August 13, 2022
Alwar, Rajasthan, India
Arts & Culture

राजस्थान के मेले के बारे में जाने Rajasthan Fair

राजस्थान के पशु मेले ( Animal Fairs of Rajasthan )

1. श्रीबलदेव पशु मेला मेड़ता सिटी (नागौर)

  • इस मेले का आयोजन चेत्र मास के सुदी पक्ष में होता हैं
  • नागौरी नस्ल से संबंधित है।

2. श्री वीर तेजाजी पशु मेला परबतसर (नागौर)

  • श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक चलता है।
  • इस मेले से राज्य सरकार को सर्वाधिक आय होती है।

3. रामदेव पशु मेलामानासर (नागौर)

  • इस मेले का आयोजन मार्गशीर्ष माह में होता है।
  • इस मेले में नागौरी किस्म के बैलों की सर्वाधिक बिक्री होती है।

4. गोमती सागर पशु मेला झालरापाटन (झालावाड़)

  •  इस मेले का आयोजन वैशाख माह में होता है।
  • मालवी नस्ल से संबंधित है।यह पशु मेला हाडौती अंचल का सबसे बडा पशुमेला है।

5. चन्द्रभागा पशु मेला झालरापाटन (झालावाड़)

  • कार्तिक माह में आयोजित होता है।
  • मालवी नस्ल से संबंधित है।

6. पुष्कर पशु मेला

  • कार्तिक माह मे आयोजित होता हैं
  • इस मेले का आयोजन पुष्कर (अजमेर) में किया जाता है।
  • गिर नस्ल से संबंधित है।

7. गोगामेड़ी पशु मेला नोहर (हनुमानगढ़)

  • इस मेले का आयोजन भाद्रपद माह में होता है।
  • नस्ल से संबंधित है।
  • राजस्थान का सबसे लम्बी अवधि तक चलन वाला पशु मेला है।

8. शिवरात्री पशु मेला करौली

  • फाल्गुन मास में आयोजित होता है।
  • हरियाणवी नस्ल से संबंधित है।

9. जसवंत प्रदर्शनी एवं पुश मेला

  • इस मेले का आयोजन आश्विन मास में होता है।
  • हरियाणवी नस्ल से संबंधित है।

10. श्री मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाडा (बाङमेर)

  • यह मेला चैत्र कृष्ण ग्यारस से चैत्र शुक्ल ग्यारस तक लूनी नदी के तट पर आयोजित किया जाता है।
  •  थारपारकर (मुख्यतः) व काॅकरेज नस्ल की बिक्री होती है।
  •  देशी महीनों के अनुसार सबसे पहले आने वाला पशु मेला है।

11. बहरोड़ पशु मेला बहरोड (अलवर)

  • मुर्राह भैंस का व्यापार होता है।

12. बाबा रधुनाथ पुरी पशु मेला सांचैर (जालौर)में आयोजित होता है।

13. सेवडिया पशु मेला रानीवाडा (जालौर)

  • रानीवाड़ा राज्य की सबसे बडी दुग्ध डेयरी है।

प्रमुख महोत्सव 

  • अन्तराष्ट्रीय मरू महोत्सव -जैसलमेर में। जनवरी – फरवरी माह में मनाया जाता है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय थार महोत्सव- बाड़मेर में, समय- फरवरी – मार्च
  •  तीज महोत्सव(छोटी तीज) -जयपुर में।, समय – श्रावण शुक्ल तृतीया
  • जली/बड़ी/सातूडी तीज –बूंदी में।, समय-भाद्र कृष्ण तृतीया
  • गणगौर महोत्सव- जयपुर में।, समय-चैत्र शुक्ल तृतीया
  • कार्तिक महोत्सव- पुष्कर, अजमेर में।, समय- कार्तिक पूर्णिमा
  • वेणेश्वर महोत्सव- डुंगरपुर।, समय-माघ पूर्णिमा
  • ऊंट महोत्सव –बीकानेर ।, समय-जनवरी
  •  हाथी महोत्सव- जयपुर, समय- मार्च
  • पतंग महोत्सव- जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर में, समय – जनवरी
  • बैलून महोत्सव- बाड़मेर में।, समय – वर्ष में चार बार
  • मेवाड़ महोत्सव- उदयपुर, समय- अप्रैल
  •  मारवाड़ महोत्सव- जोधपुर, समय- अक्टुबर
  • शरद कालीन महोत्सव- माउण्ट आबू, समय- नवम्बर
  •  ग्रीष्म कालीन महोत्सव- माउण्ट आबू, समय- मई
  • शेखावटी महोत्सव- चुरू – सीकर – झुंझुनू, समय- फरवरी
  • ब्रज महोत्सव- भरतपुर, समय- फरवरी

बेणेश्वर धाम मेला डूंगरपुर

  • सोम , माही व जाखम नदियों के संगम पर मेला भरता है।
  • यह मेला माघ पूर्णिमा को भरता हैं
  • इस मेले को बागड़ का पुष्कर व आदिवासियों मेला भी कहते है। प्राचीन शिवलिंग स्थित है।
  • संत माव जी को बेणेश्वर धाम पर ज्ञान की प्राप्ति हुई।

2. घोटिया अम्बा मेला (बांसवाडा)

  • यह मेला चैत्र अमावस्या को भरता है।
  • इस मेले को “भीलों का कुम्भ” कहते है।

3. भूरिया बाबा/ गोतमेश्वर मेला (अरणोद-प्रतापगढ़)

  • यह मेला वैशाख पूर्णिमा को भरता हैं
  • इस मेले को “मीणा जनजाति का कुम्भ” कहते है।

4. चैथ माता का मेला (चैथ का बरवाडा – सवाई माधोपुर)

  • यह मेला माध कृष्ण चतुर्थी को भरता है।
  • इस मेले को “कंजर जनजाति का कुम्भ” कहते है।

5. गौर का मेला (सिरोही)

  • यह मेला वैशाख पूर्णिमा को भरता है।
  • इस मेले को ‘ गरासिया जनजाति का कुम्भ’ कहते है।

6. सीताबाड़ी का मेला (केलवाड़ा – बांरा)

  • यह मेला ज्येष्ठ अमावस्या को भरता है।
  • इस मेले को “सहरिया जनजाति का कुम्भ” कहते है।
  •  हाडौती अंचल का सबसे बडा मेला है।

7. पुष्कर मेला (पुष्कर अजमेर)

राज के मेले

  • यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।
  • मेरवाड़ा का सबसे बड़ा मेला है।
  • इस मेले के साथ-2 पशु मेले का भी आयोजन होता है जिसे गिर नस्ल का व्यापार होता है।
  • यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का मेला है।
  • इस मेले को “तीर्थो का मामा” कहते है।
  • यह राजस्थान का सबसे रंगीन मेला है।

8. कपिल मुनि का मेला (कोलायत-बीकानेर)

  • यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।
  • मुख्य आकर्षण “कोलायत झील पर दीपदान” है।
  • कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रणेता थे।जंगल प्रेदश का सबसे बड़ा मेला कहलाता है।

9. साहवा का मेला (चूरू)

  • यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।
  •  सिंख धर्म का सबसे बड़ा मेला है।

10. चन्द्रभागा मेला (झालरापाटन -झालावाड़)

  • यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।
  • चन्द्रभागा नदी पर बने शिवालय में पूजन होता हैं
  • झालरापाटन को घण्टियों का शहर कहते है।

इस मेले के साथ-2 पशु मेला भी आयोजित होता है, जिसमें मुख्यतः मालवी नसल का व्यापार होता है।

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