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Rajasthan Geography

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August 12, 2020

राजस्थान की सिंचाई परियोजना Rajasthan ki Sinchai Pariyojana

राज्य की प्रमुख सिचाई State’s main irrigation project

  1. भाँखड़ा नाँगल परियोजना
  2. व्यास परियोजना
  3. चम्बल घाटी परियोजना
  4. माही परियोजना

ये परियोजनाए बहुउद्देश्य परियोजनाए भी है इनसे सिचाई पेयजल एंव विद्युत की पुर्ति करवायी जाती है

1. भांखड़ा नाँगल परियोजना (Bhankha Nagal Project)

यह देश की सबसे बड़ी नदी घाटी बहुउद्देशीय परियोजना है जो कि राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की मिश्रित परियोजना है 

इस परियोजना के निर्माण का सर्वप्रथम विचार 1908 में लुईस डेने के दिमाग में आया स्वतंत्रता के बाद मार्च 1948 में इसके निर्माण का कार्य शुरू हुआ 

इस परियोजना का निर्माण दो चरणों में हुआ जिसमें दो बांध बनाए गए

भाखड़ा बांध

  1. यह देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध है विश्व का दूसरा और एशिया का सबसे ऊंचा कंक्रीट निर्मित गुरुत्व सीधा बांध है 
  2. जिसकी आधारशिला 17 नवंबर 1955 को देश के प्रधानमंत्री Jawahar Lal Nehru द्वारा रखी गई जो कि अक्टूबर 1962 में अमेरिकी बांध निर्माता हार्वे स्लोकेम के निर्देश में बनकर तैयार हुआ 
  3. जिसे 22 अक्टूबर 1963 को जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्र को समर्पित कर दिया 
  1. इस बांध का निर्माण सतलज नदी पर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में किया गया  इस बांध की ऊंचाई 225.55 मीटर ( 740 फीट ) है
  2. लंबाई 518.16 मीटर(1700 फिट) है चौड़ाई 9.14 मीटर (30 फीट) है इस बांध के पीछे के जलाशय को गोविंद सागर झील कहां जाता है
  3. जो की भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है 

भाखड़ा बांध के पिछे बिलासपुर में बने विशाल जलाशय का नाम गोविंद सागर है

जो पंजाब में हरियाणा में राजस्थान की पेयजल व सिंचाई तथा दिल्ली से चंडीगढ़ की पेयजल आवश्यकताओं को पूरी करता है

भारत का सबसे ऊंचा बांध टिहरी बांध है जिसकी ऊंचाई 261 मिटर हैं  इस बांध के दोनों किनारों पर विद्युत संयंत्र स्थापित किए गये है

नाँगल बांध


यह बांध 1952 में बनकर तैयार हुआ सतलज नदी पर भाखड़ा बांध से 13 किलोमीटर नीचे बनाया गया है

यह बांध पंजाब की रोपण जिले में बनाया गया है इस बांध की लंबाई 340.8 मीटर(1000 फीट) & उचांई 29 मीटर (95 फिट) है 

इस बांध पर दो विद्युत संयत्र लगाए गए हैं जो निम्न है
1.गंगेवाल
2.कोटला

इस बांध से सिंचाई के लिए सिचाई के लिए दो नहरे निकाली गई हैं
1. बारी बिस्ट दोआब
2. भांखड़ा नहर

  1. Note राजस्थान को भाखड़ा नांगल परियोजना से पंजाब सरकार व राजस्थान के मध्य 1959 में हुए भाखड़ा नांगल समझौते के तहत 15.22 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हुआ है 
  2. इस परियोजना से सर्वाधिक सिंचाई हनुमानगढ़ जिले में होती है
  3. चूरु गंगानगर हनुमानगढ़ सीकर झुंझुनू से बिकानेर जिलों को विद्युत प्राप्त होती है

इस परियोजना की कुल विद्युत क्षमता 1493 मेगा वाट हैं सिचाई क्षमता 14.6 लाख हेक्टेयर है

जिसमें से राजस्थान को 2.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर सिचाई उपलब्ध होती है राजस्थान को 227.32 MW विद्युत प्राप्त होती है

2. चंबल नदी घाटी परियोजना (Chambal River Valley Project)

यह परियोजना राजस्थान और मध्यप्रदेश की मिश्रित परियोजना है

 जिसमें से राजस्थान और मध्य प्रदेश का 50- 50 प्रतिशत हिस्सा है इस परियोजना का निर्माण तीन चरणों में पूरा हुआ

1. पहला चरण 1953 से 1960 तक-  इस चरण में दो बांध बनाए गए ( गांधी सागर & कोटा बैराज )
2 .दूसरा चरण 1960 से 1970 तक– इस चरण में राणा प्रताप सागर बांध बनाया गया
3. तीसरा चरण 1962 से 1973 तक – इस चरण में जवाहर सागर बांध बनाया गया

1 पहला चरण 1953 से 1960 तक

  1. गांधी सागर बांध यह चंबल नदी पर निर्मित सबसे पहला और सबसे बड़ा बांध है
  2. इस बांध का निर्माण 1960 में पूरा हुआ यह बांध मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में भानपुरा तहसील में चंबल नदी पर है
  3.  इस बांध पर 23 मेगा वाट की 5 विद्युत इकाइयां लगाई गई हैं जिनसे 115 मेगा वाट के विद्युत प्राप्त होती है
  4. कोटा बैराज यह चंबल पर निर्मित दूसरा बांध है यह राजस्थान में बनाया गया चंबल पर पहला बांध है
  5. इस बांध विद्युत उत्पादन नहीं होता है केवल सिंचाई के लिए जल काम में लिया जाता है 
  6. इनसे दो नहरें निकाली गई हैं
  7. 1 दायी नहर
  8. 2.बांयी नहर
  9. दायी नहर राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों में सिंचाई करती है
  10. इस नहर से 8 लिफ्ट नहर निकाली गई हैं जिनमें से दो कोटा में सिंचाई करती हैं
  11. और 6 बांरा में सिंचाई करती हैं
  12. बांयी नहर से केवल राजस्थान मे सिचाई होती है

2 दूसरा चरण 1960 से 1970 तक

  1. राणा प्रताप सागर बांध चंबल नदी पर निर्मित चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में स्थित है 
  2.  इस बांध पर 43 मेगा वाट की 4 विद्युत इकाइयां लगाई गई हैं
  3. जिनसे कुल 172 मेगा वाट विद्युत उत्पन्न होती है 
  4. इस बांध की लंबाई 110 मीटर ऊंचाई 36 मीटर इस बांध से 1.2 लाख हैक्टर क्षेत्र पर सिचाई होती है

3 तीसरा चरण 1962 से 1973 तक

  1. जवाहर सागर बांध कोटा के बोरावास नामक स्थान पर चंबल नदी पर बनाया गया है
  2.  इस बांध पर 33 मेगावाट की 3 विद्युत इकाइयां लगी हैं जिनसे 99 मेगा वाट विद्युत उत्पन्न होती है चंबल नदी पर कुल विद्युत का उत्पादन 386 मेगा वाट होता है
  3. और 4.58 लाख हेक्टर क्षेत्रफल सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है 
  4. जिसमें से राजस्थान को 50% हिस्सा प्राप्त होता है

3. माही नदी घाटी परियोजना

  1. राजस्थान और गुजरात की मिश्रित परियोजना है  
  2. जिसमें राजस्थान का 45% हिस्सा और गुजरात का 55% हिस्सा है 
  3. इस नदी पर तीन बांध स्थित है माही बजाज सागर बांध, कागदी पिकअप वियर बांध ये दोनों बांसवाड़ा में स्थित हैं कडाना बांध पंचमहल गुजरात में स्थित है 
  4. इस नदी घाटी परियोजना से कुल विद्युत का उत्पादन 140 मेगा वाट होता है  
  5. इससे 8.8 लाख हेक्टर पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना

  1. यह परियोजना पूर्ण होने पर विश्व की सबसे बड़ी परियोजना होगी इसे प्रदेश की जीवन रेखा/मरूगंगा भी कहा जाता है।
  2. पहले इसका नाम राजस्थान नहर था। 2 नवम्बर 1984 को इसका नाम इन्दिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया है। 
  3. बीकानेर के इंजीनियर कंवर सैन ने 1948 में भारत सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन पेश किया जिसका विषय बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता था।
  4. IGNP का मुख्यालय(बोर्ड) जयपुर में है।
  1. इस नहर का निर्माण का मुख्य उद्द्देश्य- रावी व्यास नदियों के जल से राजस्थान को आवंटित 86 लाख एकड़ घन फीट जल को उपयोग में लेना है।
  2. नहर निर्माण के लिए सबसे पहले फिरोजपुर में सतलज, व्यास नदियों के संगम पर 1952 में हरिकै बैराज का निर्माण किया गया।
  3. हरिकै बैराज से बाड़मेर के गडरा रोड़ तक नहर बनाने का लक्ष्य रखा गया।
  4. जिससे श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर को जलापूर्ति हो सके।
  5. नहर’ निर्माण कार्य का श्री गणेश तात्कालिक ग्रहमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत ने 31 मार्च 1958 को किया ।
  6. 11 अक्टुबर 1961 को इससे सिंचाई प्रारम्भ हो गई
  7. जब तात्कालिन उपराष्ट्रपति डा. राधाकृष्णनन ने नहर की नौरंगदेसर वितरिका में जल प्रवाहित किया था।

  • IGNP के दो भाग हैं। प्रथम भाग राजस्थान फीडर कहलाता है इसकी लम्बाई 204 कि.मी.(169 कि.मी. पंजाब व हरियाणा + 35 कि.मी. राजस्थान) है।
  • जो हरिकै बैराज से हनुमानगढ़ के मसीतावाली हैड तक विस्तारित है। नहर के इस भाग में जल का दोहन नहीं होता है।
  1. IGNP का दुसरा भाग मुख्य नहर है। इसकी लम्बाई 445 किमी. है।
  2. यह मसीतावाली से जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे तक विस्तारित है।
  3. इस प्रकार IGNP की कुल लम्बाई 649 किमी. है। इसकी वितरिकाओं की लम्बाई 9060 किमी. है।
  4. IGNP के निर्माण के प्रथम चरण में राजस्थान फीडर सूरतगढ़, अनुपगढ़, पुगल शाखा का निर्माण हुआ है।
  5. राजस्थान फीडर का निर्माण कार्य सन् 1975 में पूरा हुआ।

नहर का द्वितीय चरण बीकानेर के पूगल क्षेत्र के सतासर गांव से प्रारम्भ हुआ था।

जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे में द्वितीय चरण पूरा हुआ है। इसलिए मोहनगढ़ कस्बे को IGNP का ZERO POINT कहते हैं।

द्वितीय चरण का कार्य 1972-73 में पुरा हुआ है।

IGNP के द्वारा राज्य के आठ जिलों- हनुमानगढ़, श्री गंगानगर, चूरू, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, जैसलमेर एवं बाड़मेर में सिंचाई हो रही है या होगी।

इनमें से सर्वाधिक कमाण्ड क्षेत्र क्रमशः जैसलमेर एवं बीकानेर जिलों का है।

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना से निम्नलिखीत नहर निकाली गई है।

i) गंधेली(नोहर) साहवा लिफ्ट(पुराना नाम) –  चैधरी कुम्भाराम लिफ्ट नहर(नया नाम)- हनुमानगढ़, चुरू, झुंझुनू(लाभान्वित जिले)

ii) बीकानेर – लुणकरणसर लिफ्ट(पुराना नाम) – कंवरसेन लिफ्ट नहर(नया नाम)-  श्री गंगानगर, बीकानेर(लाभान्वित जिले)

iii) गजनेर लिफ्ट नहर(पुराना नाम) – पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर (नया नाम) – बीकानेर, नागौर(लाभान्वित जिले)

iv) बांगड़सर लिफ्ट नहर(पुराना नाम) – भैरूदम चालनी वीर तेजाजी लिफ्ट नहर (नया नाम) – बीकानेर(लाभान्वित जिले)

v) कोलायत लिफ्ट नहर(पुराना नाम) – डा. करणी सिंह लिफ्ट नहर (नया नाम) – बीकानेर, जोधपुर(लाभान्वित जिले)

vi) फलौदी लिफ्ट नहर(पुराना नाम) – गुरू जम्भेश्वर जलो उत्थान योजना (नया नाम) – जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर(लाभान्वित जिले)

vii) पोकरण लिफ्ट नहर(पुराना नाम) -जयनारायण व्यास लिफ्ट (नया नाम) – जैसलमेर, जोधपुर(लाभान्वित जिले)

viii) जोधपुर लिफ्ट नहर(170 किमी. + 30 किमी. तक पाईप लाईन)(पुराना नाम) – राजीवगांधी लिफ्ट नहर (नया नाम) – जोधपुर(लाभान्वित जिले)

नर्मदा नहर परियोजना ( Narmada Canal Project

नर्मदा नहर को मारवाड़ की जीवन रेखा कहा जाता है यह परियोजना गुजरात, राजस्थान, मद्ये प्रदेश चार राज्यों की संयुक्त परियोजना है

इस परियोजना को सरदार￶ सरोवर बांध परियोजना व् मारवाड़ की भागीरथी गंगा के नाम से जाना जाता है.

इस परियोजना में राजस्थान का हिस्सा￶ 0.05 एम.ए.एफ.है यह राजस्थान की पहली परियोजना है

जिससे सम्पूर्ण सिंचाई ‘ फंवारा पद्धति बूँद-बूँद पर की जाती है.

परियोजना

इस परियोजना के तहत सरदार सरोवर बांध से नहरों के द्वारा सिंचाई की जाती है

इस परियोजना के तहत सर्वप्रथम राजस्थान मे सिलू गॉंव (जालोर )में 27 मार्च, 2008 को आया !

नर्मदा नहर परियोजना से राजस्थान के जालौर व् बाड़मेर ज़िलों के 1336 गाँवो को पेयजल एंव 2.46 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जाती है नर्मदा बचाओ आंदोलन का सम्बन्ध बाबा￶ आम्टे व् अरुंधति राय मेघापाटकर से है

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August 12, 2020

राजस्थान की खान एवं खनिज संपदा Mines of Raj

राजस्थान की खान व खनिज

राजस्थान में भौतिक दृष्टि से तीन मरु, मेरु व माल भू- आकृतियों का विशेष महत्व है।

राजस्थान में अरावली प्रदेश खनिज संसाधनों की दृष्टि से धनी है।

पश्चिमी राजस्थान में अधात्विक खनिज व शक्ति के स्रोत पाए जाते हैं।

खनिज

पूर्वी राजस्थान के खनिज की कमी पाई जाती हैं। खानो कि दृष्टि से राजस्थान का प्रथम स्थान है।

राजस्थान में सर्वाधिक कुल 79 प्रकार के खनिज पाये जाते है। जिनमें 44 प्रकार के बड़े खनिज व 23 प्रकार के लघु खनिज एवं 12 अन्य गौण खनिज पाए जाते हैं, इसलिए राजस्थान को खनिजों का अजायबघर कहते हैं।

खनिजों उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान भारत का तीसरा बड़ा राज्य हैं।

झारखंड और मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान का खनिज भंडारो  कि दृष्टि से भारत में झारखण्ड के बाद राजस्थान का दूसरा स्थान है।

खनिजो से होने वाली आय की दृष्टि से पांचवा स्थान है लोह खनिज उत्पादन मूल्य में 4th स्थान हे ओर अलोह उत्पादन में 1st  हे

देश के कुल खनिज उत्पादन में राज्य का भाग 22 प्रतिशत है। देश देश के कुल खनिजों में राज्य का 15% धात्विक, 25% अधात्विक एवं 26% लघु श्रेणी के खनिजों का योगदान है।

राजस्थान में धात्विक और अधात्विक खनिज पाए जाते हैं, परंतु धात्विक खनिजों की कमी पाई जाती हैं।

नागौर जिले के डेगाना (भाकरी) में एशिया की सबसे बड़ी टंगस्टन की खदान है। राजस्थान के झुंझुनू को भारत का तांबा जिला कहा जाता है।

राजस्थान के मकराना का संगमरमर (केल्साइटिक प्रकार का) विश्वविख्यात है।

जिसका प्रयोग ताजमहल (आगरा) व ‘विक्टोरिया मेमोरियल’ (कोलकाता) के निर्माण में हुआ है।

राजस्थान में हिरा केसरपुरा (प्रतापगढ़) है पर अभी वहां संभावनाएं व्यक्त की गई है

भारत की सबसे बड़ी खदान रॉक फॉस्फेट झामर कोटड़ा (उदयपुर) में है।

राजस्थान में भारत का सर्वाधिक सीसा-सस्ता मिलता है राजस्थान में काला मार्बल जयपुर भैंसलाना में मिलता है। तामडा उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है

यह’लालमणि’व् ‘रक्तमणि’ के नाम से जानी जाती है तामड़ा उत्पादन में राजस्थान में टोंक जिले का प्रथम स्थान है. 

राजस्थान के नागौर को राज्य का धातु नगर कहा जाता है। राजस्थान राज्य टंगस्टन विकास निगम लिमिटेड की स्थापना 22 नवंबर 1983 में की गई।

राजस्थान में खनिज विकास निगम की स्थापना 1979 ईं. में की गई है।

राज्य की प्रथम खनिज नीति 1978 में तत्कालीन मुख्य मंत्री भैरो सिंह शेखावत के काल में बनी. द्वितीय खनिज नीति 1991में बनी.

राजस्थान के खान एवं भू-विज्ञान निदेशालय ने राज्य में खनन क्षेत्र का विकास करने के लिए “विजन-2020” नामक योजना शुरू की।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग द्वारा “भू-वैज्ञानिक पार्क” के रूप में राजपुरा-दरीबा-बामनिया कला क्षेत्र को सुरक्षित एवं संरक्षित किया गया है। 

राजस्थान की सीसे की सबसे बड़ी खदान जावर खदान (उदयपुर) में है।

खनिज नीति, 2006 ई. सर्वोच्च प्राथमिकता को पर्यावरण मित्र तथा खनिज आधारित उद्योगों के लिए उचित वातावरण तैयार करने पर दी गई।

राजस्थान में प्रथम मार्बल नीति की घोषणा अक्टूबर 1994 ई., तथा प्रथम ग्रेनाइट नीति 1991ई. में घोषित की गयी।

राजस्थान की नवीनतम मार्बल नीति व ग्रेनाइट नीति की घोषणा 8 जनवरी 2002 को की गई।

राजस्थान के खनिज विभाग ने 15 अगस्त 1999 को “विजन 2020” घोषित किया।

राजस्थान राज्य खान एंव खनिज लि.की स्थापना 2003 में की गयी.

राजस्थान में नई खनन नीति को प्रदेश मंत्रिमंडल ने 28 जनवरी 2011 को अनुमोदित कर दिया।  

राजस्थान जास्पर, गारनेट जैम व वोलेस्टोनाईट का समस्त देश में एकमात्र उत्पादक राज्य है 

राज्य की नई खनिज नीति 4 जून 2015 को जारी की गई

नागौर के खींवसर उदयपुर के कोटडा डूंगरपुर के आसपुर चित्तौड़गढ़ के कपासन के अंजनी खेड़ा में लाइमस्टोन की विस्तृत पट्टी का आंकलन किया गया है राज्य में पाईराइट की एक मात्र खान सलादीपुर(सीकर)में है

जैतून की रिफाइनरी बीकानेर जिले के लूणकरणसर में लगाई गई है राजस्थान ओलिव कल्टीवेशन लिमिटेड द्वारा संस्थापित यह देश की पहली रिफाइनरी है

जैतून के तेल का उत्पादन करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है

सिरोही में चंद्रावती में उत्खनन के दौरान लाजवर्त पत्थर मिला है यह पत्थर अफगानिस्तान में हिंदू कुश के पास स्थित बदक शा की पहाड़ियों में पाया जाता है

इससे अफगानिस्तान व चंद्रावती के मध्य व्यापार का पता चलता है

केयर्न इंडिया ने गुडामालानी सांचौर में 1 खरब घन फीट गैस भंडार मिलने का दावा किया गया है

बीकानेर जिले के खाजूवाला तहसील के आनंदगढ़ एवं फरीदसर क्षेत्र में जिप्सम की परत पाई गई है

ऑस्ट्रेलियाई कंपनी इंडो गोल्ड ने फरवरी 2007 में बांसवाड़ा जिले के मुखिया जगपुरा में 3. 85 करोड़ टन स्वर्ण स्वर्ण भंडार की खोज की

राज्य में चार पेट्रोलियम संभाव्य क्षेत्र है

  • राजस्थान सेल्फ जैसलमेर व बीकानेर
  • बाड़मेर सांचौर बेसिन बाड़मेर से सांचौर
  • बीकानेर नागौर बेसिन बीकानेर नागौर गंगानगर चूरु
  • विंध्यन बेसिन कोटा झालावाड़ बारा बूंदी चित्तौड़गढ़ भीलवाडा

ऐसे खनिज जिन पर राजस्थान का एकाधिकार है

पन्ना, जास्पर, तामड़ा,  रक्त मणि, वोलेस्टेनाइट

वे खनिज जिनके उत्पादन में राज्य प्रथम स्थान पर है

जस्ता (97%), फ्लोराइट(96%), एस्बेटोस(96%), रॉक फॉस्फेट, जिप्सम चूना पत्थर , खड़िया मिट्टी घीया पत्थर, चांदी मार्बल सीसा , फेल्सफार टंगस्टन कैल्साइट, फायर क्ले इमारती पत्थर

वो खनिज जिनकी राजस्थान मे कमी है

लौहा, कोयला , मैंगनीज, खनिज तेल, ग्रेफाइट कुल 

राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम Rajasthan State Mineral Development Corporation

स्थापना कम्पनी अधिनियम 1956 के तहत 27 सितम्बर 1979 को की गई 20 फरवरी 2003 को इसका विलय राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड मे कर दिया

राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड Rajasthan State Mines & Minerals Limited

इसकी स्थापना 1948 में बीकानेर जिप्सम लिमिटेड के नाम से की गई 1974 में इसका नाम राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड कर दिया

इसके प्रमुख कार्य

  1. उदयपुर के झामड़ – कोटड़ा मे रॉक फॉस्फेट का कार्य
  2. गिरल बाड़मेर मे 125 मेगावाट के विद्युत संयत्र की स्थापना
  3. जैसलमेर के बड़ाबाग में 106.3 मेगावाट की विद्युत इकाई की स्थापना
  4. राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड व राष्ट्रीय केमिकल एण्ड फर्टिलाइजर द्वारा 425 करोड़ रूपये की लागत से चितौड़ गढ में राजस्थान राष्ट्रीय केमिकल एण्ड फर्टिलाइजर लिमिटेड के DAP खाद का कारखाना लगाया है

Special Note

  • हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड – खेतड़ी (झुंझुनू)
  • हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड – देबारी (उदयपुर)

1. सीसा, जस्ता, चाँदी   Lead, zinc, silver
जावर -उदयपुर, राजपुरा दरीबा -राजसमंद, रामपुरा , आगूँचा-भीलवाड़ा, चौथ कबरवाड़ा -सवाई माधोपुर

राजस्थान में सीसा जस्ता शोधन के लिए हिदुस्तान जिंक लिमिटेड कि स्थापना 1966 में कि गई परन्तु यहा हो रहे अवैध खनन के कारण उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है।

वर्त्तमान में जस्ता शोधन का कार्य सुपर जिंक स्मेल्टर चंदेरिया चितोडगढ़ में किया जाता है

यह ब्रिटेन कि सहायता से  स्थापित गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा जिंक स्मेल्टर है

2.  लोहा Iron
मोरीजा बनेरा -जयपुर , नीमला राइसेला -दौसा, खेतड़ी सिंघाना -झुंझुंनू, थुर हुण्डेर -उदयपुर

3. ताँबा Copper
खेतड़ी सिंघाना  झुंझुंनू , खोदरीबा -अलवर, बन्नी कि ढाणी -सीकर

4. रॉक फास्फेट Rock Phosphate

सर्वाधिक उत्पादन – झामर कोटड़ा -उदयपुर

इसका उपयोग उवर्रक उधोग में किया जाता है। इससे सुपर फास्फेट का निर्माण  होता है।

बिरमानिया जैसलमेर भारत कि रॉक फास्फेट कि सबसे बड़ी खान है 

5. टंगस्टन  Tungsten

सर्वाधिक उत्पादन – डेगाना-नागौर, वालदा -सिरोही 

राजस्थान का इस खनिज पर एकाधिकार है। 

6. जिप्सम Gypsum

सर्वाधिक उत्पादन – भदवासी क्षेत्र -नागौर, सबसे बड़ी जिप्सम कि खान -जामसर -बीकानेर

7. संगमरमर  Marble

सर्वाधिक उत्पादन -राजसमंद 

यह बहुमूल्य पत्थरो में सर्वाधिक आय प्रदान करने वाला पत्थर है। मकराना नागौर के सफेद संगमरमर से विश्व प्रसिद ताजमहल का निर्माण किया गया है

  • हरा संगमरमर- उदयपुर ,डूंगरपुर
  • सफेद संगमरमर – मकराना ,राजसमंद
  • काला संगमरमर -भेसलाना जयपुर
  • बादामी संगमरमर -जोधपुर
  • पीला संगमरमर -जैसलमेर
  • सतरंगा संगमरमर-खदरा गॉव पाली

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