Finance Commission: वित्त आयोग

Finance Commission (वित्त आयोग)

वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच साल में होता है।

Finance Commission केंद्र से राज्यों को मिलने वाले अनुदान के नियम भी तय करता है। वित्त_आयोग में अध्यक्ष के अलावा 4 सदस्य होते हैं।

Finance Commission संबंधित नीति और नियामकों में बदलाव कर इन्हें व्यापार के अनुरूप बनाने के साथ श्रम सुधार को बढ़ावा देने में हुई प्रगति की जांच भी करता है। 

राज्य वित्त_आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य में पंचायत तथा अभी तक भारत में कुल 14 वित्त आयोग का गठन किया … Read the rest

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राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग National minority commission

commission ( राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग )

अल्पसंख्यकों के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीएम) ने अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को अधिक प्रभावी ढंग से बचाने के लिए संवैधानिक स्थिति प्रदान करने के लिए सरकार से संपर्क करने का निर्णय लिया है।

संवैधानिक स्थिति की आवश्यकता:-

अपने वर्तमान रूप में, एनसीएम के पास मुख्य सचिवों और पुलिस के निदेशक जनरलों सहित अधिकारियों को बुलावा देने की शक्तियां हैं, लेकिन उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संबंधित विभागों पर भरोसा करना है। यदि संवैधानिक स्थिति दी जाती है, तो एनसीएम उन ग़लत अधिकारियों के खिलाफ कार्य करने में सक्षम होगा जो सुनवाई में … Read the rest

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वैधानिक आयोग क्या है?? Legal Commission

वैधानिक आयोग

राष्ट्रीय महिला आयोग ( National Women Commission )

इस आयोग का गठन राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 के तहत 31 जनवरी 1992 को हुआ। महिला आयोग में एक अध्यक्ष 5 सदस्य एवं एक सदस्य सचिव होता है। इसका प्रमुख कार्य महिलाओं को अन्याय के खिलाफ त्वरित न्याय दिलाना है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ( National Child Rights Protection Commission )

दिसंबर 2006 में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की स्थापना की गई। आयोग का काम बच्चों के अधिकारों का सही रूप में उपयोग करना। कानूनों और कार्यक्रमों पर प्रभावी रूप से अमल करना है। राष्ट्रीय एकता परिषद इसका गठन … Read the rest

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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग National SC commission

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के बारे में:NCSC एक संवैधानिक निकाय है जो भारत में अनुसूचित जातियों (SC) के हितों की रक्षा हेतु कार्य करता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 338 इस आयोग से संबंधित है।

अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कौन है?

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोगआयोग अवलोकनअधिकारक्षेत्रा भारत सरकार मुख्यालय नई दिल्ली आयोग कार्यपालक विजय सांपला, अध्यक्ष अरुण हालदार, उपाध्यक्ष अंजू बाला, सदस्य सुभाष पारधी

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग

एक संवैधानिक निकाय है क्योंकि इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 338 के द्वारा किया गया है । दूसरी और अन्य राष्ट्रीय आयोग जैसे राष्ट्रीय महिला आयोग (1992) … Read the rest

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नीति आयोग क्या है व इसके कार्य NITI AAYOG??

नीति आयोग में कुल कितने सदस्य होते हैं?

नीति आयोग की संरचना में एक पूर्णकालिक अध्यक्ष, 5 पूर्णकालिक सदस्य, 2 अंशकालिक सदस्यों (अग्रणी विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संगठनों से जुड़े लोग) शामिल होते हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिपरिषद के 4 पदेन सदस्य भी होते हैं।

नीति आयोग का क्या कार्य है?

नीति आयोग सरकार का प्रमुख नीति ‘प्रबुद्ध मंडल / थिंक टैंक’ है जो कि भारत सरकार को दिशात्मक और नीतिगत जानकारियाँ प्रदान करता हैं। रणनीतिक निर्णय करते समय और दीर्घकालिक नीतियों और कार्यक्रमों की रचना करते समय नीति आयोग विभिन्न प्रकार की प्रासंगिक तकनीकी सलाह भी प्रदान करता है।

नीति आयोग

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What is Respiratory System?? Part 1

The major function of the respiratory system is to supply the body with oxygen and dispose of carbon dioxide.

To accom-plish this function, at least four processes, collectively called respiration, must happen:

  1. Pulmonary ventilation: movement of air into and out of the lungs so that the gases there are continuously changed and refreshed (commonly called breathing).
  2. External respiration: movement of oxygen from the lungs to the blood and of carbon dioxide from the blood to the lungs.
  3. Transport of respiratory gases: transport of oxygen from the lungs to the tissue cells of the body, and of carbon dioxide from the
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Public Policy: भारत की लोकनीति क्या है?

Public Policy

Public Policy (लोकनीति )

लोकनीति (Public Policy) का अर्थ- लोकनीति में लोक का अर्थ सरकार सें है। अतः लोकनीति का तात्पर्य है सरकार द्वारा बनाई गई नीति। दूसरे शब्दों में जनता की विविध मांगों एवं कठिनाइयों का सामना करने के लिए सरकार को जो नीतियां बनानी पडती है उन्हें ही लोकनीति कहते है।

लोकनीति अथवा ‘सार्वजनिक नीति’ (Public policy) वह नीति है जिसके अनुसार राज्य के प्रशासनिक कार्यपालक अपना कार्य करते हैं। बहुत से विचार कों का मत है कि लोक प्रशासन, लोकनीति को लागू करने और उसकी पूर्ति के लिये लागू की गयी गतिविधियों का योग है।… Read the rest

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भारतीय लोकतंत्र एवं चुनोतियाँ Indian democracy and challenges

भारतीय लोकतंत्र एवं चुनोतियाँ

राजनीतिक व्यवस्था एक सामाजिक संस्था है जो किसी देश के शासन से संव्यवहार करती है और लोगों से इसका संबंध प्रकट करती है। राजनितिक कुछ मूलभूत सिद्धांतों का समुच्चय है जिसके इर्द-गिर्द राजनीति और राजनीतिक संस्थान विकसित होते हैं या देश को शासित करने हेतु संगठित होते हैं।

राजनीतिक व्यवस्था में ऐसे तरीके भी शामिल होते हैं जिसके अंतर्गत शासक चुने या निर्वाचित होते हैं, सरकारों का निर्माण होता है तथा राजनीतिक निर्णय लिए जाते हैं।  समाज में राजनीतिक पारस्परिक विमर्श तथा निर्णय-निर्माण की संरचना एवं प्रक्रिया सभी देशों की राजनीतिक व्यवस्था में समाहित होते हैं।

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What is Civil rights? नागरिक अधिकार_क्या है ??

Civil rights नागरिक

नागरिक

अधिदेश

अधिदेश देश में औषध क्षेत्र के विकास और साथ ही मूल्य निर्धारण एवं वहनीय मूल्यों पर दवाइयों की उपलब्धता, अनुसंधान एवं विकास, बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की सुरक्षा और औषध क्षेत्र से संबंधित अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं पर अधिकाधिक ध्यान एवं बल देना।

दृष्टिकोण और मिशन

दृष्टिकोण भारत : वहनीय मूल्यों पर गुणवत्तायुक्त दवाइयों का सबसे बड़ा वैश्विक प्रदाता

मिशन:

  • औषध नीति के अनुसार वहनीय मूल्यों पर गुणवत्तायुक्त दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • औषध अवसंरचना का विकास तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भी औषध क्षेत्र में नवीन प्रगति।
  • फार्मा ब्रांड इंडिया का संवर्धन
  • औषध उद्योग के पर्यावरण
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व्यवस्था एवं शासन- विधिक अधिकार Legal right

व्यवस्था एवं शासन- विधिक अधिकार

विधिक अधिकार वे हैं जो किसी दत्त विधिक प्रणाली द्वारा किसी व्यक्ति को प्रदान किये जाते हैं

अर्थात्, वे अधिकार जो मानवीय नियमों द्वारा परिवर्तित, निरसित और निरुद्ध किये जा सकते।

विधिक सहायता का अधिकार ऐसे लोगों जो न्याय पाने के लिये वकीलों और अदालतों का खर्च वहन नहीं कर सकते, को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करता है।

भारतीय संविधान में उल्लिखित राज्य के नीति-निदेशक तत्त्वों के अंतर्गत इसे अनुच्छेद 39- A के तहत जोड़ा गया है,

जिसके अंतर्गत गरीब और वंचित वर्गों के लिये निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करवाना राज्य का कर्त्तव्य होगा।

विधिक

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