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Ancient History

May 19, 2020

मुगलकालीन स्थापत्य कला व संस्कृति और प्रमुख इमारतें के बारे में??

मुगलकालीन स्थापत्य

सबसे पहले मुगलकालीन स्थापत्य कला के बारे में जानेंगे मुगलकालीन स्थापत्य कला क्या थी आइए देखते हैं !

1. बाबर (1526 -1530)

  • बाबर को उपवनो का राजकुमार कहा जाता है !
  • मुगलों के द्वारा जो बाघ लगवाए गए थे वे दृश्य-ए – बहिसत पद्धति से लगवाए गए थे !
  • कुरान में लिखा गया है कि जन्नत में तसनिस नामक एक पानी का झरना है जिससे जन्नत में पानी की नहर निकाली गई !
  • मुगलों के बागों में इसी प्रकार की पानी कि नहरें बनी है !
  • बाबर ने आगरा में आरामबाग या नूर अफगान बाग का निर्माण करवाया !
  • प्रारंभ में बाबर को इसी में दफनाया गया परंतु बाबर ने मरने से पहले इच्छा व्यक्त की उसे काबुल में दफनाया जाए ! जिसके बाद बाबर को काबुल में ले जाकर दफनाया गया !
  • बाबर ने धौलपुर में निलोकर बाग का निर्माण करवाया !
  • बाबर ने पानीपत (हरियाणा) में काबुली बाग मस्जिद बनवाई ! ये भारत में ईटों से निर्मित प्रथम मस्जिद है !
  • इसके अलावा बाबर ने रूहेलखंड (उत्तर प्रदेश) कि संभल नामक स्थान पर जामा मस्जिद का निर्माण करवाया था !
  • बाबर के सेनानायक मीर बाकी ने फैजाबाद (अयोध्या) मैं बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था !

2. हुमायूं (1530 -40, 1555 – 1556 )

  • हुमायूं ने 1534 में दिल्ली में दीन-ए-पनाह अर्थात धर्म की शरण स्थली नामक नगर का निर्माण करवाया इसी के शेर मंडल पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर हुमायूं की मृत्यु हो गई !

3. अकबर (1556 -1605)

अकबर के शासन कला की बनी प्रथम इमारत दिल्ली में स्थित हुमायूं का मकबरा है !

इसका निर्माण अकबर की सौतेली मां हाजी बेगम ने ईरान के वास्तुकार मिर्जा ग्यास की देखरेख में करवाया !

यह मकबरा चार बाग शैली में निर्मित है !

मुगल काल में संगमरमर के पत्थर का पहला प्रयोग इसी मकबरे में किया गया है इसका केवल दोहरा गुंबद ही संगमरमर से निर्मित है बाकी पूरी इमारत है धौलपुर व करौली के लाल पत्थर से बनी हुई है !

अकबर के दाय मां अनगा ने महरौली में अपने पुत्र अदम खा का मकबरा बनवाया इसी को भूल भुलैया कहा जाता है !

अकबर ने कासिम खां की देखरेख में आगरा व लाहौर में दुर्गों का निर्माण करवाया !

आगरा के दुर्ग में अकबर ने दीवान-ए-आम व दीवान-ए-खास व जहांगीर महल जैसी इमारतें बनवाई !

इसके अलावा अकबर ने अटक दुर्ग पाकिस्तान, इलाहाबाद दुर्ग सबसे बड़ा व अजमेर स्थित दौलत खाने का निर्माण करवाया !

इस दौलत खाने में 1837 में अंग्रेजों ने अपना शास्त्र गार स्थापित किया था इसलिए वर्तमान में से मैगजीन दुर्ग कहते हैं !

1569-70 में अकबर ने बहउधिन फतेहपुर सीकरी के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी !

ईसाई संत मोसरोत के निर्माण के समय फतेहपुर सीकरी में स्थिति थी !

शेख सलीम चिश्ती फतेहपुर सीकरी में ही रहा करते थे तथा इन्हीं के आशीर्वाद से अकबर को जहांगीर नामक पुत्र की प्राप्ति हुई !

मुगलकालीन प्रमुख इमारतें

आइए सबसे पहले प्रमुख मुगलकालीन इमारतें देखते हैं जो कि निम्न प्रकार से हैं :-

1. जामा मस्जिद

  • यह लाल पत्थर से निर्मित है !
  • इस मस्जिद को फतेहपुर सीकरी का गौरव कहा गया है !
  • फर्ग्यूसन ने इसे पत्थरों की रुमानी कथा कहा है !

2. शेख सलीम चिश्ती का मकबरा

  • अकबर ने इसका निर्माण लाल पत्थर से करवाया परंतु जहांगीर व शाहजहां ने इसे तुड़वाकर संगमरमर से निर्मित करवा दिया गया !

3. इस्लाम खा का मकबरा

  • सर्वप्रथम वर्गाकार मेहराब का प्रयोग इसी मकबरे में किया गया है !

4. जोधाबाई का महल

  • यह फतेहपुर सीकरी की सबसे बड़ी आवासीय इमारत है !

5. तुर्की सुल्तान की कोठी

  • यह अकबर की प्रथम पत्नी रुकैया बेगम का महल था !
  • पर्शी ब्राउन ने इसे मुगल स्थापत्य का रतन कहां है !

6. मरियम महल

  • अकबर की माता हमीदा बानो का महल था !
  • हमीदा बानो मरियम मकानी के नाम से प्रसिद्ध है !
  • अकबर ने इसमें हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बनवाएं थे जिन्हें बाद में औरंगजेब ने चूने से पुतवा दिया गया !
  • इसका उल्लेख इटली के मनुची ने अपनी पुस्तक स्टीरियो डी मोगर में किया !

7. पंचमहल

  • यह पांच मंजिला पिरामिड की आकृति की इमारत है इसमें कोई दरवाजा नहीं है !
  • नीचे वाली इमारत में 48 व ऊपर वाली इमारत में 4 स्तंभ हैं !

8. हिरण मीनार

  • अकबर ने अपने हाथी हिरण की स्मृति में इस 80 फीट ऊंची इस इमारत का निर्माण करवाया !

9. इबादत खाना

  • 1575 में अकबर ने इसका निर्माण करवाया !
  • प्रारंभ में केवल इस्लाम धर्म पर वाद विवाद किया जाता था !
  • इसके अलावा दो मंजिला बीरबल महल का निर्माण करवाया गया !
  • 1570-71 में अकबर ने गुजरात पर विजय प्राप्त की थी !
  • इस विजय के उपलक्ष में 1601 में बुलंद दरवाजा का निर्माण कराया गया !
  • यह जमीन से 176 फीट ऊंचा है !
  • भरतपुर के लोहागढ़ दुर्ग के फतेह बुरज से यह भी यह दरवाजा दिखाई देता है !
  • विसेंट अर्थर स्मिथ – फतेहपुर सीकरी नगर को पत्थरों में डाला गया रोमांस कहां !
  • फर्ग्यूसन – यह उस आदमी के मस्तिष्क की परछाई है जिसने उसकी कल्पना की !

4.जहांगीर (1605 – 1627)

  • अकबर ने अपने जीवन काल में ही सिकंदरा (आगरा) अपने मकबरे का निर्माण प्रारंभ करवा दिया था इसे जहांगीर ने पूर्ण करवाया !
  • यह बौद्ध शैली से प्रेरित है !
  • गुंबद विहीन है !
  • स्वतंत्र रूप से मीनारों का पहला प्रयोग इसी मकबरे में किया गया है !
  • जहांगीर की पत्नी नूरजहां या मेहरून्निसा ने अपने पिता मिर्जा गयास बेगम का एतमादुधोला का मकबरा आगरा के निकट बनवाया !
  • मुगलकाल में पूर्ण संगमरमर की बनी यह प्रथम इमारत है !
  • मुगलकाल में सर्वप्रथम पितरादूरा का प्रयोग इसी इमारत में किया गया था !
  • पितरादूरा सफेद संगमरमर पर रंगीन की जड़ाई को कहते हैं !
  • जहांगीर ने श्रीनगर में शालीमार बाग लगवाया और इसे शाहजहां ने पूर्ण करवाया !
  • जहांगीर ने अजमेर में दौलत बाग या सुभाष उद्यान का निर्माण करवाया !
  • इसी बाग के गुलाब के फूलों से नूरजहां की माता अस्मत बेगम ने इत्र का आविष्कार किया था !
  • नूरजहां के भाई आसफ खा ने श्रीनगर में डल झील के सामने निशाद बाग का निर्माण किया !
  • जहांगीर ने लाहौर में स्थित शाहदरा के दिलकुशा बगीचे में अपने मकबरे का निर्माण प्रारंभ करवाया जिसे नूरजहां ने पूर्ण किया !
  • जहांगीर व नूरजहां को इसी में दफनाया गया था !

5. शाहजहां (1628 -58)

  • शाहजहां के काल को मुगल स्थापत्य का स्वर्ण काल माना जाता है !
  • पर्षी ब्राउन ने लिखा है – जैसे आगस्टस ने रोम को ईटो से बना हुआ पाया और पत्थरों से बना हुआ छोड़ दिया उसी प्रकार शाहजहां ने अकबर के लाल पत्थर को संगमरमर में परिवर्तित कर दिया !
  • शाहजहां ने सर्वप्रथम अकबर के द्वारा निर्मित आगरा दुर्ग के दीवाने -ए-आम को जुड़वा कर संगमरमर का बनवाया !
  • शाहजहां ने पहली बार संगमरमर के पत्थर का प्रयोग इसी इमारत में किया !
  • इसके अलावा शाहजहां ने आगरा दुर्ग में संगमरमर की मोती मस्जिद बनवाई यह इस दुर्ग की सबसे सुंदर इमारत है !
  • शाहजहां ने दुर्ग में संगमरमर का मुसम्मन या शाहबुर्ज बनवाया !
  • औरंगजेब ने शाहजहां को इसी बुर्ज में बंदी बनाकर रखा !
  • इसके अलावा दुर्ग के परकोटे, नगीना मस्जिद का निर्माण करवाया !
  • शाहजहां की पुत्री जहांआरा ने आगरा की जामा मस्जिद बनवाई इसी को मस्जिद -ए – जहांनुमा कहते हैं !
  • दिल्ली की जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहां के द्वारा करवाया गया !
  • 1638 में शाहजहां ने दिल्ली में शाहजहानाबाद नगर का निर्माण करवाया !
  • इसी ने हमिद अहमद की देखरेख में दिल्ली का लाल किला बनवाया था !
  • इसके दीवाने -ए-आम मैं बेबादल खा के द्वारा निर्मित तख्त ए ताऊस या मयूर सिंहासन रखा जाता था !
  • इसी में ही कोह-ए- नूर हीरा लगा हुआ था !
  • दीवाने खास की दीवार पर अमीर खुसरो की इस पंक्ति को लिखा गया” गर फिरदौस भर रूठन जमी जमीअस्त ……………….

ताजमहल

  • ताजमहल को मुगल स्थापत्य का सर्वश्रेष्ठ इमारत माना गया है !
  • 1631 में शाहजहां की पत्नी अर्जुमंद बानो बेगम या मुमताज की मृत्यु हो गई !
  • इस की स्मृति में आगरा में यमुना नदी के किनारे ताजमहल का निर्माण प्रारंभ करवाया
  • 22 वर्ष 9 करोड़ की लागत व मकराना के संगमरमर से यह बनकर पूर्ण हुआ !
  • इसका प्रधान वास्तुकार अहमद लाहौरी था जिसे शाहजहां ने नादिर उल हसरार की उपाधि प्रदान की !
  • इसका अर्थ होता है कि संसार के आदित्य में भी आदित्य !
  • इसका प्रधान कारीगर ईशा खा था !
  • हवेल ने ताजमहल को भारतीय नारी की साकार प्रतिमा कहा इसे स्थापत्य से नहीं बल्कि मूर्ति कला से संबंधित माना !

6. औरंगजेब ( 1658 -1707 )

  • इसने दिल्ली की लाल किले की मोती मस्जिद लाहौर की बादशाही मस्जिद वह हरियाणा के पिंजौर बाग का निर्माण करवाया था !
  • 1679 में औरंगजेब की पत्नी रबिया उद् दुर्रानी की मृत्यु हो गई !
  • इसी की स्मृति में औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में मकबरा बनवाया इसे बीबी का मकबरा, दक्षिण भारत का ताजमहल या ताजमहल की फूहड़ नकल कहते हैं
  • औरंगजेब ने अपने स्वयं का मकबरा खुल्दाबाद (महाराष्ट्र) में बनवाया था !

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May 19, 2020

दिल्ली सल्तनत का प्रशासन व स्थापत्य कला

दिल्ली सल्तनत प्रशासन

दिल्ली सल्तनत में सुल्तान सभी विभाग का प्रमुख होता था सुल्तान के बाद वजीर प्रमुख अधिकारी होता था वजीर वजारत सबसे बना है जिसका अर्थ है मंत्री परिषद

वजीर शासन के कार्य में राजा की सहायता किया करता था एवं अन्य अधिकारियों की नियुक्ति वजीर के द्वारा की जाती थी

ग़ुलाम वंश में कुतुबुद्दीन ऐबकदिल्ली सल्तनत

वजीर वित्त एवं राजस्व से संबंधित अधिकारी होता था अधिकारियों को वेतन देना और उनका स्थानांतरण करना वजीर के नियंत्रण में होता था

प्रशासन का आधार

  • एक धर्म ग्रंथ – कुरान
  • एक संप्रसू – खलीफा
  • एक – सुल्तान

प्रमुख विभाग

  1. दीवान ए वजारत-वित्त व राजस्व से संबंधित
  • दीवान ए अर्ज —
  • बलबन के काल में इसकी स्थापना हुई यह सैन्य विभाग से संबंधित था इसका प्रमुख आरिफ ए मामलिक कहलाता था इसका कार्य सैनिकों की भर्ती करना उनका हुलिया रखना तथा सैनिकों के लिए रसद की व्यवस्था करना
  • दीवान ए रसालत–यह विदेश विभाग से संबंधित था डॉक्टर आई एच कुरेशी ने इसे धार्मिक विभाग से संबंधित बताया

दीवान ए इंसा

यह राजकीय पत्राचार से संबंधित विभाग था

दीवान ए कजा

यह न्याय विभाग से संबंधित था काजी उल कुजात को जाट इस विभाग का प्रमुख होता था

वजीर की सहायता के लिए निम्न अधिकारी हुआ करते थे

1 दीवान ए तन – यह वेतन बांटने का कार्य करता था

2 मुशर्रफ – यह आय तथा व्यय का हिसाब रखता था

3 मुस्तफा – यह आय तथा व्यय की जांच करता था

प्रांतीय शासन

मोहम्मद बिन तुगलक के काल में कुल 23 प्रांत थे प्रांत में दो प्रकार के अधिकारी थे जो निम्नलिखित हैं

  • एक्तादार – शांति व्यवस्था बनाए रखना
  • ख्वाजा – इसका कार्य भू राजस्व से संबंधित था

जिला / शिक

एकता का विभाजन जिला या सिक में किया गया बलवान के काल में यह व्यवस्था लागू की गई सिक प्रमुख अधिकारी सिकदार होता था इसका कार्य जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना था लोदी वंश के शासकों ने जिले के लिए सरकार शब्द का प्रयोग किया

परगना

दिल्ली-सल्तनत में जिले का विभाजन परगना में किया गया परगने के प्रमुख अधिकारी थे

1 आमिल – इसका कार्य परगना में शांति व्यवस्था बनाए रखना था

2 मुशर्रफ – यह आय तथा व्यय से संबंधित अधिकारी था

3 कारकुन – यह राजस्व विभाग से संबंधित अधिकारी होता था

4 गांव – यह प्रशासन की सबसे निचली काई होती थी

सैन्य व्यवस्था दशमलव प्रणाली पर आधारित थी इसकी जानकारी तारीख ए फिरोज शाह से मिलती है जो निम्नलिखित है

  • पेदल
  • अश्व
  • गज

सेना – दिल्ली सल्तनत में दो प्रकार की सेना थी

  • हश्म ए क्लब- यह सुल्तान की सेना थी जो कि राजधानी में रहती थी
  • हश्म ए अत्रफ – यह प्रांतों की सेना थी

भू राजस्व व्यवस्था

  • इकता भूमि
  • खालसा भूमि
  • अनुदान भूमि
  • हिंदू सामंतों की भूमि

दिल्ली-सल्तनत में रवि व खरीफ दोनों प्रकार की फसलें बोई जाती थी इस काल में मुख्य फसल धान थी नगदी फसल गन्ना तेल सरसों व कपास थे सिंचाई के लिए रहट का प्रयोग किया जाता था बाबरनामा वह मलिक मोहम्मद जायसी के द्वारा रहट का उल्लेख किया गया है

उत्पादन के आधार पर भूमि

  • पोलाज
  • परती
  • चाचर
  • बंजर

भू राजस्व का निर्धारण

अलाउद्दीन खिलजी के काल में मुख्य रूप से भू राजस्व निर्धारण करने की तीन विधियां थी जो निम्नलिखित है

  • खेत बटाई – खेत में खड़ी फसल का किसान और राज्य के मध्य में बंटवारा
  • लंक बटाई – फसल काटकर उसका गट्ठर के रूप में बटवारा
  • रास बटाई – अनाज के रूप में बटवारा

पिजन

यह रुई धोने की कमान होती थी फारसी भाषा में रुई धोने का कार्य करने वाले नदा भी खेल आते थे रोहित होने पर भी दिल्ली-सल्तनत में कर लिया जाता था

तकली

दिल्ली-सल्तनत में कतई का पारंपरिक कार्य तकली कहलाता था तकली को फारसी भाषा में दुक कहा जाता था

सल्तनत कालीन स्थापत्य कला

1 क़ुतुब मीनार

2 बलबन का मकबरा दिल्ली में स्थित शुद्ध इस्लामी पद्धति पर निर्मित यह पहला मकबरा माना जाता है

3 अटाला मस्जिद जौनपुर में स्थित इस मस्जिद का निर्माण फिरोजशाह तुगलक के काल में शुरू हुआ तथा इब्राहिम शाह शर्की के काल में इस मस्जिद का निर्माण पूरा हुआ

4 हिंडोला महल मालवा में होशंग शाह के काल में इसका निर्माण हुआ

5 जहाज महल महमूद प्रथम के द्वारा मांडू में इस महल का निर्माण कराया गया

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May 18, 2020

मौर्यकालीन गुहालेख व स्तूप और मौर्य कालीन साहित्य व सिक्के

मौर्यकालीन गुहालेख

  • अशोक के गया (बिहार) अभिलेख बराबर पहाड़ी पर आजीवक संप्रदाय की गुफाएं दान दी जिन्हें निम्न नामों से पुकारा जाता है !
  • सुदामा
  • विश्व झोपड़ी
  • कर्ण चापर
  • अशोक के पौत्र दशरथ ने भी इसी पहाड़ी पर आजीविका संप्रदाय लोमश ऋषि की गुफा दान की जो सबसे सुंदर गुफा थी !
  • दशरथ ने भी अशोक के समान देवान प्रियदर्शी की उपाधि को धारण किया !
  • दशरथ ने गया जिले में स्थित नागार्जुन पहाड़ी पर ही आजीविका संप्रदाय को गुफा दान दे दी जिन्हें निम्न नामों से जाना जाता है
  • गोपी का गुफा
  • बौद्धिक गुफा
  • वैदिक गुफा
  • व सातों गुफाओं को सम्मिलित रूप से सप्त गुफा कहा जाता है !

मौर्यकालीन स्तूप

  • इसका प्रारंभिक उल्लेख ऋग्वेद में हुआ !
  • ऋग्वेद में धूप नामक शब्द का उल्लेख है जिसका अर्थ है कि उठती हुई जवाला/राख का ढेर
  • महात्मा बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद उनकी अस्थियों पर जो स्थापित बनाया गया उसी को स्तूप का गया है !
  • बुध की अस्थियों को 8 राज्यों में बांट दिया गया था!
  • इन 8 में से वर्तमान में केवल पिपरवा (उत्तर प्रदेश) के स्तूप के अवशेष मिलते हैं !
  • बौद्ध ग्रंथ दिव्या दान के अनुसार अशोक के द्वारा 84000 स्तूपो का निर्माण करवाया गया !
  • अशोक के समय निर्मित स्तूपो में भरहुत (मध्य प्रदेश) का स्तूप सबसे प्राचीन है !
  • इसकी खोज 1872-73 में कनिखम के द्वारा की गई !
  • सर्वप्रथम जातक कथाओं का भरहुत के स्तूप पर किया गया !
  • जातक कथाओं का अर्थ- बुद्ध के जीवन से संबंधित घटनाओं से है !
  • इस स्तूप पर अजातशत्रु महात्मा बुद्ध की वंदना करते हुए दिखाया गया है !
  • मौर्य काल में इस स्तूप की वेदिका लकड़ी की बनी होती थी सुंग काल में इसे पत्थर की बनवाई गई !
  • अशोक के समय निर्मित स्तूपो में सांची का स्तूप सबसे प्रसिद्ध है !
  • इसके निर्माण में अशोक की पत्नी देवी/महादेवी का योगदान माना जाता है !
  • इसकी खोज 1818 में रॉयल ट टेलर के द्वारा की गई !
  • 1920 -30 में जॉन मार्शल इस पहाड़ी को साफ करवा कर इस स्तूप के अन्य अवशेष की खोज की

सांची के स्तूप

:- सांची से कुल 3 स्तूप मिले हैं जो कि निम्न प्रकार से हैं

  • स्तूप A – “बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं” !
  • स्तूप B – इसमें बौद्ध प्रचार को के अवशेष रखे गए हैं !
  • स्तूप C – इसमें बुद्ध के शिष्य सारिपुत्र,
  • के अवशेष मिलते हैं !
  • सारनाथ का धमेख स्तूप अशोक के समय निर्मित था !
  • प्रारंभिक स्तूपो का निर्माण ईटों, लकड़ियों, व पत्थरों से हुआ !
  • चट्टानों को काटकर बनाए गए स्तूपो को चैत्य कहा जाता है तथा बौद्ध भिक्षुओं के पूजा स्थान भी होते हैं !
  • बौद्ध भिक्षुओं के आवास स्थलों को विहार कहा जाता है !

स्तूपो के प्रकार

  • स्तूपो के चार प्रकार होते हैं जोकि निम्नलिखित हैं
  • शारीरिक स्तूप :- जिनमें बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं उनको सबसे पवित्र माना गया है !
  • पारभोगिक स्तूप :- बुद्ध तथा उनके शिष्यों ने अपने जीवन काल में जिन वस्तुओं का उपयोग किया हो जैसे भिक्षा पात्र आदि !
  • उद्ददेसिक स्तूप :- बुद्ध तथा उनके शिष्यों ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के उद्देश्य जिन स्थानों की यात्रा की
  • संकल्पित स्तूप :- राजा व व्यापारियों के द्वारा बनाए गए स्तूप

मौर्य कालीन साहित्य

  • यूनान के शासक सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को अपना दूध बनाकर चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था !
  • मेगस्थनीज 299 ईसवी पूर्व तक चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहा जहां उसने यूनानी भाषा इंडिका नामक पुस्तक लिखी !
  • परंतु यह अभी तक प्राप्त नहीं हुई परंतु कई बाद के लेखकों ने अपनी पुस्तक में लिखा है
  • कि मेगस्थनीज के द्वारा इंडिका लिखी गई जिसमें इन बातों को लिखा गया है
  • एरियन – ए वीसीयस (सिकंदर की जीवनी)
  • स्ट्रेबो – जियोग्राफिक
  • जस्टिन – एपि टाम
  • प्लितार्क – लहिब्स
  • पिलनी – natural storica
  • Talmi – जो ग्राफी
  • मेगास्थनीज ने कहीं पर भी चाणक्य नाम का उल्लेख नहीं किया !
  • मेगास्थनीज ने कई बातें असत्य कही जैसे-
  • भारत में अकाल नहीं पड़ते
  • भारतीयों को लेखन कला का ज्ञान नहीं है
  • भारत में दास प्रथा का प्रचलन नहीं था
  • भारतीय समाज सात वर्गों में विभक्त था
  • जैन आचार्य भद्रबाहु ने कल्पसूत्र की रचना की
  • चंद्रगुप्त के पुरोहित या प्रधानमंत्री चाणक्य (कौटिल्य) विष्णु गुप्त ने संस्कृत भाषा में अर्थशास्त्र की रचना की
  • यह संस्कृत में लिखित एक पांडुलिपि थी
  • इसमें 15 अधिकरण व 180 प्रकरण है
  • 1905 में तंजौर (कर्नाटक) के ब्राह्मण ने इसकी पांडुलिपि तंजौर के सरकारी पुस्तकालय कक्ष श्याम प्रसाद शास्त्री को भेंट की थी !
  • 1902 में इसे पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया !
  • चाणक्य ने अपनी पुस्तक न तो चंद्रगुप्त मौर्य और न ही मेगास्थनीज के नाम का उल्लेख किया है !

मौर्य कालीन सिक्के

  • इन सिक्कों को आहत/पंचमार्क सिक्के कहते हैं !
  • धातु को पिघला कर किसी वस्तु से दबाकर इन सिक्कों का निर्माण किया जाता था !
  • इन पर सूर्य, चंद्रमा, पशु पक्षी, इत्यादि की आकृति बनी होती थी !
  • टकसाल के अधिकारी को कोषाध्यक्ष कहते थे !
  • रूप दर्शक नामक अधिकारी इन सिक्कों की जांच करता था !
  • स्वर्ण सिक्के :- 1 स्वर्ण 2. निसक
  • चांदी के सिक्के :- 1. पण 2. धरण 3. कर्सापन
  • ताम्र सिक्के :- 1. भासक 2. काकनी

महाजनपद और उनकी राजधानी अवंतीमौर्यकालीन गुहालेख http://मौर्यकालीन गुहालेख

May 18, 2020

मौर्यकालीन अशोक के स्तंभ लेख के बारे में जाने ?

अशोक के स्तंभ लेख

  • अशोक के स्तंभ लेख उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चुनार नामक स्थान पर बलुआ पत्थर से निर्मित इन पत्थर को साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगवाया गया !
  • संभवत अशोक को अभिलेख लिखवाने की प्रेरणा ईरान के शासक डेरियस या दारा सिंह परंतु दोनों के स्तंभों में पर्याप्त अंतर नजर आता है !

डेरियस

  • इसके स्तंभों को अलग अलग तराश कर जोड़ा गया है !
  • नीचे से ऊपर तक एक समान है !
  • यह गड़ारीदर स्तंभ है !
  • चौकियों पर निर्मित है !
  • महलों में स्थित व शीर्ष पर पूर्वजों की मूर्ति स्थित है
  • उल्टे कमल के नीचे बने हुए हैं !
  • लेख विहीन व पॉलिसी विहिन है !

अशोक के स्तंभ

  • इसके स्तंभों को एकात्मक अर्थात एक ही पत्थर को काटकर तराशे गए हैं !
  • नीचे से ऊपर तक पतले होते हैं !
  • यह सपाट बने हुए हैं !
  • धरातल पर खड़े हुए हैं !
  • खुले में स्थित वह शीर्ष पर पशुओं की मूर्ति बनी हुई है !
  • उल्टे कमल के शीर्ष पर बने हुए हैं !
  • लेख युक्त व पॉलिश युक्त हैं !
  • अशोक के स्तंभों को इतनी चमकदार पॉलिश की गई है आज भी इनकी चमक फीकी नहीं है !
  • इस पॉलिश के लिए विंसेट अर्थ स्मिथ में लिखा है की इतने विकसित होने पर भी अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए हम इस पॉलिश करने की कला को विलुप्त मान लेते हैं !

स्तंभ लेख के भाग:- स्तंभ लेखों को भी दो भागों में बांटा गया है !

  1. वृहद स्तंभ लेख
  2. लघु स्तंभ लेख

1. वृहद स्तंभ लेख

  • यह 6 स्थानों से प्राप्त हुए हैं
  • जो कि निम्नानुसार है
  • यह मेरठ मैं था फिरोजशाह तुगलक ने इसे लाकर कुशक-ए -शिकार या शिकार महल मैं लगवाया
  • मुगल शासक के समय बारूद खाने में विस्फोट के कारण यह क्षतिग्रस्त हो गया था !
  • अतः 1867 मैं इसे पुन मुद्रित करवाया गया

1. दिल्ली-मेरठ स्तंभ लेख

2. दिल्ली-टोपरा स्तंभ लेख

  • यह हरियाणा के अंबाला जिले के अंबाला गांव में स्थित था !
  • इसे भी फिरोज शाह तुगलक ने दिल्ली लाकर अपने महल में लगवाया इसे मीरान- ए-जरीन (स्वर्ण मनार) भीमलात सुनहरी लाट, या शिवालिक लाट भी कहा जाता है !
  • इस पर अजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ का भी लेख लिखा हुआ है !
  • शम्स -ए-सिराज अफीम की पुस्तक तारीख-ए-फिरोज साईं मैं लिखा गया है कि यह स्तंभ फिरोजशाह के द्वारा दिल्ली लाई गई !
  • मोहम्मद हामिद कुरेशी की पुस्तक सीरत-ए-फिरोजशा ही मैं उस नाव का चित्र बना हां जिस नाव से यह स्तंभ दिल्ली लाए गए !

3 लौरिया नंदनगढ़ (बिहार)

  • यह सबसे सुरक्षित व सुंदर स्तंभ है इस पर मुगल शासक औरंगजेब रिबून बॉर्न नामक अंग्रेज अधिकारी का भी लेख लिखा गया है1792 ईसवी का भी लेख लिखा गया है !
  • इसके शीर्ष पर सिंह की आकृति वह हंस को मोती चुगते हुए दिखाया गया है !

4. अरेराज (बिहार)

5. रामपुरवा (बिहार)

6. प्रयाग/कौशांबी (उत्तर प्रदेश)

  • अशोक ने इसे कौशांबी में लगवाया परंतु अकबर ने इसे लाकर इलाहाबाद दुर्ग में लगवा दिया !
  • इस पर सम समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति तथा जहांगीर बीरबल का लेख भी लिखा हुआ है !
  • प्रत्येक स्थान के स्तंभ पर 6 लेख लिखें हुए हैं तथा एक समान है केवल दिल्ली टोपरा वाले में अलग से सातवा लेख लिखा गया है !

2. लघु स्तंभ लेख

  • लघु स्तंभ लेख निम्न प्रकार से हैं
  1. रमनदेई (नेपाल)
  • शासक के 20 वर्ष में मैंने लुंबिनी की यात्रा की वह बुद्ध की जन्मस्थली होने के कारण है धार्मिक कर (बली) को समाप्त कर दिया वह भू राजस्व कर का भाग 2/6 से घटाकर 1/8 कर दिया !
  • यह अशोक का सबसे छोटा अभिलेख है तथा इसके शीर्ष पर घोड़े की आकृति बनी हुई है !

2. निग्लिवसगर (नेपाल)

  • शासन के 14 वर्ष कनक मुनि के स्तूप का का आकार दुगना कर दिया गया !
  • कनक मुनि पौराणिक के बुद्ध को कहते हैं !

3. सांची का लघु स्तंभ (मध्य प्रदेश), सारनाथ का लघु स्तंभ (उत्तर प्रदेश), कौशांबी का लघु स्तंभ (उत्तर प्रदेश)

  • इनसे जो लघु स्तंभ मिले उनमें अशोक ने चेतावनी दी है अगर किसी ने संघ में फूट डालने का प्रयास किया तो उसे श्वेत वस्त्र पहनाकर संघ से निष्कासित कर दिया जाएगा
  • प्रयाग/कौशांबी के स्तंभ में अशोक की पत्नी कारू वाकी व उसके पुत्र तीवर के नाम का उल्लेख है !
  • इसमें कारू वाकी के द्वारा दान दिए जाने का उल्लेख है इसे रानी का अभिलेख कहते हैं !

नेपाल में स्तंभ लेख http://अशोक के स्तंभ लेख

अशोक के लेख वीहीन स्तंभ

  • अशोक के कुछ ऐसे ही स्तंभ भी हैं जोकि लेख वीहीन
  • सांची स्तंभ (मध्य प्रदेश) – चार सिंह
  • वैशाली स्तंभ (बिहार) -एक सिंह
  • संकिसा स्तंभ (उत्तर प्रदेश) – हाथी
  • रामपुरवा स्तंभ (बिहार) – वृषभ
  • सारनाथ स्तंभ (उत्तर प्रदेश) – चार सिंह
  • लेकिन सबसे प्रसिद्ध सारनाथ का स्तंभ है जिस पर चार सिंह पीठ सटा कर बैठे हुए हैं और इनको मुंडक उपनिषद से लिया गया है !
  • भारत का राष्ट्रीय वाक्य सत्यमेव जयते लिखा हुआ है !
  • इसकी चौकी में स्थिति गोल चक्कर हैं वह 32 तिलिया है !
  • ऊपर की चारों दिशाओं में बड़े चक्रों में 24 तिलिया है जिनमें 4 पशुओं को गतिमान अवस्था में दर्शाया गया है ! 1. हाथी 2. वृषभ 3. अशव 4. सिंह
  • फुशो ने इनका संबंध महात्मा बुध से स्थापित किया है !
  • हाथी – गर्भाधान (Buddh)
  • वृषभ – बुद्ध की राशि/धर्म चक्र प्रवर्तन
  • सिंह – बुद्ध के पराक्रम या शाक्य कुल के राजकीय प्रतीक बताया गया है !
  • अस्व- गृह त्याग http://Jay
  • ब्लॉख ने इनका संबंध हिंदू लोक देवी देवताओं से संबंध स्थापित किया है जो कि निम्न प्रकार से है !
  • हाथी – इंद्र
  • अस्व – सूर्य
  • वृषभ – शिव
  • सिंह – दुर्गा

May 17, 2020

मौर्यकालीन कला व संस्कृति अशोक के अभिलेख व शिलालेख

अशोक के अभिलेख

  • अशोक के अभिलेखों को तीन भागों में बाटा गया है जोकि निम्नानुसार है!

1. शिलालेख:-इन शिलालेखों को दो भागों में बांटा गया है जो निम्नानुसार है

a. वृहद शिलालेख

b. लघु शिलालेख

सबसे पहले वृहद शिलालेख के बारे में जानेंगे !

a. वृहद शिलालेख:- वृहद शिलालेख 8 स्थानों से प्राप्त हुए तथा प्रत्येक स्थान की चट्टान पर 14 लेख लिखें हैं ! जो कि निम्नानुसार है !

  1. शाहबाजगढ़ी
  • यह पाकिस्तान में स्थित है !
  • इस स्थान की चट्टानों के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में है !
  • इसकी खोज कोर्ट ने कि है !

2. मान सेहरा

  • यह भी पाकिस्तान में स्थित है !
  • इस स्थान की चट्टानों के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में है !
  • इसकी खोज कनिघम की है !
  • नोट :- इन दो स्थानों की चट्टानों के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में बाकी अभिलेख ब्राह्मी लिपि में है !

3. कालसी

  • यह उत्तराखंड में स्थित है !
  • इसकी खोज फॉरेस्ट ने की है !
  • इसकी लिपि ब्राह्मी लिपि है !

4. गिरनार

  • यह गुजरात में स्थित है !
  • इसकी लिपि भी ब्राह्मी लिपि है !
  • इसकी खोज जेम्स टॉड ने की है !
  • यह सर्वाधिक सुरक्षित चट्टान है !

5. सोपारा

  • यह महाराष्ट्र में स्थित है !
  • इसकी लिपि भी ब्राह्मी लिपि है !
  • इसकी खोज भगवान लाल ने की !

6. ए रागुडी

  • यह आंध्र प्रदेश में स्थित है !
  • इसकी खोज Anu Ghosh ने की है !
  • इसकी लिपि भी ब्राह्मी लिपि है !

7. धोली

  • यह उड़ीसा में स्थित है !
  • इसकी लिपि भी ब्राह्मी लिपि है !
  • इसकी खोज कीटो ने की है !

8. जोगड़

  • यह भी उड़ीसा में स्थित है !
  • इसके लिपि भी ब्राह्मी लिपि है !

अशोक के 14 लेख :- वृहद शिलालेख के अंतर्गत इन 8 स्थानों पर अशोक के जो 14 लेख लिखे हैं वह निम्नानुसार है !

प्रथम वृहद शिलालेख

  • इसमें अशोक ने सामाजिक उत्सव का निषेध किया है इसके अलावा पशु वध का भी निषेध किया गया है
  • इसमें लिखा है कि पाक साला है हजारों पशु प्रतिदिन मरते हैं के स्थान पर केवल दो मोर तथा एक मिर्ग ही मारा जाएगा !
  • भविष्य में इसे भी रोक दिया जाएगा !

दूसरा वृहद शिलालेख

  • इसमें सीरिया के शासक एन्टि योकस वह अपने पड़ोसी राज्य चोल चेर , केरल पुत, ताम्र वर्षी, श्रीलंका मैं मानव तथा पशु चिकित्सा उपलब्ध करवाने के बारे में लिखा गया है !
  • इसके अलावा साम्राज्य के विविध हिस्सों में जड़ी बूटियां उगाने के बारे में लिखा गया है !
  • अशोक ने लिखा है कि उसने यात्रियों के लिए सड़कें बनवाई जिसके किनारे छायादार वृक्ष लगवाए सराय बनवाई तथा कुआं खुद वाया !

तीसरा वृहद शिलालेख

  • इसमें अशोक में युक्त नामक अधिकारी को आदेश दिया कि वह प्रादेशिक वह रज्जू के साथ प्रत्येक 5 ईयर के बाद निकाली जाने वाली दम में यात्राएं उज्जैन तथा तक्षशिला की यात्राएं 3 वर्षों के बाद निकाली जाएगी !

चौथा वृहद शिलालेख

  • रण घोष की बजाए दम घोष की नीति बेहतर होगी!

पांचवा वृहद शिलालेख

  • शासन के 13 वर्ष दम्म महामात्य नामक अधिकारी की नियुक्ति की है तथा इसके अपने भाई और बहनों के महलों में भी नियुक्त किया ताकि वह भी उनका अनुसरण कर सकें !
  • यवन कंबोज गंधार रिस्टिक आदि जनजातियों में प्रचार का उल्लेख है!

छटा वृहद शिलालेख

  • प्रतिवेदक नामक अधिकारी को यह कहा गया प्रजा व साम्राज्य से जुड़ी सूचनाएं मुझ तक तुरंत पहुंचाई जाए !

सातवां वृहद शिलालेख

  • सभी धर्मों को मानने वाले साम्राज्य के सभी हिस्सों में रह सकते हैं !

आठवां वृहद शिलालेख

  • शासन के दसवें वर्ष बाद इन दम यात्राओं को निकालना प्रारंभ किया है !
  • इन यात्राओं को अन संधान कहां गया है !

नोवा वृहद शिलालेख

  • कुछ स्त्रियां सार हीन मंगल करती हैं इनके स्थान पर इन्हें दम मंगल का प्रयोग करना चाहिए !

दसवा वृहद शिलालेख

  • धम नीति की पालना से स्वर्ण की प्राप्ति होती है !

11 वा वृहद शिलालेख

  • दम दान अर्थात माता पिता की सेवा गुरुजनों का आदर वह मित्रों की सहायता श्रेष्ठदान है !

12 वा वृहद शिलालेख

  • इसमें धार्मिक सहिष्णुता का उपदेश कहते हैं इसमें लिखा है कि एक धर्म को मानने वाला दूसरे धर्म का अपमान करता है तो अपने धर्म को हानि पहुंचाता है!

13 वा वृहद शिलालेख

  • इसमें समकालीन पांच विदेशी शासक का वर्णन है
  • इसके अलावा यव न, कंबोज, गांधार, आंध्र, पुलि, भोज धर्म प्रचार का उल्लेख है इसी में लिखा गया है कि शासन के 8 वर्ष बाद कलिंग पर विजय प्राप्त की गई जिसमें एक लाख मारे गए डेढ़ लाख घायल हो गए कितने बेघर हो गए सम्राट इस पर पश्चात प्रकट करता है !

14 वा वृहद शिलालेख

  • उपरोक्त 13 में हुई त्रुटि को सुधार करके लिखा गया है !

नोट:- धोली व जोगड मैं अशोक ने 11 12 13 लेख नही लिखवाया इसके स्थान पर दो अलग लेख लिखवाए !

प्रथम प्रथक शिलालेख:- सभी मनुष्य मेरी संतान है जिस प्रकार मैं अपनी संतान की यह लोग परलोक में सुख की कामना करता हूं उसी प्रकार प्रजा के सुख की भी कामना करता हूं !

दूसरा पृथक शिलालेख:- सभी मनुष्य मेरी संतान है जिन स्थानों पर धर्म का प्रचार नहीं किया गया वहां पर भी धर्म का प्रचार कर दिया गया है !

b. लघु शिलालेख:- अशोक के निम्नलिखित लघु शिलालेख पाए गए जोकि निम्नानुसार हैं !

  1. भाब्रू शिलालेख – बैराट
  • यह बीजक डूंगरी पहाड़ी पर मिला !
  • इसकी खोज 1837 में बर ट के द्वारा की गई !
  • कनिघम इस अभिलेख को चट्टान से काटकर कोलकाता ले गया वर्तमान में कोलकाता की रॉयल सोसाइटी में रखा हुआ है
  • यह सबसे लंबा अभिलेख है !
  • इसमें अशोक ने बुद्ध दम तथा सन के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की है !
  • इसमें 7 पुस्तकों का उल्लेख है जिन्हें पढ़ना भिक्षुओं के लिए आवश्यक माना गया है !

2. रूपनाथ- मध्य प्रदेश

  • पिछले ढाई वर्षों से मैं शाक्य धर्म का अनुयाई बना हुआ हूं !
  • प्रारंभ में मैं इसके प्रति उत्साहित नहीं था पिछले 1 वर्षों में मैं संघ के काफी निकट आ गया हूं तथा मेरे ब्राह्मणों को मिथ्या साबित कर दिया है !

3. अरोरा- उत्तर प्रदेश

  • स्तूपो के निर्माण के लिए मैंने 256 रातें भ्रमण करके बिताई है !

4. ब्रह्मागिरी – कर्नाटक

  • इसमें उषिला नामक नगर का उल्लेख है !
  • मास की, उदय कोल्लम (कर्नाटक), गुर्जरा मध्य प्रदेश आदि अभिलेखों में अशोक का नाम लिखा गया है !
  • मास्की के अभिलेखों में अशोक को बुद्ध शाक्य कहा गया है !

5. एरा कुड़ी – आंध्र प्रदेश

  • इसमें एक पंक्ति खरोष्ठी लिपि में लिखी गई है बाकी अभिलेख ब्राह्मी लिपि में लिखी गई है
  • तक्षशिला (पाकिस्तान) व अफगानिस्तान के अभिलेख अरे माइक लिपि में है !
  • शेर- ए- कुना अफगानिस्तान के अभिलेख अरे माई की व ग्रीक के तथा इसी को दीभासी अभिलेख कहते हैं !

मौर्यकालीन कला संस्कृतिअशोक के अभिलेख मौर्यकालीन कला व संस्कृति मौर्यकालीन कला व संस्कृति मौर्यकालीन कला व संस्कृति

May 3, 2020

मौर्यकालीन कला संस्कृति और प्रशासन के बारे में जाने

मौर्यकालीन कला व संस्कृति

चंद्रगुप्त मौर्य (322BC-298BC)

1917 में जर्मनी के विद्वान डॉक्टर स्पिनर ने बिहार के बुलंदी बाग जिले कुमार नामक स्थल से चंद्रगुप्त मौर्य का लकड़ी का बना महल मिला था

यूनान के लेखक हेरियन ने इस महल के लिए लिखा शानो शौकत यह सुसा/एकबतना महलों से भी श्रेष्ठ था!

एकबतना महल इरान के हखमनी साम्राज्य के महल थे!

चीन के यात्री फाह्यान ने लिखा है कि इसका निर्माण मनुष्यों ने नहीं बल्कि देवताओं व फरिश्तों ने किया है

150 ईसवी, का शक शासक के रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख मिला था इसमें लिखा है कि चंद्रगुप्त मौर्य के समय सौराष्ट्र प्रांत के गवर्नर पुष्य गुप्त वैश्य ने ऊर्जयनत रवेतक पहाड़ियों से निकलने वाली पलासनी व स्वर्ण सिकता

नदियों के पानी को रोककर गिरनार गुजरात नामक स्थान पर सुदर्शन झील का निर्माण करवाया तथा अशोक के समय तुसास्क यहां का गवर्नर था

जिसने इस झील पर बांध बनवाया है।

चंद्रगुप्त मौर्य के लिए दो अभिलेख मिले हैं।

1. सोहगौरा(उत्तर प्रदेश)- ताम्र-पत्र (1893)

इसमें श्रावस्ती के महामात्य मथुरा, मोडम (उत्तर प्रदेश) के अधिकारियों को आदेश दिया था कि वह अनाज ग्रह में अन्न का भंडार करें

ताकि सूखे व अकाल के समय प्रजा को लाभ मिल सके।

2. महा स्थान (बांग्लादेश) चूने का फट (BOARD)

इसमें अकाल से पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए ऋण देने का उल्लेख है

इसमें ऋण ताम्र सिक्के के रूप में दिया जाता था।

इसकी खोज 1931 में बारू नामक फकीर के द्वारा की गई थी।

यह ब्राह्मी लिपि में लिखित प्राचीनतम अभिलेख है।

मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी जो गंगा व सोन नदियों के किनारे स्थित थी

तथा मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को नगरों की रानी कहां।

बिंदुसार (298-272Bc)

बिंदुसार का कोई स्थापत्य

kala प्राप्त नहीं हुआ।

बिंदुसार ने अपना उत्तराधिकारी

सुसिम को घोषित किया।

अशोक ( 269BC-232BC)

अशोक ने 273 ईसा पूर्व खुद को मगध का शासक घोषित कर दिया

परंतु अशोक को अपने भाइयों के विद्रोह को दबाने में 4 वर्ष का समय लग गया।

अशोक का राज्याभिषेक 269 BC बीच में हो गया अशोक ने अपने अभिलेखों में जिन घटनाओं का उल्लेख किया है

वह अपने राज्याभिषेक के वर्षों से ही किया है

, 232 ईसा पूर्व में अशोक की मृत्यु हुई।

अशोक के बारे में जानने का प्रमुख साधन उसके अभिलेख हैं

यह ब्राह्मी, खरोष्ठी, अरे माइक, ग्रीक लिपि में प्राप्त हुए।

ब्राह्मी – भारत

खरोष्ठी – पाकिस्तान

एरामिक – पाकिस्तान+अफगानिस्तान

ग्रीक – अफगानिस्तान+ईरान

खरोष्ठी की उत्पत्ति ऐरमा इ क से हुई है तथा दोनों लिपियां दाएं से बाएं लिखी जाती हैं।

ग्रीक लिपि के अभिलेख अरे माइक के साथ ही मिले हैं।

अशोक अपनी प्रजा से सीधा संवाद स्थापित करना चाहता था

इसलिए जिस क्षेत्र में जैसी भाषा व लिपि किस लिपि उसी का प्रयोग किया।

इन अभिलेखों की भाषा प्राकृत है।

सर्वप्रथम 1750 में टिफे न थलेर अशोक का दिल्ली मेरिट का स्तंभ मिला था।

1837 मैं जेम्स प्रिंसेप ने दिल्ली टोपरा के स्तंभ की लिपि को पड़ा परंतु यह बताया

कि इन अभिलेखों को खुदवाने वाला श्रीलंका का शासक तिसाय था

क्योंकि तिसा य अशोक के समकालीन था तिसे ने श्रीलंका के ऐसे अभिलेख लगवाए

वह अशोक के समान देवनानी प्रियदर्शी की उपाधि धारण की

1915 में बीउल को मास्की (कर्नाटक) से लघु शिलालेख मिला

1917 में टर्नर ने इसका अनुवाद किया तथा बताया कि यह अभिलेख अशोक के हैं

क्योंकि सर्वप्रथम मास्की के अभिलेख अशोक का नाम मिला है।

अशोक के अभिलेखों को तीन भागों में बांटा गया है

1. शिलालेख

इन्हीं वृहद व लघु दो भागों में बांटा गया है

वृहद शिलालेख:- यह 8 स्थानों से प्राप्त हुए हैं तथा प्रत्येक स्थान की चट्टान पर 14 लेख लिखे हैं।

लघु शिलालेख:-

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मौर्यकालीन कला संस्कृतिमौर्यकालीन कला संस्कृतिमौर्यकालीन कला संस्कृति

April 30, 2020

हर्यक वंश व विदेशी आक्रमण!

हर्यक वंश और विदेशी आक्रमण

हर्यक वंश 544-412 ईसा पूर्व तक रहा

राजधानी — गिरिव्रज

बिंबिसार को हर्यक वंश का

संस्थापक माना जाता है

बिंबिसार के काल में अवंतिका शासक

चंड प्रद्योत था

बिंबिसार ने अपने राज वैद्य जीवक को चंड प्रद्योत के दरबार में भेजा था

बिंबिसार की हत्या उसके पुत्र अजातशत्रु के द्वारा की गई

अजातशत्रु के काल में पहली बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया

अजातशत्रु की हत्या उसके पुत्र उद यीनी ने कि

उदयिन ने गंगा व सोन नदी के संगम पर पाटलिपुत्र की स्थापना की थी

शिशुनाग वंश 412-344 BC

से सुना को इस वंश का संस्थापक माना जाता है इसने वैशाली को अपनी राजधानी के रूप में स्थापित किया

कालाशोक ऐसी वंश का शासक था कालाशोक के काल में ही दूसरी बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया

नंद वंश 344-324 BC

संस्थापक — महापदम नंद

महापदम नंद के द्वारा पहली बार कलिंग आक्रमण किया गया जिसमें महापदम नंद को सफलता मिली इस आक्रमण की जानकारी कलिंग के शासक खारवेल के हाथी गुफा अभिलेख से मिलती है

घनानंद को नंद वंश का अंतिम शासक माना गया

मौर्य वंश की स्थापना से पहले भारत में ईरानी हक मनी वंश के शासकों ने आक्रमण किया

भारत में पहला आक्रमण साइरस दित्य के द्वारा किया गया ईरानी आक्र,मण के बाद ही भारत में खरोष्ठी लिपि का प्रचलन हुआ

दूसरा शासक डेरियस प्रथम या दारा प्रथम

यूनानी आक्रमण

सिकंदर यूनान के मकदूनिया का निवासी था

सिकंदर ने 326 ईसा पूर्व में भारत पर आक्रमण किया

जेलम नदी के किनारे सिकंदर ने पोरस के साथ युद्ध किया था

सिकंदर के आक्रमण के समय तक चला का शासक आंबी थ सिकंदर ने भारत में 2 नगरों की स्थापना की

हर्यक वंश और विदेशी आक्रमण हर्यक वंश और विदेशी आक्रमण

1 निकेया

2 बुकाफेला

323 ईसा पूर्व में बेबीलोन में सिकंदर की मृत्यु हो गई सिकंदर का उत्तराधिकारी सेल्यूकस निकेटर था

हर्यक वंश १ २ ३ ४ ५ ६ ७ 8 ९ ० हर्यक वंश

April 30, 2020

जैन धर्म क्या होता हें व् इसके बारे में जाने ?

जैन जिन शब्द से बना है जिसका अर्थ है इंद्रियों पर नियंत्रण करना

तीर्थंकर

तीर्थंकर से तात्पर्य है ऐसा व्यक्ति जो अपने ज्ञान के माध्यम से मानव को

इस संसार रूपी भवसागर से पार करने में मदद करें

कुल तीर्थंकर 24 माने गए हैं

1 ऋषभदेव

2 (22) अरिष्ट नेमी

3 (23) पार्श्वनाथ

महावीर स्वामी

महावीर

स्वामी की फोटो http://www.goldenclasses.com/जैन-धर्म/

चार महाव्रत

1 सत्य

2 अहिंसा

3 अस्तेय — चोरी नहीं करना

4 अपरिग्रह — जरूरत से ज्यादा संग्रह नहीं करना

महावीर स्वामी के द्वारा पांचवा महाव्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा गया

महावीर स्वामी

जन्म – 540 ईसा पूर्व

स्थान – वैशाली के कुंड ग्राम नामक स्थान पर

पिता – सिद्धार्थ

माता – त्रिशला

पत्नी – यशोदा

पुत्री – प्रियदर्शना

महावीर स्वामी को जुंमबिक ग्राम के समीप रिजुपालिका नदी के किनारे

साल वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई इसके बाद महावीर स्वामी निम्न नामों से जाने गए

1 अर्ह – योग्य

2 निर्ग्रन्थ – बंधन रहित

3 जिन – विजेता

468 ईसा पूर्व में पावा में महावीर स्वामी की मृत्यु हुई जो मल्ल महाजनपद की राजधानी थी

जैनधर्म की शिक्षाएं

जैन धर्म ईश्वर व आत्मा दोनों में विश्वास करता है

परंतु इन दोनों का स्थान 24 तर्थंकरों के नीचे रखा गया

जैनधर्म स्यादवाद में विश्वास करता है

जैनधर्म के त्रि रत्न

1 सम्यक श्रद्धा

2 सम्यक के ज्ञान

3 सम्यक आचरण

आश्रव

कर्म का जीव की और प्रवाह आश्रव कहलाता है

सर्वर

कर्म का प्रवाह जीव की और रुक जाना सर्वर कहलाता है

बंधन

कर्म का जीव में संयुक्त हो जाना बंधन कहलाता है

निर्जरा

जीव मै से जब बुरे कर्मों का नाश हो जाए तब यह स्थिति निर्जरा कहलाती है

निर्जरा के बाद जीव को अनंत चतुष्टय की प्राप्ति होती है जिसमें अनंत ज्ञान

अनंत दर्शन अनंत वीर्य (तेज) व अनंत सुख शामिल है

सल्लेखना

सल्लेखना से तात्पर्य है सत्य का लेखा जोखा जैन धर्म में जलन को त्याग कर

अपनी जीवन लीला समाप्त करना इसको सल्लेखना कहा गया

चंद्रगुप्त मौर्य ने कर्नाटक के श्रवणबेलगोला नामक स्थान पर सल्लेखना पद्धति के द्वारा अपने प्राणों का त्याग किया था

जैन धर्म में अहिंसा पर विशेष बल दिया गया है

जैन संगीति

चंद्रगुप्त मौर्य के काल में 300 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र के नेतृत्व में

पहली जैन संगीति का आयोजन किया गया

यहां जैन धर्म दो भागों में बट गया

1 श्वेतांबर

2 दिगंबर

दूसरी जैन संगीति

इस संगीति का आयोजन 513 ईस्वी में गुजरात के बल्लवी नामक स्थान पर किया गया

इस जैन संगीति का नेतृत्व देवरदीक्षमाश्रमण के द्वारा किया गया यहां जैन साहित्य की रचना हुई जिन्हें आगम कहा गया

सभी सभी परीक्षाओं में इसमें से सवाल आता है इसलिए पढ़ें और आगे शेयर करें

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April 30, 2020

वैदिक सभ्यता 1500-600BC भाग – 4

वैदिक सभ्यता कि सामाजिक न्याय व्यवस्था

रिग वैदिक काल में राजा न्याय का प्रमुख होता था

छोटे स्तर पर होने वाले विवादों का निपटारा मध्यस्थ के द्वारा किया जाता था

रिग वैदिक काल में गाय को सबसे प्रमुख वस्तु माना गया है

पुलिस कर्मचारियों के लिए उम्र व न्यायाधीश के लिए प्रश्न विनायक शब्द का प्रयोग किया गया है

अपराधियों के लिए जीवगर्व शब्द का प्रयोग किया गया है

सामाजिक व्यवस्था

रिग वैदिक कालीन समाज पितृसत्तात्मक थे परिवार के मुखिया को ग्रहपति कहा जाता था

संयुक्त परिवार की प्रथा मौजूद थी विवाह को एक संस्कार माना गय

विवाह के प्रकार

अनुलोम प्रतिलोम दोनों होते थे

स्त्रियों की स्थिति

रिग वैदिक काल में परिवार के सभीरिग वैदिक काल में परिवार के सभी सदस्य एक साथ निवास करते थे

जिन्हें सम्मिलित रूप से नरपत कहा

1 कन्याओं का उपनयन संस्कार होता था

2 महिलाओं को शिक्षा दी जाती थी

3 बाल विवाह में पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था

4 अंतरजातीय विवाह विनियोग प्रथा का प्रचलन था

5 महिलाओं को राजनीति में भाग लेने का अधिकार था

अमाजू

आजीवन अविवाहित रहने वाली महिलाओं को अमाजु कहा जाता था

व्हतू

विवाह के अवसर पर कन्या को दिया जाने वाला उपहार

वैदिक सभ्यता वैदिकhttp://वैदिक-सभ्यता-1500-600bc-भाग-4

वस्त्र

1 निवी

कमर के नीचे पहनने जाने वाला वस्त्र

2 वास

शरीर के ऊपरी भाग में पहनने जाने वाला वस्त्र

3अधिवास

यह भी शरीर के ऊपरी भाग में पहने जाने वाले वस्त्र

4 उसनि

पगड़ी

चमड़े को भी वस्त्र के रूप में प्रयोग लिया जाता था

5 आभूषण

स्त्री व पुरुष दोनों आभूषणों का प्रयोग करते थे

सोने के आभूषणों के लिए निष्क शब्द का प्रयोग किया गया है

मनोरंजन

1 रथ दौड़,

2 पासा पशु

3 पक्षियों की लड़ाई

कृषि व्यवस्था

कृषि कार्य के लिए चर्सिनी शब्द का प्रयोग किया गया है

ऋग्वेद के चौथे मंडल से कृषि के बारे में जानकारी मिलती है

रिग वैदिक कालीन लोगों का प्राथमिक कार्य कृषि था इस काल में पशु पालन किया जाता था

गाय को प्रमुख पशु माना गया है और गाय के लिए अघन्य शब्द का प्रयोग किया गया है

जिस से तात्पर्य है न मारने योग्य

दूसरा प्रमुख पशु घोड़ा था

क्षेत्र— इसका तात्पर्य जूता हुआ खेत

उर्वरा —उपजाऊ भूमि

पर्जन्य —बादल

लागल — हल

रिग वैदिक काल में कृषि कार्य अच्छी अवस्था में था खेती करने वालों की स्थिति उन्नत थी

खेती के अलावा शिल्प जैसे कार्य भी संपन्न किए जाते थे

गोबर की खाद को करिसू कहते थे

हाल से बनी नालियां सीता कहलाती थी

धार्मिक जीवन

रिग वैदिक कालीन लोग बहू देव आदि थे हालांकि इनके द्वारा एक देवता की भी पूजा की जाती थी

April 30, 2020

वैदिक सभ्यता 1500-600BC भाग – 2

वैदिक सभ्यता की राजनीतिक व्यवस्था

रिग वैदिक कालीन राजनीतिक जीवन कबीलाई पद्धति पर आधारित तथा

इस समय प्रमुख रूप से पांच काबिले ते जिन्हें पंचजन्य कहा गया है जो निम्नलिखित हैं

1 अनु

2 धुह

3 यदु

4 तुर्वस

5 पुरू

राजनीतिक इकाई

1 परिवार

2 ग्राम

3 जन

4 जनपद

5 महाजनपद

6 साम्राज्य

कबीले के प्रमुख को जन्नस्य गोप कहा गया है जन्नस्य गोप युद्ध का स्वामी होता था

इस समय राजा पर नियंत्रण रखने के लिए सभा समिति विधत गण जैसी राजनीतिक इकाइयां मौजूद थी

नाम ऋग्वेद में उल्लेख

इंद्र 250

अग्नि। 200

गाय 176

सभा। 8

समिति। 9

गंगा 1

यमुना। 3

बलि

यह रिग वैदिक कालीन धार्मिक कर था जोकि जनसाधारण के द्वारा स्वेच्छा से राजा को दिया जाता था

उत्तर वैदिक काल में यह एक नियमित कर हो गया

दसराग्य युद्ध

ऋग्वेद के सातवें मंडल से इस युद्ध की जानकारी मिलती है परूश्नी नदी के किनारे लड़े गए

इस युद्ध में भारतवंशी राजा सुधांश की विजय हुई थी

प्रमुख अधिकारी

1 purohit

यह राजा का मित्र अध्यापक दार्शनिक में प्रधानमंत्री होता था

2 सेनानी

यह सेना प्रमुख होता था

3 ग्रामीणी

ग्रामीणी अधिकारी होता था

4 शुत

रथ चलाने वाला

5 पूरप

दुर्ग से संबंधित अधिकारी

6 स्पेस

गुप्तचर विभाग से संबंधित अधिकारी

7 कर्मरा

धातु कार्य से संबंधित अधिकारी

सामाजिक न्याय

रिग वैदिक काल में राजा न्याय का प्रमुख होता था

छोटे स्तर पर होने वाले विवादों का निपटारा मध्यस्थ के द्वारा किया जाता था

रिग वैदिक काल में गाय को सबसे प्रमुख वस्तु माना गया है

पुलिस कर्मचारियों के लिए उम्र व न्यायाधीश के लिए प्रश्न विनायक शब्द का प्रयोग किया गया है

अपराधियों के लिए जीवगर्व शब्द का प्रयोग किया गया है

सामाजिक व्यवस्था

रिग वैदिक कालीन समाज पितृसत्तात्मक थे परिवार के मुखिया को ग्रहपति कहा जाता था

संयुक्त परिवार की प्रथा मौजूद थी विवाह को एक संस्कार माना गय

विवाह के प्रकार

अनुलोम प्रतिलोम दोनों होते थे

स्त्रियों की स्थिति

रिग वैदिक काल में परिवार के सभीरिग वैदिक काल में परिवार के सभी सदस्य एक साथ निवास करते थे

जिन्हें सम्मिलित रूप से नरपत कहा

1 कन्याओं का उपनयन संस्कार होता था

2 महिलाओं को शिक्षा दी जाती थी

3 बाल विवाह में पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था

4 अंतरजातीय विवाह विनियोग प्रथा का प्रचलन था

5 महिलाओं को राजनीति में भाग लेने का अधिकार था

अमाजू

आजीवन अविवाहित रहने वाली महिलाओं को अमाजु कहा जाता था

व्हतू

विवाह के अवसर पर कन्या को दिया जाने वाला उपहार

वस्त्र

1 निवी

कमर के नीचे पहनने जाने वाला वस्त्र

2 वास

शरीर के ऊपरी भाग में पहनने जाने वाला वस्त्र

3अधिवास

यह भी शरीर के ऊपरी भाग में पहने जाने वाले वस्त्र

4 उसनि

पगड़ी

चमड़े को भी वस्त्र के रूप में प्रयोग लिया जाता था

5 आभूषण

स्त्री व पुरुष दोनों आभूषणों का प्रयोग करते थे

सोने के आभूषणों के लिए निष्क शब्द का प्रयोग किया गया है

मनोरंजन

1 रथ दौड़,

2 पासा पशु

3 पक्षियों की लड़ाई

कृषि व्यवस्था

कृषि कार्य के लिए चर्सिनी शब्द का प्रयोग किया गया है

ऋग्वेद के चौथे मंडल से कृषि के बारे में जानकारी मिलती है

रिग वैदिक कालीन लोगों का प्राथमिक कार्य कृषि था इस काल में पशु पालन किया जाता था

गाय को प्रमुख पशु माना गया है और गाय के लिए अघन्य शब्द का प्रयोग किया गया है

जिस से तात्पर्य है न मारने योग्य

वैदिक सभ्यतावैदिक सभ्यता की फोटो http://www.goldenclasses.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-1500-600bc-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-4/

दूसरा प्रमुख पशु घोड़ा था

क्षेत्र— इसका तात्पर्य जूता हुआ खेत

उर्वरा —उपजाऊ भूमि

पर्जन्य —बादल

लागल — हल

रिग वैदिक काल में कृषि कार्य अच्छी अवस्था में था खेती करने वालों की स्थिति उन्नत थी

खेती के अलावा शिल्प जैसे कार्य भी संपन्न किए जाते थे

गोबर की खाद को करिसू कहते थे

हाल से बनी नालियां सीता कहलाती थी

धार्मिक जीवन

रिग वैदिक कालीन लोग बहू देव आदि थे हालांकि इनके द्वारा एक देवता की भी पूजा की जाती थी