Category

Modern History

May 25, 2020

भारत में राष्ट्रवाद का उदय और विकास/Rise of Indian Nationalism

राष्ट्रवाद-Nationalism राष्ट्रवाद वह भावना है। जो लोगों को एक साथ एकता के सूत्र में बांधती है व स्वराज के प्रति एक ठोस आधार प्रदान करती है। यह लोगों में चेतना प्रदान करने में समाज सुधार को, राष्ट्रवादी नेताओं, व राजनीतिक संस्थाओं, शिक्षा प्रणाली आदि तत्वों का योग रहा है।

कुछ महत्वपूर्ण शब्द

  • राष्ट्रवाद
  • समाज सुधारक
  • शिक्षा प्रणाली
  • समाचार पत्र
  • राष्ट्रीय आंदोलन

भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण और विकास- CAUSES OF THE RISE OF NATIONALISHM

  • भारत में राष्ट्रीय उदय के कारण और विकास में अनेक कारणों का योग रहा है। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इन कारणों को निम्नलिखित भागों में बांटा गया है जो कि निम्न प्रकार से है। :-

आर्थिक नीतियां

  • 1901 ईस्वी में रमेशचंद्र दत्त ने इकोनॉमिक्स हिस्ट्री ऑफ इंडिया नामक पुस्तक लिखी थी। जिसमें 3 चरणों का उल्लेख किया गया था। इन तीनों चरणों में अंग्रेजों ने भारत का आर्थिक शोषण किया।

(A). सीधी लूट (1757-1813) :-

  • प्लासी के युद्ध में विजय के पश्चात बंगाल में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन स्थापित हो गया था।
  • कंपनी अब बंगाल के नवाब को बनाने लगी थी इसके बदले हमसे अत्यधिक रिश्वत लेने लगी तथा व्यापार में भी हिस्सेदारी मांगने लगी।
  • कंपनी कम कीमत में सूती रेशमी वस्त्र व गर्म मसालों को खरीद कर इंग्लैंड व यूरोप के बाजारों में महंगी कीमत पर बेचने लगी। जिससे कंपनी की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई।
  • इसी चरण में इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति हो चुकी थी। मशीनों से उत्पादन अधिक होने लगा इसलिए वहां के पूंजीपतियों ने वहां की सरकार पर दबाव डाला कि उन्हें भी भारत में व्यापार करने की अनुमति दी जाए।

(B). स्वतंत्र व्यापारिक पूंजीवाद (1813-1858) :-

  • 1813 के चार्टर में ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया था कंपनी को केवल चाय व चीन देश के साथ व्यापार पर एकाधिकार रहा।
  • इस चरण में इंग्लैंड की कई कंपनियां भारत आई। यहा से कच्चा माल इंग्लैंड ले जाकर उत्पाद के रूप में परिवर्तित करती और पुन: भारत लाकर बेच दिया जाता था
  • इसी चरण में भारत का हथकरघा उद्योग समाप्त हो गया। क्योंकि भारतीय बुनकरों के पास कच्चा माल ही उपलब्ध नहीं हो पाया।
  • बंगाल के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिंग ने कहा था कि भारतीय बुनकरों की हड्डियां भारत के मैदानों में बिखरी पड़ी हैं।
  • इसी चरण में 1857 की क्रांति हो चुकी थी।

(C). वित्तीय पूंजीवाद (1858-1940) :-

  • 1 नवंबर 1958 को ईस्ट इंडिया का शासन समाप्त कर दिया गया था।
  • भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन को सौंपा गया तथा इसमें यह भी लिखा गया कि क्राउन भारत का शासन इंग्लैंड की संसद के द्वारा चलाएगा।
  • इसी चरण में इंग्लैंड की सरकार ने वहां के पूंजीपतियों को प्रस्ताव दिया। भारत में निवेश करने पर 5% शुद्ध लाभ की गारंटी दी जाएगी अत: कई निवेशकों ने भारत में निवेश किया।
  • सर्वाधिक निवेश रेलवे में किया गया इसके अलावा निम्न क्षेत्रों में निवेश किया गया :-
  • बीमा
  • बैंकिंग
  • मेडिकल
  • जॉन सुलीववान ने कहा था कि हमारी व्यवस्थाए स्पंज की तरह काम करती है जो गंगा नदी से सभी अच्छी वस्तु को सौंप कर टेम्स (लंदन) के किनारे निचोड़ देती है।

धन निष्कासन का सिद्धांत :-

  • सर्वप्रथम दादा भाई नौरोजी ने 1867-68 में लिखे गए अपने लेख”England Debit to India” मैं धन निष्कासन का सिद्धांत दिया था। तथा इसकी विस्तारित व्याख्या अपनी पुस्तक” पॉवरटी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया”में की थी।
  • इसके अलावा दादा भाई नौरोजी ने ऑन द कॉमर्स ऑफ इंडिया तथा The wants and means rule in India नामक पुस्तक लिखी।
  • रमेशचंद्र दत्त ने इस धन के निष्कासन को”भारतीयों के सीने पर एक बहता हुआ घाव बताया”
  • 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इस धन निष्कासन के सिद्धांत को मान्यता दी गई।

2. कृषि पर प्रभाव

  • भारत में राष्ट्रवाद के उदय और विकास से कृषि पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े जो कि निम्न प्रकार से है आइए इन्हें देखते हैं। :-

(A). स्थाई बंदोबस्त :-

  • 1793 में इसे कार्नवालिस के द्वारा निम्न क्षेत्रों में लागू किया गया। :-
  • बंगाल
  • बिहार
  • उड़ीसा
  • वाराणसी
  • उत्तरी कर्नाटक के जिले
  • यह ब्रिटिश भारत के 19% भूभाग पर विस्तृत थी इसमें 1/11 भाग जमीदार को व 10/11 भाग कंपनी को मिलता था।
  • इस व्यवस्था में सूर्यस्त कानून था। अगर जमीदार समय पर राजस्व जमा नहीं करवा पाता था तो उससे जमीदारी छीन ली जाती थी।
  • सबसे ऊंची बोली लगाने वाले जमीदार को जमीदारी शॉप दी जाती थी।
  • राजा राममोहन राय ने इसका समर्थन किया था।

(B). रैयतवाड़ी :-

  • इसमें रैयत अर्थात किसान के साथ समझौता किया जाता था।
  • ब्रिटिश भारत के 57 परसेंट भूभाग पर विस्तृत थी इसमें उपज का 33 से 55 परसेंट वसूल किया जाता था।
  • सर्वप्रथम 1792 में कैप्टन रीड ने इसे तमिलनाडु के बारामहल जिले में लागू किया था।
  • मुंबई में एलफिंसटन व मद्रास में मुनरो के द्वारा इसे लागू किया गया।

(C) महालवाड़ी :-

  • इसमें गांव के समूह के साथ समझौता किया गया।
  • ब्रिटिश भारत के 30 परसेंट भूभाग पर विस्तृत थी व उपज का 66 परसेंट वसूल किया जाता था।
  • इसे आगरा, अवध, पंजाब के क्षेत्रों में लागू किया गया।
  • उत्तरी भारत की कृषि व्यवस्था का जनक Martin बर्ड को माना जाता है ।

3. प्रशासनिक नीतियां :-

  • 1857 की क्रांति में हिंदुओं तथा मुसलमानों ने समान रूप से भाग लिया।इसके बाद अंग्रेजों ने मुसलमानों के प्रति तुष्टीकरण की नीति अपनाई।
  • William hunter ने अपनी पुस्तक”इंडियन मुसलमान मैं लिखा है कि-अगर अंग्रेजों को भारत में लंबे समय तक राज्य करना है तो मुसलमानों को अपने पक्ष में करना होगा।
  • अंग्रेजों ने सैयद अहमद आगा खां को मुसलमान का नेतृत्व सौंपा
  • इन्होंने 1875 में अलीगढ़ स्कूल खुलवाकर दी तथा 1877 में इसे कॉलेज बना दिया गया।
  • आरचीबोल्ड इसी कॉलेज के प्रिंसिपल थे जिन्होंने पृथक निर्वाचन क्षेत्र का प्रारूप तैयार किया था। इसी प्रारूप को लेकर अक्टूबर 1906 को सैयद अहमद आगा खां के नेतृत्व में कुछ मुस्लिम प्रतिनिधि शिमला गए तथा वायसराय मिंटो-ll से मुलाकात की व मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र मांगा।

मार्ले मिंटो अधिनियम 1909

  • 1909 के मार्ले मिंटो अधिनियम में मुसलमानों को पृथक निर्वाचन क्षेत्र प्रदान कर दिया गया।
  • मार्ले इस समय भारत सचिव था तथा इसने वायसराय मिंटो को पत्र भी लिखा था की हम चांगदल के बीज बो रहे हैं इसके परिणाम अत्यंत घातक होंगे।
  • 1876 के शाही राजसी अधिनियम के तहत इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को भारत की महारानी घोषित किया गया।
  • इस कारण से 1877 में वायसराय लिंटन ने दिल्ली के दरबार का आयोजन किया, जिस पर बहुत अधिक पैसा खर्च किया गया था जबकि इस समय भारत में अकाल की स्थिति थी।

वर्नाकुलर प्रेस एक्ट :-

1878 में लिटन ने वर्नाकुलर प्रेस एक्ट लागू किया जिसके तहत देसी भाषाओं के समाचार पत्रों को सेंसरशिप लागू कर दी गई। अर्थात इस समाचार पत्र को प्रकाशित होने से पहले सरकार के पास भेजा जाता था अगर शासन विरोधी कोई बात लिखी होती तो इसका प्रकाशन नहीं हो पाता था।

  • 1883 में वायसराय रिपन के समय मुख्य न्यायाधीश इल्बर्ट ने एक बिल पारित किया इसके अनुसार कोई भी भारतीय न्यायधीश किसी भी यूरोपीय व्यक्ति के मुकदमे की सुनवाई कर सकता था।
  • इसका संपूर्ण यूरोप में विरोध हुआ और इल्बर्ट को अपना बिल वापस लेना पड़ा।

4. जातीय भेदभाव :-

  • जातीय भेदभाव की भावना ने भारतीयों को राष्ट्रीय रूप में एक होने को प्रेरित किया। जातिभेद के आधार पर अंग्रेज भारतीयों से घृणा करते थे और उनके साथ बुरा व्यवहार करते थे
  • अंग्रेज केवल अपने कोई नहीं बल्कि समस्त यूरोपीय जाति को एशियाई जाति से ऊंचा मानते थे तथा वे चाहते थे कि भारतीय भी इस बात को स्वीकार करें अंग्रेज जातीय और सांस्कृतिक रूप से ऊंचे हैं। इस व्यवहार के कारण ही भारतीयों को एक होने को मजबूत किया था।

महत्वपूर्ण सूचना

ठीक है दोस्तों आपका http://भारतीय राष्ट्रवाद का उदय और विकास से संबंधित टॉपिक कंप्लीट हुआ मैंने आपको अच्छे से बेहतर से बेहतर कंटेंट दिया है

आप ध्यान से पढ़ें और यदि आपको यह कंटेंट अच्छा लगे तो इसे अपने दोस्तों को भी फॉरवर्ड करें धन्यवाद।

भारतीय राष्ट्रवाद

May 24, 2020

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन क्या है विस्तार से जाने?PART-2

राष्ट्रीय आंदोलन

भारत का राष्ट्रीय आंदोलन 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रारंभ हो गया था स्वतंत्रता किस राष्ट्रीय आंदोलन में लाखों लोगों एवं राष्ट्रवादी नेताओं ने सक्रिय रूप से भाग लेकर शक्तिशाली अंग्रेजी शासन को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया और अतः इन्हें देश छोड़कर जाना पड़ा ।

भारत में राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय आंदोलन के विकास की प्रक्रिया बड़ी जटिल एवं बहुमुखी है

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्भव और विकास में अनेक कारणों का योग रहा है आइए इन कारणों को देखते हैं :-

साइमन कमीशन

  • एक्ट 1919 की धारा 84A. लिखा गया कि इस एक्ट के कारण भारत में उत्तरदायी सरकार की स्थापना कितना प्रयास हुआ
  • इसके लिए 10 वर्षों के पश्चात एक कमीशन भारत भेजा जाएगा।
  • इस समय इंग्लैंड में कंजरवेटिव पार्टी के प्रधानमंत्री बाल्डविन की सरकार थी
  • जिन्हें इस बात का डर था की 1928 इंग्लैंड में होने वाले चुनाव में लेबर पार्टी सत्ता में आ सकती है।
  • इसलिए 1927 में जॉन साइमन की अध्यक्षता में 7 सदस्यों वाली साइमन कमीशन का गठन किया गया।
  • भारत के वायसराय इरविन की सलाह पर इसमें किसी भारतीयों को शामिल नहीं किया गया इसलिए इसे श्वेत कमीशन भी कहा गया।
  • इसके सातों सदस्य अंग्रेज थे
  • क्लीमेंट एटली इसी का एक सदस्य था भारत की स्वतंत्रता के समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री के पद पर 3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन भारत पहुंचा।
  • साइमन कमीशन दो बार भारत आया :-
  • फरवरी-March 1928
  • October 1928-अप्रैल 1929
  • जब साइमन कमीशन दूसरी बार भारत आया तब लाहौर में हुए विरोध प्रदर्शन के समय लाला लाजपत राय लाठीचार्ज में 30 अक्टूबर 1928 को घायल हो गए।
  • 17 नवंबर 1928 को लालजी की मृत्यु हो गई।
  • लाला लाजपत राय ने कहा था कि” मेरे शरीर पर पड़ी प्रत्येक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।
  • साइमन कमीशन जब प्रथम बार भारत आया था उस समय इसके विरोध के कारण भारत सचिव वीकैनहाइड ने भारतीयों को स्वय का संविधान बनाने की चुनौती दी।
  • मोतीलाल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई जिसने भारत के लिए प्रथम संविधान लिखा।
  • 10 अगस्त 1928 को नहेरू रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया इसमें मांगे थी!

प्रमुख मांगे

  • भारत को डोमिनियन स्टेट (औपनिवेशिक राज्य) का दर्जा इसका अर्थ है
  • रक्षा विभाग संचार व विदेश विभाग इंग्लैंड के पास रहे बाकी मामले में भारत को स्वतंत्र कर दिया जाए !
  • केंद्र में द्विसदनात्मक प्रणाली लागू की जाए।
  • भाषा के आधार पर प्रांतों को गठन हो।
  • शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच।
  • मूल अधिकार 19, व्यस्क मताधिकार,
  • सिंध को मुंबई से अलग प्रांत बनाया जाए।

जिन्ना की चार मांगे

  • पृथक निर्वाचन को समाप्त करके संयुक्त निर्वाचन लागू किया जाए।
  • केंद्र में मुसलमानों को 1/3 आरक्षण दिया जाए।
  • जिन स्थानों पर मुस्लिम आबादी अधिक है वहां उन्हें आरक्षण दिया जाए।
  • सिंध बलूचिस्तान मुस्लिम प्रांत बनाया जाए परंतु इसका हिंदू महासभा के द्वारा विरोध किया गया।

इस कारण से मोहम्मद सफी के नेतृत्व में मुस्लिम लीग के कुछ कार्यकर्ता साइमन कमीशन के सदस्य बन गए अन्यथा जब पहली बार साइमन कमीशन आया तब मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया था।

उस समय साइमन कमीशन मद्रास की जस्टिस पार्टी, पंजाब की यूनियनिस्ट पार्टी, बंगाल की कृषक प्रजा पार्टी, अंबेडकर की डिस्प्लेस क्लास एसोसिएशन साइमन कमीशन का समर्थन किया।

नहरू

  • दिसंबर 1928 को कांग्रेस का अधिवेशन कोलकाता में मोतीलाल तेजावत की अध्यक्षता में हुआ।
  • नेहरू रिपोर्ट को लागू करने के लिए सरकार को 1 वर्ष का समय दिया गया।
  • दिसंबर 1929 में कांग्रेस का अधिवेशन लाहौर में हुआ। और इसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
  • नेहरू जी को कांग्रेस का प्रथम समाजवादी अध्यक्ष मानते हैं।
  • नेहरु जी ने पूर्ण स्वराज की मांग की।
  • सरकार को पुनः एक माह का समय दिया गया तथा नेहरू रिपोर्ट लागू न करने पर 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने आधुनिक भारत के इतिहास को प्रथम पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
  • गांधी जी ने यंग इंडिया नामक समाचार पत्र के माध्यम से वायसराय इरविन के समक्ष 11 मांगे रखी जिन पर इरविन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
  • गांधीजी ने कहा कि” मैंने रोटी मांगी थी और मुझे पत्थर मिले।

सविनय अवज्ञा आंदोलन

  • गांधी जी ने नमक के मुद्दे को लेकर यह आंदोलन प्रारंभ किया।
  • नमक सरकारी राशन की दुकानों पर मिलता था व इसकी कीमत बहुत ज्यादा होती थी।
  • 12 मार्च 1930 को गांधी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से यात्रा प्रारंभ करके 24 दिन 358 किलोमीटर (241 मील) की यात्रा के बाद 5 अप्रैल 1930 को गुजरात की साबरमती जिले में स्थित दांडी नामक स्थान पर पहुंचे।
  • 6 अप्रैल 1930 को नमक बनवाकर कानून का उल्लंघन किया और इसी के साथ भारत में आंदोलन प्रारंभ हो गया।
  • इस अवसर पर गांधी जी ने कहा था कि” राजद्रोह करना मेरा धर्म बन चुका है।

सुभाष चंद्र बोस

  • सुभाष चंद्र बोस ने कहा कि इस यात्रा की तुलना नेपोलियन की एल्बा दीप से लेकर पेरिस की यात्रा तक की है।
  • बलूचिस्तान के लोगों ने गांधी को मलंग बाबा की उपाधि प्रदान की।
  • बलूचिस्तान में अब्दुल गफ्फार खा या सीमांत गांधी ने आंदोलन का नेतृत्व किया।
  • इनकी पार्टी का नाम खुदाई खिदमतगार या लाल कुर्ती दल था।
  • नागालैंड की 13 वर्षीय बालिका Godin न्यू रानी के द्वारा आंदोलन चलाया, इसे नेहरू ने रानी की उपाधि दी थी।
  • इंदिरा गांधी ने बालकों को वानर सेना वह बालिकाओं को मंजरी सेना का गठन किया।
  • असम के छात्रों द्वारा कनिघम पत्र का विरोध किया गया।
  • पेशावर में चंद्र सिंह गढ़वाल के नेतृत्व में गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों ने जुलूस पर गोली चलाने से मना कर दिया इसलिए पेशावर में हवाई हमले किए गए।
  • 21 मई 1930 को गांधी के पुत्र मानिक लाल वह सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में जुलूस के द्वारा नमक कारखानों को लूटने का प्रयास किया गया। इनका पुलिस ने निर्ममता से दमन किया।
  • इसका उल्लेख है अमेरिका के समाचार पत्र न्यू फ्रीमैन के संपादक वेल मिलर ने किया।
  • गांधीजी को गिरफ्तार करके यरवदा जेल (पुणे) मे रखा गया। तब इसका नेतृत्व अब्बास तैयब जी के द्वारा किया गया।
  • आंदोलन के दौरान साइमन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 12 नवंबर 1930 से 13 नवंबर 1931 को प्रथम गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • इसमें कांग्रेस ने भाग नहीं लिया अतः इसका कोई महत्व नहीं रहा।

इरविन

ब्रिटिश सरकार ने वायसराय इरविन पर कांग्रेस को शामिल करने के लिए दबाव डाला इरविन ने गांधी को जेल से रिहा किया

वह दिल्ली बुलाकर 5 मार्च 1931 को समझौता किया इसे गांधी इरविन समझौता कहते हैं।

  • इसके बाद गांधी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए राजी हो गए।
  • गांधी ने इरविन से भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की फांसी की सजा को काम करने की कोई अपील नहीं की।
  • 23 मार्च 1931 को तीनों को लाहौर जेल में फांसी दे दी गई।
  • 26 से 29 मार्च 1931 को कांग्रेस का अधिवेशन कराची में सरदार पटेल की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • कांग्रेस ने मूल अधिकारों को अपने संविधान में शामिल किया गांधी इरविन समझौते की पुष्टि की गई।
  • कांग्रेस ने मदन मोहन मालवीय वैसे रोशनी नाइटी को भी कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में दूसरे गोलमेज सम्मेलन में प्रतिनिधि के रूप में मनोनीत किया था
  • परंतु इरविन ने गांधी को कांग्रेस का प्रतिनिधि माना आता है ये वायसराय के विशेष रूप प्रतिनिधि के रूप में लंदन गए।
  • मालवीय हिंदू महासभा व सरोजनी नायडू में भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया।
  • गांधी का अत्यधिक प्रतिरोध हुआ था इस तरह गांधी ने कहा गांधी मर सकता है परंतु गांधीवादी नहीं।

दूसरा गोलमेज सम्मेलन -7 सितंबर-1 December 1931

  • इस समय भारत का वायसराय वेलिंग्टन था उसने गांधी को ईमानदार किंतु बोल्शेविक इसलिए खतरनाक कहा।
  • गांधी राजपूताना जहाज से लंदन में इनके साथ उनका सचिव महादेव देसाई भी थे।
  • अंबेडकर कोस्टारोस जहाज से से लंदन गए थे।
  • इस समय भारत का सचिव से सैमुअल होर था जिसने गांधी का परिचय इंग्लैंड के शासक जॉर्ज पंचम से करवाया।
  • इस समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री रेमज मैकडोनाल्ड तीनो गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की गई ।
  • व तीनों गोलमेज सम्मेलन लंदन के जेम्स पैलेस में हुई इस समय चर्चिल ने कहा कि”देशद्रोही फकीर कहा था व ब्रिटिश पत्रकार फ्रैंक मोरिस ने गांधी को अर्धनग्न फकीर कहा।

अंबेडकर

  • अंबेडकर ने दलितों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की मांग प्रस्तुत की इसे मानने से गांधी ने इंकार कर दिया और दूसरा गोल में सम्मेलन असफल रहा।
  • प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने गांधी के लिए कहा आने वाली पीढ़ी शायद इस बात का यकीन करें कि धरती पर दुबला पतला हाड मास का व्यक्ति पैदा हुआ।
  • भारत लौटते समय गांधी ने इटली के तानाशाह मुसोलिनी से मुलाकात की।
  • भारत लौटकर गांधी ने दूसरा सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाने की घोषणा की तो गांधी को पुन: गिरफ्तार करके यरवदा जेल में डाल दिया गया।
  • 16 अगस्त 1932 को रेमज़ मैकडोनाल्ड ने सांप्रदायिक पंचाट की घोषणा की इसमें दलितों को भी अलग निर्वाचन क्षेत्र प्रदान किया गया।
  • इसके विरोध में गांधी आमरण अनशन पर बैठ गएइस कारण से 26 सितंबर 1932 को गांधी और अंबेडकर के बीच एक समझौता हुआ
  • जिसे पूना पैक्ट कहते हैं। इसके बाद अंबेडकर संयुक्त निर्वाचन प्रणाली पर सहमत हो गए।
  • केंद्रीय विधानमंडल में दलितों को 18% आरक्षण दिया गया।
  • प्रांतों में उनकी सीटों को बढ़ाकर 71 से 148 कर दिया गया।
  • गांधी ने वर्धा में हरिजन सेवक संघ की स्थापना करवाई व घनश्याम दास बिड़ला को इसका अध्यक्ष बनाया गया।

तीसरा गोलमेज सम्मेलन-17 नवंबर 1932 से 24 दिसंबर 1932

  • तीसरा गोलमेज सम्मेलन 17 नवंबर 1932 से 24 दिसंबर 1932 को लंदन में आयोजित किया गया इसमें कांग्रेस ने भाग नहीं लिया।
  • 1935 के भारत शासन अधिनियम के तहत 1937 में भारत के प्रांतों में चुनाव हुए इसलिए कांग्रेस के दोनों अधिवेशन 1936 में ही लखनऊ व फैजपुर में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • फैजपुर अधिवेशन कांग्रेस का प्रथम ग्रामीण अधिवेशन था।

कांग्रेस के पांचप्रांत में स्पष्टबहुमत

कांग्रेस के 5 प्रांतों में स्पष्ट बहुमत मिला जो निम्न

मद्रास -राजगोपालचारी

बिहार – श्रीकृष्ण सिन्हा

उड़ीसा -हरेकृष्ण महताब

मध्य प्रांत – एन. बी. खरे

संयुक्त प्रांत – गोविंद बल्लभ पंत

मुंबई में स्पष्ट बहुमत से केवल 2 सीटें कम मिली या अभी कांग्रेस के जे.बी खैर प्रधानमंत्री बने।

असम व सिंध मैं कांग्रेस ने सांझा सरकारे बनाई

असम में बारदोलाई

सिंध में गुलाम हुसैन हिदायतुल्लाह प्रधानमंत्री बने।

बलूचिस्तान में अब्दुल गफ्फार प्रधानमंत्री बने।

मुस्लिम लीग केवल बंगाल व पंजाब में सरकार में शामिल हो सकी।

बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी के फजल उल हक के व पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी के सिकंदर हयात खा का प्रधानमंत्री बने।

जिस समय संयुक्त प्रांत में सरकार का गठन किया जा रहा था

उस समय जिन्ना ने नेहरू से मुस्लिम लीग को सरकार में शामिल करने का आग्रह किया।

नेहरू ने कहा कि मुस्लिम लीग से त्यागपत्र देकर कांग्रेस में शामिल पर ही सरकार में शामिल किया जा सकता है

जिन्ना व नेहरू

इसके बाद जिन्ना की राजनीति विभाजन की ओर मुड़ गई।

1938 में कांग्रेस का अधिवेशन हरिपुरा (गुजरात) में आयोजित हुआ। इसके अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस चुने गए।

कांग्रेस ने देसी रियासतों में हस्तक्षेप का निर्णय लिया।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के अध्यक्षता में आर्थिक योजना समिति बनाई गई।

1939 में कांग्रेस का अधिवेशन त्रिपुरी(मध्य प्रदेश) मैं आयोजित किया गया इसके अध्यक्ष पद के लिए सुभाष चंद्र बोस व मौलाना आजाद दो उम्मीदवार थे

परंतु मौलाना आजाद ने अपना नामांकन वापस ले लिया तब गांधी ने वर्धा से पट्टाभिसीता रमैया को अपना उम्मीदवार बना कर भेजा।

परंतु सुभाष चंद्र बोस को अध्यक्ष चुना गया और गांधी ने इसे व्यक्तिगत हार मानी। परंतु बाद में सुभाष चंद्र बोस व गांधी में मतभेद हो गए।

सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया।

कोलकाता में 3 मई 1944 को फॉरवर्ड ब्लॉक नामक पार्टी की स्थापना की गई।

सुभाष चंद्र बोस के इस्तीफा देने पर डॉ राजेंद्र प्रसाद कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए।

द्वितीय विश्व युद्ध

  • 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड के उंजिग बंदरगाह पर आक्रमण किया इसी के साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत हो गई।
  • 3 सितंबर को इसमें इंग्लैंड शामिल हुआ।
  • 5 सितंबर 1939 को इंग्लैंड ने भारत को युद्धरत राष्ट्र घोषित कर दिया गया।
  • इसलिए जिन प्रांतों में कांग्रेस की सरकार थी उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
  • इस कारण से 22 दिसंबर 1939 को मुस्लिम लीग व अंबेडकर की डिसप्लेस class association मुक्ति दिवस मनाया।

युद्ध

  • द्वितीय विश्व युद्ध के समय इंग्लैंड पर आए संकट को सुभाष चंद्र बोस ने भारत के लिए एक सुनहरा अवसर कहा।
  • परंतु गांधी व नेहरू ने कहा की हमें इंग्लैंड की बर्बादी पर भारत की स्वतंत्रता नहीं चाहिए।
  • मार्च 1940 में कांग्रेस का अधिवेशन रामगढ़ (झारखंड) मैं आयोजित हुआ इसकी अध्यक्षता मौलाना आजाद ने की।
  • कांग्रेस ने वायसराय लिनलिथगो को प्रस्ताव दिया अगर युद्ध की समाप्ति पर भारत में एक अंतरिम सरकार की स्थापना का वादा किया जाए तो इस समय कांग्रेस सरकार समर्थन दे सकती है।
  • लिनलिथगो ने 8 अगस्त 1940 को अगस्त प्रस्ताव कांग्रेस को प्रस्ताव दिया।
  • युद्ध समाप्ति पर भारत को डोमिनियन स्टेट का दर्जा दे दिया जाएगा संविधान सभा का गठन कर दिया जाएगा
  • परंतु कांग्रेस ने इसे मानने से इनकार कर दिया पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे दरवाजे में जंग लगी किल के समान माना।
  • यह अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट के दबाव में आकर इंग्लैंड के प्रधानमंत्री चर्चिल ने अपने युद्ध मंत्रिमंडल के सदस्य स्टेफोर्ड क्रिप्स को 22 मार्च 1942 भारत भेजा था।
  • क्रिप्स ने आते ही अगस्त प्रस्ताव में उल्लेखित संविधान सभा की मांग को मान लिया था
  • ।परंतु क्रिप्स ने देसी रियासतों को यह स्वतंत्रता दी कि वे अपना संविधान स्वयं बना सकते हैं।
  • इसके अलावा किसी भी बात पर निर्णय करने का अंतिम अधिकार वायसराय को दिया गया।
  • कांग्रेस ने इसका विरोध किया गांधी ने इसे पोस्ट डैड चेक कहा इसी ने इसमें यह जोड़ दिया था कि ऐसे बैंक का दिवालिया हो चुका है।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि मेरा मित्र क्रिप्स शैतान का वकील बनकर आया है।

भारत छोड़ो आंदोलन

  • 14 July 1942 वर्धा (महाराष्ट्र) मैं कांग्रेस की बैठक हुई व आंदोलन चलाने के पश्चात प्रस्ताव को पारित किया गया।
  • इसका प्रस्ताव पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था।
  • 8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वाला टैंक (अगस्त क्रांति मैदान) मे एक सभा को संबोधित करते हुए गांधी ने नारा दिया करो या मरो।
  • इसके साथ ही भारत में आंदोलन की शुरुआत हुई।
  • 9 अगस्त की मध्यरात्रि को सरकार ने ऑपरेशन जीरो चलाया वह सभी कांग्रेस के नेताओं को नजरबंद किया गया।
  • गांधी को पुणे के आगा खां पैलेस में रखा गया था।
  • कस्तूरबा गांधी महादेव देसाई सरोजिनी नायडू को भी यहीं पर रखा गया तथा कस्तूरबा गांधी महादेव देसाई का यहां रहने के दौरान निधन भी हो गया।
  • समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण झारखंड की हजारीबाग जेल में रखा गया था
  • इसी जेल की दीवार को तोड़कर जयप्रकाश नारायण फरार हुए इस आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया।
  • के व्यक्तियों के द्वारा स्वतंत्र सरकारें स्थापित की गई।

आंदोलन

  • सर्वप्रथम बलिया (उत्तर प्रदेश) में चीतू पांडे के द्वारा सरकार गठित की गई तथा 1945 तक सातारा (महाराष्ट्र) y.v. चव्हान व नाना पाटील ने सरकार गठित की।
  • बंगाल के मिदनापुर में सतीश सावंत के द्वारा एक जातीय सरकार गठित की गई।
  • यहीं पर एक जुलूस के दौरान गोली लगने के बावजूद एक 73 वर्षीय विधवा मातंगिनी हजारा ने तिरंगे झंडे को नीचे नहीं गिरने दिया।
  • वेवेल को भारत का वायसराय बनाया गया उसने 24 जून से 14 जुलाई 1945 को शिमला में कांग्रेस व मुस्लिम लीग की बैठक बुलाई।
  • कांग्रेस की ओर से मौलाना आजाद व मुस्लिम लीग की ओर से जिन्ना ने नेतृत्व किया।
  • कांग्रेस ने जिन्ना कि इस बात को मान लिया जब भी अंतरिम सरकार बनाई जाएगी दोनों पार्टियों के समान मंत्री होंगे।
  • परंतु जिन्ना ने तुरंत मांग कि मुस्लिम मंत्री केवल मुस्लिम लीग के हो सकते हैं इसे मानने से कांग्रेस ने इंकार कर दिया अतः शिमला बैठक असफल हुई।
  • मौलाना आजाद ने इसे भारत का जल विभाजक कहा।

कैबिनेट मिशन-1946

  • 1946 मैं कैबिनेट मिशन भारत आया था इसमें कुल 3 सदस्य थे जो कि निम्न है-
  • पेथिक लॉरेंस – भारत सचिव
  • एबी एलेग्जेंडर- नौसेना मंत्री
  • स्टेफोर्ड क्रिप्स – व्यापार मंत्री
  • मार्च 1946 को कैबिनेट मिशन कराची पहुंचा उसने मुस्लिम लीग की पाकिस्तान मांग को अस्वीकार कर दिया फिर भी मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन का विरोध नहीं किया।
  • गांधी ने इसे तत्कालीन परिस्थितियों का स्वर्णम योजना कहा
  • 22 जुलाई 1946 को वेबेल ने एक के अंतरिम सरकार बनाने की घोषणा की जिसमें छह कांग्रेस के 5 मुस्लिम लीग के 3 अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शामिल किए जाने थे।
  • मुस्लिम लीग ने इसमें शामिल ना होने का निर्णय लिया तथा वेवेल ने 12 अगस्त को बिना मुस्लिम लीग कांग्रेस को सरकार बनाने का निमंत्रण भेज दिया।
  • तथा मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को सीधी कार्रवाई दिवस मनाने की घोषणा की।
  • 16 अगस्त को मौलाना आजाद ने भारतीय इतिहास का एक काला दिन कहा।
  • 20 फरवरी 1947 को इंग्लैंड के प्रधानमंत्री एट ली ने यह घोषणा की कि 30 जून 1948 तक भारत को स्वतंत्र कर दिया जाएगा।
  • 22 मार्च 1947 को 34 वे वायसराय के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन भारत भेजा गया।
  • माउंटबेटन ने सभी दलों के नेताओं से बातचीत की तथा सबसे पहले सरदार पटेल विभाजन के लिए राजी हुए।

आजादी

  • 3 जून 1947 को माउंटबेटन ने एक प्लान प्रस्तुत किया।
  • इसमें भारत के विभाजन की योजना इसे 13 से लेकर 16 जून 1947 को गोविंद बल्लभ पंत ने कांग्रेस कार्यसमिति अब्दुल गफ्फार खान कहा कांग्रेस ने हमारे आंदोलन को भेडियो के आगे फेंक दिया ।
  • मौलानाआजाद ने कहा इतिहास हमें इस बात के लिए कभी माफ नहीं करेगा।
  • इस समय नेहरू ने कहा था हमें कटा छटा भारत नहीं चाहिए।
  • डिकी बरड प्लॉट तहत ही 14 अगस्त को पाकिस्तान का निर्माण किया गया।
  • 15 अगस्त को मध्य रात्रि को भारत को स्वतंत्र किया गया।
  • नेहरु के द्वारा देश की जनता को दिया गया संबोधन नियति के साथ वादा कहलाता है।

महत्पूर्ण सूचना

ठीक है साथियों यह आपका http://राष्ट्रीयआंदोलन से संबंधित टॉपिक कंप्लीट हुआ यदि आपको यह जानकारी आपके लिए लाभदायक है

और आपको अच्छी जानकारी मिली है तो इसे आगे अपने दोस्तों को भी फॉरवर्ड करें और इस वेबसाइट पर इस तरह की कंटेंट के लिए हम से जुड़े रहे धन्यवाद

May 22, 2020

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन क्या है जाने ? PART-1

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

आइए आज इस टॉपिक पर चर्चा करेंगे महात्मा गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में क्या क्या योगदान रहा और गांधीजी ने कौन कौन से आंदोलन किए व व किन किन आंदोलनों में भाग लिया और इस आंदोलन से क्या क्या प्रभाव पड़ा इसको आज अच्छे से जानेंगे ! सबसे पहले महात्मा गांधी जी की जीवनी के बारे में जानेंगे !

महात्मा गांधी की जीवनी ( Mahatma Gandhi Biography )

भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन

आइए हम आपको महात्मा गांधी के बारे में कुछ जानकारियां सांझा करते हैं जोकि निम्न प्रकार से हैं !

  • नाम – मोहनदास करमचंद गांधी
  • पिता का नाम – करमचंद गांधी
  • माता का नाम – पुतलीबाई
  • जन्म – 2 अक्टूबर, 1869
  • जन्म स्थान – गुजरात के पोरबंदर में
  • राष्ट्रीयता – भारतीय
  • शिक्षा – बैरिस्टर
  • पत्नी – कस्तूरबाई मखजी कपाड़िया (कस्तूरबा गांधी)
  • संतान – चार पुत्र – हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
  • जातीयता – गुजराती
  • राजनीतिक पार्टी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • मृत्यु – 30 जनवरी, 1948

भारतीयराष्ट्रीयआंदोलन में महात्मा गांधी का योगदान या भूमिका

आइए अब राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी की भूमिका और योगदान के बारे में जानेंगे विस्तार से जोकि निम्न प्रकार से हैं :-

  • 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से अरेविया नामक जहाज से मुंबई के अपोलो बंदरगाह पर आए थे ! इस समय प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था (1914-1918)
  • महात्मा गांधी ने भारत के युवाओं को अंग्रेजी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया था ! इसलिए ब्रिटिश सरकार ने गांधी जी को केसर -ए -हिंद की उपाधि प्रदान की !
  • भारतीयों ने गांधीजी का विरोध किया गांधी जी को अंग्रेजों का सार्जेंट (सेना में भर्ती करने वाला) कहा !
  • 1915 में ही गांधी जी ने जीवन लाल देसाई के द्वारा गुजरात के अहमदाबाद जिले में साबरमती नदी के तट पर कोचराव नामक बंगले में एक आश्रम स्थापित किया इसे सत्याग्रह आश्रम नाम दिया गया था !
  • 1917 में गुजरात के व्यवसायी अंबालाल साराभाई ने इस आश्रम की आसपास की भूमि खरीदकर गांधी को भेंट दी तथा इसे साबरमती आश्रम नाम दिया गया !
  • 1930 में गांधी जी ने जब सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया था तब इसे अंतिम रूप से छोड़ दिया था !
  • चार्ल्स कोरियन को इस आश्रम का वास्तुकार माना जाता है !
  • 1916 में गांधी जी ने मदन मोहन मालवीय के द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह में भाग लिया था !
  • 1916 में कांग्रेस का अधिवेशन लखनऊ में अंबिका चरण मजमुदार की अध्यक्षता में आयोजित हुआ !
  • नरम दल और गरम दल तिलक व एनीबेसेंट के प्रयासों से एक हो गए !
  • कांग्रेस के सदस्य जिन्ना के प्रयासों से कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की पृथक निर्वाचन प्रणाली की मांग को मान लिया ! इसी को रमेशचंद्र मजमुदार ने कांग्रेस की प्रथम भूल कहां है !
  • इसी अधिवेशन में राजकुमार शुक्ल ने गांधी से मुलाकात की वह बिहार के चंपारण जिले के प्रचलित नील की तिनकठिया खेती के बारे में बताया फिर महात्मा गांधी 1917 में चंपारण गए !

गांधीजी के प्रमुख आंदोलन

गांधी जी के प्रमुख आंदोलन निम्न प्रकार से हैं :-

  • चंपारण आंदोलन
  • खेड़ा आंदोलन
  • अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन
  • रोलेट सत्याग्रह आंदोलन
  • खिलाफत आंदोलन
  • असहयोग आंदोलन
  • साइमन कमीशन
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन
  • कैबिनेट मिशन

भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन में गांधी जी के यह आंदोलन बहुत ही महत्वपूर्ण थे गांधीजी का इन आंदोलनों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है अब हम इन आंदोलनों के बारे में विस्तार से जानेंगे कि गांधी जी की क्या क्या भूमिका रही है आइए देखते हैं :-

चंपारण किसान आंदोलन

  • चंपारण में अंग्रेज व्यापारी किसानों के खेत को 20 भागों में बांटते थे। जिनमें से तीन भागों में नील की खेती करवाई जाती थी बाकी पूरी भूमि को परती छोड़ दिया जाता है ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे । इसके लिए अंग्रेज व्यापारी किसानों को अग्रिम भुगतान भी करते थे परंतु इस समय जर्मनी में रासायनिक रंग बना लिए थे ! यूरोप में भारतीय नील की मांग में कमी आ गई इसलिए दिए गए अग्रिम भुगतान को ब्याज सहित वसूल किया जा रहा है !
  • लगातार नील की खेती करने से भूमि बंजर हो चुकी थी अतः किसान इस भुगतान को देने में असमर्थ था।
  • चंपारण के जिला कलेक्टर (W.B Hitchcoke) ने गांधी के चंपारण प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • गांधीजी के जाने पर उन्हें मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया था ! और उसे चंपारण की जेल में रखा गया था।
  • गांधी जी ने सत्याग्रह का प्रथम प्रयोग इसी आंदोलन में किया था !
  • सत्याग्रह का अर्थ : – सत्याग्रह का अर्थ अहिंसात्मक तरीके से सरकार के समक्ष अपनी मांग प्रस्तुत करना होता है इसे सत्याग्रह नाम भूलाभाई देसाई के द्वारा दिया गया ।
  • इस आंदोलन में गांधी को निम्न लोगों के द्वारा सहयोग दिया गया जो कि निम्न है:-
  • अनुराग नारायण सिन्हा
  • ब्रजकिशोर शर्मा
  • जे पी कृपलानी
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू
  • अंग्रेज व्यापारियों ने गलत तरीके से वसूली की गई 25% राशि किसानों को वापस लौटा दी थी !
  • इस आंदोलन की सफलता के बाद रविंद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी की उपाधि प्रदान की।
  • जूनीपत ब्राउन ने इस आंदोलन का उल्लेख अपनी पुस्तक Arising the power of Gandhi मैं की है !

खेड़ा किसान आंदोलन

  • खेड़ा (गुजरात) की सूरत जिले की तहसील थी ।
  • 1917-18 के वर्ष में यहां अकाल पड़ा था ! इसके बावजूद लगान में वृद्धि की गई जबकि अकाल संहिता के तहत 3/4 फसल नष्ट होने पर पूरा लगान माफ कर दिया जाता था ।
  • इस आंदोलन में वल्लभ भाई पटेल ने गांधी को सहयोग दिया।
  • 23 मार्च 1918 को सरकार ने एक आदेश लागू किया की किसानों से समर्थ लगान वसूल किया जाएगा

अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के कारण भारत में महंगाई बढ़ चुकी थी अतः मजदूर वेतन में 50% वृद्धि की मांग कर रहे थे जबकि मिल मालिक 20% वेतन वृद्धि को राजी थे।
  • जब मजदूरों का प्लेग बोनस बंद किया गया तब मजदूरों ने अनसूइया बेग पटेल से मुलाकात की जिन्होंने गांधी को बुलाया।
  • 15 March 1918 को गांधी अनशन पर बैठ गए तब मिल मालिकों ने समझौता करके 35% वेतन वृद्धि की।

रोलेट सत्याग्रह आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के समय भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों में तेजी आई
  • रासबिहारी बोस के पूरे भारत में सशस्त्र क्रांति की योजना भी बनाई गई। हालांकि असफल होने पर रासबिहारी बोस जापान चले गए।
  • 1917 में ब्रिटिश सरकार ने इंग्लैंड के किगजू न्यायालय के न्यायाधीश सिडनी रोलैंड की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जिसने मार्च 1919 को रोलेट एक्ट लागू किया।
  • इसमें प्रावधान था कि अगर किसी व्यक्ति पर सरकार विरोधी होने का संदेह हो तो बिना न्यायालय में पेश किए उसे अधिकतम 2 वर्ष तक हिरासत में रख सकते थे। इसे काला कानून कहा गया।
  • संभवत मोतीलाल नेहरू ने इसे बिना अपील बिना दलील और बिना वकील का कानून कहां ।
  • गांधीजी ने इसके विरोध के लिए रौलट सत्याग्रह समिति बनाई इसमें एनीबेसेंट सदस्य थी परंतु बाद में गांधी की विचारधारा से असहमत होकर इस समिति से अलग हुई और गांधी जी को छोटा राजनीतिक बच्चा कहां।
  • 9 अप्रैल 1919 को पंजाब के दो क्रांतिकारी डॉ सत्यपाल व सैफुद्दीन किचलू पंजाब की सीमा पर गिरफ्तार करके अमृतसर की जेल में रखा।
  • 10 अप्रैल 1919 को पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइक ओ डायर ने पंजाब में धारा 144 लगा दी व पंजाब का प्रशासन सेना को सौंपा दिया।
  • 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी का त्यौहार गांव से लोग अमृतसर आए हुए
  • इन दोनों की गिरफ्तारी के विरोध में एक ही स्थान पर इकट्ठा हुए जिसे जलियावालाबाग कहा जाता है
  • यहां पहुंचकर राबर्ट इनफील्ड हेनरी डायर नामक सैन्य अधिकारी के आदेश से गोलीबारी की गई।
  • इस हत्याकांड के विरोध में टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि लौटा दी
  • वायसराय चेम्सफोर्ड की कार्यकारिणी परिषद के भारतीय सदस्य शंकरन नायर ने इस्तीफा दे दिया था।
  • सरकार ने इस हत्याकांड को जांच के लिए 8 सदस्यों वाली हंटर कमेटी बनाई इसमें तीन भारतीय थे इनके निम्न नाम है:-
  • चिमनलाल शीत सितउवाड
  • शायबजादा सुल्तान अहमद
  • जगत नारायण
  • हंटर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 379 व्यक्ति इस हत्याकांड में मारे गए।
  • कांग्रेस ने मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में तहकीकात कमेटी बनाई।
  • इस कमेटी के अन्य सदस्य थे :-
  • मोतीलाल नेहरू
  • चितरंजन दास
  • महात्मा गांधी
  • गांधीजी ने हंटर कमेटी की रिपोर्ट को पन्ने दर पन्ने लीपापोती कहा।
  • इन रिपोर्ट के अनुसार 1000 से भी ज्यादा व्यक्ति हत्याकांड में मारे गए।

खिलाफत आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के विजेता राष्ट्र इंग्लैंड ने पराजित राष्ट्र तुर्की के विवाह जन का निर्णय लिया।
  • तुर्की के सुल्तान को पूरे विश्व के मुसलमान खलीफा के समान मानते थे।
  • इस समय सुल्तान मोहम्मद चतुर्थ थे।
  • मुसलमानों ने इस निर्णय के कारण आक्रोश उत्पन्न हो गया तथा गांधी ने इसे पिछले 100 सालों में आया हुआ हिंदू व मुसलमानों की एकता का स्वर्णिम अवसर कहा था।
  • भारत में यह आंदोलन मोहम्मद अली व शौकत अली दो भाइयों के द्वारा चलाया गया।
  • 17 अक्टूबर 1919 को भारत में खिलाफत दिवस मनाया गया।
  • 24 नवंबर 1919 को दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी की बैठक आयोजित की गई।
  • डॉक्टर अंसारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अंग्रेजी सरकार से बातचीत के लिए लंदन भेजा गया।
  • मार्च 1920 में खिलाफत कमेटी की बैठक इलाहाबाद में आयोजित की गई। इसमें असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया।
  • 1 अगस्त 1920 इसकी तिथि निश्चित की गई परंतु इसी दिन तिलक की मृत्यु हो गई अत: इसे कुछ दिनों के लिए स्थगित किया गया।
  • परंतु 20 अगस्त 1920 को इंग्लैंड व तुर्की के मध्य सेवरस (फ्रांस) की संधि हो गई
  • तुर्की में कमाल पाशा ने सरकार गठित की और इसने सुल्तान के पद को ही समाप्त कर दिया इस कारण से भारत में आंदोलन समाप्त हो गया।
  • कमाल पाशा को अतातुर्क अर्थात तुर्कों का पिता कहते हैं।
  • जिन्ना ने इस आंदोलन में भाग नहीं लिया।

असहयोग आंदोलन

  • गांधी के कहने पर कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय लिया।
  • सितंबर 1920 में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन कोलकाता में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • इसमें आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया
  • इसके लेखक महात्मा गांधी थे।
  • स्वयं गांधी ने इसका प्रस्ताव रखा था।
  • चितरंजन दास ने इसका विरोध किया तथा मोतीलाल नेहरु के द्वारा गांधी का समर्थन किया गया।
  • इस समय एनी बेसेंट, मालवीय, मोहम्मद अली जिन्ना, शंकर नायर इत्यादि ने इस्तीफा दे दिया।
  • दिसंबर 1920 में कांग्रेस वार्षिक अधिवेशन नागपुर में राघवाचार्य की अध्यक्षता में आयोजित हुआ इसमें पारित प्रस्ताव की पुष्टि की गई।चितरंजन दास ने इसका प्रस्ताव रखा।
  • इसके प्रस्ताव में लिखा है कि ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर सुशासन की बजाए इसे बाहर जाकर स्वराज्य की प्राप्ति द्वारा लक्ष्य हासिल करना सही है।
  • गांधी ने केसर हिंद की उपाधि तथा ज़ुलु व बोहर पदक सरकार को लौटा दिए थे।
  • सुभाष चंद्र बोस ने आईएएस के पद से त्यागपत्र दिया व कोलकाता के नेशनल कॉलेज के प्रिंसिपल बने।
  • महिलाओं के द्वारा शराब की दुकानों में धरना प्रदर्शन किया गया यह एकमात्र ऐसा कार्य था जो इसके कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था।
  • वक्ताओं की दृष्टि से यह कांग्रेस का सबसे बड़ा अधिवेशन था।
  • December 1920 में नागपुर अधिवेशन में ही कांग्रेस के दैनिक कार्यों के संचालन के लिए 15 सदस्यों वाली कार्य समिति का गठन किया गया इसको बनाने का पहला सुझाव तिलक में 1916 में लखनऊ अधिवेशन में दिया था।
  • इसे सांप्रदायिक सोपान का आंदोलन माना गया।
  • स्वामी श्रद्धानंद को मुसलमानों ने दिल्ली की जामा मस्जिद भाषण देने के लिए आमंत्रित किया।
  • सैफुद्दीन किचलू को शिव सिखो ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की चाबी सौंप दी।
  • गांधी ने अहिंसा की पालना में सर्वाधिक प्रशंसा बिहार की।
  • अंग्रेज शिक्षा की सर्वाधिक बहिष्कार बंगाल में हुआ।
  • मदुरई तमिलनाडु में एक बालक के द्वारा प्रश्न पूछे जाने के बाद गांधी ने आजीवन एक धोती में रहने का निर्णय किया।
  • 5 फरवरी 1922 को यूपी के गोरखपुर जिले के चोरी चोरा नामक गांव में ग्रामीणों ने थाने का घेराव करके आग लगा दी इसमें 22 पुलिस वह एक सब इंस्पेक्टर सहित कुल 23 पुलिसकर्मी व तीन ग्रामीण मारे गए
  • 5 फरवरी 1922 को बारदोली (गुजरात) में कांग्रेस की बैठक हुई उसमें असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
  • 10 March 1922 को ब्रिटिश न्यायाधीश ब्रूमफील्ड ने हिंसा भड़काने के आरोप में गांधी जी को 6 साल की कारावास की सजा सुनाई गई।

1919 के एक्ट के तहत

  • 1919 के एक्ट के तहत भारत की केंद्रीय असेंबली में चुनाव होने दे। इन चुनाव को लेकर कांग्रेस के दो ग्रुप बन गए।
  • परिवर्तनवादी
  • अपरिवर्तनवादी

परिवर्तनवादी

  • यह चुनाव में भाग लेना चाहते थे।
  • इस ग्रुप का नेतृत्व चितरंजन दास व मोतीलाल नेहु कर रहे थे।

अपरिवर्तनवादी

  • यह चुनाव का बहिष्कार कर रहे थे।
  • इनका नेतृत्व विट्ठल भाई पटेल व बल्लभ भाई पटेल कर रहे थे।
  • अपरिवर्तन वादियों के द्वारा नागपुर में झंडा सत्याग्रह चलाया गया ताकि परिवर्तनवादियों को कांग्रेस के झंडे के प्रयोग से रोक सके।
  • जब गांधी जी ने भी चुनाव का बहिष्कार किया तब परिवर्तनवादी कांग्रेस से अलग हुए
  • March 1923 को इलाहाबाद में स्वराज पार्टी की स्थापना की गई। चितरंजन दास इसके अध्यक्ष बने वह मोतीलाल नेहरू इसके सचिव बनाए गए
  • गांधी जी की खराब स्वास्थ्य के कारण जेल से रिहा किया गया।
  • 8 नवंबर 1924 को गांधी जी ने चितरंजन दास को दिल्ली बुलावाया व यह समझौता किया कि जो भी कांग्रेस के सदस्य चुनाव में भाग लेना चाहते हैं स्वराज पार्टी के तहत ले सकते हैं।
  • 1924 में कांग्रेस का अधिवेशन बेलगांव (कर्नाटक ) मैं आयोजित हुआ । इसकी अध्यक्षता गांधीजी ने की इसमें गांधी व दास समझौते की पुष्टि की गई।
  • इसके बाद कांग्रेस के लगभग नेताओं ने स्वराज पार्टी के तहत चुनाव में भाग लिया।
  • विट्ठल भाई पटेल ने केंद्रीय असेंबली के स्पीकर नियुक्त हुए।
  • स्वराज पार्टी के दबाव के कारण 1919 के एक्ट की जांच की गई मुडडीमैन कमेटी का गठन किया गया।

देखिए दोस्तों ! http://भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन से संबंधित आगे की जानकारी पार्ट-2 पर जाकर पढ़ें। और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका और सहयोग के बारे में जानकारी आपको अच्छी लगी है तो इसे आगे भी फॉरवर्ड करें अपने दोस्तों को।