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Psychology

January 3, 2021

मनोविज्ञान की उत्पत्ति, अर्थ एवं क्षेत्र क्या है?

मनो_विज्ञान की उत्पत्ति अर्थ एवं क्षेत्र के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे ! मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई व मनोविज्ञान का अर्थ क्या है और इसके क्षेत्र कौन-कौन से हैं इन सब के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे यह टॉपिक बहुत ही महत्वपूर्ण है इसलिए आप इस टॉपिक को ध्यान से पढ़ें!

मनो_विज्ञान की उत्पत्ति, अर्थ एवं क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु –

  • मनोविज्ञान की उत्पत्ति ईसा पूर्व 4 सदी में मानी जाती है!
  • मनो_विज्ञान का जनक अरस्तु को माना जाता है।
  • कॉल सैनिक के अनुसार मनोविज्ञान का वास्तविक जनक प्लेटो को माना जाता है।
  • प्राचीन मनो-विज्ञान का

September 29, 2020

Wisdom शिक्षा मनोविज्ञान- बुद्धि और अधिगम पठार

Wisdom शिक्षा मनोविज्ञान- बुद्धि

बुद्धि की परिभाषा ( Definition of intelligence )

थार्नडाइक के अनुसार “उत्तम क्रिया करने तथा नई परिस्थितियों के साथ समायोजन करने की योग्यता को बुद्धि कहते हैं।”

थॉमसन के अनुसार- “बुद्धि वंशपरम्परागत प्राप्त विभिन्न गुणों का योग है।”

वेस्लर के मत में – “बुद्धि व्यक्ति की क्षमताओं का वह समुच्चय है जो उसकी ध्येयात्मक क्रिया, विवेकशील चिंतन तथा पर्यावरण के प्रभाव से समायोजन कराने में सहायक होती है।”

स्टोडार्ड के मतानुसार “बुद्धि (क) कठिनता (ख) जटिलता (ग) अमूर्तता (ड.) आर्थिकता (च) उद्देश्य प्राप्यता (छ) सामाजिक मूल्य तथा (ज) मौलिकता से सम्बंधित समस्याओं को समझने की योग्यता है।”

बुद्धि

September 29, 2020

Psychology Introduction मनोविज्ञान का परिचय

मनोविज्ञान का परिचय

मनोविज्ञान का_परिचय

मनोविज्ञान_को शताब्दियों पूर्व ” दर्शन शास्त्र ” कि एक शाखा केरूप मे माना जाता था । मनोविज्ञान को स्वतंत्र विषय बनाने के लिए इसे परिभाषित करना शुरू किया ।

PSYCHOLOGY शब्द कि उत्पत्ति लैटिन भाषा के दो शब्दो PSYCHE+LOGOS से मिलकर हुई हैं, PSYCHE का अर्थ होता है ” आत्मा का” तथा LOGOS का अर्थ होता हैं “अध्ययन करना ” 

इस शाब्दिक अर्थ के आधार पर सर्वप्रथम प्लेटो, अरस्तु और डेकार्ट के द्वारा मनोविज्ञान को ” आत्मा का विज्ञान ” माना गया ।

आत्मा शब्द की स्पष्ट व्याख्या नहीं होने के कारण 16वीं शताब्दी के …

August 13, 2020

विशिष्ट बालकों की पहचान Specific Children???

विशिष्ट शिक्षा -किसी कक्षा में विभिन्न तरह के बच्चे होते हैं जिनकी अपनी-अपनी आवश्यकताएँ हो सकती हैं। जैसे – कुछ बच्चे अक्षरों को उल्टा लिखते हैं, कुछ की श्रवण शक्ति कम होती हैं, कुछ मंद बुद्धि वाले होते हैं। सभी बच्चे सामान्य गति से नहीं सीख पाते हैं। कुछ बच्चों का उच्चारण स्पष्ट नहीं होता है जिसके कारण इन बच्चों का विकास एवं दैनिक कार्यशीलता प्रभावित होती है।

अधिगम अक्षम बालक  Learning disabled child )

  • औसत विद्यालय उपलब्धि से निम्न का प्रदर्शन
  • निष्पादन संबंधी कठिनाई से युक्त।
  • बिना सोचे – विचारे कार्य करना
  • उपयुक्त आचरण नहीं करना
  • निर्णयात्मक क्षमता का

August 7, 2020

Personality Meaning and Theory व्यक्तित्व अर्थ सिध्दांत

व्यक्तित्व – अर्थ सिध्दांत

व्यक्तित्व के सिद्धांत ( Principles of personality )

मनोविश्लेषण सिद्धांत ➖फ्रायड
आत्मज्ञान का सिद्धांत ➖हर्ज वर्ग मास्लो
रचना का सिद्धांत➖ शेल्डन
आलपोर्ट का सिद्धांत ➖आलपोर्ट
नव फ्रायड सिद्धांत ➖ एरिक्सन एरिक्फ्राम
जीव सिद्धांत ➖गोल्डस्टीन

एब्राहम मैसलो: व्यक्तित्व का मानवतावादी सिद्धान्त ( Abraham Misllo: The Humanitarian Principle of Personality )

एब्राहम मैसलो मानवतावादी मनोविज्ञान के आध्यात्मिक जनक माने गए है।
मैसलो ने अपने व्यक्तित्व सिद्धान्त में प्राणी के अनूठापन का उसके मूल्यों के महत्व पर तथा व्यक्तिगत वर्धन तथा आत्म निर्देश की क्षमता पर सर्वाधिक बल डाला है।
इस बल के कारण ही उनका मानना है कि सम्पूर्ण प्राणी …

August 6, 2020

एक शिक्षक के लिए सीखने और शिक्षार्थी के विकास

एक शिक्षक के लिए सीखने और निहितार्थ सिद्धांतो, सीखने के हस्तांतरण, शिक्षा, रचनावादी सीखने प्रभावित करने वाले कारक

अधिगम या प्रशिक्षण के स्थानांतरण का सामान्य अर्थ- “ किसी एक परिस्थिति में अर्जित ज्ञान, आदित्य दृष्टिकोणों अथवा अन्य अनुप्रयोग का किसी अन्य परिस्थिति में प्रयोग करना”

अधिगम स्थानांतरण की महत्वपूर्ण परिभाषाएं-

सौरेंसन – “ स्थानांतरण एक परिस्थिति में अर्जित ज्ञान, प्रशिक्षण और आदतों का दूसरी परिस्थिति में स्थानांतरित किए जाने की चर्चा करता है|”

कार्लसनिक- ” स्थानांतरण पहली परिस्थिति में प्राप्त ज्ञान, कौशल, आदित्य, दृष्टिकोण हो या अन्य क्रियाओं का दूसरी परिस्थिति में अनुप्रयोग करना है|”

इन सभी के द्वारा हम स्पष्ट …

August 5, 2020

Principles of Accretion अभिवृद्धि और विकास का सिद्धान्त

अभिवृद्धि और विकास का सिद्धान्त

अभिवृद्धि

विकास सभी के लिए समान है विकास सामान्य से विशिष्ट की ओर होता है विकास सत्तत् होता है विकास कि गति भिन्न होती है विकास समग्रता से विभेदीकरण की ओर होता है विकास मे सहसंबन्ध होते है

बाल- विकास के सिद्धांत-

  • सतत विकास का सिद्धांत-हरलोक(विकास निरन्तर चलता रहता है। गर्भाधान से मर्रतु तक)
  • अंगों की गति में भिनता का सिद्धांत-सिर का विकास पहले ,हाथ पैर का अंत मे।
  • अवस्थाओ में गति की भिन्नता का सिद्धांत-शेश्वावस्था व किशोरावस्था में तीव्र होता है
  • वंशानुक्रम व वातावरण की अंत: किर्या का सिद्धांत-विकास= वंशानुक्रम x वातावरण  

बालक के

August 2, 2020

Child Development बाल विकास केसे होता है???

Child Development बाल विकास

बाल विकास

बाल_विकास (या बच्चे का विकास), बच्चे के जन्म से लेकर किशोरावस्था के अंत तक उनमें होने वाले जैविक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों को कहते हैं। ये विकासात्मक परिवर्तन काफी हद तक आनुवंशिक कारकों और घटनाओं से प्रभावित हो सकते हैं इसलिए आनुवंशिकी और जन्म पूर्व  विकास को आम तौर पर बच्चे के विकास के अध्ययन के हिस्से के रूप में शामिल किया जाता है।

बाल_मनोविज्ञान का जनक पेस्टालॉजी को माना जाता है

बाल_मनोविज्ञान की परिभाषाएं ( Child psychology definitions )

क्रो एंड क्रो बाल मनोविज्ञान गर्भाधान काल से लेकर पूर्व किशोरा तक सभी प्रकार के व्यवहारों का करता …

August 1, 2020

Education Planning Unit शिक्षण की योजना व दैनिक पाठ योजना

शिक्षण की योजना, इकाई व दैनिक पाठ योजना

शिक्षण

रमन बिहारी लाल के अनुसार- ” किसी 1 घंटे के लिए निश्चित अंश को प्रारंभ करने के पहले हम उनके लिए निश्चित पाठ्य वस्तु का विश्लेषण कर उसके शिक्षण के लिए एक योजना बनाते हैं इसी को दैनिक पाठ योजना कहते हैं।”

दैनिक पाठ योजना का महत्व ( Importance of daily text plan )–

दैनिक पाठ योजना द्वारा शिक्षण को उद्देश्यनिष्ठ बनाया जा सकता है पाठ योजना द्वारा शिक्षक के सफल शिक्षण के लिए पूर्व विचार एवं चिंतन का अवसर मिलता है इसके द्वारा स्थाई ज्ञान की प्राप्ति होती है

पाठ योजना …

July 4, 2020

Education Psychology शिक्षा मनोविज्ञान

शिक्षा मनोविज्ञान

शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ एवं परिभाषा वा शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति

शिक्षा मनोविज्ञान

शिक्षा के ही द्वारा मनुष्य प्राणी से इंसान या सामाजिक “प्राणी” बनता है। इससे मनुष्य का शारीरिक,संवेगात्मक, मानसिक तथा शारीरिक विकास होता है ।

मनोविज्ञान के इतिहास के प्रारंभिक काल में इसे आत्मा का ज्ञान अथवा विज्ञान माना जाता था इसके बाद इस अर्थ को पूर्ण रुप से त्याग कर मनोविज्ञान को मन के विज्ञान के रूप में स्वीकार किया जाने लगा लेकिन कुछ समय बाद यह धारणा भी गलत सिद्ध हुई

इसके विभिन्न कारण थे वास्तव में मान कोई मूर्त वस्तु नहीं है मन …