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September 2020

September 30, 2020

Currency मुद्रा की परिभाषा, मुद्रा का अर्थ एवं प्रकार

उपयोगिता उपभोक्ता का व्यवहार 

अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसमे उपयोगिता ,उपभोग, उपभोक्ता का कार्यान्वयन होता हैं जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है।

‘अर्थशास्त्र’ शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ (धन) और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है – ‘धन का अध्ययन’।

किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं,  इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कायों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है।

अर्थशास्त्र का प्रयोग यह समझने के लिये भी किया जाता है कि अर्थव्यवस्था किस …

September 29, 2020

Wisdom शिक्षा मनोविज्ञान- बुद्धि और अधिगम पठार

Wisdom शिक्षा मनोविज्ञान- बुद्धि

बुद्धि की परिभाषा ( Definition of intelligence )

थार्नडाइक के अनुसार “उत्तम क्रिया करने तथा नई परिस्थितियों के साथ समायोजन करने की योग्यता को बुद्धि कहते हैं।”

थॉमसन के अनुसार- “बुद्धि वंशपरम्परागत प्राप्त विभिन्न गुणों का योग है।”

वेस्लर के मत में – “बुद्धि व्यक्ति की क्षमताओं का वह समुच्चय है जो उसकी ध्येयात्मक क्रिया, विवेकशील चिंतन तथा पर्यावरण के प्रभाव से समायोजन कराने में सहायक होती है।”

स्टोडार्ड के मतानुसार “बुद्धि (क) कठिनता (ख) जटिलता (ग) अमूर्तता (ड.) आर्थिकता (च) उद्देश्य प्राप्यता (छ) सामाजिक मूल्य तथा (ज) मौलिकता से सम्बंधित समस्याओं को समझने की योग्यता है।”

बुद्धि

September 29, 2020

Psychology Introduction मनोविज्ञान का परिचय

मनोविज्ञान का परिचय

मनोविज्ञान का_परिचय

मनोविज्ञान_को शताब्दियों पूर्व ” दर्शन शास्त्र ” कि एक शाखा केरूप मे माना जाता था । मनोविज्ञान को स्वतंत्र विषय बनाने के लिए इसे परिभाषित करना शुरू किया ।

PSYCHOLOGY शब्द कि उत्पत्ति लैटिन भाषा के दो शब्दो PSYCHE+LOGOS से मिलकर हुई हैं, PSYCHE का अर्थ होता है ” आत्मा का” तथा LOGOS का अर्थ होता हैं “अध्ययन करना ” 

इस शाब्दिक अर्थ के आधार पर सर्वप्रथम प्लेटो, अरस्तु और डेकार्ट के द्वारा मनोविज्ञान को ” आत्मा का विज्ञान ” माना गया ।

आत्मा शब्द की स्पष्ट व्याख्या नहीं होने के कारण 16वीं शताब्दी के …

September 28, 2020

Structures and resources आधारभूत -सरंचना एवं संसाधन

सरंचना एवं संसाधन

संसाधन

आर्थिक विकास में आधारभूत संरचना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है आधारभूत संरचना में जो क्षेत्र समृद्ध होते हैं उनका विकास तेज गति से होता है आधारभूत संरचना को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है

पहला भाग आधारभूत ढांचागत संरचना है इस में परिवहन विद्युत संचार को सम्मिलित किया जाता है इसके अलावा सिंचाई भी आधारभूत ढांचागत संरचना का भाग है क्योंकि कृषि विकास सिंचाई पर निर्भर है

आधारभूत संरचना का दूसरा भाग आधारभूत सामाजिक संरचना है इसमें प्रमुख रूप से मानव संसाधन विकास को सम्मिलित किया जाता है

राजस्थान का विकास के मामले में …

September 28, 2020

Programs and schemes कमजोर वर्गों के लिए कार्यक्रम व योजनाएं

कमजोर वर्गों के लिए कार्यक्रम व योजनाएं )

1. राजस्थान अन्नपूर्णा दूध योजना ( Rajasthan Annapoorna Milk Scheme )

योजनाएं

राजस्थान सरकार ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे उन छात्रों के नामांकन में वृद्धि, ड्रॉप-आउट को रोकने, और पौष्टिक स्तर को बढ़ाने के लिए मध्य-भोजन भोजन योजना के लिए राजस्थान अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू की है।

छात्रों का इसके लिए, मिड डे मील के आयुक्त प्रति छात्र एक लीटर दूध की मात्रा दी जाएगी और हर स्कूल में दूध के लिए डेयरी के अलावा जहां से भी हो निर्देश दिए जाएँगे।  शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह …

September 28, 2020

Rajasthan Economic प्रमुख विकास परियोजनाएं

प्रमुख विकास परियोजनाएं

विकास परियोजनाएं

क्षेत्रीय एवं जनजाति विकास कार्यक्रम ( Regional and tribal development program )

सूखा संभाव्य (सूखा प्रभावित) क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP)- यह कार्यक्रम 1974 -75 में केंद्र प्रवर्तित स्कीम के रूप में प्रारंभ किया गयाmइसकी वित्तीय व्यवस्था में केंद्र व राज्यों का 75: 25 रखा गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य सूखे की संभावना वाले क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में सुधार करना

इसके लिए भूमि व जल के उपलब्ध साधनों का सर्वोत्तम उपयोग किया जाता है ताकि इन क्षेत्रों में अकाल व सूखे के प्रतिकूल प्रभाव कम किए जा सके निम्न कार्यक्रमों पर बल दिया जाता है

  • मिट्टी में नमी

September 27, 2020

Rajasthan Economy आधारभूत-संरचना एवं संसाधन

राजस्थान की आधारभूत-संरचना एवं संसाधन

संसाधन

संसाधन ( Resources) :-

हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हर वह वस्तु जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये इस्तेमाल की जा सकती है जिसे बनाने के लिए हमारे पास प्रौद्योगिकी है और जिसका इस्तेमाल सांस्कृतिक रूप से मान्य है., उसे संसाधन कहते हैं।

संसाधन के प्रकार ( Types of resources ):- 

संसाधन को विभिन्न आधारों पर विभिन्न प्रकारों में बाँटा जा सकता है; जो नीचे दिये गये हैं

A.उत्पत्ति के आधार पर ( On the basis of origin )-: जैव और अजैव संसाधन ( Bio and Abiotic Resources )

B.समाप्यता के आधार पर ( On the basis of

September 27, 2020

Rajput History राजस्थान में राजपूत वंशों का उदय 7-12 वीं सदी

राजस्थान में राजपूत वंशों का उदय 7-12 वीं सदी

राजपूत

सूर्यवंशी, चंद्रवंशी, यदुवंशी, अग्निवंशी।

“राजपूत” शब्द की व्युत्पत्ति राजपूतों की उत्पत्ति के विभिन्न मत और उनकी समीक्षा

  • अग्निवंशीय मत
  • सूर्य तथा चंद्रवंशीय मत
  • विदेशी वंश का मत
  • गुर्जर वंश का मत
  • ब्राह्मणवंशीय मत
  • वैदिक आर्य वंश का मत

राजपूतों की विदेशी उत्पत्ति का सिद्धांत ( Rajput Origin )

(1) विदेशी सिद्धान्त ( Foreign principle )

राजस्थान के इतिहास को लिखने का श्रेय कर्नल जेम्स टॉड को दिया जाता है, कर्नल टॉड को हम राजस्थान इतिहास का जनक व राजस्थान इतिहास के पितामह भी कहते हैं कर्नल टॉड ने अपने ग्रंथ ‘दे

September 27, 2020

Medieval Rajasthan मध्यकालीन राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था

मध्यकालीन राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था

प्रशासनिक

मध्यकाल में राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था से तात्पर्य मुगलों से संपर्क के बाद से लेकर 1818 ईसवी में अंग्रेजों के साथ हुई संधियों की काल अवधि के अध्ययन से है।  इस काल अवधि में राजस्थान में 22 छोटी बड़ी रियासतें थी और अजमेर मुगल सूबा था।

इन सभी रियासतों का अपना प्रशासनिक तंत्र था लेकिन, कुछ मौलिक विशेषताएं एकरूपता लिए हुए भी थी। रियासतें मुगल सूबे के अंतर्गत होने के कारण मुगल प्रभाव भी था।

राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था के मूलत 3 आधार थे —

  • सामान्य एवं सैनिक प्रशासन।
  • न्याय प्रशासन।
  • भू राजस्व प्रशासन।

संपूर्ण …

September 26, 2020

Historical Period Maurya ऐतिहासिक काल मौर्य काल

ऐतिहासिक काल मौर्य काल

मौर्य काल ( Maurya Empire )

चंद्रगुप्त मौर्य के समय से ही मौर्यों की सत्ता इस क्षेत्र में फैल गई। कोटा जिले के कणसावा गांव से मिले शिलालेख से यह पता चलता है कि वहां मौर्य वंश के राजा धवल का राज्य था बैराठ से अशोक के दो अभिलेख मिले हैं मौर्य काल में राजस्थान सिंध, गुजरात तथा कोकण का क्षेत्र अपर जनपद अथवा पश्चिमी जनपद कहलाता था

अशोक का बैराठ का शिलालेख तथा उसके उतराधिकारी कुणाल के पुत्र सम्प्रति द्वारा बनवाये गये मन्दिर मौर्यों के प्रभाव की पुष्टि करते हैं कुमारपाल प्रबंध अन्य जैन ग्रंथ से …