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Geography

August 23, 2020

भारत के मुख्य दर्रे Indian Geography – Passes In India

भारत के मुख्य दर्रे (Passes)

जम्मू-कश्मीर

1. अघील: यह कराकोरम में स्थित भारत की सबसे ऊंची चोटी K2 के उत्तर में स्थित है यह समुन्दर तल से लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई पर है और भारत के लद्दाख को चीन के एक्सिन्जियांग (सिकियांग) प्रांत से मिलाता है अधिक ऊंचाई पर स्थित होने तथा पर्वतों द्वारा घिरे रहने के कारण यह नवम्बर से मई के प्रथम सप्ताह तक बंद रहता है

दर्रे Passes

2. बनिहाल: यह पीर पंजाल पर्वत श्रंखला में 2832 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यहां शीत ऋतु में हिमपात होता है जिस कारण यह आवागमन के लिए उपयुक्त नहीं रहता। दिसंबर 1956 में यहां वर्ष पर आवागमन के लिए एक सुरंग बनाई गई थी, जिसका नाम देश के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर जवाहरलाल सुरंग रखा गया।

3. बारालाचा : यह जम्मू- कश्मीर में लगभग 5045 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है इसमें से बहुत ऊंचा मनाली से लेह सड़क मार्ग गुजरता है यहां शीत ऋतु में हिमपात होता है और यह नवम्बर से मई के मध्य तक बंद रहता है

4. चांग ला : लगभग 5270 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा लद्दाख को तिब्बत से मिलाता है यहां पर चांगला बाबा का मंदिर है जिसके नाम पर इस दर्रे का नामकरण किया गया है हिमपात के कारण यह शीत ऋतु में बंद रहता है

5. खूजराव : यह कराकोरम पर्वत श्रंखला में 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है और लद्दाख को चीन के सिक्यांग प्रांत से मिलाता है

6. लानक ला : यह जम्मू- कश्मीर के चीन अधिकृत अक्साई चीन इलाके में स्थित है और लद्दाख तथा तिब्बत की राजधानी लासा के बीच संपर्क स्थापित करता है चीन ने सामरिक दृष्टि से इस दर्रे में से गुजरती हुई सिकियांग को तिब्बत से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण किया है

7. पीर पंजाल : यह दर्रा पीर पंजाल पर्वत में है और मुगल राजमार्ग पर जम्मू से श्रीनगर जाने का परंपरागत मार्ग है परंतु देश के विभाजन के बाद इसे बंद कर दिया गया।

8. कारा ताघ : यह कराकोरम पर्वत पर 6000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है और हिमपात के कारण वर्ष की अधिकांश अवधि में बंद ही रहता है

9. खारदुंग : यह जम्मू-कश्मीर के कराकोरम पर्वत में 6000 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर स्थित है इस दर्रे में से भारत की सबसे ऊंची सड़क गुजरती है परंतु यह हिमपात के कारण शीत ऋतु में बंद रहता है

10. थांग ला : यह जम्मू- कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में 5359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है इस दर्रे में से खारदुंग के बाद दूसरी सबसे ऊंची सड़क गुजरती है

11. इमिस ला : लगभग 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा लद्दाख को तिब्बत से मिलाता है यहां पर भूमि बहुत उबड़ खाबड़ है और डाल काफी तीव्र है जिस कारण से इसका अधिक उपयोग नहीं किया जाता यह शीत ऋतु में बंद हो जाता है

12. पेन्सी ला : यह महान हिमालय में 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर जोजी ला के पूर्व में स्थित है यह कश्मीर घाटी को कारगिल से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है परन्तु यह शीत ऋतु में हिमपात के कारण नवम्बर से मई मध्य तक बंद रहता है

13. जोजी ला : लगभग 3850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा श्रीनगर तथा कार्गिल एवं लेह के बीच सम्पर्क स्थापित करने में सहायता देता है यहां पर सड़कों के निर्माण तथा रखरखाव का काम सीमा सड़क संगठन द्वारा किया जाता है इसके सामरिक महत्व को देखते हुए श्रीनगर से जोजी ला सड़क को राष्ट्रीय महामार्ग NH-ID घोषित किया गया है

हिमाचल प्रदेश

1. देबसा : यह हिमाचल प्रदेश के महान हिमालय में कुल्लू एवं स्पीती के बीच लगभग 5270 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है इससे कुल्लू तथा स्पीती के बीच छोटे मार्ग का निर्माण हो गया है

2. रोहतांग : लगभग 3970 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा हिमाचल प्रदेश की लाहौल एवं स्पीती घाटियों के बीच संपर्क स्थापित करता है border road Organisation (BRO) ने इस दर्रे में महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण किया है जिस पर सेना तथा आम जनता के वाहनों की भीड़ लगी रहती है यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है

3. शिपकी ला : यह झेलम महाखडड पर 6000 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर स्थित है और हिमाचल प्रदेश को तिब्बत से मिलाता है शीत ऋतु में हिमपात के कारण यह बंद रहता है

उत्तराखंड

1. लीपु लेख : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत से मिलाता है विश्व की सबसे कठिन पवित्र मानसरोवर की यात्रा करने वाले तीर्थयात्री इसी दर्रे Passes से होकर जाते हैं

2. माना : यह उत्तराखंड के महान् हिमालय में हिन्दुओं के पवित्र धार्मिक स्थल बद्रीनाथ के मंदिर से कुछ ही दूर लगभग 5611 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और उत्तराखंड को तिब्बत से मिलाता है

3. मंगसा धुरा : यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है मानसरोवर के लिए जाने वाले तीर्थ यात्री इस दर्रे Passes का भी प्रयोग करते हैं

4. निती : यह भी उत्तराखंड में लगभग 5068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और उत्तराखंड को तिब्बत से मिलाता है यह नवंबर से मई तक बंद रहता है

5. मुलिंग ला : यह गंगोत्री के उत्तर में स्थित है और उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है भारी हिमपात के कारण यह शीत ऋतु में बंद रहता है

सिक्किम

1. नाथू ला : यह भारत-चीन सीमा पर लगभग 4310 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यह प्राचीन सिल्क मार्ग की प्रशाखा का अंग था और यहां से भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध थे 1962 में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण के बाद इसे बंद कर दिया गया था। परंतु 44 वर्ष बाद सद्भावना के प्रतीक के रूप में 2006 में इसे फिर खोल दिया गया इस दर्रे Passes कैलाश मानसरोवर के तीर्थ यात्रियों के लिए 2015 में एक अन्य मार्ग खोला गया है

2. जेलेप ला : यह सिक्किम- भूटान सीमा पर 4538 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और चुम्बी घाटी द्वारा सिक्किम का लासा (तिब्बत) से संपर्क स्थापित करता है

अरुणाचल प्रदेश

1. बोमडी ला : यह भूटान के पूर्व तथा भारत-चीन सीमा के थोड़ा सा दक्षिण में महान हिमालय में लगभग 2600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यह अरुणाचल प्रदेश का लासा से संपर्क कराता है हिमपात तथा खराब मौसम के कारण यह शीत ऋतु में बंद रहता है

2. दिहांग : यह अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित है और इस राज्य को म्यामार के मांडले से मिलाता है
3. दिफ़ू : यह भी इस राज्य के पूर्वी भाग में स्थित है और म्यामार के मांडले को छोटा मार्ग उपलब्ध कराता है यह भारत तथा म्यामार के बीच परंपरागत मार्ग है और इस पर ऋतु का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अतः यह सारा साल यातायात के लिए खुला रहता है

4. लिखापानी : यह भी अरुणाचल प्रदेश का संपर्क मांडले से कराता है और सारा साल खुला रहता है

5. यांगसान : लगभग 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा अरुणाचल प्रदेश तथा म्यामार के मांडले में संपर्क स्थापित करता है

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August 22, 2020

वन्य जीव एवं राष्ट्रीय उद्यान Indian wildlife and National Park

वन्य जीव एवं राष्ट्रीय उद्यान

भारतीय उप-महाद्वीप न केवल अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है बल्कि यहाँ पर वनस्पतियों और जीवों की विविध प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं| इसलिए भारत में वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों का निर्माण लुप्तप्राय पक्षियों और जानवरों के संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में किया गया है,

ताकि इन पक्षियों और जानवरों के विलोपन को रोका जा सके| वन्यजीव अभयारण्य में मानव गतिविधियों की अनुमति दे दी जाती है जबकि एक राष्ट्रीय पार्क में ये पूरी तरह से प्रतिबंधित रहती हैं ।

राष्ट्रीय उद्यान

अभयारण्य में शिकार अनुमति के बिना निषिद्ध है हालांकि चराई और मवेशियों की आवाजाही की अनुमति है। जबकि राष्ट्रीय उद्यान में शिकार और चराई पूरी तरह से निषिद्ध हैं ।

भारत में वन्यजीव अभयारण्य निम्न स्थानों पर हैं:

  1. अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह ग्रेट निकोबार
  2. आंध्र प्रदेश:-नागार्जुन सागर श्रीशैलम, एटुरनगरं, कोल्लेरू , पुलिकट
  3. अरुणाचल प्रदेश पाखुई-बामेरी
  4. असम-  गरमपनी
  5. बिहार-  गौतम बुद्ध (गया )
  6. हिमाचल प्रदेश-  गोविंद सागर, शिकारी देवी ( मंडी )
  7. झारखंड:- पलामू, हजारीबाग
  8. कर्नाटक भद्रा, दांदेली, रंगनाथिट्टू
  9. केरल:- वेणाड, नैयर
  10. मध्य प्रदेश :- बोरी – सतपुड़ा पंचमढ़ी, राष्ट्रीय चंबल
  11. गोवा:-भगवान महावीर
  12. महाराष्ट्र:-कन्हेरी, मेलघाट
  13. मिजोरम:- डम्पा
  14. ओडिशा:- सतकसिया, नंदन कानन ( भुवनेश्वर ), चंदक, चिल्का झील
  15. पंजाब:-अबोहर
  16. राजस्थान:- माउंट आबू, ताल छ्प्पर
  17. तमिलनाडु:- वेदंथंगल, प्वाइंट केलिमियर, मुंडनथुराई
  18. उत्तर प्रदेश:- चंद्रप्रभा (वाराणसी)
  19. पश्चिम बंगाल:-महानदी. जोल्दापरा, सजनाखाली

August 22, 2020

information INDIAN FOREST भारत की प्राकृतिक वनस्पति, वन

भारत की प्राकृतिक वनस्पति, वन

भारत में हिमालय तथा प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में स्थानिक वनस्पति पाई जाती है। भारत में पाए जाने वाले पेड़-पौधों की 40 प्रतिशत जातियां तिब्बत तथा चीन से लाकर विकसित की गई हैं। इन्हें बोरियल वनस्पति कहते हैं।

पार्थेनियम नाम की वनस्पति भारत के विभिन्न भागोँ मेँ खूब फैली है यह एक प्रकार की घास है, जिससे स्वास्थ्य तथा चर्म रोग होते हैं। जो वन जलवायु की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं, उन्हें आरक्षित वन कहते हैं।

प्राकृतिक वनस्पति

इसके अंतर्गत अधिकांश राष्ट्रीय पार्क एवं अभ्यारण भी आते हैं। उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन अंडमान निकोबार द्वीप समूह, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा एवं पश्चिम बंगाल तथा पश्चिमी घाट की पश्चिमी ठालों पर पाए जाते हैं।

ये वन आर्थिक दृष्टि से अधिक उपयोगी नहीं हैं। पौधों की जातियां एक शाखा के रुप में रखी जाती हैं, जैसे बोरियल (Boreal)। उष्ण कटिबंधीय शुष्क वन की लकडी बहुत मूल्यवान होती हैं, जैसे- शीशम, बबूल, कीकर महुआ, आदि।

डेल्टाई वनो को मैंग्रोव, दलदली अथवा ज्वारीय वन भी कहते हैं। ये वन गंगा, ब्रहमपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि नदियों के डेल्टाओं में उगते हैं। हिमालय के गिरिपादों में पर्णपाती प्रकार के वन पाए जाते हैं। नीलगिरी, अन्नामलाई और पालनी पहाडियों पर शीतोष्ण कटिबंधीय वनों को शोला कहते हैं।

मैग्नोलिया लॉरल, यूकेलिप्टस, सिनकोना, ठाठर आदि प्रमुख वृक्ष हैं। ये तेल एवं औषधि के लिए प्रयुक्त होते हैं। भारत में 75,000 प्रकार के जीव जंतु तथा 2500 प्रकार की ताजे व खारे पानी की मछलियां पाई जाती हैं। विश्व में 45000 हजार तरह की वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनमें से 5000 प्रकार की वनस्पतियांया सिर्फ भारत में हैं।

राष्ट्रीय कृषि आयोग ने सामाजिक वानिकी को तीन वर्गो में बाटा है – शहरी वानिकी, ग्रामीण वानिकी और फॉर्म वानिकी। देश में 92 राष्ट्रीय उद्यान और लगभग 500 वन्य प्राणी अभ्यारण हैं और ये 1.57 करोड़ हैक्टेअर भूमि पर फैले हैं।

1973 से चलाई जा रही राष्ट्रीय बाघ परियोजना के अंतर्गत कुल 33 उद्यान हैं। भारत विश्व के 17 बडे पारिस्थितिकी विविधता वाले केंद्रों में से एक है।

भारत की वन स्थिति रिपोर्ट 2017

12 फरवरी 2017 को  ‘भारत वन स्‍थिति रिपोर्ट 2017’ (India State of Forest Report-ISFR) जारी की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक़ वन क्षेत्र के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में है।

वनों पर मानवीय आबादी और मवेशियों की संख्‍या के बढ़ते दवाब के बावजूद भारत अपनी वन संपदा को संरक्षित रखने और उसे बढ़ाने में सफल रहा है।

वर्ष 1987 से भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट को द्विवार्षिक रूप से भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा प्रकाशित किया जाता है। यह इस श्रेणी की 15वीं रिपोर्ट है। रिपोर्ट में दी गई जानकारी देश की वन संपदा की निगरानी और उसके संरक्षण के लिये वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित प्रबंधन व्‍यवस्‍था और नीतियां तय करने में काफी सहायक है।

इस रिपोर्ट में वन एवं वन संसाधनों के आकलन के लिये भारतीय दूरसंवेदी उपग्रह रिसोर्स सेट-2 से प्राप्‍त आँकड़ों का इस्‍तेमाल किया गया है  रिपोर्ट में सटीकता लाने के लिये आँकड़ों की जाँच हेतु  वैज्ञानिक पद्धति अपनाई गई है। संयुक्‍त राष्‍ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत को दुनिया के उन 10 देशों में 8वाँ स्‍थान दिया गया है जहाँ वार्षिक स्‍तर पर वन क्षेत्रों में सबसे ज्‍यादा वृद्धि दर्ज की गई है।

ISFR 2017 से प्रमुख तथ्य

  • देश में वनों और वृक्षों से आच्छादित कुल क्षेत्रफल= 8,02,088 वर्ग किमी. (24.39%)
  • भौगोलिक क्षेत्रफल में वनों का हिस्सा = 7,08,273 वर्ग किमी. (21.54%)
  • वनों से आच्छादित क्षेत्रफल में वृद्धि = 6778 वर्ग किमी.
  • वृक्षों से आच्छादित क्षेत्रफल में वृद्धि = 1243 वर्ग किमी.
  • वनावरण और वृक्षावरण क्षेत्रफल में कुल वृद्धि= 8021 वर्ग किमी. (1%)
  • भौगोलिक क्षेत्रफल में वनों और वृक्षावरण का हिस्सा= 24.39%

IFSR 2017 ( प्रमुख बिंदु )

  • इस रिपोर्ट में सबसे उत्‍साहजनक संकेत घने वनों का बढ़ना है।
  • रिपोर्ट में वनों को घनत्व के आधार पर तीन वर्गों-बहुत घने जंगल , मध्यम घने जंगल और खुले जंगल में बाँटा गया है।
  • घने वन क्षेत्र वायुमंडल से सर्वाधिक मात्रा में कार्बन डाईऑक्‍साइड सोखने का काम करते हैं। घने वनों का क्षेत्र बढ़ने से खुले वनों का क्षेत्र भी बढ़ा है।
  • रिपोर्ट के ताजा आकलन के अनुसार देश के 15 राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों का 33% भू-भाग वनों से घिरा है।
  • इनमें से 7 राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों जैसे- मिज़ोरम, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, नगालैंड, मेघालय और मणिपुर का 75% से अधिक भूभाग वनाच्‍छादित है।
  • जबकि त्रिपुरा, गोवा, सिक्‍किम, केरल, उत्‍तराखंड, दादरा नगर हवेली, छत्‍तीसगढ़ और असम का 33 से 75% के बीच का भू-भाग वनों से घिरा है।

  • देश का 40% वनाच्‍छादित क्षेत्र 10 हज़ार वर्ग किलोमीटर या इससे अधिक के 9 बड़े क्षेत्रों के रूप में मौजूद है।
  • देश में मैंग्रोव वनस्‍पति का क्षेत्र 4921 वर्ग किमी. है, जिसमें वर्ष 2015 के आकलन की तुलना में कुल 181 वर्ग किमी. की वृद्धि हुई है।
  • मैंग्रोव वनस्‍पति वाले सभी 12 राज्‍यों में पिछले आकलन की तुलना में सकारात्‍मक बदलाव देखा गया है।
  • मैंग्रोव वनस्‍पति जैव विविधता में समृद्ध होती है जो कई तरह की पारिस्‍थितिकीय आवश्‍यकताओं को पूरा करती है।
  • रिपोर्ट के अनुसार देश में वाह्य वन एवं वृक्षावरण का कुल स्टॉक 582.377 करोड़ घन मीटर अनुमानित है, जिसमें से 421.838 करोड़ घन मीटर क्षेत्र वनों के अंदर है, जबकि 160.3997 करोड़ घन मीटर क्षेत्र वनों के बाहर है।
  • पिछले आकलन की तुलना में बाह्य एवं वृक्षावरण स्टॉक में 5.399 करोड़ घन मीटर की वृद्धि हुई है, जिसमें 2.333 करोड़ घन मीटर की वृद्धि वन क्षेत्र के अंदर तथा 3.0657 करोड़ घन मीटर की वृद्धि वन क्षेत्र के बाहर हुई है।
  • इस हिसाब से यह वृद्धि पिछले आकलन की तुलना में 3 करोड़ 80 लाख घन मीटर रही।

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August 22, 2020

भारत की मिट्टियां क्या है??? Indian SOILS

भारत की मिट्टियां

भारत में सर्वाधिक क्षेत्रफल पर पाई जाने वाली मिट्टी क्रमानुसार-

  • जलोढ़ मिट्टी – 43 %
  • लाल मिट्टी – 18 %
  • काली मिट्टी – 15 %
  • लैटेराइट मिट्टी – 3.7%

भारत की सभी मिट्टियों में तीन तत्वों की कमी पाई जाती है।

  • ह्यूमस
  • नाइट्रोजन
  • फास्फोरस

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली  (Indian Council of Agricultural Research-I.C.A.R.) ने भारतीय मिट्टी को 8 भागों में बांटा है-

  1. लाल मिट्टी Red Soil
  2. काली मिट्टी Black Soil
  3. लैटेराइट मिट्टी Laterite Soil
  4. क्षारयुक्त मिट्टी Saline and Alkaline Soil
  5. हल्की काली एवं दलदली मिट्टी Peaty and Other Organic soil
  6. रेतीली मिट्टी Arid and Desert Soil
  7. कांप मिट्टी Alluvial Soil
  8. वनों वाली मिट्टी Forest Soil

भारत की मिट्टियां

1. लाल मिट्टियां

भारत में दूसरा सर्वाधिक क्षेत्र 18% में पाया जाने वाला मिट्टी लाल मिट्टी है। लाल मिट्टी लोहे के ऑक्साइड के कारण लाल दिखाई देता है। लोहा का ऑक्सीकरण हो जाता है अर्थात लोहा जब खुला में रहता है तो वह ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में आ जाता है जिसके कारण लोहा में जंग लग जाता है। यह जंग लोहा का ऑक्साइड कहलाता है।

यह मिट्टी अपक्षय के प्रभाव से चट्टानों के टूट-फुट से बनती है| यह मिट्टी प्रमुख रूप से मध्य-प्रदेश, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, छोटा नागपुर के पठार, आंध्र प्रदेश के दण्डकारण्य क्षेत्र, पश्चिम बंगाल और मेघालय  में पाई जाती है|

पठारी भारत का आधा पूर्वी भाग लाल मिट्टी का क्षेत्र है तथा आधा पश्चिमी भाग काली मिट्टी का क्षेत्र है। लाल मिट्टी पठारी भारत के पूर्वी भाग तथा पूरे दक्षिण भारत में पाया जाता है। इसका विस्तार मुख्य रूप से तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ उड़ीसा, पूर्वी मध्य प्रदेश तथा झारखंड में है लेकिन लाल मिट्टी का सर्वाधिक क्षेत्रफल तमिलनाडु में है।

पठार तथा पहाड़ियों पर इन मिट्टियों की उर्वराशक्ति कम होती है और ये कंकरीली तथा रूखडी होती हैं, किंतु नीचे स्थानों में अथवा नदियों की घाटियों में ये दोरस हो जाती हैं और अधिक उपजाऊ हो जाती  है और इनमें निक्षालन  भी अधिक हुआ है।

तटीय मैदानों और काली मिट्टी के क्षेत्र को छोड़कर, प्रायद्वीपीय पठार के अधिकांश भाग में लाल मिट्टी पाई जाती है। इस मिट्टी में मोटे अनाज पैदा होते है जैसे गेंहू, धान, अलसी आदि।  इस मिट्टी का संघटन इस प्रकार है-

  • अघुलनशील तत्व = 90.47%
  • लोहा = 3.61%
  • एल्यूमिनियम = 2.92%
  • जीवांश = 1.01%
  • मैग्निशिया = 0.70%
  • चूना = 0.56%
  • कार्बन डाई ऑक्साइड = 0.30%
  • पोटाश = 0.24%

2. काली मिट्टियां

यह मिट्टी ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा से बनती है| भारत में यह लगभग 5 लाख वर्ग-किमी. में फैली है| महाराष्ट्र में इस मिट्टी का सबसे अधिक विस्तार है। इसे दक्कन ट्रॅप से बनी मिट्टी भी कहते हैं। इस मिट्टी में चुना, पोटॅश, मैग्निशियम, एल्यूमिना और लोहा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।

काली मिट्टी का विस्तार महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश तथा उत्तरी कर्नाटक के क्षेत्र तक है। दक्षिण पूर्वी राजस्थान काली मिट्टी में कपास की खेती अधिक होती है इसलिए इसे कपासी मिट्टी कहते हैं।

कपासी, रेगुर लावा मिट्टी, करेल मिट्टी उत्तर प्रदेश में करेल मिट्टी को काली मिट्टी कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काली मिट्टी को चेरनोजम कहा गया है।

चेरनोजम मिट्टी मुख्य रूप से काला सागर के उत्तर में यूक्रेन में तथा ग्रेट लेक्स के पश्चिम में संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में पाई जाती है।

काली मिट्टी को लावा मिट्टी भी कहते हैं क्योंकि यह दक्कन ट्रैप के लावा चट्टानों की अपक्षय अर्थात टूटने फूटने से निर्मित हुई मिट्टी है। दक्कन पठार के अलावा काली मिट्टी मालवा पठार की भी विशेषता है अर्थात मालवा पठार पर भी काली मिट्टी पाई जाती है।

काली मिट्टी का सर्वाधिक विस्तार महाराष्ट्र राज्य में है। काली मिट्टी की प्रमुख विशेषता यह है कि उसमें जल धारण करने की सर्वाधिक क्षमता होती है काली मिट्टी बहुत जल्दी चिपचिपी हो जाती है तथा सूखने पर इस में दरारें पड़ जाती हैं इसी गुण के कारण काली मिट्टी को स्वत जुताई वाली मिट्टी कहा जाता है।

कपास की खेती सर्वाधिक गुजरात राज्य में होती है अर्थात कपास का उत्पादन सर्वाधिक गुजरात राज्य में होता है।

शुष्क कृषि- जिन क्षेत्रों में वर्षा कम होती है {जैसे – राजस्थान वृष्टि छाया प्रदेश का क्षेत्र} वहां खेती की एक विशेष पद्धति अपनाई जाती है जो जल बचत पर आधारित होती है। ऐसे कृषि में पानी सीधे पौधों को ही मिलती है। किसान बरसात से पहले खेतों की जुताई इसलिए करते हैं ताकि मिट्टी बरसात के समय अधिक से अधिक नमी अर्थात जल धारण कर सके।

इसका काला रंग शायद अत्यंत महीन लौह अंशों की उपस्थिति के कारण है। इस मिट्टी में गन्ना, केला, ज्वार, तंबाकू, रेंड़ी, मूँगफली और सोयाबीन की भी अच्छी पैदावार होती है।

इस मिट्टियां का रासायनिक संघटन इस प्रकार है-

  • फेरिक ऑक्साइड = 11.24%
  • एल्यूमिना = 9.39%
  • जल तथा जीवांश = 5.83%
  • चूना = 1.81%
  • मैग्निशिया = 1.79%

3. लैटेराइट मिट्टियां

लैटेराइट मिट्टी का निर्माण दो परिस्थितियों में होता है।

  • 1-  200 सेंटीमीटर से अधिक वार्षिक वर्षा
  • 2-  अधिक गर्मी

उपरोक्त दोनों परिस्थिति भारत के तीन क्षेत्रों में पाई जाती है।

  • 1- पश्चिमी घाट पर
  • 2- उड़ीसा तट पर
  • 3- शिलांग पठार पर

भारत में लैटेराइट मिट्टी का सर्वाधिक क्षेत्रफल केरल में है।

 भारत में लैटेराइट मिट्टियां का विस्तार

  • 1- पश्चिमी घाट
  • 2- तमिलनाडु की शिवाराय पहाड़ी
  • 3- उड़ीसा का तट
  • 4- झारखंड के राजमहल पहाड़ी
  • 5- मेघालय एवं असम की पहाड़ियां अर्थात मेघालय के शिलांग पठार एवं असम के मिकीर रेंगमा पहाड़ी पर

लैटेराइट मिट्टी भारत में चौथा सर्वाधिक क्षेत्रफल पर विस्तृत मिट्टी है। ईट बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी लैटेराइट मिट्टी है। लैटेराइट मिट्टी में ह्यूमस, नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश (k) की कमी पाई जाती है। लैटेराइट मिट्टी में लोहे और एल्यूमीनियम के ऑक्साइड की प्रचुरता होती है और लोहे के ऑक्साइड के कारण ही लैटेराइट मिट्टी का रंग लाल होता है।

इन क्षेत्रों में अधिक वर्षा के कारण तथा क्रम से भीगने एवं सूखने के कारण इन क्षेत्रों की मिट्टियों में सिलिका पदार्थ का निक्षालन हो गया है अर्थात सिलिका पदार्थ रिस कर नीचे की ओर चला गया है। लेटेराइट मिट्टी का निर्माण सिलिका के निक्षालन से हुआ है।

लैटेराइट मिट्टी एक निक्षालित मिट्टी है। लैटेराइट मिट्टी की उपजाऊ मिट्टी है इसलिए या खानदान की लैटेराइट मिट्टी की उपजाऊ मिट्टी है इसलिए या खाद्यान्न की खेती के लिए उपयुक्त नहीं है। यहां पर चाय, कॉफी, मसाला, काजू, चीनकोना की खेती होती है। यह मिट्टी अम्लीय होती है।

इस मिट्टी का रासायनिक संघटन इस प्रकार है-

  • लोहा = 18.7%
  • सिलिका = 32.62%
  • एल्यूमिना = 25.2%
  • फास्फ़ोरस = 0.7%
  • चूना = 0.42%

4. मरुस्थलीय मिट्टियां

मरुस्थलीय मिट्टी का निर्माण पश्चिमी भारत के शुष्क क्षेत्रों में हुआ है राजस्थान तथा राजस्थान के आसपास के राज्यों में। इसका विस्तार भारत में दक्षिणी पंजाब, दक्षिणी हरियाणा, समग्र राजस्थान तथा गुजरात के कच्छ क्षेत्र में है। इसका मिट्टी में खाद्यान्नों की खेती संभव नहीं है इसलिए यहां पर ज्वार, बाजरा, सरसों एवं मोटे अनाज की खेती की जाती है।

ज्वार, बाजरा, सरसों एवं मोटे अनाज उत्पादन में राजस्थान सबसे आगे है क्योंकि मरुस्थलीय मिट्टी का सर्वाधिक क्षेत्रफल राजस्थान में है राजस्थान के गंगानगर जिला जहां से इंदिरा गांधी नहर के माध्यम से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है वहां पर खाद्यान्नों की खेती भी की जाती है।

हरित क्रांति के क्षेत्रों में राजस्थान का श्रीगंगानगर जिला भी शामिल था। {गेहूं} पंजाब में हरिके नाम के स्थान पर व्यास नदी सतलज से मिलती है इनके मिलन स्थान पर पोंग नामक बांध बनाकर इस बांध से इंदिरा गांधी नहर निकालकर राजस्थान की ओर ले जाया गया है तथा इस नहर से राजस्थान के 7 जिलों की सिंचाई की जाती है।

5. पर्वतीय मिट्टियां

पर्वतीय मिट्टी भारत में हिमालय के साथ-साथ पाई जाती है इस कारण जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पाई जाती है। हिमालय पर वनस्पतियों एवं जीवों की प्रचुरता है इसी कारण हिमालय के पर्वतीय मिट्टी में ह्यूमस की प्रचुरता पाई जाती है।

ह्यूमस की अधिकता के कारण पर्वतीय मिट्टी में अम्लीयता के गुण आ गए हैं जिसके कारण यहां सेब, नाशपाती एवं चाय की खेती होती है।पर्वतीय मिट्टी एक पूर्ण विकसित मिट्टी नहीं है बल्कि यह एक अविकसित तथा निर्माणधीन मिट्टी है। अर्थात इसका निर्माण अभी भी हो रहा है।

6. जलोढ़ मृदा मिट्टियां

जलोढ़ मिट्टी को कॉप या  कद्दारी मिट्टी भी कहते हैं। यह भारत के सर्वाधिक क्षेत्रफल 43% पर विस्तृत है। यह भारत में मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में पाई जाती है।

  1. उत्तर भारत के मैदान में
  2. तटीय क्षेत्रों में

उत्तर भारत के मैदान में जलोढ़ मिट्टी सतलज के मैदान से लेकर पूर्व में ब्रम्हपुत्र के मैदान तक मिलता है। तटीय मैदान के अंतर्गत जलोढ़ मिट्टी महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी नदियों के डेल्टा क्षेत्र में और पश्चिमी तटीय मैदान के अंतर्गत केरला और गुजरात में पाई जाती है। जलोढ़ मिट्टी नदियों के द्वारा पहाड़ों को काटकर लाई गई है तथा मैदानों में बिछा दी गई है।

जलोढ़ मिट्टियां दो प्रकार की होती है।

  • 1- खादर
  • 2- बांगर

नदी के आसपास बाढ़ क्षेत्र की जलोढ़ मिट्टी खादर मिट्टी कहलाती है। खादर मिट्टी हर साल नई हो जाती है बाढ़ के माध्यम से नदी से दूर ऊंचे क्षेत्रों के पुराने जलोढ़ को बांगर मिट्टी कहते हैं।

बांगर मिट्टी हर साल नहीं नहीं होती है अतः खादर मिट्टी अपेक्षाकृत अधिक उपजाऊ होता है। भारत के सभी मिट्टियों में सर्वाधिक उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी है तथा जलोढ़ मिट्टी में खादर मिट्टी सर्वाधिक उपजाऊ है। बांगर क्षेत्र की मिट्टी में खुदाई करने पर कैल्शियम कार्बोनेट या चूना की ग्रंथियां मिलती हैं।

यह ग्रंथियां हिमालय क्षेत्र को काटकर नदियों द्वारा लाई गई हैं तथा इन्हें नई मिट्टियों के द्वारा ढक दिया गया है। इन्हें स्थानीय भाषा में ककड़ कहा जाता है। जलोढ़ मिट्टी में भी ह्यूमस, नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी पाई जाती है। जलोढ़ मिट्टी में पोटेशियम और चूना प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

7. कांप मिट्टियां

उत्तर के विस्तृत मैदान तथा प्रायद्वीपीय भारत के तटीय मैदानों में मिलती है। यह अत्यंत ऊपजाऊ है इसे जलोढ़ या कछारीय मिट्टी भी कहा जाता है। यह भारत के लगभग 40% भाग में पाई जाती है| यह मिट्टी सतलज, गंगा, यमुना, घाघरा,गंडक, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों द्वारा लाई जाती है|

इस मिट्टी में कंकड़ नही पाए जाते हैं। इस मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और वनस्पति अंशों की कमी पाई जाती है| खादर में ये तत्व भांभर की तुलना में अधिक मात्रा में वर्तमान हैं, इसलिए खादर अधिक उपजाऊ है।

भांभर में कम वर्षा के क्षेत्रों में, कहीं कहीं खारी मिट्टी ऊसर अथवा बंजर होती है। भांभर और तराई क्षेत्रों में पुरातन जलोढ़, डेल्टाई भागोंनवीनतम जलोढ़, मध्य घाटी में नवीन जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। पुरातन जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र को भांभर और नवीन जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र  को खादर  कहा जाता है।

पूर्वी तटीय मैदानों में यह मिट्टी कृष्णा, गोदावरी, कावेरी और महानदी के डेल्टा में प्रमुख रूप से पाई जाती है| इस मिट्टी की प्रमुख फसलें खरीफ और रबी जैसे- दालें, कपास, तिलहन, गन्ना और गंगा-ब्रह्मपुत्र घाटी में जूट प्रमुख से उगाया जाता है।

8. क्षारयुक्त मिट्टियां

शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों, दलदली क्षेत्रों, अधिक सिंचाई वाले क्षेत्रों में यह मिट्टी पाई जाती है। इन्हे थूर , ऊसर, कल्लहड़, राकड़, रे और चोपन के नामों से भी जाना जाता है।

शुष्क भागों में अधिक सिंचाई के कारण एवं अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल-प्रवाह दोषपूर्ण होने एवं जलरेखा उपर-नीचे होने के कारण इस मिट्टी का जन्म होता है। इस प्रकार की मिट्टी में भूमि की निचली परतों से क्षार या लवण वाष्पीकरण द्वारा उपरी परतों तक आ जाते हैं।

इस मिट्टी में सोडियम, कैल्सियम और मैग्निशियम की मात्रा अधिक पायी जाने से प्रायः यह मिट्टी अनुत्पादक हो जाती है।

9. हल्की काली एवं दलदली मिट्टियां

इस मिट्टी में ज़्यादातर जैविक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। यह सामान्यतः आर्द्र -प्रदेशों में मिलती है। दलदली मिट्टी उड़ीसा के तटीय भागों, सुंदरवन के डेल्टाई क्षेत्रों, बिहार के मध्यवर्ती क्षेत्रों, उत्तराखंड के अल्मोड़ा और तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी एवं केरल के तटों पर पाई जाती है।

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August 21, 2020

भारत के व्यापार एवं उद्योग Indian Trade and Industry

भारत के व्यापार एवं उद्योग

स्वतंत्रता पूर्व औद्योगिक विकास

व्यापार एवं उद्योग

भारत में औपनिवेशिक काल के दौरान उद्योगों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया |उद्योगों का प्रथम सफल प्रयास 1854 ईसवी में मुंबई में सूती वस्त्र बनाने और 1855 में रीसरा में (कोलकाता के निकट )जूट कारखाने का रहा| कोयला खनन उद्योग की शुरुआत भी लगभग उसी समय हुई|

1874 ईसवी में कुल्टी मे लोहा बनाने का कारखाना स्थापित किया गया |वर्ष 1907 में जमशेदपुर में टाटा लौह इस्पात के कारखाने की स्थापना से औद्योगिक विकास को नई दिशा मिली|

स्वतंत्रता के पश्चात औद्योगिक विकास

स्वतंत्रता पश्चात सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 6 अप्रैल 1948 को प्रथम औद्योगिक नीति की घोषणा की| जिसमें मिश्रित अर्थव्यवस्था की संकल्पना पर बल दिया गया| बाद में समाजवादी ढंग से समाजवाद की स्थापना के उद्देश्य में 1948 की औद्योगिक नीति में व्यापक परिवर्तन करते हुए दूसरी औद्योगिक नीति की घोषणा 30 अप्रैल 1956 को की गई| उद्योगों को सार्वजनिक-निजी तथा संयुक्त क्षेत्रों में विभाजित किया गया|

24 जुलाई 1991 को सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र में उदारीकरण की नीति की घोषणा की | औद्योगिक विकास की धीमी गति बड़े पैमाने पर बेरोजगारी, सार्वजनिक क्षेत्र में औद्योगिक रुग्णता, महंगाई की उच्च दर तथा विदेशी मुद्रा विनिमय के संकट के परिप्रेक्ष्य में औद्योगिक नीति में यह एक क्रांतिकारी उद्भव था| जिसका परिणाम यह हुआ कि हमारे औद्योगिक उत्पादन में काफी वृद्धि हुई |

Indian Trade and Industry important facts

  1. HMT बेंगलुरु की स्थापना 1963 में किस देश की सहायता से किया गया था- स्विट्ज़रलैंड
  2. भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) 1964 की 6इकाइयाँ कहां- कहां स्थापित है- भोपाल, तिरुचिरापल्ली, हैदराबाद, जम्मू ,बेंगलुरु एवं हरिद्वार
  3. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च(NIPER) कहां स्थित है- मोहाली, चंडीगढ़
  4. एस. एस. भटनागर अवार्ड कौन प्रदान करता है- नीपेर(NIPER)
  5. प्लास्टिक उद्योग के कच्चे माल कहां से प्राप्त होते हैं- तेल शोधनशालाओं से
  6. उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद एवं कर्नाटक में बेलगाम जिला किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध है- कांच उद्योग
  7. नेपानगर, होशंगाबाद, टीटागढ़ तथा राजमुंद्री किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध है- कागज उद्योग
  8. देश में पहली 4जी मोबाइल सेवा की शुरुआत कहां से और कब की गई- 10 अप्रैल, 2012 को कोलकाता से।
  9. पश्मीना ऊन किससे प्राप्त होता है- बकरी से
  10. विश्व प्रसिद्ध अंगोरा ऊन प्राप्त किया जाता है- खरगोश से
  11. भारत का प्रथम आधुनिक ऊन कारखाना कहां स्थापित किया गया-कानपुर (1876)
  12. ऊन उत्पादक अग्रणी राज्य है-पंजाब
  13. भदोही, मिर्जापुर एवं गोपीगंज किस कुटीर उद्योग के लिए प्रसिद्ध है-कालीन निर्माण
    दवा और फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र के सार्वजनिक क्षेत्र की पहली कंपनी कौन सी है- हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड पिंपरी, पुणे (1954)
  14. हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड(HAL) की तीन सहायक कंपनियां कहां स्थापित है- बेंगलुरु, नागपुर एवं इम्फाल में

August 21, 2020

भारत के भौतिक प्रदेश Indian Physical territory

भारत के भौतिक प्रदेश

भौतिक भूगोल (Physical geography) भूगोल की एक प्रमुख शाखा है जिसमें पृथ्वी के भौतिक स्वरूप का अध्ययन किया जाता हैं। यह धरातल पर अलग अलग जगह पायी जाने वाली भौतिक परिघटनाओं के वितरण की व्याख्या व अध्ययन करता हैसाथ ही यह भूविज्ञान, मौसम विज्ञान, जन्तु विज्ञान और रसायन शास्त्र से भी जुड़ा हुआ है।  इसकी कई उपशाखाएँ हैं जो विविध भौतिक परिघटनाओं की विवेचना करती हैं।

भौतिक भूगोल से जुड़े विषय और इसकी शाखायें:

खगोलीय भूगोल : यह पार्थिव घटनाओं का अध्ययन करता है, जिसमें मुख्य रूप से पृथ्वी की सतह के साथ-साथ सूर्य, चन्द्रमा और सौरमंडल के ग्रहों को शामिल किया जाता है।

भू-आकृति विज्ञान : यह पृथ्वी के स्थलरूपों काअध्ययन करता है। इसके अन्तर्गत जल, वायु और हिमानी के अपरदनात्मक, परिवहनात्मक और निक्षेपात्मक कार्यों द्वारा स्थलरूपों की उत्पत्ति व विकास शामिल है।

शैल

समुद्र विज्ञान : यह महासागरीय तल की गहराइयों, धाराओं, प्रवाल भित्तियों और महाद्वीपीय विस्थापन आदि से सम्बंधित महासागरीय संघटकों का अध्ययन करता है।

जलवायु विज्ञान : जलवायु विज्ञान वायुमंडलीय दशाओं और सम्बंधित जलवायविक और मौसमी परिघटनाओं का अध्ययन है। इसके अन्तर्गत वायुमंडलीय संघटन, जलवायविक प्रदेशों तथा मौसमों आदि का अध्ययन शामिल है।

  • भूकम्प विज्ञान
  • ज्वालामुखी
  • भूविज्ञान

जैव भूगोल- : 

यह स्थान की जैविक घटनाओं के अध्ययन से सम्बंधित है, विशेष तौर पर विविध प्रकार के वनस्पतियों और वन्य जीवों के वितरणों का अध्ययन करता है। जैव भूगोल को पादपया वनस्पति भूगोल, जन्तु भूगोल और मानव पारिस्थितिकी के रूप में उपविभाजित किया जा सकता है।

भारत की भूगर्भिक संरचना की विविधता के उच्चावच तथा भौतिक लक्षणों की विविधता ने जन्म दिया है देश के 10.6% क्षेत्र पर पर्वत 18.5 प्रतिशत क्षेत्र पर पहाड़िया 27.7 प्रतिशत क्षेत्र पर पठार और 43.2 प्रतिशत क्षेत्र पर मैदान है भारत में मुख्यतः 4 बड़ें , मध्यम स्तर के 20 , सूक्ष्म स्तर के 58 भौतिक विभाग है।

  1. मैदान➖43•2%
  2. पर्वत➖10•6%
  3. पहाड़ी ➖18•5%
  4. पठार➖28•7%

उच्चावच एवं संरचना के आधार पर भारत को 5 भू- आकृतिक विभागों में बांटा जा सकता है।

1 उत्तर का पर्वतीय प्रदेश
2 प्रायद्वीपीय पठार
3 उत्तर भारत का मैदान
4 तटवर्ती मैदान

5 द्वीपीय भाग

1 उत्तर भारत का पर्वतीय क्षेत्र

भारत की उत्तरी सीमा पर विश्व की सबसे ऊंची एवं पूर्व पश्चिम में सबसे बड़ी पर्वतमाला है। यह विश्व की नवीनतम मोड़दार पर्वत श्रेणी है। यह भारत के 5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है लंबाई पूर्व से पश्चिम 2.5 हजार किलोमीटर, उत्तर से पश्चिम 160 से 400 किलोमीटर , इस पर्वतमाला की औसत ऊंचाई 6000 मीटर है

इसके उत्तर में तिब्बत का पठार दक्षिण में सिंधु गंगा ब्रह्मपुत्र का मैदान है हिमालय पर्वतमाला सिंधु नदी के मोड़ से प्रारंभ होकर ब्रह्मपुत्र नदी मोड़ तक है इस पर्वतमाला का फैलाव 22 देशांतर रेखाओं के बीच में स्थित है इस पर्वतमाला को चार समानांतर भागों में बंटा है

A ट्रांस हिमालय
B वृहद हिमालय
C लघु या मध्य हिमालय
D शिवालिक हिमालय

1. ट्रांस हिमालय

 महान हिमालय के पश्चिमी भाग में तीन श्रेणियां स्थित है यह तीनों श्रेणियां जम्मू कश्मीर में स्थित है

A काराकोरम
B लद्दाख
C जास्कर

ट्रांस हिमालय हिमालय के उत्तर में स्थित है हिमालय से प्राचीन पर्वत है गॉडविन ऑस्टिन/K-2(8611.मी.) काराकोरम श्रेणी की सर्वोच्च चोटी है। जो भारत की सबसे ऊंची चोटी भी है। विश्व की दूसरी उच्चतम पर्वत चोटी है इंदिरा कॉल और काराकोरम दर्रा ट्रांस हिमालय में स्थित है काराकोरम का प्राचीन नाम कृष्णागिरी है काराकोरम यूरेशियाई प्लेट पर स्थित है ट्रांस हिमालय का भाग है

काराकोरम पर्वत के उत्तर में पामीर अघील पर्वत यारकंद नदी दक्षिण में शोक नदी सिंधु नदी स्थित है भारत का सबसे बड़ा ग्लेशियर सियाचिन ग्लेशियर इसी पर्वत श्रंखला में स्थित है काराकोरम दर्रा भारत व चीन के मध्य स्थित है कराकोरम के पश्चिम में स्थित है पर्वत चोटियां

  • गेशर ब्रम1
  • गेशर ब्रम2

लद्दाख काराकोरम के दक्षिण में तथा जम्मू कश्मीर के पूर्व में स्थित है लद्दाख से सिंधु नदी बहती है लद्दाख भारत का न्यूनतम वर्षा वाला क्षेत्र है सिंधु नदी लद्दाख पर्वत को काटकर आगे बढ़ती है यह नदी इस पर्वत को काटकर बूंजा गार्ज का निर्माण करती है लद्दाख की सबसे ऊंची चोटी राकापोशी है ट्रांस हिमालय वृहत हिमालय से इंडो-सांगपो शचर जोन द्वारा अलग होती है।

2. हिमाद्रि या वृहद हिमालय

जिसे हिमाद्रि भी कहा जाता है हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी है।इसकी औसत ऊंचाई 6000 मीटर है। विश्व के सभी महत्वपूर्ण शिखर इसी में ही स्थित है।

  • एवरेस्ट(नेपाल में)➖8848 मी.
  •  कंचनजंघा➖8558 मी.
  •  नंगा पर्वत,नंदा देवी आदि।

इसके क्रोड में आग्नेय शैलें पायी जाती है जो ग्रेनाइट तथा गैब्रो नामक चट्टानों के रूप में हैं। पार्श्वों और शिखरों पर अवसादी शैलों का विस्तार है। कश्मीर की जांस्कर श्रेणी भी इसी का हिस्सा मानी जाती है।

हिमालय की सर्वोच्च चोटियाँ मकालू, कंचनजंघा, एवरेस्ट, अन्नपूर्ण और नामचा बरवा इत्यादि इसी श्रेणी का हिस्सा हैं। यह श्रेणी मुख्य केन्द्रीय क्षेप द्वारा मध्य हिमालय से अलग है। हालांकि पूर्वी नेपाल में हिमालय की तीनों श्रेणियाँ एक दूसरे से सटी हुई हैं।

3. लघु अथवा मध्य हिमालय श्रेणी

यह महान हिमालय के दक्षिण के उसके समानान्तर विस्तृत है। इसकी चौड़ाई 80 से 100 किमी. तक औसत ऊंचाई 1,828 से 3,000 के बीच पायी जाती है। इस श्रेणी में नदियों द्वारा 1,000 मीं. से भी अधिक गहरे खड्डों अथवा गार्जों का निर्माण किया गया है।

यह श्रेणी मुख्यतः छोटी-छोटी पर्वत श्रेणियों जैसे – धौलाधार, नागटीवा, पीरपंजाल, महाभारत तथा मसूरी कासम्मिलित रूप है। इस श्रेणी के निचले भाग में देश के शिमला, मसूरी, नैनीताल, चकराता, रानीखेत, दार्जिलिंग आदि स्थित है।

वृहत तथा लघु हिमालय के बीच विस्तृत घाटियां हैं जिनमें कश्मीर घाटी तथा नेपाल में काठमांडू घाटी प्रसिद्ध है श्रेणी के ढालों पर मिलने वाले छोटे-छोटे घास के मैदानों को जम्मू-कश्मीर में मर्ग (जैसे-सोनमर्ग, गुलमर्ग आदि) तथा उत्तराखण्ड में बुग्याल एवं पयार कहा जाता हे।

4. शिवालिक हिमालय

यह हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है एवं इसको इसे चुरिया श्रेणी या बाह्य हिमालय भी कहा जाता  के नाम से भी जाना जाता है। यह हिमालय पर्वत की दक्षिणतम श्रेणी है जो लघु हिमालय के दक्षिण में इसके समानांतर पूर्व-पश्चिम दिशा में फैली हुई है। इसकी औसत ऊंचाई  900  से  12,00  मीटर तक औसत चौड़ाई 10 से 50 किमी है।

इसका विस्तार पाकिस्तान के पोटवार पठार से पूर्व में कोसी नदी तक है। गोरखपुर के समीप इसे डूंडवा श्रेणी तथा पूर्व की ओर चूरियामूरिया श्रेणी के स्थानीय नाम से भी पुकारा जाता है। यह हिमालय पर्वत का सबसे नवीन भाग है।

लघु तथा वाह्म हिमालय के बीच पायी जाने वाली विस्तृत घाटियों को पश्चिम में ‘दून’ तथा पूर्व में ‘द्वार’ कहा जाता है। देहरादून, केथरीदून तथा पाटलीदून और हरिद्वार इसके प्रमुख उदाहरण है।

हिमालय पर्वत श्रेणियों की दिशा में असम से पूर्व से उत्तर पूर्व हो जाती है। नामचाबरचा के आगे यह श्रेणियाँ दक्षिणी दिशा में मुड़कर पटकोई, नागा, मणिपुर, लुशाई, अराकानयोमा, आदि श्रेणियों के रूप में स्थित हैं जो भारत एवं म्यान्मार के मध्य सीमा बनाती है।

शिवालिक को जम्मू में जम्मू पहाड़ियाँ तथा अरुणाचल प्रदेश में डफला, गिरी, अवोर और मिशमी पहाड़ियों के नाम से भी जाना जाता है। अक्साईचीन, देवसाई, दिषसंग तथा लिंगजीतांग के उच्च तरंगित मैदान इन पर्वतों के निर्माण से पहले ही क्रिटेशश काल में बन चुके थे जो अपरदन धरातल के प्रमाण हैं।

हिमालय के दर्रे➖

  • 1 काराकोरम दर्रा
  • 2 शिपकीला दर्रा
  • 3 नाथूला दर्रा
  • 4 बोमडीला दर्रा

विभिन्न नदियों ने हिमालय क्षेत्र को चार प्रमुख प्राकृतिक भगाओ भागों में विभाजित कर रखा है।

1. कश्मीर या पंजाब हिमालय

  • सिंधु और सतलज
  • पीरपंजाल श्रेणी व जास्कर इसी का भाग है।

2. कुमायूं हिमालय

  • सतलज व काली
  • नंदा देवी,कामेट,केदारनाथ

3. नेपाल हिमालय

  • काली व तिस्ता
  • एवरेस्ट,कंचनजंगा, मकालू

4. असम हिमालय

  • तीस्ता तथा दिहांग(सांगपो व ब्राह्मपुत्र)

2 प्रायद्वीपीय पठार

भारत का सबसे पुराना भौतिक विभाग,  16 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तृत, भारत के लगभग 49% भाग पर फैला हुआ है। इसमें तीन प्रकार की स्थलाकृतियां मिलती है।

  • 1 पर्वत
  • 2 पठार
  • 3 भ्रंश घाटी

विंध्याचल पर्वतमाला यह भारत का महान जल विभाजक कहलाता है। सतपुड़ा पर्वतमालाएं यह भ्रंश पर्वत है। पश्चिमी घाट यह एक भ्रंश कगार है,जिसका निर्माण अफ्रीका की प्लेट के अलग होने के कारण हुआ।

1 मालवा के पठार

  • मालवा के पठार विस्तार गुजरात,राजस्थान व मध्यप्रदेश
  • बेसाल्ट लावा से निर्मित
  • काली मिट्टी मिलती है।
  • यह कपास व अफीम की खेती हेतु प्रसिद्ध है।

2 बुंदेलखंड का पठार

  • विस्तार➖ यूपी एवं मध्य प्रदेश
  • नीस चट्टानें मिलती है।
  • उत्खात भूमि।

3 बघेलखंड का पठार

  • चूना पत्थर की चट्टानों से निर्मित
  • विस्तार➖मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़
  • यहाँ सीमेंट उद्योग का विकास हुआ।

4 छोटा नागपुर का पठार

  • आर्कियन युग की चट्टानें मिलती हैं। जिसके कारण यहां सर्वाधिक खनिज मिलते हैं।
  • इसीलिए भारत का खनिजों का अजायबघर कहलाता है।
  • इसका विस्तार➖ झारखंड
  • लोहा मैगनीज कोयला अभ्रक बॉक्साइट मिलता है।
  • छोटा नागपुर पठार को भारत का रूर प्रदेश व सार प्रदेश कहते हैं।

5 दक्कन लावा पठार

  • यह महाराष्ट्र राज्य में स्थित है।
  • यह त्रिभुजाकार में फैला है।
  • भारत की सर्वाधिक काली मिट्टी यहां मिलती है। जिसे स्थानीय भाषा में रेगुर कहते है। यह कपास की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
  • इसी पठार में नागपुर स्थित है। जो संतरा उत्पादन हेतु प्रसिद्ध है।
  • इस पठार को दक्कन ट्रैप भी कहते हैं।

3. तटवर्ती मैदान

1. केरल का तटीय भाग

  • पश्चिमी तट का दूसरा सर्वाधिक लंबा व चौड़ा भाग है।
  • मुख्य बंदरगाह➖ कोच्चि (पेट्रोलियम आयातक और समुद्री उत्पाद व मसालों का निर्यातक)
  • यहां पर भी पेट्रोलियम रिफाइनरी स्थित है।
  • केरल के बालू तट में थोरियम के भंडार मिलते है। जो एशिया के सबसे बड़े भंडार हैं।
  • लैगून झील/कयाल झील खारे पानी की झील होती है।
  • इसका निर्माण तरंगों के अपरदन व निक्षेपण से होता है।
  • केरल के तट पर दो लैगून झील हैं।
  • 1 वेम्बनाद➖भारत की सबसे बड़ी लैगून झील
  • 2 अष्टमुदी

2. पूर्वी तट:-

बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित तटीय मैदान हैं, जो गंगा के डेल्टा से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इस तट पर गोदावरी, महानदी, कृष्ण, कावेरी नदियों के कारण बड़े मैदान का निर्माण हुआ हैं।

कोरोमण्डल का तटीय मैदान:-

  • तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश का तट हैं।
  • तमिलनाडु में इसे तमिल का मैदान व आंध्र प्रदेश में इसे आंध्र तटीय मैदान भी कहते हैं।
  • तमिलनाडु में कावेरी नदी के द्वारा तटीय डेल्टा बनाया जाता हैं। जिसे दक्षिण भारत का धान का कटोरा कहते हैं।
  • यह तट पश्चिमी तट की तुलना में ज्यादा कटा-फटा हैं।
  • आंध्र के तट पर पुलिकट झील स्थित हैं।जो एक लेगुन झील है। यहां लेगुन झीले अधिक पायी जाती हैं।

उत्कल तट/उत्तरी सरकार का तट:-

  • उत्तरी सरकार उड़ीसा का एक तट भी हैं।
  • उत्कल, उड़ीसा का पुराना नाम भी था।
  • यहा चावल व जूट की खेती सर्वाधिक होती हैं।इसमें चील्का झील स्थित हैं।

Indian Physical territory important facts-

  • कश्मीर घाटी तथा डल झील किस के बीच अवस्थित है- वृहद हिमालय एवं पीर पंजाल
  • करेवा क्या है – हिमनद, गाद, सघन रेत चिकनी मिट्टी और दूसरे पदार्थों का हीमोढ़ पर मोटी परत के रूप में जमाव
  • उत्तराखंड के किस भाग में पाताल तोड़ कुए पाए जाते हैं- तराई में
  • करेवा के लिए हिमालय का कौन सा भाग प्रसिद्ध है- कश्मीर हिमालय
  • केसर (जाफरान)की खेती किस पर की जाती है- करेवा पर
  • वैष्णो देवी, अमरनाथ गुफा एवं चरार -ए -शरीफ किस हिमालय में स्थित है- कश्मीर हिमालय
  • कश्मीर घाटी के उत्तरी एवं दक्षिणी सीमा किन श्रेणियों द्वारा निर्धारित होती है- क्रमशः जास्कर श्रेणी और पीर पंजाल श्रेणी द्वारा
  • काली नदी किसकी सहायक नदी है- घागरा की सहायक
  • फूलों की घाटी कहां स्थित है- कुमायूं हिमालय
  • लोकतक झील किस नदी घाटी में स्थित है – मणिपुर घाटी
  • मोलेसिस बेसिन किस राज्य की संझा है- मणिपुर
  • भारत एवं म्यांमार सीमा का निर्धारण कौन सा पर्वत करता है- अराकान योमा
  • शेवराय बाड़ा किस राज्य में अवस्थित है- तमिलनाडु
  • लद्दाख और तिब्बत के बीच संपर्क संभव हो पाता है- चांगला, इमिला, लनकला तथा तसका ला दर्रो द्वारा
  • उत्तराखंड और तिब्बत एवं मानसरोवर से जोड़ने वाले दर्रे का नाम बताइए- माना,मांगशा धुर, मुलीगं ला और नीति दर्रे

भौतिक भौतिक प्रदेश

August 21, 2020

भारत की फसलों के बारे में जाने??? Indian Agriculture

भारत की कृषि

 भारत एक कृषि प्रधान देश है यहां की लगभग 52 प्रतिशत आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं |

वर्ष 2012 -13 में देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद का 14 .1% योगदान कृषि का है|

यहां कुल क्षेत्रफल का लगभग 45% भाग शुद्ध बोया गया क्षेत्र है|

भारत की जलवायु विशेषकर तापमान वर्षभर कृषि उत्पादन के अनुकूल रहता है जलवायु की विविधता के कारण भारत में उष्ण उपोषण शीतोष्ण सभी फसलें उगाई जाती हैं|

भारत की फसलों

भारत में कुल कृषि भूमि के लगभग 75% भाग पर खाद्यान्न फसलें उगाई जाती हैं

शेष 25% भाग वाणिज्यिक फसलों के अधीन है विनिर्माण क्षेत्र में उत्पन्न आय का 50% कृषि से ही प्राप्त होता है|

भारतीय कृषि जीवन निर्वाह प्रकृति की है क्योंकि भारतीय किसान अनाज का उत्पादन स्वयं परिवार के उपभोग के लिए करते हैं |यहां जनसंख्या का उच्च दबाव है उदाहरणस्वरूप प्रति व्यक्ति कृषि भूमि 10 हेक्टेयर है जबकि विश्व में 4 .5 हेक्टेयर है| 50% से अधिक कृषि वर्षा आधारित है| जिससे मिश्रित खेती का होना सामान्य ह यहां की कृषि श्रम गहन होते हुए भी निम्न उत्पादकता वाली भी है

भारतीय कृषि को मौसम पर आधारित तीन फसली मौसमों में बांटा गया है

1 रवि फसल ( Rabi crop )
–  
शीत ऋतु की फसलें रबी कहलाती है। इन फसलों की बुआई के समय कम तापमान तथा पकते समय खुश्क और गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है।

फसलें सामान्यता अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में काट ली जाती हैं इसके अंतर्गत प्रमुख फसलें गेहूं, जो, चना, मटर, सरसों,राई बरसीम, आलू, मसूर, लुसर्न, आदि।

2 खरीफ फसल ( Kharif crop )- 

यह वर्षाकाल की फसलें है इन फसलों को बोते समय अधिक तापमान एवं आर्द्रता तथा पकते समय शुष्क वातावरण की आवश्यकता होती है। जो दक्षिण पश्चिम मानसून के प्रारंभ के साथ बोई जाती हैं और सितंबर अक्टूबर तक काट ली जाती हैं

इसके अंतर्गत  ज्वार, बाजरा, धान, मक्का, मूंग, सोयाबीन, लोबिया, मूंगफली, कपास, जूट, गन्ना, तम्बाकू, आदि।

3 जायद फसल ( Zayed crop )-  एक अल्पकालिक ग्रीष्म ऋतु की फसल है जो रबी एवं खरीफ के मध्यवर्ती काल में मार्च में बोकर जून तक ले जाती है इस वर्ग की फसलों में तेज गर्मी और शुष्क हवाएँ सहन करने की अच्छी क्षमता होती हैं।

इसमें सिंचाई की सहायता से सब्जियों तथा खरबूजा, ककड़ी, खीरा, करेला, की कृषि की जाती है एवम,मूंग, उड़द, कुल्थी दलहनी फसलें उगाई जाती हैं इसे दो श्रेणी में रखा जाता है 

जायद खरीफ:

  • बीज लगाने का समयः अगस्त से सितम्बर
  • फसलों की कटाई का समयः दिसंबर से जनवरी
  • प्रमुख फसलें: धान, ज्वार, रेप्सीड, कपास, तिलहन, आदि।

जायद रबी:

  • बीज लगाने का समयः फरवरी से मार्च
  • फसलों की कटाई का समयः अप्रैल से मई
  • प्रमुख फसलें: खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, मूंग, लोबीया, पत्तेदार सब्जियां, आदि।

4. व्यापारिक फसलें ( Trading crops )

वे फसलें जिन्हें उगाने का मुख्य उद्देश्य व्यापार करके धन अर्जित करना होता है। जिसे किसान या तो संपूर्ण रूप से बेच देते हैं या फिर आंशिक रूप से उपयोग करते है तथा शेष बड़ा हिस्सा बेच देते हैं। मुख्य  व्यापारिक  फसलें  इस प्रकार हैं:-

  • तिलहन: मूंगफली, सरसों, तिल, अलसी, अण्डी, सूर्यमुखी।
  • शर्करा वाली फसलें: गन्ना, चुकन्दर।
  • रेशे वाली फसलें: जूट, मेस्टा, सनई और कपास।
  • उद्दीपक फसलें: तम्बाकू।
  • पेय फसलें: चाय और कहवा।

भारतीय कृषि के प्रकार ( Types of Indian Agriculture )

1 निर्वाह कृषि ( Subsistence farming )
भारत के अधिकांश किसान अनाज का उत्पादन स्वयं परिवार के उपयोग के लिए करते हैं इस पद्धति में किसानों द्वारा छोटी-छोटी कृषि भूमि पर अपने परिवार के सदस्य एवं भारवाहक पशुओं की सहायता से पुराने तरीके एवं उपकरणों से कृषि की जाती हैं

2 स्थानांतरित कृषि ( Transferred farming )

इस प्रकार की कृषि भारत में असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ एवं आंध्र प्रदेश में मुख्यता की जाती है इसमें हस्तनिर्मित उपकरणों द्वारा सूखा धान मक्का बाजरा आदि की कृषि की जाती है

3 व्यापारिक कृषि ( Trading agriculture )

जब कृषि नई तकनीकों सिंचाई उन्नत बीज रासायनिक उर्वरक कीटनाशक एवं कृषि यंत्रों के प्रयोग द्वारा की जाती है तो उसे व्यापारिक कृषि कहते हैं इस प्रकार की कृषि पंजाब हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सुनिश्चित सिंचाई विभाग में शुरू की गई है इसे पूंजीवादी कृषि भी कहते हैं

4 रोपण कृषि ( Plantation farming )

भारत में इसके अंतर्गत मुख्य चाय, कहवा, रबड़, मसालों की कृषि की जाती हैं यह कृषि मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल का पर्वतीय भाग, दक्षिण में नीलगिरी अन्नामलाई, इलायची की पहाड़ियों पर की जाती है

भारत की प्रमुख फसलें ( Main crops of India )

1. चावल ( Rice )

चावल भारत में सबसे अधिक उगाई जाने वाली फसल है। चावल उगाने के लिए 75 से.मी. से 200 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। चावल बोते समय 20 डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 27 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। चिकनी, कछारी तथा दोमट मिट्टी को चावल की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार, आन्ध्र प्रदेश, ओड़िसा, उत्तर प्रदेश तथा तमिलनाडु चावल के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। कुल कृषि भूमि के 25%भाग पर चावल की खेती की जाती है। विश्व के कुल चावल उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है।भारत विश्व का 22%चावल उत्पादित करता है। भारत मे चावल का सर्वाधिक उत्पादन पश्चिम बंगाल करता है,दूसरे व तीसरे स्थान पर क्रमशः आंध्र प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश है।

  • समुचित खाद:-जैसे हरी खाद,अमोनिया सल्फेट,सुपर-फास्फेट आदि।
  • किस्में:- ताईचुंग,कावेरी,मंसूरी,भवानी,रत्ना, पदमा, जया, IR-8,जमुना आदि।

2. मक्का ( Maize ):-

  • मक्का अमेरिकी मूल का पौधा है।
  • प्रमुख किस्मे:- गंगा-201,रणजीत, गंगा-5,सरताज,ध्वज,प्रभात,अरुण,दक्कन-105 आदि।
  • प्रमुख उत्पादक :- कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र

3. ज्वार ( Sorghum )

ज्वार भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। ज्वार उगाने के लिए 30 से.मी. से 100 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। ज्वार बोते समय 21 डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 25 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। हल्की दोमट मिट्टी को चावल की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, तथा तमिलनाडु ज्वार के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं क्षेत्रफल एवं उत्पादन की वृद्धि से चावल और गेहूं के बाद ज्वार देश में तीसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान फसल ह विश्व में ज्वार का सबसे बड़ा उत्पादक देश भारत है।

  • किस्में:-सी एस एच-1,सी एस एच-4,सी एस वी-2 आदि।

4. बाजरा ( Millet )

बाजरा भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। बाजरा उगाने के लिए 50 से.मी. से 70 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। बाजरा बोते समय 25 डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 35 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। बालुई मिट्टी को बाजरा की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

राजस्थान महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश  बाजरा के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं बाजरा अफ़्रीकी मूल का पौधा है।यह गरीबो की प्रमुख फसल है। बाजरा विश्व में बाजरा के क्षेत्रफल एवं उत्पादन की दृस्टि से भारत का प्रथम स्थान है।

  • किस्में:- सी ओ 1-5, के-1, एक्स-3, एच बी-67

5. गेहूँ ( wheat )-

चावल के बाद गेहूँ(Wheat),भारत की दूसरी प्रमुख फसल है। भारत विश्व का 12%भाग पर गहुँ की कृषि की जाती है। उष्ण जलवायु के कारण उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में गेहूँ कम समय में पक जाता है। भारत में हरित-क्रांति का सबसे अनुकूल प्रभाव गेहूँ की कृषि पर पड़ा है।

  • वर्षा:-25 से 75 सेमी
  • तापमान:-बोते समय 10°,बढ़ते समय 15°,पकते समय 20° सेंटीग्रेड
  • मिट्टी:-हल्की दोमट व चिकनी
  • प्रमुख उत्पादक:- उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान व बिहार(घटते क्रम में)
  • प्रमुख किस्में:-करना, राजो, सोनेरा63 और 64, हिरा, शेरा आदि।

6. तंबाकू (Tobacco )

तंबाकू भारत में 1508 ईसवी में पुर्तगालियों द्वारा लाया गया था आज भारत चीन एवं ब्राजील के बाद तंबाकू का तीसरा बड़ा उत्पादक है वर्तमान में यह सरकार के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है! तंबाकू के उत्पादन में आंध्र प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश एवं गुजरात का प्रमुख स्थान है आंध्र प्रदेश का प्रकाशन एवं गुंटूर जिला कृष्णा नदी का डेल्टा क्षेत्र तंबाकू उत्पादन हेतु प्रसिद्ध है|

  • वर्षा 50 से 100 सेंटीमीटर|
  • तापमान 16 डिग्री से 18 सेंटीग्रेड मिट्टी हल्की दोमट बलुई कछारी
  • किसमें हेमा, गौतमी, CM-12 ,भव्या, वर्जिना 1158
  • प्रमुख उत्पादक आंध्र प्रदेश गुजरात, कर्नाटक ,तमिलनाडु, उड़ीसा|

7. मूंगफली ( Peanut )

मूंगफली भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। मूंगफली उगाने के लिए 75 से.मी. से 150 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। मूंगफली बोते समय 15 डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 25 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। हल्की रेतीली मिट्टी को मूंगफली की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ मूंगफली के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

8. चाय ( TEA )

चाय भारत की प्रमुख पेय फसलों में से एक है। चाय उगाने के लिए 200 से.मी. से 300 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। चाय बोते समय 24 डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 30 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। हल्की तथा उपजाऊ मिट्टी को चाय के बगानों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

असम, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा प. बंगाल चाय के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

9. कपास (Cotton )

कपास भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। कपास उगाने के लिए 50 से.मी. से 100 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। कपास बोते समय 20 डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 40 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। गहरी तथा मध्यम काली मिट्टी को कपास की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तथा हरियाणा कपास के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

10. गन्ना ( Sugarcane )  

गन्ना भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। गन्ना उगाने के लिए 100 से.मी. से 150 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है।  गन्ना बोते समय 30 डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 35 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। दोमट या नमी वाली गहरी तथा चिकनी मिट्टी को गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा आन्ध्र प्रदेश गन्ना के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

11.जूट ( JUTE ) 

जूट भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। जूट उगाने के लिए 100 से.मी. से 200 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। जूट बोते समय 25 डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 35 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। कांप मिट्टी को जूट की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओड़िसा तथा आन्ध्र प्रदेश जूट के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

12. सरसों ( Mustard )

सरसों भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। सरसों उगाने के लिए 75 से.मी. से 150 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। सरसों बोते तथा काटते समय 20 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। दोमट मिट्टी को सरसों की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है। 

राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, पंजाब तथा असम सरसों के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

13. रेपसीड ( Rapeseed )  

रेपसीड भारत की प्रमुख फसलों में से एक है  रेपसीड उगाने के लिए 75 से.मी. से 150 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है  रेपसीड बोते तथा काटते समय 20 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए। दोमट मिट्टी को रेपसीड की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, पंजाब तथा असम रेपसीड के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

14. चने की फसल ( Gram crop )

चना भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। चना उगाने के लिए 75 से.मी. से 150 से.मी. तक की वर्षा की आवश्यकता होती है। चना बोते समय 20डिग्री सेल्शियस तथा काटते समय 35 डिग्री सेल्शियस तापमान होना चाहिए।  हल्की दोमट तथा चिकनी मिट्टी को चने की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

पंजाब, हरियाणा , उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तथा महाराष्ट्र चना के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

भारत की फसलों

August 20, 2020

भारत की जलवायु के बारे में जाने??? Climate

भारत की जलवायु ( Climate of India )

भारत की जलवायु

भारत की जलवायु मानसूनी जलवायु है। यहां की जलवायु परिस्थितियों के सामान्य रूप से मानसून पूर्व की स्थिति मानसून काल एवं मानसून वापस सी के कालक्रम में बांटा जा सकता है। मानसून पूर्व की स्थिति में देश में भयंकर गर्मी पड़ती है। कई स्थानों पर तेज आंधियां एवं गर्म हवा चलती है उत्तरी भारत में निम्न वायुदाब विकसित हो जाता है। इससे पौधों की दिशा में परिवर्तन हो जाता है। पवन एक तीव्र वेग से समुद्र से स्थूल की ओर बढ़ती है।​

मानसून काल आने पर दक्षिण- पश्चिम से आने वाली पवन अरब सागर के मानसून ने बंगाल की खाड़ी के मानसून के रूप में भारत में वर्षा करती है यह कल वर्षा काल कहा जाता है। मानसून लापसी का समय शीत ऋतु एवं ग्रीष्म से संबंधित है।​

एक विशाल क्षेत्र में लंबे समय अवधि में मौसम की अवस्थाओं तथा विविधताओं का कुल योग ही जलवायु है! मौसम एक विशेष समय में एक क्षेत्र के वायुमंडल की अवस्था को बताता है! किसी भी क्षेत्र की जलवायु को नियंत्रित करने वाले छह प्रमुख कारक हैं –अक्षांश ,ऊंचाई, वायुदाब ,एवं पवन तंत्र समुद्र से दूरी महासागरीय धाराएं एवं उच्चावच लक्षण !

भारत की जलवायु की महत्वपूर्ण विशेषता पवनों की दिशा में परिवर्तन है भारतीय मानसून का वर्णन सबसे पहले अल समूदी वैज्ञनिक ने किया था  भारत की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसूनी है तथा भारत में सबसे अधिक वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी मानूसन से होती हे

भारत मे मौसम संबंधी सेव सन् 1875 मे शुरू कु गई थी उस समय इसका मुख्यालय शिमला मे था। पहले विश्व युद्ध के बाद इसका मुख्यालय पुणे लाया गया, अब यही से ही भारत के मौसम संबंधी मानचित्र प्रकाशित होते है।

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारण 

1. समुद्र तल से ऊंचाई-​
2. समुद्र से दूरी -​
3. अक्षांशीय स्थिति -​
4. पर्वतों की स्थिति-​
5. पर्वतों की दिशा-​
6.पवनों की दिशा-​
7. उच्चस्तरीय भाई संचरण-​

भारत जलवायु को मानसून के अलावा प्रभावित करने वाले 2 प्रमुख कारक हैं

1.उतर मे हिमालय पर्वत:- इस की उपस्थिति के कारण मध्य एशिया से आने वाली शीतल हवाएं भारत मे नही आ पाती हैं।

2. दक्षिण मे हिन्द महासागर-: इसकी उपस्थिति और भूमध्य रखा के पास होने के कारण उष्णकटिबंधीय जलवायु अपने आदर्श स्वरूप मे पाई जाती हैं।

भारत सरकार के मौसम विभाग के अनुसार भारत की जलवायु परिस्थितियों को चार बिना ऋतु में बाटा है।

?(क) उत्तरी पूर्वी या शीतकालीन मानसून काल

  • 1. शीत ऋतु- दिसंबर से फरवरी तक।
  • 2. ग्रीष्म ऋतु- मार्च से मध्य जून तक।

?(ख) दक्षिण पश्चिम या ग्रीष्मकालीन मानसूनी काल

  • 1. वर्षा ऋतु- मध्य जून से मध्य सितंबर तक।
    2. शरद ऋतु- मध्य सितंबर से मध्य दिसंबर तक।

भारतीय संस्कृति के अनुसार छ: ऋतुएं मानी गई है-

1. बसंत ऋतु – चैत्र-वैशाख
2. ग्रीष्म ऋतु – ज्येष्ठ-आषाढ़
3.वर्षा ऋतु – श्रावण-भाद्रपद
4. शरद ऋतु – अश्विन-कार्तिक
5. शीत ऋतु – मार्गशीष-पोष
6. हेमंत ऋतु – माघ-फाल्गुन

भारत मे  4 ऋतुएं पाई जाती हैं

1. शीत ऋतु:-

उतर भारत के मैदानी भागो मे शीतल ऋतु मे वर्षा पश्चिम विभोक्ष या जेट स्ट्रीम के कारण होती हैं। जाडे. के दिनो मे (जनवरी-फरवरी) तमिलनाडु के तटो पर वर्षों लौटते हुए मानसून या उतरी पूर्वी मानसून के कारण होती हैं।

2. ग्रीष्म ऋतु :-

इस ऋतु मे असम ओर पश्चिम बंगाल राज्यो मे तीव्र आदि हवाएं चलने लगती हैं, जिनसे गरज के साथ वर्षों हो जाती हैं। इन हवाऔ को पूर्वी भारत मे नारवेस्टर और बंगाल मे काल वैशाखी के नाम से जाना जाता हैं। कर्नाटक मे इन्हें चेरी ब्लास्म कहा जाता हैं जो काॅफी की कृषि के लिए लाभदायक है।

आम की फसल के लिए लाभदायक होने के कारण इसे दक्षिण भारत मे आम्र वर्षा या मैगो शावर भी कहा जाता हैं। उतर पश्चिम भारत के शुष्क भागो मे ग्रीष्म ऋतु मे चलने वाली गर्म और शुष्क हवाओं को “लू” कहा जाता हैं।

इस ऋतु मे उतर पश्चिम भारत ओर पाकिस्तान मे उष्णदाब का क्षेत्र बन जाता हैं जिसे मानसून गर्त कहते हैं इसी समय उतरी उष्ण अभिसरण (NITC) उतर की ओर खिसकने लगता हैं जिसके कारण विषुवत रेखीय पछुआ पवन और दक्षिणी गोलार्द की दक्षिण पूर्वी वाणिज्यिक पवन विषुवत रेखा को पार कर फेरेल के नियम का अनुसरण करते हुए भारत मे प्रवाहित होने लगती हैं।

जिसे दक्षिण पश्चिम मानसून के नाम से भी जाना जाता हैं। भारत की ज्यादातर वर्षा लगभग 80 फीसदी इसी मानसून मे होती है। भारत की प्रायद्वीपीय आकृति के कारण दक्षिण पश्चिम का मानसून दो शाखाओं मे विभाजित किया गया है।

3. वर्षा ऋतु:- 

अरब सागर की शाखा:- अरब सागर.शाखा का मानसून सबसे पहले भारत के केरल राज्य मे जून के पहले हफ्ते मे आता हैं। यहां यह पश्चिम घाट पर्वत से टकरा कर केरल के तटो पर वर्षा करता हैं इसे मानसून प्रस्फोट यानी मानसून ब्रस्टर कहा जाता हैं। मानसून द्रारा लाई गई कुछ आर्दता का 65 फीसदी भाग अरब सागर से आता हैं।

अरब सागरीय मानसून की एक शाखा सिघं नदी के डेल्टा क्षेत्र से आगे बढ़कर राजस्थान के मरुस्थल से होती हुई सीधे हिमालय पर्वत से जा टकराती हैं और इसीलिए धर्मशाला के आस पास अधिक वर्षा होती हैं।

राजस्थान मे सागरीय मानसून मार्ग मे अवरोध न होने के कारण वर्षा का अभाव पाया जाता हैं, क्यूंकि अरावली पर्वत माला इसके सामानांतर पड़ती हैं।

बंगाल की खाडी़- इसरो, खासी और जयतिया पहाडियों पर बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाएं अधिक वर्षा लाती हैं जिसकी वजह से यहां स्थित मेघालय विश्व मे सबसे ज्यादा वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान हैं। मानसून द्रारा लाई गई कुछ आवृता का 35 फीसदी भाग बंगाल की खाड़ी से आता हैं। मानसून की अरब शाखा तुलनात्मक रुप से अधिक शक्तिशाली होती हैं।

4. शरद ऋतु:-

इस ऋतु को मानसून पत्यावर्तन का काल ररिटी्टिग मानसून सीजन कहा जाता हैं। इस ऋतु मे बंगाल की खाडी और अरबसागर मे उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती हैं इन चक्रवातों से ओडिशा ,आंधप्रदेश, और पश्चिमी तटीय क्षेत्र मे गुजरात मे काफी क्षति पहुचति हैं।

कोपेन की योजना के अनुसार:भारत के जलवायु प्रदेश

1. Amw- लघु शुष्क ऋतु वाला मानसून प्रकार
क्षेत्र:- गोवा के दक्षिण में स्थित पश्चिमी तट

2. As:- शुष्क ग्रीष्म ऋतु वाला मानसून प्रकार
क्षेत्र- तमिलनाडु का कोरोमंडल तट

3. Aw:- उष्ण कटीबंधीय सवाना प्रकार

क्षेत्र:-कर्क वृर्त के दक्षिण में प्रायद्विपीय पठार का अधिकतर भाग

4. Bshw:- अर्द्ध शुष्क स्टेपी जलवायु

क्षेत्र – उत्तर-पश्चिमी गुजरात,पश्चिमी राजस्थान और पंजाब के कुछ भाग

5. BWhw:- गर्म मरुस्थल

क्षेत्र- राजस्थान का पश्चिमी भाग

6. Cwg:- शुष्क शीत ऋतु वाला मानसून प्रकार

क्षेत्र- गंगा का मैदान,पूर्वी राजस्थान,उत्तरी-मध्यप्रदेश,उत्तरपूर्वी भारत का अधिकतर भाग(प्रदेश)

7. Dfc:- लघु ग्रीष्म ठंडी आद्र ऋतु

क्षेत्र- अरुणाचल प्रदेश वाला जलवायु प्रदेश

8. E:- ध्रुवीय प्रकार

क्षेत्र:- जम्मु और कश्मीर,हिमाचल प्रदेश और उत्तरांचल

Climate of India important facts 

  1. किसने कहा कि विश्व की समस्त प्रकार की जलवायु भारत में पाई जाती है? ➡मर्सडेन।
  2. विश्व में सबसे अधिक वर्षा कहां होती है। ➡मासिनराम।
  3. भारत में सबसे कम वर्षा कहां होती है ➡लेह
  4. जैसलमेर में औसत वार्षिक वर्षा कितनी होती है ➡ 12 सेमी।
  5. पुपरी अनुमंडल में तीव्रगामी वडोदरा का क्या नाम है➡ जेट प्रवाह।
  6. जेट प्रवाह की कौन सी शाखा भारत में शीतकालीन चक्रवात लाने में सहायक होती है➡ पश्चिमी।
  7. भारत के किस भाग में पश्चिमी विक्षोभ द्वारा शीत ऋतु में वर्षा होती है ➡उत्तर-पश्चिमी भारत।
  8. भारत के कौन से भाग में लौटते हुए मानसून द्वारा शीत ऋतु में वर्षा होती है➡कोरोमंडल तट( तमिलनाडु )
  9. देश में महाद्वीपीय जलवायु की स्थिति कौन उत्पन्न करता है➡हिमालय।

  1. शीत ऋतु की प्रमुख विशेषता क्या है ➡Paschimi vikshobh ( शीतोष्ण चक्रवात)
  2. पश्चिमी विक्षोभ किसके निकट उत्पन्न होते हैं ➡पश्चिमी एशिया एवं भूमध्य सागर।
  3. शीतकाल में रात्रि के तापमान में वृद्धि किस का सूचक माना जाता है ➡Paschimi vikshobh ke aane ka
  4. भारत में औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त होती है- 112 से 125 सेमी के बीच।
  5. दक्षिणी भारत का सबसे गर्म महीना कौन सा होता है ➡अप्रैल।
  6. पहाड़ी बागों में सर्वाधिक गर्म महीना होता है ➡जुलाई।
  7. वर्षा ऋतु में किस समय वायुमंडल सर्वाधिक आद्र होता है ➡प्रातः काल में
  8. देश के पश्चिमोत्तर भाग में कौन सा मानसून पहले पहुंचता है ➡अरब सागर का मानसून।
  9. कौन सी मानसून शाखा देश में सर्वाधिक वर्षा करती है ➡बंगाल की खाड़ी मानसून।
  10. भारत में मानसून ठहरने की सबसे कम अवधि किस प्रदेश में पाई जाती है ➡पंजाब में
  11. भारत में किस प्रकार की वर्षा सर्वाधिक होती है ➡पर्वतीय वर्षा।
  12. जेट स्ट्रीम का सर्वाधिक औसत वेग कहां होता है ➡उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब क्षेत्रों के ऊपर।
  13. भारत की दक्षिणतम पर्वत चोटी है-➡महेंद्र गिरी (1654मी.)
  14. महाराष्ट्र के नागपुर पठार पर किस प्रकार की वर्षा होती है- चक्रवाती वर्षा।

August 20, 2020

भारत की स्थिति एवं विस्तार India Location & Extension

भारत की स्थिति एवं विस्तार 

भौगोलिक परिचय

भारत का विस्तार

भारत की आकृति चतुष्कोणीय है।यह दक्षिण एशिया के मध्य में स्थित है। भारत के पूर्व में इंडोचीन प्रायद्वीप व पश्चिम में अरब प्रायद्वीप स्थित है। भारत अक्षांशीय दृष्टि से उत्तरी गोलार्द्ध का देश है तथा देशांतरीय दृष्टि से पूर्वी गोलार्द्ध में मध्यवर्ती स्थिति रखता है। समूचा भारत लगभग मानसूनी जलवायु वाले क्षेत्रों में पाया जाता है, जिसका विस्तार उष्ण तथा तथा उपोष्ण के दोनों कटिबंधों में है।

इसका क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सातवां बड़ा देश है, केवल रूस, कनाडा, चीन, अमेरिका(usa), ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया इससे बड़े हैं।भारत का क्षेत्रफल संपूर्ण विश्व के क्षेत्रफल का 2. 42% है  जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है

इस देश का विस्तार उत्तर- दक्षिण दिशा में 3214 किलोमीटर तथा पूर्व पश्चिम दिशा में 2933 किलोमीटर है।

यह भूमध्य रेखा के उत्तर में 8°4’से 37°6′ उत्तरी अक्षांशों तथा 68°7′ से 97°25′ पूर्वी देशांतरों के मध्य स्थित है। 82°1/2 पूर्वी देशांतर भारत के लगभग मध्य (इलाहाबाद के नैनी से) होकर गुजरती है जो कि देश का मानक समय है। यहां ग्रीनविच समय से 5 घंटा 30 मिनट आगे हैं।

कर्क रेखा भारत के मध्य से गुजरती है। कर्क रेखा भारत के 8 राज्यों से गुजरती है:- 1. गुजरात 2. राजस्थान 3. मध्यप्रदेश 4. छत्तीसगढ़ 5. झारखण्ड 6.पश्चिम बंगाल 7. त्रिपुरा 8. मिजोरम

ट्रिक:- गुरामछ झाप त्रिमि

भारत के स्थलीय सीमा की लंबाई 15,200 किलोमीटर तथा मुख्य भूमि की तटीय सीमा की लंबाई 6100 किलोमीटर है । द्वीपों समेत देश की कुल तटीय सीमा 7516.6 किलोमीटर है। इस प्रकार भारत की कुल सीमा 22716.6 (15200+7516.6) किलोमीटर है।

भारत की स्थलीय सीमाएँ पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान, उत्तर में चीन, नेपाल उत्तर पूर्व में भूटान तथा पूर्व में बांग्लादेश एवं म्यांमार देश से मिली हुई है।

Indian border ( भारतीय सीमाएं )

इन देशों के साथ संलग्न भारतीय सीमाओं पर अवस्थित राज्य –

पाकिस्तान(4):- गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू और कश्मीर
अफ़्ग़ानिस्तान(1):- जम्मू और कश्मीर(pok)
चीन(5):- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
नेपाल(5):- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम,
भूटान(4):- सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश
बांग्ला देश(5):- पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम
म्यांमार(4):- अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम

  • भारत-बंगलादेश सीमा:-4096Km.
  • भारत-चीन सीमा:-3439Km
  • भारत-पाकिस्तान सीमा:-3310Km
  • भारत-नेपाल सीमा:-1761
  • भारत म्यामांर सीमा:-1643
  • भारत-भूटान सीमा:-587

पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों में नागालैंड, मणिपुर अरुणाचल प्रदेश एवं सिक्किम की सीमा बांग्लादेश से नहीं मिलती हैं

श्रीलंका भारत का पड़ोसी देश है जो हिंद महासागर में पाक जलसंधि द्वारा भारत की मुख्य भूमि से प्रथक् है। “आदम ब्रिज” तमिलनाडु एवं श्रीलंका के मध्य स्थित है। “पम्बन द्वीप” आदम ब्रिज का ही हिस्सा है। पम्बन द्वीप पर ही रामेश्वर मं स्थित है। आदम ब्रिज के उत्तर में पाक की खाड़ी एवं दक्षिण में मन्नार की खाड़ी स्थित है।

भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट है यह निकोबार द्वीप समूह में स्थित है इस पहले इसका नाम *पिगमिलयन प्वाइंट था यह भूमध्य रेखा से 876 किलोमीटर दूर है भारत के सबसे उत्तरी बिंदु इंदिरा कॉल जम्मू कश्मीर राज्य में है  कोलाबा पॉइंट मुंबई में, पॉइंट कोलीमेरे तमिलनाडु में, पॉइंट पेड्रो जाफना (श्रीलंका के उत्तर पूर्व) में है

भारत एवं चीन की सीमा को मैकमहोन रेखा कहते हैं यह रेखा 1914 ईस्वी में शिमला में निर्धारित की गई थी इसका इसकी उत्तरी पूर्वी सीमा की लंबाई लगभग 4224 किलोमीटर है  भारत और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा है जो 1896 में सर डूरंड द्वारा निर्धारित की गई थी यह अब रेखा अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान के बीच है

भारत एवं पाकिस्तान के बीच रेडक्लिफ रेखा है जो 15 अगस्त 1947 को सर एम रेडक्लिफ के द्वारा निर्धारित की गई थी दक्षिण में श्रीलंका भारत से पाक जल संधि तथा मन्नार की खाड़ी द्वारा अलग होता है श्रीलंका के बाद भारत का दूसरा निकटतम समुद्री पड़ोसी देश इंडोनेशिया है जो निकोबार द्वीप समूह के अंतिम द्वीप ग्रेट निकोबार के दक्षिण में स्थित है 

भारतीय उपमहाद्वीप में देश भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान सम्मिलित हैं  भारतीय राज्यों में गुजरात राज्य की तट रेखा सर्वाधिक लंबी है इसके बाद आंध्र प्रदेश की तट रेखा लंबी है 

जोजिला दर्रा का निर्माण सिंधु नदी द्वारा शिपकी का निर्माण सतलज नदी द्वारा एवं जैलेप्ला का निर्माण तिस्ता नदी द्वारा हुआ है तीन अर्धचंद्राकार समुद्र तट कन्याकुमारी में मिलते हैं

India Location & Extension important facts

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के बाद फ्रांस एवं पुर्तगाल के अन्य कई क्षेत्रों का भारत में विलय हुआ जो इस प्रकार है….

पुर्तगाल के अधीन क्षेत्र

1 दादर एवं नगर हवेली
2 दमन व द्वीप
3 गोवा

फ्रांस के अध्ययन क्षेत्र

1 चंदन गोर
2 पांडिचेरी
3 कराईकल
4 माहे
5 यमन

मई 1987 को 65 वां संविधान संशोधन द्वारा गोवा भारत का 25वां राज्य बना

  1. भारत का वह राज्य जो तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा है- त्रिपुरा
  2. त्रिपुरा और बांग्लादेश की सीमा कहलाती है- शुनयरेखा
  3. पाकिस्तान से लगे भारत के किस राज्य की सीमा सबसे लंबी है- जम्मू कश्मीर 1225 किलोमीटर
  4. भारतीय उपमहाद्वीप में शामिल देश ह- भारत पाकिस्तान बांग्लादेश नेपाल एवं भूटान
  5. भारतीय राज्यों की संख्या जो पड़ोसी देशों की सीमाओं से जुड़े हैं- 17 राज्य
  6. पांडिचेरी पुद्दुचेरी केंद्र शासित क्षेत्र में सम्मिलित हैं- माहे (केरल) कराईकल पांडिचेरी (तमिलनाडु) में एवं यमन (आंध्र प्रदेश )

  1. मरकत द्वीप (एमराल्ड आइलैंड )के नाम से जाना जाता है – अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह
  2. इंदिरा पॉइंट की विश्वत रेखा से दूरी 876 किलोमीटर है
  3. भारत के शीर्ष पांच तटरेखा वाले राज्य क्रम से हैं- गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु ,महाराष्ट्र, और केरल|
  4. नेपाल भूटान एवं चीन की सीमा से मिलने वाला भारतीय राज्य है – सिक्किम|
  5. समुद्र तटीय राज्य:- 9 (गुजरात, महाराष्ट्र ,गोवा ,कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश ,उड़ीसा, पश्चिम बंगाल )
  6. भारत के समुद्र तटीय केंद्र शासित प्रदेश:- 4( दमन व दीव ,लक्षद्वीप, पांडिचेरी, अंडमान व निकोबार दीप समूह )
  7. भारतीय उपमहाद्वीप मूलतः जिस विशाल भूखंड का भाग था:; गोंडवानालैंड

विस्तार विस्तार

August 19, 2020

राजस्थान की जनसंख्या विशेषताएँ Demographic Features

राजस्थान की जनसंख्या विशेषताएँ

2011 की जनगणना के अनुसार ( According to the 2011 census )

rajasthan की जनसंख्या

 1. राजस्थान की कुल जनसंख्या –  6.86 करोड़ लगभग

2. राजस्थान की पुरुष जनसंख्या –   35620086

3. राजस्थान की स्त्री जनसंख्या –   33000926

4.  राजस्थान की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर-  21 .44 % 

5. राजस्थान में साक्षरता प्रतिशत- 67 .06% 

6. राजस्थान में पुरुष साक्षरता प्रतिशत-   80 .51  %

7. राजस्थान में महिला साक्षरता प्रतिशत-  52 .66 %

8. अधिकतम एवं न्यूनतम_जनसंख्या वाले जिले-

राजस्थान में सर्वाधिक_जनसंख्या वाले 5 जिले –

  1.  जयपुर –                66,63,971 
  2. जोधपुर –                36,85,681 
  3. अलवर –                36,71,999 
  4. नागौर –                 33,09,234
  5. उदयपुर –              30,67,549

राजस्थान में न्यूनतम जनसंख्या वाले 5 जिले –

  1. जैसलमेर –              6,72,008 
  2. प्रतापगढ़ –              8,68,231 
  3. सिरोही –                 10,37,185 
  4. बूंदी-                      11,13,725
  5. राजसमन्द –            1158283

9. राजस्थान में न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला- जैसलमेर (6,72,008)

10. सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला – जयपुर (598 व्यक्ति प्रति वर्गकिमी)

11. न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला जिला – जैसलमेर (17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी)

12. सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला – डूंगरपुर (990)

13. न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला – धौलपुर (845)

14. सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धिदर वाला जिला- बाड़मेर (32.55)

15. न्यूनतम दशकीय जनसंख्या वृद्धिदर वालाजिला-  श्रीगंगानगर (10.06)

16. सर्वाधिक कुल साक्षरता वालाजिला- कोटा (77.48%)

17. न्यूनतम कुल साक्षरता वाला जिला-  जालौर (55.58%)

18. सर्वाधिक पुरुष साक्षरता वालाजिला- झुंझुनू (87.88%)

19. न्यूनतम पुरुष साक्षरता वाला जिला- प्रतापगढ़ (70.13%)

20. सर्वाधिक महिला साक्षरता वाला जिला-   कोटा  (66.32%)

21. न्यूनतम महिला साक्षरता वाला जिला- जालौर (38.73%)

22. राज्य का _जनसंख्या घनत्व –  200 व्यक्ति प्रति किमी (जबकि 2001 में 165)

23. राजस्थान की _जनसंख्या में वर्ष 2001 की तुलना में वृदि दर में प्रतिशत कमी- 6.97% कमी

24. राज्य की सर्वाधिक साक्षरता दर वाली तहसील-   जयपुर तहसील (83.89 प्रतिशत)

25. राज्य की न्यूनतम साक्षरता दर वाली तहसील-  कोटडा तहसील जिला-उदयपुर (27.10%)

26. दो जिले जिनका साक्षरता प्रतिशत दशक 2001-11में घटा है- चुरू व बाड़मेर

27. राजस्थान का लिंगानुपात –  926 

जनसँख्या नियंत्रण कार्यक्रम ( Population Control Program )

बेटियां अमूल्य है कार्यक्रम ( Daughters are Precious ) – 23 सितंबर, 2016 से शुरू इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न कॉलेजों, शॉपिंग मॉल्स आदि में पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण, प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम एवं नुक्कड़ नाटक के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ।

ज्योति योजना ( Jyoti Yojana ) –जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में राज्य में ज्योति योजना 11 जुलाई, 2011 से शुरू की गई है।योजना में दो लड़कियों के बाद नसबंदी कराने वाली महिलाओं को रोल मॉडल के रूप में पेश कर उनके घर के बाहर “गांव की ज्योति” लिखा जाएगा।

कलेवा योजना ( Kaleva Yojana ) – बजट घोषणा वर्ष 2010-11 के अंतर्गत मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा योजना प्रारंभ की गई है।

जन मंगल कार्यक्रम – यह कार्यक्रम _जनसंख्या वृद्धि दर में कमी तथा _जनसंख्या में स्थायित्व के लिए चालू किया गया है।

1 जून 2002 – दो से अधिक बच्चे वाले अभ्यर्थी को सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए अपात्र घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री बालिका संबल योजना ( Balika Sambal Yojna ) – राज्य में गिरते लिंगानुपात को रोकने एवं बालिकाओं के सर्वांगीण विकास एवं उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए पूरे राज्य में 5 साल तक की बालिकाओं के लिए ₹10000 के यू. टी. आई. के बांड देने की इस अनुपम योजना का शुभारंभ 13 अगस्त, 2007 को जोधपुर में किया।

राज्य जनसंख्या नीति ( State Population Policy )- राज्य जनसंख्या नीति का लोकार्पण 20 जनवरी, 2010 को किया गया था। राजस्थान देश में स्वयं की जनसंख्या नीति घोषित करने वाला आंध्र प्रदेश के बाद दूसरा राज्य हैं।