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History

September 27, 2020

राजस्थान में राजपूत वंशों का उदय

राजस्थान में राजपूत वंशों का उदय 7-12 वीं सदी

राजपूत

सूर्यवंशी, चंद्रवंशी, यदुवंशी, अग्निवंशी।

“राजपूत” शब्द की व्युत्पत्ति राजपूतों की उत्पत्ति के विभिन्न मत और उनकी समीक्षा

  • अग्निवंशीय मत
  • सूर्य तथा चंद्रवंशीय मत
  • विदेशी वंश का मत
  • गुर्जर वंश का मत
  • ब्राह्मणवंशीय मत
  • वैदिक आर्य वंश का मत

राजपूतों की विदेशी उत्पत्ति का सिद्धांत

(1) विदेशी सिद्धान्त ( Foreign principle )

राजस्थान के इतिहास को लिखने का श्रेय कर्नल जेम्स टॉड को दिया जाता है, कर्नल टॉड को हम राजस्थान इतिहास का जनक व राजस्थान इतिहास के पितामह भी कहते हैं कर्नल टॉड ने अपने ग्रंथ ‘दे एनल्स एंड एंटिक्विटी ऑफ

September 27, 2020

Administrative System मध्यकालीन राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था Medieval Rajasthan

Administrative System मध्यकालीन राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था

प्रशासनिक

मध्यकाल में राजस्थान की Administrative System से तात्पर्य मुगलों से संपर्क के बाद से लेकर 1818 ईसवी में अंग्रेजों के साथ हुई संधियों की काल अवधि के अध्ययन से है।  इस काल अवधि में राजस्थान में 22 छोटी बड़ी रियासतें थी और अजमेर मुगल सूबा था।

इन सभी रियासतों का अपना प्रशासनिक तंत्र था लेकिन, कुछ मौलिक विशेषताएं एकरूपता लिए हुए भी थी। रियासतें मुगल सूबे के अंतर्गत होने के कारण मुगल प्रभाव भी था।

राजस्थान की मध्यकालीन Administrative System के मूलत 3 आधार थे —

  • सामान्य एवं सैनिक प्रशासन।
  • न्याय प्रशासन।
  • भू

September 26, 2020

Historical Period Maurya ऐतिहासिक काल मौर्य काल

ऐतिहासिक काल मौर्य काल

मौर्य काल ( Maurya Empire )

चंद्रगुप्त मौर्य के समय से ही मौर्यों की सत्ता इस क्षेत्र में फैल गई। कोटा जिले के कणसावा गांव से मिले शिलालेख से यह पता चलता है कि वहां मौर्य वंश के राजा धवल का राज्य था बैराठ से अशोक के दो अभिलेख मिले हैं मौर्य काल में राजस्थान सिंध, गुजरात तथा कोकण का क्षेत्र अपर जनपद अथवा पश्चिमी जनपद कहलाता था

अशोक का बैराठ का शिलालेख तथा उसके उतराधिकारी कुणाल के पुत्र सम्प्रति द्वारा बनवाये गये मन्दिर मौर्यों के प्रभाव की पुष्टि करते हैं कुमारपाल प्रबंध अन्य जैन ग्रंथ से …

September 26, 2020

Literary and Museum आधुनिक साहित्यकार एवं संग्रहालय

आधुनिक साहित्यकार एवं संग्रहालय

Albert Hall Museum अल्बर्ट हॉल म्यूजियम 

यह राजस्थान का पहला संग्रहालय है, इसे महाराजा रामसिंह के शासनकाल में प्रिंस अलबर्ट ने 1876 में शुभारम्भ करवाया था  उनके नाम पर ही इसका नाम रखा गया है।

इसी राजस्थान का प्रथम संग्रहालय कहा जा सकता है वर्तमान में इसका आकर्षण केंद्र मिस्र से मंगवाई गई ममी है

राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग जयपुर ( Rajasthan Archeology and Museum Department )

राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का गठन 1950 में हुआ, यह विभाग प्रदेश में बिखरी पुरासंपदा तथा सांस्कृतिक धरोहर की खोज सर्वेक्षण एवं प्रचार प्रसार में संलग्न है इस विभाग …

September 26, 2020

Rajasthan Tribes राजस्थान में जनजाति

राजस्थान में जनजाति

जनजाति

भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान में जनजातियों को 3 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है ।

  1. पूर्वी एवं दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र
  2. दक्षिणी क्षेत्र
  3. उत्तर पश्चिम क्षेत्र

1. पूर्वी एवं दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र ( Eastern and Southern Eastern Areas )

अलवर ,भरतपुर ,धौलपुर, जयपुर, दोसा, सवाई माधोपुर, करौली ,अजमेर ,भीलवाड़ा, टोंक, कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ इन क्षेत्रों में मीणा जाति का बाहुल्य है। अन्य जनजातियां भील, सहरिया, और सांसी पाई जाती है ,।

2. दक्षिणी क्षेत्र ( Southern Region )

सिरोही ,राजसमंद ,चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा ,डूंगरपुर ,उदयपुर क्षेत्र में भील, मीणा, गरासिया, डामोर मुख्य रूप से निवास करते हैं। भील जनजाति की …

September 25, 2020

राजस्थान के दर्शनीय स्थल Rajasthan Tourist Places

राजस्थान के दर्शनीय स्थल

दर्शनीय स्थल

बूंदी के दर्शनीय स्थल

चौरासी खम्भों की छतरी –

बूंदी शहर से लगभग डेढ किलोमीटर दूर कोटा मार्ग पर यह भव्य छतरी स्थित हैं। राव राजा अनिरूद्व सिंह के भाई देवा द्वारा सन् 1683 में इस छतरी का निर्माण करवाया गया था। चौरासी स्तम्भों की यह विशाल छतरी नगर के दर्शनीय स्थलों में से एक हैं।

तारागढ दुर्ग –

बूंदी शहर का प्रसिद्व दुर्ग जो पीले पत्थरों का बना हुआ हैं, तारागढ के दुर्ग के नाम से प्रसिद्व हैं। इसका निर्माण राव राजा बरसिंह ने 1354 में बनवाया था।

 रामेश्वर-

बूंदी से 25 …

September 25, 2020

Rajasthan Folk music लोक संगीत कोन कोन से हे??

Rajasthan Folk music लोक संगीत

भारत संगीत गायन शैलियां

1. ध्रुपद गायन शैली ( Dhrupad singing style )

  • जनक – ग्वालियर के शासक मानसिंह तोमर को माना जाता है।
  • महान संगीतज्ञ बैजू बावरा मानसिंह के दरबार में था।
  • संगीत सामदेव का विषय है।
  • कालान्तर में ध्रुपद गायन शैली चार खण्डों अथवा चार वाणियां विभक्त हुई।

(अ) गोहरवाणी ( Gorawani )

  • उत्पत्ति- जयपुर
  • जनक- तानसेन

(ब) डागुर वाणी ( Dagur vani )

  • उत्पत्ति- जयपुर
  • जनक – बृजनंद डागर

(स) खण्डार वाणी ( Khandar Vani )

  • उत्पत्ति – उनियारा (टोंक)
  • जनक- समोखन सिंह

(द) नौहरवाणी जयपुर ( Navhwani Jaipur )

  • जनक- श्रीचंद नोहर

2. ख्याल गायन शैली

September 25, 2020

Rajasthan Festival राजस्थान के पर्व कोन कोन से है??

Rajasthan Festival राजस्थान के पर्व

पर्व

हिंदुओं के त्योहार ( Festivals of Hindus )

  • तीज राजस्थान की स्त्रियों का सर्व प्रिय त्यौहार है तीज प्रतिवर्ष 2 बार आती है
  • बड़ी तीज भाद्र कृष्ण तृतीया
  • छोटी तीज श्रवण शुक्ला तृतीया छोटी तीज ही अधिक प्रसिद्ध है तीज के 1 दिन पूर्व सिंजारा का पर्व मनाया जाता है ।
  • नाग पंचमी सावन कृष्णा पंचमी को नाग पूजा की जाती है घर के दरवाजे के दोनों और गोबर से नाग का चित्र अंकित किया जाता है ।
  • रक्षाबंधन श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है बहन भाई को

September 24, 2020

Rajasthan Folk drama: राजस्थान के लोक नाट्य

Rajasthan Folk drama राजस्थान के लोक नाट्य

लोक नाट्यो में ‘तुर्रा कलंगी’ कम से कम 500 साल.पुराना हैं। मेवाड़ के दो पीर संतो ने जिनके नाम शाहअली और तुक्कनगीर थे ‘ तुर्राकलंगी ‘की रचना की। बीकानेर की ‘रम्मत’ की अपनी न्यारी ही विशेषता ह

Rajasthan Folk drama

1. ख्याल:-

नाटक मे जहाँ देखना और सुनना दोनों प्रधान होते है वहां ख्याल मे केवल सुनना प्रधान होता हैं। 18 वीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही राजस्थान में लोक नाट्यों के नियमित रुप से सम्पन्न होने के प्रमाण मिलते हैं। इन्हें ख्याल कहा जाता था। इन ख्यालों की विषय-वस्तु पौराणिक या किसी पुराख्यान से …

September 24, 2020

राजस्थान के प्रमुख संगीतज्ञ Rajasthan Chief Musicians

राजस्थान के प्रमुख संगीतज्ञ

संगीतज्ञ

1. सवाई प्रताप सिंह – जयपुर नरेश सवाई प्रताप सिंह संगीत एवं चित्रकला के प्रकांड विद्वान और आश्रयदाता थे इन्होंने संगीत का विशाल सम्मेलन करवाकर संगीत के प्रसिद्ध ग्रंथ राधा गोविंद संगीत सार की रचना करवाई जिसके लेखन में इनके राजकवि देवर्षि बृजपाल भट्ट का महत्वपूर्ण योगदान रहा  इनके दरबार में 22 प्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं विद्वानों की मंडली गंधर्व बाईसी थी

2. महाराजा अनूप सिंह- बीकानेर के शासक जो स्वयं एक विद्या अनुरागी तथा विद्वान संगीतज्ञ थे प्रसिद्ध संगीतज्ञ भाव भट्ट इन्हीं के दरबार में था

3. पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर- यह महाराष्ट्र के थे …