आनुवंशिकता और विकास

आनुवंशिकता

आनुवंशिकी जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत आनुवंशिकता तो जीवों की विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है प्रत्येक सजीव प्राणी का निर्माण मूलभूत कोशिकाओं द्वारा हुआ है इन कोशिकाओं कुछ गुणसूत्र पाए जाते हैं जिनकी संख्या प्रत्येक जाति में निश्चित होती है कितने गुणसूत्र कहते हैं माला के मोतियों की भाति ही कुछ DNA की रसायनिक इकाइयां पाई जाती है जिन्हें जिन कहते हैं

माता पिता के गुण संतति में आना ही आनुवांशिकता कहलाता है

अनुवांशिकी शब्द का प्रतिपादन विलियम बेट्सन ने किया, आनुवंशिकता की खोज ऑस्ट्रिया के निवासी ग्रेगर जॉन मेंडल ने की थी उन्हें अनुवांशिकता का पिता कहा जाता है, मेंडल ने अनुवांशिकता का प्रयोग मटर के पौधे पर किया था, मटर के पौधे का वानस्पतिक नाम पाइसम सटाइवम है 

डब्ल्यू वाटसन ने 1905 में सर्वप्रथम जेनेटिक्स नाम का उपयोग किया। जोहानसन ने 1909 में सर्वप्रथम जीन शब्द का प्रयोग किया।

फीनोटाइप ( Phenotype ) – जीवधारी के दो लक्षण प्रत्यक्ष रुप से दिखाई पड़ते हैं उन्हें फीनोटाइप कहते हैं।

जीनोटाइप ( Genotype )- जीवधारी के अनुवांशिक संगठन को उसका जीनोटाइप कहते हैं जो की कारकों (जीन) का बना होता है ।

अनुवांशिक गुणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आने के लिए गुणसूत्र जिम्मेदार है जिसमे जीन उपस्थित होते हैं

गुणसूत्रों में पाए जाने वाले अनुवांशिक पदार्थ को जीनोम कहते हैं । गुणसूत्रों के बाहर जीन यदि कोशिका द्रव्य के कोशिकाओं में होती है तो उन्हें प्लाज्माजीन कहते हैं।

मेंडल के नियम ( Mendel’s Laws )

मेंडल के तीन नियम हैं –

1. प्रभाविता का नियम ( Rule of effectiveness ) – एक जोड़ा विपर्याय गुणों वाले शुद्ध माता या पिता में संकरण करने से प्रथम पीढ़ी में प्रभावी गुण प्रकट होते हैं जबकि अप्रभावी गुण छुप जाते हैं प्रथम पीढ़ी में केवल प्रभावी गुण ही दिखाई देता है लेकिन अप्रभावी गुण उपस्थित अवश्य रहता है यह गुण दूसरी पीढ़ी में प्रकट होता है

जब F1 पीढ़ी का संकरण अप्रभावी जनक से कराया जाता है तो उसे परीक्षण संकरण कहते हैं जब F1 पीढ़ी का संकरण दोनों जनको में से किसी एक जनक से कराया जाता है तो उसे संकर पूर्वज संकरण कहते हैं।

2. पृथक्करण का नियम ( Rule of separation ) – लक्षण कारको ( जीनो ) के जोड़ों के दोनों कारक युग्म बनाते समय पृथक पृथक हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में 1 लक्षण के लिए एक युग्मविकल्पी पाया जाता है। इस नियम को युग्मों को  शुद्धता का नियम भी कहते हैं ।

3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम ( Rule of independent Observation) – नियम के अनुसार दो या दो से अधिक जीन युग्म साथ रहते हुए भी एक दूसरे के प्रति स्वतंत्र व्यवहार करते हैं। जब 2 जोड़ी पर विपरीत लक्षणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है तो दोनों लक्षणों का पृथक्करण स्वतंत्र रूप से होता है एक लक्षण की वंशानुगति दूसरे को प्रभावित नहीं करती गुणसूत्र का नामकरण डब्ल्यू वाल्डेयर ने 1888 ईस्वी में किया था।

मेंडल के अनुसार एक संकर संकरण की F2 पीढ़ी का लक्षण प्रारूप अनुपात 3:1 तथा जीन प्रारूप अनुपात 1:2:1 प्राप्त होता है। द्वि संकर संकरण की F2 पीढ़ी का लक्षण प्रारूप अनुपात 9:3:3:1तथा जीन प्रारूप अनुपात 1:2:2:4:1:2:1:2:1 प्राप्त होता है।

जैव विकास ( Biodiversity )

कालांतर में हुए जीवों के विकास की प्रक्रिया को ही जैव विकास कहते है । इस प्रक्रिया में हजारों-लाखों वर्षों का समय लगता है और एक नई जाति की उत्पत्ति होती है ।

जाति उदभव ( Origin of Species ) –  विकासीय प्रक्रिया के दौरान नई जाति की उत्पत्ति होना , जाति उदभव कहलाता है । जाति की उत्पत्ति या उदभव में निम्न कारक सहायक या उत्तरदायी होते है –

  1. उत्परिवर्तन ( Mutation )
  2. आनुवांशिक विचलन (Genetic deviation )
  3. पुनर्मिलन ( Reunion )
  4. संकरण ( Hybridization )
  5. पृथक्करण ( Separation )

उत्परिवर्तन ( Mutation )- जीवों के DNA या जीन्स में होने वाले ऐसे परिवर्तन जो विकास में सहायक होते है ,उन्हें उत्परिवर्तन कहते है ।

अभिलक्षण ( Phenotype )- बाह्य आकृति अथवा व्यवहार का विवरण अभिलक्षण कहलाता है ।

समजात अंग ( Homologous ) –  ऐसे अंग जिनकी उत्पत्ति या उदभव समान हो लेकिन कार्य में भिन्न-भिन्न हो , समजात अंग कहलाते है । उदा. 

  • मानव , व्हेल , चमगादड़ , चीता आदि के अग्रपाद
  • बोगनविलिया के कांटे व कुकुरबिटा के प्रतान

समवृति अंग ( Solitary organ ) –  ऐसे अंग जो उत्पत्ति या उदभव में भिन्न-भिन्न हो लेकिन कार्य में समान हो , समवृति अंग कहलाते है ।उदा. 

  • चमगादड़ व कीट के पंख
  • शकरकंदी ( मूल रूपांतरण ) व आलू ( तना रूपांतरण )

जीवाश्म (Fossil ) –  कालांतर में चट्टानों के या भूमि के अंदर दबे जीवों के मृत परिरक्षित अवशेष या उनकी छाप , जीवाश्म कहलाते है ।

Number of chromosomes in organisms ( जीवो में गुणसूत्रों की संख्या )

  • मनुष्य -46
  • घोड़ा-64
  • चिंपैंजी- 48
  • एस्केरिस-02
  • घरेलू मक्खी -12
  • मच्छर-06
  • मेंढक -26
  • कबूतर – 80
  • खरगोश-44
  • कुत्ता -78
  • बिल्ली38
  • मक्का-20
  • तंबाकू-48
  • टेरिडोकाइट्स-1300-1600
  • नींबू -18,36
  • आलू -48
  • टमाटर-24
  • गेहूं -42
  • मटर -14
  • प्याज-16