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Modern History

September 22, 2020

Constitutional development of india भारत का संवैधानिक विकास

Constitutional development of india भारत का संवैधानिक विकास

Constitutional development of india

ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियम 1858 का अधिनियम मुख्य लेख :-

भारत सरकार अधिनियम- 1858 इस अधिनियम के पारित होने के कुछ महत्त्वपूर्ण कारण थे। भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम, जो 1857 ई. में हुआ था, ने भारत में कम्पनी शासन के दोषों के प्रति ब्रिटिश जनमानस का ध्यान आकृष्ट किया।

इसी समय ब्रिटेन में सम्पन्न हुए आम चुनावों के बाद पामस्टर्न प्रधानमंत्री बने, इन्होंने तत्काल कम्पनी के भारत पर शासन करने के अधिकार को लेकर ब्रिटिश क्राउन के अधीन करने का निर्णय लिया। उस कम्पनी के अध्यक्ष …

September 22, 2020

Indian Freedom Struggle भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन (प्रथम चरण)

शुरुआत 1885 ई. में कांग्रेस की स्थापना के साथ ही इस आंदोलन की शुरुआत हुई, जो कुछ उतार-चढ़ावों के साथ 15 अगस्त, 1947 ई. तक अनवरत रूप से जारी रहा। प्रमुख संगठन एवं पार्टी गरम दल, नरम दल, गदर पार्टी, आज़ाद हिंद फ़ौज, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, इंडियन होमरूल लीग, मुस्लिम लीग

अन्य प्रमुख आंदोलन असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन, स्वदेशी आन्दोलन, नमक सत्याग्रह
परिणाम भारत स्वतंत्र राष्ट्र घोषित हुआ

भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन को तीन भागों में बाँटा जा सकता है-

  1. प्रथम चरण
  2. द्वितीय चरण
  3. तृतीय चरण।

1. आन्दोलन का प्रथम

September 22, 2020

Indian National Movement-Gandhian era गांधीवादी युग

गांधीवादी युग

गांधीवादी

राष्ट्रपिता’ की उपाधि से सम्मानित महात्मा गाँधी भारतीय राजनीतिक मंच पर1919ई. से 1948 ई. तक छाए रहे। गाँधीजी के इस कार्यकाल को ‘भारतीय इतिहास’ में ‘गाँधी युग’ के नाम से जाना जाता है।

गांधी जी 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से वापस भारत आए उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में सरकार के युद्ध प्रयासों में मदद की जिनके लिए सरकार ने उन्हें कैसर-ए-हिंद की उपाधि से सम्मानित किया। 1915 ईस्वी में गांधी जी ने अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की।

गाँधी-गोखले भेंट:

जनवरी 1915 ई. में गाँधी जी भारत आये और यहाँ …

September 21, 2020

Jawahar Lal Nehru जवाहरलाल नेहरु

जवाहरलाल नेहरु

जवाहरलाल नेहरु

भारत की आज़ादी के लिए सबसे लम्बे समय तक चलने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय आन्दोलन था। शुरुआत 1885 ई. में कांग्रेस की स्थापना के साथ ही इस आंदोलन की शुरुआत हुई जो कुछ उतार-चढ़ावों के साथ15 अगस्त,1947ई. तक अनवरत रूप से जारी रहा।

प्रमुख संगठन एवं पार्टी गरम दल, नरम दल, गदर पार्टी, आज़ाद हिंद फ़ौज, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, इंडियन होम रूल लीग, मुस्लिम लीग

जवाहरलाल नेहरू

पद बहाल:-15 अगस्त 1947 – 27 मई 1964

राजा:-जॉर्ज षष्ठम् (26 जनवरी 1950 तक)

गर्वनर जनरल बर्मा के पहले अर्ल माउंटबेटन चक्रवर्ती राज गोपालाचारी (26 जनवरी 1950 …

September 21, 2020

C Ramgopalchari चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

राजगोपालाचारी

चक्रवर्ती राजगोपालचारी का जन्म मद्रास के थोरपल्ली गांव में 10 दिसंबर 1878 को हुआ था। भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष थे रोजगोपालचारी ‘राजाजी’ के नाम से भी जाने जाते हैं। राजगोपालाचारी वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक थे

राजगोपालचारी को कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी के रूप में भी चुना गया था। अंतिम गवर्नर माउंटबेटन के बाद राजगोपालचारी स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर बने थे। (21 जून 1948 से 26 जनवरी 1950 तक)

अपने अद्भुत और प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण ‘राजाजी’ के नाम से प्रसिद्ध महान् स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, गांधीवादी राजनीतिज्ञ चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को आधुनिक भारत के इतिहास का ‘चाणक्य’ माना …

September 21, 2020

What is Muslim league मुस्लिम लीग क्या हे ??

muslim league

मुस्लिम लीग

मुस्लिम_लीग का मूल नाम ‘अखिल भारतीय मुस्लिम लीग( all-india muslim league ) था। यह एक राजनीतिक समूह था जिसने ब्रिटिश भारत के विभाजन (1947 ई.) से निर्मित एक अलग मुस्लिम राष्ट्र के लिए आन्दोलन चलाया।

बंगाल विभाजन की घोषणा के बाद मुस्लिम लीग ( muslim league ) अलीगढ़ कॉलेज के प्राचार्य आर्चबोल्ड एवं तत्कालीन वायसराय लॉर्ड मिंटो के निजी सचिव डनलप स्मिथ के प्रयास से आगा खां के नेतृत्व में 36 मुसलमानों का प्रतिनिधिमंडल 1 अक्टूबर 1906 को वायसराय लॉर्ड मिंटो से मिला ।  

उन्होंने मांग की कि प्रतिनिधि संस्थाओं में मुस्लिमों के …

September 20, 2020

Uttar Mughal Period New Dynasty उत्तर मुगलकालीन नये राजवंश

उतर मुगलकालीन नये राजवंश

अवध ( Awadh )

उत्तर मुगलकालीन

अवध के स्वतंत्र राज्य के संस्थापक सआदत खां बुराहनुल्मुल्क था। 1722 ई. में मुग़ल बादशाह मुहमदशाह द्वारा फारस के शिया सआदत खां को अवध का सूबेदार बनाये जाने के बाद अवध सूबे को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया।

सआदत खां ने सैय्यद बंधुओं को हटाने में सहयोग दिया। बादशाह ने सआदत खां को नादिरशाह के साथ वार्ता के लिए नियुक्त किया ताकि वह एक बड़ी रकम के भुगतान के एवज में अपने देश लौट जाये और शहर को तबाह करने से उसे रोका जा सके।  लेकिन जब नादिरशाह को …

September 19, 2020

Statutory Development 1857 से पहले वैधानिक विकास

रेग्यूलेटिंग एक्ट (1773 ई.) –

वैधानिक विकास

18 मई, 1773 ई. को लार्ड नार्थ ने कॉमन्स सभा में ईस्ट इंण्डिया कम्पनी रेग्यूलेटिंग बिल प्रस्तुत किया, जिसे कॉमन्स सभा ने 10 जून को और लार्ड सभा ने 19 जून को पास कर दिया। यह 1773 ई. के रेग्यूलेटिंग एक्ट के नाम से प्रसिद्ध है।

इस एक्ट का मुख्य उद्देश्य कम्पनी के संविधान तथा उसके भारतीय प्रशासन में सुधार लाना था।  बंगाल का शासन गवर्नर जनरल तथा चार सदस्यीय परिषद में निहित किया गया। इस परिषद में निर्णय बहुमत द्वारा लिए जाने की भी व्यवस्था की गयी।

इस अधिनियम द्वारा प्रशासक मंडल में …

September 19, 2020

British Power बंगाल में ब्रिटिश शक्ति की स्थापना

बंगाल में ब्रिटिश शक्ति की स्थापना

बंगाल

मुगलकालीन बंगाल में आधुनिक पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, बिहार और उड़ीसा शामिल थे। बंगाल में डच, अंग्रेज व फ्रांसीसियों ने व्यापारिक कोठीयां स्थापित की थी जिनमें हुगली सर्वाधिक महत्वपूर्ण थी। 1651 ईस्वी में शाहशुजा से अनुमति लेकर इस इंडिया कंपनी ने बंगाल में हुगली में अपने प्रथम कारखाने की स्थापना की।

1670-17०० ईसवी के बीच बंगाल में अनधिकृत अंग्रेज व्यापारियों जिन्हें इंटरलाॅपर्स कहा जाता था,ने कंपनी नियंत्रण से मुक्त होकर व्यापार किया जो अंग्रेज और मुगलों के बीच संघर्ष का कारण बना।

जॉब चारनाक नामक एक अंग्रेज ने कालिकाता, गोविंदपुर और सूतानाती को मिलाकर …

August 16, 2020

सुभाष चंद बोस Subhash Chandra Bose

सुभाष चंद बोस

सन् 1933 से लेकर 1936 तक सुभाष यूरोप में रहे। यूरोप में सुभाष ने अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए अपना कार्य बदस्तूर जारी रखा। वहाँ वे इटली के नेता मुसोलिनी से मिले, जिन्होंने उन्हें भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में सहायता करने का वचन दिया। आयरलैंड के नेता डी वलेरा सुभाष के अच्छे दोस्त बन गये। जिन दिनों सुभाष यूरोप में थे

सुभाष चंद बोस

उन्हीं दिनों जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू का ऑस्ट्रिया में निधन हो गया। सुभाष ने वहाँ जाकर जवाहरलाल नेहरू को सान्त्वना दी।जर्मनी में प्रवास एवं हिटलर से मुलाकात बर्लिन में सुभाष …