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Arts & Culture

September 26, 2020

Literary and Museum आधुनिक साहित्यकार एवं संग्रहालय

आधुनिक साहित्यकार एवं संग्रहालय

Albert Hall Museum अल्बर्ट हॉल म्यूजियम 

यह राजस्थान का पहला संग्रहालय है, इसे महाराजा रामसिंह के शासनकाल में प्रिंस अलबर्ट ने 1876 में शुभारम्भ करवाया था  उनके नाम पर ही इसका नाम रखा गया है।

इसी राजस्थान का प्रथम संग्रहालय कहा जा सकता है वर्तमान में इसका आकर्षण केंद्र मिस्र से मंगवाई गई ममी है

राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग जयपुर ( Rajasthan Archeology and Museum Department )

राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का गठन 1950 में हुआ, यह विभाग प्रदेश में बिखरी पुरासंपदा तथा सांस्कृतिक धरोहर की खोज सर्वेक्षण एवं प्रचार प्रसार में संलग्न है इस विभाग …

September 26, 2020

Rajasthan Tribes राजस्थान में जनजाति

राजस्थान में जनजाति

जनजाति

भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान में जनजातियों को 3 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है ।

  1. पूर्वी एवं दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र
  2. दक्षिणी क्षेत्र
  3. उत्तर पश्चिम क्षेत्र

1. पूर्वी एवं दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र ( Eastern and Southern Eastern Areas )

अलवर ,भरतपुर ,धौलपुर, जयपुर, दोसा, सवाई माधोपुर, करौली ,अजमेर ,भीलवाड़ा, टोंक, कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ इन क्षेत्रों में मीणा जाति का बाहुल्य है। अन्य जनजातियां भील, सहरिया, और सांसी पाई जाती है ,।

2. दक्षिणी क्षेत्र ( Southern Region )

सिरोही ,राजसमंद ,चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा ,डूंगरपुर ,उदयपुर क्षेत्र में भील, मीणा, गरासिया, डामोर मुख्य रूप से निवास करते हैं। भील जनजाति की …

September 25, 2020

राजस्थान के दर्शनीय स्थल Rajasthan Tourist Places

राजस्थान के दर्शनीय स्थल

दर्शनीय स्थल

बूंदी के दर्शनीय स्थल

चौरासी खम्भों की छतरी –

बूंदी शहर से लगभग डेढ किलोमीटर दूर कोटा मार्ग पर यह भव्य छतरी स्थित हैं। राव राजा अनिरूद्व सिंह के भाई देवा द्वारा सन् 1683 में इस छतरी का निर्माण करवाया गया था। चौरासी स्तम्भों की यह विशाल छतरी नगर के दर्शनीय स्थलों में से एक हैं।

तारागढ दुर्ग –

बूंदी शहर का प्रसिद्व दुर्ग जो पीले पत्थरों का बना हुआ हैं, तारागढ के दुर्ग के नाम से प्रसिद्व हैं। इसका निर्माण राव राजा बरसिंह ने 1354 में बनवाया था।

 रामेश्वर-

बूंदी से 25 …

September 25, 2020

लोक संगीत कोन कोन से हे?? Rajasthan Folk music

लोक संगीत

लोक संगीत

भारत संगीत गायन शैलियां

1. ध्रुपद गायन शैली ( Dhrupad singing style )

  • जनक – ग्वालियर के शासक मानसिंह तोमर को माना जाता है।
  • महान संगीतज्ञ बैजू बावरा मानसिंह के दरबार में था।
  • संगीत सामदेव का विषय है।
  • कालान्तर में ध्रुपद गायन शैली चार खण्डों अथवा चार वाणियां विभक्त हुई।

(अ) गोहरवाणी ( Gorawani )

  • उत्पत्ति- जयपुर
  • जनक- तानसेन

(ब) डागुर वाणी ( Dagur vani )

  • उत्पत्ति- जयपुर
  • जनक – बृजनंद डागर

(स) खण्डार वाणी ( Khandar Vani )

  • उत्पत्ति – उनियारा (टोंक)
  • जनक- समोखन सिंह

(द) नौहरवाणी जयपुर ( Navhwani Jaipur )

  • जनक- श्रीचंद नोहर

2. ख्याल गायन शैली ( Kayal singing style )

  • ख्याल

September 25, 2020

राजस्थान के पर्व कोन कोन से है??Rajasthan Festival

राजस्थान के पर्व

पर्व

हिंदुओं के त्योहार ( Festivals of Hindus )

  • तीज राजस्थान की स्त्रियों का सर्व प्रिय त्यौहार है तीज प्रतिवर्ष 2 बार आती है
  • बड़ी तीज भाद्र कृष्ण तृतीया
  • छोटी तीज श्रवण शुक्ला तृतीया छोटी तीज ही अधिक प्रसिद्ध है तीज के 1 दिन पूर्व सिंजारा का पर्व मनाया जाता है ।
  • नाग पंचमी सावन कृष्णा पंचमी को नाग पूजा की जाती है घर के दरवाजे के दोनों और गोबर से नाग का चित्र अंकित किया जाता है ।
  • रक्षाबंधन श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है बहन भाई को राखी बांधती

September 24, 2020

राजस्थान के लोक नाट्य Rajasthan Folk drama

राजस्थान के लोक नाट्य

लोक नाट्यो में ‘तुर्रा कलंगी’ कम से कम 500 साल.पुराना हैं। मेवाड़ के दो पीर संतो ने जिनके नाम शाहअली और तुक्कनगीर थे ‘ तुर्राकलंगी ‘की रचना की। बीकानेर की ‘रम्मत’ की अपनी न्यारी ही विशेषता ह

लोक नाट्य

1. ख्याल:-

नाटक मे जहाँ देखना और सुनना दोनों प्रधान होते है वहां ख्याल मे केवल सुनना प्रधान होता हैं। 18 वीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही राजस्थान में लोक नाट्यों के नियमित रुप से सम्पन्न होने के प्रमाण मिलते हैं। इन्हें ख्याल कहा जाता था। इन ख्यालों की विषय-वस्तु पौराणिक या किसी पुराख्यान से जुड़ी होती है।

इनमें …

September 24, 2020

राजस्थान के प्रमुख संगीतज्ञ Rajasthan Chief Musicians

राजस्थान के प्रमुख संगीतज्ञ

संगीतज्ञ

1. सवाई प्रताप सिंह – जयपुर नरेश सवाई प्रताप सिंह संगीत एवं चित्रकला के प्रकांड विद्वान और आश्रयदाता थे इन्होंने संगीत का विशाल सम्मेलन करवाकर संगीत के प्रसिद्ध ग्रंथ राधा गोविंद संगीत सार की रचना करवाई जिसके लेखन में इनके राजकवि देवर्षि बृजपाल भट्ट का महत्वपूर्ण योगदान रहा  इनके दरबार में 22 प्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं विद्वानों की मंडली गंधर्व बाईसी थी

2. महाराजा अनूप सिंह- बीकानेर के शासक जो स्वयं एक विद्या अनुरागी तथा विद्वान संगीतज्ञ थे प्रसिद्ध संगीतज्ञ भाव भट्ट इन्हीं के दरबार में था

3. पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर- यह महाराष्ट्र के थे …

September 24, 2020

Rajasthan Handicrafts राजस्थान की हस्तशिल्प

राजस्थान की हस्तशिल्प

हस्तशिल्प

मीनाकारी

मीनाकारी का कार्य सोने से निर्मित हल्के आभूषणों पर किया जाता है । मीनाकारी जयपुर के महाराजा मानसिंह प्रथम लाहौर से अपने साथ लाए । लाहौर में यह काम सिक्खों द्वारा किया जाता था । जहां फारस से मुगलों द्वारा लाया गया । मीनाकारी के कार्य की सर्वोत्तम कृतिया जयपुर में तैयार की जाती है । जयपुर में मीना का कार्य सोना चांदी और तांबे पर किया जाता है । लाल रंग बनाने में जयपुर के मीना कार कुशल है ।

प्रतापगढ़ की मीनाकारी थेवा कला कहलाती है । प्रतापगढ़ में कांच पर थेवा कला का कार्य किया जाता …

September 23, 2020

Regional bids of Rajasthan राजस्थान की क्षेत्रीय बोलियां

डॉ एल.पी.टेसीटोरी का वर्गीकरण

इटली के निवासी टेसीटोरी की कार्यस्थली बीकानेर रही । उनकी मृत्यु (1919 ई. ) भी बीकानेर में ही हुई । बीकानेर महाराजा गंगासिंह ने उन्हें ‘राजस्थान के चारण साहित्य’ के सर्वेक्षण एंव संग्रह का कार्य सौंपा था । डॉ. टेसीटोरी ने चरणों और ऐतिहासिक हस्तलिखित ग्रन्थों की एक विवरणात्मक सूची तैयार की । उन्होंने अपना कार्य पूरा कर राजस्थानी साहित्य पर दो ग्रंथ लिखे ।

  1. राजस्थानी चारण साहित्य एंव ऐतिहासिक सर्वे ।
  2. पश्चमी राजस्थान का व्याकरण ।

टेसीटोरी की प्रसिद्ध पुस्तक “ए डिस्क्रिप्टिव केटलॉग ऑफ द बार्डिक एन्ड हिस्टोरिकल क्रोनिकल्स ‘ है ।

डॉ एल.पी.टेसीटोरी के …

September 23, 2020

राजस्थान के लोक नृत्य Rajasthan Folk dance

राजस्थान के क्षेत्रीय लोक नृत्य, राजस्थान का शास्त्रीय नृत्य, राजस्थानी लोक नृत्य, राजस्थान के लोक नृत्य आदि के बारे में हम इस लेख में बात करेंगे हम उम्मीद करते है की राजस्थान के लोक नृत्य के बारे में पढ़ने में मजा आयेगा और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरूर करेंगे।

राजस्थान के लोक नृत्य

उमंग में भरकर सामूहिक रूप से ग्रामीणों द्वारा किए जाने वाले नृत्य जिनमें केवल लय के साथ क्रमशः तीव्र गति से अंगो का संचालन होता है, “”उन्हें देशी नृत्य”” अथवा “”लोक नृत्य”” कहा जाता है।

क्षेत्रीय लोक नृत्य (Regional folk dance)– क्षेत्र विशेष