August 13, 2022
Alwar, Rajasthan, India
Psychology

मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई | अर्थ एवं क्षेत्र क्या है?

मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई – अर्थ एवं क्षेत्र के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे ! मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई व मनोविज्ञान का अर्थ क्या है और इसके क्षेत्र कौन-कौन से हैं इन सब के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे यह टॉपिक बहुत ही महत्वपूर्ण है इसलिए आप इस टॉपिक को ध्यान से पढ़ें!

मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई | अर्थ एवं क्षेत्र क्या है?

  • मनोविज्ञान की उत्पत्ति ईसा पूर्व 4 सदी में मानी जाती है!

  • मनोविज्ञान का जनक अरस्तु को माना जाता है।

  • कॉल सैनिक के अनुसार मनोविज्ञान का वास्तविक जनक प्लेटो को माना जाता है।

  • प्राचीन मनो-विज्ञान का जनक अरस्तु को माना जाता है।

मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई एवं अर्थ एवं क्षेत्र आइए जानते हैं

  • एबिगहास के अनुसार सबसे पहले ईसवी पूर्व पांचवी सदी में पैदा हुए दार्शनिक सुकरात ने कहा था मनुष्य को मनुष्य का भी अध्ययन करना चाहिए।

  • सुकरात के शिष्य प्लेटो ने ईसवी पूर्व चौथी सदी में अपने विचार देते हुए कहा था ईश्वर, प्रकृति, मनुष्य आपस में इस प्रकार से बंधे हुए हैं इन्हें एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता।

  • प्लेटो ने ही अपनी पुस्तक रिपब्लिक में लिखा था मनुष्य में आत्मा पाई जाती है और आत्मा की भाव से किसी परम सत्ता को ईश्वर मानता है।

  • प्लूटो के शिष्य अरस्तु (384 ई. पूर्व – 322 ई. पूर्व) ने दर्शनशास्त्र में आत्मा के अध्ययन की शुरुआत की यही आत्मा का अध्ययन आगे चलकर आधुनिक मनोविज्ञान बना इसलिए अरस्तु को मनोविज्ञान का जनक कहते हैं।

  • कॉलसैनिक एकमात्र विद्वान है जिनका मानना है कि आत्मा की अवधारणा सबसे पहले प्लोटो के द्वारा दी गई इसलिए मनो विज्ञान का वास्तविक जनक प्लेटो को माना जाता है।

मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई आइए जानते हैं इसकी शुरुआत

  • लगभग 2000 वर्षों तक अरस्तु के द्वारा किए गए अध्ययन या दी गई विषय वस्तु को लोग पढ़ते आए।

  • पहली बार सोलवीं सदी में 1590 ईसवी के समय यूनानी दार्शनिक रूडोल्फ गोईक्ले साइकोलॉजिया नामक पुस्तक लिखी जिसमें उन्होंने आत्मा के अध्ययन के लिए साइकोलॉजि शब्द का प्रयोग किया तब से लेकर आज तक मनोविज्ञान के लिए अंग्रेजी भाषा में साइकोलॉजि शब्द का प्रयोग किया जाता है।

  • साइकोलॉजि शब्द Psyche+Logus से मिलकर बना है क्योंकि मूलतः ग्रीक भाषा का शब्द है।

  • यूनानी दार्शनिक देकार्ते (1596 ई.- 1650 ई.) ने आत्मा के अध्ययन की विषय वस्तु को भौतिक शास्त्र में जोड़ने का प्रयास किया। तब लोगों ने उनका विरोध किया विशेषकर हॉबस, लॉक, कांट, स्पिनोजा वे प्रमुख दार्शनिक थे जिन्होंने कहा कि आत्मा का अध्ययन भौतिक शास्त्र में संभव नहीं है और सवाल पैदा हो गए आत्मा क्या है,कैसी है, कहां है, और इन सवालों का जवाब नहीं मिलने के कारण यह अभिप्राय अमान्य हो गया।

  • 17 वी सदी में इटली के दार्शनिक पोम्पोनोंजी ने आत्मा के अध्ययन की विषय वस्तु को नया अभिप्राय दिया और मन/मस्तिष्क का विज्ञान बताया।पोम्पोनोंजी के विचारों का समर्थक हाब्स , लॉक, कांट, स्पिनोजा आदि विद्वानों के द्वारा किया गया।

  • 19वीं सदी आते आते यह अभिप्राय भी समाप्त होने लगा इसके लिए कई प्रश्न पैदा हुए जैसे मन व मस्तिष्क में क्या अंतर है मन कितने होते हैं कौन से मन का अध्ययन किया जाता है।

  • 1852 ईस्वी की एक घटना से प्रभावित होकर अमेरिकी विद्वान विलियम जेम्स ने लगभग 18 वर्षों तक मेहनत की और 1870 ईस्वी में आते आते मनोविज्ञान की विषय वस्तु को दर्शनशास्त्र से अलग करते हुए आधुनिक मनोविज्ञान की रचना की इस प्रकार से 1870 में मनो विज्ञान (psychology) स्वतंत्र विषय बना इसे विलियम जेम्स के द्वारा शुरू किया गया इसी कारण से विलियम जेम्स को आधुनिक मनो विज्ञान (psychology) का जनक कहते हैं।

  • विलियम जेम्स ने 1870 ई. मे विचार दिया चेतना ही जीवन है और जीवन ही चेतना है । इनके इसी विचार के आधार पर इसका नया अभिप्राय चेतना का विज्ञान बना और इस विचार का समर्थन विलियम वुनट, जेम्स सली, टीचनर , जेड़विक,(ये सब संरचनावादी थे) आदि ने किया।

मनोविज्ञान की पहली प्रयोगशाला

  • जर्मनी के मनोवैज्ञानिक विलियम वुंट ने 1879 में लिपजिंग नामक स्थान पर कार्ल मार्क्स विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की पहली प्रयोगशाला स्थापित की और प्रयोगात्मक मनो विज्ञान (Psychology) के जनक कहलाए।

मनोविज्ञान के आगे का विकास

  • चेतना का विज्ञान अभिप्राय सबसे कम समय तक प्रचलित रहा और 1900 ई. वी आते आते मात्र 30 वर्षों में समाप्त हो गया इसके नियम दो कारण थे

  • विलियम मैकडूगल (इंग्लैंड)-1900 ई.

  • सिगमंड फ्रायड (वियना) – 1900 ई.

  • इंग्लैंड के विद्वान मेंक़डूगल ने 1900 ई. वीं में अपनी पुस्तक the outline psychology में लिखा की चेतना एक बुरा शब्द है और मनोविज्ञान का अर्थ चेतना के रूप में लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

  • 1900 ई. वी में ही सिगमंड फ्रायड ने मनोविश्लेषण वाद का सिद्धांत दिया और एक बर्फ के टुकड़े का उदाहरण देते हुए समझाने का प्रयास किया की जिस प्रकार से बर्फ के टुकड़े को पानी में डालने पर उसका अधिकतर भाग पानी में डूब जाता है

  • बहुत कम भाग बाहर नजर आता है ठीक उसी प्रकार से चेतना का स्वरूप तीन प्रकार का होता है जिसमें चेतना का भाग केवल 10% और अर्द चेतन व अचेतन भाग 90% होता है। इन दोनों कारणों से यह अभिप्राय समाप्त हो गया।

  • मनोविज्ञान का वर्तमान अभिप्राय बीसवीं सदी के प्रारंभ में अमेरिकी विद्वान जेबी_वाटसन के द्वारा दिया गया जिन्होंने मनो विज्ञान का अर्थ व्यवहार का सकारात्मक विज्ञान/अध्ययन कहा।

  • जेबी वाटसन के द्वारा दिए गए इस अभिप्राय के आधार पर मनो_विज्ञान को व्यवहार का अध्ययन कहते हैं इसका समर्थन मैकडूगल, स्किनर, कॉल सैनिक, क्रो एंड क्रो, हल, मरफी, बोरिंग, मन, आदि के द्वारा किया गया।

  • वुडवर्थ ने इसका समर्थन करते हुए अर्थ यात्रा परिभाषा दी मनो_विज्ञान ने सबसे पहले अपनी आत्मा, फिर मन, और फिर चेतना का त्याग किया तथा वर्तमान में व्यवहार के स्वरूप को अपनाता है।

मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई उससे से संबंधित महत्वपूर्ण बातें

  • वर्तमान में मनो विज्ञान में अर्थ चेतन व अचेतन का अध्ययन किया जाता है।

  • सिगमंड फ्रायड के कार्यों को मनोविज्ञान के क्षेत्र में स्थापित करने का श्रेय प्राइड की पुत्री अन्ना फ्रायड और उनके शिष्य जुग को जाता है।

  • जेबी वाटसन को व्यवहारवाद का जनक कहते हैं तथा इन्हीं को 20 वीं सदी का चमकता सितारा मनो-वैज्ञानिक की संज्ञा दी जाती है।

  • वाटसन ने ही कहा था तुम मुझे एक बालक दो मैं उसे शिक्षक, इंजीनियर, डॉक्टर, चोर, डाकू कुछ भी बना सकता हूं।

मनोविज्ञान की अवधारणा या परिभाषाएं

  • मनोविज्ञान में कुछ विद्वानों के द्वारा मनोविज्ञान की अवधारणाएं या परिभाषाएं दी गई हैं जोकि निम्न प्रकार से है।

  • जेबी वाटसन के अनुसार- ” मनोविज्ञान व्यवहार का सकारात्मक विज्ञान/अध्ययन है।”

  • वुडवर्थ के अनुसार- “ मनोविज्ञान सामाजिक वातावरण में होने वाले मानव व्यवहार का अध्ययन है।”

  • मेकडूगल के अनुसार– ” मनोविज्ञान मानव के आचरण एवं व्यवहार का यथार्थ विज्ञान है।”

  • बोरिंग के अनुसार– ” मनोविज्ञान मानव प्रकृति का अध्ययन है।”

  • मरफी के अनुसार– ” जीवित प्राणियों का सामाजिक वातावरण के साथ होने वाला व्यवहार ही मनोविज्ञान है।”

मनोविज्ञान की प्रमुख शाखाएं या क्षेत्र

  • मनो विज्ञान की कुछ महत्वपूर्ण शाखा है या क्षेत्र होती हैं जोकि निम्न प्रकार से-

  • सामान्य मनोविज्ञान

  • असामान्य मनोविज्ञान

  • बाल मनोविज्ञान

  • किशोर मनोविज्ञान

  • प्रोढ़ मनोविज्ञान

  • शिक्षा मनोविज्ञान

  • निदानात्मक या उपचारात्मक मनोविज्ञान

  • परा मनोविज्ञान

  • पशु मनोविज्ञान

  • तुलनात्मक मनोविज्ञान

  • समाज मनोविज्ञान

  • प्रयोगात्मक मनो विज्ञान

  • औद्योगिक मनो विज्ञान पशु

  • बाल मनो विज्ञान

FAQ

Q. मनोविज्ञान का पिता कौन है?

विल्हेम मैक्समिलियन वुण्ट (Wilhelm Maximilian Wundt ; 16 अगस्त, 1832 – 31 अगस्त, 1920) जर्मनी के चिकित्सक, दार्शनिक, प्राध्यापक थे जिन्हें आधुनिक मनोविज्ञान का जनक माना जाता है।

Q. मनोविज्ञान शब्द की उत्पत्ति कब हुई?

मनोविज्ञान शब्द की उत्पत्ति 17वीं शताब्दी में लैटिन भाषा के दो शब्दों, अंग्रेजी में PSYCHE + LOGOS से मिलकर हुई जहां साइको का अर्थ है – आत्मा अर्थात मन और लोगो का अर्थ है – अध्ययन करना।

Q. मनोविज्ञान किसकी देन है?

आधुनिक मनोविज्ञान की खोज, चिकित्सा विज्ञान के कार्यकर्ताओं की देन हैं। इन खोजों की शुरुआत डॉ॰ फ्रायड ने की। उनके शिष्य अलफ्रेड एडलर चार्ल्स युगं विलियम स्टेकिल और फ्रेंकजी ने इसे आगे बढ़ाया।

Q. भारत में मनोविज्ञान का जनक कौन है?

कलकत्ता विश्वविद्यालय में आधुनिक प्रायोगिक मनोविज्ञान का प्रारम्भ भारतीय मनोवैज्ञानिक डॉ॰ एन. एन. सेनगुप्ता, जो वुण्ट की प्रायोगिक परंपरा में अमेरिका में प्रशिक्षण प्राप्त थे, से बहुत प्रभावित था।

Q. मनोविज्ञान की शाखाएं कितनी है?

मनोविज्ञान की मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त – दोनों प्रकार की शाखाएं हैं। इसकी महत्वपूर्ण शाखाएं सामाजिक एवं पर्यावरण मनोविज्ञान, संगठनात्मक व्यवहार/मनोविज्ञान, क्लीनिकल (निदानात्मक) मनोविज्ञान, मार्गदर्शन एवं परामर्श, औद्योगिक मनोविज्ञान, विकासात्मक, आपराधिक, प्रायोगिक परामर्श, पशु मनोविज्ञान आदि है।


संक्षेप में – इस लेख के माध्यम से मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई व अर्थ एवं क्षेत्र के बारे में जाना ! यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी है ! तो इसे आगे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और इसी तरह पोस्ट पढ़ने के लिए हमारी साइट पर विजिट करते रहिए धन्यवाद !

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