Wisdom शिक्षा मनोविज्ञान- बुद्धि

बुद्धि की परिभाषा ( Definition of intelligence )

थार्नडाइक के अनुसार “उत्तम क्रिया करने तथा नई परिस्थितियों के साथ समायोजन करने की योग्यता को बुद्धि कहते हैं।”

थॉमसन के अनुसार- “बुद्धि वंशपरम्परागत प्राप्त विभिन्न गुणों का योग है।”

वेस्लर के मत में – “बुद्धि व्यक्ति की क्षमताओं का वह समुच्चय है जो उसकी ध्येयात्मक क्रिया, विवेकशील चिंतन तथा पर्यावरण के प्रभाव से समायोजन कराने में सहायक होती है।”

स्टोडार्ड के मतानुसार “बुद्धि (क) कठिनता (ख) जटिलता (ग) अमूर्तता (ड.) आर्थिकता (च) उद्देश्य प्राप्यता (छ) सामाजिक मूल्य तथा (ज) मौलिकता से सम्बंधित समस्याओं को समझने की योग्यता है।”

बुद्धि लब्धि का मान एवं अर्थ ( Meaning of wisdom )

  • 140 या उससे उपर प्रतिभाशाली
  • 120 से 139 अतिश्रेष्ठ
  • 110 से 119 श्रेष्ठ
  • 90 से 109  सामान्य
  • 80 से 89 मन्द
  • 70 से 79 सीमान्त मंदबुद्धि
  • 60 से 69 मंदबुद्धि
  • 20 से 59 हीनबुद्धि
  • 20 से कम जड़बुद्धि

बुद्धि_का मापन ( Measurement of intelligence )

बुद्धि परिक्षण के निर्माण का पहला प्रयास फ्रांसीसी मनोवैज्ञानिक अल्फ्रेड बिने ने 1905 में किया बिने को_बुद्धि लब्धि के विचार का जनक माना जाता है

1908 में बिने ने साइमन के सहयोग से बिने साइमन परीक्षण का विकास किया  स्टर्न ने 1912 में मानसिक लब्धि की बात कहीं,  

टरमन के अनुसार एक व्यक्ति गसी अनुपात में बुद्धिमान है जिस अनुपात में वह अमूर्त चिंतन करने योग्य है  टरमन ने बुद्धि लब्धि का ज्ञात करने के लिए सूत्र में 100 का गुणा कर दिया

बुद्धि_लब्धि =  ( मानसिक आयु / वास्तविक आयु ) X 100 

बुद्धि_के प्रकार ( Types of intelligence )

ई. एल. थार्नडाइक ने_बुद्धि के तीन प्रकार बतलाये है।

  1. सामाजिक_बुद्धि ( Social intelligence  )
  2. अमूर्त_बुद्धि ( Intangible intelligence )
  3. मूर्त_बुद्धि ( Tangible intelligence )

बुद्धि

अधिगम पठार

सीखते समय या अधिगम करते समय जब हमारी सीखने की गति अचानक रुक जाती है तो इसे अधिगम का पठार कहते है

जब अधिगम की दर में लंबे समय तक स्थिरता की स्थिति हो अर्थात ना तो अधिगम वक्र में चढ़ाव आ रहा है और ना अधिगम वक्र में उतारा रहा है इस स्थिरता को अधिगम पठार कहते हैं

यह अधिगम का पठार नई चीजों को सीखने में ; एक अवस्था से दूसरी अवस्था में सीखने पर ; काम की जटिलता होने पर ; रुचि का अभाव थकान कार्य की उदासीनता ; गलत आदतों से सीखने पर आदि कारणों से होता है