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Medieval History

September 20, 2020

Bhakti Movement भक्ति आन्दोलन क्या है??

भक्ति आन्दोलन

भक्ति आन्दोलन

वैसे तो श्वेताश्तर उपनिषद में पहली बार भक्ति का उल्लेख मिलता है। किंतु भक्ति का सर्वप्रथम विस्तृत उलेख श्रीमद् भागवत गीता में है। जहां इसे मोक्ष प्राप्ति का साधन बताया गया है।

मध्य काल में भक्ति आन्दोलन की शुरुआत सर्वप्रथम दक्षिण के अलवार भक्तों द्वारा की गई। दक्षिण भारत से उत्तर भारत में बारहवीं शताब्दी के प्रारम्भ में रामानन्द द्वारा यह आन्दोलन लाया गया।

भक्ति आन्दोलन का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य था- हिन्दू धर्म एवं समाज में सुधार तथा इस्लाम एवं हिन्दू धर्म में समन्वय स्थापित करना। अपने उद्देश्यों में यह आन्दोलन काफ़ी सफल रहा।  इन सन्तों ने भक्ति मार्ग को …

September 20, 2020

Sufi Movement सूफी आंदोलन क्या है??

सूफी आंदोलन

सूफी आंदोलन

जिस प्रकार मध्यकालीन भारत में हिन्दुओं में भक्ति-आन्दोलन प्रारम्भ हुआ, उसी प्रकार मुसलमानों में प्रेम-भक्ति के आधार पर सूफीवाद का उदय हुआ। सूफी शब्द की उत्पत्ति कहाँ से हुई, इस विषय पर विद्वानों में विभिन्न मत है।

कुछ विद्वानों का विचार है कि इस शब्द की उत्पत्ति सफा शब्द से हुई। सफा का अर्थ पवित्र है। मुसलमानों में जो सन्त पवित्रता और त्याग का जीवन बिताते थे, वे सूफी कहलाये। एक विचार यह भी है कि सूफी शब्द की उत्पत्ति सूफा से हुई, जिसका अर्थ है ऊन। मुहम्मद साहब के पश्चात् जो सन्त ऊनी कपड़े पहनकर …

September 19, 2020

Governing Policies ब्रिटिश कंपनी की शासन नीतियां भाग 2

रैयतवाड़ी व्यवस्था

ब्रिटिश कंपनी

स्थायी बंदोबस्त के पश्चात, ब्रिटिश सरकार ने भू-राजस्व की एक नयी पद्धति अपनायी, जिसे रैयतवाड़ी बंदोबस्त कहा जाता है। मद्रास के तत्कालीन गवर्नर (1820-27) टॉमस मुनरो द्वारा 1820 में प्रारंभ की गयी इस व्यवस्था को मद्रास, बम्बई एवं असम के कुछ भागों लागू किया गया।

बम्बई में इस व्यवस्था को लागू करने में बंबई के तत्कालीन गवर्नर (1819-27) एल्फिन्सटन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। भू-राजस्व की इस व्यवस्था में सरकार ने रैयतों अर्थात किसानों से सीधा बंदोबस्त किया। अब रैयतों को भूमि के मालिकाना हक तथा कब्जादारी अधिकार दे दिये गये तथा वे सीधे या व्यक्तिगत रूप …

September 18, 2020

Governing Policies ब्रिटिश कंपनी की शासन नीतियां भाग 1

ब्रिटिश कंपनी की शासन नीतियां

ब्रिटिश कंपनी

अंग्रेजों की भू राजस्व नीतियां 

अंग्रेजों के आगमन से पूर्व भारत में जो परम्परागत भूमि व्यवस्था कायम थी उसमें भूमि पर किसानों का अधिकार था तथा फसल का एक भाग सरकार को दे दिया जाता था। 1765 में इलाहाबाद की संधि के द्वारा ईस्ट इंडिया कम्पनी ने बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा की दीवानी प्राप्त कर ली।

यद्यपि 1771 तक ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में प्रचलित पुरानी भू-राजस्व व्यवस्था को ही जारी रखा किंतु कम्पनी ने भू-राजस्व की दरों में वृद्धि कर दी।  धीरे-धीरे कम्पनी के खर्चे में वृद्धि होने लगी, जिसकी भरपाई के लिये …

September 18, 2020

Vijayanagar and Bahmanid बहमनी एवं विजयनगर साम्राज्य

बहमनी_एवं विजयनगर साम्राज्य

बहमनी_साम्राज्य

बहमनी_राज्य की स्थापना दक्षिण भारत में मुहम्मद तुगलक के खिलाफ विद्रोह से हुई ।  1347 ई. में हसन गंगु, अलाउद्दीन बहमनशाह के नाम से गद्दी पर बैठा और दक्षिण में मुस्लिम राज्य की नींव रखी । यह मुस्लिम राज्य भारत में बहमनी राज्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।

बहमनी_राज्य के_शासक

अलाउद्दीन हसन बहमन शाह (1347-1358 ई.)-

मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में  1347 ई. में सरदारों ने हसन गंगु को अबल मुजफ्फर अलाउद्दीन बहमन शाह के नाम से सुल्तान घोषित किया। गुलबर्गा में अपनी राजधानी स्थापित की …

September 18, 2020

Mughal Period-Babur Humayun मुगल साम्राज्य- बाबर हुमायूँ

मुगल साम्राज्य बाबर हुमायूँ

मुगल शब्द ग्रीक शब्द डवदह से बना है जिसका अर्थ है बहादुर, मुगल शासक पादशाह की उपाधि धारण करते थे। पाद का अर्थ है मूल और शाह का अर्थ है स्वामी अर्थात ऐसा शक्तिशाली राजा अथवा स्वामी जिसे अन्य कोई अपदस्थ नही कर सकता। मुगल राज्य का संस्थापक यद्यपि _बाबर माना जाता है परन्तु इसका वास्तविक संस्थापक वस्तुतः अकबर था।

मुग़ल साम्राज्य की शुरुवात 1526 में हुयी, जिसने 18 शताब्दी के शुरुवात तक भारतीय उप महाद्वीप में राज्य किया था।जो 19 वी शताब्दी के मध्य तक लगभग समाप्त हो गया था। मुग़ल साम्राज्य तुर्क-मंगोल पीढी के तैनुर वंशी …

September 17, 2020

Mughal Empire-Akbar मुगल काल-अकबर

मुगल काल-अकबर

अकबर

अकबर मुगल वास्तुकला का वास्तविक जन्मदाता था। इसके निर्माण में अधिकतर लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग हुआ है।

  • जन्मः- 15 अक्टूबर 1542 को अमरकोट के राणा वीरसाल के महल में ।
  • माँ का नाम:– हमीदा बानो बेगम (सिन्ध के पास)
  • 1551 में 9 वर्ष की अवस्था में गजनी की सूबेदारी मिली।
  • राज्याभिषेक:- कलानौर (पंजाब) 14 फरवरी 1556 को
  • संरक्षक:- बैरम खाँ

बैरम खाँ:- यह सिया मतावलम्बी था तथा अकबर के समय वकील के पद पर था। अकबर का संरक्षक भी यह था।

हेमू:- यह सूर शासक आदिल शाह का प्रधानमंत्री था जो वैश्य जाति का था। 24 …

September 17, 2020

Mughal Empire Shahjahan मुग़ल वंश- शाहजहाँ

मुग़ल वंश- शाहजहाँ

शाहजहाँ

  • जन्म:-1592 लाहौर में
  • माँ का नाम:-जगत गोसाईं
  • विवाह:-1612 ई0 में आसफ खाँ की पुत्री अरजुमन्द बानो बेगम उर्फ मुमताज महल से। यह नूरजहाँ की भतीजी थी। मुमताज महल की उपाधि मलिका-ए-जमानी।

दक्षिण अभियान की सफलता के बाद 1617 में खुर्रम को शाहजहाँ की उपाधि प्रदान की गई। शाहजहाँ का राज्याभिषेक 1628 ई0 में आगरा में। राज्याभिषेक के बाद ’’अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दीन मुहम्मद शाहिब किस ए सानी’’ की उपाधि धारण की।

Shah Jahan Major Revolt ( शाहजहाँ प्रमुख विद्रोह )

शाहजहाँ के समय के प्रमुख विद्रोह निम्नलिखित हैं-

1. बुन्देल खण्ड का विद्रोह (1628-36):- इस विद्रोह का नेतृत्व …

September 17, 2020

Mughal Empire Jahangir मुगल काल- जहाँगीर

जहाँगीर (1605-27)

जहाँगीर

  • जन्म:-फतेहपुर सीकरी में स्थित शेख सलीम चिश्ती की कुटिया में।
  • माँ का नाम:-जोधा बाई
  • गुरु का नाम:-अब्दुल रहीम खान- खाना
  • बचपन:-सलीम ( अकबर इसे शेखू बाबा कहकर पुकारता था )
  • विवाह:- आमेर के राजा भगवानदास की पुत्री मानबाई से इससे पुत्र खुसरो उत्पन्न हुआ। मानबाई की मृत्यु अफीम खाने से हुई।
  • अन्य विवाह:– मारवाड़ के राजा उदयसिंह की पुत्री जगत गोसाई से, इसी से शाहजहाँ उत्पन्न हुआ।
  • शाही-ए-जमाल इससे परवेज उत्पन्न हुआ। अन्य पुत्र शहरयार एक रखैल से उत्पन्न पुत्र था।

जहाँगीर पुत्र

  1. खुसरो:- इसे अर्जुनदेव का समर्थन प्राप्त था।
  2. परवेज:- इसे महावत खाँ का समर्थन था।

September 16, 2020

Mughal Empire-Aurangzeb औरंगजेब और अन्य मुगल शासक

औरगंजेब और अन्य मुगल शासक

औरंगजेब

औरंगजेब का जन्म 1618 ई. में उज्जैन के निकट ‘ दोहद ‘नामक स्थान पर मुमताज महल के गर्भ से हुआ था । लेकिन औरंगजेब का अधिकांश बचपन नूरजहाँ के पास बीता

पिता- शाहजहां, माता- मुमताज महल

औरंगजेब का विवाह फारस के राजघराने के शाहनवाज की पुत्री दिलरस बानो बेगम (राबिया- उद् -दोरानी )से हुआ था । औरंगजेब की पुत्री का नाम मेहरून्निसा था ।

औरंगजेब दक्षिण का सूबेदार दो बार नियुक्त हुआ था
पहली बार -1636 -1644 ई. ।
दूसरी बार -1652 -1657 ई. ।

वह गुजरात, मुल्तान व सिन्ध का गवर्नर भी रहा …