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May 31, 2020

राजस्थान के जनजाति आंदोलन-Rajasthan ke janjati Andolan

राजस्थान में जनजाति आंदोलन (Tribal Movement of Rajasthan)

:- राजस्थान में मुख्य रूप से तीन जनजातीय या आदिवासी आंदोलन हुए इनमें प्रमुख आंदोलन निम्न है।

  • भील जनजातीय आंदोलन
  • मीणा जनजातीय आंदोलन
  • मेव जनजातीय आंदोलन

• राजस्थान में जनजाति या आदिवासी आंदोलनों में इन आंदोलनों के अलावा और भी बहुत छोटे-छोटे आंदोलन हुए हैं। तथा राजस्थान में प्रमुख जन आंदोलन एवं क्रांतिकारी घटनाएं भी हुई हैं। इन आंदोलन और घटनाओं के बारे में हम विस्तार से आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे इसलिए आप ध्यान से इस लेख को पढ़ें।

राजस्थान के जनजातीय या आदिवासी आंदोलन (Tribal Movement in Rajasthan)

भील आंदोलन या विद्रोह (Bhil Movement or Rebellion)

  • भील समाज के 2 वर्ग होते थे।
  • पहला वर्ग :- ये प्राचीन भील थे व जंगलों में निवास करते थे।
  • दूसरा वर्ग :- दूसरे वर्ग के अंतर्गत गरासिया जनजाति आती थी। इन्हें मेवाड़ केेेे शासकों के द्वारा भूमि का ग्रास तथा टुकड़ा प्रदान कियाा गया तथा ये कृषि के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते थे।

• 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने मेवाड़ के शासक भीम सिंह से सहायक संधि की व जेम्स टॉड को मेवाड़ का पोलिटिकल एजेंट नियुक्त किया गया।

  • भोमिया भील व्यापारी के सामान जंगलों के रास्तों में सुरक्षा प्रदान करते थे इसके बदले में बोलाई नामक कर वसूला जाता था। इसे जेम्स टॉड समाप्त कर दिया।
  • गरासिया भील पहाड़ की ढलानो व मैदानी भागों में चिमता व र दजिया प्रकार की स्थानांतरण कृषि करते थे।
  • इसमें जंगलों को जलाकर साफ किया जाता था क्योंकि पेड़ों की राख अच्छे उर्वरक का कार्य करती थी। परंतु अंग्रेजों का मानना था कि वन संसाधन उनकी संपत्ति है अतः जेम्स टॉड इस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • भील महुआ के वृक्ष के फूल से शराब का उत्पादन करते थे इस पर भी जेम्स टॉड के द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • 1813 के चार्टर में ईसाई प्रचार को भारत में ईसाई धर्म फैलाने की स्वतंत्रता या अनुमति दी गई ज्यादा से ज्यादा भील ईसाई धर्म को ग्रहण करने लगे।

• सुरजी भगत को इस बात का श्रेय दिया गया है कि उसने भील जनजाति के द्वारा ईसाई धर्म को अपनाया जा रहा था उस पर सुरजी भगत ने रोक लगाई। सुरजी भगत को ही भीलो का प्रथम समाज सुधारक माना गया है।

2. भील आंदोलन अथवा भगत आंदोलन (Bhil movement or Bhagat movement)

  • भगत आंदोलन का नेतृत्व स्वामी गोविंद गिरी ने किया था।

• स्वामी गोविंद गिरी के बारे में

  • जन्म – 1858
  • कहां पर हुआ – डूंगरपुर जिले के बांसिया गांव में बंजारा परिवार में हुआ।
  • गुरु – राजगिरी

• 1881 में दयानंद सरस्वती उदयपुर की यात्रा पर आए थे। गोविंद गिरी ने उनसे मुलाकात की व इनसे प्रेरित होकर 1883 में सिरोही में सम्प सभा की स्थापना की।

  • इस सभा के कुल 10 नियम थे जिनकी पालना गोविंद गिरी की अनुयायियों को करनी होगी इसलिए गोविंद गिरी के संप्रदाय को दशनामी संप्रदाय का गया।
  • सम्प गुजराती भाषा का शब्द है जिसका अर्थ एक समान बंधुत्व अथवा भाईचारा होता है।
  • 1903 में सम्प का पहला अधिवेशन मानगढ़ पहाड़ी (बांसवाड़ा) मैं आयोजित किया गया।
  • इसके बाद गोविंदगिरी पर बागड़ रियासत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया तथा गोविंदगिरी सूथ व ईडर (गुजरात) में चले गए। व सूथ के उकरेली गांव में एक हाली के रूप में काम किया।
  • 1908 में गोविंद गिरी लौटे और बेडसा गांव में भगत पंथ की स्थापना की। इसके बाद पुनः गोविंद गिरी पर प्रतिबंध लगाया गया अक्टूबर 1913 में गोविंद गिरी लौटे व मानगढ़ पहाड़ी पर अपनी धूनी स्थापित की।

• सभी भील इस पहाड़ी पर एकत्रित होने लगे।

  • सरकार ने इनकी गतिविधियों की जांच हेतु गुल मोहम्मद नामक सिपाही को भेजा जिसकी भीलो ने हत्या कर दी। अतः 10 नवंबर 1913 को मेवाड़ भील कोर 34 वी राजपूत बटालियन व वेलेजली राइफल के सैनिकों ने इस पहाड़ी को घेर लिया।
  • 17 नवंबर के दिन गोलाबारी की गई। इसमें 1500 से 2000 भील मारे गए।
  • सर्वप्रथम पूंजा भील ने आत्मसमर्पण किया इसी ने गोविंद गिरी को आत्मसमर्पण के लिए राजी किया था।
  • अहमदाबाद न्यायालय में इन पर मुकदमा चलाया गया व 15 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।
  • गोविंद गिरी ने अपना शेष जीवन गुजरात के कंबोई नामक स्थान पर व्यतीत किया।

3. सम्प सभा आंदोलन का इतिहास एक नजर में (History of Samp Sabha movement at a glance )

  • स्थापना – 1883 में
  • संस्थापक – स्वामी गोविंद गिरी
  • प्रथम अध्यक्ष – स्वामी दयानंद सरस्वती
  • समकालीन जागीरदार – राव अभय सिंह के काल की घटना
  • अधिवेशन केंद्र – मानगढ़ पहाड़ी (बांसवाड़ा)
  • घटना चक्र – 17 नवंबर 1913
  • उपस्थिति गाण – 15000 लोग (भील समाज के)
  • गोलीकांड – सार्जेंट नामक अंग्रेज ने
  • क्षतिग्रस्त – 1500 भील मारे गए
  • घटना नामित – 1913-1920 तक मानगढ़ कांड

• note :- 1. 1889 मैं अजमेर शहर से जारी राजस्थान समाचार पत्र (प्रथम हिंदी राजनीतिक दैनिक) के संपादक मुंशी समर्थनाथ चारण ने 1920 के अंत में मानगढ़ कांड को प्रथम जलियांवाला कांड नामित किया है।

2. 2012 को मानगढ़ कांड का शताब्दी वर्ष अशोक गहलोत की अध्यक्षता में मनाया गया जिसमें 12 करोड़ रुपए की लागत जनजातीय विकास के खर्चे करने का ऐलान किया।

3. मानगढ़ धाम में प्रतिवर्ष अश्विन पूर्णिमा के दिन इन शहीदों की याद में विशाल मेला लगता है।

4. एकी आंदोलन अथवा भोमट आंदोलन (Eki movement or Bhomat movement )

  • नेतृत्व – मोतीलाल तेजावत (आदिवासियों का मसीहा)
  • आंदोलन का प्रारंभ – 1. 1920 मातृकुंडिया चित्तौड़ से। 2. 1921 झामरकोटडा उदयपुर से।
  • आंदोलन की विषय वस्तु/कारण – 1. 1893 का अफीम राइफ एक्ट 2. झूमिंग खेती पर प्रतिबंध
  • झूमिंग खेती के उपनाम – 1. वालर कृषि 2. चिमाता कृषि
  • कृषि का उपयोग करने वाले भील व गरासिया जाति के लोग थे।
  • मोतीलाल तेजावत का दृष्टिकोण – गांधीवादी दृष्टिकोण

• सामान्य जनता की मांगों को सरकार के सामने रखने के लिए पत्र जारी किया गया- मेवाड़ की पुकार जो कि मेवाड़ी भाषा में लिखा गया।

  • आंदोलन में योगदान देने वाली संस्था :- मेवाड़ भील कोर संघ
  • स्थान – चित्तौड़
  • संस्था का समय – 1841
  • संस्थापक – धीर भाई भील
  • समकालीन गवर्नर जनरल – लॉर्ड डलहौजी (आधुनिक भारत का निर्माता)
  • संगठन को संरक्षण – 1853 में जे. सी. बुकर के द्वारा।
  • संगठन को गैर कानूनी – 1872 ईसवी में वायसराय गवर्नर जनरल लॉर्ड मेयो के द्वारा।
  • संगठन को पुनर्जीवित – 1920 में नाना भाई भील ने किया। (लॉर्ड चेम्सफोर्ड के काल में)

नोट :- 1. उपरोक्त संगठन को सहयोग मोतीलाल तेजावत आंदोलन के तहत प्राप्त होने लगा।

2. मोतीलाल तेजावत 1929 से 1936 तक ईडर पुलिस के पास बंधक रहा। अतः 12 मार्च 1930 को गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग नहीं ले सका।

3. 1944 में लॉर्ड वेवेल को तेजावत ने ज्ञापन दिया लॉर्ड वेवेल ने प्रतिबंध हटा लिए तथा मोतीलाल तेजावत ने इस आंदोलन की समाप्ति की घोषणा की।

एकी या भोमट आंदोलन का इतिहास

  • मोतीलाल तेजावत के आंदोलन को एकी इसलिए कहा गया है कि उन्होंने भीलो के दोनों वर्ग भोमिया व गरासिया को एक करने के लिए यह आंदोलन चलाया।
  • 1921 में तेजावत के नेतृत्व में भील चित्तौड़ की राशमी तहसील मातृकुंडिया नामक स्थान पर एकत्रित हुए
  • सरकार के समक्ष 21 मांगे प्रस्तुत की जिन्हें मेवाड़ की पुकार कहा गया। इनमें से तीन मांगे अस्वीकार कर दी गई फिर भी तेजावत ने अपना आंदोलन जारी रखा।
  • इसलिए तेजावत पर मेवाड़ रियासत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसलिए तेजावत गुजरात चले गए।
  • 7 March 1922 को मोतीलाल तेजावत के कहने पर भील किसान नींमडा गांव में एकत्रित हुए जहां स्थानीय जागीरदारों ने इस सम्मेलन पर गोली चलवाई इस गोलीकांड में 1220 भील मारे गए। इसके बाद तेजावत सिरोही रियासत आ गए

• 7 April 1922 को सिरोही के रोहिड़ा गांव में रुके हुए थे दत्त अंग्रेज अधिकारी सेटरन ने गांव को घेर कर गोलीबारी की इससे तेजावत घायल हो गए। बाद में गांधी के कहने पर तेजावत ने खेडब्रह्मा नामक स्थान पर समर्पण कर दिया था

  • तेजावत को कुंभलगढ़ के दुर्ग में नजर बंद करके रखा गया।
  • भील तेजावत को बड़े पिता के नाम से पुकारते थे।
  • मोतीलाल तेजावत को आदिवासियों का मसीहा कहां गया।

5. मीणा आंदोलन (meena protest)

  • नेतृत्व – ठक्कर बप्पा
  • प्रारंभ क्षेत्र – 1. जयपुर 2. सीकर 3. सवाई माधोपुर
  • आंदोलन का कारण – 1. जयराम पेशवा कानून 1918 2. क्रिमिनल एक्ट 1923-24
  • मीणा समाज का जन नेता – पंडित बंशीधर शर्मा
  • संगठन – मीणा क्षेत्रीय सभा (1920)
  • स्थान – जयपुर में
  • उद्देशय – मीणा समाज का नेतृत्व करना

प्रथम सत्याग्रह – 1933 में जयपुर में विफल रहा।

दूसरा सत्याग्रह – 1944 में नीम का थाना सीकर

  • आयोजक – पंडित बंशीधर शर्मा
  • नेतृत्व – जैन मुनि मगन सागर ने
  • ज्ञापन दिया – 1944 में जैन मुनि ने लॉर्ड वेवेल को
  • लॉर्ड वेवेल ने जयराम पेशवा कानून के अंतर्गत मीणा समाज के स्त्री व बच्चों को छूट दी।

नोट :- 1. 1952 में पंडित नेहरू के आदेश पर राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल ने जयराम पेशवा कानून का अंत कर दिया था।

2. जैन मुनि मगन सागर ने मीणा समाज पर आदि मीन पुराण साहित्य लिखा जिसमें मीणा जाति की 5200 शाखाओं का उल्लेख है।

मीणा आंदोलन का इतिहास

  • जैन मुनि मगन सागर जी के द्वारा मीणा पुराण नामक पुस्तक लिखी गई इसमें लिखा गया कि मीणा प्रारंभ में शासक हुए तथा इनका राज्य ढूंढाड मैं था।
  • मीणा ने दोसा के बड़ गुर्जरों के विरुद्ध आमंत्रण देकर नरवर (मध्य प्रदेश) से कच्छावा वंश के शासक तेजकरण या दूल्हे राय को बुलाया।
  • प्रारंभ में उन्होंने बड़ गुर्जरों को पराजित किया परंतु बाद में कछवाहो ने मीणा को ही पराजित कर दिया।
  • जिन मीणाओं की खेती योग भूमि थी उन्हें जमीदार मीणा कहा गया। तथा जिनको रियासत की सुरक्षा सौंपी उन्हें चौकीदार मीणा कहा गया
  • रियासत में कोई भी चोरी होने पर उसका भुगतान चौकीदार मीणाओं को ही करना होता था। बाद में चौकीदार मीणाओं ने चोरी करना प्रारंभ कर दिया था।

• 1924 में क्रिमिनल tribal act लागू हुआ

• 1920 में जयपुर रियासत के द्वारा जयराम पेशा कानून लागू किया गया इसके तहत 12 वर्ष से अधिक आयु के सभी मीणाओं को आपने निकटवर्ती स्थानों सुबह शाम उपस्थित होकर हाजिरी देनी होती थी।

  • इसके विरोध में 1933 में मीणा क्षेत्रीय सभा गठित की गई अप्रैल 1944 को चौकीदार मीणा का सम्मेलन नीमकाथाना सीकर में आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता मुनि मगन सागर जी ने की थी।
  • इसी सम्मेलन में जयपुर राज्य मीणा सुधार समिति गठित की गई जिसके अध्यक्ष पंडित बंशीधर शर्मा बनाए गए।
  • 31 दिसंबर 1945 व 1 जनवरी 1946 को उदयपुर में अखिल भारतीय देसी राज्य लोक परिषद का अधिवेशन आयोजित हुआ। इसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
  • पिछड़ी जातियों के मसीहा के नाम से प्रसिद्ध ठक्कर बाप्पा ने नेहरू से मुलाकात की व इस एक्ट के बारे में बताया
  • नेहरू ने जयपुर के प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल को पत्र लिखा।
  • 1946 में बच्चे व महिलाओं को इस एक्ट के तहत उपस्थित होने से छूट प्रदान की गई तथा 1952 में इसे पूरे एक्ट को समाप्त कर दिया गया।

6. मेव आंदोलन(Meo Movement)

  • औरंगजेब के समय हिंदुओं को इस्लाम धर्म में परिवर्तित किया गया तथा यह परिवर्तित मुसलमान मेल कहलाए।
  • मत्स्य क्षेत्र में शासक शिकार के लिए जंगली सूअरों को पालते थे ये सूअर मेवों की फसल को बर्बाद करते थे। इसी कारण से मेवों के द्वारा सूअर का शिकार किया जाता था।
  • जिस पर 1927 में अलवर के शासक जयसिंह ने प्रतिबंध लगा दिया।
  • करौली के युवक मदन पाल ने इसके लिए भूख हड़ताल भी रखी।
  • 1932 में मोहम्मद हादी ने भरतपुर में अंजुमन खालिद अल इस्लाम नामक संस्था बनाई इसके बाद इसका नेतृत्व गुड़गांव के नेता चौधरी यासीन खान के द्वारा किया गया।
  • जिस कारण से यह हिंदू व मेव के मध्य सांप्रदायिक दंगों में बदल गया।
  • 1933 में तिजारा (अलवर) मैं सांप्रदायिक दंगे भड़के जिन्हें रोकने के लिए जयसिंह नाकाम रहा इसलिए इसे भारत से निष्कासित कर दिया गया।

राजस्थान में प्रमुख जन आंदोलन एवं क्रांतिकारी घटनाएं(Major mass movements and revolutionaries in Rajasthan)

  1. तोल आंदोलन( tol movement)
  • यह आंदोलन जोधपुर रियासत में चांदमल सुराणा के नेतृत्व में चलाया गया था।
  • यह आंदोलन 1920-21 ईसवी में जोधपुर रियासत द्वारा 100 तोल के सेर को 80 तोल के सेर में बदलने के विरोध में चलाया गया था।

2. शुद्धि आंदोलन(Purification movement)

  • संबंध – भरतपुर (1928)
  • नेतृत्व – गोकुल जी वर्मा के द्वारा
  • घटना – 1. जबरन धर्म परिवर्तन की घटना 2. मानव तस्करी को प्राथमिकता 3. मांस व्यापार को प्राथमिकता
  • घटना के समय समकालीन जागीरदार – राव कृष्ण सिंह
  • शुद्धिकरण के लिए आमंत्रण – स्वामी दयानंद सरस्वती को

नोट :- भारत में शुद्धि आंदोलन के प्रणेता स्वामी दयानंद सरस्वती थे जिन्होंने 1881-82 में शुद्धि आंदोलन को प्रारंभ किया।

  • 1921 ईसवी में महाराजा कृष्ण सिंह द्वारा राजस्थान में यह आंदोलन चलाया गया।

3. मेयो कॉलेज बम कांड(Mayo College Bomb Scandal)

  • 1934 ईस्वी में भारत के वायसराय लोड वेलिंगटन की अजमेर यात्रा के दौरान ज्वाला प्रसाद और फतेह चंद जैसे क्रांतिकारी ने उनकी हत्या की योजना बनाई परंतु पुलिस की सक्रियता के कारण या योजना असफल हो गई।
  • मेयो कॉलेज की स्थापना 1875 ईसवी में अजमेर में की गई थी जिसका मुख्य उद्देश्य राजकुमारों को अंग्रेजी शिक्षा देकर उन्हें अंग्रेजों को प्रति स्वामी भक्त बनाना था।
  • मेयो कॉलेज में सर्वप्रथम अलवर महाराजा मंगल सिंह ने प्रवेश लिया था।

4. तसिमो कांड(Tasimo scandal)

  • 11 अप्रैल 1946 के दिन धौलपुर रियासत के तसिमो गांव मैं कांग्रेस के एक सभा के दौरान तिरंगे की रक्षा के लिए ठाकुर छतर सिंह और ठाकुर पंचम सिंह रियासती पुलिस की गोले का शिकार हुए।

5. नीमेजआरा हत्याकांड

  • 1914 ईस्वी में केसरी सिंह बारहठ, अर्जुन लाल सेठी तथा मोती चंद्र ने मिलकर निमेजआरा मैं डकैती की योजना बनाई।
  • इस डकैती के दौरान महंत की हत्या कर दी गई।
  • इस हत्याकांड के आरोप में मोतीचंद को फांसी की सजा सुनाई गई तथा अर्जुन लाल सेठी को 7 वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई।

6. डाबड़ा कांड(Dabra scandal)

  • 13 मार्च 1947 को डाबड़ा गांव में मारवाड़ लोक परिषद द्वारा एक किसान सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • डाबड़ा के जागीरदारों ने इस सम्मेलन पर गोली चलवाई इस गोलीकांड में चुन्नीलाल शर्मा सहित 4 किसान मारे गए।

7. पूनावाड़ा कांड

  • मई 1947 ईस्वी में डूंगरपुर रियासत के पुनवाड़ा गांव में पाठशाला की इमारत को रियासती सैनिक द्वारा नष्ट कर दिया गया तथा इस पाठशाला के अध्यापक शिवराम भील को बुरी तरह से पीटा गया।

8. रास्तापाल कांड

  • घटना – 19 जून 1947 की
  • प्रमुख – काली बाई भील

काली बाई भील के बारे में

  • गांव – रास्तापाल
  • पंचायत समिति – सीमलवाडा
  • तहसील – सागवाड़ा
  • जिला – डूंगरपुर
  • काली बाई के आदर्श – नाना भाई भील
  • काली बाई के शिक्षक – सेंगा भाई

• समकालीन जागीरदार – राव अभय सिंह के काल की घटना

  • घटना का विषय – सेंगा भाई को जमीदार के आदेश से सेहू गांव डूंगरपुर में लाया गया और गाड़ी के बांधकर कठोर यातनाएं दी गई
  • काली बाई भील ने रस्सी काट कर अपने गुरु की जान बचाई परंतु खुद शहीद हो गई और उन्हें बचाते हुए नाना भाई भील भी शहीद हो गए।
  • दोनों के स्मारक के गैप सागर झील के किनारे बनाए गए हैं। स्मारक का उद्घाटन 1956 में मोहनलाल सुखाड़िया के द्वारा किया गया
  • उपरोक्त घटना के समय डूंगरपुर रियासत के शासक रावल लक्ष्मण सिंह थे।

9. हार्डिग बम कांड

  • 23 दिसंबर 1912 को भारतीय गवर्नर जनरल लॉर्ड हार्डिंग के जुलूस पर दिल्ली के चांदनी चौक में राजस्थान के क्रांतिकारी जोरावर सिंह बारहठ व प्रताप सिंह बारहठ ने बम फेंका इस बम कांड में लॉर्ड हार्डिंग बच गए परंतु उनका अंगरक्षक मारा गया।
  • प्रताप सिंह बारहठ को गिरफ्तार करके बरेली जेल में रखा गया जहां 27 मई 1918 के दिन जेल में यातना सहते हुए प्रताप सिंह की मृत्यु हो गई
  • अंग्रेज अधिकारी चार्ल्स क्लीवलैंड ने प्रताप से कहा था कि ” तेरी मां तेरे लिए दिन रात रोती है”

राजस्थान के जनजाति आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

Q. 1 किस पंचायत की स्थापना 1916-17 में की गई उस संगठन का नाम था ?

उत्तर – बिजोलिया

Q.2 मेवाड़ का बिजोलिया आंदोलन किसके नेतृत्व में हुआ था ?

उत्तर – विजय सिंह पथिक

Q. 3 बेगू किसान आंदोलन में कौन नेता शहीद हुए ?

उत्तर – कृपा जी

Q. 4 जयपुर में सर्वप्रथम जन चेतना का सूत्रपात किसने किया ?

उत्तर – अर्जुन लाल सेठी

Q. 5 बिजोलिया आंदोलन में कौन से जाति के किसान सर्वाधिक संख्या में थे ?

उत्तर – धाकड़ जाति

Q. 6 मोतीलाल तेजावत का एकी आंदोलन कहां से प्रारंभ हुआ ?

उत्तर – चित्तौड़गढ़ से

Q. 7 रूपा जी व कृपा जी किसान नेता का संबंध किस आंदोलन से है ?

उत्तर- बेगू

Q. 8 नींमडा हत्याकांड किस से संबंधित है?

उत्तर- एक के आंदोलन से

Q. 9 सूअर आंदोलन किस राज्य से संबंधित था ?

उत्तर- अलवर किसान आंदोलन से

Q. 10 राजस्थान में भील आंदोलन के मुख्य कौन थे ?

उत्तर – गुरु गोविंद गिरी

इस लेख के माध्यम से हमने राजस्थान के जनजाति या आदिवासी और राजस्थान के प्रमुख जन आंदोलन एवं क्रांतिकारी घटनाएं के बारे में मैंने आपको बताया है यदि आपको यह लेख और जानकारी अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों को भी शेयर करें और इसे ध्यान से पढ़ें आगे भी आपको और अच्छे से जानकारी दी जाएगी ताकि आपके एग्जाम में आपको फायदा हो सके !धन्यवाद

जनजाति आंदोलन

May 29, 2020

राजस्थान में किसान व जनजाति और आदिवासी आंदोलन

  • देखिए साथियों व मित्रों राजस्थान में किसान आंदोलन यह टॉपिक परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए आप ध्यान से इस टॉपिक को पढ़ें देखिए आपको मजा आएगा राजस्थान के बहुत ही महत्वपूर्ण किसान आंदोलन हुए हैं। जिनमें जनजातीय आंदोलन या आदिवासी आंदोलन बहुत ही महत्वपूर्ण है। सबसे पहले राजस्थान में किसान आंदोलन की रूपरेखा देखेंगे किस तरह से यह आंदोलन आगे बढ़ा इसको आप ध्यान से पढ़ें इसमें आपको कंप्लीट जानकारी मिलेगी।

राजस्थान में किसान आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण बातें

  • भारत की रियासत में कृषि योग्य भूमि का मालिक जमीदार को माना गया। परंतु इस जमीन पर उगे अनाज का मालिक शासक को माना गया। इस अनाज पर कर लगाने का व इसे वसूलने का अधिकार शासक को दिया गया है। परंतु शासक सामान्यतः इस कर को जमीदार के माध्यम से वसुलता था।
  • इसलिए शासक व जमीदार के संबंध अच्छे बने रहते थे। परंतु राजपूताना स्टेट काउंसिल इस स्थापना के बाद कंपनी अपने कर्मचारियों के माध्यम से लगान वसूल करने लगी। इसलिए जमीदार का महत्व कम हो गया।
  • इसी कारण से कई जमीदारों ने 1857 की क्रांति में कई जमीदारों ने क्रांतिकारियों को सहयोग प्रदान किया।
  • क्रांति के बाद अंग्रेजों ने जमीदार को किसानों पर लाग-बाग लगाने का अधिकार दे दिया।
  • अंग्रेजों की मौद्रिक नीति के कारण किसानों को अपनी आय का तीन चौथाई पैसा कर के रूप में देना होता था।
  • एक रिपोर्ट के अनुसार बिजोलिया के किसान अपनी कुल आय का 89% पैसा कर के रूप में देते थे। क्योंकि किसानों से प्रत्यक्ष कर की वसूली जमीदारों के द्वारा वसूल की जाती थी इसलिए प्रारंभिक किसान आंदोलन जमीदारों के विरुद्ध हुई ना की राज्य व अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध ।

राजस्थान के प्रमुख व महत्वपूर्ण किसान आंदोलन

राजस्थान के प्रमुख व महत्वपूर्ण किसान आंदोलन निम्नलिखित हैं जोकि सबसे पहले आपको नाम बता देते हैं फिर आपको विस्तार से इन आंदोलनों के बारे में पढ़ेंगे।

  • बिजोलिया किसान आंदोलन
  • बीकानेर किसान आंदोलन
  • बेगू किसान आंदोलन
  • बूंदी का किसान आंदोलन
  • शेखावाटी किसान आंदोलन
  • अलवर किसान आंदोलन
  • दुधवा-खारा किसान आंदोलन
  • सीकर किसान आंदोलन
  • भरतपुर किसान आंदोलन
  • लसाडिया आंदोलन
  • मारवाड़ किसान आंदोलन
  • मातृकुंडिया किसान आंदोलन
  • झुंझुनू किसान आंदोलन
  • सीकर शेखावाटी किसान आंदोलन
  • मंडोर किसान आंदोलन

देखें सबसे पहले इन किसान आंदोलन के बारे में विस्तार से जानेंगे फिर आगे आपको राजस्थान के महत्वपूर्ण जनजाति या आदिवासी और कुछ गोलीकांड व हत्याकांड के बारे में जानेंगे तो आप इस टॉपिक से जुड़े सभी सवाल आपको इसी में मिलेंगे।

1. बिजोलिया किसान आंदोलन

  • संबंधित – गिरधारीपुरा गांव शाहपुरा (भीलवाड़ा)
  • ठिकाना – बिजोलिया
  • नेतृत्व – साधुसीताराम दास ने
  • प्रमुख जागीर – ऊपरमाल जागीर (मेवाड़ की A श्रेणी की जागीर)
  • Note :- 17 March 1527 ईस्वी को मेवाड़ के शासक सांगा ने खानवा का युद्ध के समय यह जागीर सहयोगी अशोक परमार को उपहार स्वरूप भेट कर दी थी।
  • तात्कालिक जागीरदार – राव कृष्ण सिंह परमार (इन्होंने प्रमुख लाग-बाग 84 प्रकार की लगाई थी व 32 कर का उन्मूलन मानिक लाल वर्मा के आदेश पर किया था। )

चर्चित कर

  • चवरी कर (कन्या के विवाह पर)
  • तलवार बंधाई कर।
  • उत्तराधिकार शुल्क।
  • विजय सिंह पथिक को राज्य आने का आमंत्रण सान्याल के निमंत्रण पर।

सामाजिक संगठन

विद्या प्रचारिणी सभा (1914)

  • स्थान – चित्तौड़गढ़
  • संस्थापक – विजय सिंह पथिक
  • उद्देश्य – जन जागृति लाना
  • संरक्षिका – नारायण देवी पथिक (शिक्षिका)
  • Note – विजय सिंह पथिक के दो पत्नी थी। 1. जानकी बाई पथिक 2. नारायण देवी पथिक
  • विजय सिंह पथिक (भूपसिंह) 1916 में बिजोलिया किसान आंदोलन में प्रवेश करते हैं।

क्षेत्रीय संगठन – ऊपरमाल पंच बोर्ड (1917)

  • संस्थापक – विजय सिंह पथिक
  • प्रथम अध्यक्ष – मन्ना पटेल
  • सहयोगी – 1. ब्रहमदत्त चारण 2. फतेहकर्ण चारण 3. नानक जी पटेल 4. ठाकरी जी पटेल
  • उपरोक्त संगठन में हरियाली अमावस को उमाजी का खेड़ा नामक स्थान से आंदोलन प्रारंभ किया।
  • नोट:- 1919 कोई क्षेत्रीय संगठन को समझाने के लिए बिंदुलाल आचार्य का गठन और कार्य किया गया।

राजनीतिक संगठन – राजस्थान सेवा संघ (1919)

  • स्थान – वर्धा (महाराष्ट्र)
  • संस्थापक – हरिभाई किंकर
  • उद्देशय – पत्र-पत्रिकाओं को राजनीतिक संरक्षण देना।
  • संगठन के भामाशाह :-
  • जमुनालाल बजाज
  • विजय सिंह पथिक
  • दामोदर लाल व्यास
  • केसरसिंह बाराहट

संरक्षित पत्र

  • कानपुर से – प्रताप
  • वर्धा (महाराष्ट्र) – राजस्थान केसरी
  • उदयपुर से – राजस्थान संदेश
  • अजमेर से – नवीन राजस्थान
  • 1920 में राजस्थान में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना अजमेर में विजय सिंह पथिक के द्वारा की गई।
  • 1924 में गांधी के आदेश पर नवीन कार्यकर्ताओं के प्रवेश हुए जो निम्न है। :-
  • जमनालाल बजाज
  • हरिभाई उपाध्याय
  • रामनारायण चौधरी
  • 1924 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन बेलगांव में महात्मा गांधी के नेतृत्व में आयोजित हुआ।
  • नोट :- गांधी जी ने 1940 – 41 में कस्तूरबा गांधी के लिए निजी सचिव महादेव देसाई आंदोलन का सर्वेक्षण करने के लिए भेजा और उन्होंने मेवाड़ के शासक महाराणा भूपाल सिंह को ज्ञापन दिया।
  • महाराणा भूपाल सिंह के आदेश पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया
  • यह आंदोलन भारत का सबसे बड़ा अहिंसात्मक आंदोलन कहा जाता है।
  • जॉन स्मिथ के शब्दों में रक्तहीन क्रांति के नाम से चर्चित है।

बिजोलिया किसान आंदोलन का इतिहास

  • मेवाड़ रियासत की ऊपरमाल जागीर का प्रशासनिक अधिकरण बिजोलिया था। बिजोलिया के अंतर्गत 79 गांव आते थे तथा 60% आबादी धाकड़ जाति के किसानों की थी।
  • खानवा के युद्ध के बाद अशोक परमार को सांगा ने ऊपरमाल की जागीर प्रदान की।
  • 1894 में कृष्ण सिंह बिजोलिया के जमीदार बने इनके समय किसानों से 1/2 भू राजस्व व 84 प्रकार की लाग-बाग ली जाती थी।
  • 1897 ईस्वी में बिजोलिया के किसान गिरधरपुरा (भीलवाड़ा) में गंगाराम धाकड़ के पिता के मृत्यु भोज के अवसर पर एकत्रित हुए व बिजोलिया के सरकारी पुस्तकालय कक्ष साधु सीताराम दास की सलाह पर ठाकरे पटेल व नानक पटेल को कृष्णसिंह की शिकायत करने के लिए मेवाड़ के शासक फतेह सिंह के पास भेजा गया।
  • फतेह सिंह ने हामिद हुसैन नामक जांच अधिकारी को बिजोलिया भेजा। जिसने किसानों के पक्ष में रिपोर्ट भेजी परंतु फतेह सिंह ने कृष्ण सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं की।
  • इस कारण से कृष्ण सिंह ने दोनों व्यक्तियों को जागीर से निष्कासित कर दिया।₹5 का जुर्माना वसूलने के बाद में उन्हें जागीर में प्रवेश दिया गया
  • 1903 में कृष्ण सिंह ने किसानों पर चवरी कर लगाया। इसके विरोध में 1905 तक बिजोलिया में किसी की भी शादी नहीं हुई।
  • बिजोलिया के किसान ग्वालियर जाने लगे तथा कृष्ण सिंह ने समझौता करके चवरी कर को आधा कर दिया गया।
  • 1996 में पृथ्वी सिंह बिजोलिया के जमीदार बने। इन्होंने तलवार बंधाई शुल्क का भार किसानों पर लगा दिया।
  • राजस्थान में केवल जैसलमेर रियासत को छोड़कर सभी रियासतों के राजा जमीदारों से यह कर वसूलते थे ।

बिजोलिया किसान आंदोलन का आगे का इतिहास

  • 1913 में बिजोलिया के किसानों ने भूमि को परती रखा।
  • इसके लिए किसानों को प्रेरित करने का कार्य है पंडित भीमदेव शर्मा, फतेहकरण चारण, व सीताराम दास ने किया।
  • 1914 में प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ। इस समय ब्रिटिश सरकार प्रत्येक भारतीय से कर के रूप में ₹14 वसूल कर रही थी। तथा नारायण सिंह पटेल नामक किसान ने यह पैसा देने से इनकार कर दिया इस कारण इसे गिरफ्तार करके बिजोलिया की जेल में रखा गया।
  • लगभग 2000 किसानों ने नारायण सिंह को जेल से रिहा करवाया इसकी रिहाई इस आंदोलन में किसानों की प्रथम विजई मानी गई।
  • 1914 में पृथ्वी सिंह की मृत्यु हुई तथा उसका नन्ना मुन्ना केसरी सिंह जमीदार बना।
  • इस कारण बिजोलिया में (court of wards ) का गठन किया गया।
  • अमर सिंह राणावत को बिजोलिया का प्रशासक बनाया गया तथा डूंगर सिंह भाटी इसके सहायक अधिकारी बनाए गए।

विजयसिंह पथिक का किसान आंदोलन में प्रवेश

  • विजय सिंह पथिक का वास्तविक नाम – भूपसिंह
  • निवासी – उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के गुठावली गांव के निवासी थे।
  • 1857 की क्रांति के 50 साल पूर्ण होने के उपलक्ष में पूरे भारत में क्रांति योजना बनाई गई थी। इसके लिए विजय सिंह पथिक को राजस्थान भेजा गया।
  • 1914 ईस्वी में प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ था तथा रासबिहारी बॉस ने पूरे भारत में विद्रोह की योजना बनाई।
  • राजस्थान में इसका नेतृत्व विजय सिंह पति को सौंपा तथा खेरवा (अजमेर) के जमीदार गोपाल सिंह इनके सहयोगी बनाए गए।

  • परंतु अंग्रेजों को योजना का पता चल गया था तथा पति को खेरवा के जंगलों से गिरफ्तार करके टॉडगढ़ दुर्ग में नजरबंद करके रखा गया । यहां से फरार होकर विजय सिंह पथिक चित्तौड़ की है ओछड़ी गांव में पहुंचे और हरिभाई किंकर के साथ मिलकर विद्या प्रचारिणी सभा बनाई
  • 1916 में इस सभा के सम्मेलन में बिजोलिया के साधु सीतारामदास व मंगल सिंह भाग लेने आए। जिन के आग्रह पर विजय सिंह पथिक इस आंदोलन में शामिल हुए।
  • विजय सिंह पथिक ने बिजोलिया के निकट उमा जी का खेड़ा गांव को अपना मुख्यालय बनाया।
  • 1917 में बारीसाल गांव (भीलवाड़ा) में 13 सदस्यों वाले ऊपरमाल पंच बोर्ड का गठन किया। जिसके अध्यक्ष मन्ना पटेल बनाए गए।
  • इस बोर्ड का कार्य था किसानों को लगान न देने के लिए प्रेरित करना वह किसानों के आपसी मुकदमों की सुनवाई करना।
  • 1918 में विजय सिंह पथिक ने मुंबई जाकर गांधी जी से मुलाकात की गांधी ने विजय सिंह पथिक को राष्ट्रीय पथिक व अपने निजी सचिव महादेव देसाई को बिजोलिया भेजा।
  • महादेव देसाई ने मेवाड़ के प्रधानमंत्री रामाकांत मालवीय से मुलाकात की तथा मालवीय ने अप्रैल 1918 में 3 सदस्य बिंदुलाल भट्टाचार्य आयोजन का गठन किया इसके अन्य सदस्य निम्न है। :-
  • अमर सिंह राणावत
  • हकीम अजमल
  • इन्होंने भी किसानों के पक्ष में रिपोर्ट दी।
  • 1919 में कांग्रेस का अधिवेशन अमृतसर में आयोजित हुआ जिसमें विजय सिंह पथिक ने भाग लिया।
  • तिलक ने इस आंदोलन का मुद्दा उठाया परंतु गांधी व मालवीय को तिलक का समर्थन नहीं किया।
  • 1919 में ही वर्धा (महाराष्ट्र) मैं राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की।
  • 1920 में कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन हुआ इसमें बिजोलिया किसान आंदोलन से संबंधित एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

बिजोलिया किसान आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित करने का श्रेय

  • इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित करने का श्रेय कानपुर से गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा प्रकाशित प्रताप नामक समाचार पत्र के माध्यम से किया इसके अलावा प्रयाग से प्रकाशित व कोलकाता से प्रकाशित भारत मित्र व तिलक ने मराठा नामक समाचार पत्र से इस आंदोलन को प्रकाशित किया था।
  • रामनारायण चौधरी व विजय सिंह पथिक के द्वारा ऊपर माल डंका नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया गया।
  • असहयोग आंदोलन के समय सरकार के दबाव में आकर ए .जी .जी रॉबर्ट हॉलैंड व मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट विलकिंग्सन को बिजोलिया भेजा था। 11 फरवरी 1922 को उन्होंने किसानों के साथ समझौता किया।
  • इस समझौते में किसानों की ओर से रामनारायण चौधरी, माणिक्य लाल वर्मा, व ऊपर माल पंच बोर्ड अध्यक्ष मोतीचंद के द्वारा भाग लिया गया।
  • इस समय 74 लाग- बाग की सूची दी गई जिनमें से 33 को माफ कर दिया गया

बिजोलिया से संबंधित अन्य तथ्य

  • विलियम ट्रेंच को बिजोलिया का भूमि बंदोबस्त अधिकारी बनाया गया।
  • मेवाड़ के जमीदारों ने इस समझौते का विरोध किया।
  • सितंबर 1923 में विजय सिंह पथिक को बेगू किसान आंदोलन में गिरफ्तार किया गया।
  • 1927 में रिहा किया गया था। पथिक रिहा होकर बिजोलिया आने पर बिजोलिया के किसानों को जमीदारों से भूमि किराए पर न लेने की सलाह दी। परंतु इस भूमि को धाकड़ के अलावा अन्य जाति के किसान व ग्वालियर के किसानों ने किराए पर ले लिया

  • विजय सिंह पथिक व चौधरी में मतभेद हो गए।
  • 1929 तक विजय सिंह पथिक इस आंदोलन से पूरी तरह से अलग हो गए।
  • रामनारायण चौधरी की पत्नी अंजना देवी चौधरी सविनय अवज्ञा आंदोलन में गिरफ्तार की गई।
  • राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम में गिरफ्तार होने वाली प्रथम महिला थी।
  • जमनालाल बजाज, हरिभाई उपाध्याय के द्वारा भी इस आंदोलन का नेतृत्व किया गया।
  • उपाध्याय की पत्नी रामादेवी इस आंदोलन में महिलाओं का नेतृत्व प्रदान किया।
  • यह आंदोलन 1941 में समाप्त हुआ। जब मेवाड़ के प्रधानमंत्री T.राघवचारी ने अपने राजस्व अधिकारी मोहन सिंह मेहता को बिजोलिया भेजा।
  • मेहता ने मानिक लाल वर्मा की मध्यस्था से किसानों के साथ समझौता किया।
  • मानिक लाल वर्मा ने इस आंदोलन के दौरान पंछीड़ा नामक गीत लिखा था।
  • इस आंदोलन का जन्मदाता साधु सीताराम दास को माना जाता है।
  • राजस्थान में किसान आंदोलन का जन्मदाता विजय सिंह पथिक को मानते हैं।

विजय सिंह पथिक की पुस्तक

  • विजय सिंह पथिक के निम्नलिखित पुस्तक है जो कि निम्न है। :-
  • What are the Indian states
  • अजमेरू
  • प्रमोदिनी

• गेथेट के अनुसार” यह एशियाई का सर्वाधिक लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन है।

• इस आंदोलन का संदेशवाहक तुलसीभील था।

  • भंवरलाल ने अपने सॉन्ग के माध्यम से इस आंदोलन को रूसी क्रांति के सामान का तथा फतेह सिंह को जार कहा।
  • यह आंदोलन प्रारंभ हुआ उस समय फतेह सिंह मेवाड़ के शासक थे और समाप्ति के समय भुपालसिंह शासक थे।

2. बीकानेर किसान आंदोलन

  • बीकानेर के शासक के गंगासिंह ने 1925 में गंगनहर का निर्माण प्रारंभ करवाया। यह नहर 1927 में बनकर पूर्ण हुई थी।
  • इसके निर्माण पर जितना भी व्यय हुआ पूरा गंगासिंह ने दिया था। परंतु इसके पश्चात सिंचाई हेतु पूरा पानी उपलब्ध नहीं करवाया गया। तथा इस सिंचाई सुविधा के बदले वसूले जाने वाले कर को पूरी शक्ति के साथ वसूल किया जाता था।
  • गंगासिंह जब दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने गए जब चंदनमल बहर ने द्वारा लिखित बीकानेर एक दिग्दर्शिका नामक पुस्तिका के माध्यम से गंगा सिंह की आलोचना की।
  • गंगासिंह गोलमेज सम्मेलन बीच में ही है छोड़ कर लौटे तथा 1932 में सार्वजनिक सुरक्षा कानून लागू किया।

सार्वजनिक सुरक्षा कानून नियम के प्रावधान

  • सार्वजनिक सुरक्षा कानून नियम में निम्नलिखित प्रावधान थे जोकि निम्न प्रकार से :-
  • किसी भी व्यक्ति को यह संदेश हो कि वह राज्य विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो तो उसे रियासत से निष्कासित किया जा सकता था।
  • किसी अपराध में गिरफ्तार होने पर लंबी अवधि तक के जमानत नहीं मिलती थी व कर्ज़ को ना देने पर अपराध मान लिया गया

• इसे काला कानून कहा गया।

  • गांधीजी ने इसकी तुलना रोलेट एक्ट से की है।
  • नेहरू ने कहा कि जिस रियासत में कुमकुम पत्रिका सेंसर होती हो उस रियासत का शासक है इंसान नहीं हैवान है।
  • 1937 में उदासर गांव से जीवन लाल चौधरी के द्वारा प्रथम संगठित किसान आंदोलन प्रारंभ किया गया।
  • 1941 में रघुवर दयाल ने बीकानेर राज्य प्रजा परिषद की स्थापना की।
  • इसके कार्यकर्ताओं के द्वारा 30 जून से 1 जुलाई 1946 को रायसिंहनगर में किसानों का एक सम्मेलन बुलाया गया। जिसकी प्रशासन ने अनुमति दे दी थी।
  • केवल झंडे के प्रयोग को प्रतिबंधित किया गया था परंतु कुछ लोग झंडे ले आए जिस कारण से गोलाबारी में बीरबल सिंह नामक व्यक्ति मारा गया। इसकी स्मृति 6 जुलाई को किसान दिवस व 17 जुलाई को बीरबल दिवस मनाया जाता है।

3. बेगू किसान आंदोलन

  • बेगू किसान आंदोलन के बारे में सबसे पहले महत्वपूर्ण तथ्यों को देखेंगे।

बेगू किसान आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • सम्बन्ध – मेनाल गांव (भीलवाड़ा)
  • नेतृत्व – रामनारायण चौधरी
  • दायित्व देने वाले – विजय सिंह पथिक
  • समर्थन करने वाले – जयनारायण व्यास
  • आंदोलन की विषय वस्तु या कारण – 1. स्थाई कर 2. बंदोबस्त कर
  • किसान नेता – रूपाजी व कृपाजी (बूंदी से)
  • समकालीन जागीरदार – रावअनूप सिंह के काल की घटना
  • सत्याग्रह – 13 जुलाई 1923 को (गोविंदपुरा, चित्तौड़गढ़)
  • नेतृत्व – रूपाजी व कृपाजी (सत्याग्रह का)
  • समझाने के लिए कमीशन – ट्रेंच आयोग कमीशन
  • गोलीकांड – मि. ट्रेंच नामक अंग्रेज ने
  • शहीद – रूपाजी व कृपाजी
  • सरकारी रिपोर्ट के आधार पर – 120 महिला-पुरुष व बच्चे मारे गए
  • घटना को नामित – बोल्शेविक क्रांति
  • नामित करने वाले – 1. महात्मा गांधी 2. मेवाड़ नरेश महाराणा फतेह सिंह

बेगू किसान आंदोलन का इतिहास या घटना

  • बेगू (चित्तौड़) मेवाड़ रियासत की जागीर थी।
  • यहां के अधिकांश किसान धाकड़ जाति के थे व बिजोलिया के किसानों से संबंध थे।
  • बिजोलिया आंदोलन से प्रभावित होकर 1922 में मेनाल (भीलवाड़ा) में एकत्रित हुए व अजमेरा आकर विजय सिंह पथिक से मुलाकात की व आंदोलन का नेतृत्व ग्रहण करने का आग्रह किया।
  • क्योंकि विजय सिंह पथिक का मेवाड़ रियासत में प्रवेश पर प्रतिबंध था इसलिए पथिक ने रामनारायण चौधरी को इन किसानों के साथ चौधरी ने मेवाड़ के दीवान दामोदर लाल व पॉलिटकल एजेंड विलकिंनसन से मुलाकात की परंतु इन दोनों के कानों में जूं तक नहीं रेगी।
  • इस कारण से बेगू में किसानों ने हिंसक विद्रोह कर दिया। दबाव में आकर बेगू का जमीदार अनूपसिंह अजमेर आया।
  • June 1942 को राजस्थान सेवा संघ की अध्यक्ष से किसानों के साथ समझौता किया। परंतु सरकार ने इस समझौते को मानने से इंकार कर दिया। इस समझोते को बोल्शेविक समझौता कहा गया।
  • अनूप सिंह को उसके पद से हटाकर बेगू में मुसरमात का गठन कर दिया गया व अमृतलाल को बेगू का प्रशासनिक किया गया।

• किसानों की समस्या की जांच हेतु ट्रेंच आयोग का गठन किया गया।

•13 July 1923 को बेगू के जमीदार गोविंदपुरा (भीलवाड़ा) गांव में एकत्रित हुए थे व ट्रेंच के आदेश से गोली चलाई गई।

  • इसमें रूपाजी धाकड़ व कृपाजी धाकड़ व्यक्ति मारे गए।
  • सितंबर 1923 में विजय सिंह पथिक इसी आंदोलन में गिरफ्तार हुए थे इसलिए आंदोलन समाप्त हो गया।
  • इस आंदोलन का नेतृत्व रामनारायण चौधरी के द्वारा किया गया।

4. बूंदी का बरड किसान आंदोलन

  • ऊपरमाल से सटे हुए बूंदी के पठारी क्षेत्र को बरड कहा जाता है।
  • इस क्षेत्र की मुख्य आबादी गुर्जर थी जिसकी आजीविका पशुपालन थी।
  • गुर्जरों ने जानवरों को हाका देने की परंपरा जब भी क्षेत्र में अंग्रेज अधिकारी या शासक शिकार के लिए आते थे गुर्जर जानवरों को घेरकर एक ही स्थान पर इकट्ठा हो जाते थे इसमें गुर्जरों की स्वयं के पशु भी मारे जाते थे।
  • पठारी भूभाग होने के कारण कृषि कम होती थी तथा वह भी इस शिकार में नष्ट हो जाती थी।
  • 1921 में साधु सीताराम दास की सलाह पर बरड किसान सभा का गठन किया गया इसके अध्यक्ष हरला भड़क को बनाया गया।
  • प्रारंभ में केवल हाका देने का विरोध हुआ परंतु बिजोलिया में हुए समझौते के बाद भू राजस्व या लागबाग देने से मना कर दिया गया।
  • गुर्जरों का नेतृत्व पंडित नयनू शर्मा व महिलाओं का नेतृत्व सत्यभामा के द्वारा किया गया।
  • सत्यभामा को गांधी का मानस पुत्री कहा जाता है।

डाबी (बूंदी) की घटना

  • 2 अप्रैल 1923 को गुर्जर डाबी (बूंदी) में एकत्रित हुए व पुलिस अधिकारी इकराम हुसैन के आदेश से गोली चलाई गई। इसमें देव गुर्जर व नानक भील मारे गए।
  • नानक भील की स्मृति में माणिक्य लाल वर्मा ने अर्जीवन नामक कविता लिखी थी जिसे इनके दाह संस्कार पर भंवरलाल प्रज्ञाच के द्वारा पढ़कर सुनाया गया।
  • 1936 में सरकार पशु गणना करवा रही थी तथा गुर्जरों को लगा कि पशुओं पर कोई लाख बाग लगाई जाएगी अतः ये गुर्जर हिंडोली के हूंडेश्वर महादेव मंदिर में एकत्रित हुए परंतु प्रजामंडल आंदोलन सक्रिय होने के कारण गुर्जरों को उचित नेतृत्व नहीं मिल पाया।
  • स्त्रियों का सर्वाधिक योगदान इसी आंदोलन में था।

5. शेखावाटी किसान आंदोलन

  • शेखावाटी में एकमात्र रियासत सीकर थी परंतु यह जयपुर की अर्द स्वायत्त रियासत थी। अर्थात कुछ ही मामलों में स्वतंत्रता थी बाकी मामलों में उसे जयपुर पर निर्भर रहना पड़ता था।
  • सीकर के अंतर्गत 436 गांव आते थे। यहां के किसान जाट जाति से थे व जमीदार राजपूत थे।
  • इनका प्रारंभ एक किसान आंदोलन के रूप में प्रारंभ हुआ परंतु बाद में यह वर्गों की जातीय श्रेष्ठता में परिवर्तित हो गया। बाकी जातियों ने जाटों को सहयोग किया इसलिए छुआछूत शेखावाटी में सर्वप्रथम समाप्त माना गया।
  • 1922 में कल्याण सिंह सीकर के शासक बने तथा इन्होंने लगान में 25 से 50 परसेंट वृद्धि कर दी थी।
  • सीकर के किसानों ने अजमेर जाकर रामनारायण चौधरी को इस समस्या के बारे में बताया।
  • चौधरी ने लंदन से प्रकाशित हेराल्ड नामक समाचार पत्र में सीकर के किसानों पर मुद्दा उठाया।
  • जयपुर के शासक सवाई मानसिंह -ll ने बेब नामक अधिकारी को सीकर भेजा जिसने सीकर को भूमि बंदोबस्त करके लगान की दरें निश्चित की। परंतु बेब के जयपुर लौटते ही कल्याण सिंह ने बढ़ा हुआ लगान वसूलना शुरू कर दिया।

कटराथल (सीकर) की घटना

  • 25 April 1924 को कटराथल (सीकर) मैं जाट महिलाओं का सम्मेलन बुलाया गया।
  • धारा 144 लगे होने के बावजूद भी 10,000 महिलाएं इस सम्मेलन में शामिल हुई।
  • इस सम्मेलन की अध्यक्षता किशोरी देवी के द्वारा की गई व प्रमुख वक्ता उत्तमा देवी थी।
  • इस सम्मेलन को कोलकाता से प्रकाशित विश्वमित्र व भारतमित्र में प्रकाशित किया गया।

डूंडलोद (झुंझुनू) की घटना

  • 21 जून 1934 को डूंडलोद (झुंझुनू) के जमीदार हरनाथ सिंह के भाई ईश्वरसिंह ने जयसिंहपुरा गांव में खेत में काम कर रहे चारों किसानों को गोली मारकर हत्या कर दी गई इस कारण से उन पर मुकदमा चलाया गया।
  • सजा पाने वालों में प्रथम राजपूत जमीदार थे।
  • इस हत्याकांड को मंदसौर से प्रकाशित अर्जुन नामक समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया।
  • कुंदन, वलथाना, खूड इस आंदोलन के प्रमुख केंद्र थे।
  • House of commons के सदस्य पेथिक लॉरेंस के द्वारा भी इस आंदोलन का मुद्दा उठाया गया।
  • राजस्थान के अंतिम ए .जी .जी ए.सी लेथियन ने भी इस आंदोलन के बारे में लिखा है।

6. अलवर किसान आंदोलन

  • अलवर में जमींदार प्रथा कम थी। अलवर की 80% भूमि खालसा थी अर्थात सीधे राज्य के नियंत्रण में थी।
  • मात्र 20% भूमि पर ही जमीदारों को प्रभाव था इन जमीदारों को विश्वेश्वरदास कहते थे।
  • किसान खालसा भूमि को किराए पर लेते और कृषि करता था
  • खालसा भूमि पर से लगान की वसूली जमीदार करके राज्य को देता था।
  • 1921 में अलवर के शासक जयसिंह ने लगान की दरों में वृद्धि कर दी थी। किसानों ने बढ़ा हुआ लगान देने से इनकार कर दिया।
  • 14 मई 1925 को अलवर के बानसूर तहसील की नींमुचण गांव में किसान व जमीदार एकत्रित हुए।
  • पुलिस अधिकारी गोपाल सिंह व कमांडर छज्जू सिंह (राजस्थान का जनरल डायर) के आदेश पर गोली चलाई गई। इसमें कुल 156 व्यक्ति मारे गए।
  • गोलीबारी के समय सीता देवी नामक महिला भाषण दे रही थी।
  • लाहौर से प्रकाशित रियासत नामक अखबार में इसकी तुलना जलियांवाला बाग से की है।
  • गांधी ने यंग इंडिया नामक समाचार पत्र जिसे डबल डायिरीजम डीस्टीलड अर्थात दोहरी डायर शाही कहां गया।

नींमुचण(अलवर) की घटना

  • कालक्रम – 14 मई 1925 से 24 मई 1925 के मध्य
  • संबंधित क्षेत्र – बानसूर तहसील (अलवर)
  • नेतृत्व – महेश मेव
  • समकालीन जागीरदार – राव अनूप सिंह
  • आंदोलन के रचनात्मक कारण – 1. मादा पशुओं के क्रय विक्रय पर प्रतिबंध। 2. जंगल से लकड़ी प्राप्त करने पर प्रतिबंध 3. मांस व्यापार पर प्रतिबंध 4. जंगली पशुओं के शिकार पर प्रतिबंध

सूअर विरोधी गतिविधि (अलवर)

  • सूअर विरोधी अभियान के तहत पुलिस निरीक्षक छाजू सिंह ने मेव किसान वर्ग पर गोली कांड किया जिसमें सीता देवी मेव शहीद हुई और 60 अन्य कार्यकर्ता मारे गए।
  • महात्मा गांधी ने इस घटना को दोहरी डायर नीति अर्थात डबल डायर नीति व राजस्थान का दूसरा जलियांवाला कांड कहा।
  • महात्मा गांधी ने इस घटना का जिक्र न्यू इंडिया नामक पत्र में उजागर किया।

7. मातृकुंडिया किसान आंदोलन (चित्तौड़गढ़)

  • यह आंदोलन 22 जून 1980 में हुआ था जोकि एक जाट किसान आंदोलन था। इसका मुख्य उद्देश्य नई भू राजस्व व्यवस्था थी। इस समय मेवाड़ के शासक महाराणा फतेहसिंह था।

8. दुधवा-खारा किसान आंदोलन

  • यह आंदोलन बीकानेर रियासत के चूरू में हुआ था। यहां के किसानों ने जागीरदारों के अत्याचार व शोषण के विरुद्ध आंदोलन किया इस समय बीकानेर का शासक सार्दुल सिंह जी थे।
  • इस आंदोलन का नेतृत्व रघुवर दयाल गोयल, हनुमान सिंह आर्य के द्वारा किया गया।

9. मारवाड़ में किसान आंदोलन

  • मारवाड़ की किसानों पर बहुत ही अत्याचार हुए थे। 1923 ईस्वी में जयनारायण व्यास ने मारवाड़ में हितकारी सभा का गठन किया और किसानों को आंदोलन के लिए प्रेरित किया परंतु सरकार ने इस सभा को गैर कानूनी संस्था घोषित कर दिया सरकार ने इस आंदोलन को ध्यान में रखते हुए मारवाड़ किसान सभा नामक संस्था का गठन किया परंतु इसमें सफलता प्राप्त नहीं हुई।
  • आजादी के बाद भी जागीरदार किसानों पर अत्याचार करते रहे परंतु राज्य में लोकप्रिय सरकार के गठन के बाद किसानों को भूमि के अधिकार मिल गए।

किसान आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

Q.1 राजस्थान के किस क्षेत्र में कृषक आंदोलन प्रारंभ करने की पहल की ?

उत्तर – मेवाड़

Q. 2 राजस्थान का प्रथम किसान आंदोलन कौन सा था ?

उत्तर – बिजोलिया

Q.3 बेगू किसान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था ?

उत्तर – रामनारायण चौधरी

Q. 4 रूपाजी व कृपाजी किसान नेताओं का संबंध किस आंदोलन से है ?

उत्तर – बेगू किसान आंदोलन से

Q. 5 बूंदी किसान आंदोलन की शुरुआत कब हुई ?

उत्तर – 1926-27

Q.6 मेवाड़ का वर्तमान शासन नामक पुस्तक किसने लिखी ?

उत्तर – माणिक्य लाल वर्मा

Q. 7 पूर्व मेवाड़ परिषद की स्थापना की गई ?

उत्तर – 1922

Q.8 कांगड़ा कांड किस प्रजामंडल में गठित हुआ

उत्तर – बीकानेर प्रजामंडल

Q. 9 बोल्शेविक समझौता किस आंदोलन से है ?

उत्तर – बेगू आंदोलन से

Q.10 जोधपुर में लिजियन का गठन कब हुआ ?

उत्तर – 1836

ठीक है मित्रों राजस्थान के किसान आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण टॉपिक आपका यह टॉपिक कंप्लीट हुआ। अगले भाग में राजस्थान के जनजाति या आदिवासी आंदोलन को पढ़ने के लिए अगले पेज पर क्लिक करें और जनजाति व आदिवासी आंदोलन के बारे में जाने । धन्यवाद

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राजस्थान में किसान आंदोलन

राजस्थान में किसान आंदोलन

राजस्थान में किसान आंदोलन

May 28, 2020

सामाजिक व धार्मिक पुनर्जागरण व आंदोलन के बारे में कंप्लीट जानकारी

  • भारत में लगभग 18वीं शताब्दी में राष्ट्रीय पतन के समय आर्थिक व धार्मिक रूप से भारतीय समाज प्राचीन रूढ़िवादी में जकड़ा हुआ था। देश में महिलाओं की दयनीय स्थिति थी, कठोर जाति प्रथा, आधारहीन सामाजिक रीति रिवाज तथा बाल विवाह, बाल हत्या, विधवाओं के साथ अत्याचार आधी कुप्रथाओं में आमूलचूल परिवर्तन हुआ। पुनर्जागरण के द्वारा हमारे देश में भी सुधार प्रारंभ करने की प्रेरणा दी अतः इसी समय 19वी व 20 वीं सदी में धर्म सुधार आंदोलन प्रारंभ हुआ। इस समय महान समाज व धर्म सुधारकों ने हमारे समाज की कमियां में बुराइयों का विश्लेषण करके उन्हें दूर करने के प्रयास किए गए इनके द्वारा किए गए प्रयास ही सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन के नाम से जाने जाते हैं।

सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन के प्रमुख कारण

  • ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा बहुत अधिक देश का आर्थिक शोषण किया गया।
  • अंग्रेजों के समय भारत में नए मध्यम वर्ग का उदय हुआ- बुद्धिजीवी, डॉक्टर, शिक्षक, वकील, पत्रकार आदि।
  • अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार के माध्यम से शिक्षित भारतीय अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, फ्रांस की राज्य क्रांति वहां की बढ़ती हुई राष्ट्र भावना से परिचित हुए।
  • भारत में इस नवजागरण के द्वारा भारतीय समाज एवं धार्मिक विचारधारा क्रांतिकारी परिवर्तन हुए।
  • परिवर्तनों का श्रेय-राजा राममोहन राय एवं उनके ब्रह्म समाज, दयानंद सरस्वती एवं आर्य समाज, स्वामी विवेकानंद एवं रामकृष्ण मिशन, थियोसोफिकल सोसायटी तथा अलीगढ़ आंदोलन को है।
  • भारतीय समाज में ईश्वरचंद्र विद्यासागर का भी पर्याप्त योगदान रहा है। इन्होंने स्त्री शिक्षा, स्त्रियों के उद्धार एवं बाल विवाह पर रोक लगाने के प्रयास किए गए।

देखिए साथियों इस टॉपिक को आपको पूरा ध्यान से और अच्छे से पढ़ना है देखिए इस टॉपिक में आगे पढ़ेंगे जिन जिन व्यक्तियों का धार्मिक व सामाजिक सुधार आंदोलन में योगदान रहा है उनका विस्तार से अध्ययन करेंगे।

भारत में सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन से संबंधित प्रमुख व्यक्ति

  • शासन में स्थायित्व इस प्रकार के आंदोलनों को चलाने की स्थाई शर्त होती है। क्योंकि समाज नये परिवर्तन को आसानी से स्वीकार कर लेता है।

राजा राममोहन राय – ब्रह्म समाज

राजा राममोहन राय धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म (date of birth) – 22 मई 1772
  • जन्म स्थान (birth of palace) – बंगाल के हुगली जिले के राधानगर स्थान पर हुआ।
  • पिता का नाम – राधाकांत देव
  • माता का नाम – तारिणी देवी
  • भाई का नाम – जगमोहन राय
  • कुल विवाह – 3
  • प्रारंभिक शिक्षा – कोलकाता (बंगाली भाषा में)
  • राजा राममोहन राय ने कुल 3 विवाह किए। जिनमें से प्रथम दो कि जल्दी मृत्यु हो गई।
  • राम मोहनराय को प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में बंगाली भाषा में दी गई।
  • अरबी व फारसी की शिक्षा उन्होंने पटना के मदरसा में प्राप्त की थी।
  • वाराणसी में उन्होंने संस्कृत का अध्ययन किया था।
  • अंग्रेजी शिक्षा के लिए मुर्शिदाबाद के डिप्टी मजिस्ट्रेट जॉन बुडरोक डिप्टी के पास क्लर्क के पद पर कार्य किया।
  • राममोहन राय भारत की तुरंत स्वतंत्रता के पक्ष में नहीं थे। बल्कि वे चाहते थे कि अंग्रेज भारतीयों को प्रशासन में शामिल करके उन्हें शिक्षा प्रदान करें।
  • राममोहन राय ईसाई धर्म की नीति शास्त्र, इस्लाम धर्म के एकेश्वरवाद, सूफी धर्म के रहस्यवाद से प्रभावित थे।

राजा राम मोहन राय द्वारा किए गए प्रयास

  • 1807 ईस्वी में फारसी भाषा में मूर्ति पूजा के विरुद्ध तुहफाल उल मुवाहिदीन अर्थात एकेश्वरवादियों नामक लेख लिखा था।
  • 1811 ईसवी में इनके भाई जगमोहन की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी को सती किया गया। इस दृश्य को देखकर राजा राममोहन राय सती प्रथा के विरोधी हो गए।
  • 1814 ईसवी में कोलकाता में”आत्मीय सभा ” की स्थापना की ।
  • 1817 इसवी में डेविड हेयर को कोलकाता में हिंदू कॉलेज की स्थापना में सहयोग प्रदान किया।
  • 1821 में बंगाली भाषा में “संवाद कौमुदी” नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया। यह किसी भारतीय द्वारा देसी भाषा में प्रकाशित प्रथम समाचार पत्र था।
  • इसके अलावा 1822 में फारसी भाषा में “मिराततुल दर्पण” नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया।
  • राजा राममोहन राय को भारतीय पत्रकारिता का अग्रदूत कहा जाता है।

ब्रह्म समाज :-

  • 20 August 1828 को कोलकाता में कमल घोष के घर पर ब्राह्मण वर्ण की संस्था ब्रह्म समाज की स्थापना की स्थापना की।

ब्रह्म समाज के प्रमुख उद्देश्य

  • हिंदू समाज की बुराइयों को दूर करना।
  • ईसाई धर्म के भारत में बढ़ते प्रभाव को रोकना।
  • सभी धर्मों में आपसी एकता स्थापित करना।

ब्रह्म समाज के मूल सिद्धांत

  • ईश्वर एक है। वह सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक और सर्वगुण संपन्न है।
  • ईश्वर कभी भी शरीर धारण नहीं करता। इसलिए मूर्ति पूजा से ईश्वर नहीं मिलता है।
  • ईश्वर की प्रार्थना का अधिकार सभी जाति और वर्ग के लोगों को है। ईश्वर की पूजा के लिए मंदिर, मस्जिद आदि की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • सच्चे दिल से की गई प्रार्थना ईश्वर अवश्य सुनता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना आवश्यक है।
  • आत्मा अजर और अमर है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।
  • सभी धर्मों और धर्म ग्रंथों के प्रति आदर की भावना रखनी चाहिए।

मोहनराय के आगे के प्रयास

  • राजा राममोहन राय के प्रयासों से बंगाल के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिंग ने 4 दिसंबर 1829 को एक कानून लागू किया। जिसकी धारा 17 के तहत ब्रिटिश भारत को सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया गया।
  • 1833 के चार्टर में इसे संपूर्ण भारत में लागू कर दिया गया
  • राजा राममोहन राय के ही सहयोगी रहे राधाकांत देव 1830 में “धर्म सभा”की स्थापना कर दी। इसका विरोध किया गया।
  • 1830 में मुगल शासक अकबर द्वितीय ने अपनी पेंशन बढ़ाने के लिए राजा राममोहन राय को इंग्लैंड के साथ साथ विलियम चतुर्थ के पास भेजा। इस अवसर पर राजा की उपाधि दी गई।
  • बंगाल के नवाबों के द्वारा राजा राममोहन राय के पूर्वजों को राय की उपाधि दी गई।
  • यूरोप जाने वाले यह प्रथम भारतीय थे 27 सितंबर 1833 को इंग्लैंड के ब्रिस्टल शहर में डॉक्टर कारपेटर के निवास स्थान पर राजा राममोहन राय की मृत्यु हुई।
  • ब्रिस्टल में इनकी समाधि है क्योंकि उस समय इंग्लैंड में अग्नि दाह संस्कार की अनुमति नहीं होती थी।
  • उनकी समाधि पर अजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ के द्वारा लिखित ” हरीकेली नाटक”की पंक्तियों को भी लिखा गया है।

राजा राममोहन राय की पुस्तकें

राजा राममोहन राय के द्वारा निम्न पुस्तकें लिखी गई:-

  • The precepts of Jesus the Guide to peace and happiness
  • Precept of Jesus
  • तूहफात- उल-मुवाहेदिन

सुभाष चंद्र बोस ने राजा राम मोहन राय को युगदूत की उपाधि दी। इसके अलावा पुनर्जागरण का तारा अतीत तथा भविष्य के मध्य सेतु तथा राष्ट्रवाद का जनक कहा जाता है।

  • राजा राममोहन राय के बाद द्वारिका नाथ टैगोर ने ब्रह्म समाज का नेतृत्व किया।
  • 1843 में उन्होंने अपने बेटे देवेंद्रनाथ टैगोर को ब्रह्म समाज का नेतृत्व सौंपा।
  • 1857 में केशव चंद्र सेन ब्रह्म समाज के सदस्य बने व 1862 में आचार्य के पद पर नियुक्त हुए।

केशव चंद्र सेन

  • केशव चंद्र सेन के कारण ब्रह्म समाज को पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया था क्योंकि केशव चंद्र सेन ने कोलकाता से बाहर प्रसार किया सभी वर्णो धर्मों के लोगों को इसका सदस्य बनाया।
  • इस कारण से देवेंद्र नाथ से इनका विवाद हो गया।
  • 1865 में केशव चंद्र सेन को ब्रह्म समाज से निष्कासित किया गया था।
  • 1866 में केशव चंद्र सेन ने भारतीय ब्रह्म समाज की स्थापना की जो समाज देवेंद्र नाथ के नेतृत्व में रह गया उसे आदि ब्रह्म समाज कहां गया।
  • भारतीय ब्रह्म समाज के कारण 1872 में अंतर्जातीय व विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लागू हुआ जिसमें की बाल विवाह को अपराध घोषित किया गया था
  • परंतु स्वयं केशव चंद्र सेन ने 1878 में अपनी 12 वर्षीय पुत्री सुनीति देवी का विवाह कूचबिहार (पश्चिम बंगाल) के युवराज निपेंद्र नारायण से कर दिया।
  • इसी कारण भारतीय ब्रह्म समाज में फूट पड़ी जिन लोगों ने केशव चंद्र सेन का साथ छोड़ा उनको समाज को साधारण ब्रह्म समाज कहां गया जिसका नेतृत्व आनंद मोहन गोष व सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने किया।

प्रार्थना समाज

  • प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 ईसवी में मुंबई में आत्माराम पांडुरंग ने की थी।
  • एमजी रानाडे, आरजी भंडारकर भी इससे जुड़ गए।
  • इन्होंने भी जाति प्रथा का विरोध किया व अंतरजातीय विवाह एवं विधवा विवाह का पुरजोर समर्थन किया
  • इन्होंने विधवा पुनर्विवाह एसोसिएशन की स्थापना की।

स्वामी दयानंद सरस्वती – आर्य समाज

स्वामी दयानंद सरस्वती

  • जन्म – 12 फरवरी 1824
  • जन्म स्थान – गुजरात के मोरवी जिले के टंकारा नामक गांव में हुआ।
  • बाल्यावस्था का नाम – मूलशंकर
  • 24 साल की आयु में दंडस्वामी पूर्णानंद से शिक्षा प्राप्त की।
  • इसके बाद इन्हें दयानंद सरस्वती नाम दिया गया।
  • 1860 में मथुरा के आचार्य विरजानंद से इन्होंने वेदों की शिक्षा ली जिसके बाद नारा दिया था-वेदो की ओर लोटो
  • इन्हें दयानंद नाम अपने गुरु विरजानंद ने दिया था।

शुद्धि आंदोलन

  • स्वामी दयानंद सरस्वती ने भारत में शुद्धि आंदोलन चलाया क्योंकि यह डलहौजी के 1850 ईसवी के लागू किए गए धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम की धारा 21 की प्रतिक्रिया के वादी के कारण चलाया।
  • इन्होंने वैदिक धर्म में व्याप्त बुराइयों के विरुद्ध पाखंड खाउनि पताका को फहराया
  • उन्होंने स्वराज्य शब्द का प्रथम बार प्रयोग किया।

स्वामी दयानंद सरस्वती का कथन

  • इनका कथन था” बुरे से बुरा देसी राज्य अच्छे से अच्छे विदेशी राज्य की तुलना में बेहतर होगा”

एनीबेसेंट का कथन

एनीबेसेंट

  • एनी बेसेंट का कथन था “भारत भारतीयों का है। यह लिखने वाले दयानंद सरस्वती प्रथम भारतीय थे।

आर्य समाज

  • 10 April 1875 को उन्होंने मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की।
  • 1877 में इसके मुख्यालय को लाहौर में स्थानांतरित किया गया।
  • केशव चंद्र सेन के कहने पर इन्होंने आर्य समाज की पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश का लेखन कार्य हिंदी भाषा में किया गया। इसे मुंबई में लिखना प्रारंभ किया गया।
  • इसका अधिकांश भाग उदयपुर में लिखा गया व अजमेर में इसका प्रारंभिक प्रकाशन है।
  • राजस्थान में 4 शासक इनके शिष्य थे :-
  • मदनपाल – करौली
  • नारसिंह – शाहपुरा
  • सज्जन सिंह – उदयपुर
  • जसवंतसिंह -ll – जोधपुर

दयानंद सरस्वती के बारे में

  • जसवंत सिंह-ll तथा इनके प्रधानमंत्री प्रताप सिंह नए-नए आमंत्रण देकर जोधपुर बुलाया था।
  • जसवंत सिंह-ll की प्रेमिका नन्ही जान ने बड़ा काम करते हुए दयानंद सरस्वती को भोजन में कांच पीसकर या जहर मिलाकर खिला दिया।
  • इलाज के लिए इन्हें माउंट आबू ले जाए ले जाया गया।
  • 30 अक्टूबर 1883 को अजमेर में इनकी मृत्यु हो गई।
  • वेलेंटाइन शिरोल ने अपने पुस्तकें unrest india मैं तिलक व आर्य समाज को भारतीय अशांति का जन्मदाता कहा गया।
  • दयानंद सरस्वती के बाद शिक्षा को लेकर आर्य समाज के दो गुट बन गए थे।

आर्य समाज के दो गुट

  • प्राच्य अर्थात देसी शिक्षा के समर्थक लाला मुंशी राम थे।
  • इन्होंने 1901- 02 में हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की।
  • इसमें वैदिक शिक्षा दी जाती थी।
  • मुंशी राम स्वामी श्रद्धानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए इन्हीं के द्वारा महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में 1500 रुपए का मनी ऑर्डर किया था। इन्हीं के पैसों की टिकट खरीद कर महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत आए।
  • पाश्चात्य शिक्षा के समर्थक लाला हंसराज व लाला लाजपत राय थे। इन्होंने 1886 में दयानंद एंग्लो वैदिक स्कूल की स्थापना की। तथा इसमें 1889 में कॉलेज बनाया गया।

स्वामी विवेकानंद

धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म – 12 जनवरी 1863
  • जन्म स्थान – कोलकाता
  • बाल्यावस्था का नाम – नरेंद्र नाथ दत्त
  • पिता का नाम – विश्वनाथ
  • माता का नाम – भुनेश्वरी देवी
  • कोलकाता में स्थित काली माता के मंदिर (दक्षिणेश्वर) के पुजारी गजाधर आचार्य या रामकृष्ण परमहंस से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की।
  • खेतड़ी के शासक अजीत सिंह विवेकानंद के मित्र थे। दोनों की प्रथम मुलाकात मुंबई में जोधपुर के प्रधानमंत्री प्रताप सिंह ने करवाई।
  • विवेकानंद तीन बार खेतड़ी आए:-
  • 1891
  • 1893
  • 1897
  • जब यह दूसरी बार आए थे तब अजीत सिंह ने इनको विवेकानंद नाम दिया व पगड़ी प्रदान की।

अजीत सिंह

  • अजीत सिंह ने इनके लिए नृत्य का आयोजन रखा। परंतु नृत्यांगना मैणा बाई ने जैसे ही नृत्य प्रारंभ किया विवेकानंद उठकर जाने लगे और मैणा बाई ने सूरदास का भजन सुनाया, विवेकानंद ने इनको मां बोलकर संबोधित किया।

1893 में शिकागो में प्रथम विश्व धर्म संसद जनवरी का आयोजन किया गया।

  • रामानंद रियासत (तमिलनाडु) के शासक भास्कर सेथूपल्ली ने विवेकानंद के लिए तृतीय श्रेणी के टिकट करवा कर दी। इसको पता चलने पर अजीत सिंह ने अपने मुंशी जगमोहन लाल को भेजा।
  • जगमोहन लाल ने ओरियंट कंपनी पेनिनशूना जहाज के प्रथम श्रेणी के टिकट करवा दी।
  • ग्यारह सितंबर 1893 में शिकागो में आयोजित प्रथम विश्व धर्म संसद में भाषण दिया था।
  • इस संसद के अध्यक्ष जॉन हैरास बोरो थे ।

न्यूयॉर्क हेराल्ड

  • अगले दिन अमेरिका के समाचार पत्र न्यूयॉर्क हेराल्ड ने लिखा था इस युवा तूफानी प्रचारक को सुनने के बाद पश्चिम देशों के द्वारा भारत में धर्म प्रचारक भेजना एक मूर्खतापूर्ण कार्य है।
  • इसके बाद 1895 में उन्होंने न्यूयॉर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना की।
  • इसके बाद में इंग्लैंड आए जहां माग्रेट नोबेल इनकी शिष्य बनी थी। जोकि सिस्टर निवेदिता के नाम से प्रसिद्ध हुई।
  • इसके बाद ये श्रीलंका आए तथा पूर्व में अपना प्रथम सार्वजनिक भाषण उन्होंने कोलंबो में दिया था इसके बाद ये भारत आए।
  • 1 मई 1897 को कोलकाता के बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना हुई।
  • इसके अलावा उत्तराखंड के अल्मोड़ा नामक स्थान पर मायावती मठ स्थापित किया गया।
  • 1899 में यह पुन: अमेरिका गए। 1900 ईसवी में पेरिस में आयोजित विश्व शांति सम्मेलन में भाग लिया।
  • 4 July 1902 वेल्लूर मठ में स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हुई।
  • सुभाष चंद्र बोस ने विवेकानंद को भारत का अध्यात्मिक पिता कहां।

विवेकानंद की प्रसिद्ध पुस्तकें

  • मैं समाजवादी हूं
  • राजयोग
  • ज्ञान योग
  • कर्म योग
  • My master
  • A journey from Colombo to to Almora

स्वामी विवेकानंद के प्रमुख कथन

  • हमारा धर्म केवल रसोई घर तक सीमित हो गया है।
  • मैं ऐसे प्रत्येक शिक्षित भारतीयों को देशद्रोही मानता हूं जिसकी शिक्षा का लाभ निम्न वर्ग के लोगों तक ना पहुंचे।
  • उठो जागृति हो वह तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए।

रामकृष्ण परमहंस

रामकृष्ण परमहंस धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म – 18 फरवरी 1836
  • जन्म स्थान – बंगाल के कमरपुकर
  • पिता का नाम – शुदीराम
  • माता का नाम – चंद्रा देवी
  • असली नाम – गदाधर चट्टोपाध्याय
  • रामकृष्ण मठ की स्थापना रामकृष्ण ने की
  • रामकृष्ण परमहंस के सर्वाधिक प्रिय शिष्य नरेंद्र नाथ दत्त थे।

थियोसोफिकल सोसाइटी

  • स्थापना – 1875
  • कहां पर की गई – अमेरिका में
  • किसके द्वारा की गई – मैडम एच. पी. ब्लावेटस्की और हेनरी स्टील आलकॉट
  • इस सोसाइटी के द्वारा हिंदू धर्म को विश्व का सबसे अध्यात्मिक धार्मिक माना है।
  • 1882 में मद्रास के समीप अंतरराष्ट्रीय कार्यालय स्थापित किया गया ।
  • भारत में इस आंदोलन का श्रेय एक आयरिश महिला श्रीमती एनी बेसेंट को दिया गया जो कि 1893 में भारत आई और इस संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रचार प्रसार में लग गई।
  • श्रीमती एनी बेसेंट ने 1898 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की जो 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयास से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में परिवर्तित हो गया।

मुस्लिम सुधार आंदोलन

हमदिया आंदोलन

मिर्जा गुलाम अहमद

  • इस आंदोलन का प्रारंभ 1889-90 में मिर्जा गुलाम अहमद ने फरीदाकोट में किया
  • इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मुसलमानों में आधुनिक बौद्धिक विकास प्रचार करना था।
  • मिर्जा गुलाम अहमद ने हिंदू देवता कृष्णा और ईशा मसीह के अवतार होने का दावा किया ।

अलीगढ़ आंदोलन

सर सैयद अहमद

  • इस आंदोलन को सर सैयद अहमद के द्वारा चला गया।
  • वो इस आंदोलन के माध्यम से मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा का प्रसार करना चाहता था।
  • इसने 1865 में अलीगढ़ मैं मोमडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की जो कि बाद में 1890 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बन गया।
  • इस आंदोलन के माध्यम से सर सैयद अहमद में मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया।

देवबंद आंदोलन

  • यह आंदोलन रूढ़िवादी मुस्लिमों के द्वारा चलाया गया इसका प्रमुख उद्देश्य विदेशी शासन का विरोध करना और मुसलमानों में कुरान की शिक्षा का प्रचार प्रसार करना
  • यह आंदोलन मोहम्मद कासिम ननौतवी व रशीद अहमद गंगोही के द्वारा 1867 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में इस आंदोलन की स्थापना की
  • यह अलीगढ़ आंदोलन का विरोधी था।
  • देवबंद के नेता भारत में अंग्रेजी शासन के विरोधी थे उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा का विरोध किया।

सिख समुदाय आंदोलन

  • 19वीं सदी में सिक्कों की संस्था सरीन सभा की स्थापना हुई।
  • पंजाब का कुक आंदोलन सामाजिक व धार्मिक आंदोलन से संबंधित था।
  • जवाहर मल और रामसिंह ने कूका आंदोलन का नेतृत्व किया
  • पंजाब के अमृतसर में सिंह सभाआंदोलन चलाए गया।
  • इन आंदोलनों के परिणाम स्वरूप 1922 में सिख गुरुद्वारा अधिनियम पारित किया गया जो कि आज तक भी कार्य कर रही है।

प्रमुख अन्य संस्थाएं और आंदोलन

  • 1861 में शिवदयाल साहिब में आगरा में राधास्वामी आंदोलन चलाया।
  • 1887 में नारायण अग्निहोत्री ने लाहौर में देव समाज की स्थापना की थी।
  • गोपाल कृष्ण गोखले ने सन् 1851 में समाज सुधार के लिए भारतीय सेवा समाज की स्थापना की।
  • सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिबा फुले ने की थी। इन्होंने गुलामगिरी नाम के पुस्तक की रचना भी की थी।
  • केरल के बायकोम मंदिर में अछूतों के प्रवेश हेतु एक आंदोलन चलाया गया जिसका नेतृत्व श्री नारायण गुरु ने किया।
  • एन मुदालियर ने जस्टिस पार्टी की स्थापना की ।
  • 1924 में अखिल भारतीय दलित वर्ग की स्थापना बीआर अंबेडकर ने की थी तथा 1927 में बहिष्कृत भारत के नामा के के पत्रिका का प्रकाशन किया
  • 1932 में हरिजन सेवक संघ की स्थापना महात्मा गांधी के द्वारा की गई।
  • 1942 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के द्वारा अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की स्थापना की गई
  • भारत में महिलाओं के विकास के लिए श्रीमती एनी बेसेंट ने मद्रास में 1917 में भारतीय महिला संघ की स्थापना की ।
  • 1920 में रामास्वामी नायकर दक्षिण भारत में आत्मसम्मान आंदोलन चलाया था।

ठीक है साथियों मुझे आशा है कि आपको यह जानकारी पढ़कर आपको अच्छा लगा होगा और आपकी परीक्षा की दृष्टि से यह टॉपिक सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन बहुत ही उपयोगी साबित होगा इसमें से काफी अच्छे सवाल पूछे जाते हैं जोकि आप इसे पढ़कर अच्छे से उत्तर दे पाएंगे यदि आपको सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन इससे संबंधित जानकारी अच्छी लगी है तो आप मुझे कमेंट करके बताएं और अपने दोस्तों को आगे भी फॉरवर्ड करें धन्यवाद।

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May 25, 2020

भारत में राष्ट्रवाद का उदय और विकास/Rise of Indian Nationalism

राष्ट्रवाद-Nationalism राष्ट्रवाद वह भावना है। जो लोगों को एक साथ एकता के सूत्र में बांधती है व स्वराज के प्रति एक ठोस आधार प्रदान करती है। यह लोगों में चेतना प्रदान करने में समाज सुधार को, राष्ट्रवादी नेताओं, व राजनीतिक संस्थाओं, शिक्षा प्रणाली आदि तत्वों का योग रहा है।

कुछ महत्वपूर्ण शब्द

  • राष्ट्रवाद
  • समाज सुधारक
  • शिक्षा प्रणाली
  • समाचार पत्र
  • राष्ट्रीय आंदोलन

भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण और विकास- CAUSES OF THE RISE OF NATIONALISHM

  • भारत में राष्ट्रीय उदय के कारण और विकास में अनेक कारणों का योग रहा है। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इन कारणों को निम्नलिखित भागों में बांटा गया है जो कि निम्न प्रकार से है। :-

आर्थिक नीतियां

  • 1901 ईस्वी में रमेशचंद्र दत्त ने इकोनॉमिक्स हिस्ट्री ऑफ इंडिया नामक पुस्तक लिखी थी। जिसमें 3 चरणों का उल्लेख किया गया था। इन तीनों चरणों में अंग्रेजों ने भारत का आर्थिक शोषण किया।

(A). सीधी लूट (1757-1813) :-

  • प्लासी के युद्ध में विजय के पश्चात बंगाल में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन स्थापित हो गया था।
  • कंपनी अब बंगाल के नवाब को बनाने लगी थी इसके बदले हमसे अत्यधिक रिश्वत लेने लगी तथा व्यापार में भी हिस्सेदारी मांगने लगी।
  • कंपनी कम कीमत में सूती रेशमी वस्त्र व गर्म मसालों को खरीद कर इंग्लैंड व यूरोप के बाजारों में महंगी कीमत पर बेचने लगी। जिससे कंपनी की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई।
  • इसी चरण में इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति हो चुकी थी। मशीनों से उत्पादन अधिक होने लगा इसलिए वहां के पूंजीपतियों ने वहां की सरकार पर दबाव डाला कि उन्हें भी भारत में व्यापार करने की अनुमति दी जाए।

(B). स्वतंत्र व्यापारिक पूंजीवाद (1813-1858) :-

  • 1813 के चार्टर में ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया था कंपनी को केवल चाय व चीन देश के साथ व्यापार पर एकाधिकार रहा।
  • इस चरण में इंग्लैंड की कई कंपनियां भारत आई। यहा से कच्चा माल इंग्लैंड ले जाकर उत्पाद के रूप में परिवर्तित करती और पुन: भारत लाकर बेच दिया जाता था
  • इसी चरण में भारत का हथकरघा उद्योग समाप्त हो गया। क्योंकि भारतीय बुनकरों के पास कच्चा माल ही उपलब्ध नहीं हो पाया।
  • बंगाल के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिंग ने कहा था कि भारतीय बुनकरों की हड्डियां भारत के मैदानों में बिखरी पड़ी हैं।
  • इसी चरण में 1857 की क्रांति हो चुकी थी।

(C). वित्तीय पूंजीवाद (1858-1940) :-

  • 1 नवंबर 1958 को ईस्ट इंडिया का शासन समाप्त कर दिया गया था।
  • भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन को सौंपा गया तथा इसमें यह भी लिखा गया कि क्राउन भारत का शासन इंग्लैंड की संसद के द्वारा चलाएगा।
  • इसी चरण में इंग्लैंड की सरकार ने वहां के पूंजीपतियों को प्रस्ताव दिया। भारत में निवेश करने पर 5% शुद्ध लाभ की गारंटी दी जाएगी अत: कई निवेशकों ने भारत में निवेश किया।
  • सर्वाधिक निवेश रेलवे में किया गया इसके अलावा निम्न क्षेत्रों में निवेश किया गया :-
  • बीमा
  • बैंकिंग
  • मेडिकल
  • जॉन सुलीववान ने कहा था कि हमारी व्यवस्थाए स्पंज की तरह काम करती है जो गंगा नदी से सभी अच्छी वस्तु को सौंप कर टेम्स (लंदन) के किनारे निचोड़ देती है।

धन निष्कासन का सिद्धांत :-

  • सर्वप्रथम दादा भाई नौरोजी ने 1867-68 में लिखे गए अपने लेख”England Debit to India” मैं धन निष्कासन का सिद्धांत दिया था। तथा इसकी विस्तारित व्याख्या अपनी पुस्तक” पॉवरटी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया”में की थी।
  • इसके अलावा दादा भाई नौरोजी ने ऑन द कॉमर्स ऑफ इंडिया तथा The wants and means rule in India नामक पुस्तक लिखी।
  • रमेशचंद्र दत्त ने इस धन के निष्कासन को”भारतीयों के सीने पर एक बहता हुआ घाव बताया”
  • 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इस धन निष्कासन के सिद्धांत को मान्यता दी गई।

2. कृषि पर प्रभाव

  • भारत में राष्ट्रवाद के उदय और विकास से कृषि पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े जो कि निम्न प्रकार से है आइए इन्हें देखते हैं। :-

(A). स्थाई बंदोबस्त :-

  • 1793 में इसे कार्नवालिस के द्वारा निम्न क्षेत्रों में लागू किया गया। :-
  • बंगाल
  • बिहार
  • उड़ीसा
  • वाराणसी
  • उत्तरी कर्नाटक के जिले
  • यह ब्रिटिश भारत के 19% भूभाग पर विस्तृत थी इसमें 1/11 भाग जमीदार को व 10/11 भाग कंपनी को मिलता था।
  • इस व्यवस्था में सूर्यस्त कानून था। अगर जमीदार समय पर राजस्व जमा नहीं करवा पाता था तो उससे जमीदारी छीन ली जाती थी।
  • सबसे ऊंची बोली लगाने वाले जमीदार को जमीदारी शॉप दी जाती थी।
  • राजा राममोहन राय ने इसका समर्थन किया था।

(B). रैयतवाड़ी :-

  • इसमें रैयत अर्थात किसान के साथ समझौता किया जाता था।
  • ब्रिटिश भारत के 57 परसेंट भूभाग पर विस्तृत थी इसमें उपज का 33 से 55 परसेंट वसूल किया जाता था।
  • सर्वप्रथम 1792 में कैप्टन रीड ने इसे तमिलनाडु के बारामहल जिले में लागू किया था।
  • मुंबई में एलफिंसटन व मद्रास में मुनरो के द्वारा इसे लागू किया गया।

(C) महालवाड़ी :-

  • इसमें गांव के समूह के साथ समझौता किया गया।
  • ब्रिटिश भारत के 30 परसेंट भूभाग पर विस्तृत थी व उपज का 66 परसेंट वसूल किया जाता था।
  • इसे आगरा, अवध, पंजाब के क्षेत्रों में लागू किया गया।
  • उत्तरी भारत की कृषि व्यवस्था का जनक Martin बर्ड को माना जाता है ।

3. प्रशासनिक नीतियां :-

  • 1857 की क्रांति में हिंदुओं तथा मुसलमानों ने समान रूप से भाग लिया।इसके बाद अंग्रेजों ने मुसलमानों के प्रति तुष्टीकरण की नीति अपनाई।
  • William hunter ने अपनी पुस्तक”इंडियन मुसलमान मैं लिखा है कि-अगर अंग्रेजों को भारत में लंबे समय तक राज्य करना है तो मुसलमानों को अपने पक्ष में करना होगा।
  • अंग्रेजों ने सैयद अहमद आगा खां को मुसलमान का नेतृत्व सौंपा
  • इन्होंने 1875 में अलीगढ़ स्कूल खुलवाकर दी तथा 1877 में इसे कॉलेज बना दिया गया।
  • आरचीबोल्ड इसी कॉलेज के प्रिंसिपल थे जिन्होंने पृथक निर्वाचन क्षेत्र का प्रारूप तैयार किया था। इसी प्रारूप को लेकर अक्टूबर 1906 को सैयद अहमद आगा खां के नेतृत्व में कुछ मुस्लिम प्रतिनिधि शिमला गए तथा वायसराय मिंटो-ll से मुलाकात की व मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र मांगा।

मार्ले मिंटो अधिनियम 1909

  • 1909 के मार्ले मिंटो अधिनियम में मुसलमानों को पृथक निर्वाचन क्षेत्र प्रदान कर दिया गया।
  • मार्ले इस समय भारत सचिव था तथा इसने वायसराय मिंटो को पत्र भी लिखा था की हम चांगदल के बीज बो रहे हैं इसके परिणाम अत्यंत घातक होंगे।
  • 1876 के शाही राजसी अधिनियम के तहत इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को भारत की महारानी घोषित किया गया।
  • इस कारण से 1877 में वायसराय लिंटन ने दिल्ली के दरबार का आयोजन किया, जिस पर बहुत अधिक पैसा खर्च किया गया था जबकि इस समय भारत में अकाल की स्थिति थी।

वर्नाकुलर प्रेस एक्ट :-

1878 में लिटन ने वर्नाकुलर प्रेस एक्ट लागू किया जिसके तहत देसी भाषाओं के समाचार पत्रों को सेंसरशिप लागू कर दी गई। अर्थात इस समाचार पत्र को प्रकाशित होने से पहले सरकार के पास भेजा जाता था अगर शासन विरोधी कोई बात लिखी होती तो इसका प्रकाशन नहीं हो पाता था।

  • 1883 में वायसराय रिपन के समय मुख्य न्यायाधीश इल्बर्ट ने एक बिल पारित किया इसके अनुसार कोई भी भारतीय न्यायधीश किसी भी यूरोपीय व्यक्ति के मुकदमे की सुनवाई कर सकता था।
  • इसका संपूर्ण यूरोप में विरोध हुआ और इल्बर्ट को अपना बिल वापस लेना पड़ा।

4. जातीय भेदभाव :-

  • जातीय भेदभाव की भावना ने भारतीयों को राष्ट्रीय रूप में एक होने को प्रेरित किया। जातिभेद के आधार पर अंग्रेज भारतीयों से घृणा करते थे और उनके साथ बुरा व्यवहार करते थे
  • अंग्रेज केवल अपने कोई नहीं बल्कि समस्त यूरोपीय जाति को एशियाई जाति से ऊंचा मानते थे तथा वे चाहते थे कि भारतीय भी इस बात को स्वीकार करें अंग्रेज जातीय और सांस्कृतिक रूप से ऊंचे हैं। इस व्यवहार के कारण ही भारतीयों को एक होने को मजबूत किया था।

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भारतीय राष्ट्रवाद

May 24, 2020

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन-Indian national moment

राष्ट्रीय आंदोलन

भारत का राष्ट्रीय आंदोलन 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रारंभ हो गया था स्वतंत्रता किस राष्ट्रीय आंदोलन में लाखों लोगों एवं राष्ट्रवादी नेताओं ने सक्रिय रूप से भाग लेकर शक्तिशाली अंग्रेजी शासन को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया और अतः इन्हें देश छोड़कर जाना पड़ा ।

भारत में राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय आंदोलन के विकास की प्रक्रिया बड़ी जटिल एवं बहुमुखी है

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्भव और विकास में अनेक कारणों का योग रहा है आइए इन कारणों को देखते हैं :-

साइमन कमीशन

  • एक्ट 1919 की धारा 84A. लिखा गया कि इस एक्ट के कारण भारत में उत्तरदायी सरकार की स्थापना कितना प्रयास हुआ
  • इसके लिए 10 वर्षों के पश्चात एक कमीशन भारत भेजा जाएगा।
  • इस समय इंग्लैंड में कंजरवेटिव पार्टी के प्रधानमंत्री बाल्डविन की सरकार थी
  • जिन्हें इस बात का डर था की 1928 इंग्लैंड में होने वाले चुनाव में लेबर पार्टी सत्ता में आ सकती है।
  • इसलिए 1927 में जॉन साइमन की अध्यक्षता में 7 सदस्यों वाली साइमन कमीशन का गठन किया गया।
  • भारत के वायसराय इरविन की सलाह पर इसमें किसी भारतीयों को शामिल नहीं किया गया इसलिए इसे श्वेत कमीशन भी कहा गया।
  • इसके सातों सदस्य अंग्रेज थे
  • क्लीमेंट एटली इसी का एक सदस्य था भारत की स्वतंत्रता के समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री के पद पर 3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन भारत पहुंचा।
  • साइमन कमीशन दो बार भारत आया :-
  • फरवरी-March 1928
  • October 1928-अप्रैल 1929
  • जब साइमन कमीशन दूसरी बार भारत आया तब लाहौर में हुए विरोध प्रदर्शन के समय लाला लाजपत राय लाठीचार्ज में 30 अक्टूबर 1928 को घायल हो गए।
  • 17 नवंबर 1928 को लालजी की मृत्यु हो गई।
  • लाला लाजपत राय ने कहा था कि” मेरे शरीर पर पड़ी प्रत्येक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।
  • साइमन कमीशन जब प्रथम बार भारत आया था उस समय इसके विरोध के कारण भारत सचिव वीकैनहाइड ने भारतीयों को स्वय का संविधान बनाने की चुनौती दी।
  • मोतीलाल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई जिसने भारत के लिए प्रथम संविधान लिखा।
  • 10 अगस्त 1928 को नहेरू रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया इसमें मांगे थी!

प्रमुख मांगे

  • भारत को डोमिनियन स्टेट (औपनिवेशिक राज्य) का दर्जा इसका अर्थ है
  • रक्षा विभाग संचार व विदेश विभाग इंग्लैंड के पास रहे बाकी मामले में भारत को स्वतंत्र कर दिया जाए !
  • केंद्र में द्विसदनात्मक प्रणाली लागू की जाए।
  • भाषा के आधार पर प्रांतों को गठन हो।
  • शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच।
  • मूल अधिकार 19, व्यस्क मताधिकार,
  • सिंध को मुंबई से अलग प्रांत बनाया जाए।

जिन्ना की चार मांगे

  • पृथक निर्वाचन को समाप्त करके संयुक्त निर्वाचन लागू किया जाए।
  • केंद्र में मुसलमानों को 1/3 आरक्षण दिया जाए।
  • जिन स्थानों पर मुस्लिम आबादी अधिक है वहां उन्हें आरक्षण दिया जाए।
  • सिंध बलूचिस्तान मुस्लिम प्रांत बनाया जाए परंतु इसका हिंदू महासभा के द्वारा विरोध किया गया।

इस कारण से मोहम्मद सफी के नेतृत्व में मुस्लिम लीग के कुछ कार्यकर्ता साइमन कमीशन के सदस्य बन गए अन्यथा जब पहली बार साइमन कमीशन आया तब मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया था।

उस समय साइमन कमीशन मद्रास की जस्टिस पार्टी, पंजाब की यूनियनिस्ट पार्टी, बंगाल की कृषक प्रजा पार्टी, अंबेडकर की डिस्प्लेस क्लास एसोसिएशन साइमन कमीशन का समर्थन किया।

नहरू

  • दिसंबर 1928 को कांग्रेस का अधिवेशन कोलकाता में मोतीलाल तेजावत की अध्यक्षता में हुआ।
  • नेहरू रिपोर्ट को लागू करने के लिए सरकार को 1 वर्ष का समय दिया गया।
  • दिसंबर 1929 में कांग्रेस का अधिवेशन लाहौर में हुआ। और इसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
  • नेहरू जी को कांग्रेस का प्रथम समाजवादी अध्यक्ष मानते हैं।
  • नेहरु जी ने पूर्ण स्वराज की मांग की।
  • सरकार को पुनः एक माह का समय दिया गया तथा नेहरू रिपोर्ट लागू न करने पर 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने आधुनिक भारत के इतिहास को प्रथम पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
  • गांधी जी ने यंग इंडिया नामक समाचार पत्र के माध्यम से वायसराय इरविन के समक्ष 11 मांगे रखी जिन पर इरविन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
  • गांधीजी ने कहा कि” मैंने रोटी मांगी थी और मुझे पत्थर मिले।

सविनय अवज्ञा आंदोलन

  • गांधी जी ने नमक के मुद्दे को लेकर यह आंदोलन प्रारंभ किया।
  • नमक सरकारी राशन की दुकानों पर मिलता था व इसकी कीमत बहुत ज्यादा होती थी।
  • 12 मार्च 1930 को गांधी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से यात्रा प्रारंभ करके 24 दिन 358 किलोमीटर (241 मील) की यात्रा के बाद 5 अप्रैल 1930 को गुजरात की साबरमती जिले में स्थित दांडी नामक स्थान पर पहुंचे।
  • 6 अप्रैल 1930 को नमक बनवाकर कानून का उल्लंघन किया और इसी के साथ भारत में आंदोलन प्रारंभ हो गया।
  • इस अवसर पर गांधी जी ने कहा था कि” राजद्रोह करना मेरा धर्म बन चुका है।

सुभाष चंद्र बोस

  • सुभाष चंद्र बोस ने कहा कि इस यात्रा की तुलना नेपोलियन की एल्बा दीप से लेकर पेरिस की यात्रा तक की है।
  • बलूचिस्तान के लोगों ने गांधी को मलंग बाबा की उपाधि प्रदान की।
  • बलूचिस्तान में अब्दुल गफ्फार खा या सीमांत गांधी ने आंदोलन का नेतृत्व किया।
  • इनकी पार्टी का नाम खुदाई खिदमतगार या लाल कुर्ती दल था।
  • नागालैंड की 13 वर्षीय बालिका Godin न्यू रानी के द्वारा आंदोलन चलाया, इसे नेहरू ने रानी की उपाधि दी थी।
  • इंदिरा गांधी ने बालकों को वानर सेना वह बालिकाओं को मंजरी सेना का गठन किया।
  • असम के छात्रों द्वारा कनिघम पत्र का विरोध किया गया।
  • पेशावर में चंद्र सिंह गढ़वाल के नेतृत्व में गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों ने जुलूस पर गोली चलाने से मना कर दिया इसलिए पेशावर में हवाई हमले किए गए।
  • 21 मई 1930 को गांधी के पुत्र मानिक लाल वह सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में जुलूस के द्वारा नमक कारखानों को लूटने का प्रयास किया गया। इनका पुलिस ने निर्ममता से दमन किया।
  • इसका उल्लेख है अमेरिका के समाचार पत्र न्यू फ्रीमैन के संपादक वेल मिलर ने किया।
  • गांधीजी को गिरफ्तार करके यरवदा जेल (पुणे) मे रखा गया। तब इसका नेतृत्व अब्बास तैयब जी के द्वारा किया गया।
  • आंदोलन के दौरान साइमन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 12 नवंबर 1930 से 13 नवंबर 1931 को प्रथम गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • इसमें कांग्रेस ने भाग नहीं लिया अतः इसका कोई महत्व नहीं रहा।

इरविन

ब्रिटिश सरकार ने वायसराय इरविन पर कांग्रेस को शामिल करने के लिए दबाव डाला इरविन ने गांधी को जेल से रिहा किया

वह दिल्ली बुलाकर 5 मार्च 1931 को समझौता किया इसे गांधी इरविन समझौता कहते हैं।

  • इसके बाद गांधी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए राजी हो गए।
  • गांधी ने इरविन से भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की फांसी की सजा को काम करने की कोई अपील नहीं की।
  • 23 मार्च 1931 को तीनों को लाहौर जेल में फांसी दे दी गई।
  • 26 से 29 मार्च 1931 को कांग्रेस का अधिवेशन कराची में सरदार पटेल की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • कांग्रेस ने मूल अधिकारों को अपने संविधान में शामिल किया गांधी इरविन समझौते की पुष्टि की गई।
  • कांग्रेस ने मदन मोहन मालवीय वैसे रोशनी नाइटी को भी कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में दूसरे गोलमेज सम्मेलन में प्रतिनिधि के रूप में मनोनीत किया था
  • परंतु इरविन ने गांधी को कांग्रेस का प्रतिनिधि माना आता है ये वायसराय के विशेष रूप प्रतिनिधि के रूप में लंदन गए।
  • मालवीय हिंदू महासभा व सरोजनी नायडू में भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया।
  • गांधी का अत्यधिक प्रतिरोध हुआ था इस तरह गांधी ने कहा गांधी मर सकता है परंतु गांधीवादी नहीं।

दूसरा गोलमेज सम्मेलन -7 सितंबर-1 December 1931

  • इस समय भारत का वायसराय वेलिंग्टन था उसने गांधी को ईमानदार किंतु बोल्शेविक इसलिए खतरनाक कहा।
  • गांधी राजपूताना जहाज से लंदन में इनके साथ उनका सचिव महादेव देसाई भी थे।
  • अंबेडकर कोस्टारोस जहाज से से लंदन गए थे।
  • इस समय भारत का सचिव से सैमुअल होर था जिसने गांधी का परिचय इंग्लैंड के शासक जॉर्ज पंचम से करवाया।
  • इस समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री रेमज मैकडोनाल्ड तीनो गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की गई ।
  • व तीनों गोलमेज सम्मेलन लंदन के जेम्स पैलेस में हुई इस समय चर्चिल ने कहा कि”देशद्रोही फकीर कहा था व ब्रिटिश पत्रकार फ्रैंक मोरिस ने गांधी को अर्धनग्न फकीर कहा।

अंबेडकर

  • अंबेडकर ने दलितों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की मांग प्रस्तुत की इसे मानने से गांधी ने इंकार कर दिया और दूसरा गोल में सम्मेलन असफल रहा।
  • प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने गांधी के लिए कहा आने वाली पीढ़ी शायद इस बात का यकीन करें कि धरती पर दुबला पतला हाड मास का व्यक्ति पैदा हुआ।
  • भारत लौटते समय गांधी ने इटली के तानाशाह मुसोलिनी से मुलाकात की।
  • भारत लौटकर गांधी ने दूसरा सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाने की घोषणा की तो गांधी को पुन: गिरफ्तार करके यरवदा जेल में डाल दिया गया।
  • 16 अगस्त 1932 को रेमज़ मैकडोनाल्ड ने सांप्रदायिक पंचाट की घोषणा की इसमें दलितों को भी अलग निर्वाचन क्षेत्र प्रदान किया गया।
  • इसके विरोध में गांधी आमरण अनशन पर बैठ गएइस कारण से 26 सितंबर 1932 को गांधी और अंबेडकर के बीच एक समझौता हुआ
  • जिसे पूना पैक्ट कहते हैं। इसके बाद अंबेडकर संयुक्त निर्वाचन प्रणाली पर सहमत हो गए।
  • केंद्रीय विधानमंडल में दलितों को 18% आरक्षण दिया गया।
  • प्रांतों में उनकी सीटों को बढ़ाकर 71 से 148 कर दिया गया।
  • गांधी ने वर्धा में हरिजन सेवक संघ की स्थापना करवाई व घनश्याम दास बिड़ला को इसका अध्यक्ष बनाया गया।

तीसरा गोलमेज सम्मेलन-17 नवंबर 1932 से 24 दिसंबर 1932

  • तीसरा गोलमेज सम्मेलन 17 नवंबर 1932 से 24 दिसंबर 1932 को लंदन में आयोजित किया गया इसमें कांग्रेस ने भाग नहीं लिया।
  • 1935 के भारत शासन अधिनियम के तहत 1937 में भारत के प्रांतों में चुनाव हुए इसलिए कांग्रेस के दोनों अधिवेशन 1936 में ही लखनऊ व फैजपुर में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • फैजपुर अधिवेशन कांग्रेस का प्रथम ग्रामीण अधिवेशन था।

कांग्रेस के पांचप्रांत में स्पष्टबहुमत

कांग्रेस के 5 प्रांतों में स्पष्ट बहुमत मिला जो निम्न

मद्रास -राजगोपालचारी

बिहार – श्रीकृष्ण सिन्हा

उड़ीसा -हरेकृष्ण महताब

मध्य प्रांत – एन. बी. खरे

संयुक्त प्रांत – गोविंद बल्लभ पंत

मुंबई में स्पष्ट बहुमत से केवल 2 सीटें कम मिली या अभी कांग्रेस के जे.बी खैर प्रधानमंत्री बने।

असम व सिंध मैं कांग्रेस ने सांझा सरकारे बनाई

असम में बारदोलाई

सिंध में गुलाम हुसैन हिदायतुल्लाह प्रधानमंत्री बने।

बलूचिस्तान में अब्दुल गफ्फार प्रधानमंत्री बने।

मुस्लिम लीग केवल बंगाल व पंजाब में सरकार में शामिल हो सकी।

बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी के फजल उल हक के व पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी के सिकंदर हयात खा का प्रधानमंत्री बने।

जिस समय संयुक्त प्रांत में सरकार का गठन किया जा रहा था

उस समय जिन्ना ने नेहरू से मुस्लिम लीग को सरकार में शामिल करने का आग्रह किया।

नेहरू ने कहा कि मुस्लिम लीग से त्यागपत्र देकर कांग्रेस में शामिल पर ही सरकार में शामिल किया जा सकता है

जिन्ना व नेहरू

इसके बाद जिन्ना की राजनीति विभाजन की ओर मुड़ गई।

1938 में कांग्रेस का अधिवेशन हरिपुरा (गुजरात) में आयोजित हुआ। इसके अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस चुने गए।

कांग्रेस ने देसी रियासतों में हस्तक्षेप का निर्णय लिया।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के अध्यक्षता में आर्थिक योजना समिति बनाई गई।

1939 में कांग्रेस का अधिवेशन त्रिपुरी(मध्य प्रदेश) मैं आयोजित किया गया इसके अध्यक्ष पद के लिए सुभाष चंद्र बोस व मौलाना आजाद दो उम्मीदवार थे

परंतु मौलाना आजाद ने अपना नामांकन वापस ले लिया तब गांधी ने वर्धा से पट्टाभिसीता रमैया को अपना उम्मीदवार बना कर भेजा।

परंतु सुभाष चंद्र बोस को अध्यक्ष चुना गया और गांधी ने इसे व्यक्तिगत हार मानी। परंतु बाद में सुभाष चंद्र बोस व गांधी में मतभेद हो गए।

सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया।

कोलकाता में 3 मई 1944 को फॉरवर्ड ब्लॉक नामक पार्टी की स्थापना की गई।

सुभाष चंद्र बोस के इस्तीफा देने पर डॉ राजेंद्र प्रसाद कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए।

द्वितीय विश्व युद्ध

  • 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड के उंजिग बंदरगाह पर आक्रमण किया इसी के साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत हो गई।
  • 3 सितंबर को इसमें इंग्लैंड शामिल हुआ।
  • 5 सितंबर 1939 को इंग्लैंड ने भारत को युद्धरत राष्ट्र घोषित कर दिया गया।
  • इसलिए जिन प्रांतों में कांग्रेस की सरकार थी उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
  • इस कारण से 22 दिसंबर 1939 को मुस्लिम लीग व अंबेडकर की डिसप्लेस class association मुक्ति दिवस मनाया।

युद्ध

  • द्वितीय विश्व युद्ध के समय इंग्लैंड पर आए संकट को सुभाष चंद्र बोस ने भारत के लिए एक सुनहरा अवसर कहा।
  • परंतु गांधी व नेहरू ने कहा की हमें इंग्लैंड की बर्बादी पर भारत की स्वतंत्रता नहीं चाहिए।
  • मार्च 1940 में कांग्रेस का अधिवेशन रामगढ़ (झारखंड) मैं आयोजित हुआ इसकी अध्यक्षता मौलाना आजाद ने की।
  • कांग्रेस ने वायसराय लिनलिथगो को प्रस्ताव दिया अगर युद्ध की समाप्ति पर भारत में एक अंतरिम सरकार की स्थापना का वादा किया जाए तो इस समय कांग्रेस सरकार समर्थन दे सकती है।
  • लिनलिथगो ने 8 अगस्त 1940 को अगस्त प्रस्ताव कांग्रेस को प्रस्ताव दिया।
  • युद्ध समाप्ति पर भारत को डोमिनियन स्टेट का दर्जा दे दिया जाएगा संविधान सभा का गठन कर दिया जाएगा
  • परंतु कांग्रेस ने इसे मानने से इनकार कर दिया पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे दरवाजे में जंग लगी किल के समान माना।
  • यह अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट के दबाव में आकर इंग्लैंड के प्रधानमंत्री चर्चिल ने अपने युद्ध मंत्रिमंडल के सदस्य स्टेफोर्ड क्रिप्स को 22 मार्च 1942 भारत भेजा था।
  • क्रिप्स ने आते ही अगस्त प्रस्ताव में उल्लेखित संविधान सभा की मांग को मान लिया था
  • ।परंतु क्रिप्स ने देसी रियासतों को यह स्वतंत्रता दी कि वे अपना संविधान स्वयं बना सकते हैं।
  • इसके अलावा किसी भी बात पर निर्णय करने का अंतिम अधिकार वायसराय को दिया गया।
  • कांग्रेस ने इसका विरोध किया गांधी ने इसे पोस्ट डैड चेक कहा इसी ने इसमें यह जोड़ दिया था कि ऐसे बैंक का दिवालिया हो चुका है।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि मेरा मित्र क्रिप्स शैतान का वकील बनकर आया है।

भारत छोड़ो आंदोलन

  • 14 July 1942 वर्धा (महाराष्ट्र) मैं कांग्रेस की बैठक हुई व आंदोलन चलाने के पश्चात प्रस्ताव को पारित किया गया।
  • इसका प्रस्ताव पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था।
  • 8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वाला टैंक (अगस्त क्रांति मैदान) मे एक सभा को संबोधित करते हुए गांधी ने नारा दिया करो या मरो।
  • इसके साथ ही भारत में आंदोलन की शुरुआत हुई।
  • 9 अगस्त की मध्यरात्रि को सरकार ने ऑपरेशन जीरो चलाया वह सभी कांग्रेस के नेताओं को नजरबंद किया गया।
  • गांधी को पुणे के आगा खां पैलेस में रखा गया था।
  • कस्तूरबा गांधी महादेव देसाई सरोजिनी नायडू को भी यहीं पर रखा गया तथा कस्तूरबा गांधी महादेव देसाई का यहां रहने के दौरान निधन भी हो गया।
  • समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण झारखंड की हजारीबाग जेल में रखा गया था
  • इसी जेल की दीवार को तोड़कर जयप्रकाश नारायण फरार हुए इस आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया।
  • के व्यक्तियों के द्वारा स्वतंत्र सरकारें स्थापित की गई।

आंदोलन

  • सर्वप्रथम बलिया (उत्तर प्रदेश) में चीतू पांडे के द्वारा सरकार गठित की गई तथा 1945 तक सातारा (महाराष्ट्र) y.v. चव्हान व नाना पाटील ने सरकार गठित की।
  • बंगाल के मिदनापुर में सतीश सावंत के द्वारा एक जातीय सरकार गठित की गई।
  • यहीं पर एक जुलूस के दौरान गोली लगने के बावजूद एक 73 वर्षीय विधवा मातंगिनी हजारा ने तिरंगे झंडे को नीचे नहीं गिरने दिया।
  • वेवेल को भारत का वायसराय बनाया गया उसने 24 जून से 14 जुलाई 1945 को शिमला में कांग्रेस व मुस्लिम लीग की बैठक बुलाई।
  • कांग्रेस की ओर से मौलाना आजाद व मुस्लिम लीग की ओर से जिन्ना ने नेतृत्व किया।
  • कांग्रेस ने जिन्ना कि इस बात को मान लिया जब भी अंतरिम सरकार बनाई जाएगी दोनों पार्टियों के समान मंत्री होंगे।
  • परंतु जिन्ना ने तुरंत मांग कि मुस्लिम मंत्री केवल मुस्लिम लीग के हो सकते हैं इसे मानने से कांग्रेस ने इंकार कर दिया अतः शिमला बैठक असफल हुई।
  • मौलाना आजाद ने इसे भारत का जल विभाजक कहा।

कैबिनेट मिशन-1946

  • 1946 मैं कैबिनेट मिशन भारत आया था इसमें कुल 3 सदस्य थे जो कि निम्न है-
  • पेथिक लॉरेंस – भारत सचिव
  • एबी एलेग्जेंडर- नौसेना मंत्री
  • स्टेफोर्ड क्रिप्स – व्यापार मंत्री
  • मार्च 1946 को कैबिनेट मिशन कराची पहुंचा उसने मुस्लिम लीग की पाकिस्तान मांग को अस्वीकार कर दिया फिर भी मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन का विरोध नहीं किया।
  • गांधी ने इसे तत्कालीन परिस्थितियों का स्वर्णम योजना कहा
  • 22 जुलाई 1946 को वेबेल ने एक के अंतरिम सरकार बनाने की घोषणा की जिसमें छह कांग्रेस के 5 मुस्लिम लीग के 3 अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शामिल किए जाने थे।
  • मुस्लिम लीग ने इसमें शामिल ना होने का निर्णय लिया तथा वेवेल ने 12 अगस्त को बिना मुस्लिम लीग कांग्रेस को सरकार बनाने का निमंत्रण भेज दिया।
  • तथा मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को सीधी कार्रवाई दिवस मनाने की घोषणा की।
  • 16 अगस्त को मौलाना आजाद ने भारतीय इतिहास का एक काला दिन कहा।
  • 20 फरवरी 1947 को इंग्लैंड के प्रधानमंत्री एट ली ने यह घोषणा की कि 30 जून 1948 तक भारत को स्वतंत्र कर दिया जाएगा।
  • 22 मार्च 1947 को 34 वे वायसराय के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन भारत भेजा गया।
  • माउंटबेटन ने सभी दलों के नेताओं से बातचीत की तथा सबसे पहले सरदार पटेल विभाजन के लिए राजी हुए।

आजादी

  • 3 जून 1947 को माउंटबेटन ने एक प्लान प्रस्तुत किया।
  • इसमें भारत के विभाजन की योजना इसे 13 से लेकर 16 जून 1947 को गोविंद बल्लभ पंत ने कांग्रेस कार्यसमिति अब्दुल गफ्फार खान कहा कांग्रेस ने हमारे आंदोलन को भेडियो के आगे फेंक दिया ।
  • मौलानाआजाद ने कहा इतिहास हमें इस बात के लिए कभी माफ नहीं करेगा।
  • इस समय नेहरू ने कहा था हमें कटा छटा भारत नहीं चाहिए।
  • डिकी बरड प्लॉट तहत ही 14 अगस्त को पाकिस्तान का निर्माण किया गया।
  • 15 अगस्त को मध्य रात्रि को भारत को स्वतंत्र किया गया।
  • नेहरु के द्वारा देश की जनता को दिया गया संबोधन नियति के साथ वादा कहलाता है।

महत्पूर्ण सूचना

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May 22, 2020

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन क्या है जाने ? PART-1

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

आइए आज इस टॉपिक पर चर्चा करेंगे महात्मा गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में क्या क्या योगदान रहा और गांधीजी ने कौन कौन से आंदोलन किए व व किन किन आंदोलनों में भाग लिया और इस आंदोलन से क्या क्या प्रभाव पड़ा इसको आज अच्छे से जानेंगे ! सबसे पहले महात्मा गांधी जी की जीवनी के बारे में जानेंगे !

महात्मा गांधी की जीवनी ( Mahatma Gandhi Biography )

भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन

आइए हम आपको महात्मा गांधी के बारे में कुछ जानकारियां सांझा करते हैं जोकि निम्न प्रकार से हैं !

  • नाम – मोहनदास करमचंद गांधी
  • पिता का नाम – करमचंद गांधी
  • माता का नाम – पुतलीबाई
  • जन्म – 2 अक्टूबर, 1869
  • जन्म स्थान – गुजरात के पोरबंदर में
  • राष्ट्रीयता – भारतीय
  • शिक्षा – बैरिस्टर
  • पत्नी – कस्तूरबाई मखजी कपाड़िया (कस्तूरबा गांधी)
  • संतान – चार पुत्र – हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
  • जातीयता – गुजराती
  • राजनीतिक पार्टी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • मृत्यु – 30 जनवरी, 1948

भारतीयराष्ट्रीयआंदोलन में महात्मा गांधी का योगदान या भूमिका

आइए अब राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी की भूमिका और योगदान के बारे में जानेंगे विस्तार से जोकि निम्न प्रकार से हैं :-

  • 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से अरेविया नामक जहाज से मुंबई के अपोलो बंदरगाह पर आए थे ! इस समय प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था (1914-1918)
  • महात्मा गांधी ने भारत के युवाओं को अंग्रेजी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया था ! इसलिए ब्रिटिश सरकार ने गांधी जी को केसर -ए -हिंद की उपाधि प्रदान की !
  • भारतीयों ने गांधीजी का विरोध किया गांधी जी को अंग्रेजों का सार्जेंट (सेना में भर्ती करने वाला) कहा !
  • 1915 में ही गांधी जी ने जीवन लाल देसाई के द्वारा गुजरात के अहमदाबाद जिले में साबरमती नदी के तट पर कोचराव नामक बंगले में एक आश्रम स्थापित किया इसे सत्याग्रह आश्रम नाम दिया गया था !
  • 1917 में गुजरात के व्यवसायी अंबालाल साराभाई ने इस आश्रम की आसपास की भूमि खरीदकर गांधी को भेंट दी तथा इसे साबरमती आश्रम नाम दिया गया !
  • 1930 में गांधी जी ने जब सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया था तब इसे अंतिम रूप से छोड़ दिया था !
  • चार्ल्स कोरियन को इस आश्रम का वास्तुकार माना जाता है !
  • 1916 में गांधी जी ने मदन मोहन मालवीय के द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह में भाग लिया था !
  • 1916 में कांग्रेस का अधिवेशन लखनऊ में अंबिका चरण मजमुदार की अध्यक्षता में आयोजित हुआ !
  • नरम दल और गरम दल तिलक व एनीबेसेंट के प्रयासों से एक हो गए !
  • कांग्रेस के सदस्य जिन्ना के प्रयासों से कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की पृथक निर्वाचन प्रणाली की मांग को मान लिया ! इसी को रमेशचंद्र मजमुदार ने कांग्रेस की प्रथम भूल कहां है !
  • इसी अधिवेशन में राजकुमार शुक्ल ने गांधी से मुलाकात की वह बिहार के चंपारण जिले के प्रचलित नील की तिनकठिया खेती के बारे में बताया फिर महात्मा गांधी 1917 में चंपारण गए !

गांधीजी के प्रमुख आंदोलन

गांधी जी के प्रमुख आंदोलन निम्न प्रकार से हैं :-

  • चंपारण आंदोलन
  • खेड़ा आंदोलन
  • अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन
  • रोलेट सत्याग्रह आंदोलन
  • खिलाफत आंदोलन
  • असहयोग आंदोलन
  • साइमन कमीशन
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन
  • कैबिनेट मिशन

भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन में गांधी जी के यह आंदोलन बहुत ही महत्वपूर्ण थे गांधीजी का इन आंदोलनों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है अब हम इन आंदोलनों के बारे में विस्तार से जानेंगे कि गांधी जी की क्या क्या भूमिका रही है आइए देखते हैं :-

चंपारण किसान आंदोलन

  • चंपारण में अंग्रेज व्यापारी किसानों के खेत को 20 भागों में बांटते थे। जिनमें से तीन भागों में नील की खेती करवाई जाती थी बाकी पूरी भूमि को परती छोड़ दिया जाता है ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे । इसके लिए अंग्रेज व्यापारी किसानों को अग्रिम भुगतान भी करते थे परंतु इस समय जर्मनी में रासायनिक रंग बना लिए थे ! यूरोप में भारतीय नील की मांग में कमी आ गई इसलिए दिए गए अग्रिम भुगतान को ब्याज सहित वसूल किया जा रहा है !
  • लगातार नील की खेती करने से भूमि बंजर हो चुकी थी अतः किसान इस भुगतान को देने में असमर्थ था।
  • चंपारण के जिला कलेक्टर (W.B Hitchcoke) ने गांधी के चंपारण प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • गांधीजी के जाने पर उन्हें मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया था ! और उसे चंपारण की जेल में रखा गया था।
  • गांधी जी ने सत्याग्रह का प्रथम प्रयोग इसी आंदोलन में किया था !
  • सत्याग्रह का अर्थ : – सत्याग्रह का अर्थ अहिंसात्मक तरीके से सरकार के समक्ष अपनी मांग प्रस्तुत करना होता है इसे सत्याग्रह नाम भूलाभाई देसाई के द्वारा दिया गया ।
  • इस आंदोलन में गांधी को निम्न लोगों के द्वारा सहयोग दिया गया जो कि निम्न है:-
  • अनुराग नारायण सिन्हा
  • ब्रजकिशोर शर्मा
  • जे पी कृपलानी
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू
  • अंग्रेज व्यापारियों ने गलत तरीके से वसूली की गई 25% राशि किसानों को वापस लौटा दी थी !
  • इस आंदोलन की सफलता के बाद रविंद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी की उपाधि प्रदान की।
  • जूनीपत ब्राउन ने इस आंदोलन का उल्लेख अपनी पुस्तक Arising the power of Gandhi मैं की है !

खेड़ा किसान आंदोलन

  • खेड़ा (गुजरात) की सूरत जिले की तहसील थी ।
  • 1917-18 के वर्ष में यहां अकाल पड़ा था ! इसके बावजूद लगान में वृद्धि की गई जबकि अकाल संहिता के तहत 3/4 फसल नष्ट होने पर पूरा लगान माफ कर दिया जाता था ।
  • इस आंदोलन में वल्लभ भाई पटेल ने गांधी को सहयोग दिया।
  • 23 मार्च 1918 को सरकार ने एक आदेश लागू किया की किसानों से समर्थ लगान वसूल किया जाएगा

अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के कारण भारत में महंगाई बढ़ चुकी थी अतः मजदूर वेतन में 50% वृद्धि की मांग कर रहे थे जबकि मिल मालिक 20% वेतन वृद्धि को राजी थे।
  • जब मजदूरों का प्लेग बोनस बंद किया गया तब मजदूरों ने अनसूइया बेग पटेल से मुलाकात की जिन्होंने गांधी को बुलाया।
  • 15 March 1918 को गांधी अनशन पर बैठ गए तब मिल मालिकों ने समझौता करके 35% वेतन वृद्धि की।

रोलेट सत्याग्रह आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के समय भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों में तेजी आई
  • रासबिहारी बोस के पूरे भारत में सशस्त्र क्रांति की योजना भी बनाई गई। हालांकि असफल होने पर रासबिहारी बोस जापान चले गए।
  • 1917 में ब्रिटिश सरकार ने इंग्लैंड के किगजू न्यायालय के न्यायाधीश सिडनी रोलैंड की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जिसने मार्च 1919 को रोलेट एक्ट लागू किया।
  • इसमें प्रावधान था कि अगर किसी व्यक्ति पर सरकार विरोधी होने का संदेह हो तो बिना न्यायालय में पेश किए उसे अधिकतम 2 वर्ष तक हिरासत में रख सकते थे। इसे काला कानून कहा गया।
  • संभवत मोतीलाल नेहरू ने इसे बिना अपील बिना दलील और बिना वकील का कानून कहां ।
  • गांधीजी ने इसके विरोध के लिए रौलट सत्याग्रह समिति बनाई इसमें एनीबेसेंट सदस्य थी परंतु बाद में गांधी की विचारधारा से असहमत होकर इस समिति से अलग हुई और गांधी जी को छोटा राजनीतिक बच्चा कहां।
  • 9 अप्रैल 1919 को पंजाब के दो क्रांतिकारी डॉ सत्यपाल व सैफुद्दीन किचलू पंजाब की सीमा पर गिरफ्तार करके अमृतसर की जेल में रखा।
  • 10 अप्रैल 1919 को पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइक ओ डायर ने पंजाब में धारा 144 लगा दी व पंजाब का प्रशासन सेना को सौंपा दिया।
  • 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी का त्यौहार गांव से लोग अमृतसर आए हुए
  • इन दोनों की गिरफ्तारी के विरोध में एक ही स्थान पर इकट्ठा हुए जिसे जलियावालाबाग कहा जाता है
  • यहां पहुंचकर राबर्ट इनफील्ड हेनरी डायर नामक सैन्य अधिकारी के आदेश से गोलीबारी की गई।
  • इस हत्याकांड के विरोध में टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि लौटा दी
  • वायसराय चेम्सफोर्ड की कार्यकारिणी परिषद के भारतीय सदस्य शंकरन नायर ने इस्तीफा दे दिया था।
  • सरकार ने इस हत्याकांड को जांच के लिए 8 सदस्यों वाली हंटर कमेटी बनाई इसमें तीन भारतीय थे इनके निम्न नाम है:-
  • चिमनलाल शीत सितउवाड
  • शायबजादा सुल्तान अहमद
  • जगत नारायण
  • हंटर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 379 व्यक्ति इस हत्याकांड में मारे गए।
  • कांग्रेस ने मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में तहकीकात कमेटी बनाई।
  • इस कमेटी के अन्य सदस्य थे :-
  • मोतीलाल नेहरू
  • चितरंजन दास
  • महात्मा गांधी
  • गांधीजी ने हंटर कमेटी की रिपोर्ट को पन्ने दर पन्ने लीपापोती कहा।
  • इन रिपोर्ट के अनुसार 1000 से भी ज्यादा व्यक्ति हत्याकांड में मारे गए।

खिलाफत आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के विजेता राष्ट्र इंग्लैंड ने पराजित राष्ट्र तुर्की के विवाह जन का निर्णय लिया।
  • तुर्की के सुल्तान को पूरे विश्व के मुसलमान खलीफा के समान मानते थे।
  • इस समय सुल्तान मोहम्मद चतुर्थ थे।
  • मुसलमानों ने इस निर्णय के कारण आक्रोश उत्पन्न हो गया तथा गांधी ने इसे पिछले 100 सालों में आया हुआ हिंदू व मुसलमानों की एकता का स्वर्णिम अवसर कहा था।
  • भारत में यह आंदोलन मोहम्मद अली व शौकत अली दो भाइयों के द्वारा चलाया गया।
  • 17 अक्टूबर 1919 को भारत में खिलाफत दिवस मनाया गया।
  • 24 नवंबर 1919 को दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी की बैठक आयोजित की गई।
  • डॉक्टर अंसारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अंग्रेजी सरकार से बातचीत के लिए लंदन भेजा गया।
  • मार्च 1920 में खिलाफत कमेटी की बैठक इलाहाबाद में आयोजित की गई। इसमें असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया।
  • 1 अगस्त 1920 इसकी तिथि निश्चित की गई परंतु इसी दिन तिलक की मृत्यु हो गई अत: इसे कुछ दिनों के लिए स्थगित किया गया।
  • परंतु 20 अगस्त 1920 को इंग्लैंड व तुर्की के मध्य सेवरस (फ्रांस) की संधि हो गई
  • तुर्की में कमाल पाशा ने सरकार गठित की और इसने सुल्तान के पद को ही समाप्त कर दिया इस कारण से भारत में आंदोलन समाप्त हो गया।
  • कमाल पाशा को अतातुर्क अर्थात तुर्कों का पिता कहते हैं।
  • जिन्ना ने इस आंदोलन में भाग नहीं लिया।

असहयोग आंदोलन

  • गांधी के कहने पर कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय लिया।
  • सितंबर 1920 में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन कोलकाता में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • इसमें आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया
  • इसके लेखक महात्मा गांधी थे।
  • स्वयं गांधी ने इसका प्रस्ताव रखा था।
  • चितरंजन दास ने इसका विरोध किया तथा मोतीलाल नेहरु के द्वारा गांधी का समर्थन किया गया।
  • इस समय एनी बेसेंट, मालवीय, मोहम्मद अली जिन्ना, शंकर नायर इत्यादि ने इस्तीफा दे दिया।
  • दिसंबर 1920 में कांग्रेस वार्षिक अधिवेशन नागपुर में राघवाचार्य की अध्यक्षता में आयोजित हुआ इसमें पारित प्रस्ताव की पुष्टि की गई।चितरंजन दास ने इसका प्रस्ताव रखा।
  • इसके प्रस्ताव में लिखा है कि ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर सुशासन की बजाए इसे बाहर जाकर स्वराज्य की प्राप्ति द्वारा लक्ष्य हासिल करना सही है।
  • गांधी ने केसर हिंद की उपाधि तथा ज़ुलु व बोहर पदक सरकार को लौटा दिए थे।
  • सुभाष चंद्र बोस ने आईएएस के पद से त्यागपत्र दिया व कोलकाता के नेशनल कॉलेज के प्रिंसिपल बने।
  • महिलाओं के द्वारा शराब की दुकानों में धरना प्रदर्शन किया गया यह एकमात्र ऐसा कार्य था जो इसके कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था।
  • वक्ताओं की दृष्टि से यह कांग्रेस का सबसे बड़ा अधिवेशन था।
  • December 1920 में नागपुर अधिवेशन में ही कांग्रेस के दैनिक कार्यों के संचालन के लिए 15 सदस्यों वाली कार्य समिति का गठन किया गया इसको बनाने का पहला सुझाव तिलक में 1916 में लखनऊ अधिवेशन में दिया था।
  • इसे सांप्रदायिक सोपान का आंदोलन माना गया।
  • स्वामी श्रद्धानंद को मुसलमानों ने दिल्ली की जामा मस्जिद भाषण देने के लिए आमंत्रित किया।
  • सैफुद्दीन किचलू को शिव सिखो ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की चाबी सौंप दी।
  • गांधी ने अहिंसा की पालना में सर्वाधिक प्रशंसा बिहार की।
  • अंग्रेज शिक्षा की सर्वाधिक बहिष्कार बंगाल में हुआ।
  • मदुरई तमिलनाडु में एक बालक के द्वारा प्रश्न पूछे जाने के बाद गांधी ने आजीवन एक धोती में रहने का निर्णय किया।
  • 5 फरवरी 1922 को यूपी के गोरखपुर जिले के चोरी चोरा नामक गांव में ग्रामीणों ने थाने का घेराव करके आग लगा दी इसमें 22 पुलिस वह एक सब इंस्पेक्टर सहित कुल 23 पुलिसकर्मी व तीन ग्रामीण मारे गए
  • 5 फरवरी 1922 को बारदोली (गुजरात) में कांग्रेस की बैठक हुई उसमें असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
  • 10 March 1922 को ब्रिटिश न्यायाधीश ब्रूमफील्ड ने हिंसा भड़काने के आरोप में गांधी जी को 6 साल की कारावास की सजा सुनाई गई।

1919 के एक्ट के तहत

  • 1919 के एक्ट के तहत भारत की केंद्रीय असेंबली में चुनाव होने दे। इन चुनाव को लेकर कांग्रेस के दो ग्रुप बन गए।
  • परिवर्तनवादी
  • अपरिवर्तनवादी

परिवर्तनवादी

  • यह चुनाव में भाग लेना चाहते थे।
  • इस ग्रुप का नेतृत्व चितरंजन दास व मोतीलाल नेहु कर रहे थे।

अपरिवर्तनवादी

  • यह चुनाव का बहिष्कार कर रहे थे।
  • इनका नेतृत्व विट्ठल भाई पटेल व बल्लभ भाई पटेल कर रहे थे।
  • अपरिवर्तन वादियों के द्वारा नागपुर में झंडा सत्याग्रह चलाया गया ताकि परिवर्तनवादियों को कांग्रेस के झंडे के प्रयोग से रोक सके।
  • जब गांधी जी ने भी चुनाव का बहिष्कार किया तब परिवर्तनवादी कांग्रेस से अलग हुए
  • March 1923 को इलाहाबाद में स्वराज पार्टी की स्थापना की गई। चितरंजन दास इसके अध्यक्ष बने वह मोतीलाल नेहरू इसके सचिव बनाए गए
  • गांधी जी की खराब स्वास्थ्य के कारण जेल से रिहा किया गया।
  • 8 नवंबर 1924 को गांधी जी ने चितरंजन दास को दिल्ली बुलावाया व यह समझौता किया कि जो भी कांग्रेस के सदस्य चुनाव में भाग लेना चाहते हैं स्वराज पार्टी के तहत ले सकते हैं।
  • 1924 में कांग्रेस का अधिवेशन बेलगांव (कर्नाटक ) मैं आयोजित हुआ । इसकी अध्यक्षता गांधीजी ने की इसमें गांधी व दास समझौते की पुष्टि की गई।
  • इसके बाद कांग्रेस के लगभग नेताओं ने स्वराज पार्टी के तहत चुनाव में भाग लिया।
  • विट्ठल भाई पटेल ने केंद्रीय असेंबली के स्पीकर नियुक्त हुए।
  • स्वराज पार्टी के दबाव के कारण 1919 के एक्ट की जांच की गई मुडडीमैन कमेटी का गठन किया गया।

देखिए दोस्तों ! http://भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन से संबंधित आगे की जानकारी पार्ट-2 पर जाकर पढ़ें। और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका और सहयोग के बारे में जानकारी आपको अच्छी लगी है तो इसे आगे भी फॉरवर्ड करें अपने दोस्तों को।

May 20, 2020

मुगलकालीन साहित्य, चित्रकला व संगीत के बारे में पूरी जानकारी

मुगलकालीन साहित्य

आइए जानते हैं सबसे पहले मुगलकालीन साहित्य के बारे में जो कि निम्न शासको के काल में साहित्य की रचना हुई जो कि निम्न प्रकार से है

1. बाबर

  • बाबर ने तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा तुजुक- ए – बाबरी लिखी थी !
  • एलफिनसटन ने इसे मध्य एशिया में लिखी गई इतिहास की सबसे प्रमाणित पुस्तक माना है !
  • मुगल काल में इसका चार बार तुर्की से फारसी में अनुवाद किया गया !
  • इसके फारसी अनुवाद को बाबरनामा कहते हैं !
  • हुमायूं के समय जैन खा व पायदा खा ने अकबर के समय अब्दुल रहीम खान-ए-खाना तथा शाहजहां के समय मीर अंबु तालिब तुरवीती ने इसका अनुवाद किया था !
  • लीउन एरीस्टन व किग ने फारसी से अंग्रेजी में अनुवाद किया तथा श्रीमती चार्ल्स बेबरीज ने इसका तुर्की से अंग्रेजी में अनुवाद किया !
  • इसी को अंग्रेजी का सबसे प्रमाणित अनुवाद मानते हैं !
  • बाबर की कविताओं के संग्रह को दीवान का जाता है !
  • बाबर ने पद्य शैली में इस्लाम के कानून लिखे हैं इस शैली को मुबइयान कहा जाता है !
  • बाबर के द्वारा अपने अधिकारियों वह शासको को भेजे गए पत्र व प्राप्त पत्रों के संग्रह को रिसाल-ए-उसज या खत-ए-बाबरी कहते हैं !

2. हुमायूं

  • हुमायूं के समय दवादा मीर ने कानून-ए-हुमायूंनी की रचना की !
  • इसमें हुमायूं का खगोल, ज्योतिष वह संगीत के प्रति लगाव बताया गया है !

3. अकबर

मुगलकालीन साहित्य

  • अकबर के समय हुमायूं के नौकर जोहर आफताबची ने तारीख-ए-हुमायूं की रचना की, इसे तजकिरात-उल-बाकियात भी कहते हैं !
  • हुमायूं की बहन गुलबदन बेगम ने हुमायूंनामा की रचना की परंतु यह दोनों पुस्तकें हुमायूं के निजी जीवन पर लिखी गई हैं !
  • अकबर के शासन काल में लिखित प्रथम ऐतिहासिक पुस्तक अलाऊदोला कजविनी की नफाइस उल मआसिर है !
  • अबुल फजल : – अबुल फजल अकबर के समय सरकारी इतिहासकार के पद पर था !
  • इसने अकबरनामा की रचना की जिस के कुल 3 भाग हैं तीसरे भाग को आइन-ए-अकबरी कहते हैं इसके भी कुल 5 भाग है !
  • इनायत उल्लाह :- 1602 से 1605 तक इनायत उल्लाह सरकारी इतिहासकार के पद पर रहा जिसने लकमील -ए-अकबरनामा की रचना की !
  • बदायूंनी ने मुतखत-उत-तवारीख की रचना की ! इसमें हल्दीघाटी युद्ध का उल्लेख किया गया है !
  • मिर्जा रोशन दौलगत ने तारीख-ए-रसीदो की रचना की है !
  • मोहसीन फनी ने दाविस्तान-ए -महाजिब की रचना की इसमें इबादतखाने में हुए वाद विवादो को लिखा गया है !

मुगलकाल में धर्म से संबंधित साहित्यकार

  • हिंदू धर्म से – पुरुषोत्तम व देवी
  • ईसाई धर्म से – मोसरोल, एक्वाबीव
  • जैन धर्म से – जिनचंद्र सूरी, हीर विजय सूरी
  • पारसी धर्म से – दस्तूर जी मेंहर राणा
  • राजस्थान से निर्गुण संप्रदाय के संत दादू दयाल जी ने भाग लिया !

आइए देखते हैं अकबर के शासन काल में और कौन-कौन से साहित्य लिखे गए गए हैं

  • अकबर के शासन काल में लिखित एकमात्र पुस्तक के मीर निजामुद्दीन अहमद की तवकात-ए-अकबरी है !
  • अबुल फजल के भाई फैजी को अकबर ने अनुवाद विभाग का अध्यक्ष बनाया ! फैजी की पुस्तक का नाम अकबरनामा था !
  • अबुल फजल ने पंचतंत्र का अरबी और फारसी भाषा में अनुवाद किया था !
  • इसके फारसी अनुवाद को अनवर-ए-सुहली अरबी अनुवाद को कलीला-दमन या अयार-ए-दानिश कहते हैं
  • गिजाली को अकबर के समय का श्रेष्ठ कवि माना गया इसने मसनवी नल एवं दमयत की रचना की
  • अकबर ने मुल्ला हुसैन कश्मीर को जरी कलम की उपाधि प्रदान की !

4. जहांगीर

  • जहांगीर ने अपनी आत्मकथा जहांगीरनामा लिखी इसके आरंभिक 16 सालों का इतिहास जहांगीर ने स्वयं अपने हाथों से लिखा और अगले 3 सालों का इतिहास मोतमिद खा ने लिखा !

5. शाहजहां

  • शाहजहां के द्वारा आमीन कजविनी को अपना इतिहासकार बनाया जिसने बादशाहनामा पुस्तक लिखना शुरू किया परंतु शाहजहां ने कजवीनी के स्थान अब्दुल हमीद लाहोरी को इतिहासकार नियुक्त किया !
  • इसी के द्वारा बादशाहनामा आदिशेष भाग का लेखन कार्य किया गया !
  • पंडित जगन्नाथ ने गंगाधर व गंगालहरी नामक पुस्तक लिखी !
  • शाहजहां के बेटे दाराशिकोह ने 52 उपनिषदों का सिर -ए-अकबर के नाम से फारसी में अनुवाद किया
  • दाराशिकोह ने मजम – उल- बहरीन (दो समुंदरों का संगम) नामक पुस्तक लिखी है !
  • इसके अलावा सकीनत – उल-ओलिया ने विभिन्न सूफी संतों की जीवनी लिखी है !
  • सकीनत उल औलिया ने कादरी संप्रदाय के संतों की जीवनी लिखी है !
  • शाहजहां की पुत्री जहांआरा ने साहिंबिया नामक पुस्तक लिखी है !
  • इसमें कादरी संप्रदाय के संत मुल्ला शाह की जीवनी लिखी थी !

6. औरंगजेब

  • औरंगजेब ने मिर्जा मुहम्मद कासिम को सरकारी इतिहासकार बनाया !
  • इसने आलमगीरनामा नामक पुस्तक लिखना शुरू की परंतु बाद में औरंगजेब ने सरकारी इतिहास के लेख पर प्रतिबंध लगा दिया !
  • फिर भी औरंगजेब के समय का इतिहास हाशिम मुंनतव उल लुबान पुस्तक में लिखा है परंतु औरंगजेब के डर के कारण इसे छिपा कर रखा गया
  • मुहम्मद शाह रंगीला (1719-1748) के समय से मुहम्मद शाह को दिया गया
  • मुहम्मद शाह ने हाशिम को खाफी खा की उपाधि प्रदान की !
  • पंडित भीमसेन ने नुस्खा -ए- दिलकुशा नामक पुस्तक लिखी जिसमें औरंगजेब को मराठों के विरुद्ध किए गए अभियानों को लिखा गया !
  • ईश्वरदास नागर ने फुतूहात-ए-आलमगीर नामक पुस्तक लिखी है !
  • इसने औरंगजेब का मेवाड़ के शासक राजसिंह व मारवाड़ के शासक अजीत सिंह के साथ संबंधों को लिखा है !
  • मिर्जा मोहम्मद साकी ने महासिरे आलमगिरी नामक पुस्तक लिखी है जिसे डॉक्टर जदुनाथ सरकार ने मुगल काल साहित्य का गिजेटीयर कहां है !
  • औरंगजेब की पुत्री जेब्लूनिस्सा ने दीवान ए मरूफी की रचना की है

मुगलकालीन चित्रकला

आइए मुगलकालीन चित्रकला के बारे में जानते हैं जो कि निम्न शासकों के काल में निम्न चित्रकला विकसित हुई है जो कि निम्न प्रकार से है !

1. बाबर

  • बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुक ए बाबरी में विहजाद नामक चित्रकार का उल्लेख किया गया है जिसे पूर्व का राफेल कहा गया है है !

2. हुमायूं

  • हुमायूं ने अपना निर्वासन कॉल ईरान के शासक तहमास्प के पास व्यतीत किया था !
  • ईरान से भारत लौटते समय हुमायूं दो चित्रकारों मीर सैयद अली वह अब्दुल समद को अपने साथ भारत ले आया !
  • इन दोनों ने हुमायूं के पास दास्तान -ए -अमीर हमज़ा या हमजनामा नामक ग्रंथ चित्रित करना शुरू किया !
  • अलाऊदोला कजवीनी ने अपनी पुस्तक नफाइस उल – मआसिर ने हम्ज़नामा को हुमायूं के मस्तिष्क की उपज का है ! परंतु हुमायूं जब भारत का शासक बना तथा उसके 6 महीने के बाद मृत्यु हो गई !

3. अकबर

  • हम्ज़नामा का अधिकांश चित्रण अकबर के शासनकाल में हुआ इसमें पैगंबर मोहम्मद के चाचा हमजा की अरब देशों में प्रचलित वीरता की कथाओं को कपड़ों पर चित्रित किया गया है !
  • 100 चित्रों के 12 खंडों सहित कुल 1200 चित्र बनाए गए !
  • हमजनमा मीर सैयद अली के निर्देशन में बनकर पूर्ण हुई !
  • अब्दुस समद को अकबर ने टकसाल का अधिकारी व मुल्तान का दीवान नियुक्त किया था !
  • अब्दुस समद ने चावल के दाने पर चौगान खेलते हुए व्यक्ति का चित्र बनाया था इसलिए अकबर ने अब्दुस समद को शीरी कलम की उपाधि प्रदान की थी !
  • अकबर के समय महाभारत को रज्जनामा के नाम से चित्रित किया गया !
  • रज्जनामा का शाब्दिक अर्थ- युद्धों की पुस्तक होता है !
  • फारुख बेग को छोड़कर अकबर के समकालीन सभी चित्रकारों ने रज्जनामा के चित्र बनाएं !
  • दसवंत अकबर के समय का उभरता हुआ चित्रकार था ! इसके चित्र केवल रज्जनामा में मिले बाद में दसवंत ने मानसिक रूप से विक्षिप्त होकर आत्महत्या कर ली !
  • रज्जनामा अब्दुस समद के के पुत्र मोहम्मद शरीफ के निर्देशन में बनकर पूर्ण हुई !
  • बसावन अकबर के समय का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार माना गया है !
  • बसावन भूदृश्य, व्यंग चित्रकारी वछवि चित्रकारी में निपुण था ! एक क्रशकाय घोड़े के साथ जंगल में भटकते हुए मजनू का चित्र बसावन का सर्वश्रेष्ठ चित्र है !
  • अकबर चित्रकला को देवी देवताओं की कृपा प्राप्त करने का माध्यम मानता था !
  • अकबर के समय फारूक बेग ने कपड़े की बजाए कागज पर चित्रकारी को प्रारंभ किया था !
  • मिशकिन यूरोपीय शैली से प्रभावित चित्रकार था !
  • अकबर का कथन था” मैं ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को हेय की दृष्टि से देखता हूं जो चित्रकारी से घृणा करते हैं

4. जहांगीर

  • जहांगीर के समय के काल को मुगल चित्रकला का स्वर्ण काल कहा जाता है !
  • अकबर के समय ईरान से आये आका – रिजा- खा ने जहांगीर के समय आगरा में एक चित्रशाला की स्थापना की !
  • जहांगीर के समय से ही चित्रकारों को उस्ताद कहा जाने लगा !
  • उस्ताद मंसूर पशु पक्षियों की चित्रकारी में निपुण था इसे जहांगीर ने नादिर- उल- अस्त्र (संसार में आदित्य) की उपाधि प्रदान की !
  • इसके बनाए गए चित्रों में साइबेरियन सारस वह बंगाल के अनोखा पुष्प का चित्र प्रसिद्ध है !
  • अब्दुल हसन व्यक्तियों की छवि चित्रकारी में निपुणता इसे जहांगीर ने नादिर – उल – जमा (संसार में अतुल्य) की उपाधि प्रदान की ! यह व्यक्ति छवि चित्रकारी में निपुण था !
  • इसने ईसाई संत जान पाल व जहांगीरनामा मुखपृष्ठ भाग का चित्र बनाया था जिसमें जहांगीर का आगरा में हुआ राज्य अभिषेक है !
  • फारुख बेग ने बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह का चित्र बनाया था !
  • फारुख बेग के शिष्य दौलत ने अपने साथी चित्रकारों गोवर्धन , विशन दास, अबुल हसन व अपने स्वयं का चित्र बनाया !
  • जहांगीर ने विशनदास को ईरान के राज परिवार का चित्र बनाने भेजा था !
  • जहांगीर ने अपनी आत्मकथा बसावन के पुत्र मनोहर के नाम का उल्लेख नहीं किया है !
  • पर्सी ब्राउन ने लिखा है ” जहांगीर की मृत्यु के साथ ही मुगल काल की चित्रकला का पतन हो गया !

5. शाहजहां

  • शाहजहां के समय चित्रों में आभामंडल बनने लगे !
  • साहिबा शाहजहां के समय की एक महिला चित्रकार थी !

6. औरंगजेब

  • औरंगजेब ने चित्रकला को प्रतिबंधित कर दिया था !

मुगलकालीन संगीत

आइए दोस्तों मुगलकालीन संगीत के बारे में जानते हैं जो कि निम्न प्रकार से –

1. बाबर

  • बाबर ने तुजुक -ए- बाबरी में लिखा है – दिनभर युद्धाभ्यास में व्यस्त होने के बाद भी दिन का एक पहर संगीत के लिए अवश्य निकालना चाहिए !

2. हुमायूं

  • हुमायूं का संगीत के प्रति लगाव” कानून- ए -हुमायूंनी नामक पुस्तक में लिखा गया है !

3. अकबर

  • अकबर के समय ध्रुवपद गायक कि 4 शेलिया प्रचलन थी !
  • गौरहागिरी
  • खंडारी
  • अंगूरी
  • नौहारी
  • इनका विकास ग्वालियर के शासक के मानसिंह तोमर के दरबार में हुआ था !
  • तानसेन अकबर के समय का प्रमुख संगीतकार था इसका वास्तविक नाम रामतनु पांडे था !
  • तानसेन पहले रीवा के शासक के रामचंद्र राव (मध्य प्रदेश ) के दरबार में कार्य करते थे !
  • अकबर ने तानसेन को रामचंद्र राव से मांगा था !
  • तानसेन सारंगी वादन में निपुण था जो दोपहर से शाम तक किया जाता था !
  • अबुल फजल ने लिखा है कि तानसेन जैसा गायक पिछले 1000 वर्षों में भी पैदा नहीं हुआ है !
  • अबुल फजल ने मालवा के शासक के बाज बहादुर को हिंदी गायन शैली का श्रेष्ठ संगीतकार कहां है !
  • बैजू बावरा अकबर के समकालीन था लेकिन कभी भी अकबर के दरबार में उपस्थित नहीं हुआ ! स्वयं अकबर इसका संगीत सुनने के लिए वृंदावन गया !
  • बैजू बावरा ने कहा था कि मेरा संगीत मेरे ईश्वर का है !

4. जहांगीर

  • जहांगीर के समय तानसेन का पुत्र विलास खा श्रेष्ठ संगीतकार था !
  • जहांगीर ने गजल गायक शैली को आनंद खां की उपाधि प्रदान की !

5. शाहजहां

  • शाहजहां के समय विलास खा का दामाद लाल खा श्रेष्ठ संगीतकार था जिसे शाहजहां ने गुण समुंद्र की उपाधि प्रदान की !

6. औरंगजेब

  • औरंगजेब ने संगीत कला पर भी प्रतिबंध लगा दिया फिर भी संगीत शास्त्र की सर्वा पुस्तकें औरंगजेब के समय से ही लिखी गई !
  • संगीतकारों के द्वारा वाद्य यंत्रों का जनाजा निकाला गया तक औरंगजेब ने कहा कि इन्हें इतनी गहराई में दफन कर दो ताकि इनका शोर बार सुनाई ना दे
  • खाफी खा ने औरंगजेब को कुशल वीणा वादक कहा !
  • मनूची ने लिखा कि प्रतिबंध के बावजूद राजमहल में राजकुमारियों की संगीत शिक्षा का अच्छा प्रबंध किया गया था !
  • मोहम्मद शाह रंगीला :- मोहम्मद शाह रंगीला के समय सुखरो खा ने तबले का अविष्कार किया था !

ठीक है दोस्तों आपका यह टॉपिक के कंप्लीट हुआ यदि आपको मुगलकालीन साहित्य, चित्रकला, व संगीत से संबंधित जानकारी सही लगी हो तो इसे आगे फॉरवर्ड करें और इस वेबसाइट से जुड़े आगे भी आपको और अच्छे-अच्छे टॉपिक के बारे में बताया जाएगा !

धन्यवाद साथियों व प्रिय छात्र- छात्राओं

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May 19, 2020

मुगलकालीन स्थापत्य कला व संस्कृति और प्रमुख इमारतें के बारे में??

मुगलकालीन स्थापत्य

सबसे पहले मुगलकालीन स्थापत्य कला के बारे में जानेंगे मुगलकालीन स्थापत्य कला क्या थी आइए देखते हैं !

1. बाबर (1526 -1530)

  • बाबर को उपवनो का राजकुमार कहा जाता है !
  • मुगलों के द्वारा जो बाघ लगवाए गए थे वे दृश्य-ए – बहिसत पद्धति से लगवाए गए थे !
  • कुरान में लिखा गया है कि जन्नत में तसनिस नामक एक पानी का झरना है जिससे जन्नत में पानी की नहर निकाली गई !
  • मुगलों के बागों में इसी प्रकार की पानी कि नहरें बनी है !
  • बाबर ने आगरा में आरामबाग या नूर अफगान बाग का निर्माण करवाया !
  • प्रारंभ में बाबर को इसी में दफनाया गया परंतु बाबर ने मरने से पहले इच्छा व्यक्त की उसे काबुल में दफनाया जाए ! जिसके बाद बाबर को काबुल में ले जाकर दफनाया गया !
  • बाबर ने धौलपुर में निलोकर बाग का निर्माण करवाया !
  • बाबर ने पानीपत (हरियाणा) में काबुली बाग मस्जिद बनवाई ! ये भारत में ईटों से निर्मित प्रथम मस्जिद है !
  • इसके अलावा बाबर ने रूहेलखंड (उत्तर प्रदेश) कि संभल नामक स्थान पर जामा मस्जिद का निर्माण करवाया था !
  • बाबर के सेनानायक मीर बाकी ने फैजाबाद (अयोध्या) मैं बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था !

2. हुमायूं (1530 -40, 1555 – 1556 )

  • हुमायूं ने 1534 में दिल्ली में दीन-ए-पनाह अर्थात धर्म की शरण स्थली नामक नगर का निर्माण करवाया इसी के शेर मंडल पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर हुमायूं की मृत्यु हो गई !

3. अकबर (1556 -1605)

अकबर के शासन कला की बनी प्रथम इमारत दिल्ली में स्थित हुमायूं का मकबरा है !

इसका निर्माण अकबर की सौतेली मां हाजी बेगम ने ईरान के वास्तुकार मिर्जा ग्यास की देखरेख में करवाया !

यह मकबरा चार बाग शैली में निर्मित है !

मुगल काल में संगमरमर के पत्थर का पहला प्रयोग इसी मकबरे में किया गया है इसका केवल दोहरा गुंबद ही संगमरमर से निर्मित है बाकी पूरी इमारत है धौलपुर व करौली के लाल पत्थर से बनी हुई है !

अकबर के दाय मां अनगा ने महरौली में अपने पुत्र अदम खा का मकबरा बनवाया इसी को भूल भुलैया कहा जाता है !

अकबर ने कासिम खां की देखरेख में आगरा व लाहौर में दुर्गों का निर्माण करवाया !

आगरा के दुर्ग में अकबर ने दीवान-ए-आम व दीवान-ए-खास व जहांगीर महल जैसी इमारतें बनवाई !

इसके अलावा अकबर ने अटक दुर्ग पाकिस्तान, इलाहाबाद दुर्ग सबसे बड़ा व अजमेर स्थित दौलत खाने का निर्माण करवाया !

इस दौलत खाने में 1837 में अंग्रेजों ने अपना शास्त्र गार स्थापित किया था इसलिए वर्तमान में से मैगजीन दुर्ग कहते हैं !

1569-70 में अकबर ने बहउधिन फतेहपुर सीकरी के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी !

ईसाई संत मोसरोत के निर्माण के समय फतेहपुर सीकरी में स्थिति थी !

शेख सलीम चिश्ती फतेहपुर सीकरी में ही रहा करते थे तथा इन्हीं के आशीर्वाद से अकबर को जहांगीर नामक पुत्र की प्राप्ति हुई !

मुगलकालीन प्रमुख इमारतें

आइए सबसे पहले प्रमुख मुगलकालीन इमारतें देखते हैं जो कि निम्न प्रकार से हैं :-

1. जामा मस्जिद

  • यह लाल पत्थर से निर्मित है !
  • इस मस्जिद को फतेहपुर सीकरी का गौरव कहा गया है !
  • फर्ग्यूसन ने इसे पत्थरों की रुमानी कथा कहा है !

2. शेख सलीम चिश्ती का मकबरा

  • अकबर ने इसका निर्माण लाल पत्थर से करवाया परंतु जहांगीर व शाहजहां ने इसे तुड़वाकर संगमरमर से निर्मित करवा दिया गया !

3. इस्लाम खा का मकबरा

  • सर्वप्रथम वर्गाकार मेहराब का प्रयोग इसी मकबरे में किया गया है !

4. जोधाबाई का महल

  • यह फतेहपुर सीकरी की सबसे बड़ी आवासीय इमारत है !

5. तुर्की सुल्तान की कोठी

  • यह अकबर की प्रथम पत्नी रुकैया बेगम का महल था !
  • पर्शी ब्राउन ने इसे मुगल स्थापत्य का रतन कहां है !

6. मरियम महल

  • अकबर की माता हमीदा बानो का महल था !
  • हमीदा बानो मरियम मकानी के नाम से प्रसिद्ध है !
  • अकबर ने इसमें हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बनवाएं थे जिन्हें बाद में औरंगजेब ने चूने से पुतवा दिया गया !
  • इसका उल्लेख इटली के मनुची ने अपनी पुस्तक स्टीरियो डी मोगर में किया !

7. पंचमहल

  • यह पांच मंजिला पिरामिड की आकृति की इमारत है इसमें कोई दरवाजा नहीं है !
  • नीचे वाली इमारत में 48 व ऊपर वाली इमारत में 4 स्तंभ हैं !

8. हिरण मीनार

  • अकबर ने अपने हाथी हिरण की स्मृति में इस 80 फीट ऊंची इस इमारत का निर्माण करवाया !

9. इबादत खाना

  • 1575 में अकबर ने इसका निर्माण करवाया !
  • प्रारंभ में केवल इस्लाम धर्म पर वाद विवाद किया जाता था !
  • इसके अलावा दो मंजिला बीरबल महल का निर्माण करवाया गया !
  • 1570-71 में अकबर ने गुजरात पर विजय प्राप्त की थी !
  • इस विजय के उपलक्ष में 1601 में बुलंद दरवाजा का निर्माण कराया गया !
  • यह जमीन से 176 फीट ऊंचा है !
  • भरतपुर के लोहागढ़ दुर्ग के फतेह बुरज से यह भी यह दरवाजा दिखाई देता है !
  • विसेंट अर्थर स्मिथ – फतेहपुर सीकरी नगर को पत्थरों में डाला गया रोमांस कहां !
  • फर्ग्यूसन – यह उस आदमी के मस्तिष्क की परछाई है जिसने उसकी कल्पना की !

4.जहांगीर (1605 – 1627)

  • अकबर ने अपने जीवन काल में ही सिकंदरा (आगरा) अपने मकबरे का निर्माण प्रारंभ करवा दिया था इसे जहांगीर ने पूर्ण करवाया !
  • यह बौद्ध शैली से प्रेरित है !
  • गुंबद विहीन है !
  • स्वतंत्र रूप से मीनारों का पहला प्रयोग इसी मकबरे में किया गया है !
  • जहांगीर की पत्नी नूरजहां या मेहरून्निसा ने अपने पिता मिर्जा गयास बेगम का एतमादुधोला का मकबरा आगरा के निकट बनवाया !
  • मुगलकाल में पूर्ण संगमरमर की बनी यह प्रथम इमारत है !
  • मुगलकाल में सर्वप्रथम पितरादूरा का प्रयोग इसी इमारत में किया गया था !
  • पितरादूरा सफेद संगमरमर पर रंगीन की जड़ाई को कहते हैं !
  • जहांगीर ने श्रीनगर में शालीमार बाग लगवाया और इसे शाहजहां ने पूर्ण करवाया !
  • जहांगीर ने अजमेर में दौलत बाग या सुभाष उद्यान का निर्माण करवाया !
  • इसी बाग के गुलाब के फूलों से नूरजहां की माता अस्मत बेगम ने इत्र का आविष्कार किया था !
  • नूरजहां के भाई आसफ खा ने श्रीनगर में डल झील के सामने निशाद बाग का निर्माण किया !
  • जहांगीर ने लाहौर में स्थित शाहदरा के दिलकुशा बगीचे में अपने मकबरे का निर्माण प्रारंभ करवाया जिसे नूरजहां ने पूर्ण किया !
  • जहांगीर व नूरजहां को इसी में दफनाया गया था !

5. शाहजहां (1628 -58)

  • शाहजहां के काल को मुगल स्थापत्य का स्वर्ण काल माना जाता है !
  • पर्षी ब्राउन ने लिखा है – जैसे आगस्टस ने रोम को ईटो से बना हुआ पाया और पत्थरों से बना हुआ छोड़ दिया उसी प्रकार शाहजहां ने अकबर के लाल पत्थर को संगमरमर में परिवर्तित कर दिया !
  • शाहजहां ने सर्वप्रथम अकबर के द्वारा निर्मित आगरा दुर्ग के दीवाने -ए-आम को जुड़वा कर संगमरमर का बनवाया !
  • शाहजहां ने पहली बार संगमरमर के पत्थर का प्रयोग इसी इमारत में किया !
  • इसके अलावा शाहजहां ने आगरा दुर्ग में संगमरमर की मोती मस्जिद बनवाई यह इस दुर्ग की सबसे सुंदर इमारत है !
  • शाहजहां ने दुर्ग में संगमरमर का मुसम्मन या शाहबुर्ज बनवाया !
  • औरंगजेब ने शाहजहां को इसी बुर्ज में बंदी बनाकर रखा !
  • इसके अलावा दुर्ग के परकोटे, नगीना मस्जिद का निर्माण करवाया !
  • शाहजहां की पुत्री जहांआरा ने आगरा की जामा मस्जिद बनवाई इसी को मस्जिद -ए – जहांनुमा कहते हैं !
  • दिल्ली की जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहां के द्वारा करवाया गया !
  • 1638 में शाहजहां ने दिल्ली में शाहजहानाबाद नगर का निर्माण करवाया !
  • इसी ने हमिद अहमद की देखरेख में दिल्ली का लाल किला बनवाया था !
  • इसके दीवाने -ए-आम मैं बेबादल खा के द्वारा निर्मित तख्त ए ताऊस या मयूर सिंहासन रखा जाता था !
  • इसी में ही कोह-ए- नूर हीरा लगा हुआ था !
  • दीवाने खास की दीवार पर अमीर खुसरो की इस पंक्ति को लिखा गया” गर फिरदौस भर रूठन जमी जमीअस्त ……………….

ताजमहल

  • ताजमहल को मुगल स्थापत्य का सर्वश्रेष्ठ इमारत माना गया है !
  • 1631 में शाहजहां की पत्नी अर्जुमंद बानो बेगम या मुमताज की मृत्यु हो गई !
  • इस की स्मृति में आगरा में यमुना नदी के किनारे ताजमहल का निर्माण प्रारंभ करवाया
  • 22 वर्ष 9 करोड़ की लागत व मकराना के संगमरमर से यह बनकर पूर्ण हुआ !
  • इसका प्रधान वास्तुकार अहमद लाहौरी था जिसे शाहजहां ने नादिर उल हसरार की उपाधि प्रदान की !
  • इसका अर्थ होता है कि संसार के आदित्य में भी आदित्य !
  • इसका प्रधान कारीगर ईशा खा था !
  • हवेल ने ताजमहल को भारतीय नारी की साकार प्रतिमा कहा इसे स्थापत्य से नहीं बल्कि मूर्ति कला से संबंधित माना !

6. औरंगजेब ( 1658 -1707 )

  • इसने दिल्ली की लाल किले की मोती मस्जिद लाहौर की बादशाही मस्जिद वह हरियाणा के पिंजौर बाग का निर्माण करवाया था !
  • 1679 में औरंगजेब की पत्नी रबिया उद् दुर्रानी की मृत्यु हो गई !
  • इसी की स्मृति में औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में मकबरा बनवाया इसे बीबी का मकबरा, दक्षिण भारत का ताजमहल या ताजमहल की फूहड़ नकल कहते हैं
  • औरंगजेब ने अपने स्वयं का मकबरा खुल्दाबाद (महाराष्ट्र) में बनवाया था !

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May 19, 2020

दिल्ली सल्तनत का प्रशासन व स्थापत्य कला

दिल्ली सल्तनत प्रशासन

दिल्ली सल्तनत में सुल्तान सभी विभाग का प्रमुख होता था सुल्तान के बाद वजीर प्रमुख अधिकारी होता था वजीर वजारत सबसे बना है जिसका अर्थ है मंत्री परिषद

वजीर शासन के कार्य में राजा की सहायता किया करता था एवं अन्य अधिकारियों की नियुक्ति वजीर के द्वारा की जाती थी

ग़ुलाम वंश में कुतुबुद्दीन ऐबकदिल्ली सल्तनत

वजीर वित्त एवं राजस्व से संबंधित अधिकारी होता था अधिकारियों को वेतन देना और उनका स्थानांतरण करना वजीर के नियंत्रण में होता था

प्रशासन का आधार

  • एक धर्म ग्रंथ – कुरान
  • एक संप्रसू – खलीफा
  • एक – सुल्तान

प्रमुख विभाग

  1. दीवान ए वजारत-वित्त व राजस्व से संबंधित
  • दीवान ए अर्ज —
  • बलबन के काल में इसकी स्थापना हुई यह सैन्य विभाग से संबंधित था इसका प्रमुख आरिफ ए मामलिक कहलाता था इसका कार्य सैनिकों की भर्ती करना उनका हुलिया रखना तथा सैनिकों के लिए रसद की व्यवस्था करना
  • दीवान ए रसालत–यह विदेश विभाग से संबंधित था डॉक्टर आई एच कुरेशी ने इसे धार्मिक विभाग से संबंधित बताया

दीवान ए इंसा

यह राजकीय पत्राचार से संबंधित विभाग था

दीवान ए कजा

यह न्याय विभाग से संबंधित था काजी उल कुजात को जाट इस विभाग का प्रमुख होता था

वजीर की सहायता के लिए निम्न अधिकारी हुआ करते थे

1 दीवान ए तन – यह वेतन बांटने का कार्य करता था

2 मुशर्रफ – यह आय तथा व्यय का हिसाब रखता था

3 मुस्तफा – यह आय तथा व्यय की जांच करता था

प्रांतीय शासन

मोहम्मद बिन तुगलक के काल में कुल 23 प्रांत थे प्रांत में दो प्रकार के अधिकारी थे जो निम्नलिखित हैं

  • एक्तादार – शांति व्यवस्था बनाए रखना
  • ख्वाजा – इसका कार्य भू राजस्व से संबंधित था

जिला / शिक

एकता का विभाजन जिला या सिक में किया गया बलवान के काल में यह व्यवस्था लागू की गई सिक प्रमुख अधिकारी सिकदार होता था इसका कार्य जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना था लोदी वंश के शासकों ने जिले के लिए सरकार शब्द का प्रयोग किया

परगना

दिल्ली-सल्तनत में जिले का विभाजन परगना में किया गया परगने के प्रमुख अधिकारी थे

1 आमिल – इसका कार्य परगना में शांति व्यवस्था बनाए रखना था

2 मुशर्रफ – यह आय तथा व्यय से संबंधित अधिकारी था

3 कारकुन – यह राजस्व विभाग से संबंधित अधिकारी होता था

4 गांव – यह प्रशासन की सबसे निचली काई होती थी

सैन्य व्यवस्था दशमलव प्रणाली पर आधारित थी इसकी जानकारी तारीख ए फिरोज शाह से मिलती है जो निम्नलिखित है

  • पेदल
  • अश्व
  • गज

सेना – दिल्ली सल्तनत में दो प्रकार की सेना थी

  • हश्म ए क्लब- यह सुल्तान की सेना थी जो कि राजधानी में रहती थी
  • हश्म ए अत्रफ – यह प्रांतों की सेना थी

भू राजस्व व्यवस्था

  • इकता भूमि
  • खालसा भूमि
  • अनुदान भूमि
  • हिंदू सामंतों की भूमि

दिल्ली-सल्तनत में रवि व खरीफ दोनों प्रकार की फसलें बोई जाती थी इस काल में मुख्य फसल धान थी नगदी फसल गन्ना तेल सरसों व कपास थे सिंचाई के लिए रहट का प्रयोग किया जाता था बाबरनामा वह मलिक मोहम्मद जायसी के द्वारा रहट का उल्लेख किया गया है

उत्पादन के आधार पर भूमि

  • पोलाज
  • परती
  • चाचर
  • बंजर

भू राजस्व का निर्धारण

अलाउद्दीन खिलजी के काल में मुख्य रूप से भू राजस्व निर्धारण करने की तीन विधियां थी जो निम्नलिखित है

  • खेत बटाई – खेत में खड़ी फसल का किसान और राज्य के मध्य में बंटवारा
  • लंक बटाई – फसल काटकर उसका गट्ठर के रूप में बटवारा
  • रास बटाई – अनाज के रूप में बटवारा

पिजन

यह रुई धोने की कमान होती थी फारसी भाषा में रुई धोने का कार्य करने वाले नदा भी खेल आते थे रोहित होने पर भी दिल्ली-सल्तनत में कर लिया जाता था

तकली

दिल्ली-सल्तनत में कतई का पारंपरिक कार्य तकली कहलाता था तकली को फारसी भाषा में दुक कहा जाता था

सल्तनत कालीन स्थापत्य कला

1 क़ुतुब मीनार

2 बलबन का मकबरा दिल्ली में स्थित शुद्ध इस्लामी पद्धति पर निर्मित यह पहला मकबरा माना जाता है

3 अटाला मस्जिद जौनपुर में स्थित इस मस्जिद का निर्माण फिरोजशाह तुगलक के काल में शुरू हुआ तथा इब्राहिम शाह शर्की के काल में इस मस्जिद का निर्माण पूरा हुआ

4 हिंडोला महल मालवा में होशंग शाह के काल में इसका निर्माण हुआ

5 जहाज महल महमूद प्रथम के द्वारा मांडू में इस महल का निर्माण कराया गया

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May 18, 2020

मौर्यकालीन गुहालेख व स्तूप और मौर्य कालीन साहित्य व सिक्के

मौर्यकालीन गुहालेख

  • अशोक के गया (बिहार) अभिलेख बराबर पहाड़ी पर आजीवक संप्रदाय की गुफाएं दान दी जिन्हें निम्न नामों से पुकारा जाता है !
  • सुदामा
  • विश्व झोपड़ी
  • कर्ण चापर
  • अशोक के पौत्र दशरथ ने भी इसी पहाड़ी पर आजीविका संप्रदाय लोमश ऋषि की गुफा दान की जो सबसे सुंदर गुफा थी !
  • दशरथ ने भी अशोक के समान देवान प्रियदर्शी की उपाधि को धारण किया !
  • दशरथ ने गया जिले में स्थित नागार्जुन पहाड़ी पर ही आजीविका संप्रदाय को गुफा दान दे दी जिन्हें निम्न नामों से जाना जाता है
  • गोपी का गुफा
  • बौद्धिक गुफा
  • वैदिक गुफा
  • व सातों गुफाओं को सम्मिलित रूप से सप्त गुफा कहा जाता है !

मौर्यकालीन स्तूप

  • इसका प्रारंभिक उल्लेख ऋग्वेद में हुआ !
  • ऋग्वेद में धूप नामक शब्द का उल्लेख है जिसका अर्थ है कि उठती हुई जवाला/राख का ढेर
  • महात्मा बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद उनकी अस्थियों पर जो स्थापित बनाया गया उसी को स्तूप का गया है !
  • बुध की अस्थियों को 8 राज्यों में बांट दिया गया था!
  • इन 8 में से वर्तमान में केवल पिपरवा (उत्तर प्रदेश) के स्तूप के अवशेष मिलते हैं !
  • बौद्ध ग्रंथ दिव्या दान के अनुसार अशोक के द्वारा 84000 स्तूपो का निर्माण करवाया गया !
  • अशोक के समय निर्मित स्तूपो में भरहुत (मध्य प्रदेश) का स्तूप सबसे प्राचीन है !
  • इसकी खोज 1872-73 में कनिखम के द्वारा की गई !
  • सर्वप्रथम जातक कथाओं का भरहुत के स्तूप पर किया गया !
  • जातक कथाओं का अर्थ- बुद्ध के जीवन से संबंधित घटनाओं से है !
  • इस स्तूप पर अजातशत्रु महात्मा बुद्ध की वंदना करते हुए दिखाया गया है !
  • मौर्य काल में इस स्तूप की वेदिका लकड़ी की बनी होती थी सुंग काल में इसे पत्थर की बनवाई गई !
  • अशोक के समय निर्मित स्तूपो में सांची का स्तूप सबसे प्रसिद्ध है !
  • इसके निर्माण में अशोक की पत्नी देवी/महादेवी का योगदान माना जाता है !
  • इसकी खोज 1818 में रॉयल ट टेलर के द्वारा की गई !
  • 1920 -30 में जॉन मार्शल इस पहाड़ी को साफ करवा कर इस स्तूप के अन्य अवशेष की खोज की

सांची के स्तूप

:- सांची से कुल 3 स्तूप मिले हैं जो कि निम्न प्रकार से हैं

  • स्तूप A – “बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं” !
  • स्तूप B – इसमें बौद्ध प्रचार को के अवशेष रखे गए हैं !
  • स्तूप C – इसमें बुद्ध के शिष्य सारिपुत्र,
  • के अवशेष मिलते हैं !
  • सारनाथ का धमेख स्तूप अशोक के समय निर्मित था !
  • प्रारंभिक स्तूपो का निर्माण ईटों, लकड़ियों, व पत्थरों से हुआ !
  • चट्टानों को काटकर बनाए गए स्तूपो को चैत्य कहा जाता है तथा बौद्ध भिक्षुओं के पूजा स्थान भी होते हैं !
  • बौद्ध भिक्षुओं के आवास स्थलों को विहार कहा जाता है !

स्तूपो के प्रकार

  • स्तूपो के चार प्रकार होते हैं जोकि निम्नलिखित हैं
  • शारीरिक स्तूप :- जिनमें बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं उनको सबसे पवित्र माना गया है !
  • पारभोगिक स्तूप :- बुद्ध तथा उनके शिष्यों ने अपने जीवन काल में जिन वस्तुओं का उपयोग किया हो जैसे भिक्षा पात्र आदि !
  • उद्ददेसिक स्तूप :- बुद्ध तथा उनके शिष्यों ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के उद्देश्य जिन स्थानों की यात्रा की
  • संकल्पित स्तूप :- राजा व व्यापारियों के द्वारा बनाए गए स्तूप

मौर्य कालीन साहित्य

  • यूनान के शासक सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को अपना दूध बनाकर चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था !
  • मेगस्थनीज 299 ईसवी पूर्व तक चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहा जहां उसने यूनानी भाषा इंडिका नामक पुस्तक लिखी !
  • परंतु यह अभी तक प्राप्त नहीं हुई परंतु कई बाद के लेखकों ने अपनी पुस्तक में लिखा है
  • कि मेगस्थनीज के द्वारा इंडिका लिखी गई जिसमें इन बातों को लिखा गया है
  • एरियन – ए वीसीयस (सिकंदर की जीवनी)
  • स्ट्रेबो – जियोग्राफिक
  • जस्टिन – एपि टाम
  • प्लितार्क – लहिब्स
  • पिलनी – natural storica
  • Talmi – जो ग्राफी
  • मेगास्थनीज ने कहीं पर भी चाणक्य नाम का उल्लेख नहीं किया !
  • मेगास्थनीज ने कई बातें असत्य कही जैसे-
  • भारत में अकाल नहीं पड़ते
  • भारतीयों को लेखन कला का ज्ञान नहीं है
  • भारत में दास प्रथा का प्रचलन नहीं था
  • भारतीय समाज सात वर्गों में विभक्त था
  • जैन आचार्य भद्रबाहु ने कल्पसूत्र की रचना की
  • चंद्रगुप्त के पुरोहित या प्रधानमंत्री चाणक्य (कौटिल्य) विष्णु गुप्त ने संस्कृत भाषा में अर्थशास्त्र की रचना की
  • यह संस्कृत में लिखित एक पांडुलिपि थी
  • इसमें 15 अधिकरण व 180 प्रकरण है
  • 1905 में तंजौर (कर्नाटक) के ब्राह्मण ने इसकी पांडुलिपि तंजौर के सरकारी पुस्तकालय कक्ष श्याम प्रसाद शास्त्री को भेंट की थी !
  • 1902 में इसे पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया !
  • चाणक्य ने अपनी पुस्तक न तो चंद्रगुप्त मौर्य और न ही मेगास्थनीज के नाम का उल्लेख किया है !

मौर्य कालीन सिक्के

  • इन सिक्कों को आहत/पंचमार्क सिक्के कहते हैं !
  • धातु को पिघला कर किसी वस्तु से दबाकर इन सिक्कों का निर्माण किया जाता था !
  • इन पर सूर्य, चंद्रमा, पशु पक्षी, इत्यादि की आकृति बनी होती थी !
  • टकसाल के अधिकारी को कोषाध्यक्ष कहते थे !
  • रूप दर्शक नामक अधिकारी इन सिक्कों की जांच करता था !
  • स्वर्ण सिक्के :- 1 स्वर्ण 2. निसक
  • चांदी के सिक्के :- 1. पण 2. धरण 3. कर्सापन
  • ताम्र सिक्के :- 1. भासक 2. काकनी

महाजनपद और उनकी राजधानी अवंतीमौर्यकालीन गुहालेख http://मौर्यकालीन गुहालेख