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Modern History

July 25, 2020

मुग़ल साम्राज्य का पतन How did the Mughal Empire fall?

पृष्ठभूमि

मुग़ल साम्राज्य की स्थापना ज़हीरुद्दीन बाबर द्वारा 1526 इ. में पानीपत के प्रथम युद्ध में ननणाषयक
निजय के पश्चात् की गइ थी तथा साम्राज्य का निस्तार ईनके ईत्तरानधकाररयों के समय में भी जारी
रहा। औरंगजेब (1657-1707) के शासन काल में मुगल साम्राज्य का िेत्रीय निस्तार ऄपने चरम पर
पहुंच गया थाI आसके साथ ही निघटन की प्रकक्रया भी औरंगजेब के समय में ही प्रारंभ हो गयी थी।
औरंगजेब के कमजोर ईत्तरानधकारी आस प्रकक्रया को रोकने में ऄसमथष रहेIऔरंगजेब द्वारा ककए गए
िेत्रीय निस्तार ने साम्राज्य की शनि बढ़ाने के बजाय आसकी नीति को कमजोर कर कदया, नजसका मूल
कारण औरंगजेब की सामानजक-धार्थमक नीनतयां थीं। ये नीनतयां ईसके पूिषजों के निपरीत ऄसनहष्णु
और कट्टरता से प्रेररत थीं।

पतन के कारण ( Due to collapse )


ननम्ननलनखत शीषषकों के ऄंतगषत मुगल साम्राज्य के पतन के कारणों का निश्लेषण ककया जा सकता है:


1.2.1 राजनीनतक कारण


औरंगज़ेब के निशक्त उत्तराधिकारी


मुगल शासन व्यिस्था कें द्रीकृत होने के कारण सम्राटों के व्यनित्ि पर ऄत्यनधक ननभषर थी, आस प्रकार
कमजोर सम्राटों का प्रभाि प्रशासन के प्रत्येक िेत्र में पररलनित हुअ। औरंगजेब के पश्चात सत्तारूढ़ होने
िाले सभी सम्राट दुबषल थेI ऄतः िे अंतररक और बाह्य दोनों प्रकार की चुनौनतयों का सामना करने में
ऄसमथष रहे।


साम्राज्य का वहदआकार :


1687 इ. तक औरंगजेब ने दक्कन के प्रान्तों ,बीजापुर और गोलकुंडा को मुग़ल साम्राज्य में नमला नलया।
आसके पश्चात् िह कनाषटक को भी मुग़ल साम्राज्य में नमलाने के नलए प्रयत्नशील हो गया। निजयी िेत्रों में
नबना ककसी ठोस प्रशासन की व्यिस्था ककये, ननरंतर युद्ध में ईलझे रहने के कारण साम्राज्य ऄंदर से
कमज़ोर होता गया। साम्राज्य कमज़ोर होने से िेत्रीय शनियों जैसे मराठा अकद के ईदय के साथ-साथ
दरबारी मुग़ल ऄमीरों को भी षड्यंत्र करने का ऄिसर नमल गया । आसके साथ ही साम्राज्य की
भौगोनलक निनिधता एिं ईत्तम संचार व्यिस्था की कमी ने भी आसके तीव्र पतन का मागष प्रशस्त ककया I


मुग़ल अभिजात वर्ग्ग का पतन


जब मुगल भारत अए, तो ईनके पास एक साहनसक चररत्र था। परन्तु ऄत्यनधक धन, निलास और
ऄिकाश ने ईनके चररत्र को कमजोर कर ईन्हें ऄयोग्य एिं ईत्तरदानयत्ि निहीन कर कदया। ईनके
ऄधःपतन का मुख्य कारण ऄनभजात िगष का एक बंद ननगम के रूप में कायष करना था। एक ऄन्य कारण
ऄसाधारण जीिन शैली और निलानसता प्रदशषन जैसी ईनकी ख़राब अदतें भी थी। आन सबके कारण
बड़ी जागीरों के बािजूद कइ ऄनभजात िगष कदिानलया हो गए और आनका पतन प्रारंभ हो गयाI परन्तु
सम्पूणष ऄमीर िगष के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता ,क्योंकक आन्हीं के मध्य कुली खां,
ननजामुल-मुल्क, सअदत खां जैसे सुयोग्य ऄमीर भी थे, नजन्होंने ऄपने िेत्र में सुदृढ़ प्रशासननक व्यिस्था
स्थानपत करकेईसका http://निकास ककया।

दरबार में गुटबन्दी

औरंगज़ेब के ऄनन्तम कदनों में दरबार में ईमरा िगष प्रभािशाली गुटों में बंट गए थे। आन गुटों ने साम्राज्य
में शाश्वत राजनैनतक ऄशानन्त की नस्थनत ईत्पन्न कर दी थी। प्रत्येक गुट का प्रयत्न यह रहता था कक िह
सम्राट के कान भरे और सम्राट को दूसरे गुट के निरुद्ध कर दे। ये गुट अपस में छोटे-छोटे युद्ध भी लड़ते
रहते थे।निदेशी अक्रमणों के निरुद्ध भी ये गुट एक नहीं हो सके और अक्रान्ताओं से नमलकर षड्यन्त्र

रचने में लगे रहे,नजससे साम्राज्य का शासन लुप्तप्राय हो गया। यहााँ तक कक ननज़ामुलमुल्क और
बुरहानुलमुल्क ने नाकदरशाह से नमलकर कदल्ली प्रशासन के निरुद्ध षड्यंत्र रचे और ऄपने नननहत स्िाथों
के नलए साम्राज्य के नहतों का न्योछािर कर कदया।

ईत्तरानधकार का त्रुरटपूणष ननयम

मुगलों मेंज्येष्ठानधकार (Law of Primogeniture) का ननयम नहीं था। ऄतः मुगल शहजादे सम्राट
बनने के नलए स्ियं को समान रूप से योग्य समझते थे और ऄपने दािे के नलए लड़ने को तैयार रहते थे।
शनिशाली ‘शासक ननमाषता’ ईमरा िगष के िल ऄपने ननजी स्िाथों के नलए शासकों को ससहासन पर
बैठाते ऄथिा ईतारते थे। आस प्रकार ईत्तरानधकार के ननयमों का ऄभाि मुग़ल साम्राज्य के पतन का एक
कारण बना।

मराठों का ईत्थान

मुग़ल साम्राज्य के पतन का एक ऄन्य महत्त्िपूणष कारण था पेशिाओं के ऄधीन मराठों का ईत्थान। ईत्तर
भारत की राजनीनत में मराठे सबसे शनिशाली बन कर ईभरे तथा मुग़ल दरबार में सम्राट ननमाषता की
भूनमका ननभाने लगे। आसके साथ ही मराठों ने भारत को ऄहमद शाह ऄधदाली जैसे अक्रान्ता से बचाने
का प्रयास ककया। यद्यनप मराठे भारत में एक स्थाइ सरकार बनाने में ऄसफल रहे कफर भी ईन्होंने मुग़ल
साम्राज्य के निघटन में बहुत योगदान कदया।

सैन्य कारण

मुगल निघटन का एक ऄन्य कारण मुगल सेना की िमता में ह्रास और मनोबल में कमी था। मुगल
साम्राज्य के निघटन के मुख्य कारणों में से एक सेना का नैनतक पतन था। आसका मुख्य स्रोत सेना की
संरचनात्मक कमजोररयां थी। ऄनुशासन की कमी के कारण सेना एक भीड़ में बदल गयी I सैननकों में
ऄभ्यास का ऄभाि था, साथ ही ईनको पेशेिर प्रनशिण भी नहीं नमलता था। सैन्य ऄपराधों के नलए
कोइ ननयनमत सजा नहीं थीI औरंगजेब द्वारा भी राजद्रोह, कायरता और युद्ध के समय कतषव्य की
ईपेिा जैसे मामलों की ऄनदेखी की गयी । आसके ऄनतररि मुगलों की सैन्य व्यिस्था की कमजोरी के
बारे में यह तकष कदया जाता है कक ईनके हनथयार और युद्ध के तरीके काफी पुराने हो चुके थे।

जागीरदारी संकट

औरंगज़ेब के शासन के ऄंनतम काल में प्रशासननक व्यय को पूरा करने के नलए बड़ी मात्रा में जागीर भूनम
को खानलसा भूनम मेंपररिर्थतत ककया गया। िहीाँदसू री ओर नए मनसबदारों की ननयुनि जारी रही,
नजससे एक निरोधाभास की नस्थनत भी ईत्पन्न हो गयी थी। साथ ही ईि काल में िेत्रीय प्रशासन
कमज़ोर होने से जागीरों की जमादानी और हानसलदानी में अने िाले ऄंतर ने मनसबदारों की सैन्य
नस्थनत को कमज़ोर ककया जो मुग़ल साम्राज्य की रीढ़ कहे जाते थे।

अर्थथक कारण

शाहजहां के समय में कर की दर को ईत्पादन के अधे नहस्से तक बढा कदया गया था। भव्य आमारतों के
ननमाषण पर शाहजहां द्वारा ककए गए व्यय से साम्राज्य के संसाधनों पर भारी बोझ पड़ा। औरंगजेब के
दीघषकालीन दनिण युद्धों ने न केिल कोष ही ररि कर कदया ऄनपतु देश के व्यापार और ईद्योग को भी
नष्ट कर कदया। औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य को नित्तीय कदिानलयेपन का सामना करना
पड़ा, नजसकी शुरुअत औरंगजेब के समय और ईसकी मृत्यु के बाद ही हो गइ थी। युद्धों में सेना के
अिागमन से खड़ी फसलें नष्ट हो गईं। कृषकों ने तंग अकर कृ नष करना छोड़ कदया और लूटमार अरम्भ
कर कदया। नजसके फलस्िरूप माल नमलने में करठनाइ हुइ और ननयाषत प्रभानित हुअ। आस काल मेंटैक्स
फार्ममग की प्रणाली (ननजी नागररकों या समूहों को कर राजस्ि संग्रहण की नज़म्मेदारी सौंपना) का
सहारा नलया जाता था, हालांकक आस पद्धनत से सरकार को ज्यादा लाभ नहीं हुअ पर आसने लोगों की
नस्थनत को और ख़राब कर कदया

मुग़ल साम्राज्य के चरमोत्कषष काल में देशी बैंककग, बीमा एिं व्यापाररक संस्थान साम्राज्य के महत्त्िपूणष
सहयोगी थे, परन्तु औरंगज़ेब की मृत्यु के पश्चात्ईि संस्थानों ने िेत्रीय शनियों में ऄनधक स्थानयत्ि के
लिण देखकर आन्हें सहयोग देना प्रारम्भ कर कदया। आससे मुग़ल साम्राज्य अर्थथक कदिानलयेपन की ओर
बढ़ने लगा। कृ नष िेत्र में नगण्य ननिेश तथा अनितों की संख्या बढ़ना, भू-राजस्ि की दर में बढ़ोत्तरी,
समय के साथ नइ प्रौद्योनगकी का निकास न होना तथा शहरी जनसाँख्या का ग्रामीण िेत्र से प्राप्त
ऄनधशेष पर ननभषर रहना अकद जैसे कारणों ने साम्राज्य की अर्थथक नस्थनत को कमजोर कर कदया।

सामानजक कारण


नहन्दुओं के साथ हो रहे ऄत्याचार ने भी सामानजक ऄसंतोष को बढ़ा कदया थाI धार्थमक स्ितंत्रता और
सनहष्णुता के ऄभाि के कारण भी लोगों में एक रोष की भािना थीI गरीबों पर ऄनािश्यक कर
अरोनपत कर कदए गए थेI सभी गैर-मुनस्लम लोगों पर कर लगा कदया गया थाI

धार्थमक कारण


औरंगज़ेब स्िाभाि से बड़ा कट्टर था तथा आस्लामी कानून के ऄनुसार ही कायष करना चाहता था। परन्तु
आस कानून का निकास भारत के बाहर नबल्कुल ऄलग पररनस्थनतयों में हुअ था और यह ईम्मीद नहीं की
जा सकती थी कक यह भारत में भी कारगर नसद्ध होगा। औरंगज़ेब ने कइ ऄिसरों पर ऄपनी ग़ैर-
मुसलमान प्रजा की भािनाओं को समझने से आंकार कर कदया। मंकदरों के प्रनत ऄपनाइ गइ ईसकी नीनत
और आस्लामी कानून के अधार पर जनज़या को दोबारा लागू करके न तो िह मुसलमानों को ऄपने पि
में कर सका और न ही आस्लामी कानून पर अधाररत राज्य के प्रनत ईनकी ननष्ठा प्राप्त कर सका। आस
नीनत के कारण सतनामी, बुंदेलों और जाटों ने निद्रोह कर कदया तथा दूसरी ओर आस नीनत के कारण
नहन्दू भी ईसके नख़लाफ़ हो गये और ऐसे िगष सशि हो गये जो राजनीनतक तथा ऄन्य कारणों से मुग़ल
साम्राज्य के निरुद्ध थे

औरंगजेब की दनिण नीनत


दक्कन में ननरंतर युद्ध को जारी रखने की औरंगजेब की गलत नीनत मुगल साम्राज्य के नलए घातक नसद्ध
हुयी। ये युद्ध 27 साल तक जारी रहे तथा आससे साम्राज्य के संसाधनों को भारी िनत पहुंची।

बाह्य अक्रमण और यूरोपीय अगमन


1739 में नाकदरशाह के अक्रमण ने मरणासन्न मुगल राज्य को बहुत अघात पहुंचाया। राजकोष ररि
हो गया और सैननक दुबषलता स्पष्ट हो गइ। जो लोग मुग़ल नाम से भय खाते थे िे ऄब नसर ईठाने लगे
तथा मुगल सत्ता की खुलकर ऄिहेलना करने लगे।
मुग़ल सैन्य दुबषलता के कारण 18िीं शताधदी में भारत में सैननक सामन्तशाही का बोलबाला हो गया।
यूरोपीय कम्पननयां सैननक सामन्त बन गईं और शीघ्र ही भारतीय रजिाड़ों से व्यापार और सैननक सत्ता
में अगे ननकल गईं। आंनग्लश इस्ट आंनडया कंपनी के िेत्रीय लाभ ने मुगल साम्राज्य के पुनरुत्थान की सभी
संभािनाओं को ख़त्म कर कदया। ऄंग्रेजों ने प्लासी की लड़ाइ जीती साथ ही दक्कन और गंगा िेत्र में
ऄपने साम्राज्य का निस्तार जारी रखा। समय बीतने के साथ, िे पूरे भारत में ऄपनी पकड़ मजबूत करने
में सिम हो गए और मुगल साम्राज्य के पुनरुथान के नलए कोइ मौका नहीं छोड़ा।

मुग़ल साम्राज्य

नयी शनियों का ईत्थान


पंजाब में नसक्ख, राजपूताना में राजपूत, रुहेलखण्ड में रुहेला सरदार तथा अगरा एिं मथुरा में जाट
ऄनधक शनिशाली हो गए थे। बंगाल,ऄिध और हैदराबाद ने ऄपनी स्ितंत्रता की घोषणा पहले ही कर
दी थी।

May 28, 2020

सामाजिक व धार्मिक पुनर्जागरण व आंदोलन के बारे में कंप्लीट जानकारी

  • भारत में लगभग 18वीं शताब्दी में राष्ट्रीय पतन के समय आर्थिक व धार्मिक रूप से भारतीय समाज प्राचीन रूढ़िवादी में जकड़ा हुआ था। देश में महिलाओं की दयनीय स्थिति थी, कठोर जाति प्रथा, आधारहीन सामाजिक रीति रिवाज तथा बाल विवाह, बाल हत्या, विधवाओं के साथ अत्याचार आधी कुप्रथाओं में आमूलचूल परिवर्तन हुआ। पुनर्जागरण के द्वारा हमारे देश में भी सुधार प्रारंभ करने की प्रेरणा दी अतः इसी समय 19वी व 20 वीं सदी में धर्म सुधार आंदोलन प्रारंभ हुआ। इस समय महान समाज व धर्म सुधारकों ने हमारे समाज की कमियां में बुराइयों का विश्लेषण करके उन्हें दूर करने के प्रयास किए गए इनके द्वारा किए गए प्रयास ही सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन के नाम से जाने जाते हैं।

सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन के प्रमुख कारण

  • ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा बहुत अधिक देश का आर्थिक शोषण किया गया।
  • अंग्रेजों के समय भारत में नए मध्यम वर्ग का उदय हुआ- बुद्धिजीवी, डॉक्टर, शिक्षक, वकील, पत्रकार आदि।
  • अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार के माध्यम से शिक्षित भारतीय अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, फ्रांस की राज्य क्रांति वहां की बढ़ती हुई राष्ट्र भावना से परिचित हुए।
  • भारत में इस नवजागरण के द्वारा भारतीय समाज एवं धार्मिक विचारधारा क्रांतिकारी परिवर्तन हुए।
  • परिवर्तनों का श्रेय-राजा राममोहन राय एवं उनके ब्रह्म समाज, दयानंद सरस्वती एवं आर्य समाज, स्वामी विवेकानंद एवं रामकृष्ण मिशन, थियोसोफिकल सोसायटी तथा अलीगढ़ आंदोलन को है।
  • भारतीय समाज में ईश्वरचंद्र विद्यासागर का भी पर्याप्त योगदान रहा है। इन्होंने स्त्री शिक्षा, स्त्रियों के उद्धार एवं बाल विवाह पर रोक लगाने के प्रयास किए गए।

देखिए साथियों इस टॉपिक को आपको पूरा ध्यान से और अच्छे से पढ़ना है देखिए इस टॉपिक में आगे पढ़ेंगे जिन जिन व्यक्तियों का धार्मिक व सामाजिक सुधार आंदोलन में योगदान रहा है उनका विस्तार से अध्ययन करेंगे।

भारत में सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन से संबंधित प्रमुख व्यक्ति

  • शासन में स्थायित्व इस प्रकार के आंदोलनों को चलाने की स्थाई शर्त होती है। क्योंकि समाज नये परिवर्तन को आसानी से स्वीकार कर लेता है।

राजा राममोहन राय – ब्रह्म समाज

राजा राममोहन राय धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म (date of birth) – 22 मई 1772
  • जन्म स्थान (birth of palace) – बंगाल के हुगली जिले के राधानगर स्थान पर हुआ।
  • पिता का नाम – राधाकांत देव
  • माता का नाम – तारिणी देवी
  • भाई का नाम – जगमोहन राय
  • कुल विवाह – 3
  • प्रारंभिक शिक्षा – कोलकाता (बंगाली भाषा में)
  • राजा राममोहन राय ने कुल 3 विवाह किए। जिनमें से प्रथम दो कि जल्दी मृत्यु हो गई।
  • राम मोहनराय को प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में बंगाली भाषा में दी गई।
  • अरबी व फारसी की शिक्षा उन्होंने पटना के मदरसा में प्राप्त की थी।
  • वाराणसी में उन्होंने संस्कृत का अध्ययन किया था।
  • अंग्रेजी शिक्षा के लिए मुर्शिदाबाद के डिप्टी मजिस्ट्रेट जॉन बुडरोक डिप्टी के पास क्लर्क के पद पर कार्य किया।
  • राममोहन राय भारत की तुरंत स्वतंत्रता के पक्ष में नहीं थे। बल्कि वे चाहते थे कि अंग्रेज भारतीयों को प्रशासन में शामिल करके उन्हें शिक्षा प्रदान करें।
  • राममोहन राय ईसाई धर्म की नीति शास्त्र, इस्लाम धर्म के एकेश्वरवाद, सूफी धर्म के रहस्यवाद से प्रभावित थे।

राजा राम मोहन राय द्वारा किए गए प्रयास

  • 1807 ईस्वी में फारसी भाषा में मूर्ति पूजा के विरुद्ध तुहफाल उल मुवाहिदीन अर्थात एकेश्वरवादियों नामक लेख लिखा था।
  • 1811 ईसवी में इनके भाई जगमोहन की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी को सती किया गया। इस दृश्य को देखकर राजा राममोहन राय सती प्रथा के विरोधी हो गए।
  • 1814 ईसवी में कोलकाता में”आत्मीय सभा ” की स्थापना की ।
  • 1817 इसवी में डेविड हेयर को कोलकाता में हिंदू कॉलेज की स्थापना में सहयोग प्रदान किया।
  • 1821 में बंगाली भाषा में “संवाद कौमुदी” नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया। यह किसी भारतीय द्वारा देसी भाषा में प्रकाशित प्रथम समाचार पत्र था।
  • इसके अलावा 1822 में फारसी भाषा में “मिराततुल दर्पण” नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया।
  • राजा राममोहन राय को भारतीय पत्रकारिता का अग्रदूत कहा जाता है।

ब्रह्म समाज :-

  • 20 August 1828 को कोलकाता में कमल घोष के घर पर ब्राह्मण वर्ण की संस्था ब्रह्म समाज की स्थापना की स्थापना की।

ब्रह्म समाज के प्रमुख उद्देश्य

  • हिंदू समाज की बुराइयों को दूर करना।
  • ईसाई धर्म के भारत में बढ़ते प्रभाव को रोकना।
  • सभी धर्मों में आपसी एकता स्थापित करना।

ब्रह्म समाज के मूल सिद्धांत

  • ईश्वर एक है। वह सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक और सर्वगुण संपन्न है।
  • ईश्वर कभी भी शरीर धारण नहीं करता। इसलिए मूर्ति पूजा से ईश्वर नहीं मिलता है।
  • ईश्वर की प्रार्थना का अधिकार सभी जाति और वर्ग के लोगों को है। ईश्वर की पूजा के लिए मंदिर, मस्जिद आदि की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • सच्चे दिल से की गई प्रार्थना ईश्वर अवश्य सुनता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना आवश्यक है।
  • आत्मा अजर और अमर है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।
  • सभी धर्मों और धर्म ग्रंथों के प्रति आदर की भावना रखनी चाहिए।

मोहनराय के आगे के प्रयास

  • राजा राममोहन राय के प्रयासों से बंगाल के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिंग ने 4 दिसंबर 1829 को एक कानून लागू किया। जिसकी धारा 17 के तहत ब्रिटिश भारत को सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया गया।
  • 1833 के चार्टर में इसे संपूर्ण भारत में लागू कर दिया गया
  • राजा राममोहन राय के ही सहयोगी रहे राधाकांत देव 1830 में “धर्म सभा”की स्थापना कर दी। इसका विरोध किया गया।
  • 1830 में मुगल शासक अकबर द्वितीय ने अपनी पेंशन बढ़ाने के लिए राजा राममोहन राय को इंग्लैंड के साथ साथ विलियम चतुर्थ के पास भेजा। इस अवसर पर राजा की उपाधि दी गई।
  • बंगाल के नवाबों के द्वारा राजा राममोहन राय के पूर्वजों को राय की उपाधि दी गई।
  • यूरोप जाने वाले यह प्रथम भारतीय थे 27 सितंबर 1833 को इंग्लैंड के ब्रिस्टल शहर में डॉक्टर कारपेटर के निवास स्थान पर राजा राममोहन राय की मृत्यु हुई।
  • ब्रिस्टल में इनकी समाधि है क्योंकि उस समय इंग्लैंड में अग्नि दाह संस्कार की अनुमति नहीं होती थी।
  • उनकी समाधि पर अजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ के द्वारा लिखित ” हरीकेली नाटक”की पंक्तियों को भी लिखा गया है।

राजा राममोहन राय की पुस्तकें

राजा राममोहन राय के द्वारा निम्न पुस्तकें लिखी गई:-

  • The precepts of Jesus the Guide to peace and happiness
  • Precept of Jesus
  • तूहफात- उल-मुवाहेदिन

सुभाष चंद्र बोस ने राजा राम मोहन राय को युगदूत की उपाधि दी। इसके अलावा पुनर्जागरण का तारा अतीत तथा भविष्य के मध्य सेतु तथा राष्ट्रवाद का जनक कहा जाता है।

  • राजा राममोहन राय के बाद द्वारिका नाथ टैगोर ने ब्रह्म समाज का नेतृत्व किया।
  • 1843 में उन्होंने अपने बेटे देवेंद्रनाथ टैगोर को ब्रह्म समाज का नेतृत्व सौंपा।
  • 1857 में केशव चंद्र सेन ब्रह्म समाज के सदस्य बने व 1862 में आचार्य के पद पर नियुक्त हुए।

केशव चंद्र सेन

  • केशव चंद्र सेन के कारण ब्रह्म समाज को पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया था क्योंकि केशव चंद्र सेन ने कोलकाता से बाहर प्रसार किया सभी वर्णो धर्मों के लोगों को इसका सदस्य बनाया।
  • इस कारण से देवेंद्र नाथ से इनका विवाद हो गया।
  • 1865 में केशव चंद्र सेन को ब्रह्म समाज से निष्कासित किया गया था।
  • 1866 में केशव चंद्र सेन ने भारतीय ब्रह्म समाज की स्थापना की जो समाज देवेंद्र नाथ के नेतृत्व में रह गया उसे आदि ब्रह्म समाज कहां गया।
  • भारतीय ब्रह्म समाज के कारण 1872 में अंतर्जातीय व विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लागू हुआ जिसमें की बाल विवाह को अपराध घोषित किया गया था
  • परंतु स्वयं केशव चंद्र सेन ने 1878 में अपनी 12 वर्षीय पुत्री सुनीति देवी का विवाह कूचबिहार (पश्चिम बंगाल) के युवराज निपेंद्र नारायण से कर दिया।
  • इसी कारण भारतीय ब्रह्म समाज में फूट पड़ी जिन लोगों ने केशव चंद्र सेन का साथ छोड़ा उनको समाज को साधारण ब्रह्म समाज कहां गया जिसका नेतृत्व आनंद मोहन गोष व सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने किया।

प्रार्थना समाज

  • प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 ईसवी में मुंबई में आत्माराम पांडुरंग ने की थी।
  • एमजी रानाडे, आरजी भंडारकर भी इससे जुड़ गए।
  • इन्होंने भी जाति प्रथा का विरोध किया व अंतरजातीय विवाह एवं विधवा विवाह का पुरजोर समर्थन किया
  • इन्होंने विधवा पुनर्विवाह एसोसिएशन की स्थापना की।

स्वामी दयानंद सरस्वती – आर्य समाज

स्वामी दयानंद सरस्वती

  • जन्म – 12 फरवरी 1824
  • जन्म स्थान – गुजरात के मोरवी जिले के टंकारा नामक गांव में हुआ।
  • बाल्यावस्था का नाम – मूलशंकर
  • 24 साल की आयु में दंडस्वामी पूर्णानंद से शिक्षा प्राप्त की।
  • इसके बाद इन्हें दयानंद सरस्वती नाम दिया गया।
  • 1860 में मथुरा के आचार्य विरजानंद से इन्होंने वेदों की शिक्षा ली जिसके बाद नारा दिया था-वेदो की ओर लोटो
  • इन्हें दयानंद नाम अपने गुरु विरजानंद ने दिया था।

शुद्धि आंदोलन

  • स्वामी दयानंद सरस्वती ने भारत में शुद्धि आंदोलन चलाया क्योंकि यह डलहौजी के 1850 ईसवी के लागू किए गए धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम की धारा 21 की प्रतिक्रिया के वादी के कारण चलाया।
  • इन्होंने वैदिक धर्म में व्याप्त बुराइयों के विरुद्ध पाखंड खाउनि पताका को फहराया
  • उन्होंने स्वराज्य शब्द का प्रथम बार प्रयोग किया।

स्वामी दयानंद सरस्वती का कथन

  • इनका कथन था” बुरे से बुरा देसी राज्य अच्छे से अच्छे विदेशी राज्य की तुलना में बेहतर होगा”

एनीबेसेंट का कथन

एनीबेसेंट

  • एनी बेसेंट का कथन था “भारत भारतीयों का है। यह लिखने वाले दयानंद सरस्वती प्रथम भारतीय थे।

आर्य समाज

  • 10 April 1875 को उन्होंने मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की।
  • 1877 में इसके मुख्यालय को लाहौर में स्थानांतरित किया गया।
  • केशव चंद्र सेन के कहने पर इन्होंने आर्य समाज की पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश का लेखन कार्य हिंदी भाषा में किया गया। इसे मुंबई में लिखना प्रारंभ किया गया।
  • इसका अधिकांश भाग उदयपुर में लिखा गया व अजमेर में इसका प्रारंभिक प्रकाशन है।
  • राजस्थान में 4 शासक इनके शिष्य थे :-
  • मदनपाल – करौली
  • नारसिंह – शाहपुरा
  • सज्जन सिंह – उदयपुर
  • जसवंतसिंह -ll – जोधपुर

दयानंद सरस्वती के बारे में

  • जसवंत सिंह-ll तथा इनके प्रधानमंत्री प्रताप सिंह नए-नए आमंत्रण देकर जोधपुर बुलाया था।
  • जसवंत सिंह-ll की प्रेमिका नन्ही जान ने बड़ा काम करते हुए दयानंद सरस्वती को भोजन में कांच पीसकर या जहर मिलाकर खिला दिया।
  • इलाज के लिए इन्हें माउंट आबू ले जाए ले जाया गया।
  • 30 अक्टूबर 1883 को अजमेर में इनकी मृत्यु हो गई।
  • वेलेंटाइन शिरोल ने अपने पुस्तकें unrest india मैं तिलक व आर्य समाज को भारतीय अशांति का जन्मदाता कहा गया।
  • दयानंद सरस्वती के बाद शिक्षा को लेकर आर्य समाज के दो गुट बन गए थे।

आर्य समाज के दो गुट

  • प्राच्य अर्थात देसी शिक्षा के समर्थक लाला मुंशी राम थे।
  • इन्होंने 1901- 02 में हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की।
  • इसमें वैदिक शिक्षा दी जाती थी।
  • मुंशी राम स्वामी श्रद्धानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए इन्हीं के द्वारा महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में 1500 रुपए का मनी ऑर्डर किया था। इन्हीं के पैसों की टिकट खरीद कर महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत आए।
  • पाश्चात्य शिक्षा के समर्थक लाला हंसराज व लाला लाजपत राय थे। इन्होंने 1886 में दयानंद एंग्लो वैदिक स्कूल की स्थापना की। तथा इसमें 1889 में कॉलेज बनाया गया।

स्वामी विवेकानंद

धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म – 12 जनवरी 1863
  • जन्म स्थान – कोलकाता
  • बाल्यावस्था का नाम – नरेंद्र नाथ दत्त
  • पिता का नाम – विश्वनाथ
  • माता का नाम – भुनेश्वरी देवी
  • कोलकाता में स्थित काली माता के मंदिर (दक्षिणेश्वर) के पुजारी गजाधर आचार्य या रामकृष्ण परमहंस से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की।
  • खेतड़ी के शासक अजीत सिंह विवेकानंद के मित्र थे। दोनों की प्रथम मुलाकात मुंबई में जोधपुर के प्रधानमंत्री प्रताप सिंह ने करवाई।
  • विवेकानंद तीन बार खेतड़ी आए:-
  • 1891
  • 1893
  • 1897
  • जब यह दूसरी बार आए थे तब अजीत सिंह ने इनको विवेकानंद नाम दिया व पगड़ी प्रदान की।

अजीत सिंह

  • अजीत सिंह ने इनके लिए नृत्य का आयोजन रखा। परंतु नृत्यांगना मैणा बाई ने जैसे ही नृत्य प्रारंभ किया विवेकानंद उठकर जाने लगे और मैणा बाई ने सूरदास का भजन सुनाया, विवेकानंद ने इनको मां बोलकर संबोधित किया।

1893 में शिकागो में प्रथम विश्व धर्म संसद जनवरी का आयोजन किया गया।

  • रामानंद रियासत (तमिलनाडु) के शासक भास्कर सेथूपल्ली ने विवेकानंद के लिए तृतीय श्रेणी के टिकट करवा कर दी। इसको पता चलने पर अजीत सिंह ने अपने मुंशी जगमोहन लाल को भेजा।
  • जगमोहन लाल ने ओरियंट कंपनी पेनिनशूना जहाज के प्रथम श्रेणी के टिकट करवा दी।
  • ग्यारह सितंबर 1893 में शिकागो में आयोजित प्रथम विश्व धर्म संसद में भाषण दिया था।
  • इस संसद के अध्यक्ष जॉन हैरास बोरो थे ।

न्यूयॉर्क हेराल्ड

  • अगले दिन अमेरिका के समाचार पत्र न्यूयॉर्क हेराल्ड ने लिखा था इस युवा तूफानी प्रचारक को सुनने के बाद पश्चिम देशों के द्वारा भारत में धर्म प्रचारक भेजना एक मूर्खतापूर्ण कार्य है।
  • इसके बाद 1895 में उन्होंने न्यूयॉर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना की।
  • इसके बाद में इंग्लैंड आए जहां माग्रेट नोबेल इनकी शिष्य बनी थी। जोकि सिस्टर निवेदिता के नाम से प्रसिद्ध हुई।
  • इसके बाद ये श्रीलंका आए तथा पूर्व में अपना प्रथम सार्वजनिक भाषण उन्होंने कोलंबो में दिया था इसके बाद ये भारत आए।
  • 1 मई 1897 को कोलकाता के बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना हुई।
  • इसके अलावा उत्तराखंड के अल्मोड़ा नामक स्थान पर मायावती मठ स्थापित किया गया।
  • 1899 में यह पुन: अमेरिका गए। 1900 ईसवी में पेरिस में आयोजित विश्व शांति सम्मेलन में भाग लिया।
  • 4 July 1902 वेल्लूर मठ में स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हुई।
  • सुभाष चंद्र बोस ने विवेकानंद को भारत का अध्यात्मिक पिता कहां।

विवेकानंद की प्रसिद्ध पुस्तकें

  • मैं समाजवादी हूं
  • राजयोग
  • ज्ञान योग
  • कर्म योग
  • My master
  • A journey from Colombo to to Almora

स्वामी विवेकानंद के प्रमुख कथन

  • हमारा धर्म केवल रसोई घर तक सीमित हो गया है।
  • मैं ऐसे प्रत्येक शिक्षित भारतीयों को देशद्रोही मानता हूं जिसकी शिक्षा का लाभ निम्न वर्ग के लोगों तक ना पहुंचे।
  • उठो जागृति हो वह तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए।

रामकृष्ण परमहंस

रामकृष्ण परमहंस धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म – 18 फरवरी 1836
  • जन्म स्थान – बंगाल के कमरपुकर
  • पिता का नाम – शुदीराम
  • माता का नाम – चंद्रा देवी
  • असली नाम – गदाधर चट्टोपाध्याय
  • रामकृष्ण मठ की स्थापना रामकृष्ण ने की
  • रामकृष्ण परमहंस के सर्वाधिक प्रिय शिष्य नरेंद्र नाथ दत्त थे।

थियोसोफिकल सोसाइटी

  • स्थापना – 1875
  • कहां पर की गई – अमेरिका में
  • किसके द्वारा की गई – मैडम एच. पी. ब्लावेटस्की और हेनरी स्टील आलकॉट
  • इस सोसाइटी के द्वारा हिंदू धर्म को विश्व का सबसे अध्यात्मिक धार्मिक माना है।
  • 1882 में मद्रास के समीप अंतरराष्ट्रीय कार्यालय स्थापित किया गया ।
  • भारत में इस आंदोलन का श्रेय एक आयरिश महिला श्रीमती एनी बेसेंट को दिया गया जो कि 1893 में भारत आई और इस संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रचार प्रसार में लग गई।
  • श्रीमती एनी बेसेंट ने 1898 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की जो 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयास से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में परिवर्तित हो गया।

मुस्लिम सुधार आंदोलन

हमदिया आंदोलन

मिर्जा गुलाम अहमद

  • इस आंदोलन का प्रारंभ 1889-90 में मिर्जा गुलाम अहमद ने फरीदाकोट में किया
  • इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मुसलमानों में आधुनिक बौद्धिक विकास प्रचार करना था।
  • मिर्जा गुलाम अहमद ने हिंदू देवता कृष्णा और ईशा मसीह के अवतार होने का दावा किया ।

अलीगढ़ आंदोलन

सर सैयद अहमद

  • इस आंदोलन को सर सैयद अहमद के द्वारा चला गया।
  • वो इस आंदोलन के माध्यम से मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा का प्रसार करना चाहता था।
  • इसने 1865 में अलीगढ़ मैं मोमडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की जो कि बाद में 1890 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बन गया।
  • इस आंदोलन के माध्यम से सर सैयद अहमद में मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया।

देवबंद आंदोलन

  • यह आंदोलन रूढ़िवादी मुस्लिमों के द्वारा चलाया गया इसका प्रमुख उद्देश्य विदेशी शासन का विरोध करना और मुसलमानों में कुरान की शिक्षा का प्रचार प्रसार करना
  • यह आंदोलन मोहम्मद कासिम ननौतवी व रशीद अहमद गंगोही के द्वारा 1867 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में इस आंदोलन की स्थापना की
  • यह अलीगढ़ आंदोलन का विरोधी था।
  • देवबंद के नेता भारत में अंग्रेजी शासन के विरोधी थे उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा का विरोध किया।

सिख समुदाय आंदोलन

  • 19वीं सदी में सिक्कों की संस्था सरीन सभा की स्थापना हुई।
  • पंजाब का कुक आंदोलन सामाजिक व धार्मिक आंदोलन से संबंधित था।
  • जवाहर मल और रामसिंह ने कूका आंदोलन का नेतृत्व किया
  • पंजाब के अमृतसर में सिंह सभाआंदोलन चलाए गया।
  • इन आंदोलनों के परिणाम स्वरूप 1922 में सिख गुरुद्वारा अधिनियम पारित किया गया जो कि आज तक भी कार्य कर रही है।

प्रमुख अन्य संस्थाएं और आंदोलन

  • 1861 में शिवदयाल साहिब में आगरा में राधास्वामी आंदोलन चलाया।
  • 1887 में नारायण अग्निहोत्री ने लाहौर में देव समाज की स्थापना की थी।
  • गोपाल कृष्ण गोखले ने सन् 1851 में समाज सुधार के लिए भारतीय सेवा समाज की स्थापना की।
  • सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिबा फुले ने की थी। इन्होंने गुलामगिरी नाम के पुस्तक की रचना भी की थी।
  • केरल के बायकोम मंदिर में अछूतों के प्रवेश हेतु एक आंदोलन चलाया गया जिसका नेतृत्व श्री नारायण गुरु ने किया।
  • एन मुदालियर ने जस्टिस पार्टी की स्थापना की ।
  • 1924 में अखिल भारतीय दलित वर्ग की स्थापना बीआर अंबेडकर ने की थी तथा 1927 में बहिष्कृत भारत के नामा के के पत्रिका का प्रकाशन किया
  • 1932 में हरिजन सेवक संघ की स्थापना महात्मा गांधी के द्वारा की गई।
  • 1942 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के द्वारा अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की स्थापना की गई
  • भारत में महिलाओं के विकास के लिए श्रीमती एनी बेसेंट ने मद्रास में 1917 में भारतीय महिला संघ की स्थापना की ।
  • 1920 में रामास्वामी नायकर दक्षिण भारत में आत्मसम्मान आंदोलन चलाया था।

ठीक है साथियों मुझे आशा है कि आपको यह जानकारी पढ़कर आपको अच्छा लगा होगा और आपकी परीक्षा की दृष्टि से यह टॉपिक सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन बहुत ही उपयोगी साबित होगा इसमें से काफी अच्छे सवाल पूछे जाते हैं जोकि आप इसे पढ़कर अच्छे से उत्तर दे पाएंगे यदि आपको सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन इससे संबंधित जानकारी अच्छी लगी है तो आप मुझे कमेंट करके बताएं और अपने दोस्तों को आगे भी फॉरवर्ड करें धन्यवाद।

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May 25, 2020

भारत में राष्ट्रवाद का उदय और विकास/Rise of Indian Nationalism

राष्ट्रवाद-Nationalism राष्ट्रवाद वह भावना है। जो लोगों को एक साथ एकता के सूत्र में बांधती है व स्वराज के प्रति एक ठोस आधार प्रदान करती है। यह लोगों में चेतना प्रदान करने में समाज सुधार को, राष्ट्रवादी नेताओं, व राजनीतिक संस्थाओं, शिक्षा प्रणाली आदि तत्वों का योग रहा है।

कुछ महत्वपूर्ण शब्द

  • राष्ट्रवाद
  • समाज सुधारक
  • शिक्षा प्रणाली
  • समाचार पत्र
  • राष्ट्रीय आंदोलन

भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण और विकास- CAUSES OF THE RISE OF NATIONALISHM

  • भारत में राष्ट्रीय उदय के कारण और विकास में अनेक कारणों का योग रहा है। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इन कारणों को निम्नलिखित भागों में बांटा गया है जो कि निम्न प्रकार से है। :-

आर्थिक नीतियां

  • 1901 ईस्वी में रमेशचंद्र दत्त ने इकोनॉमिक्स हिस्ट्री ऑफ इंडिया नामक पुस्तक लिखी थी। जिसमें 3 चरणों का उल्लेख किया गया था। इन तीनों चरणों में अंग्रेजों ने भारत का आर्थिक शोषण किया।

(A). सीधी लूट (1757-1813) :-

  • प्लासी के युद्ध में विजय के पश्चात बंगाल में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन स्थापित हो गया था।
  • कंपनी अब बंगाल के नवाब को बनाने लगी थी इसके बदले हमसे अत्यधिक रिश्वत लेने लगी तथा व्यापार में भी हिस्सेदारी मांगने लगी।
  • कंपनी कम कीमत में सूती रेशमी वस्त्र व गर्म मसालों को खरीद कर इंग्लैंड व यूरोप के बाजारों में महंगी कीमत पर बेचने लगी। जिससे कंपनी की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई।
  • इसी चरण में इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति हो चुकी थी। मशीनों से उत्पादन अधिक होने लगा इसलिए वहां के पूंजीपतियों ने वहां की सरकार पर दबाव डाला कि उन्हें भी भारत में व्यापार करने की अनुमति दी जाए।

(B). स्वतंत्र व्यापारिक पूंजीवाद (1813-1858) :-

  • 1813 के चार्टर में ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया था कंपनी को केवल चाय व चीन देश के साथ व्यापार पर एकाधिकार रहा।
  • इस चरण में इंग्लैंड की कई कंपनियां भारत आई। यहा से कच्चा माल इंग्लैंड ले जाकर उत्पाद के रूप में परिवर्तित करती और पुन: भारत लाकर बेच दिया जाता था
  • इसी चरण में भारत का हथकरघा उद्योग समाप्त हो गया। क्योंकि भारतीय बुनकरों के पास कच्चा माल ही उपलब्ध नहीं हो पाया।
  • बंगाल के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिंग ने कहा था कि भारतीय बुनकरों की हड्डियां भारत के मैदानों में बिखरी पड़ी हैं।
  • इसी चरण में 1857 की क्रांति हो चुकी थी।

(C). वित्तीय पूंजीवाद (1858-1940) :-

  • 1 नवंबर 1958 को ईस्ट इंडिया का शासन समाप्त कर दिया गया था।
  • भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन को सौंपा गया तथा इसमें यह भी लिखा गया कि क्राउन भारत का शासन इंग्लैंड की संसद के द्वारा चलाएगा।
  • इसी चरण में इंग्लैंड की सरकार ने वहां के पूंजीपतियों को प्रस्ताव दिया। भारत में निवेश करने पर 5% शुद्ध लाभ की गारंटी दी जाएगी अत: कई निवेशकों ने भारत में निवेश किया।
  • सर्वाधिक निवेश रेलवे में किया गया इसके अलावा निम्न क्षेत्रों में निवेश किया गया :-
  • बीमा
  • बैंकिंग
  • मेडिकल
  • जॉन सुलीववान ने कहा था कि हमारी व्यवस्थाए स्पंज की तरह काम करती है जो गंगा नदी से सभी अच्छी वस्तु को सौंप कर टेम्स (लंदन) के किनारे निचोड़ देती है।

धन निष्कासन का सिद्धांत :-

  • सर्वप्रथम दादा भाई नौरोजी ने 1867-68 में लिखे गए अपने लेख”England Debit to India” मैं धन निष्कासन का सिद्धांत दिया था। तथा इसकी विस्तारित व्याख्या अपनी पुस्तक” पॉवरटी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया”में की थी।
  • इसके अलावा दादा भाई नौरोजी ने ऑन द कॉमर्स ऑफ इंडिया तथा The wants and means rule in India नामक पुस्तक लिखी।
  • रमेशचंद्र दत्त ने इस धन के निष्कासन को”भारतीयों के सीने पर एक बहता हुआ घाव बताया”
  • 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इस धन निष्कासन के सिद्धांत को मान्यता दी गई।

2. कृषि पर प्रभाव

  • भारत में राष्ट्रवाद के उदय और विकास से कृषि पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े जो कि निम्न प्रकार से है आइए इन्हें देखते हैं। :-

(A). स्थाई बंदोबस्त :-

  • 1793 में इसे कार्नवालिस के द्वारा निम्न क्षेत्रों में लागू किया गया। :-
  • बंगाल
  • बिहार
  • उड़ीसा
  • वाराणसी
  • उत्तरी कर्नाटक के जिले
  • यह ब्रिटिश भारत के 19% भूभाग पर विस्तृत थी इसमें 1/11 भाग जमीदार को व 10/11 भाग कंपनी को मिलता था।
  • इस व्यवस्था में सूर्यस्त कानून था। अगर जमीदार समय पर राजस्व जमा नहीं करवा पाता था तो उससे जमीदारी छीन ली जाती थी।
  • सबसे ऊंची बोली लगाने वाले जमीदार को जमीदारी शॉप दी जाती थी।
  • राजा राममोहन राय ने इसका समर्थन किया था।

(B). रैयतवाड़ी :-

  • इसमें रैयत अर्थात किसान के साथ समझौता किया जाता था।
  • ब्रिटिश भारत के 57 परसेंट भूभाग पर विस्तृत थी इसमें उपज का 33 से 55 परसेंट वसूल किया जाता था।
  • सर्वप्रथम 1792 में कैप्टन रीड ने इसे तमिलनाडु के बारामहल जिले में लागू किया था।
  • मुंबई में एलफिंसटन व मद्रास में मुनरो के द्वारा इसे लागू किया गया।

(C) महालवाड़ी :-

  • इसमें गांव के समूह के साथ समझौता किया गया।
  • ब्रिटिश भारत के 30 परसेंट भूभाग पर विस्तृत थी व उपज का 66 परसेंट वसूल किया जाता था।
  • इसे आगरा, अवध, पंजाब के क्षेत्रों में लागू किया गया।
  • उत्तरी भारत की कृषि व्यवस्था का जनक Martin बर्ड को माना जाता है ।

3. प्रशासनिक नीतियां :-

  • 1857 की क्रांति में हिंदुओं तथा मुसलमानों ने समान रूप से भाग लिया।इसके बाद अंग्रेजों ने मुसलमानों के प्रति तुष्टीकरण की नीति अपनाई।
  • William hunter ने अपनी पुस्तक”इंडियन मुसलमान मैं लिखा है कि-अगर अंग्रेजों को भारत में लंबे समय तक राज्य करना है तो मुसलमानों को अपने पक्ष में करना होगा।
  • अंग्रेजों ने सैयद अहमद आगा खां को मुसलमान का नेतृत्व सौंपा
  • इन्होंने 1875 में अलीगढ़ स्कूल खुलवाकर दी तथा 1877 में इसे कॉलेज बना दिया गया।
  • आरचीबोल्ड इसी कॉलेज के प्रिंसिपल थे जिन्होंने पृथक निर्वाचन क्षेत्र का प्रारूप तैयार किया था। इसी प्रारूप को लेकर अक्टूबर 1906 को सैयद अहमद आगा खां के नेतृत्व में कुछ मुस्लिम प्रतिनिधि शिमला गए तथा वायसराय मिंटो-ll से मुलाकात की व मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र मांगा।

मार्ले मिंटो अधिनियम 1909

  • 1909 के मार्ले मिंटो अधिनियम में मुसलमानों को पृथक निर्वाचन क्षेत्र प्रदान कर दिया गया।
  • मार्ले इस समय भारत सचिव था तथा इसने वायसराय मिंटो को पत्र भी लिखा था की हम चांगदल के बीज बो रहे हैं इसके परिणाम अत्यंत घातक होंगे।
  • 1876 के शाही राजसी अधिनियम के तहत इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को भारत की महारानी घोषित किया गया।
  • इस कारण से 1877 में वायसराय लिंटन ने दिल्ली के दरबार का आयोजन किया, जिस पर बहुत अधिक पैसा खर्च किया गया था जबकि इस समय भारत में अकाल की स्थिति थी।

वर्नाकुलर प्रेस एक्ट :-

1878 में लिटन ने वर्नाकुलर प्रेस एक्ट लागू किया जिसके तहत देसी भाषाओं के समाचार पत्रों को सेंसरशिप लागू कर दी गई। अर्थात इस समाचार पत्र को प्रकाशित होने से पहले सरकार के पास भेजा जाता था अगर शासन विरोधी कोई बात लिखी होती तो इसका प्रकाशन नहीं हो पाता था।

  • 1883 में वायसराय रिपन के समय मुख्य न्यायाधीश इल्बर्ट ने एक बिल पारित किया इसके अनुसार कोई भी भारतीय न्यायधीश किसी भी यूरोपीय व्यक्ति के मुकदमे की सुनवाई कर सकता था।
  • इसका संपूर्ण यूरोप में विरोध हुआ और इल्बर्ट को अपना बिल वापस लेना पड़ा।

4. जातीय भेदभाव :-

  • जातीय भेदभाव की भावना ने भारतीयों को राष्ट्रीय रूप में एक होने को प्रेरित किया। जातिभेद के आधार पर अंग्रेज भारतीयों से घृणा करते थे और उनके साथ बुरा व्यवहार करते थे
  • अंग्रेज केवल अपने कोई नहीं बल्कि समस्त यूरोपीय जाति को एशियाई जाति से ऊंचा मानते थे तथा वे चाहते थे कि भारतीय भी इस बात को स्वीकार करें अंग्रेज जातीय और सांस्कृतिक रूप से ऊंचे हैं। इस व्यवहार के कारण ही भारतीयों को एक होने को मजबूत किया था।

महत्वपूर्ण सूचना

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भारतीय राष्ट्रवाद

May 24, 2020

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन-Indian national moment

राष्ट्रीय आंदोलन

भारत का राष्ट्रीय आंदोलन 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रारंभ हो गया था स्वतंत्रता किस राष्ट्रीय आंदोलन में लाखों लोगों एवं राष्ट्रवादी नेताओं ने सक्रिय रूप से भाग लेकर शक्तिशाली अंग्रेजी शासन को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया और अतः इन्हें देश छोड़कर जाना पड़ा ।

भारत में राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय आंदोलन के विकास की प्रक्रिया बड़ी जटिल एवं बहुमुखी है

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्भव और विकास में अनेक कारणों का योग रहा है आइए इन कारणों को देखते हैं :-

साइमन कमीशन

  • एक्ट 1919 की धारा 84A. लिखा गया कि इस एक्ट के कारण भारत में उत्तरदायी सरकार की स्थापना कितना प्रयास हुआ
  • इसके लिए 10 वर्षों के पश्चात एक कमीशन भारत भेजा जाएगा।
  • इस समय इंग्लैंड में कंजरवेटिव पार्टी के प्रधानमंत्री बाल्डविन की सरकार थी
  • जिन्हें इस बात का डर था की 1928 इंग्लैंड में होने वाले चुनाव में लेबर पार्टी सत्ता में आ सकती है।
  • इसलिए 1927 में जॉन साइमन की अध्यक्षता में 7 सदस्यों वाली साइमन कमीशन का गठन किया गया।
  • भारत के वायसराय इरविन की सलाह पर इसमें किसी भारतीयों को शामिल नहीं किया गया इसलिए इसे श्वेत कमीशन भी कहा गया।
  • इसके सातों सदस्य अंग्रेज थे
  • क्लीमेंट एटली इसी का एक सदस्य था भारत की स्वतंत्रता के समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री के पद पर 3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन भारत पहुंचा।
  • साइमन कमीशन दो बार भारत आया :-
  • फरवरी-March 1928
  • October 1928-अप्रैल 1929
  • जब साइमन कमीशन दूसरी बार भारत आया तब लाहौर में हुए विरोध प्रदर्शन के समय लाला लाजपत राय लाठीचार्ज में 30 अक्टूबर 1928 को घायल हो गए।
  • 17 नवंबर 1928 को लालजी की मृत्यु हो गई।
  • लाला लाजपत राय ने कहा था कि” मेरे शरीर पर पड़ी प्रत्येक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।
  • साइमन कमीशन जब प्रथम बार भारत आया था उस समय इसके विरोध के कारण भारत सचिव वीकैनहाइड ने भारतीयों को स्वय का संविधान बनाने की चुनौती दी।
  • मोतीलाल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई जिसने भारत के लिए प्रथम संविधान लिखा।
  • 10 अगस्त 1928 को नहेरू रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया इसमें मांगे थी!

प्रमुख मांगे

  • भारत को डोमिनियन स्टेट (औपनिवेशिक राज्य) का दर्जा इसका अर्थ है
  • रक्षा विभाग संचार व विदेश विभाग इंग्लैंड के पास रहे बाकी मामले में भारत को स्वतंत्र कर दिया जाए !
  • केंद्र में द्विसदनात्मक प्रणाली लागू की जाए।
  • भाषा के आधार पर प्रांतों को गठन हो।
  • शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच।
  • मूल अधिकार 19, व्यस्क मताधिकार,
  • सिंध को मुंबई से अलग प्रांत बनाया जाए।

जिन्ना की चार मांगे

  • पृथक निर्वाचन को समाप्त करके संयुक्त निर्वाचन लागू किया जाए।
  • केंद्र में मुसलमानों को 1/3 आरक्षण दिया जाए।
  • जिन स्थानों पर मुस्लिम आबादी अधिक है वहां उन्हें आरक्षण दिया जाए।
  • सिंध बलूचिस्तान मुस्लिम प्रांत बनाया जाए परंतु इसका हिंदू महासभा के द्वारा विरोध किया गया।

इस कारण से मोहम्मद सफी के नेतृत्व में मुस्लिम लीग के कुछ कार्यकर्ता साइमन कमीशन के सदस्य बन गए अन्यथा जब पहली बार साइमन कमीशन आया तब मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया था।

उस समय साइमन कमीशन मद्रास की जस्टिस पार्टी, पंजाब की यूनियनिस्ट पार्टी, बंगाल की कृषक प्रजा पार्टी, अंबेडकर की डिस्प्लेस क्लास एसोसिएशन साइमन कमीशन का समर्थन किया।

नहरू

  • दिसंबर 1928 को कांग्रेस का अधिवेशन कोलकाता में मोतीलाल तेजावत की अध्यक्षता में हुआ।
  • नेहरू रिपोर्ट को लागू करने के लिए सरकार को 1 वर्ष का समय दिया गया।
  • दिसंबर 1929 में कांग्रेस का अधिवेशन लाहौर में हुआ। और इसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
  • नेहरू जी को कांग्रेस का प्रथम समाजवादी अध्यक्ष मानते हैं।
  • नेहरु जी ने पूर्ण स्वराज की मांग की।
  • सरकार को पुनः एक माह का समय दिया गया तथा नेहरू रिपोर्ट लागू न करने पर 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने आधुनिक भारत के इतिहास को प्रथम पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
  • गांधी जी ने यंग इंडिया नामक समाचार पत्र के माध्यम से वायसराय इरविन के समक्ष 11 मांगे रखी जिन पर इरविन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
  • गांधीजी ने कहा कि” मैंने रोटी मांगी थी और मुझे पत्थर मिले।

सविनय अवज्ञा आंदोलन

  • गांधी जी ने नमक के मुद्दे को लेकर यह आंदोलन प्रारंभ किया।
  • नमक सरकारी राशन की दुकानों पर मिलता था व इसकी कीमत बहुत ज्यादा होती थी।
  • 12 मार्च 1930 को गांधी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से यात्रा प्रारंभ करके 24 दिन 358 किलोमीटर (241 मील) की यात्रा के बाद 5 अप्रैल 1930 को गुजरात की साबरमती जिले में स्थित दांडी नामक स्थान पर पहुंचे।
  • 6 अप्रैल 1930 को नमक बनवाकर कानून का उल्लंघन किया और इसी के साथ भारत में आंदोलन प्रारंभ हो गया।
  • इस अवसर पर गांधी जी ने कहा था कि” राजद्रोह करना मेरा धर्म बन चुका है।

सुभाष चंद्र बोस

  • सुभाष चंद्र बोस ने कहा कि इस यात्रा की तुलना नेपोलियन की एल्बा दीप से लेकर पेरिस की यात्रा तक की है।
  • बलूचिस्तान के लोगों ने गांधी को मलंग बाबा की उपाधि प्रदान की।
  • बलूचिस्तान में अब्दुल गफ्फार खा या सीमांत गांधी ने आंदोलन का नेतृत्व किया।
  • इनकी पार्टी का नाम खुदाई खिदमतगार या लाल कुर्ती दल था।
  • नागालैंड की 13 वर्षीय बालिका Godin न्यू रानी के द्वारा आंदोलन चलाया, इसे नेहरू ने रानी की उपाधि दी थी।
  • इंदिरा गांधी ने बालकों को वानर सेना वह बालिकाओं को मंजरी सेना का गठन किया।
  • असम के छात्रों द्वारा कनिघम पत्र का विरोध किया गया।
  • पेशावर में चंद्र सिंह गढ़वाल के नेतृत्व में गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों ने जुलूस पर गोली चलाने से मना कर दिया इसलिए पेशावर में हवाई हमले किए गए।
  • 21 मई 1930 को गांधी के पुत्र मानिक लाल वह सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में जुलूस के द्वारा नमक कारखानों को लूटने का प्रयास किया गया। इनका पुलिस ने निर्ममता से दमन किया।
  • इसका उल्लेख है अमेरिका के समाचार पत्र न्यू फ्रीमैन के संपादक वेल मिलर ने किया।
  • गांधीजी को गिरफ्तार करके यरवदा जेल (पुणे) मे रखा गया। तब इसका नेतृत्व अब्बास तैयब जी के द्वारा किया गया।
  • आंदोलन के दौरान साइमन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 12 नवंबर 1930 से 13 नवंबर 1931 को प्रथम गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • इसमें कांग्रेस ने भाग नहीं लिया अतः इसका कोई महत्व नहीं रहा।

इरविन

ब्रिटिश सरकार ने वायसराय इरविन पर कांग्रेस को शामिल करने के लिए दबाव डाला इरविन ने गांधी को जेल से रिहा किया

वह दिल्ली बुलाकर 5 मार्च 1931 को समझौता किया इसे गांधी इरविन समझौता कहते हैं।

  • इसके बाद गांधी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए राजी हो गए।
  • गांधी ने इरविन से भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की फांसी की सजा को काम करने की कोई अपील नहीं की।
  • 23 मार्च 1931 को तीनों को लाहौर जेल में फांसी दे दी गई।
  • 26 से 29 मार्च 1931 को कांग्रेस का अधिवेशन कराची में सरदार पटेल की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • कांग्रेस ने मूल अधिकारों को अपने संविधान में शामिल किया गांधी इरविन समझौते की पुष्टि की गई।
  • कांग्रेस ने मदन मोहन मालवीय वैसे रोशनी नाइटी को भी कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में दूसरे गोलमेज सम्मेलन में प्रतिनिधि के रूप में मनोनीत किया था
  • परंतु इरविन ने गांधी को कांग्रेस का प्रतिनिधि माना आता है ये वायसराय के विशेष रूप प्रतिनिधि के रूप में लंदन गए।
  • मालवीय हिंदू महासभा व सरोजनी नायडू में भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया।
  • गांधी का अत्यधिक प्रतिरोध हुआ था इस तरह गांधी ने कहा गांधी मर सकता है परंतु गांधीवादी नहीं।

दूसरा गोलमेज सम्मेलन -7 सितंबर-1 December 1931

  • इस समय भारत का वायसराय वेलिंग्टन था उसने गांधी को ईमानदार किंतु बोल्शेविक इसलिए खतरनाक कहा।
  • गांधी राजपूताना जहाज से लंदन में इनके साथ उनका सचिव महादेव देसाई भी थे।
  • अंबेडकर कोस्टारोस जहाज से से लंदन गए थे।
  • इस समय भारत का सचिव से सैमुअल होर था जिसने गांधी का परिचय इंग्लैंड के शासक जॉर्ज पंचम से करवाया।
  • इस समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री रेमज मैकडोनाल्ड तीनो गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की गई ।
  • व तीनों गोलमेज सम्मेलन लंदन के जेम्स पैलेस में हुई इस समय चर्चिल ने कहा कि”देशद्रोही फकीर कहा था व ब्रिटिश पत्रकार फ्रैंक मोरिस ने गांधी को अर्धनग्न फकीर कहा।

अंबेडकर

  • अंबेडकर ने दलितों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की मांग प्रस्तुत की इसे मानने से गांधी ने इंकार कर दिया और दूसरा गोल में सम्मेलन असफल रहा।
  • प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने गांधी के लिए कहा आने वाली पीढ़ी शायद इस बात का यकीन करें कि धरती पर दुबला पतला हाड मास का व्यक्ति पैदा हुआ।
  • भारत लौटते समय गांधी ने इटली के तानाशाह मुसोलिनी से मुलाकात की।
  • भारत लौटकर गांधी ने दूसरा सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाने की घोषणा की तो गांधी को पुन: गिरफ्तार करके यरवदा जेल में डाल दिया गया।
  • 16 अगस्त 1932 को रेमज़ मैकडोनाल्ड ने सांप्रदायिक पंचाट की घोषणा की इसमें दलितों को भी अलग निर्वाचन क्षेत्र प्रदान किया गया।
  • इसके विरोध में गांधी आमरण अनशन पर बैठ गएइस कारण से 26 सितंबर 1932 को गांधी और अंबेडकर के बीच एक समझौता हुआ
  • जिसे पूना पैक्ट कहते हैं। इसके बाद अंबेडकर संयुक्त निर्वाचन प्रणाली पर सहमत हो गए।
  • केंद्रीय विधानमंडल में दलितों को 18% आरक्षण दिया गया।
  • प्रांतों में उनकी सीटों को बढ़ाकर 71 से 148 कर दिया गया।
  • गांधी ने वर्धा में हरिजन सेवक संघ की स्थापना करवाई व घनश्याम दास बिड़ला को इसका अध्यक्ष बनाया गया।

तीसरा गोलमेज सम्मेलन-17 नवंबर 1932 से 24 दिसंबर 1932

  • तीसरा गोलमेज सम्मेलन 17 नवंबर 1932 से 24 दिसंबर 1932 को लंदन में आयोजित किया गया इसमें कांग्रेस ने भाग नहीं लिया।
  • 1935 के भारत शासन अधिनियम के तहत 1937 में भारत के प्रांतों में चुनाव हुए इसलिए कांग्रेस के दोनों अधिवेशन 1936 में ही लखनऊ व फैजपुर में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • फैजपुर अधिवेशन कांग्रेस का प्रथम ग्रामीण अधिवेशन था।

कांग्रेस के पांचप्रांत में स्पष्टबहुमत

कांग्रेस के 5 प्रांतों में स्पष्ट बहुमत मिला जो निम्न

मद्रास -राजगोपालचारी

बिहार – श्रीकृष्ण सिन्हा

उड़ीसा -हरेकृष्ण महताब

मध्य प्रांत – एन. बी. खरे

संयुक्त प्रांत – गोविंद बल्लभ पंत

मुंबई में स्पष्ट बहुमत से केवल 2 सीटें कम मिली या अभी कांग्रेस के जे.बी खैर प्रधानमंत्री बने।

असम व सिंध मैं कांग्रेस ने सांझा सरकारे बनाई

असम में बारदोलाई

सिंध में गुलाम हुसैन हिदायतुल्लाह प्रधानमंत्री बने।

बलूचिस्तान में अब्दुल गफ्फार प्रधानमंत्री बने।

मुस्लिम लीग केवल बंगाल व पंजाब में सरकार में शामिल हो सकी।

बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी के फजल उल हक के व पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी के सिकंदर हयात खा का प्रधानमंत्री बने।

जिस समय संयुक्त प्रांत में सरकार का गठन किया जा रहा था

उस समय जिन्ना ने नेहरू से मुस्लिम लीग को सरकार में शामिल करने का आग्रह किया।

नेहरू ने कहा कि मुस्लिम लीग से त्यागपत्र देकर कांग्रेस में शामिल पर ही सरकार में शामिल किया जा सकता है

जिन्ना व नेहरू

इसके बाद जिन्ना की राजनीति विभाजन की ओर मुड़ गई।

1938 में कांग्रेस का अधिवेशन हरिपुरा (गुजरात) में आयोजित हुआ। इसके अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस चुने गए।

कांग्रेस ने देसी रियासतों में हस्तक्षेप का निर्णय लिया।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के अध्यक्षता में आर्थिक योजना समिति बनाई गई।

1939 में कांग्रेस का अधिवेशन त्रिपुरी(मध्य प्रदेश) मैं आयोजित किया गया इसके अध्यक्ष पद के लिए सुभाष चंद्र बोस व मौलाना आजाद दो उम्मीदवार थे

परंतु मौलाना आजाद ने अपना नामांकन वापस ले लिया तब गांधी ने वर्धा से पट्टाभिसीता रमैया को अपना उम्मीदवार बना कर भेजा।

परंतु सुभाष चंद्र बोस को अध्यक्ष चुना गया और गांधी ने इसे व्यक्तिगत हार मानी। परंतु बाद में सुभाष चंद्र बोस व गांधी में मतभेद हो गए।

सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया।

कोलकाता में 3 मई 1944 को फॉरवर्ड ब्लॉक नामक पार्टी की स्थापना की गई।

सुभाष चंद्र बोस के इस्तीफा देने पर डॉ राजेंद्र प्रसाद कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए।

द्वितीय विश्व युद्ध

  • 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड के उंजिग बंदरगाह पर आक्रमण किया इसी के साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत हो गई।
  • 3 सितंबर को इसमें इंग्लैंड शामिल हुआ।
  • 5 सितंबर 1939 को इंग्लैंड ने भारत को युद्धरत राष्ट्र घोषित कर दिया गया।
  • इसलिए जिन प्रांतों में कांग्रेस की सरकार थी उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
  • इस कारण से 22 दिसंबर 1939 को मुस्लिम लीग व अंबेडकर की डिसप्लेस class association मुक्ति दिवस मनाया।

युद्ध

  • द्वितीय विश्व युद्ध के समय इंग्लैंड पर आए संकट को सुभाष चंद्र बोस ने भारत के लिए एक सुनहरा अवसर कहा।
  • परंतु गांधी व नेहरू ने कहा की हमें इंग्लैंड की बर्बादी पर भारत की स्वतंत्रता नहीं चाहिए।
  • मार्च 1940 में कांग्रेस का अधिवेशन रामगढ़ (झारखंड) मैं आयोजित हुआ इसकी अध्यक्षता मौलाना आजाद ने की।
  • कांग्रेस ने वायसराय लिनलिथगो को प्रस्ताव दिया अगर युद्ध की समाप्ति पर भारत में एक अंतरिम सरकार की स्थापना का वादा किया जाए तो इस समय कांग्रेस सरकार समर्थन दे सकती है।
  • लिनलिथगो ने 8 अगस्त 1940 को अगस्त प्रस्ताव कांग्रेस को प्रस्ताव दिया।
  • युद्ध समाप्ति पर भारत को डोमिनियन स्टेट का दर्जा दे दिया जाएगा संविधान सभा का गठन कर दिया जाएगा
  • परंतु कांग्रेस ने इसे मानने से इनकार कर दिया पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे दरवाजे में जंग लगी किल के समान माना।
  • यह अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट के दबाव में आकर इंग्लैंड के प्रधानमंत्री चर्चिल ने अपने युद्ध मंत्रिमंडल के सदस्य स्टेफोर्ड क्रिप्स को 22 मार्च 1942 भारत भेजा था।
  • क्रिप्स ने आते ही अगस्त प्रस्ताव में उल्लेखित संविधान सभा की मांग को मान लिया था
  • ।परंतु क्रिप्स ने देसी रियासतों को यह स्वतंत्रता दी कि वे अपना संविधान स्वयं बना सकते हैं।
  • इसके अलावा किसी भी बात पर निर्णय करने का अंतिम अधिकार वायसराय को दिया गया।
  • कांग्रेस ने इसका विरोध किया गांधी ने इसे पोस्ट डैड चेक कहा इसी ने इसमें यह जोड़ दिया था कि ऐसे बैंक का दिवालिया हो चुका है।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि मेरा मित्र क्रिप्स शैतान का वकील बनकर आया है।

भारत छोड़ो आंदोलन

  • 14 July 1942 वर्धा (महाराष्ट्र) मैं कांग्रेस की बैठक हुई व आंदोलन चलाने के पश्चात प्रस्ताव को पारित किया गया।
  • इसका प्रस्ताव पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था।
  • 8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वाला टैंक (अगस्त क्रांति मैदान) मे एक सभा को संबोधित करते हुए गांधी ने नारा दिया करो या मरो।
  • इसके साथ ही भारत में आंदोलन की शुरुआत हुई।
  • 9 अगस्त की मध्यरात्रि को सरकार ने ऑपरेशन जीरो चलाया वह सभी कांग्रेस के नेताओं को नजरबंद किया गया।
  • गांधी को पुणे के आगा खां पैलेस में रखा गया था।
  • कस्तूरबा गांधी महादेव देसाई सरोजिनी नायडू को भी यहीं पर रखा गया तथा कस्तूरबा गांधी महादेव देसाई का यहां रहने के दौरान निधन भी हो गया।
  • समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण झारखंड की हजारीबाग जेल में रखा गया था
  • इसी जेल की दीवार को तोड़कर जयप्रकाश नारायण फरार हुए इस आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया।
  • के व्यक्तियों के द्वारा स्वतंत्र सरकारें स्थापित की गई।

आंदोलन

  • सर्वप्रथम बलिया (उत्तर प्रदेश) में चीतू पांडे के द्वारा सरकार गठित की गई तथा 1945 तक सातारा (महाराष्ट्र) y.v. चव्हान व नाना पाटील ने सरकार गठित की।
  • बंगाल के मिदनापुर में सतीश सावंत के द्वारा एक जातीय सरकार गठित की गई।
  • यहीं पर एक जुलूस के दौरान गोली लगने के बावजूद एक 73 वर्षीय विधवा मातंगिनी हजारा ने तिरंगे झंडे को नीचे नहीं गिरने दिया।
  • वेवेल को भारत का वायसराय बनाया गया उसने 24 जून से 14 जुलाई 1945 को शिमला में कांग्रेस व मुस्लिम लीग की बैठक बुलाई।
  • कांग्रेस की ओर से मौलाना आजाद व मुस्लिम लीग की ओर से जिन्ना ने नेतृत्व किया।
  • कांग्रेस ने जिन्ना कि इस बात को मान लिया जब भी अंतरिम सरकार बनाई जाएगी दोनों पार्टियों के समान मंत्री होंगे।
  • परंतु जिन्ना ने तुरंत मांग कि मुस्लिम मंत्री केवल मुस्लिम लीग के हो सकते हैं इसे मानने से कांग्रेस ने इंकार कर दिया अतः शिमला बैठक असफल हुई।
  • मौलाना आजाद ने इसे भारत का जल विभाजक कहा।

कैबिनेट मिशन-1946

  • 1946 मैं कैबिनेट मिशन भारत आया था इसमें कुल 3 सदस्य थे जो कि निम्न है-
  • पेथिक लॉरेंस – भारत सचिव
  • एबी एलेग्जेंडर- नौसेना मंत्री
  • स्टेफोर्ड क्रिप्स – व्यापार मंत्री
  • मार्च 1946 को कैबिनेट मिशन कराची पहुंचा उसने मुस्लिम लीग की पाकिस्तान मांग को अस्वीकार कर दिया फिर भी मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन का विरोध नहीं किया।
  • गांधी ने इसे तत्कालीन परिस्थितियों का स्वर्णम योजना कहा
  • 22 जुलाई 1946 को वेबेल ने एक के अंतरिम सरकार बनाने की घोषणा की जिसमें छह कांग्रेस के 5 मुस्लिम लीग के 3 अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शामिल किए जाने थे।
  • मुस्लिम लीग ने इसमें शामिल ना होने का निर्णय लिया तथा वेवेल ने 12 अगस्त को बिना मुस्लिम लीग कांग्रेस को सरकार बनाने का निमंत्रण भेज दिया।
  • तथा मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को सीधी कार्रवाई दिवस मनाने की घोषणा की।
  • 16 अगस्त को मौलाना आजाद ने भारतीय इतिहास का एक काला दिन कहा।
  • 20 फरवरी 1947 को इंग्लैंड के प्रधानमंत्री एट ली ने यह घोषणा की कि 30 जून 1948 तक भारत को स्वतंत्र कर दिया जाएगा।
  • 22 मार्च 1947 को 34 वे वायसराय के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन भारत भेजा गया।
  • माउंटबेटन ने सभी दलों के नेताओं से बातचीत की तथा सबसे पहले सरदार पटेल विभाजन के लिए राजी हुए।

आजादी

  • 3 जून 1947 को माउंटबेटन ने एक प्लान प्रस्तुत किया।
  • इसमें भारत के विभाजन की योजना इसे 13 से लेकर 16 जून 1947 को गोविंद बल्लभ पंत ने कांग्रेस कार्यसमिति अब्दुल गफ्फार खान कहा कांग्रेस ने हमारे आंदोलन को भेडियो के आगे फेंक दिया ।
  • मौलानाआजाद ने कहा इतिहास हमें इस बात के लिए कभी माफ नहीं करेगा।
  • इस समय नेहरू ने कहा था हमें कटा छटा भारत नहीं चाहिए।
  • डिकी बरड प्लॉट तहत ही 14 अगस्त को पाकिस्तान का निर्माण किया गया।
  • 15 अगस्त को मध्य रात्रि को भारत को स्वतंत्र किया गया।
  • नेहरु के द्वारा देश की जनता को दिया गया संबोधन नियति के साथ वादा कहलाता है।

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May 22, 2020

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन क्या है जाने ? PART-1

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

आइए आज इस टॉपिक पर चर्चा करेंगे महात्मा गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में क्या क्या योगदान रहा और गांधीजी ने कौन कौन से आंदोलन किए व व किन किन आंदोलनों में भाग लिया और इस आंदोलन से क्या क्या प्रभाव पड़ा इसको आज अच्छे से जानेंगे ! सबसे पहले महात्मा गांधी जी की जीवनी के बारे में जानेंगे !

महात्मा गांधी की जीवनी ( Mahatma Gandhi Biography )

भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन

आइए हम आपको महात्मा गांधी के बारे में कुछ जानकारियां सांझा करते हैं जोकि निम्न प्रकार से हैं !

  • नाम – मोहनदास करमचंद गांधी
  • पिता का नाम – करमचंद गांधी
  • माता का नाम – पुतलीबाई
  • जन्म – 2 अक्टूबर, 1869
  • जन्म स्थान – गुजरात के पोरबंदर में
  • राष्ट्रीयता – भारतीय
  • शिक्षा – बैरिस्टर
  • पत्नी – कस्तूरबाई मखजी कपाड़िया (कस्तूरबा गांधी)
  • संतान – चार पुत्र – हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
  • जातीयता – गुजराती
  • राजनीतिक पार्टी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • मृत्यु – 30 जनवरी, 1948

भारतीयराष्ट्रीयआंदोलन में महात्मा गांधी का योगदान या भूमिका

आइए अब राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी की भूमिका और योगदान के बारे में जानेंगे विस्तार से जोकि निम्न प्रकार से हैं :-

  • 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से अरेविया नामक जहाज से मुंबई के अपोलो बंदरगाह पर आए थे ! इस समय प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था (1914-1918)
  • महात्मा गांधी ने भारत के युवाओं को अंग्रेजी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया था ! इसलिए ब्रिटिश सरकार ने गांधी जी को केसर -ए -हिंद की उपाधि प्रदान की !
  • भारतीयों ने गांधीजी का विरोध किया गांधी जी को अंग्रेजों का सार्जेंट (सेना में भर्ती करने वाला) कहा !
  • 1915 में ही गांधी जी ने जीवन लाल देसाई के द्वारा गुजरात के अहमदाबाद जिले में साबरमती नदी के तट पर कोचराव नामक बंगले में एक आश्रम स्थापित किया इसे सत्याग्रह आश्रम नाम दिया गया था !
  • 1917 में गुजरात के व्यवसायी अंबालाल साराभाई ने इस आश्रम की आसपास की भूमि खरीदकर गांधी को भेंट दी तथा इसे साबरमती आश्रम नाम दिया गया !
  • 1930 में गांधी जी ने जब सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया था तब इसे अंतिम रूप से छोड़ दिया था !
  • चार्ल्स कोरियन को इस आश्रम का वास्तुकार माना जाता है !
  • 1916 में गांधी जी ने मदन मोहन मालवीय के द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह में भाग लिया था !
  • 1916 में कांग्रेस का अधिवेशन लखनऊ में अंबिका चरण मजमुदार की अध्यक्षता में आयोजित हुआ !
  • नरम दल और गरम दल तिलक व एनीबेसेंट के प्रयासों से एक हो गए !
  • कांग्रेस के सदस्य जिन्ना के प्रयासों से कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की पृथक निर्वाचन प्रणाली की मांग को मान लिया ! इसी को रमेशचंद्र मजमुदार ने कांग्रेस की प्रथम भूल कहां है !
  • इसी अधिवेशन में राजकुमार शुक्ल ने गांधी से मुलाकात की वह बिहार के चंपारण जिले के प्रचलित नील की तिनकठिया खेती के बारे में बताया फिर महात्मा गांधी 1917 में चंपारण गए !

गांधीजी के प्रमुख आंदोलन

गांधी जी के प्रमुख आंदोलन निम्न प्रकार से हैं :-

  • चंपारण आंदोलन
  • खेड़ा आंदोलन
  • अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन
  • रोलेट सत्याग्रह आंदोलन
  • खिलाफत आंदोलन
  • असहयोग आंदोलन
  • साइमन कमीशन
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन
  • कैबिनेट मिशन

भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन में गांधी जी के यह आंदोलन बहुत ही महत्वपूर्ण थे गांधीजी का इन आंदोलनों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है अब हम इन आंदोलनों के बारे में विस्तार से जानेंगे कि गांधी जी की क्या क्या भूमिका रही है आइए देखते हैं :-

चंपारण किसान आंदोलन

  • चंपारण में अंग्रेज व्यापारी किसानों के खेत को 20 भागों में बांटते थे। जिनमें से तीन भागों में नील की खेती करवाई जाती थी बाकी पूरी भूमि को परती छोड़ दिया जाता है ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे । इसके लिए अंग्रेज व्यापारी किसानों को अग्रिम भुगतान भी करते थे परंतु इस समय जर्मनी में रासायनिक रंग बना लिए थे ! यूरोप में भारतीय नील की मांग में कमी आ गई इसलिए दिए गए अग्रिम भुगतान को ब्याज सहित वसूल किया जा रहा है !
  • लगातार नील की खेती करने से भूमि बंजर हो चुकी थी अतः किसान इस भुगतान को देने में असमर्थ था।
  • चंपारण के जिला कलेक्टर (W.B Hitchcoke) ने गांधी के चंपारण प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • गांधीजी के जाने पर उन्हें मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया था ! और उसे चंपारण की जेल में रखा गया था।
  • गांधी जी ने सत्याग्रह का प्रथम प्रयोग इसी आंदोलन में किया था !
  • सत्याग्रह का अर्थ : – सत्याग्रह का अर्थ अहिंसात्मक तरीके से सरकार के समक्ष अपनी मांग प्रस्तुत करना होता है इसे सत्याग्रह नाम भूलाभाई देसाई के द्वारा दिया गया ।
  • इस आंदोलन में गांधी को निम्न लोगों के द्वारा सहयोग दिया गया जो कि निम्न है:-
  • अनुराग नारायण सिन्हा
  • ब्रजकिशोर शर्मा
  • जे पी कृपलानी
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू
  • अंग्रेज व्यापारियों ने गलत तरीके से वसूली की गई 25% राशि किसानों को वापस लौटा दी थी !
  • इस आंदोलन की सफलता के बाद रविंद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी की उपाधि प्रदान की।
  • जूनीपत ब्राउन ने इस आंदोलन का उल्लेख अपनी पुस्तक Arising the power of Gandhi मैं की है !

खेड़ा किसान आंदोलन

  • खेड़ा (गुजरात) की सूरत जिले की तहसील थी ।
  • 1917-18 के वर्ष में यहां अकाल पड़ा था ! इसके बावजूद लगान में वृद्धि की गई जबकि अकाल संहिता के तहत 3/4 फसल नष्ट होने पर पूरा लगान माफ कर दिया जाता था ।
  • इस आंदोलन में वल्लभ भाई पटेल ने गांधी को सहयोग दिया।
  • 23 मार्च 1918 को सरकार ने एक आदेश लागू किया की किसानों से समर्थ लगान वसूल किया जाएगा

अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के कारण भारत में महंगाई बढ़ चुकी थी अतः मजदूर वेतन में 50% वृद्धि की मांग कर रहे थे जबकि मिल मालिक 20% वेतन वृद्धि को राजी थे।
  • जब मजदूरों का प्लेग बोनस बंद किया गया तब मजदूरों ने अनसूइया बेग पटेल से मुलाकात की जिन्होंने गांधी को बुलाया।
  • 15 March 1918 को गांधी अनशन पर बैठ गए तब मिल मालिकों ने समझौता करके 35% वेतन वृद्धि की।

रोलेट सत्याग्रह आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के समय भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों में तेजी आई
  • रासबिहारी बोस के पूरे भारत में सशस्त्र क्रांति की योजना भी बनाई गई। हालांकि असफल होने पर रासबिहारी बोस जापान चले गए।
  • 1917 में ब्रिटिश सरकार ने इंग्लैंड के किगजू न्यायालय के न्यायाधीश सिडनी रोलैंड की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जिसने मार्च 1919 को रोलेट एक्ट लागू किया।
  • इसमें प्रावधान था कि अगर किसी व्यक्ति पर सरकार विरोधी होने का संदेह हो तो बिना न्यायालय में पेश किए उसे अधिकतम 2 वर्ष तक हिरासत में रख सकते थे। इसे काला कानून कहा गया।
  • संभवत मोतीलाल नेहरू ने इसे बिना अपील बिना दलील और बिना वकील का कानून कहां ।
  • गांधीजी ने इसके विरोध के लिए रौलट सत्याग्रह समिति बनाई इसमें एनीबेसेंट सदस्य थी परंतु बाद में गांधी की विचारधारा से असहमत होकर इस समिति से अलग हुई और गांधी जी को छोटा राजनीतिक बच्चा कहां।
  • 9 अप्रैल 1919 को पंजाब के दो क्रांतिकारी डॉ सत्यपाल व सैफुद्दीन किचलू पंजाब की सीमा पर गिरफ्तार करके अमृतसर की जेल में रखा।
  • 10 अप्रैल 1919 को पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइक ओ डायर ने पंजाब में धारा 144 लगा दी व पंजाब का प्रशासन सेना को सौंपा दिया।
  • 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी का त्यौहार गांव से लोग अमृतसर आए हुए
  • इन दोनों की गिरफ्तारी के विरोध में एक ही स्थान पर इकट्ठा हुए जिसे जलियावालाबाग कहा जाता है
  • यहां पहुंचकर राबर्ट इनफील्ड हेनरी डायर नामक सैन्य अधिकारी के आदेश से गोलीबारी की गई।
  • इस हत्याकांड के विरोध में टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि लौटा दी
  • वायसराय चेम्सफोर्ड की कार्यकारिणी परिषद के भारतीय सदस्य शंकरन नायर ने इस्तीफा दे दिया था।
  • सरकार ने इस हत्याकांड को जांच के लिए 8 सदस्यों वाली हंटर कमेटी बनाई इसमें तीन भारतीय थे इनके निम्न नाम है:-
  • चिमनलाल शीत सितउवाड
  • शायबजादा सुल्तान अहमद
  • जगत नारायण
  • हंटर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 379 व्यक्ति इस हत्याकांड में मारे गए।
  • कांग्रेस ने मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में तहकीकात कमेटी बनाई।
  • इस कमेटी के अन्य सदस्य थे :-
  • मोतीलाल नेहरू
  • चितरंजन दास
  • महात्मा गांधी
  • गांधीजी ने हंटर कमेटी की रिपोर्ट को पन्ने दर पन्ने लीपापोती कहा।
  • इन रिपोर्ट के अनुसार 1000 से भी ज्यादा व्यक्ति हत्याकांड में मारे गए।

खिलाफत आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के विजेता राष्ट्र इंग्लैंड ने पराजित राष्ट्र तुर्की के विवाह जन का निर्णय लिया।
  • तुर्की के सुल्तान को पूरे विश्व के मुसलमान खलीफा के समान मानते थे।
  • इस समय सुल्तान मोहम्मद चतुर्थ थे।
  • मुसलमानों ने इस निर्णय के कारण आक्रोश उत्पन्न हो गया तथा गांधी ने इसे पिछले 100 सालों में आया हुआ हिंदू व मुसलमानों की एकता का स्वर्णिम अवसर कहा था।
  • भारत में यह आंदोलन मोहम्मद अली व शौकत अली दो भाइयों के द्वारा चलाया गया।
  • 17 अक्टूबर 1919 को भारत में खिलाफत दिवस मनाया गया।
  • 24 नवंबर 1919 को दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी की बैठक आयोजित की गई।
  • डॉक्टर अंसारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अंग्रेजी सरकार से बातचीत के लिए लंदन भेजा गया।
  • मार्च 1920 में खिलाफत कमेटी की बैठक इलाहाबाद में आयोजित की गई। इसमें असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया।
  • 1 अगस्त 1920 इसकी तिथि निश्चित की गई परंतु इसी दिन तिलक की मृत्यु हो गई अत: इसे कुछ दिनों के लिए स्थगित किया गया।
  • परंतु 20 अगस्त 1920 को इंग्लैंड व तुर्की के मध्य सेवरस (फ्रांस) की संधि हो गई
  • तुर्की में कमाल पाशा ने सरकार गठित की और इसने सुल्तान के पद को ही समाप्त कर दिया इस कारण से भारत में आंदोलन समाप्त हो गया।
  • कमाल पाशा को अतातुर्क अर्थात तुर्कों का पिता कहते हैं।
  • जिन्ना ने इस आंदोलन में भाग नहीं लिया।

असहयोग आंदोलन

  • गांधी के कहने पर कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय लिया।
  • सितंबर 1920 में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन कोलकाता में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • इसमें आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया
  • इसके लेखक महात्मा गांधी थे।
  • स्वयं गांधी ने इसका प्रस्ताव रखा था।
  • चितरंजन दास ने इसका विरोध किया तथा मोतीलाल नेहरु के द्वारा गांधी का समर्थन किया गया।
  • इस समय एनी बेसेंट, मालवीय, मोहम्मद अली जिन्ना, शंकर नायर इत्यादि ने इस्तीफा दे दिया।
  • दिसंबर 1920 में कांग्रेस वार्षिक अधिवेशन नागपुर में राघवाचार्य की अध्यक्षता में आयोजित हुआ इसमें पारित प्रस्ताव की पुष्टि की गई।चितरंजन दास ने इसका प्रस्ताव रखा।
  • इसके प्रस्ताव में लिखा है कि ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर सुशासन की बजाए इसे बाहर जाकर स्वराज्य की प्राप्ति द्वारा लक्ष्य हासिल करना सही है।
  • गांधी ने केसर हिंद की उपाधि तथा ज़ुलु व बोहर पदक सरकार को लौटा दिए थे।
  • सुभाष चंद्र बोस ने आईएएस के पद से त्यागपत्र दिया व कोलकाता के नेशनल कॉलेज के प्रिंसिपल बने।
  • महिलाओं के द्वारा शराब की दुकानों में धरना प्रदर्शन किया गया यह एकमात्र ऐसा कार्य था जो इसके कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था।
  • वक्ताओं की दृष्टि से यह कांग्रेस का सबसे बड़ा अधिवेशन था।
  • December 1920 में नागपुर अधिवेशन में ही कांग्रेस के दैनिक कार्यों के संचालन के लिए 15 सदस्यों वाली कार्य समिति का गठन किया गया इसको बनाने का पहला सुझाव तिलक में 1916 में लखनऊ अधिवेशन में दिया था।
  • इसे सांप्रदायिक सोपान का आंदोलन माना गया।
  • स्वामी श्रद्धानंद को मुसलमानों ने दिल्ली की जामा मस्जिद भाषण देने के लिए आमंत्रित किया।
  • सैफुद्दीन किचलू को शिव सिखो ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की चाबी सौंप दी।
  • गांधी ने अहिंसा की पालना में सर्वाधिक प्रशंसा बिहार की।
  • अंग्रेज शिक्षा की सर्वाधिक बहिष्कार बंगाल में हुआ।
  • मदुरई तमिलनाडु में एक बालक के द्वारा प्रश्न पूछे जाने के बाद गांधी ने आजीवन एक धोती में रहने का निर्णय किया।
  • 5 फरवरी 1922 को यूपी के गोरखपुर जिले के चोरी चोरा नामक गांव में ग्रामीणों ने थाने का घेराव करके आग लगा दी इसमें 22 पुलिस वह एक सब इंस्पेक्टर सहित कुल 23 पुलिसकर्मी व तीन ग्रामीण मारे गए
  • 5 फरवरी 1922 को बारदोली (गुजरात) में कांग्रेस की बैठक हुई उसमें असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
  • 10 March 1922 को ब्रिटिश न्यायाधीश ब्रूमफील्ड ने हिंसा भड़काने के आरोप में गांधी जी को 6 साल की कारावास की सजा सुनाई गई।

1919 के एक्ट के तहत

  • 1919 के एक्ट के तहत भारत की केंद्रीय असेंबली में चुनाव होने दे। इन चुनाव को लेकर कांग्रेस के दो ग्रुप बन गए।
  • परिवर्तनवादी
  • अपरिवर्तनवादी

परिवर्तनवादी

  • यह चुनाव में भाग लेना चाहते थे।
  • इस ग्रुप का नेतृत्व चितरंजन दास व मोतीलाल नेहु कर रहे थे।

अपरिवर्तनवादी

  • यह चुनाव का बहिष्कार कर रहे थे।
  • इनका नेतृत्व विट्ठल भाई पटेल व बल्लभ भाई पटेल कर रहे थे।
  • अपरिवर्तन वादियों के द्वारा नागपुर में झंडा सत्याग्रह चलाया गया ताकि परिवर्तनवादियों को कांग्रेस के झंडे के प्रयोग से रोक सके।
  • जब गांधी जी ने भी चुनाव का बहिष्कार किया तब परिवर्तनवादी कांग्रेस से अलग हुए
  • March 1923 को इलाहाबाद में स्वराज पार्टी की स्थापना की गई। चितरंजन दास इसके अध्यक्ष बने वह मोतीलाल नेहरू इसके सचिव बनाए गए
  • गांधी जी की खराब स्वास्थ्य के कारण जेल से रिहा किया गया।
  • 8 नवंबर 1924 को गांधी जी ने चितरंजन दास को दिल्ली बुलावाया व यह समझौता किया कि जो भी कांग्रेस के सदस्य चुनाव में भाग लेना चाहते हैं स्वराज पार्टी के तहत ले सकते हैं।
  • 1924 में कांग्रेस का अधिवेशन बेलगांव (कर्नाटक ) मैं आयोजित हुआ । इसकी अध्यक्षता गांधीजी ने की इसमें गांधी व दास समझौते की पुष्टि की गई।
  • इसके बाद कांग्रेस के लगभग नेताओं ने स्वराज पार्टी के तहत चुनाव में भाग लिया।
  • विट्ठल भाई पटेल ने केंद्रीय असेंबली के स्पीकर नियुक्त हुए।
  • स्वराज पार्टी के दबाव के कारण 1919 के एक्ट की जांच की गई मुडडीमैन कमेटी का गठन किया गया।

देखिए दोस्तों ! http://भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन से संबंधित आगे की जानकारी पार्ट-2 पर जाकर पढ़ें। और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका और सहयोग के बारे में जानकारी आपको अच्छी लगी है तो इसे आगे भी फॉरवर्ड करें अपने दोस्तों को।