरोना इकाई योजना का प्रतिपादक SC मॉरिसन के द्वारा 1926 में दिया गया है मॉरिसन के अनुसार यदि विषय वस्तु पर दक्षता प्राप्त करनी है

तो उसे इकाई में विभाजित कर दिया जाना चाहिए इकाई योजना के अंतर्गत एक ही आधार पर आधारित विभिन्न पाठो को एकत्रित कर एक इकाई माना जाता है छात्रों के व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन लाने के लिए शिक्षण शास्त्र के सिद्धांतों को लागू करने के पूर्व का चिंतन है, इकाई योजना शिक्षा की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है

जिससे विषय वस्तु को इस प्रकार संगठित किया जाता है कि सीखने और सीखने की परिस्थितियां महत्वपूर्ण बन जाती है या योजना संपूर्ण से अंश की ओर बढ़ते हुए ज्ञान प्राप्त करने की मनोवैज्ञानिक सिद्धांत पर काम करती है इसके निर्माण में सबसे पहले विषय वस्तु को विभिन्न इकाइयों में बांटा जाता है

तथा उसे पूर्ण करने के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित कर ली जाती है ,समय सीमा अल्पकालिक होती इसलिए इसे अल्पकालिक योजना भी कहते हैं ,इसके अंतर्गत वस्तु से संबंधित शिक्षक और छात्र की क्रियाएं, अधिगम सामग्री एवं मूल्यांकन की प्रविधियां को समाहित कर एक योजना पद एवं व्यवस्थित ढंग से लिखा जाता है

दैनिक पाठ योजना ( Daily lesson plans )

जब शिक्षक एक कालांश के लिए शिक्षण की योजना तैयार करता है तो उसे दैनिक पाठ योजना या शिक्षण की रूपरेखा कहते हैं शिक्षक द्वारा शिक्षण कार्य के क्रियान्वयन से पूर्ण उसकी एक रूपरेखा तैयार की जाती है जिसमें वह कक्षा में प्रवेश लेकर शिक्षण के पश्चात कक्षा से बाहर आने तक के समस्त कार्यों

जैसे शिक्षण उद्देश्य ,छात्रों के पूर्व ज्ञान, विषय वस्तु ,शिक्षण विधियों, प्रविधियों ,सहायक सामग्री, मूल्यांकन आदि सभी का निर्धारण करता है ,दैनिक पाठ योजना को छात्रों को प्रतिदिन शिक्षण करने को तैयार किया जाता है, पाठ योजना छात्रों के मानसिक स्तर में योग्यता तथा निश्चित समय को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है

दैनिक पाठ योजना इकाई योजना का ही एक भाग है तथा यह शिक्षक की एक तरह से पूर्व तैयारी होती है ,डेविस के अनुसार -कक्षा में जाने से पूर्व अध्यापक को पूरी तैयारी कर लेनी चाहिए क्योंकि उसकी प्रगति में कोई भी बात इतनी बाधक नहीं है जितनी की शिक्षण की अपूर्ण तैयारी।

हरबर्ट की पाठ योजना

प्राचीनतम पाठ योजनाओं में से एक है। इस पाठ योजना के जन्मदाता प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री हरबर्ट है। प्रो. हरबर्ट की अधिगम के संबंध में यह धारणा है कि प्रत्येक छात्र बाहर से मिलने वाले ज्ञान को संचित करता रहता है, यदि नवीन ज्ञान को छोटे-छोटे सोपानों में बाँटकर उसे पूर्व संचित ज्ञान से संबंधित करके पढ़ाया जाये तो छात्र उसे अधिक शीघ्रता एवं सुगमता से ग्र्रहण करता है।हरबर्ट पाठ योजना में स्मृति स्तर पर सीखने को अधिक प्रभावशाली माना जाता है। यह पाठ योजना विषय-वस्तु केन्द्रित है। इसमें पाठ के छात्रों के सम्मुख प्रस्तुतीकरण की आधिक महत्वपूर्ण माना जाता है और उस पर अधिक बल दिया जाता है, छात्रों की अपनी आवश्यकताओं, रुचियों, मूल्यों आदि को इसमें अधिक स्थान नहीं दिया जाता है।

हरबर्ट ने कक्षा शिक्षण के लिए सर्वप्रथम निम्न चार पदों का प्रतिपादन किया-

स्पष्टता: तथ्यों व विषयसामग्री को शिक्षार्थी के समक्ष स्पष्टता से प्रस्तुत करना।

सम्बद्ध: प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों या नवीन ज्ञान को बालक के पूर्व ज्ञान से सम्बद्ध करना।

व्यवस्था: बालक के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों व नवीन ज्ञान को व्यवस्थित रूप देना।

विधि:हरबर्ट ने उपर्युक्त चार सोपानों की विवेचना की जिसे उसके शिष्यों/अनुयायियों ने अधिक स्पष्ट व महत्वपूर्ण बनाने का प्रयास किया। उसके शिष्य जिलर ने सर्वप्रथम ‘स्पष्टता’ को दो भागों में विभक्त किया।

(1) प्रस्तावना

(2) प्रस्तुतीकरण

हरबर्ट के एक अन्य शिष्य राइन ने इनमें एक उपकथन और जोड़ा, वह था- ‘उद्देश्य’। इस परिवर्तन के बाद प्रथम दो पद इस प्रकार हो गए-

(1) (अ) प्रस्तावना
2) प्रस्तुतीकरणहरबर्ट के एक अन्य शिष्य राइन ने इनमें एक उपकथन और जोड़ा, वह था- ‘उद्देश्य’। इस परिवर्तन के बाद प्रथम दो पद इस प्रकार हो गए-
(1) (अ) प्रस्तावना(ब) उद्देश्य कथन(2) प्रस्तुतीकरणइसके बाद हरबर्ट के अनुयायियों ने हरबर्ट के शेष तीन पदो के नामों में भी इस प्रकार परिवर्तन कर दिए-सम्बद्ध- तुलनाव्यवस्था- सामान्यीकरण

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