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Rajasthan Geography

Raj Geography
Raj Geography

August 19, 2020

राजस्थान की जनसंख्या विशेषताएँ Demographic Features

राजस्थान की जनसंख्या विशेषताएँ

2011 की जनगणना के अनुसार ( According to the 2011 census )

rajasthan की जनसंख्या

 1. राजस्थान की कुल जनसंख्या –  6.86 करोड़ लगभग

2. राजस्थान की पुरुष जनसंख्या –   35620086

3. राजस्थान की स्त्री जनसंख्या –   33000926

4.  राजस्थान की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर-  21 .44 % 

5. राजस्थान में साक्षरता प्रतिशत- 67 .06% 

6. राजस्थान में पुरुष साक्षरता प्रतिशत-   80 .51  %

7. राजस्थान में महिला साक्षरता प्रतिशत-  52 .66 %

8. अधिकतम एवं न्यूनतम_जनसंख्या वाले जिले-

राजस्थान में सर्वाधिक_जनसंख्या वाले 5 जिले –

  1.  जयपुर –                66,63,971 
  2. जोधपुर –                36,85,681 
  3. अलवर –                36,71,999 
  4. नागौर –                 33,09,234
  5. उदयपुर –              30,67,549

राजस्थान में न्यूनतम जनसंख्या वाले 5 जिले –

  1. जैसलमेर –              6,72,008 
  2. प्रतापगढ़ –              8,68,231 
  3. सिरोही –                 10,37,185 
  4. बूंदी-                      11,13,725
  5. राजसमन्द –            1158283

9. राजस्थान में न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला- जैसलमेर (6,72,008)

10. सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला – जयपुर (598 व्यक्ति प्रति वर्गकिमी)

11. न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला जिला – जैसलमेर (17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी)

12. सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला – डूंगरपुर (990)

13. न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला – धौलपुर (845)

14. सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धिदर वाला जिला- बाड़मेर (32.55)

15. न्यूनतम दशकीय जनसंख्या वृद्धिदर वालाजिला-  श्रीगंगानगर (10.06)

16. सर्वाधिक कुल साक्षरता वालाजिला- कोटा (77.48%)

17. न्यूनतम कुल साक्षरता वाला जिला-  जालौर (55.58%)

18. सर्वाधिक पुरुष साक्षरता वालाजिला- झुंझुनू (87.88%)

19. न्यूनतम पुरुष साक्षरता वाला जिला- प्रतापगढ़ (70.13%)

20. सर्वाधिक महिला साक्षरता वाला जिला-   कोटा  (66.32%)

21. न्यूनतम महिला साक्षरता वाला जिला- जालौर (38.73%)

22. राज्य का _जनसंख्या घनत्व –  200 व्यक्ति प्रति किमी (जबकि 2001 में 165)

23. राजस्थान की _जनसंख्या में वर्ष 2001 की तुलना में वृदि दर में प्रतिशत कमी- 6.97% कमी

24. राज्य की सर्वाधिक साक्षरता दर वाली तहसील-   जयपुर तहसील (83.89 प्रतिशत)

25. राज्य की न्यूनतम साक्षरता दर वाली तहसील-  कोटडा तहसील जिला-उदयपुर (27.10%)

26. दो जिले जिनका साक्षरता प्रतिशत दशक 2001-11में घटा है- चुरू व बाड़मेर

27. राजस्थान का लिंगानुपात –  926 

जनसँख्या नियंत्रण कार्यक्रम ( Population Control Program )

बेटियां अमूल्य है कार्यक्रम ( Daughters are Precious ) – 23 सितंबर, 2016 से शुरू इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न कॉलेजों, शॉपिंग मॉल्स आदि में पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण, प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम एवं नुक्कड़ नाटक के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ।

ज्योति योजना ( Jyoti Yojana ) –जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में राज्य में ज्योति योजना 11 जुलाई, 2011 से शुरू की गई है।योजना में दो लड़कियों के बाद नसबंदी कराने वाली महिलाओं को रोल मॉडल के रूप में पेश कर उनके घर के बाहर “गांव की ज्योति” लिखा जाएगा।

कलेवा योजना ( Kaleva Yojana ) – बजट घोषणा वर्ष 2010-11 के अंतर्गत मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा योजना प्रारंभ की गई है।

जन मंगल कार्यक्रम – यह कार्यक्रम _जनसंख्या वृद्धि दर में कमी तथा _जनसंख्या में स्थायित्व के लिए चालू किया गया है।

1 जून 2002 – दो से अधिक बच्चे वाले अभ्यर्थी को सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए अपात्र घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री बालिका संबल योजना ( Balika Sambal Yojna ) – राज्य में गिरते लिंगानुपात को रोकने एवं बालिकाओं के सर्वांगीण विकास एवं उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए पूरे राज्य में 5 साल तक की बालिकाओं के लिए ₹10000 के यू. टी. आई. के बांड देने की इस अनुपम योजना का शुभारंभ 13 अगस्त, 2007 को जोधपुर में किया।

राज्य जनसंख्या नीति ( State Population Policy )- राज्य जनसंख्या नीति का लोकार्पण 20 जनवरी, 2010 को किया गया था। राजस्थान देश में स्वयं की जनसंख्या नीति घोषित करने वाला आंध्र प्रदेश के बाद दूसरा राज्य हैं।

August 19, 2020

राजस्थान में कृषि Rajasthan Agriculture

राजस्थान में कृषि

राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3 लाख 42 हजार 2 सौ 39 वर्ग कि.मी. है। जो की देश का 10.41 प्रतिशत है।

राजस्थान में देश का 11 प्रतिशत क्षेत्र कृषि योग्य भूमि है और राज्य में 50 प्रतिशत सकल सिंचित क्षेत्र है जबकि 30 प्रतिशत शुद्ध सिंचित क्षेत्र है।

राजस्थान का 60 प्रतिशत क्षेत्र मरूस्थल और 10 प्रतिशत क्षेत्र पर्वतीय है। अतः कृषि कार्य संपन्न नहीं हो पाता है

और मरूस्थलीय भूमि सिंचाई के साधनों का अभाव पाया जाता है।

अधिकांश खेती राज्य में वर्षा पर निर्भर होने के कारण राज्य में कृषि को मानसून का जुआ कहा जाता है।

राजस्थान कृषि

राजस्थान में भू उपयोग व कृषि जोत आकार

  • भू-उपयोग सांख्यिकी (वर्ष 2013-14) में राज्य का प्रतिवेदित भौगोलिक क्षेत्रफल – 342.68 लाख हैक्टेयर
  • जिसमें शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल – 53.31 प्रतिशत ( 182.68 लाख हैक्टेयर )
  • राजस्थान में 2010-11 में कृषि जोत का औसत आकार 3.07 हेक्टेअर जबकि अखिल भारतीय स्तर पर कृषि जोत का औसत आकार 1.15 हेक्टेयर था।
  • भारत में कृषि जोत के आकार के आधार पर राजस्थान का क्रमशः नागालैंड, पंजाब व अरुणाचल प्रदेश के बाद चौथा स्थान है। संपूर्ण देश में क्रियाशील जोतों का आकार घटने की प्रवृत्ति विद्यमान है।

कृषि के प्रकार ( Types of agriculture )

1. शुष्क कृषि ( Dry farming )- ऐसी कृषि जो रेगिस्तानी भागों में जहां सिचाई का अभाव हो शुष्क कृषि की जाती है। इसमें भूमि मेे नमी का संरक्षण किया जात है।

  • फ्वारा पद्धति  ( Spray system )
  • ड्रिप सिस्टम ( Drip system )

इजराइल के सहयोग से शुष्क कृषि में इसका उपयोग किया जाता है।

2. सिचित कृषि ( Irrigated farming ) – जहां सिचाई के साधन पूर्णतया उपलब्ध है। उन फसलों को बोया जाता है जिन्हें पानी की अधिक आवश्यकता होती है।

3. मिश्रित कृषि ( Mixed agriculture ) –  जब कृषि के साथ-साथ पशुपालन भी किया जाता है तो उसे मिश्रित कृषि कहा जाता है।

4. मिश्रित खेती ( Mixed farming )- जब दो या दो से अधिक फसले एक साथ बोई जाये तो उसे मिश्रित खेती कहते है।

5. झूमिग कृषि ( Zooming agriculture ) – इस प्रकार की कृषि में वृक्षों को जलाकर उसकी राख को खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। राजस्थान में इस प्रकार की खेती को वालरा कहा जाता है। भील जनजाति द्वारा पहाडी क्षेत्रों में इसे “चिमाता” व मैदानी में “दजिया” कहा जाता है। इस प्रकार की खेती से पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है। राजस्थान में उदयपुर, डूंगरपुर, बांरा में वालरा कृषि की जाती है।

फसले ( The crop)

  1. खाद्यान्न फसले ( 57 प्रतिशत )
  2. नकदी/व्यापारिक फसले (43 प्रतिशत)

गेहूं, जो, ज्वार, मक्का, गन्ना, कपास, तम्बाकू, बाजरा, चावंल, दहलने, तिलहन, सरसों, राई, मोड, अरहर, उड्द, तारामिरा, अरण्डी, मूंग, मसूर, चांवल, तिल, सोयाबीन,  इत्यादि

रबी की फसल ( Rabi crop )

अक्टूबर, नवम्बर व जनवरी -फरवरी

इसी राजस्थान में स्यालू एम उनालू का मौसम कहा जाता है इस का प्रारंभ नवंबर में होता है तथा मार्च सन तक चलता है|
रवि की मुख्य फसलें- गेहूं, जो, चना, मसूर, मटर, सरसों, अलसी, तारामीरा, सूरजमुखी, धनिया, जीरा, मेथी

खरीफ की फसल ( Kharif crop )

जून, जुलाई व सितम्बर-अक्टूबर

खरीफ का मौसम किसी राजस्थान में चौमासा एवं स्यालु/सावणु कहा जाता है यह जुलाई से प्रारंभ होकर अक्टूबर के अंत तक चलता है|
खरीफ की मुख्य फसलें चावल ज्वार बाजरा मक्का अरहर उड़द मूंग चावला मोठ मूंगफली अरंडी तेल सोयाबीन कपास गन्ना ग्वार आदि

जायद की फसल ( Zayed crop )

इसका प्रारंभ अप्रैल प्रारंभ से होता है तथा जून अंत तक चलता है

मार्च-अपे्रल व जून-जुलाई

जायद – खरबूजे, तरबूज ककडी

खाद्यान्न फसले ( Food crops )

1. गेहूं ( Wheat)

राजस्थान में सर्वाधिक खाया जाने वाला और सर्वाधिक उत्पन्न होने वाला खाद्यान्न गेहंू है। देश में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन उत्तर-प्रदेश में होता है। राजस्थान का गेहूं उत्पादन में देश में 4th स्थान है।

राजस्थान का पूर्वी भाग गेहूं उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है। जबकि श्रीगंगानगर जिला राज्य में गेहंू उत्पादन में 1st स्थान पर है। गेहंू के अधिक उत्पादन के कारण गंगानगर को राज्य का अन्न भंण्डार और कमाऊपूत कहा जाता है। राजस्थान में गेहूं की प्रमुख किस्में सोना-कल्याण, सोनेरा, शरबती, कोहिनूर, और मैक्सिन बोयी जाती है।

2. जौ ( Barley )

देश में जौ का सर्वाधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। यू.पी. के पश्चात् राजस्थान जौ उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र में जौ सर्वाधिक होता है और जयपुर जिला जौ उत्पादन में राज्य का प्रथम स्थान पर है। राजस्थान में जौ कि प्रमुख किस्मों में ज्योति राजकिरण और आर.एस.-6 प्रमुख है। जौ माल्ट बनाने में उपयोगी है।

3. ज्वार ( Sorghum )

( सोरगम / गरीब की रोटी )

ज्वार को खाद्यान्न के रूप में प्रयोग किया जाता है। देश में सर्वाधिक ज्वार महाराष्ट्र में होता है। जबकि राजस्थान में देश में चैथा स्थान रखता है। राजस्थान में मध्य भाग में ज्वार का सर्वाधिक उत्पादन होता है। जबकि अजमेर जिला ज्वार उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। ज्वार की राज्य में प्रमुख किस्म पी.वी.-96 है।

राजस्थान में ज्वार अनुसंधान केन्द्र वल्लभनगर उदयपुर में स्थापित किया गया है।

4. मक्का ( Maize )

दक्षिणी राजस्थान का प्रमुख खाद्यान्न मक्का है। देश में सर्वाधिक मक्का का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। जबकि राजस्थान का मक्का के उत्पादन मे देश में आठवां स्थान है। राजस्थान का चित्तौडगढ़ जिला मक्का उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान में मक्के की डब्ल्यू -126 किस्म बोई जाती है जबकि कृषि अनुसंधान केन्द्र बांसवाडा द्वारा मक्का की माही कंचन व माही घवल किस्म तैयार की गई है।

5. चांवल ( Rice )

देश में सर्वाधिक खाया जाने वाला खाद्यान्न चावंल है। देश में इसका सर्वाधिक उत्पादन पश्चिमी बंगाल में है। राजस्थान में चावंल का उत्पादन नाममात्र का आधा प्रतिशत से भी कम है। राजस्थान में हुनमानगढ़ जिले के घग्घर नदी बहाव क्षेत्र (नाली बैल्ट) में “गरडा वासमती” नामक चावंल उत्पन्न किया जाता है। जबकि कृषि अनुसंधान केन्द्र बासवांडा ने चावंल की माही सुगंधा किस्म विकसित की है।

चांवन के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सीयस तापमान व 200 संेटी मीटर वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। जो कि राजस्थान में उपलब्ध नहीं है। अतः यहां जापानी पद्वति से चांवन उत्पन्न किया जाता है। देश में प्रति हैक्टेयर अधिक उत्पादन में पंजाब राज्य का प्रथम स्थान रखता है।

6. चना ( Gram )

यह एक उष्णकटिबधिय पौधा है। इसके लिए मिट्टी की आवश्यकता होती है। देश में उत्तर-प्रदेश के पश्चात् राजस्थान चना उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। राजस्थान में चुरू जिला चने के उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है। गेहूं और जो के साथ चने को बोने पर उसे गोचनी या बेझड़ कहा जाता है।

7. दलहन ( Pulses )

चने के पश्चात् विभिन्न प्रकार की दालो में मोठ का प्रथम स्थान राजस्थान का पश्चिमी भाग दालों में अग्रणी स्थान रखता है। राजस्थान का नागौर जिला उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान में कुल कृषि भूमि का 18 प्रतिशत दाले बोयी जाती है। उड्द की दाल भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में सहायक है। पौधों को नाइट्रोजन नाइट्रेट के रूप में प्राप्त होती है। जबकि राइजोबियम नामक बैक्टीरिया नाइट्रोजन को नाइट्रेट के रूप में परिवर्तित करता है।

8. बाजरा ( Millet )

देश में सर्वाधिक बाजरे का उत्पादन राजस्थान में होता है। राजस्थान में सर्वाधिक बोया जाने वाला खाद्यान्न बाजरा है। राजस्थान का पश्चिमी भाग बाजरा उत्पादन हेतु प्रसिद्ध है जबकि जयपुर जिला बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान पर हैं राजस्थान में बाजरे की साधारण किस्म के अतिरिक्त Raj-171 प्रमुख किस्म है। राजस्थान के पूर्वी भाग में संकर बाजरा होता है। उसे सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती है। राजस्थान में बाजरा अनुसंधान केन्द्र बाडमेर में स्थित है।

नगदी/व्यापारिक फसले ( Cash / trading crops )

9. गन्ना ( Sugarcane )

भारतीय मूल का पौधा (Indian Origine) है। अर्थात् विश्व में सर्वप्रथम गन्ने का उत्पादन भारत में ही हुआ। दक्षिणी भारत में सर्वप्रथम गन्ने की खेती आरम्भ हुई। वर्तमान में विश्व में गन्ने का सर्वाधिक उत्पादन भारत में ही होता है।

भारत में उत्तर प्रदेश राज्य गन्ना उत्पादन में प्रथम स्थान पर है (देश का 40 प्रतिशत)। राजस्थान में गन्ने का उत्पादन नाम मात्र का होता है (0.5 प्रतिशत)। राजस्थान में गंगानगर जिला गन्ना उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है। गन्ने का कम उत्पादन होने के कारण राजस्थान में मात्र तीन सुगर मिले है|

  1. दा मेवाड शुगर मिल- भूपाल सागर (चित्तौड़) 1932 निजी
  2. गंगानगर शुगर मिल – गंगानगर (1937 निजी -1956 में सार्वजनिक)
  3. द केशोरायपाटन शुगर मिल – केशोरायपाटन (बूंदी) 1965 सहकारी

10. कपास ( Cotton )

कपास देशी कपासअमेरिकन कपासमानवी कपास गंगानगरगंगानगरकोटा (हडौती क्षेत्र) उदयपुरहनुमानगढ़बूंदी चित्तौडगढ़बांसवाडा बांरा

कपास भारतीय मूल का पौधा है। विश्व में सर्वप्रथम कपास का उत्पादन सिंधु घाटी सभ्यता में हुआ। वर्तमान में विश्व में सर्वाधिक कपास भारत में उत्पन्न होती है। जबकी भारत में गुजरात राज्य कपास में प्रथम स्थान रखता है। राजस्थान देश में चैथे स्थान पर है। राजस्थान में कपास तीन प्रकार की होती है।

वर्तमान में राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला कपास उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है। जबकि जैसलमेर व चरू में कपास का उत्पादन नाम मात्र का होता है। कपास को “बणीया” कहा जाता है। कपास से बिनौला निकाला जाता है उससे खल बनाई जाती है। कपास की एक गांठ 170 किलो की होती है।

11. तम्बाकू ( Tobacco )

भारतीय मूल का पौधा नही। पूर्तगाली 1508 ईं. में इसको भारत लेकर आये थे। मुगल शासक जहांगीर ने सर्वप्रथम भारत में 1608 ई. में इसकी खेती की शुरूआत की किन्तु कुछ समय पश्चात् इसके जब दुशपरीणाम आने लगे तब जहांगीर ने ही इसे बंद करवा दिया।

वर्तमान में भारत का आंधप्रदेश राज्य तम्बाकू उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान में पूर्व भाग में तम्बाकू का सर्वाधिक उत्पादन होता है। अलवर जिला तम्बाकू उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान में तम्बाकू की दो किस्में बोयी जाती है।

  • निकोटिना टेबुकम  ( Nikotina Tekinum )
  • निकोटिना रास्टिका ( Nikotina Rastica )

12. तिलहन ( Oilseed )

( तिलहन विकास कार्यक्रम 1984-85 )

सरसो, राई, तारामीरा, तिल, मूंगफली, अरण्डी, सोयाबीन, होहोबा राजस्थान में उत्पन्न होने वाली प्रमुख तिलहन फसले है। तिलहन उत्पादन में राजस्थान का तीसरा स्थान है। तिलहन उत्पादन में उत्तर प्रदेश प्रथम है। किन्तु सरसों व राई के उत्पादन में राजस्थान प्रथम स्थान रखता है।

सरसों ( Mustard )

राजस्थान का भरतपुर जिला सरसों के उत्पादन में राज्य में प्रथम स्थान पर है। केन्द्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र सेवर भरतपुर की स्थापना 1983 में की गयी।

मूंगफली ( Peanut )

विश्व में मूंगफली का सर्वाधिक उत्पादन भारत में होता है। भारत में गुजरात राज्य मूंगफली उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है। राजस्थान का देश में मंूगफली के उत्पादन में चैथा स्थान है। राज्य का जयपुर जिला मूंगफली के उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है। बीकानेर का लूणकरणसर क्षेत्र उत्तम मंूगफली के लिए प्रसिद्ध है अतः उसे ??राजस्थान का राजकोट भी कहा जाता है।

तिल, सोयाबीन, अरण्डी

राज्य में तिल पाली जिले में अरण्डी जालौर जिले में, सोयाबीन झालावाड़ में उत्पन्न होती है। सोयाबीन राजस्थान राज्य के दक्षिणी-पूर्वी भाग (हडौती) में होती है। इसमें सर्वाधिक प्रोटीन होती है। भारत में सर्वाधिक सोयाबीन मध्यप्रदेश में होता है।

हो होबा (जोजोबा)

यह एक प्रकार का तिलहन है इसे भारत में इजराइल से मगाया गया। इसका जन्म स्थान एरिजोना का मरूस्थल है। भारत में इसकी खेती की शुरूआत सर्वप्रथम सी.ए.जे.आर.आई संस्थान जोधपुर द्वारा की गयी। इसकी खेती इन क्षेत्रों में की जाती है जहां सिचाई के साधनों का अभाव पाया जाता है। इसके तेल का उपयोग सौन्दर्य प्रसाधनों, बडी-2 मशीनरियो व हवाई जहाजों में लुब्रिकेण्टस के रूप में किया जाता है।

राजस्थान में होहोबा के तीन फार्म है –

  1. ढण्ड (जयपुर)
  2. फतेहपुर (सीकर) सहकारी
  3. बीकानेर (नीजी)

गुलाब – राजस्थान में सर्वाधिक गुलाब का उत्पादन पुष्कर (अजमेर) में होता है। वहां का ROSE INDIA गुलाब अत्यधिक प्रसिद्ध है। राजस्थान मे चेती या दशमक गुलाब की खेती खमनौगर (राजसमंद) में होती है।

रतनजोत- सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाडा

अफीम- चित्तौडगढ़, कोटा, झालावाड

सोयाबीन – झालावाड़, कोटा, बांरा

मसाला उत्पादन

विश्व में मसाला उत्पादन में भारत प्रथम स्थान रखता है। भारत में राजस्थान मसाला उत्पादन में प्रथम है। किन्तु गरम मसालों के लिए केरल राज्य प्रथम स्थान पर है। केरल को भारत का स्पाइस पार्क भी कहा जाता है। राज्य में दक्षिण-पूर्व का बांरा जिला राज्य में मसाला उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान का प्रथम मसाला पार्क -झालावाड़ में है।

सर्वाधिक उत्पादक जिला

  • मिर्च – जोधुपर
  • धनियां – बांरा
  • सोंफ:- कोटा
  • जिरा, इसबगोल:- जालौर
  • हल्दी, अदरक:- उदयपुर
  • मैथी:- नागौर
  • लहसून:- चित्तौड़गढ़

फलों का सर्वाधिक उत्पादक जिला ( Most productive district of fruit )

  • अंगूर, कीन्नू ,माल्टा ,मौसमी :- श्री गंगानगर
  • संतरा:- झालावाड़ ( राजस्थान का नागपुर )
  • चीकू:- सिरोही
  • सेब:- माउन्ट आबू (सिरोही)
  • नींबू:- धौलपुर
  • आम:- भरतपुर
  • केला:- बांसवाडा
  • नाशपति:- जयपुर
  • मतीरा ,:- टोंक/बीकानेर
  • पपीता/खरबूजा:- टोंक

राजस्थान की मंडिया ( Rajasthan’s mandia )

  1. जीरा मंडी:- मेडता सिटी (नागौर)
  2. सतरा मंडी:- भवानी मंडी (झालावाड)
  3. कीन्नू व माल्टा मंडी:- गंगानगर
  4. प्याज मंडी:- अलवर
  5. अमरूद मंडी:- सवाई माधोपुर
  6. ईसबगोल (घोडाजीरा) मंडी:- भीनमाल (जालौर)
  7. मूंगफली मंडी:- बीकानेर
  8. धनिया मंडी:- रामगंज (कोटा)
  9. फूल मंडी:- अजमेर
  10. मेहंदी मंडी:- सोजत (पाली)
  11. लहसून मंडी:- छीपा बाडौद (बांरा)
  12. अश्वगंधा मंडी:- झालरापाटन (झालावाड)
  13. टमाटर मंडी:- बस्सी (जयपुर)
  14. मिर्च मंडी:- टोंक
  15. मटर (बसेडी):- बसेड़ी (जयपुर)
  16. टिण्डा मंडी:- शाहपुरा (जयपुर)
  17. सोनामुखी मंडी:- सोजत (पाली)
  18. आंवला मंडी:- चोमू (जयपुर)

राजस्थान में प्रथम निजी क्षेत्र की कृषि मण्डी कैथून (कोटा) में आस्टेªलिया की ए.डब्लू.पी. कंपनी द्वारा स्थापित की गई है।

कृषि से संबंधित योजनाऐं ( Agriculture related schemes )

1. भागीरथ योजना ( Bhagirath Yojana )- कृषि संबंधित इस योजना के अन्तर्गत स्वयं ही खेती में ऐसे लक्ष्य निर्धारित करता है। जो कठिन होता हैं और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रयत्न भी करते है। इसके लिए जयपुर में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

2. निर्मल ग्राम योजना ( Nirmal Gram Yojana ) – गांवो में कचरे का उपयोग कर कम्पोस खाद तैयार करने हेतु शुरू की गई।

कृषि विकास हेतु संस्थाएं एवं योजनाएं ( Institutions and Schemes for Agriculture Development ) 

  • राजस्थान राज्य भंडारण निगम की स्थापना की गई – 30 दिसंबर, 1957 को
  • राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड(NEFED), नई दिल्ली की स्थापना हुई- 2 अक्टूबर, 1958 को
  • भारत के खाद्य निगम की स्थापना की गई – 1964 में
  • किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक समुचित व समयानुसार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इफ्को की स्थापना की गई –  3 नवंबर, 1967 को
  • कृषिगत वित्त निगम की स्थापना की गई –  अप्रैल, 1968 में
  • राज्य कृषि उद्योग निगम की स्थापना की गई – 1969 में
  • राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड की स्थापना की गई – 6 जून, 1976 को
  • फतेहपुर (राजस्थान) में प्रथम विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई – 1976 में
  • राजस्थान राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था की स्थापना की गई – 30 दिसंबर, 1977 को
  • राजस्थान राज्य बीज निगम की स्थापना की गई – 28 मार्च, 1978 को
  • कृषि विपणन निदेशालय की स्थापना की गई –  1980 में
  • कृभको की स्थापना – 17 अप्रैल, 1980 को
  • राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना की गई –  12 जुलाई,1982 को
  • किसान सेवा केंद्र सादरी द्वारा जोधपुर में कब की गई –  1998 में

Rajasthan Agriculture important facts – 

  1. श्री गंगानगर जिले से राज्य को अधिकतम भोजन ऊर्जा कैलोरी प्राप्त होती है
  2. केंद्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र दुर्गापुरा जयपुर में स्थित है
  3. काजरी संस्थान जोधपुर में स्थित है जिसका गठन 1959 में किया गया
  4. गंगानगर जिले को राजस्थान का अन्न भंडार क्या नाम से जाना जाता है
  5. राजस्थान राज्य में दहशत गुलाब चैती गुलाब अर्थात देसी गुलाब की खेती पुष्कर अजमेर में होती है
  6. केंद्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र राज्य में सेवर भरतपुर में 20 अक्टूबर 1993 को स्थापित किया गया
  7. राज्य में चुकंदर से चीनी बनाने का एकमात्र कारखाना श्रीगंगानगर में स्थित है
  8. राजस्थान राज्य सहकारी तिलहन उत्पादक संघ लिमिटेड तिलम संघ की स्थापना 1990 में हुई
  9. डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर आदि जिलों में झूमिंग प्रणाली की वालरा खेती की जाती
  10. इजराइल की सहायता से राजस्थान के शुष्क प्रदेशों में होहोबा जोजोबा की फसल बोई जाती है

August 19, 2020

राजस्थान में उद्योग की संभावनाएं Industry Possibilities

राजस्थान में उद्योग की संभावनाएं

लघु एवं कुटीर उद्योग ( Small and cottage industries )

प्रदेश का पहला राईस क्लस्टर बूंदी में बनाया जा रहा है।

हाथ से कोठा डोरिया उत्पाद बनाने वालो के लिए जी.आई.पेटेंट लागु किया गया है।

राजस्थान लघु उद्योग निगम द्वारा राज्य की लुप्त हो रही फड़ चित्रकला के पुनरुत्थान के लिए शाहपुरा (भीलवाड़ा) में संचालित किया जा रहा है।

में उद्योग

राज्य में ग्रामीण अकृषि क्षेत्र – हैण्डलूम , हस्तशिल्प व कृषि / ऊन / खनिज आधारित उद्योगों के विकास को प्रोत्साहन देने हेतु रुडा ( RUDA) एजेंसी का गठन किया।

लकड़ी एवं ऊट की खाल पर सुनहरी नक्काशी व चित्रकला (उस्ताकला) हेतु राजस्थान लघु उद्योग निगम द्वारा प्रशिक्षण केंद्र बीकानेर में संचालित किया जा रहा है।

तालछापर हस्तशिल्प उत्पाद परियोजना चुरू अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डिजाईनर बी.बी. रसेल परियोजना से जुड़ी हुयी है।

भरतपुर सरसों तेल उद्योग के लिए प्रसिध्द है।

1955 राजस्थान में खादी एवं ग्राम उद्योग के विकास हेतु खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की स्थापना की गयी।

टोंक में राज्य का बीडी उद्योग का प्रमुख केंद्र है।

राजस्थान में कृषिगत ओजारों को बनाने के लघु कारखाना गजसिंहपुर (गंगानगर ) में स्थित है।

जयपुर रत्न की कटाई व जवाहरात के लिए प्रसिद्ध है।

महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना का शुभारंम्भ 19 सितम्बर 2005 को हुआ।

बलाहेडी में पीतल के बर्तन पर नक्काशी का कलस्टर विकसित किया गया।

हाट बाजार उधम प्रोत्साहन संस्थान द्वारा स्थापित किये गए है।

बकरी के बालो से जट पट्टियों की बुनाई का  मुख्य केंद्र जसोल बाड़मेर में स्थापित किया गया है।

राजस्थान का रेशम कीट पालन (सेरीकल्चर) उद्योग बासवाड़ा में स्थित है।‘आंगल’ व ‘कागसा’ दरी निर्माण में काम में आने वाले खास उपकरण है।

प्रतापगढ तरल हिंग के लिए प्रसिद्ध है।

सवाई माधोपुर – भरतपुर खस व इत्र उद्योग के लिए प्रसिद्द है।

राजस्थान में स्थापित देशी-विदेशी संस्थान ( Domestic and foreign institutions established in Rajasthan )

चंबल फर्टिलाइजर्स ( भारत ):-  निजी क्षेत्र में भारत की सबसे बड़ी उर्वरक कंपनी में से एक है, कोटा में उर्वरक इकाई की स्थापना की है।

हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड, (भारत):-  हीरो मोटो कॉर्प लिमिटेड(HMPCL) भारत की सबसे बड़ी दुपहिया वाहन निर्माता कंपनी है, जो अमेरिका की पॉलारिस इडस्ट्रीज के साथ राजस्थान में एक संयुक्त उपक्रम(JV) द्वारा पर्सनल फोर व्हीलर वाहन का उत्पादन करने जा रही है।

होंडा कार्स ( जापान):- यह बहुराष्ट्रीय कार निर्माता कंपनी विश्व की फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से एक है।

होंडा मोटरसाइकिल एवं स्कूटर इंडि. लि. ( जापान ) – यह बहुराष्ट्रीय कंपनी विश्व की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल निर्माता कंपनीयों में से एक है, इसके द्वारा दुपहिया वाहनों का निर्माण किया जा रहा है।

लाफार्ज इंडिया ( फ्रांस ) –  इस बहुराष्ट्रीय कंपनी ने चित्तौड़ के बावरिया ग्राम में सीमेंट प्लांट स्थापित किया है।

सेंड गोबेन इंडिया: (ब्रिटेन):  इसने राज्य में सबसे बड़ी फ्लोट ग्लास की इकाई की स्थापना की है।

जेसीबी: (ब्रिटेन):- यह कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है जो अपना चौथा विश्व स्तरीय उत्पादन संयंत्र जयपुर में स्थापित कर रही है।

बॉस लिमिटेड ( जर्मनी ):-  बहुराष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं ऑटो कंपोनेंट निर्माता कंपनी जिसका चौथा संयंत्र जयपुर में 1999 में स्थापित किया है।

August 12, 2020

राजस्थान की सिंचाई परियोजना Rajasthan ki Sinchai Pariyojana

राज्य की प्रमुख सिचाई State’s main irrigation project

  1. भाँखड़ा नाँगल परियोजना
  2. व्यास परियोजना
  3. चम्बल घाटी परियोजना
  4. माही परियोजना

ये परियोजनाए बहुउद्देश्य परियोजनाए भी है इनसे सिचाई पेयजल एंव विद्युत की पुर्ति करवायी जाती है

1. भांखड़ा नाँगल परियोजना (Bhankha Nagal Project)

यह देश की सबसे बड़ी नदी घाटी बहुउद्देशीय परियोजना है जो कि राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की मिश्रित परियोजना है 

इस परियोजना के निर्माण का सर्वप्रथम विचार 1908 में लुईस डेने के दिमाग में आया स्वतंत्रता के बाद मार्च 1948 में इसके निर्माण का कार्य शुरू हुआ 

इस परियोजना का निर्माण दो चरणों में हुआ जिसमें दो बांध बनाए गए

भाखड़ा बांध

  1. यह देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध है विश्व का दूसरा और एशिया का सबसे ऊंचा कंक्रीट निर्मित गुरुत्व सीधा बांध है 
  2. जिसकी आधारशिला 17 नवंबर 1955 को देश के प्रधानमंत्री Jawahar Lal Nehru द्वारा रखी गई जो कि अक्टूबर 1962 में अमेरिकी बांध निर्माता हार्वे स्लोकेम के निर्देश में बनकर तैयार हुआ 
  3. जिसे 22 अक्टूबर 1963 को जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्र को समर्पित कर दिया 
  1. इस बांध का निर्माण सतलज नदी पर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में किया गया  इस बांध की ऊंचाई 225.55 मीटर ( 740 फीट ) है
  2. लंबाई 518.16 मीटर(1700 फिट) है चौड़ाई 9.14 मीटर (30 फीट) है इस बांध के पीछे के जलाशय को गोविंद सागर झील कहां जाता है
  3. जो की भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है 

भाखड़ा बांध के पिछे बिलासपुर में बने विशाल जलाशय का नाम गोविंद सागर है

जो पंजाब में हरियाणा में राजस्थान की पेयजल व सिंचाई तथा दिल्ली से चंडीगढ़ की पेयजल आवश्यकताओं को पूरी करता है

भारत का सबसे ऊंचा बांध टिहरी बांध है जिसकी ऊंचाई 261 मिटर हैं  इस बांध के दोनों किनारों पर विद्युत संयंत्र स्थापित किए गये है

नाँगल बांध


यह बांध 1952 में बनकर तैयार हुआ सतलज नदी पर भाखड़ा बांध से 13 किलोमीटर नीचे बनाया गया है

यह बांध पंजाब की रोपण जिले में बनाया गया है इस बांध की लंबाई 340.8 मीटर(1000 फीट) & उचांई 29 मीटर (95 फिट) है 

इस बांध पर दो विद्युत संयत्र लगाए गए हैं जो निम्न है
1.गंगेवाल
2.कोटला

इस बांध से सिंचाई के लिए सिचाई के लिए दो नहरे निकाली गई हैं
1. बारी बिस्ट दोआब
2. भांखड़ा नहर

  1. Note राजस्थान को भाखड़ा नांगल परियोजना से पंजाब सरकार व राजस्थान के मध्य 1959 में हुए भाखड़ा नांगल समझौते के तहत 15.22 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हुआ है 
  2. इस परियोजना से सर्वाधिक सिंचाई हनुमानगढ़ जिले में होती है
  3. चूरु गंगानगर हनुमानगढ़ सीकर झुंझुनू से बिकानेर जिलों को विद्युत प्राप्त होती है

इस परियोजना की कुल विद्युत क्षमता 1493 मेगा वाट हैं सिचाई क्षमता 14.6 लाख हेक्टेयर है

जिसमें से राजस्थान को 2.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर सिचाई उपलब्ध होती है राजस्थान को 227.32 MW विद्युत प्राप्त होती है

2. चंबल नदी घाटी परियोजना (Chambal River Valley Project)

यह परियोजना राजस्थान और मध्यप्रदेश की मिश्रित परियोजना है

 जिसमें से राजस्थान और मध्य प्रदेश का 50- 50 प्रतिशत हिस्सा है इस परियोजना का निर्माण तीन चरणों में पूरा हुआ

1. पहला चरण 1953 से 1960 तक-  इस चरण में दो बांध बनाए गए ( गांधी सागर & कोटा बैराज )
2 .दूसरा चरण 1960 से 1970 तक– इस चरण में राणा प्रताप सागर बांध बनाया गया
3. तीसरा चरण 1962 से 1973 तक – इस चरण में जवाहर सागर बांध बनाया गया

1 पहला चरण 1953 से 1960 तक

  1. गांधी सागर बांध यह चंबल नदी पर निर्मित सबसे पहला और सबसे बड़ा बांध है
  2. इस बांध का निर्माण 1960 में पूरा हुआ यह बांध मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में भानपुरा तहसील में चंबल नदी पर है
  3.  इस बांध पर 23 मेगा वाट की 5 विद्युत इकाइयां लगाई गई हैं जिनसे 115 मेगा वाट के विद्युत प्राप्त होती है
  4. कोटा बैराज यह चंबल पर निर्मित दूसरा बांध है यह राजस्थान में बनाया गया चंबल पर पहला बांध है
  5. इस बांध विद्युत उत्पादन नहीं होता है केवल सिंचाई के लिए जल काम में लिया जाता है 
  6. इनसे दो नहरें निकाली गई हैं
  7. 1 दायी नहर
  8. 2.बांयी नहर
  9. दायी नहर राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों में सिंचाई करती है
  10. इस नहर से 8 लिफ्ट नहर निकाली गई हैं जिनमें से दो कोटा में सिंचाई करती हैं
  11. और 6 बांरा में सिंचाई करती हैं
  12. बांयी नहर से केवल राजस्थान मे सिचाई होती है

2 दूसरा चरण 1960 से 1970 तक

  1. राणा प्रताप सागर बांध चंबल नदी पर निर्मित चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में स्थित है 
  2.  इस बांध पर 43 मेगा वाट की 4 विद्युत इकाइयां लगाई गई हैं
  3. जिनसे कुल 172 मेगा वाट विद्युत उत्पन्न होती है 
  4. इस बांध की लंबाई 110 मीटर ऊंचाई 36 मीटर इस बांध से 1.2 लाख हैक्टर क्षेत्र पर सिचाई होती है

3 तीसरा चरण 1962 से 1973 तक

  1. जवाहर सागर बांध कोटा के बोरावास नामक स्थान पर चंबल नदी पर बनाया गया है
  2.  इस बांध पर 33 मेगावाट की 3 विद्युत इकाइयां लगी हैं जिनसे 99 मेगा वाट विद्युत उत्पन्न होती है चंबल नदी पर कुल विद्युत का उत्पादन 386 मेगा वाट होता है
  3. और 4.58 लाख हेक्टर क्षेत्रफल सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है 
  4. जिसमें से राजस्थान को 50% हिस्सा प्राप्त होता है

3. माही नदी घाटी परियोजना

  1. राजस्थान और गुजरात की मिश्रित परियोजना है  
  2. जिसमें राजस्थान का 45% हिस्सा और गुजरात का 55% हिस्सा है 
  3. इस नदी पर तीन बांध स्थित है माही बजाज सागर बांध, कागदी पिकअप वियर बांध ये दोनों बांसवाड़ा में स्थित हैं कडाना बांध पंचमहल गुजरात में स्थित है 
  4. इस नदी घाटी परियोजना से कुल विद्युत का उत्पादन 140 मेगा वाट होता है  
  5. इससे 8.8 लाख हेक्टर पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना

  1. यह परियोजना पूर्ण होने पर विश्व की सबसे बड़ी परियोजना होगी इसे प्रदेश की जीवन रेखा/मरूगंगा भी कहा जाता है।
  2. पहले इसका नाम राजस्थान नहर था। 2 नवम्बर 1984 को इसका नाम इन्दिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया है। 
  3. बीकानेर के इंजीनियर कंवर सैन ने 1948 में भारत सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन पेश किया जिसका विषय बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता था।
  4. IGNP का मुख्यालय(बोर्ड) जयपुर में है।
  1. इस नहर का निर्माण का मुख्य उद्द्देश्य- रावी व्यास नदियों के जल से राजस्थान को आवंटित 86 लाख एकड़ घन फीट जल को उपयोग में लेना है।
  2. नहर निर्माण के लिए सबसे पहले फिरोजपुर में सतलज, व्यास नदियों के संगम पर 1952 में हरिकै बैराज का निर्माण किया गया।
  3. हरिकै बैराज से बाड़मेर के गडरा रोड़ तक नहर बनाने का लक्ष्य रखा गया।
  4. जिससे श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर को जलापूर्ति हो सके।
  5. नहर’ निर्माण कार्य का श्री गणेश तात्कालिक ग्रहमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत ने 31 मार्च 1958 को किया ।
  6. 11 अक्टुबर 1961 को इससे सिंचाई प्रारम्भ हो गई
  7. जब तात्कालिन उपराष्ट्रपति डा. राधाकृष्णनन ने नहर की नौरंगदेसर वितरिका में जल प्रवाहित किया था।

  • IGNP के दो भाग हैं। प्रथम भाग राजस्थान फीडर कहलाता है इसकी लम्बाई 204 कि.मी.(169 कि.मी. पंजाब व हरियाणा + 35 कि.मी. राजस्थान) है।
  • जो हरिकै बैराज से हनुमानगढ़ के मसीतावाली हैड तक विस्तारित है। नहर के इस भाग में जल का दोहन नहीं होता है।
  1. IGNP का दुसरा भाग मुख्य नहर है। इसकी लम्बाई 445 किमी. है।
  2. यह मसीतावाली से जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे तक विस्तारित है।
  3. इस प्रकार IGNP की कुल लम्बाई 649 किमी. है। इसकी वितरिकाओं की लम्बाई 9060 किमी. है।
  4. IGNP के निर्माण के प्रथम चरण में राजस्थान फीडर सूरतगढ़, अनुपगढ़, पुगल शाखा का निर्माण हुआ है।
  5. राजस्थान फीडर का निर्माण कार्य सन् 1975 में पूरा हुआ।

नहर का द्वितीय चरण बीकानेर के पूगल क्षेत्र के सतासर गांव से प्रारम्भ हुआ था।

जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे में द्वितीय चरण पूरा हुआ है। इसलिए मोहनगढ़ कस्बे को IGNP का ZERO POINT कहते हैं।

द्वितीय चरण का कार्य 1972-73 में पुरा हुआ है।

IGNP के द्वारा राज्य के आठ जिलों- हनुमानगढ़, श्री गंगानगर, चूरू, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, जैसलमेर एवं बाड़मेर में सिंचाई हो रही है या होगी।

इनमें से सर्वाधिक कमाण्ड क्षेत्र क्रमशः जैसलमेर एवं बीकानेर जिलों का है।

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना से निम्नलिखीत नहर निकाली गई है।

i) गंधेली(नोहर) साहवा लिफ्ट(पुराना नाम) –  चैधरी कुम्भाराम लिफ्ट नहर(नया नाम)- हनुमानगढ़, चुरू, झुंझुनू(लाभान्वित जिले)

ii) बीकानेर – लुणकरणसर लिफ्ट(पुराना नाम) – कंवरसेन लिफ्ट नहर(नया नाम)-  श्री गंगानगर, बीकानेर(लाभान्वित जिले)

iii) गजनेर लिफ्ट नहर(पुराना नाम) – पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर (नया नाम) – बीकानेर, नागौर(लाभान्वित जिले)

iv) बांगड़सर लिफ्ट नहर(पुराना नाम) – भैरूदम चालनी वीर तेजाजी लिफ्ट नहर (नया नाम) – बीकानेर(लाभान्वित जिले)

v) कोलायत लिफ्ट नहर(पुराना नाम) – डा. करणी सिंह लिफ्ट नहर (नया नाम) – बीकानेर, जोधपुर(लाभान्वित जिले)

vi) फलौदी लिफ्ट नहर(पुराना नाम) – गुरू जम्भेश्वर जलो उत्थान योजना (नया नाम) – जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर(लाभान्वित जिले)

vii) पोकरण लिफ्ट नहर(पुराना नाम) -जयनारायण व्यास लिफ्ट (नया नाम) – जैसलमेर, जोधपुर(लाभान्वित जिले)

viii) जोधपुर लिफ्ट नहर(170 किमी. + 30 किमी. तक पाईप लाईन)(पुराना नाम) – राजीवगांधी लिफ्ट नहर (नया नाम) – जोधपुर(लाभान्वित जिले)

नर्मदा नहर परियोजना ( Narmada Canal Project

नर्मदा नहर को मारवाड़ की जीवन रेखा कहा जाता है यह परियोजना गुजरात, राजस्थान, मद्ये प्रदेश चार राज्यों की संयुक्त परियोजना है

इस परियोजना को सरदार￶ सरोवर बांध परियोजना व् मारवाड़ की भागीरथी गंगा के नाम से जाना जाता है.

इस परियोजना में राजस्थान का हिस्सा￶ 0.05 एम.ए.एफ.है यह राजस्थान की पहली परियोजना है

जिससे सम्पूर्ण सिंचाई ‘ फंवारा पद्धति बूँद-बूँद पर की जाती है.

परियोजना

इस परियोजना के तहत सरदार सरोवर बांध से नहरों के द्वारा सिंचाई की जाती है

इस परियोजना के तहत सर्वप्रथम राजस्थान मे सिलू गॉंव (जालोर )में 27 मार्च, 2008 को आया !

नर्मदा नहर परियोजना से राजस्थान के जालौर व् बाड़मेर ज़िलों के 1336 गाँवो को पेयजल एंव 2.46 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जाती है नर्मदा बचाओ आंदोलन का सम्बन्ध बाबा￶ आम्टे व् अरुंधति राय मेघापाटकर से है

सिंचाई परियोजना सिंचाई परियोजना सिंचाई परियोजना

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August 12, 2020

राजस्थान की खान एवं खनिज संपदा Mines of Raj

राजस्थान की खान व खनिज

राजस्थान में भौतिक दृष्टि से तीन मरु, मेरु व माल भू- आकृतियों का विशेष महत्व है।

राजस्थान में अरावली प्रदेश खनिज संसाधनों की दृष्टि से धनी है।

पश्चिमी राजस्थान में अधात्विक खनिज व शक्ति के स्रोत पाए जाते हैं।

खनिज

पूर्वी राजस्थान के खनिज की कमी पाई जाती हैं। खानो कि दृष्टि से राजस्थान का प्रथम स्थान है।

राजस्थान में सर्वाधिक कुल 79 प्रकार के खनिज पाये जाते है। जिनमें 44 प्रकार के बड़े खनिज व 23 प्रकार के लघु खनिज एवं 12 अन्य गौण खनिज पाए जाते हैं, इसलिए राजस्थान को खनिजों का अजायबघर कहते हैं।

खनिजों उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान भारत का तीसरा बड़ा राज्य हैं।

झारखंड और मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान का खनिज भंडारो  कि दृष्टि से भारत में झारखण्ड के बाद राजस्थान का दूसरा स्थान है।

खनिजो से होने वाली आय की दृष्टि से पांचवा स्थान है लोह खनिज उत्पादन मूल्य में 4th स्थान हे ओर अलोह उत्पादन में 1st  हे

देश के कुल खनिज उत्पादन में राज्य का भाग 22 प्रतिशत है। देश देश के कुल खनिजों में राज्य का 15% धात्विक, 25% अधात्विक एवं 26% लघु श्रेणी के खनिजों का योगदान है।

राजस्थान में धात्विक और अधात्विक खनिज पाए जाते हैं, परंतु धात्विक खनिजों की कमी पाई जाती हैं।

नागौर जिले के डेगाना (भाकरी) में एशिया की सबसे बड़ी टंगस्टन की खदान है। राजस्थान के झुंझुनू को भारत का तांबा जिला कहा जाता है।

राजस्थान के मकराना का संगमरमर (केल्साइटिक प्रकार का) विश्वविख्यात है।

जिसका प्रयोग ताजमहल (आगरा) व ‘विक्टोरिया मेमोरियल’ (कोलकाता) के निर्माण में हुआ है।

राजस्थान में हिरा केसरपुरा (प्रतापगढ़) है पर अभी वहां संभावनाएं व्यक्त की गई है

भारत की सबसे बड़ी खदान रॉक फॉस्फेट झामर कोटड़ा (उदयपुर) में है।

राजस्थान में भारत का सर्वाधिक सीसा-सस्ता मिलता है राजस्थान में काला मार्बल जयपुर भैंसलाना में मिलता है। तामडा उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है

यह’लालमणि’व् ‘रक्तमणि’ के नाम से जानी जाती है तामड़ा उत्पादन में राजस्थान में टोंक जिले का प्रथम स्थान है. 

राजस्थान के नागौर को राज्य का धातु नगर कहा जाता है। राजस्थान राज्य टंगस्टन विकास निगम लिमिटेड की स्थापना 22 नवंबर 1983 में की गई।

राजस्थान में खनिज विकास निगम की स्थापना 1979 ईं. में की गई है।

राज्य की प्रथम खनिज नीति 1978 में तत्कालीन मुख्य मंत्री भैरो सिंह शेखावत के काल में बनी. द्वितीय खनिज नीति 1991में बनी.

राजस्थान के खान एवं भू-विज्ञान निदेशालय ने राज्य में खनन क्षेत्र का विकास करने के लिए “विजन-2020” नामक योजना शुरू की।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग द्वारा “भू-वैज्ञानिक पार्क” के रूप में राजपुरा-दरीबा-बामनिया कला क्षेत्र को सुरक्षित एवं संरक्षित किया गया है। 

राजस्थान की सीसे की सबसे बड़ी खदान जावर खदान (उदयपुर) में है।

खनिज नीति, 2006 ई. सर्वोच्च प्राथमिकता को पर्यावरण मित्र तथा खनिज आधारित उद्योगों के लिए उचित वातावरण तैयार करने पर दी गई।

राजस्थान में प्रथम मार्बल नीति की घोषणा अक्टूबर 1994 ई., तथा प्रथम ग्रेनाइट नीति 1991ई. में घोषित की गयी।

राजस्थान की नवीनतम मार्बल नीति व ग्रेनाइट नीति की घोषणा 8 जनवरी 2002 को की गई।

राजस्थान के खनिज विभाग ने 15 अगस्त 1999 को “विजन 2020” घोषित किया।

राजस्थान राज्य खान एंव खनिज लि.की स्थापना 2003 में की गयी.

राजस्थान में नई खनन नीति को प्रदेश मंत्रिमंडल ने 28 जनवरी 2011 को अनुमोदित कर दिया।  

राजस्थान जास्पर, गारनेट जैम व वोलेस्टोनाईट का समस्त देश में एकमात्र उत्पादक राज्य है 

राज्य की नई खनिज नीति 4 जून 2015 को जारी की गई

नागौर के खींवसर उदयपुर के कोटडा डूंगरपुर के आसपुर चित्तौड़गढ़ के कपासन के अंजनी खेड़ा में लाइमस्टोन की विस्तृत पट्टी का आंकलन किया गया है राज्य में पाईराइट की एक मात्र खान सलादीपुर(सीकर)में है

जैतून की रिफाइनरी बीकानेर जिले के लूणकरणसर में लगाई गई है राजस्थान ओलिव कल्टीवेशन लिमिटेड द्वारा संस्थापित यह देश की पहली रिफाइनरी है

जैतून के तेल का उत्पादन करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है

सिरोही में चंद्रावती में उत्खनन के दौरान लाजवर्त पत्थर मिला है यह पत्थर अफगानिस्तान में हिंदू कुश के पास स्थित बदक शा की पहाड़ियों में पाया जाता है

इससे अफगानिस्तान व चंद्रावती के मध्य व्यापार का पता चलता है

केयर्न इंडिया ने गुडामालानी सांचौर में 1 खरब घन फीट गैस भंडार मिलने का दावा किया गया है

बीकानेर जिले के खाजूवाला तहसील के आनंदगढ़ एवं फरीदसर क्षेत्र में जिप्सम की परत पाई गई है

ऑस्ट्रेलियाई कंपनी इंडो गोल्ड ने फरवरी 2007 में बांसवाड़ा जिले के मुखिया जगपुरा में 3. 85 करोड़ टन स्वर्ण स्वर्ण भंडार की खोज की

राज्य में चार पेट्रोलियम संभाव्य क्षेत्र है

  • राजस्थान सेल्फ जैसलमेर व बीकानेर
  • बाड़मेर सांचौर बेसिन बाड़मेर से सांचौर
  • बीकानेर नागौर बेसिन बीकानेर नागौर गंगानगर चूरु
  • विंध्यन बेसिन कोटा झालावाड़ बारा बूंदी चित्तौड़गढ़ भीलवाडा

ऐसे खनिज जिन पर राजस्थान का एकाधिकार है

पन्ना, जास्पर, तामड़ा,  रक्त मणि, वोलेस्टेनाइट

वे खनिज जिनके उत्पादन में राज्य प्रथम स्थान पर है

जस्ता (97%), फ्लोराइट(96%), एस्बेटोस(96%), रॉक फॉस्फेट, जिप्सम चूना पत्थर , खड़िया मिट्टी घीया पत्थर, चांदी मार्बल सीसा , फेल्सफार टंगस्टन कैल्साइट, फायर क्ले इमारती पत्थर

वो खनिज जिनकी राजस्थान मे कमी है

लौहा, कोयला , मैंगनीज, खनिज तेल, ग्रेफाइट कुल 

राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम Rajasthan State Mineral Development Corporation

स्थापना कम्पनी अधिनियम 1956 के तहत 27 सितम्बर 1979 को की गई 20 फरवरी 2003 को इसका विलय राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड मे कर दिया

राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड Rajasthan State Mines & Minerals Limited

इसकी स्थापना 1948 में बीकानेर जिप्सम लिमिटेड के नाम से की गई 1974 में इसका नाम राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड कर दिया

इसके प्रमुख कार्य

  1. उदयपुर के झामड़ – कोटड़ा मे रॉक फॉस्फेट का कार्य
  2. गिरल बाड़मेर मे 125 मेगावाट के विद्युत संयत्र की स्थापना
  3. जैसलमेर के बड़ाबाग में 106.3 मेगावाट की विद्युत इकाई की स्थापना
  4. राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड व राष्ट्रीय केमिकल एण्ड फर्टिलाइजर द्वारा 425 करोड़ रूपये की लागत से चितौड़ गढ में राजस्थान राष्ट्रीय केमिकल एण्ड फर्टिलाइजर लिमिटेड के DAP खाद का कारखाना लगाया है

Special Note

  • हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड – खेतड़ी (झुंझुनू)
  • हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड – देबारी (उदयपुर)

1. सीसा, जस्ता, चाँदी   Lead, zinc, silver
जावर -उदयपुर, राजपुरा दरीबा -राजसमंद, रामपुरा , आगूँचा-भीलवाड़ा, चौथ कबरवाड़ा -सवाई माधोपुर

राजस्थान में सीसा जस्ता शोधन के लिए हिदुस्तान जिंक लिमिटेड कि स्थापना 1966 में कि गई परन्तु यहा हो रहे अवैध खनन के कारण उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है।

वर्त्तमान में जस्ता शोधन का कार्य सुपर जिंक स्मेल्टर चंदेरिया चितोडगढ़ में किया जाता है

यह ब्रिटेन कि सहायता से  स्थापित गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा जिंक स्मेल्टर है

2.  लोहा Iron
मोरीजा बनेरा -जयपुर , नीमला राइसेला -दौसा, खेतड़ी सिंघाना -झुंझुंनू, थुर हुण्डेर -उदयपुर

3. ताँबा Copper
खेतड़ी सिंघाना  झुंझुंनू , खोदरीबा -अलवर, बन्नी कि ढाणी -सीकर

4. रॉक फास्फेट Rock Phosphate

सर्वाधिक उत्पादन – झामर कोटड़ा -उदयपुर

इसका उपयोग उवर्रक उधोग में किया जाता है। इससे सुपर फास्फेट का निर्माण  होता है।

बिरमानिया जैसलमेर भारत कि रॉक फास्फेट कि सबसे बड़ी खान है 

5. टंगस्टन  Tungsten

सर्वाधिक उत्पादन – डेगाना-नागौर, वालदा -सिरोही 

राजस्थान का इस खनिज पर एकाधिकार है। 

6. जिप्सम Gypsum

सर्वाधिक उत्पादन – भदवासी क्षेत्र -नागौर, सबसे बड़ी जिप्सम कि खान -जामसर -बीकानेर

7. संगमरमर  Marble

सर्वाधिक उत्पादन -राजसमंद 

यह बहुमूल्य पत्थरो में सर्वाधिक आय प्रदान करने वाला पत्थर है। मकराना नागौर के सफेद संगमरमर से विश्व प्रसिद ताजमहल का निर्माण किया गया है

  • हरा संगमरमर- उदयपुर ,डूंगरपुर
  • सफेद संगमरमर – मकराना ,राजसमंद
  • काला संगमरमर -भेसलाना जयपुर
  • बादामी संगमरमर -जोधपुर
  • पीला संगमरमर -जैसलमेर
  • सतरंगा संगमरमर-खदरा गॉव पाली

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