September 29, 2022
Alwar, Rajasthan, India
Environment

वन्यजीवों को खतरा क्या है? Threats to Wildlife

सामान्य अर्थ में वन्य जीव जंतुओं के लिए प्रयुक्त होता है जो प्राकृतिक आवास में निवास करते हैं भारत जैव विविधता में से संपन्न राष्ट्र है यहां जलवायु एवं प्राकृतिक विविधता के कारण लगभग 48 हजार पादप एवं लगभग 80 हजार से अधिक जीव जंतुओं की जातियां पाई जाती हैं

वन्यजीवों के विलुप्ती के कारण

इसके विलुप्ती के कारण दो कारक हैं

  1. प्राकृतिक कारक
  2. मानव जनित कारक

प्राकृतिक कारण (Natural Causes)

भूकंप सूखा ज्वालामुखी के फटने से अथवा धरती पर उल्का पिंडों के गिरने से क्षेत्र विशेष में उपलब्ध जातियां नष्ट होकर विलुप्त हुई पृथ्वी पर अनुवांशिकी रूप से भिन्न भिन्न पादपों की कमी से उपलब्ध पादपों में अंतः प्रजनन की क्रिया के कारण जनन क्षमता में कमी आ जाती है इसे अंतः प्रजनन अब नमन कहते हैं

क्रमागत रूप से अंतः प्रजात वंश क्रम में जन्म क्षमता के हास के कारण जातियां विलुप्त हो जाती हैं

मानव जनित कारण (Anthropological Causes)

  1. आवास का हास
  2. प्रदूषण
  3. वनोन्मूलन
  4. जनसंख्या विस्फोट
  5. औद्योगिकीकरण
  6. अन्य कारक जैसे युद्ध बीमारियां विदेशी प्रजातियों का आक्रमण इत्यादि

आवास का हास (Loss of Habitat)

मनुष्य के विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए वनों का विनाश करने से वन्यजीवों के आवास स्थल निरंतर बढ़ते गए मानव ने उद्योगों बांध निर्माण सड़कों एवं रेल मार्गो आवासीय परिसरों इत्यादि बनाने के लिए जंगलों का सफाया करके प्राकृतिक आवासों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है

इसके अतिरिक्त कृषि क्षेत्र में अत्याधिक रसायन संश्लेषित उर्वरक पिड़क नास्को के उपयोग से भी वन्य जीव जंतुओं एवं वनस्पतियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है

प्रदूषण ( Pollution)

वन्य जीव

बडे बडे उद्योगों कल कारखानों तथा वाहनों से निकलने वाली विषैली गैसों से वायुमंडल प्रदूषित हो चुका है औद्योगिक अपशिष्ट वाहित मल एवं कचरे ने तालाबों झीलों नदियों एवं समुंद्र को प्रदूषित कर दिया है

जल मृदा एवं वायु के प्रदूषित हो जाने से जीव जंतुओं एवं वनस्पतियों का विनाश तीव्र गति से बड़ा है जंगलों में खनन कार्य अम्लीय वर्षा एवं हरित ग्रह प्रभाव से पृथ्वी पर जैव विविधता पर संकट गहराया है

वनोन्मूलन (Deforestation)

वन हमारे पर्यावरण के फेफड़े हैं क्योंकि वातावरण की शुद्धता के लिए यह प्रमुख भूमिका निभाते हैं अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मानव वनों पर शुरुआत से ही निर्भर रहा है भवन निर्माण इंदन फर्नीचर कागज उद्योग आदि के लिए मानव ने अंधाधुंध गति से वनों का दोहन किया है

राष्ट्रीय वन नीति 1952 के अनुसार भारत से संगत विकास के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत वन आवरण होना चाहिए किंतु वर्तमान में यह मात्र 20% के लगभग ही शेष बचे हैं वन्य जीव संरक्षण के लिए वन आरोपण पर समुचित ध्यान देना वर्तमान समय की महती आवश्यकता है

जनसंख्या विस्फोट (Population Blast)

भारत जैसे विकासशील देशों तथा अल्पविकसित राष्ट्रों की प्रमुख समस्या जनसंख्या विस्फोट है यह प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष दोनों रूपों से जैव विविधता में कमी के लिए जिम्मेदार है आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के कारण मृत्यु दर में कमी तथा उच्च जन्म दर के कारण जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई है

वर्ष 2001 के जनसंख्या के अनुसार भारत में जनसंख्या घनत्व 324 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है इस प्रकार मानव अपनी आवासीय परिसरों के लिए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को नष्ट करता जा रहा है जो कि जैव विविधता के लिए दुष्कर साबित हो रहा है

औद्योगिकीकरण (Industrialization)

बड़े-बड़े कल कारखानों एवं उद्योगों से प्रतिवर्ष लाखों टन औद्योगिक कचरा विषैले पदार्थ एवं अपशिष्ट हमारे वातावरण में त्यागी जा रहे हैं खनन उद्योग चर्म उद्योगों सीमेंट उद्योग पैट्रोलियम रिफायनरी आणविक बिजली करो इत्यादि से अत्यधिक जहरीले अपशिष्ट हमारे जल मृदा एवं वायु को निरंतर दूषित कर रहे हैं

वायु में उत्सर्जित इन गैसों के कारण ओजोन क्षरण अम्लीय वर्षा हरित गृह प्रभाव जलवायु परिवर्तन इत्यादि गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं जिनके कारण समस्त पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहे हैं इनका दुष्परिणाम यह है कि कई क्षेत्र विषैली प्रजातियां विलुप्त हो रही है

अन्य कारण ( Other Causes)

उपरोक्त कारणों के अलावा अन्य कारण जैसे विभिन्न राष्ट्रों के मध्य युद्ध एवं सैन्य अभियानों विदेश जातियों के आक्रमण विभिन्न प्रकार की बीमारियों आदि के कारण विजय विविधता प्रभावित हुई है खाड़ी युद्ध के दौरान तेल के कुओं में आग लगने के कारण मध्य एशिया में भी कई पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हुए हैं

हाल ही में वर्ल्ड फ्लू बीमारी के कारण कुक्कुट प्रजातियां एवं अन्य प्रजातियां प्रभावित हुई थी इसके अलावा हमारे देश में विदेशी प्रजातियां जैसे यूकेलिप्टस आर्जीमोन मैक्सी कान्हा जलकुंभी विदेशी बबूल इत्यादि बादलों के कारण यहां की मूल वनस्पति भी अत्यधिक प्रभावित हुई है

अवैध शिकार (Poaching)

वन्यजीवों के संकटग्रस्त एवं विलुप्त होने का एक अन्य मुख्य कारण वन्यजीवों का अवैध शिकार है मानव सदियों से अपने भोजन पदार्थ के रूप में जानवरों का शिकार करता रहा है भोजन के अतिरिक्त मानव जानवरों से सौंदर्य प्रसाधन प्राप्त करने चमड़े की वस्तुएं बनाने फर उन आदि के लिए वन्य जीवों का शिकार करता है

वर्षा पूर्व जहां हिमालय क्षेत्र थार रेगिस्तान उत्तर भारत का मैदान दक्षिण पठारी प्रदेश वन्यजीवों की विलुप्त संपदा से भरे पड़े थे वही वर्तमान स्थिति यह है कि वन्य जीव केवल राष्ट्रीय उद्यानों एवं अभयारण्यों में ही सिमट कर रह गए हैं

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अत्याधिक कीमत मिलने के कारण भी http://वन्यजीवों का अनाधिकृत शिकार किया जाता है

हाथी का शिकार हाथी दांत के लिए शेर बाघ आदि का शिकार उनकी खाल हड्डी नाखूनों के लिए मगरमच्छ कछुआ कोबरा आदि का शिकार उनकी खाल के लिए कस्तूरी मिर्ग का शिकार कस्तूरी प्राप्त करने के लिए किया जाता है इनके उत्पादन से कई तरह की दवाइयां इत्र इत्यादि बनाए जाते हैं

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