Category

Economy

September 30, 2020

Currency मुद्रा की परिभाषा एवं कार्य क्या क्या है???

उपयोगिता उपभोक्ता का व्यवहार 

अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसमे उपयोगिता ,उपभोग, उपभोक्ता का कार्यान्वयन होता हैं जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है।

‘अर्थशास्त्र’ शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ (धन) और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है – ‘धन का अध्ययन’।

किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं,  इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कायों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है।

अर्थशास्त्र का प्रयोग यह समझने के लिये भी किया जाता है कि अर्थव्यवस्था किस तरह से कार्य करती है वह समाज में विभिन्न वर्गों का आर्थिक सम्बन्ध कैसा होता है

अर्थशास्त्रीय विवेचना का प्रयोग समाज से सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे:- अपराध, शिक्षा, परिवार, स्वास्थ्य, कानून, राजनीति, धर्म, सामाजिक संस्थान और युद्ध व उपभोक्ता ओर समाज इत्यदि।

कुल उपयोगिता और सीमांत उपयोगिता में संबंध ( Relation in total utility and marginal utility )

  1. जब_कुल उपयोगिता बढ़ती है तब सीमांत उपयोगिता धनात्मक होती है
  2. जब_कुल उपयोगिता अधिकतम होती है तब सीमांत उपयोगिता शुन्य होती है
  3. जब कुल उपयोगिता घटती है तब सीमांत उपयोगिता ऋणात्मक होती है
  4. कुल उपयोगिता सीमांत उपयोगिता का + होती है।
  5. सीमांत उपयोगिता कुल उपयोगिता वक्र के डाल को मापती है।

कुल उपयोगिता और सीमांत उपयोगिता में संबंध की व्याख्या सर्वप्रथम जेवेन्स ने की.।

मुद्रा_की परिभाषा एवं कार्य 

मुद्रा_की परिभाषा Currency Definition

मुद्रा

मुद्रा_एक ऐसा मूल्यवान रिकॉर्ड है या आमतौर पर वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान के रूप में स्वीकार किया जाने वाला तथ्य है मुद्रा यह एक सामाजिक-आर्थिक संदर्भ के अनुसार ऋण के पुनर्भुगतान के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता हैं।

अंग्रेजी भाषा में मुद्रा को Money कहा जाता है अंग्रेजी भाषा के शब्द Money की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द Moneta से हुई है रोम में पहली टकसाल देवी मोनेटा के मंदिर में स्थापित की गई थी

इस टकसाल से उत्पादित सिक्को का नाम देवी मोनेटा के नाम पर मनी पड़ गया था और धीरे-धीरे मुद्रा के लिए सामने रूप से मनी शब्द का उपयोग किया जाने लगा ऐसा माना जाता है कि सीन के साथ-साथ भारत में भी विश्व के प्रथम सिक्के जारी करने वाले देशों में से एक हैं भारतीय सिक्कों का इतिहास ईसा पूर्व से प्रारंभ हो जाता है

उत्खनन में मिले मौर्य काल के चांदी के सिक्के इस बात को सूचित करते हैं कि भारत में इससे पूर्व भी सिक्को का प्रयोग आरंभ हो गया था भारत में पहला रुपया शेरशाह सूरी द्वारा 1540-45 ईसवी में जारी किया गया था वर्तमान में भारत में 50 पैसे ₹1 ₹2 ₹5 ₹10 के मूल्य वर्गों के सिक्के जारी किए जा रहे हैं साथ ही भारत के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ₹10 ₹20 ₹50 500 रु तथा ₹2000 मूल्य वर्ग के बैंक नोट जारी किए जा रहे हैं

रुपए ₹1रू 5 के बैंक नोटों का उत्पादन वर्तमान में बंद कर दिया गया है लेकिन यह चलन में बने हुए हैं 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने प्रचलित ₹500 तथा ₹1000के नोटों का विमुद्रीकरण की घोषणा कर दी

विमुद्रीकरण ( Demonetization )– प्रचलित मुद्रा की कानूनी वैधता समाप्त करके उसे प्रचलन से हटाना ही विमुद्रीकरण कहलाता है

मुद्रा की भूमिका-

विनिमय का माध्यम ( Medium of exchange )

  1. खाते की काया मूल्य का मापक
  2. विलंबित भुगतान की मानक
  3. मूल्य का भंडार

September 28, 2020

Structures and resources आधारभूत -सरंचना एवं संसाधन

सरंचना एवं संसाधन

संसाधन

आर्थिक विकास में आधारभूत संरचना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है आधारभूत संरचना में जो क्षेत्र समृद्ध होते हैं उनका विकास तेज गति से होता है आधारभूत संरचना को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है

पहला भाग आधारभूत ढांचागत संरचना है इस में परिवहन विद्युत संचार को सम्मिलित किया जाता है इसके अलावा सिंचाई भी आधारभूत ढांचागत संरचना का भाग है क्योंकि कृषि विकास सिंचाई पर निर्भर है

आधारभूत संरचना का दूसरा भाग आधारभूत सामाजिक संरचना है इसमें प्रमुख रूप से मानव संसाधन विकास को सम्मिलित किया जाता है

राजस्थान का विकास के मामले में अग्रणी राज्य नहीं होने का कारण आधारभूत संरचना का अभाव है बिना आधारभूत संरचना के विकास का पहिया नहीं घूम सकता है राजस्थान सरकार आर्थिक विकास में आधारभूत संरचना की महत्ता को दृष्टिगत रखते हुए इसके विकास पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं राजस्थान की पंचवर्षीय योजनाओं में और वार्षिक योजनाओं में वित्तीय संसाधनों का बड़ा भाग आधारभूत संरचना पर खर्च किया जा रहा है जैसे जैसे राजस्थान में आधारभूत संरचना की स्थिति सुधर रही है वैसे वैसे राजस्थान आर्थिक विकास में आगे बढ़ रहा है राजस्थान में आधारभूत संरचना विशेष रूप से परिवहन ऊर्जा सिंचाई संचार और मानव संसाधन की स्थितियां निम्नलिखित है

1 परिवहन
2 ऊर्जा
3 सिंचाई
4 संचार
5 मानव संसाधन

1 परिवहन

आर्थिक विकास में परिवहन का महत्वपूर्ण स्थान है औद्योगिक विकास के लिए परिवहन आवश्यक है परिवहन के साधनों से सभी क्षेत्रों के विकास को गति मिलती हैं परिवहन की प्राकृतिक आपदाओं के समय में अत्यधिक उपयोगिता है युद्ध के समय परिवहन के साधनों की महत्व और अधिक बढ़ जाती है परिवहन का सांस्कृतिक महत्व है राजस्थान की योजनाबद्ध विकास में परिवहन विकास पर ध्यान दिया गया है राजस्थान में विगत कुछ वर्षों में परिवहन के क्षेत्र में प्रगति की है

परिवहन में मुख्यतः सड़क रेल और वायु यातायात को सम्मिलित किया जाता है

सड़क परिवहन

महानगर और बड़े शहर सामान्यतया रेल और वायु यातायात से जुड़े होते हैं किंतु गांव के परिवहन का साधन मुख्य रूप से सड़के ही है गांव में सड़कों का महत्व मानव शरीर में शिरा और धमनियों की भांति है राजस्थान में जनसंख्या का बड़ा भाग गांव में जीवन व्यतीत करता है राज्य के गांव में जहां-जहां सड़के पहुंची हैसमृद्धि स्वतः ही नजर आने लगी है सड़कों के विकास के बिना गांव अधूरे दिखते हैं सड़कों के अभाव में गांव का सामाजिक विकास गति नहीं पकड़ पाता है वर्तमान में राजस्थान के गांव में सड़कों का जाल बिछा नजर आने लगा है

राज्य में सड़क परिवहन की प्रकृति को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है

1 यातायात विकास परियोजना खर्च- राजस्थान की योजनाबद्ध विकास में यातायात विकास पर खर्च में वृद्धि की गई वर्तमान में सड़क परिवहन राज्य सरकार का महत्वपूर्ण प्राथमिकता वाला विकास शीर्ष है

2 सड़कों का विकास- योजनाबद्ध विकास में यातायात खर्च में वृद्धि से सड़क परिवहन का विकास हुआ है राजस्थान में डामर की सड़कों की लंबाई 1950- 51 में 17339 किलोमीटर थी जो बढ़कर मार्च 2016 तक सड़कों की लंबाई 2,17;707•25 किलोमीटर हो गई। इन सड़कों में राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य राजमार्ग मुख्य जिला शहर के अन्य जिला सड़क एवं ग्रामीण सड़कें सम्मिलित हैं

3 राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम- राजस्थान सरकार का सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख प्रतिष्ठान है एक वैधानिक नियम के रूप में इसकी स्थापना सन 1 अक्टूम्बर1964(जयपुर ) में हुई यह निगम स्थापना के समय से ही यात्री यातायात के क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है।*

4 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-(PMGSY)- देश के सभी गांव को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री द्वारा 25 दिसंबर 2000 को प्रधानमंत्री “ग्राम सड़क योजना” घोषित की गई इसके अंतर्गत 1991 की जनगणना के अनुसार 1027 से अधिक आबादी वाले गांवों को वर्ष 2003 तक तथा 500 से 1000 आबादी वाले सभी गांव को 2007 तक सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जनजातीय क्षेत्रों में ढाई सौ की आबादी वाले गांव को सड़कों से जोड़ने की योजना है

5 राजस्थान रोड विजन-2025 

राजस्थान में सड़क तंत्र के कायापलट के लिए राजस्थान रोड विजन 2025 तैयार किया गया सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 21वी सदी के पहले 25 साल में राज्य में सड़कों के विकास के लिए यह दीर्धावधि “विजन” तैयार किया गया इसमें सड़कों के विकास के साथ-साथ सड़कों के रखरखाव और सड़कों की गुणवत्ता पर बल दिया गया रोड विजन 2025 में पहले 15 साल में सभी गांवों को सड़कों से जोड़ने के बाद अगले 10 साल में एक्सप्रेस में फ्लाईओवर 4 लेन के राजकीय मार्ग पर जोर दिया गया इस विषय में धार्मिक महत्व के स्थानों पर्यटन का नाम और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नए सड़क संपर्क विकसित करना जरूरी माना गया है

सड़क परिवहन के संबंध में राजस्थान को “मॉडल स्टेट” माना जाता है राजस्थान में परिवहन व्यवस्था कार्यविधि अनुकरणीय है

6 राजस्थान राज्य मार्ग अधिनियम 2016-  विधानसभा द्वारा पारित कर दिया गया जो 8 मई 2015 से लागू किया गया

7 राजस्थान राज्य राजमार्ग विकास परियोजना- राज्य में राज्य राजमार्गों को पीपीपी एन्यूटी के आधार पर विकसित करने हेतु इस परियोजना का निर्माण किया गया

8 मुख्यमंत्री सड़क योजना- यह योजना 7 अक्टूबर 2005 को शुरू की गई योजना में राज्य में प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को जोड़ने हेतु 1000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो रहा है प्रत्येक जिले में एक आदर्श सड़क मॉडल रोड का विकास किया गया है

9 ग्रामीण गौरव पथ योजना- वर्ष 2014 15 मई योजना प्रारंभ की गई इस योजना के तहत आगामी 3 वर्षों में पंचायत मुख्यालय में 0•5 से 2 किलोमीटर की एक सड़क को ग्रामीण गौरव पथ के रूप में विकसित किया जाना है

10 सार्वजनिक निजी सहभागिता(PPP) बेल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर(BOT)-

 आगामी 5 वर्षों में पीपीपी के माध्यम से 20,000 किलोमीटर राज्य उच्च मार्ग को विकसित किया जाएगा

निगम ने परिचालकों को स्वायत्तता देना तथा आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मेरी “बस मेरा रुठ योजना “लागू की जा रही है

11 राजस्थान सड़क क्षेत्र आधुनिकरण परियोजना- विश्व बैंक वर्ष 2013 14 में विश्व बैंक वित्त पोषित यह नवीन परियोजना प्रारंभ की गई थी

12 राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड(राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड-RSRDCC)- राजस्थान स्टेट ब्रिज लिमिटेड स्थापना एक सार्वजनिक कंपनी के रूप में 1979 को हुई थी 2001 को नाम परिवर्तित कर राजस्थान सड़क विकास एवं निर्माण निगम कर दिया गया इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य आधुनिक पुलों सड़कों तथा भवनों के निर्माण को करना

रेल परिवहन

स्वतंत्रता से पूर्व राजस्थान में रेलमार्गों का विकास बहुत कम था थोड़ा-बहुत रेल मार्गों का विकास जयपुर रियासत बीकानेर रियासत जोधपुर रियासत तथा उदयपुर रियासत में हुआ था डूंगरपुर बांसवाड़ा जैसलमेर रियासत रेल मार्गों से जुड़ी हुई नहीं थी स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने रेल विकास का काम हाथ में लिया वर्तमान में रेल परिवहन भारत सरकार का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है प्रत्येक वर्ष संसद में रेल मंत्री के द्वारा रेल बजट पेश किया जाता है राजस्थान में रेल विकास का दायित्व भारत सरकार पर है

  • रेलवे को हमारे संविधान में संघ सूची का विषय बनाया गया
  • राजस्थान में वर्तमान में दो रेलवे जोन व पांच मंडल कार्यालय भारत में 17 रेलवे जोन है
  • उत्तर पश्चिम रेलवे- 2002 को राजस्थान में बनाया गया नया रेलवे जोन इसका मुख्यालय जयपुर में स्थित है जिसमें राज्य के चार रेल मंडल जयपुर अजमेर बीकानेर जोधपुर शामिल किए गए
  • पश्चिमी मध्य रेलवे जोन- राज्य का कोटा मंडल इस जोन के अंतर्गत आता है पश्चिम मध्य रेलवे जोन का मुख्यालय जबलपुर में है
  • रेल मार्ग की लंबाई की दृष्टि से राजस्थान का भारत में 12 स्थान है
  • अप्रैल,1874 में राजस्थान में प्रथम रेल की शुरुआत जयपुर रियासत में आगरा फोर्ट से बांदीकुई के बीच में की गई
  • आजादी से पूर्व बीकानेर जोधपुर रियासत में सर्वप्रथम अपने निजी रेलमार्ग स्थापित किए
  • राजस्थान में मार्च 2015 तक रेल मार्ग की कुल लंबाई 5898 किलोमीटर हैं,जो देश की कुल लंबाई का 8•93 प्रतिशत है।
  • भारतीय रेल अनुसंधान एवं परीक्षण-इस केन्द्र का निर्माण पचपदरा बाड़मेर में किया जा रहा है जहां पर तेज गति से चलने वाली ट्रेनों का परीक्षण किया जाएगा

 जयपुर मेट्रो रेल परियोजना –

 जयपुर शहर में आवागमन सुविधा बढ़ाने हेतु मेट्रो रेल परियोजना की शुरुआत की गई, राज्य सरकार ने पूर्ण स्वामित्व वाली जयपुर मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड का पंजीकरण 1 जनवरी 2010 को कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत किया गया

 शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 27 नवंबर 2015 को जयपुर मेट्रो रेल परियोजना (फेज-1ए) को बेस्ट अरबन मास ट्रांजिट प्रोजेक्ट केटेगरी में  “Commedable emerging initiative  रूप में विशेष अवार्ड प्रदान किया गया है

सौ साल बाद इतिहास बन गई मीटरगेज लाइन – जयपुर सीकर मीटर गेज की रेल लाइन अब इतिहास बन गई है मीटर गेज लाइन को 15 नवंबर 2016 से बंद कर दिया गया इस लाइन को ब्रॉडगेज लाइन में बदला जा रहा है जयपुर में सौ साल पहले 19 दिसंबर 1916 को यह लाइन शुरू की गई थी इसका उद्घाटन ?लॉर्ड चेम्सफोर्ड? ने किया था

वायु परिवहन

  • स्वतंत्रता से पहले राजस्थान में वायु परिवहन का विकास नहीं के बराबर था राजस्थान में केवल जोधपुर में हवाई अड्डे था जो दिल्ली और कराची से जुड़ा था
  • वर्ष 1947 में बीकानेर जोधपुर वायु सेवा प्रारंभ हुई स्वतंत्रता के बाद 1953 में वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण किया गया
  • देश में वायु परिवहन का संचालन नागर विमानन विभाग करता है देश में एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस की प्रमुख सेवाएं हैं
  • आर्थिक उदारीकरण के बाद वायु परिवहन में निजी सेवाओं की भूमिका भी बढ़ गई है पिछले कुछ दशकों में राजस्थान वायु परिवहन में पिछड़ा हुआ था किंतु वर्तमान में वायु परिवहन के क्षेत्र में राजस्थान की स्थिति में सुधार आ रहा है
  • भारतीय संविधान में वायु परिवहन को संघ सूची का विषय बनाया गया है

  • राजस्थान में वर्तमान में कुल 10 एयरपोर्ट एवं 27 हवाई पट्टी है
  • वायुमार्गों एवं आवश्यक सुविधाओं के विकास का दायित्व पूर्णता केंद्रीय सरकार के नियंत्रण में है
  • जैसलमेर में राज्य का पांचवा सिविल एयरपोर्ट बनाया जा रहा है
  • बाड़मेर में उत्तर लाई वायुसेना हवाई अड्डा एवं बीकानेर में लाल हवाई अड्डा है जो भूमिगत सैनिक हवाई अड्डा है
  • जयपुर में स्थित हवाई अड्डे को 29 दिसंबर 2005 को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा दिया गया है
  • यह देश का 14वाँ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हो गया।
  • 20 दिसंबर 2006 को नागर विमानन निगम की स्थापना राज्य में की गई
  • उड़े देश का आम नागरिक योजना- वसुंधरा राजे ने दिल्ली जोधपुर मुंबई एवं दिल्ली जयपुर उदयपुर औरंगाबाद मुंबई सेक्टर की बंद विमान सेवाओं को बहाल करने की मांग रखी

2 ऊर्जा

  • ऊर्जा महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना है अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र जैसे कृषि उद्योग परिवहन सामाजिक विकास आदि क्षेत्र विकास के लिए ऊर्जा पर निर्भर हैं क्षेत्र विशेष का विकास ऊर्जा बिना संभव नहीं है
  • ऊर्जा के लिए परंपरागत और गैर परंपरागत स्रोत होते हैं
  • परंपरागत स्रोतों में जल विद्युत थर्मल विद्युत एवं ऊर्जा सम्मिलित की जाती है
  • ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों में बायोगैस सौर ऊर्जा पवन ऊर्जा आदि प्रमुख है
  • राजस्थान_सरकार अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की महत्ता और उदारीकरण के कारण औद्योगिक विकास में वृद्धि की संभावनाओं को दृष्टि में रखकर ऊर्जा विकास के लिए प्रयत्नशील है राजस्थान की गिनती हो जाए छेत्र में आर्थिक सुधारों को लागू करने के मामले में देश के अग्रणी राज्य में होती हैं
  • राजस्थान_में विद्युत क्षेत्र सुधार अधिनियम 1999 लागू किया गया। राजस्थान राज्य विद्युत मंडल घाटे से ग्रसित होने के कारण 1999 में समाप्त कर दिया गया
  • राजस्थान में सन 2000 में 5 स्वतंत्र कंपनियां गठित की गई नई कंपनियों में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड राज्य में विद्युत उत्पादन योजनाओं क्रियान्वयन,संचालन एवं रखरखाव करती है
  • अन्य कंपनी राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड राज्य में प्रसारण तंत्र का निर्माण एवं संचालन करती है
  • बिजली वितरण के लिए तीन कंपनियां यथा जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड तथा जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड है यह तीनों कंपनियां अपने अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से विद्युत वितरण का कार्य संचालित करती है

विद्युत विकास पर योजना परिव्यव-

 राजस्थान में ऊर्जा की कमी और आर्थिक विकास में विद्युत की महत्ता को ध्यान में रखते हुए पंचवर्षीय योजनाओं में पूजा पर भारी वित्तीय संसाधन आवंटित किए गए पंचवर्षीय योजनाओं की प्राथमिकता में ऊर्जा विकास को सर्वोच्च स्थान दिया गया।

? पहली पंचवर्षीय योजना के कुल योजना विकास 2•3% प्रतिशत भाग ऊर्जा विकास पर खर्च किया गया,ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में कुल योजना वे का ऊर्जा विकास पर भी बढ़कर 36% हो गया

प्रमुख विद्युत परियोजनाएं-

 योजनाबद्ध विकास में राजस्थान में कई विद्युत परियोजना की स्थापना की गई राजस्थान में दो प्रकार की विद्युत परियोजनाएं हैं एक राज्य की स्वयं की स्वामित्व वाली परियोजना है इनमें सुपर थर्मल तापीय विद्युत परियोजना कोटा, सूरतगढ़ ताप बिजली परियोजना, छाबड़ा तापीय विद्युत परियोजना,माही जल विद्युत परियोजना है तथा अन्य आंशिक स्वामित्व वाली परियोजना हैं जिनसे राजस्थान को विद्युत प्राप्त होती हैं इनमें चंबल परियोजना,व्यास परियोजना,भांगड़ा परियोजना,सतपुड़ा परियोजना प्रमुख है

राजस्थान परमाणु शक्ति परियोजना एक महत्वपूर्ण परियोजना है? जिसके अंतर्गत रावतभाटा में परमाणु संयंत्र स्थापित किया गया अन्य ऊर्जा परियोजना में अन्ता विद्युत परियोजना (गैस आधारित) है। ऊर्जा उत्पादन के प्रति सरकार अत्यधिक प्रयत्नशील है।

  • राजस्थान में 12वीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार ऊर्जा क्षेत्र का कुल व्यय 37•46%, 2वीं पंचवर्षीय योजना में कुल व्यय 72,723•25 करोड रुपए रहा है।
  • LED और ऊर्जा संरक्षण मिशन-2015
  • राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2014-उद्देश्य 25000 मेगावाट की सौर ऊर्जा क्षमता की स्थापना को मूर्त रूप प्रदान करने हेतु
  • अल्ट्रा सौर परियोजना-2014 सांभर, राजस्थान में 19000 एकड़ में फैला विश्व का सबसे बड़ा एकल स्थल सौर संयंत्र स्थापित किया जा रहा है 4000 मेगावाट का है
  • 18 जुलाई 2012 को राज्य सरकार ने नई पवन ऊर्जा नीति 2012 जारी की यह 18 जुलाई 2012 से लागू की गई
  • सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 19 अप्रैल 2011 को राज्य की पहली सौर ऊर्जा नीति मंजूर की गई “राजस्थान सौर ऊर्जा नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य” बन गया।
  • राज्य में प्रथम सौर ऊर्जा पार्क भादला(जोधपुर) में स्थापित किया जा रहा है

ऊर्जा के स्रोत ऊर्जा प्राप्ति के स्रोतों को दो भागो में बांटा जा सकता है

1. परंपरागत स्रोत-

  • A. जल विद्युत
  • B. तापीय विद्युत-कोयला,गैस,तेल आदि
  • C. आणविक ऊर्जा

2. गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत-

  • A. सौर ऊर्जा-सूर्य की ऊर्जा से उत्पन्न ऊर्जा
  • B. पवन ऊर्जा तेज चलने वाली हवा से उत्पन्न ऊर्जा
  • C. बायोगैस जानवरों के मल मूत्र से वायु रहित अवस्था में अपघटन से प्राप्त ऊर्जा
  • D. ज्वारीय तरंग ऊर्जा समुद्री ज्वार भाटा एवं तरंगों से उत्पन्न ऊर्जा
  • E. भूतापीय ऊर्जा-पृथ्वी के निकलने वाले गरम स्त्रोतों की उष्मा से उत्पन्न ऊर्जा।

राज्य में गैर परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों के विकास हेतु वर्तमान में राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम( राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कारपोरेशन)कार्यरत हैं जिसका गठन 9 अगस्त 2002 को राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण(REDA), राजस्थान स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड(RSPCL)को मिलाकर किया गया था जिसका मुख्यालय जयपुर में है

  • 1957 को राजस्थान राज्य विद्युत मंडल की स्थापना की गई
  • रेडा (REDA-Rajasthan energy Development Agency)- इसकी स्थापना 21 जनवरी 1985 को की गई,इसका प्रमुख उद्देश्य गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के विकास एवं गैर परंपरागत ऊर्जा उपकरणों को बढ़ावा देना है
  • राजस्थान स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड(RSPCL) – स्थापना 1995 में की गई परंपरागत ऊर्जा संसाधनों से ऊर्जा उत्पादन संयंत्रों की स्थापना इसका प्रमुख उद्देश्य हैं

राज्य की ताप विद्युत परियोजनाएं

 सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन-

(सूरतगढ़) गंगानगर के निकट ठुकराना गांव के समीप प्रभात नगर में स्थित है राज्य का पहला सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट है ढाई सौ मेगावाट की छोटी इकाई का शिलान्यास 9 जनवरी 2007 को किया गया सुपर थर्मल पावर प्लांट की क्षमता 15 मेगावाट है

  • कोटा सुपर थर्मल विद्युत परियोजना (राज्य का दूसरा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट)
  • गिरील ताप विद्युत परियोजना-गिरिल (Barmer)
  • थुम्बली गांव, शिव,बाड़मेर राजस्थान राज्य का पहला लिग्नाइट गैस करण तकनीक पर आधारित विद्युत गृह।
  • छाबड़ा थर्मल पावर प्रोजेक्ट  -ग्राम चौकी मोतीपुरा छबड़ा बारां
  • बरसिंगसर थर्मल पावर प्रोजेक्ट  – (बरसिंगसर) बीकानेर
  • भादेसर(बाड़मेर) लिग्नाइट आधारित सुपर पावर प्रोजेक्ट 

राज्य की गैस व तरल ईंधन आधारित परियोजनाएं

 रामगढ़ गैस विद्युत परियोजना- रामगढ़,(जैसलमेर) यह परियोजना राज्य द्वारा संचालित प्रथम गैस आधारित विद्युत परियोजना है जिसकी क्षमता 113•5 मेगावाट है इस परियोजना को गैस आपूर्ति गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL)द्वारा की जाएगी

➡ झामरकोटड़ा(उदयपुर )

➡ गैस विद्युत परियोजना बारा राजस्थान यह राजस्थान में स्थअंताापित प्रथम किस विद्युत परियोजना है NTPC द्वारा संचालित

1 आणविक विद्युत परियोजना

  • राजस्थान परमाणु शक्ति गृह रावतभाटा चित्तौड़- स्थापना सन 11 अगस्त 1972 में कनाडा के सहयोग से राज्य का प्रथम बार देश का दूसरा परमाणु संयंत्र है
  • दूसरा परमाणु संयंत्र बांसवाड़ा में प्रस्तावित है
  • देश में कुल 21 परमाणु संयंत्र हैं
  • 21वां परमाणु संयंत्र कुडनकुलम तमिलनाडु में स्थित है
  • परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना 1948 में की गई

2 सौर ऊर्जा

  • राज्य_में सौर ऊर्जा संयंत्र- जैसलमेर
  • राज्य_का पहला गांव जहां संपूर्ण विद्युत सौर ऊर्जा से प्राप्त की जा रही है – नया गांव (जयपुर)
  • राज्य_का पहला सौर ऊर्जा से चलित रेफ्रीजिरेटर- बालेसर (जोधपुर)
  • राज्य का प्रथम सौर ऊर्जा आधारित विद्युत संयंत्र – मथानिया (जोधपुर)
  • राजस्थान सौर ऊर्जा नीति -19 अप्रैल 2011

3 पवन ऊर्जा

  • पवन ऊर्जा के उत्पादन के क्षेत्र में राज्य का चौथा स्थान है भारत में सर्वाधिक पवन ऊर्जा का उत्पादन तमिलनाडु में है
  • राज्य की पहली पवन ऊर्जा योजना-अमरसागर (जैसलमेर) स्थापना राजस्थान स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड प्रतापगढ़ द्वारा ।

4 बायो गैस/गोबर गैस

  • सर्वाधिक बायोगैस संयंत्र- उदयपुर
  • पशुओं की पर्याप्त मात्रा होने से अधिक संभावना

5 बायोमास ऊर्जा 

  • अपशिष्ट कचरा कृषि अपशिष्टों से विद्युत का उत्पादन किया जाता है बायोमास कहलाता है
  • राजस्थान में बायोमास ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत सरसों की तूड़ी या विलायती बबूल है
  • राज्य में पहला बायोमास ऊर्जा आधारित संयंत्र- पदमपुर गंगानगर

6 भू-तापीय ऊर्जा 

राज्य में माउंट आबू में अधिक संभावना है।

3 सिंचाई

?राजस्थान कृषि प्रधान राज्य है यहां के अधिकांश लोग जीवन स्तर के लिए कृषि पर निर्भर हैं कृषि विकास सिंचाई पर निर्भर करता है राजस्थान के पश्चिमी भाग में मरुस्थल है मानसून के आने के कारण “कृषि मानसून का जुआ है” जैसी बात कई बातें चरितार्थ होती है हरित क्रांति और कृषि क्षेत्र की आधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ सिंचाई द्वारा ही संभव है इसीलिए राजस्थान में सिंचाई के साधनों के विकास की महत्ती आवश्यकता है

सिंचाई के स्रोत 

  • राजस्थान की सिंचाई के प्रमुख साधनों में नहरें,तालाब कुऐं,नलकूप है कुऐं,नलकूप सिंचाई के सर्वोत्तम साधन है इनके द्वारा फसलों में आवश्यकतानुसार पानी दिया जा सकता है कुआं और नलकूप द्वारा सिंचाई के लिए पानी का मीठा होना,जल स्तर का गहरा नहीं होना तथा उपजाऊ भूमि का होना आवश्यक है
  • नहरों द्वारा जल का सबसे अधिक उपयोग होता है राज्य में सतत प्रवाही नदियों के अभाव में नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्र कम है राज्य के दक्षिणी पूर्वी,पठारी एवं पथरीलें द्वारा तलाबों द्वारा सिंचाई की जाती है
  • राजस्थान की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को आधुनिक भारत के मंदिर संज्ञा दी गई है।

4 संचार

संचार आधारभूत संरचना का महत्वपूर्ण भाग है वर्तमान में आर्थिक विकास में संचार की भूमिका बढ़ गई है देश में डाक एवं दूरसंचार सेवाओं का तीव्र गति से विकास हुआ है सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वृद्धि और विकास में संचार क्षेत्र में क्रांति ला दी हैं संचार सुविधाओं के विकास में सार्वजनिक क्षेत्र के साथ निजी क्षेत्र उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं।

राजस्थान में डाक सेवा का पर्याप्त विकास हुआ है राज्य में औसतन 33 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक डाकघर स्थापित हैं इसके अलावा प्रति डाकघर औसतन 5404 व्यक्तियों को सेवाएं प्राप्त हो रही हैं राजस्थान में डाक एवं दूरसंचार सेवा में डाकघर,तार कार्यालय, टेलीफोन एक्सचेंज, लोकल पीसीओ, एसटीडी/पीसीओ, ग्रामीण पीटी,इंटरनेट सेवा आदि सम्मिलित है।संचार के अन्य साधनों में टेलीविजन रेडियो टेलीग्राफ टेलीग्राम टेलेक्स कंप्यूटर लैपटॉप आदि है।।

5 मानव संसाधन 

आर्थिक विकास में सामाजिक आधारभूत संरचना की भूमिका बढ़ गई है इसमें मानव संसाधन संरचना अधिक महत्वपूर्ण है इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण, जलापूर्ति, आवास, समाज कल्याण जनजाति, क्षेत्रीय विकास, महिला एवं बाल विकास और कल्याणकारी गतिविधियां भी सामाजिक आधारभूत संरचना के अंग है।

राजस्थान_में मानव संसाधन विकास की स्थिति सुधारवादी चरण में है राजस्थान में साक्षरता दर 1991 में 38•6% थी जो 2001 में बढ़कर 60•4% हो गई इस प्रकार 1991-2001 के दशक में राजस्थान की साक्षरता दर में 21•8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

राजस्थान_के मानव संसाधन विकास में प्रारंभिक शिक्षा एवं साक्षरता, माध्यमिक शिक्षा,उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा ,औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान ,संस्कृत शिक्षा विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है

राजस्थान_में 2005-06 में 56573 प्राथमिक स्कूल, 28955 उच्च प्राथमिक स्कूल, 11199 उच्च माध्यमिक विद्यालय थे, राज्य में 2006-07 में 1090 उच्च शैक्षणिक संस्थानों तथा 21 राष्ट्रीय महत्व के विश्वविद्यालय तथा डीम्ड विश्वविद्यालय थे।

संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन संसाधन

September 28, 2020

Programs and schemes कमजोर वर्गों के लिए कार्यक्रम व योजनाएं

कमजोर वर्गों के लिए कार्यक्रम व योजनाएं )

1. राजस्थान अन्नपूर्णा दूध योजना ( Rajasthan Annapoorna Milk Scheme )

योजनाएं

राजस्थान सरकार ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे उन छात्रों के नामांकन में वृद्धि, ड्रॉप-आउट को रोकने, और पौष्टिक स्तर को बढ़ाने के लिए मध्य-भोजन भोजन योजना के लिए राजस्थान अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू की है।

छात्रों का इसके लिए, मिड डे मील के आयुक्त प्रति छात्र एक लीटर दूध की मात्रा दी जाएगी और हर स्कूल में दूध के लिए डेयरी के अलावा जहां से भी हो निर्देश दिए जाएँगे।  शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह व्यवस्था जुलाई 2018 से शुरू होने वाले सत्र से लागू की जाएगी।

  • राजस्थान अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत, सरकारी स्कूलों में –
  • कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को 150 मिलीलीटर दूध दिया जाएगा।
  • कक्षा 6 से 8 के छात्रों को 200 एमएल स्कूलों में दूध प्रदान किया जाएगा।
  • यह योजना उन बच्चों को पोषण प्रदान करने के लिए है जो दूध नहीं ले सकते हैं।
  • दूध वितरण स्कूल प्रबंधन समितियों के मार्गदर्शन में किया जाएगा।

राजस्थान अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत एक सप्ताह में 3 बार दूध प्रदान किया जाएगा  शहरी इलाकों में, गर्म दूध सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को और ग्रामीण क्षेत्रों में, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार या शहरी क्षेत्रों के समान प्रदान किया जाएगा। प्रार्थना बैठक के बाद दूध दिया जाएगा।

अन्नपूर्णा दूध योजना के लाभ:-

  • राज्य सरकार इस योजना को समाज के गरीब वर्गों के छात्रों को दूध प्रदान करने के लिए शुरू करेगी जो दूध की आपूर्ति नहीं कर सकते हैं |
  • दूध एक आवश्यक भोजन है और इसके विभिन्न स्वास्थ्य लाभ हैं,  बच्चों के उचित पोषण को सुनिश्चित करेगी और इस प्रकार उन्हें स्वस्थ जीवन शैली प्रदान करने में मदद करेगी |
  • मानव शरीर के समग्र विकास और पुरानी बीमारियों की रोकथाम के लिए दूध आवश्यक है

2. ई- सखी योजना ( E- Sakhi scheme )

डिजिटल राजस्थान के संबंध में हर व्यक्ति में राज्य सरकार की सार्वजनिक कल्याण योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ई-सखी योजना शुरू की गई है। इस योजना में, राज्य में ई-स्कूलों के रूप में लगभग 1.5 लाख महिलाएं चुनी जाएंगी।

ई-सखी योजना के लिए, हर आठवें व्यक्ति को प्रत्येक गांव से चार से पांच और शहरी उपनगरीय क्षेत्रों के हर वार्ड में चुना जाएगा। ई-सखी बनने की इच्छा रखने वाली महिलाएं Google Play Store पर उपलब्ध ई-सखी मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना ऑनलाइन पंजीकरण कर सकती हैं। पंजीकरण करने से पहले, ई-सखी के पास एसएसओ होना चाहिए।

http://sso.rajasthan.gov.in/register वेब पोर्टल पर जाकर उपलब्ध विकल्पों के आधार पर एक एसएसओ बना सकता है।

3. मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृति योजना ( Chief Minister’s Higher Education Scholarship Scheme )

राजस्थान सरकार ने राज्य के मेधावी छात्रों के लिए राजस्थान मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ किया है। इस छात्रवृत्ति योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले हर छात्र को छात्रवृत्ति दी जानी चाहिए ताकि वह स्वयं निर्भर हो सके।

राज्य सरकार प्रमुख छात्र छात्रावास योजना के तहत छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। केवल राजस्थान के स्थायी निवासी इस छात्रवृत्ति योजना का लाभ उठा सकते हैं।

आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। जो छात्र अजमेर के राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12 वीं परीक्षा उत्तीर्ण की है, इस वर्ष में न्यूनतम 60 प्रतिशत और बोर्ड की प्राथमिकता सूची में पहले एक लाख में एक जगह हासिल करनी होगी।

जिन छात्रों ने सरकार द्वारा किसी अन्य छात्रवृत्ति का लाभ उठाया है, वे इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते हैं। इस योजना के लिए, छात्र का किसी भी बैंक में खाता होना चाहिए।

4. राजस्थान पद्माक्षी पुरस्कार योजना ( Rajasthan Padmakshi Award Scheme )

इस_राजस्थान_पद्माक्षी पुरस्कार_योजना के तहत लाभ 8 वीं, 10 वीं और 12 वीं कक्षा की मेधावी लड़कियों को प्रदान किए जाएंगे।

इस योजना_के तहत, एक पुरस्कार राशि के रूप में 8 वीं कक्षा की मेधावी छात्राओं के लिए 40 हजार रूपये और कक्षा 10 में सबसे जयादा अंक अर्जित करने वाली छात्राओं के लिए 75 हजार रूपये तथा कक्षा 12 में सबसे जयादा अंक अर्जित करने वाली छात्राओं के लिए 1 लाख रूपये की राशी का वितरण किया जाएगा।

इस योजना के तहत, 10 वीं और 12 वीं की मेधावी छात्राओं को राज्य द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।  इस पुरस्कार योजना के अंतर्गत, 4 छात्राओं को 31 सौ रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा।

5. राजश्री योजना ( Rajshri Yojana )

1 जून, 2016 से शुरू मुख्यमंत्री “शुभ लक्ष्मी योजना “का परिवर्तन “राजश्री योजना” नाम कर दिया गया है । बालिका कल्याण की इस महत्वकांक्षी योजना में अभ्यर्थियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक प्रोत्साहन दिया जायेगा ।

मुख्यमंत्री राजश्री योजना के जन्म से लेकर 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने तक अलग-अलग किस्तों में ₹50000 की राशि दी जाएगी ।

मुख्यमंत्री राजश्री योजना के तहत जिले के सभी शिक्षा संस्थानों तथा जेएसवाई में अधिस्वीकृत निजी शिक्षण संस्थानों पर बालिका के जीवित जन्म का प्रथम किस्त के रूप में देय राशि 2500 रुपये ,बालिका 1 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद तथा टीकाकरण की शर्त के रूप में देय राशि 2500 रुपये मिलेगी ।

इसके बाद बालिका स्कूल में पहली कक्षा में प्रवेश पर 5000 रुपये , 10 वीं कक्षा में प्रवेश पर 11,000 रुपये और राजकीय विद्यालय से 12 वी कक्षा उतीर्ण करने पर ₹25000 की राशि दी जाएगी ।

इस योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए योजना को भामाशाह कार्ड से भी जोड़ा जाएगा ।

6. श्रमिक कल्याण कार्यक्रम ( Labor welfare program )

अटल पेंशन योजना:- 1 जून 2005 मे

इसके तहत 60 साल की उम्र के बाद 5000 रुपए तक पेशन मिलेगी। स्वावलंबन योजना के मौजूद अंशधारक अगर इससे बाहर निकलने का विकल्प नहीं चुनते है तो वे स्वत: एपीवाई पेंशन योजना मे आ जाएंगे। बयान के अनुसार एपीवाई के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल तथा अधिकतम उम्र 40 साल हैं ।

राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना ( National child labor project ) :-

बाल श्रमिकों को जोखिमपूर्ण कार्यो/ व्यवसायों से मुक्त कराकर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना।

कर्मचारी राज्य बीमा योजना ( Employee state insurance scheme ):-

दिनांक 2 दिसम्बर,1956 मे क्रियाशील यह योजना एक विशिष्ट प्रकार की सामाजिक सुरक्षा योजना हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य विभिन्न उधोगों एवं कल कारखानों मे कार्यरत बीमित श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों को उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाया जाना हैं।

इस योजना मे चार चिकित्सालय- : कोटा,जोधपुर, भीलवाड़ा, व पाली मे।

श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्रारा मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रम अधिनियम बनाए गए हैं:-

  • कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923
  • मातृत्व हितलाभ अधिनियम,1961
  • उपादान भुगतान अधिनियम, 1972
  • कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम,1948
  • कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952

असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम 2008:- केन्द्र सरकार द्रारा असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम,2008 दिनांक 31 दिसंबर,2008 को अधिसूचित किया गया। जिसे 16 मई, 2009 से प्रभावी किया गया था।

7. प्रधानमंत्री आवास योजना ( Prime minister housing scheme )

18 मार्च ,2017 को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का शुभारंभ बांसवाड़ा से किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना ( Prime minister housing scheme ) का शुभारंभ श्रीमती वसुंधरा राजे ने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री नरेंद्र तोमर एवं पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ के साथ किया ।

योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री ने 5 महिलाओं को स्वीकृति पत्र देकर की । प्रधानमंत्री आवास योजना के तहतराज्य में 6.75 लाख परिवारों को 2 वर्षों में रहने के लिए अपना स्वयं का मकान मिलेगा ।

ये आवास 2 साल में बनेंगे । इन पर 8425 करोड़ रु खर्च होंगे । इस योजना के तहत 2022 तक हर गरीब व्यक्ति को अपना घर मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है ।प्रत्येक व्यक्ति को अपना घर बनाने के लिए करीब डेढ़ लाख रूपय दिए जाएंगे ।

इनमें से 1.20 लाख रुपए नगद, महानरेगा से मजदूरी के रूप में 17,280 तथा शौचालय निर्माण के लिए ₹12000 दिए जाएंगे । इस योजना में 60% राशि केंद्र तथा 40% राशि राज्य सरकार देगी ।

1 लाख 50 हजार आवासों की स्वीकृति जारी भी हो चुकी है तथा 4 लाख लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन हो चुके है । गरीबों को आश्रय देने की योजना में जनजातीय क्षेत्र पर विशेष फोकस रखा गया है ।

2 वर्षों में 2746 करोड़ रुपए की लागत से इस क्षेत्र में 2.20 लाख मकान बनेंगे । इस योजना में अपने घर का डिजाइन व्यक्ति खुद तय कर सकता है ।

8. अन्नपूर्णा भंडार योजना ( Annapurna store )

जनसाधारण को उच्च गुणवत्ता की मल्टी ब्रांड उपभोक्ता वस्तुएं प्रतिस्पर्धी दरों पर उचित मूल्य की दुकान के माध्यम से उपलब्ध करवाना सार्वजनिक एवं निजी सहभागिता के अंतर्गत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के आधुनिकरण की एक अनूठी योजना है

योजना 31 अक्टूबर 2015 को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा जयपुर जिले के भम्भोरी ग्राम से अन्नपूर्णा भंडार योजना का शुभारंभ किया गयायह देश की पहली आधुनिक पीडीएस योजना है

अन्नपूर्णा भंडार योजना लागू करने वाला राजस्थान का देश का प्रथम व एकमात्र राज्य है

9. अन्नपूर्णा रसोई योजना ( Annapurna Rasoi Scheme )

मुख्यमंत्री राजस्थान द्वारा दिनांक 15 दिसंबर 2016 को अन्नपूर्णा रसोई योजना का जयपुर में शुभारंभ किया गया प्रथम चरण में 12 शहरों जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, भरतपुर, उदयपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बारां, बांसवाड़ा मैं 80 रसाई वैनों का संचालन किया

इस योजना का संचालन जीवन संभल चैरिटेबल ट्रस्ट ( Life saving charitable trust ) संस्था द्वारा किया जा रहा है 15 अगस्त 2017 को इस योजना को प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में 500 स्मार्ट फूड वैन के माध्यम से शुरू करने की घोषणा की गई

16 अक्टूबर, 2017 को अन्नपूर्णा रसोई योजना की दूसरे चरण की शुरुआत अजमेर में की गई । मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विश्व खाद्य दिवस के मौके पर गरीबों और जरूरतमंदों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए अन्नपूर्णा रसोई योजना की दूसरे चरण की अजमेर से शुरुआत की ।

उन्होंने 51 स्मार्ट मोबाइल वेनो को हरी झंडी दिखाकर अलग-अलग शहरों के लिए रवाना किया

अन्नपूर्णा रसोई योजना की कार्यकारी एजेंसी निदेशालय स्थानीय विभाग है उद्देश्य राज्य के नागरिकों को अच्छी गुणवत्ता का पौष्टिक एवं स्वच्छता के साथ नाश्ता एवं भोजन सस्ती और यात्री दरों पर उपलब्ध करवाना

  • नाश्ता ₹5 प्रति प्लेट व भोजन ₹8 प्रति थाली
  • सरकार द्वारा सेवा प्रदाता हेतु अनुमोदित दर नाश्ता 21.70₹ और भोजन 23.70 ₹
  • सरकारी अनुदान नाश्ता ₹16.70 पैसे प्रति प्लेट एवं भोजन ₹15. 70 पैसे प्रति थाली कि दर से
  • नाश्ता 300 ग्राम प्रति प्लेट वह भोजन 425 ग्राम प्रति थाली दिया जाता था जिसे अब बढ़ाकर क्रमशः 350 में 450 ग्राम किया गया है

सभी जरूरतमंदों को पौष्टिक भोजन एंव सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए देश की पहली और अनूठी योजना को हरियाणा ,मध्य प्रदेश ,गुजरात महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य में लागू कर रहे है ।

Note अब इसे राज्य सरकार ने इंदिरा भोजन के नाम से लागू किया हे

10. भामाशाह रोजगार सृजन योजना ( Bamashah employment generation scheme )

13 दिसंबर 2015 से लागू की गई योजना शिक्षित बेरोजगार युवाओं महिलाओं अनुसूचित जाति एवं जनजाति एवं विशेष योग्यजनों को स्वयं का उद्यम प्रारंभ करने हेतु कम ब्याज दर पर बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने की योजना

योजना की अवधि 13 दिसंबर 2015 से 31 मार्च 2020 तक है अधिकतम ₹500000 तक सेवा व्यापार क्षेत्र में तथा अधिकतम 1000000 रुपए उद्योग लगाने हेतु ऋण सुविधा दी जाएगी इन ऋण पत्रों पर 4% का ब्याज अनुदान दिया जा रहा है

योजना हेतु आयु 18 से 50 वर्ष तथा राजस्थान के मूल निवासी होने चाहिए आवेदक के परिवार की आय ₹600000 वार्षिक से अधिक नहीं होनी चाहिए

गत 5 वर्षों से राजकीय रोजगारमूलक अनुदान योजना से लाभान्वित नहीं होना चाहिए राजस्थान भामाशाह (लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओ का सीधा अंतरण और सेवाओं का परिदान ) विधेयक 2017 राज्य विधानसभा द्वारा 24 अप्रैल 2017 को पारित किया गया

11. मुख्यमंत्री कौशल अनुदान योजना ( Mukhyamantri Kaushal Anudaan Yojana  )

राजस्थान सरकार द्वारा कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए युवाओं को रियायति ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ” मुख्यमंत्री कौशल अनुदान योजना” की शुरुआत 1 जनवरी, 2017 को की ।

इस योजना में सरकार युवाओं को उनके कौशल विकास के लिए ₹100000 का ऋण प्रदान करती है। मुख्यमंत्री कौशल अनुदान योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए आवश्यक कौशल के साथ आत्मनिर्भर बनाना है।

राज्य सरकार ₹100000 की राशि तक की ऋण राशि पर 4 से 6% की सब्सिडी प्रदान करती है । इस योजना के दिशा निर्देश केंद्र के राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी द्वारा निर्धारित है जो विशेष रूप से युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए और उनके कौशल को विकसित करने के लिए डिजाइन किया गया है ।

12 . मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना का शुभारंभ ( Mukhyamantri Svachchh Gram Yojana )

मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना का राज्यस्तरीय शुभारंभ 6 जनवरी ,2017 झालावाड़ की पंचायत समिति खानपुर की ग्राम पंचायत कंवरपुरा मंडवालान में राज्य जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष श्री कृष्ण पाटीदार ,संसदीय सचिव नरेंद्र नागर ,जिला प्रमुख टीना कुमारी भील ,जिला कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी द्वारा किया गया ।

मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना गांव को स्वच्छ ,स्वस्थ एवं सुंदर बनाने के लिए प्रारंभ की गई राज्य सरकार की महति योजना है ।यह योजना राज्य की उन ग्राम पंचायतों में लागू की जा रही है जो कि खुले में शौच जाने के अभिशाप से मुक्त( ओडीएफ) हो चुकी है ।

इस योजना के अंतर्गत प्रतिदिन घर-घर जाकर रिक्शा ट्रॉली के माध्यम से कचरा संग्रहण किया जाएगा । ट्रॉली के दो भाग हैं जिनमें से हरे भाग में सड़नशील कचरा बायो( बायोडिग्रेडेबल ) तथा लाल भाग में न सड़ने वाला( नॉन बायोडिग्रेडेबल) कचरा संग्रह किया जाता है

ग्राम ग्राम पंचायत प्रत्येक ग्राम में लगभग 150 घरों का क्लस्टर बनाया जाएगा। क्लस्टर के इन घरों तथा सामुदायिक संगठन एवं परिवहन के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत 2 श्रमिकों का नियोजन 100 दिवसों के लिए किया जाएगा ।

इसमें ग्राम पंचायत के करीब 30 लोगों का न सिर्फ रोजगार प्राप्त होगा बल्कि कचरा प्रबंधन से ग्राम पंचायत को वार्षिक आय भी प्राप्त होगी ।

13. मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान ( Mukhyamantri Jal Svavalamban Abhiyan )

9 दिसंबर , 2017 से “मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान” का तीसरा चरण प्रारंभ हुआ । मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान का तीसरा चरण का शुभारंभ 9 दिसंबर ,2017 को हुआ ।

अभियान के प्रथम चरण में 3,529 गांव का चयन कर 95,192 कार्य 1,270 करोड रुपए की लागत से किए गए ।  अभियान के द्वितीय चरण की शुरुआत 9 दिसंबर, 2016 से की गई थी इस में 4,213 गांव में 1,525 करोड़ रुपए की लागत से 28000 कार्य पूर्ण किए गए ।

इस प्रकार योजनाबद्ध तरीके से अब तक 7,742 गांव में 2,795 करोड़ की लागत के 2 लाख 23 हजार जल संरक्षण के कार्य पूर्ण किये जा चुके है । अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की न्यूनतम आवश्यकता की पूर्ति ,जल उपलब्धता एंव अकाल के दौरान उत्पन्न समस्याओं का निराकरण करना है ।

14. अमृत ,हृदय एंव स्मार्ट सिटी मिशन की द्वितीय वर्षगांठ (25 जून ,2017 )

अमृत मिशन- जयपुर ,जोधपुर, कोटा ,अजमेर, बीकानेर उदयपुर भरतपुर, भीलवाड़ा ,पाली, हनुमानगढ़ ,अलवर, सीकर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, चूरु ,बारां, चित्तौड़गढ़ ,नागौर मंडी, श्रीगंगानगर,टोंक , झुंझुनूं ,भिवाड़ी , ब्यावर, गंगापुर सिटी ,हिंडौन सिटी, सुजानगढ़, किशनगढ़, झालावाड़ में 3,224 करोड रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत ।

योजना में पेयजल आपूर्ति, सीवरेज ,ड्रेनेज,उद्यान व शहरी परिवहन के कार्य स्वीकृत । परियोजना में 61 प्रतिशत कार्य प्रारंभ । सभी परियोजनाएं दिसंबर, 2018 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया था।

स्मार्ट सिटी मिशन-  

  • जयपुर:- 16.4 करोड रुपए की लागत से ऐतिहासिक बाजारों में फसाड सुधार एवं राजस्थान कला विद्यालय का जीर्णोद्वार प्रारंभ ।
  • उदयपुर:- 7.22 करोड़ों रुपए की लागत से कमांड एंव कंट्रोल केंद्र का निर्माण एंव ऐतिहासिक बाजारों की विरासत सरंक्षण का कार्य प्रारंभ ।
  • कोटा:- 225 करोड़ रुपए की लागत से दशहरा मैदान पुनरोद्धार एवं तट-पर्यटन सर्किट का कार्य आरंभ ।
  • अजमेर:-12.13 करोड़ रुपए की लागत से सुभाष उद्यान एवं अजमेर जयपुर रोड पूर्ववर्ती उन्नयन की परियोजना प्रारम्भ ।

ह्रदय परियोजना

अजमेर :- 33.37 करोड़ रुपए की लागत से 5 विरासत संरक्षण परियोजना प्रारंभ।  नया बाजार में 14.02 करोड़ रुपए की लागत से विरासत संरक्षण एंव सुभाष उद्यान विकास का कार्य प्रारम्भ । आनासागर झील उन्नयन एंव अजमेर रोड पुरवर्ती उन्नयन कार्यो की 15.23 करोड़ रुपये की परियोजना प्रारम्भ ।

पुष्कर में विरासत संरक्षण कार्यों की ₹6.16 की परियोजनाएं प्रारम्भ । सभी परियोजनाए अक्टूबर, 2017 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया था 

15. भामाशाह योजना ( Bamashah scheme ):-

भामाशाह योजना, महिलाओं को वित्तीय सशक्तिकरण ओर स्वतंत्रता की दिशा मे एक बड़ा कदम हैं इस योजना का शुभारंभ ( उदयपुर) माननीया मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्रारा 15 अगस्त, 2014 को किया।

उदयपुर की शांता बाई को पहला कार्ड सोंपा। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा मे एक नई शुरुआत हैं।

समग्र वितीय समावेशन की प्राप्ति के लिए राज्य मे उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक बुनियादी ढांचे का लाभ लेते हुए केन्द्रीयकृत ई- शासन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकार की प्रायोजित योजनाओं का परिवार और व्यक्ति आधारित लाभो के अन्तिम रुप से वितरण के लिए राज्य के सभी परिवारो के कोर-बैंकिंग समर्थित बैक खाते खोले जाकर उनके घर के नजदीक या बैक खाते मे निर्बाध रूप से सीधे लाभ हस्तांतरित किए जायेंगे।

इस योजना के तहत दिसम्बर,2014 तक 9,821 भामाशाह नांमाकन कैम्प आयोजित कर राज्य के 51.70 लाख परिवारों के 1.59 करोड़ व्यक्तियों का नामांकन किया जा चुका है।

भामाशाह योजना के मुख्य बिन्दु:-

  • परिवार का बैक खाता परिवार की महिला मुखिया के नाम पर होगा ओर परिवार को मिलाने वाले सभी सरकारी लाभ इस खाते मे जमा होगै।
  • भामाशाह योजना को प्रधानमंत्री जनधन योजना से जोड़कर बैको द्रारा ‘ रुपे कार्ड’ भी जारी किया जाएगा।
  • परिवार के सदस्य नकद लाभ प्राप्ति ई-मित्र, कियोस्क, राजस्थान सम्पर्क, आईटी केन्द्र व एटीएम से कट करेंगे।
  • भामाशाह कार्ड मे सूचना संशोधन की सुविधा की सुविधा ई- मित्र पर प्रारंभ की जाएगी।
  • महिला के नाम से बैक खाता खोले जाने पर सरकार द्रारा बतौर प्रोत्साहन 1500/-प्रति परिवार जमा कराए जाएंगे।
  • इस योजना के तहत चयनित परिवारो को ‘ भामाशाह कार्ड’ दिए जाएंगे।
  • कार्ड का परिचालन बायोमैट्रिक पहचान से होगा।

मुख्य उद्देश्य:-

  • ग्रामीण क्षेत्रो के सभी बीपीएल, लघु व सीमांत कृषक तथा चिह्नित एस.सी.-एस.टी. परिवारों को बैकिंग सुविधाओं से जोड़ना।
  • योजना मे निम्न योजनाएं शामिल होगी:- मनरेगा जाॅब कार्ड, राशन कार्ड, जननी सुरक्षा, इंदिरा आवास योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, जन श्री बीमा योजना, राजस्थान सामाजिक सुरक्षा योजना ओर छात्रवृति योजनाएं

Note – अब इसे राज्य सरकाार ने

16. सुकन्या समृद्धि योजना ( Sukanya Samriddhi Account ):- 

इस योजना के तहत 0 से 10 वर्ष की आयु तक की कन्याओं के खाते सरकारी बैक या डाकघर मे न्यूनतम 1000 रुपय मे खोले जाएंगे। इस पर 9.1 %का सालाना ब्याज मिलेगा।

इसके तहत अभिभावकों को 1000 रुपया प्रतिमाह 14 वर्ष तक जमा कराना होगा। खाता 21 वे साल मे परिपक्व होगा वैसे बेटी के 18 वर्ष पूरे होने पर 50% धनराशि निकालने का प्रावधान भी है।

एक परिवार की अधिकतम दो लड़कियों का ही अकाउंट इस स्कीम के तहत खुलवाया जा सकता हैं। आवेदन पत्र के साथ कन्या का जन्म प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य हैं। इसके साथ ही पिता या माँ का पहचान पत्र भी जरूरी है।

राजस्थान मे यह योजना 4 फरवरी,2015 से शुरू हुई है। इस योजना मे एक वित्तीय वर्ष मे 1000 से लेकर अधिकतम एक लाख 50 हजार रुपय तक राशि जमा की जा सकेगी।

17. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ( Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana )-

इस योजना की घोषणा केन्द्रीय बजट 2015-16 मे की गई। इस योजना के तहत केन्द्र सरकार ने 18 से 50 वर्ष तक के लोगों का 330 रुपय के सालाना प्रीमियम पर बीमाधारक की मौत होने पर आश्रित को दो लाख रुपय का जीवन बीमा कवर देने का प्रस्ताव किया हैं 50 वर्ष की उम्र मे पहले पाॅलिसी लेने वाले इसे 55 तक जारी रख सकेंगे।

इस योजना का लाभ उठा सकेंगे जिनका बैक मे खाता होगा। इसके लिए आधार नंबर होना भी जरूरी है। इस योजना के तहत लोग एक साल के लिए या दीर्घावधि के लिए भी पाॅलिसी ले सकेंगे।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 1अप्रैल 2015 से लागू-: प्रदेश मे 70लाख परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना एक अप्रैल, 2015 से लागू।

18. चिराली योजना ( Chirali scheme )

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सुरक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा 26 सितंबर 2017 को चिराली योजना का शुभारंभ किया गया। महिला व बाल विकास विभाग द्वारा जवाहर कला केंद्र में योजना का लोकार्पण किया गया।

चिराली योजना के तहत गावों में महिला सु3के लिए वॉलीन्टियर्स लगाए जायेंगे। महिलाओं के प्रेशर ग्रुप बनाए जाएंगे।

  • योजना की शुरुआत सबसे पहले 7 जिलों में की जा रही है- बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बूंदी, जालौर, झालावाड, नागौर, प्रतापगढ़
  • मुख्य उद्देश्य – महिला हिंसा की रोकथाम तथा समाज में स्थिति बेहतर करना।

19. राष्ट्रीय पोषण मिशन ( National nutrition mission )

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरास्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च,2018 को राजस्थान के झुँझुनू में ‘राष्ट्रीय पोषण मिशन’ का सुभारम्भ किया। वर्ष 2017-18 से शुरू इस मिशन का गठन 9046.17 करोड़ रुपये के 3 साल के बजट से किया गया।

यह मिशन देश मे पोषण के स्तर को युद्ध स्तर पर बढ़ाने का एक समग्र प्रस्ताव है राष्ट्रीय पोषण मिसन का लक्ष्य बच्चो को बौनेपन,आवश्यकता से कम पोषण,खून की कमी ,जन्म के वक़्त बच्चो के कम वजन को क्रमशः 2%,2%,3%और 2%कम करना है। ।

इस मिशन के तहत2022 तक बौनेपन को 38.4 से घटाकर 25% तक लाना है इस कार्यक्रम में सभी राज्यो और जिलो की चरणबद्ध तरीके से यानी 2017-18में 315 जिलो ,2018-19 में 235 जिलो और 2019-20में शेष जिलो को शामिल किया जाएगा

20. अनुप्रति योजना ( Anuprati Yojana )

राजस्थान सरकार ने 2005 में राज्य के अनुसूचित जाति और जन जाति/ अल्प आय (2 लाख से कम)/ BPL परिवारों के लिए अनुप्रति योजना की शुरुआत की। यह योजना राज्य के समाज कल्याण विभाग द्वारा चलाई जाएगी।

इस योजना को तीन भागो में बांटा गया है:

  • अनुप्रति_योजना-1: UPSC ने द्वारा आयोजित_सिविल सेवा परीक्षा हेतु)।
  • अनुप्रति_योजना-2: RPSC द्वारा आयोजित राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (सीधी भर्ती) परीक्षा हेतु।
  • अनुप्रति_योजना-3: IITs, IIMs एवं राष्ट्रीय स्तर के मेडीकल कॉलेजों में प्रवेश हेतु अनुदान राशि।

अनुप्रति_योजना का लक्ष्य ( Goal of Anuprati Yojana Goal )- गरीब और अल्प आय वाले विद्यार्थियों को बड़ी नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना।

अनुप्रति_योजना का  उद्देश्य ( Purpose of Anuprati Yojana) :

  • अल्प आय वाले को बड़ी नौकरी लिए उत्साह देना।
  • प्रारम्भिक, मुख्य और अंतिम चयन के हिसाब से छात्रवर्ती देना।
  • अनुसूचित जाति वर्ग को आर्थिक सहयोग देना।

योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं योजनाएं

September 28, 2020

Rajasthan Economic प्रमुख विकास परियोजनाएं

प्रमुख विकास परियोजनाएं

विकास परियोजनाएं

क्षेत्रीय एवं जनजाति विकास कार्यक्रम ( Regional and tribal development program )

सूखा संभाव्य (सूखा प्रभावित) क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP)- यह कार्यक्रम 1974 -75 में केंद्र प्रवर्तित स्कीम के रूप में प्रारंभ किया गयाmइसकी वित्तीय व्यवस्था में केंद्र व राज्यों का 75: 25 रखा गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य सूखे की संभावना वाले क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में सुधार करना

इसके लिए भूमि व जल के उपलब्ध साधनों का सर्वोत्तम उपयोग किया जाता है ताकि इन क्षेत्रों में अकाल व सूखे के प्रतिकूल प्रभाव कम किए जा सके निम्न कार्यक्रमों पर बल दिया जाता है

  • मिट्टी में नमी का संरक्षण करना
  • जल संसाधनों का विकास
  • वृक्षारोपण करना

1982 -83 में इस कार्यक्रम के दायरे से वे खंड हटा दिए गए जो पहले मरू विकास कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल थे वर्तमान में यह कार्यक्रम 11 जिलों अजमेर ,बांसवाड़ा ,बारा भरतपुर, डूंगरपुर, झालावाड़, करौली ,कोटा ,सवाई माधोपुर, टोंक,व उदयपुर के विभिन्न 32 खंडों में संचालित किया जा रहा है

1995 -96 इस कार्यक्रम के अंतर्गत भरतपुर जिले का डीग अजमेर जिले का भिनाय खंड शामिल करने का प्रस्ताव किया गया था इस कार्यक्रम के अंतर्गत जनजाति जिलों में डूंगरपुर बांसवाड़ा जिले के समस्त खंड शामिल किए गए लेकिन अन्य जिलों से कुछ चुने हुए खंड ही शामिल किए गए हैं DPAP के माध्यम से भू संरक्षण नई संरक्षण सिंचाई विकास वृक्षारोपण के कार्यों पर प्रतिवर्ष धनराशि की जाती है

मरू विकास कार्यक्रम ( Desert Development Programme- DDP )

यह केंद्र चालित स्कीम है और वर्ष 1985 -86 से इसका संपूर्ण व्यय भारत सरकार वहन करने लगी है यह कार्यक्रम 1977 -78 में राष्ट्रीय कृषि आयोग की सिफारिशों के आधार पर चालू किया गया था इसका उद्देश्य मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकना एवं इन क्षेत्रों के लोगों की आर्थिक दशा को सुधारना है

1 अप्रैल 1995 से यह कार्यक्रम निम्न 16 मरू जिलों के 85 खंडों में संचालित किया जा रहा है  अजमेर ,जयपुर ,सिरोही, राजसमंद ,उदयपुर, बीकानेर, बाड़मेर ,जोधपुर, जालौर’ नागौर, चुरू, पाली ,गंगानगर, जैसलमेर, सीकर ,झुंझुनू

वर्ष 1995 -96 से यह कार्यक्रम जल ग्रहण क्षेत्र /क्लस्टर /इंडेक्स कैचमेंट आधार पर संचालित किया जा रहा है । और 500 हेक्टेयर के एक माइक्रो जल ग्रहण प्रोजेक्ट पर प्रति हेक्टेयर ₹5000 की लागत आंकी गई है जिसे 4 वर्ष में पूरा करने पर बल दिया गया है इस योजना के अंतर्गत कृषि वानिकी (चारा व चराई साधनों) का विकास

  • पशुपालन में भेड़ पालन का विकास
  • पशुओं के लिए पेयजल की पूर्ति की व्यवस्था
  • लघु सिंचाई (भूजल के विकास सहित)
  • ग्रामीण विद्युतीकरण

वर्तमान में काफी वाटर सेट प्रोजेक्ट का कार्य प्रगति पर है (जल ग्रहण परियोजनाएं)

जनजाति क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम ( Tribal Area development program- TADP)

2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में 12 . 4 लाख जनजाति के लोग थे जो राज्य की कुल जनसंख्या का 13.5% अंश था जनजाति के व्यक्तियों को निम्न कार्यक्रमों के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है

जनजाति उपयोजना

इसके अंतर्गत बांसवाड़ा, डूंगरपुर ,चित्तौड़गढ़, उदयपुर व सिरोही जिलों की 23 पंचायत समिति आती है राज्य की कुल जनजाति खबर 94 . 4 लाख लोगों में से काफी लोग जनजाति उपयोजना क्षेत्र में आते हैं इसमें 4409 गांव शामिल है

जनजाति उपयोजना 1974- 75 से आरंभ की गई मुख्य कार्यक्रम इस प्रकार है सिंचाई ,विद्युत ,फल विकास, बेर बेडिंग, डीजल पंपिंग से सामुदायिक सिंचाई, बीज व उर्वरक वितरण ,फार्म वानिकी आदि

जनजाति के व्यक्तियों के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है  विद्यार्थियों को स्टाइपेंड भी दिया जाता है  भविष्य में छात्रावास के निर्माण पर विशेष बल दिया जाएगा

1999 -2000 से राज्य में जनजाति विकास की महाराष्ट्र प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया था प्रारंभ में 13 विभागों की राज्य योजना मद की 8% राशि का एक जनजाति विकास कोष बनाया गया

2013 -14 के बजट में अनुसूचित जनजाति छात्रावास आश्रम छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों में रह रहे छात्रों का मैस भत्ता1750 रुपए मासिक किया गया था

परिवर्तित क्षेत्र विकास दृष्टिकोण MADA

इसमें 13 जिलों के 2939 गांव में 44 समूहों के जनजाति के लोग शामिल है अलवर धौलपुर भीलवाड़ा बूंदी चित्तौड़गढ़ उदयपुर झालावाड़ कोटा पाली सवाई माधोपुर सिरोही टोंक जयपुर इस कार्यक्रम के लिए विशेष केंद्रीय सहायता प्राप्त होती है

यह कार्यक्रम 1978 -79 से प्रारंभ किया गया है इसमें व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने वाली स्कीम में शामिल की गई है माडा में शैक्षणिक विकास पर भी ध्यान दिया जाता है

सहरिया विकास कार्यक्रम ( Sahria Development Program )

1977 से आरंभ किया गया इसमें बारा जिले की शाहाबाद व किशनगंज पंचायत समितियों के 50000 लोग शामिल है जो 435 गांव में फैले हुए हैं कार्यक्रम के लिए केंद्रीय सहायता मिलती है राज्य की योजना में भी इसके लिए प्रावधान किया जाता है

कृषि पशुपालन कुटीर उद्योग वानिकी शिक्षा पोषण पेयजल ग्रामीण विकास आदि पर धनराशि दी जाती है 2011 में सहरिया परिवार के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय का निर्माण करवाने और 50 नए मां बाडी शिक्षा केंद्र स्थापित करने का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया

एक ITI की स्थापना करने महिलाओं के स्वयं सहायता समूह को ब्याज अनुदान देने रीको द्वारा कृषि प्रसंस्करण, विशेष उत्पादों के लिए एक नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने पर बल दिया गया था

वर्ष 2011 में उदयपुर जिले की कथोड़ी जनजाति के लिए 200 आवासीय भवनों के निर्माण की योजना प्रारंभ की गई थी, कथोड़ी बस्तियों में मां बाड़ी केंद्र स्थापित करना प्रस्तावित है

जनजाति युवाओं को स्वरोजगार हेतु ₹10000 का अनुदान दिया गया, राजीव गांधी ट्राइबल विश्वविद्यालय उदयपुर में स्थापित किया जाएगा

मानगढ़ धाम में शहीद स्मारक बनाया जाएगा, कृषकों को ट्राइबल सब प्लान के तहत उन्नत बीज उर्वरक आरक्षण हेतु दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएगी इस कार्यक्रम पर ₹27 करोड़ के व्यय का अनुमान है

बिखरी जनजाति के लिए विकास कार्यक्रम

यह 1979 से प्रारंभ किया गया था इसका संचालन जनजाति क्षेत्र विकास विभाग द्वारा किया जाता है विभिन्न जिलों में इसकी संख्या 14. 3लाख आंकी गई है इसके लिए शिक्षा स्वास्थ्य आवास हॉस्टल विशेषतया लड़कियों के लिए निशुल्क पोशाके पुस्तकें छात्रवृत्ति परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना आदि कार्य किए जाते हैं

पेंशन योजनाएं ( Pension plans )

राजस्थान की राज्य सरकार ने प्रदेश के वरिष्ठ नागरिको के लिए मुख्यमंत्री पेंशन योजना (Chief Minister Pensions Scheme) की शुरुआत की है | यह योजना सभी वर्ग आयु के व्यक्ति के लिए शुरू की गई है |

इस योजना को विभिन्न वर्गों में बांटा गया है | सरकार द्वारा योजना को जारी करने का उद्देश्य यह है “सबका रखा ध्यान, किया सबका सम्मान, राजस्थान सरकार कि यही पहचान” |

 इन पेंशन योजना में पेंशन को बढ़ा दिया गया है | इस योजना को राज्य में 1 जुलाई, 2017 से लागू किया गया |

राजस्थान में जारी विभिन्न पेंशन योजना :-
  • मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना ( Chief Minister Ekal Nari Samman Pension Scheme)
  • मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना ( Chief Minister Special Salvation Pensions Scheme )
  • मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना ( Chief Minister’s Old Age Honor Pension Scheme )

मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना ( Chief Minister Ekal Nari Samman Pension Scheme):- 

यह पेंशन योजना राजस्थान सरकार ने राज्य की विधवा, परित्यक्त एवं तलाकशुदा पेंशनर्स को लाभ देने के लिए शुरु की | इस योजना में सभी को आयुवर्ग अनुसार लाभ दिया जाएगा | इस योजना में चयनित लोगो को आयु के मुताबिक दो दो वर्गों में बांटा गया है |

आयु पेंशन प्रति माह पेंशन में बढ़ोत्तरी
  • 60 वर्ष से अधिक आयु और 75 से कम आयु 500 रुपये 1000 रुपये
  • 75 वर्ष या अधिक 750 रुपये 1500 रुपये

मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना ( Chief Minister Special Salvation Pensions Scheme ) :

यह योजना सरकार में जन्म से 75 वर्ष आयु तक के लोगो के लिए शुरू की है | इस योजना में जन्म से 8 वर्ष तक की आयु वाले बच्चो के लिए पेंशन शुरू की है | आयु पेंशन प्रति माह पेंशन में बढ़ोत्तरी

  • 8 से 75 वर्ष आयु 500 रुपये 750 रुपये
  • जन्म से 8 वर्ष तक 250 रुपये 750 रुपये
मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना( Chief Minister’s Old Age Honor Pension Scheme ) :

सरकार ने यह पेंशन योजना केवल वरिष्ठ नागरिको के लिए शुरू की गई है | यह योजना में 75 वर्ष के बुज़ुर्गो के लिए है |आयु पेंशन प्रति माह

  • 75 वर्ष से कम 500 रुपये
  • 75 वर्ष से अधिक आयु 750 रुपये

ग्रामीण व नगरीय विकास योजनाएं ( Rural and Urban Development Schemes)

भौगोलिक एवं प्राकृतिक भू-भाग को समाज वैज्ञानिकों ने विविध आधारों पर बाँटा हैं-: महाद्वीप एवं महादेशीय आधार पर वर्गीकरण, राष्ट्र-राज्यों के आधार पर वर्गीकरण, सामाजिक-आर्थिक प्रणालियों के आधार पर वर्गीकरण, इत्यादि।

समाज ऐतिहासिक विकास की प्रक्रिया को आधार बनाकर विश्व के भू-भागों को दो श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है ग्रामीण क्षेत्र एवं नगरीय क्षेत्र। नगर, नगरीयता एवं नगरीकरण की अवधारणा आज वैष्विक स्तर पर दुनिया की लगभग आधी आबादी नगरीय क्षेत्रों में निवास कर रही है।

लेकिन विश्व के नगरीय रुपान्रतण का प्रतिमान अलग-अलग राष्ट्रों में समरुपीय नहीं है। एक ओर जहाँ विकसित देश- अमेरिका, यूरोप की भाँति लैटिन अमरीका एवं कैरिबियन द्वीप समूह में लगभग तीन चौथार्इ आबादी नगरीय क्षेत्रों में रह रही है।

वहीं दूसरी ओर भारत, चीन, इंडोनेशिया एवं अफ्रीका में लगभग दो-तिहार्इ आबादी अभी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रह रही है। अरब राष्ट्रों की लगभग आधी आबादी ग्रामीण एवं शेष आधी नगरीय आबादी का प्रतिमान अलग-अलग क्षेत्रोंमें भिन्न-भिन्न है।

नगर : ‘नगरीय क्षेत्र‘ या ‘नगर’ कया है? इस शब्द का प्रयोग दो अर्थ में होता है-जन सांख्यिकीय रुप में और समाजशास्त्रीय रुप में। पहले अर्थ में जनसंख्या के आकार, जनसंख्या की सघनता, और दूसरे अर्थ में विशमता, अवैयक्तिकता, अन्योन्याश्रय, और जीवन की गुणवत्ता पर ध्यान केन्द्रित रहता है।  जर्मन समाजशास्त्री टोनीज (1957) ने ग्रामीण और नगरीय समुदायों में भिन्नता सामाजिक संबंधो और मूल्यों के द्वारा बतार्इ है।

ग्रामीण – 

गेमिनषेफ्ट समुदाय वह है जिसमें सामाजिक बन्धन कुटुम्ब और मित्रता के निकट के व्यक्तिगत बंधनोंपर आघारित होते हैं और परम्परा, सामंजस्य और अनौपचारिकता पर बल दिया जाता है जबकि नगरीय गैसिलशेफ्ट समाज में अवैयक्तिक और द्वितीयक संबंध-प्रधान होते हैं और व्यक्तियों में विचारों का आदान-प्रदान औपचारिक, अनुबन्धित और विशेष कार्य या नौकरी जो वे करते हैं

उन पर आधारित होते हैं। गैसिलशेफ्ट समाज में उपयोगतावादी लक्ष्यों और सामाजिक संबंधों के प्रतिस्पर्द्धा के स्वरुपपर बल दिया जाता है।

मैक्स वेबर (1961:381) और जार्ज सिमल (1950) जैसे अन्य समाजषास्त्रियों ने नगरीय वातावरण में सघन आवासीय परिस्थितियों, परिवर्तन में तेजी, और अवैयक्तिक अन्त:क्रिया पर बल दिया है।

लुर्इस वर्थ ने कहा है कि समाजशास्त्रीय उद्देश्यों के लिये एक नगर की यह कह कर परिभाषा की जा सकती है कि वह सामाजिक रुप से पंचमेल/विशमरुप व्यक्तियों की अपेक्षाकृत बड़ी, सघन, और अस्थार्इ बस्ती है। रुथ ग्लास (1956) जैसे विद्वानों ने नगर को जिन कारकों द्वारा परिभाशित किया है

वे हैं जनसंख्या का आकार, जनसंख्या की सघनता, प्रमुख आर्थिक व्यवस्था, प्रशासन की सामान्य रचना, और कुछ सामाजिक विशेषतायें।भारत में ‘कस्बे’ की जनगणना की परिभाषा1950-51 तक लगभग एक ही रही, परन्तु 1961 में एक नर्इ परिभाषा अपनार्इ गर्इ।

1951 तक, ‘कस्बे’ में सम्मिलित थे:

  • मकानों का संग्रह जिनमें कम सेकम 5000 व्यक्ति स्थार्इ रुप से निवास करते हैं
  • प्रत्येक म्युनिसिपेलिटि/ कार्पोरेषन/किसी भी आकार का अधिसूचित क्षेत्र,
  • सब सिविल लाइनें जो म्यूनिसिपल इकार्इयों में सम्मिलित नहीं हैं।

इस प्रकार कस्बे की परिभाषा में प्रमुख फोकस जनसंख्या के आकार पर न होकर प्रशासनिक व्यवस्था पर अधिक था। 1961 में किसी स्थान को कस्बा कहने के लिये कुछ मापदण्ड लगाये गये।ये थे:

  • कम से कम 5000 की जनसंख्या
  • 1000 व्यक्ति प्रति वर्ग मील से कम की सघनता नहीं
  • उसकी कार्यरत जनसंख्या का तीन-चौथार्इ गैर-कृषिक गतिविधियों में होनी चाहिये
  • उस स्थान की कुछ अपनी विशेषतायें होनी चाहिये और यातायात और संचार, बैंकें, स्कूलों, बाज़ारों, मनोरंजन केन्द्रों, अस्पतालों, बिजली, और अखबारों आदि की नागरिक सुख सुविधायें होनी चाहिये।

परिभाषा में इस परिवर्तन के फलस्वरुप 812 क्षेत्र (44 लाख व्यक्तियों के) जो 1951 की जनगणना में कस्बे घोषित किये गये थे  उन्हें 1961 की जनगणना में कस्बा नहीं माना गया।

1961 का आधार 1971, 1981, 1991 की जनगणनाओं में भी कस्बे की परिभाषा करते समय अपनाया गया अब जनसांख्यिकीय रुप में उन क्षेत्रों को जिनकी जनसंख्या 5000 और 20000 के बीच है छोटा कस्बा माना जाता है, जिनकी 20000 और 50000 के बीच है उन्हे बड़ा कस्बा माना जाता है।

जिनकी जनसंख्या 50000 और एक लाख के बीच है, उन्हें शहर कहा जाता है, जिनकीएक लाख और 10 लाख के बीच उन्हे बड़ा “शहर कहा जाता है,

नगरीयता: लुर्इस वर्थ (1938:49) ने नगरीयता की चार विशेषतायें बतलार्इ हैं:

  • स्थायित्व: एक नगर निवासी अपने परिचितों को भूलता रहता है और नये व्यक्तियों से संबन्ध बनाता रहता है। उसके पड़ोसियों से एवं क्लब आदि जैसे समूहों के सदस्यों से अधिक मैत्रीपूर्ण संबन्ध नहीं होते इसलिये उनके चले जाने से उसे कोर्इ चिन्ता नहीं होती
  • सतहीपन: एक नागरिक कुछ ही व्यक्तियों से बातचीत करता है और उनसे भी उसके संबन्ध अवैयक्तिक और अनौपचारिक होते हैं।

ग्रामीण विकास कार्यक्रम एवं उनका श्रेणीगत विभाजन कार्य क्रम लागू वर्ष:-

प्रथम पंचवर्षीय योजना ( First five year plan )

  • सामुदायिक विकास कार्यक्रम 1952.
  • राष्ट्रीय विस्तार सेवा1953

द्वितीय पंचवर्षीय योजना ( Second Five Year Plan ):-

  • खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग 1957
  • बहुद्देशीय जनजातीय विकास प्रखण्ड 1959
  • पंचायती राज संस्था 1959
  • पैकेज कार्यक्रम 1960
  • गहन कृषि विकास कार्यक्रम 1960

तृतीय पंचवर्षीय योजना ( Third Five Year Plan )

  • व्यावहारिक पोशाहार कार्यक्रम 1960
  • गहन चौपाया पशु विकास कार्यक्रम 1964
  • गहन कृषि क्षेत्र कार्यक्रम 1964
  • उन्नत बीज किस्म योजना 1966
  • राष्ट्रीय प्रदर्शन कार्यक्रम  1966 वार्शिक योजना
  • कृषक प्रशिक्षण एवं शिक्षा कार्यक्रम 1966
  • कुँआ निर्माण योजना 1966
  • वाणिज्यिक अनाज विशेष कार्यक्रम 1966
  • ग्रामीण कार्य योजना 1967
  • अनेक फसल योजना 1967
  • जनजातीय विकास कार्यक्रम 1968
  • ग्रामीण जनषक्ति कार्यक्रम 1969
  • महिला एवं विद्यालय पूर्व शिक्षण हेतु समन्वित योजना 1969

चतुर्थ पंचवर्षीय योजना ( fourth five year plan ):

  •  ग्रामीण नियोजन हेतु कार्यक्रम 1971
  • लघु कृशक विकास एजेन्सी 1971
  • सीमान्त कृषक एवं भूमिहीन मजदूर परियोजना एजेन्सी 1971
  • जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1972
  • जनजातीय विकास पायलट परियोजना 1972
  • पायलट गहन ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम 1972
  • न्यूनतम आवष्यक कार्यक्रम 1972
  • सूखा उन्मुख क्षेत्र कार्यक्रम 1973
  • कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1974

पंचम पंचवर्षीय योजना ( 5th Five Year Plan):

  • समन्वित बाल विकास सेवा 1975
  • पर्वतीय क्षेत्र विकास एजेन्सी 1975
  • बीस सूत्रीय आर्थिक कार्यक्रम 1975
  • विशेष पशु समूह उत्पादन कार्यक्रम 1975
  • जिला ग्रामीण विकास एजेन्सी 1976
  • कार्य हेतु अन्य येाजना 1977
  • मरुस्थल क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1977
  • सम्पूर्ण ग्राम विकास योजना 1979
  •  ग्रामीण युवा स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम 1979

षष्ठम पंचवर्षीय योजना (Sixth Five Year Plan):

  • समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम1980
  • राष्ट्रीय ग्रामीण नियोजन कार्यक्रम1980
  • ग्रामीण महिला एवं शिशु विकास कार्यक्रम 1983
  • ग्रामीण भूमिहीन नियोजन प्रतिभू कार्यक्रम 1983
  • इन्दिरा आवास योजना1985

सप्तम पंचवर्षीय योजना ( Seventh year plan )

  • मातृत्व एवं षिषु स्वास्थ्य कार्यक्रम1985
  • सार्वभौमिक टीकारण कार्यक्रम

राजस्थान सरकार की सभी महत्वपूर्ण योजना ( All important plans of Rajasthan government )

  • देवनारायण गुरुकुल योजना – एससीएसटी व विशेष पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के निजी विद्यालय में पढ़ने के लिए
  • मुख्यमंत्री शहरी जन कल्याण योजना – शहरी क्षेत्रों में घरो का निर्माण
  • प्रथम गौ सखी गौ पुत्री योजना – गोसेवा गोरक्षा से महिला वर्ग को जोड़ने के लिए
  • श्रमिक कार्ड योजना –  श्रमिकों को कार्ड बनाने के लिए
  • दक्षता विकास प्रशिक्षण योजना – अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवार के लिए
  • वरिष्ठ उपाध्याय योजना – महिलाओं की शिक्षा में सुधार के लिए
  • छात्रवृति योजना – जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए
  • छात्रगृह किराया योजना – राजकीय महाविद्यालय, विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं करने के लिए
  • मोटरयान प्रदूषण जांच केन्द्र योजना – वाहनों की प्रदूषण जांच नहीं कराने पर विभाग ने पैनल्टी वसूलने के लिए

  • मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना – स्कूली छात्राओं को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए
  • उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना – विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए
  • भामाशाह रोजगार सृजन योजना – बेरोजगार नवयुवकों, महिलाओं अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के लोगों के लिए
  • दिशारी योजना – विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने और क्षमता संवर्धन के लिए
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना – बुज़ुर्गो के लिए
  • देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण योजना – 12वीं कक्षा की अनुसूचित जाति/ जनजाति व विशेष पिछड़ा वर्ग की छात्राओं के लिए
  • वृद्धावस्‍था पेंशन योजना –  बुज़ुर्गो आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए
  • विद्यार्थी सुरक्षा दुर्घटना बीमा योजना – विद्यार्थियों को दुर्घटना में मृत्यु एवं शारीरिक क्षति होने पर माता- पिता व अभिभाव को बीमा राशि उपलब्ध

  • मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना – मेधावी विद्यार्थियों को फ्री शिक्षा का लाभ प्रदान करने के लिए
  • श्रमिक योजना – श्रमिकों के बच्चों को छात्रवृति प्रदान करने के लिए
  • पं. दीनदयाल उपाध्याय विशेष योग्यजन पंजीयन अभियान – प्रत्येक विशेष योग्यजन को निःशुल्क ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने के लिए
  • मुख्यमंत्री विद्यादान कोष योजना राजस्थान – विद्या के लिए अधिक से अधिक राशि दान करने के लिए
  • निःशुल्क स्कूटी वितरण योजना – अनुसूचित जनजाति के छात्राओं के लिए निःशुल्क स्कूटी प्रदान करने के लिए
  • सोलर पम्प कृषि कनेक्शन योजना – किसानों को पर्याप्त बिजली प्रदान करने के लिए
  • मुख्यमंत्री विद्यादान कोष योजना – स्कूलों में भामाशाह द्वारा दान के लिए जागरूकता अभियान
  • सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना – 79 वर्ष तक के किसानो के लिए
  • शिक्षा स्वरोजगार लोन योजना – अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति सहित स्वच्छकार वर्ग को स्वरोजगार के लिए
  • राजस्थान में मासिक नाट्य प्रदर्शन योजना – प्रति माह चतुर्थ शनिवार और रविवार को नाटक का नियमित रूप से प्रदर्शन करने के लिए

  • ई-ग्राम डिजिटल योजना – इनेबल्ड सेवाओं को आसान और उपयोगी बनाने के लिए
  • मुख्यमंत्री पेंशन योजना – सभी वर्ग आयु के व्यक्ति के लिए
  • ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना – विद्यार्थियों को आर्थिक रूप से सहायता कर शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए
  • एमनेस्टी योजना – घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए
  • उद्योग रत्न प्रोत्साहन योजना – सर्वश्रेष्ठ बुनकर एवं हस्तशिल्पियों को पुरस्कृत करने के लिए
  • सहयोग उपहार योजना – बीपीएल श्रेणी के परिवारों की बेटी की शादी के लिए
  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना – राज्य के नागरिकों के लिए
  • डोर-टू-डोर योजना – कचरा संग्रह करने के लिए
  • आपणां टाबर निःशुल्क योजना – शिक्षित बेरोज़गारो के लिए निःशुल्क शिक्षा देने के लिए
  • मुख्यमंत्री निःशुल्क कोचिंग योजना – मेधावी छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग
  • उपहार योजना – विधवा महिलाओ पुत्री की शादी के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए
  • स्वदेश दर्शन योजना – देश प्रमुख धार्मिक स्थलों पर यात्रा के लिए
  • साइकिल साझा योजना – छुट्टियां मनाने आए पर्यटकों को मुफ्त ने साइकिल प्रदान करने के लिए
  • भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना – सम्बन्धी सुविधाएं फ्री प्रदान करने के लिए
  • दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना – वरिष्ठ नागरिकों के लिए
  • आम आदमी बीमा योजना – परिवार के सदस्यो की मदद के लिए
  • मुख्यमंत्री जन आवास योजना – गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए सस्ते घरों का वितरण
  • स्मार्ट सिटी योजना – आना सागर झील को आकर्षिक बनाने के लिए
  • स्वेच्छिक भार वृद्धि घोषणा योजना – किसानों को कृषि करने के लिए
  • बीपीएल परिवार छात्रवृत्ति योजना – 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को वित्तिय सहायता प्रदान करने के लिए

  • कन्या शादी सहयोग योजना – गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में मदद करने के लिए
  • मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना – युवाओ में कौशल विकसित करने के लिए
  • निःशुल्क कोचिंग कक्षाएँ योजना – 12वी बोर्ड विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए
  • राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम – किशोर स्वास्थ से सम्बंधित चिकित्सा परामर्श के लिए
  • सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना – दुग्ध उत्पादकों को बीमा लाभ देने के लिए
  • क्लिक योजना – शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए
  • अन्नपूर्णा रसोई योजना – कम व सस्ती दरों पर खाना उपलब्ध करने के लिए
  • अकृषि उद्यम ऋण योजना – फर्नीचर एवं फिक्सचर तथा कार्यशील पुंजि हेतु ऋण सुविधा करने के लिए
  • अम्बेडकर अंतर्राष्‍ट्रीय स्कॉलरशिप योजना – अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभावान विधार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए
  • भामाशाह सृजन योजना – बेरोज़गारो को लोन प्रदान करने के लिए
  • किस्मत योजना – किसानों को समृद्ध और उन्नत बनाने के लिए

  • शुभ शक्ति योजना – श्रमिकों के हितों की रक्षा और अविवाहित महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए
  • लैपटॉप वितरण योजना – मेधावी छात्रों को निशुल्क लैपटॉप वितरण करने के लिए
  • मुख्यमंत्री राजश्री योजना – शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु एवं बालिका के शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए
  • मुख्यमंत्री जनजाति जलधारा योजना – जनजाति क्षेत्रों में कृषकों को ऋण उपलब्ध करने के लिए
  • मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना – पेंशनर्स को नि:शुल्क दवाइयाँ वितरण करने के लिए

विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं विकास परियोजनाएं

September 27, 2020

Rajasthan Economy आधारभूत-संरचना एवं संसाधन

राजस्थान की आधारभूत-संरचना एवं संसाधन

संसाधन

संसाधन ( Resources) :-

हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हर वह वस्तु जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये इस्तेमाल की जा सकती है जिसे बनाने के लिए हमारे पास प्रौद्योगिकी है और जिसका इस्तेमाल सांस्कृतिक रूप से मान्य है., उसे संसाधन कहते हैं।

संसाधन के प्रकार ( Types of resources ):- 

संसाधन को विभिन्न आधारों पर विभिन्न प्रकारों में बाँटा जा सकता है; जो नीचे दिये गये हैं

A.उत्पत्ति के आधार पर ( On the basis of origin )-: जैव और अजैव संसाधन ( Bio and Abiotic Resources )

B.समाप्यता के आधार पर ( On the basis of termination )-: नवीकरण योग्य और अनवीकरण योग्य संसाधन ( Renewable and non-renewable resources)

C.स्वामित्व के आधार पर( On the basis of ownership)-: व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संसाधन

D.विकास के स्तर के आधार पर:- संभावी, विकसित भंडार और संचित कोष

उत्पत्ति के आधार पर संसाधन के प्रकार ( Types of Resources based on Origin ):-

  • जैव संसाधन:-जो संसाधन जैव मंडल से आते हैं उन्हें जैव संसाधन कहते हैं  उदाहरण:- मनुष्य, वनस्पति, मछलियाँ, प्राणिजात, पशुधन, आदि।
  • अजैव संसाधन: जो संसाधन निर्जीव पदार्थों से आते हैं उन्हें अजैव संसाधन कहते हैं। उदाहरण: मिट्टी, हवा, पानी, धातु, पत्थर, आदि।

ऊर्जा ( Energy )

किसी भी देश के आर्थिक विकास में ऊर्जा ( Energy) एक महत्वपूर्ण संसाधन है। भारत में विद्युत का विकास उन्नीसवीं सदी के अंत में शुरू हुआ।

  • जब देश का पहला जल विद्युत गृह 1897 में दार्जिलिग में सिदापोंग में स्थापित किया गया।
  • 1909 में कर्नाटक में शिव समुद्रम में पनबिजली केंद्र ने कार्य प्रारंभ किया।
  • बिजली आपूर्ति अधिनियम 1948 में पारित किया गया।
  • संविधान में विद्युत को समवर्ती सूची में स्थान दिया गया है।

राजस्थान निर्माण के समय 15 छोटे विद्युत गृह थे जिनकी कुल स्थापित विद्युत क्षमता मात्र 13.27 मेगावाट थी।

राजस्थान_में विद्युत विकास हेतु 1 जुलाई 1957 को राजस्थान राज्य विद्युत मंडल की स्थापना के साथ प्रारंभ हुए।

राजस्थान देश का पहला राज्य है जिसने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगी निविदा के आधार पर विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आशय पत्र जारी किए।

देश में ऊर्जा क्षेत्र सुधार कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार द्वारा विद्युत नियामक आयोग अधिनियम 1998 बनाया गया।

राजस्थान_विद्युत नियामक आयोग( Rajasthan Electricity regulatory Commission) का गठन 2 जनवरी 2000 को किया गया। जिस के प्रथम अध्यक्ष श्री अरुण कुमार थे।

राजस्थान_सरकार ने राजस्थान विद्युत क्षेत्र सुधार अधिनियम 1999 पारित करवाया जो 1 जून 2000 से लागू किया गया। राज्य सरकार द्वारा राज्य में विद्युत तंत्र के सुधार एवं उपभोक्ता को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दिनांक 19 जून 2000 को 5 विद्युत कंपनियों का गठन किया गया था।

अक्षय ऊर्जा ( Akshay Energy )

माह दिसम्बर 2017 की स्थिति निम्न है-

  • सौर ऊर्जा – 2258.50 मेगावॉट के सौर ऊर्जा संयंत्र अधिष्ठापित हो चुके है।
  • पवन ऊर्जा- 4292.5 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके है।
  • बायोमास ऊर्जा – 120. 45 मेगावाट के 13 जैविक द्रव्य ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके है।

विद्युतीकृत गांवों की संख्या- 43264

विद्युत (Electricity )–

राज्य में दिसम्बर 2017 तक विद्युत की अधिष्ठापित क्षमता 19536. 77 मेगावाट होगयी है। मार्च 2012 में विद्युत की उपलब्धता 5005.38 करोड युनिट थी जो कि बढकर मार्च 2017 तक 6922.10 करोड युनिट हो गयी।

2011 – 12 से 2016-17 तक कुल ऊर्जा उपलब्धता में 38.29%की वृद्धि हुई जबकि कुल शुद्ध ऊर्जा उपभोग में भी 49.33%की वृद्धि हुई।

नवगठित 5 कंपनियां:-

  • राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड। (RVUNL). मुख्यालय: जयपुर।
  • राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (RVPNL)।
  • जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड(JVVNL) मुख्यालय: जयपुर ।
  • अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) मुख्यालय: अजमेर
  • जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) मुख्यालय: जोधपुर।

जयपुर, अजमेर एवं जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की परियोजनाएं

1. उज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना ( उदय) –

भारत सरकार द्वारा राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों के परिचालन और वित्तीय रूप से दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य से उज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना को आरंभ किया गया औसत तकनीकी व वाणिज्य की हानि के आधार पर डिस्कॉम के संचालन व वित्तीय भार को कम करने एवं प्रति यूनिट खर्च व राजस्व प्राप्ति के अंतर को कम करने के उद्देश्य से ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 20 नवंबर 2015 को उदय योजना अधिसूचित की गई

राजस्थान सरकार द्वारा उदय योजना के अंतर्गत 27 जनवरी 2016 को किए गए एम ओ यू के अनुसार 30 सितंबर 2015 को बकाया ॠण राशि के 75%भार का 2 वर्षों के लिए 50% वित्तीय वर्ष 2015 -16 एवं 25% 2016-17 में वहन किया जाना है

2. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के लिए प्रस्तावित प्रमुख योजनाएं हैं

  • 3000 से अधिक एवं 4000 से कम आबादी वाले गांवों के लिए अलग से 3 फेज फीडर लगाना
  • उप हस्तानांतरण एवं वितरण प्रणाली का सुदृढ़ीकरण करना
  • दोषपूर्ण सीटर मीटरिंग उपकरणों का प्रतिस्थापन
  • ग्रामीण विद्युतीकरण कार्य -राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में सम्मिलित कर दिया गया है

3. बिजली सबके लिए योजना

सभी ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता जो कि दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में शामिल नहीं है उनके लिए प्रत्येक ग्रामीण उपखंड पर 19 जून 2016 के बाद( प्रत्येक माह के पहले और तीसरे रविवार को) विद्युत कनेक्शन उपलब्ध करवाने के लिए शिविर आयोजित किए गए हैं

इस योजना के अंतर्गत 24147 BPL और 49488 एपीएल घरेलू कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं

4. मुख्यमंत्री ग्रामीण घरेलू कनेक्शन योजना

गैर आबाद एवं छितराई हुई ढाणियों में घरेलू उपभोक्ताओं को विद्युत उपलब्ध करवाने हेतु अक्टूबर 2016 से मुख्यमंत्री ग्रामीण घरेलू कनेक्शन योजना आरंभ की गई इसके प्रथम चरण में नवंबर 2016 तक इच्छुक ग्रामीणों से सो रुपए पंजीकरण राशि जमा करके उनको इस योजना में शामिल किया गया है

5. मुख्यमंत्री विद्युत सुधार अभियान

राज्य में मुख्यमंत्री विद्युत सुधार अभियान योजना क्रमशः ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को भरोसेमंद, गुणवत्ता एवं व्यवधान रहित बिजली उपलब्ध कराने के साथ विद्युत संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान करने हेतु एवं सुरक्षित बिजली देने एवं विद्युत दरों पर नियंत्रण रखते हुए और तकनीकी एवं वाणिज्य हानि के स्तर को 15% तक लाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है

6 उन्नति ज्योति अफोर्डेबल LED फॉर ऑल (उजाला) योजना

देश में ऊर्जा दक्षता का संदेश प्रसारित करने के प्रयास में भारत सरकार ऊर्जा सक्षम उपकरणों यथा LED, बल्ब यू ट्यूब लाइट और पंखे के उपयोग को बढ़ावा दे रही है योजना के प्रथम चरण में 7 वाट LED आधारित ऊर्जा सक्षम कार्यक्रम जोकि घरेलू सक्षम प्रकाश कार्यक्रम के नाम से जाना जाता है

को जनवरी 2015 में प्रारंभ किया गया था राजस्थान में इस कार्यक्रम के अंतर्गत मई 2015 से मई 2016 की अवधि में राज्य के सभी जिलों की 21लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 1.16 करोड़ 7 वाट LED का वितरण किया गया है

7. एलईडी लाइट प्रोजेक्ट

राजस्थान में स्ट्रीट लाइट के क्षेत्र में ऊर्जा बचत करने के लिए एनर्जी सेविंग प्रोजेक्ट तैयार किया गया इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों पर प्रकाश की मात्रा में वृद्धि करना व विद्युत उपयोग उपभोग में कमी करना है

66 निकायों में कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है एवं 23 निकायों में कार्य प्रगति पर है राजस्थान में दिसंबर 2016 तक 5, 88,264 LED लाइट लगाई गई है भारत में सर्वाधिक LED स्ट्रीट लाइट लगाने में राजस्थान प्रथम स्थान पर है

ऊर्जा पुरस्कार ( Energy awards )

1. राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2016 –भारत सरकार द्वारा राजस्थान को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2016 का प्रथम पुरस्कार LED लाइट प्रोजेक्ट के लिए दिनांक 14 दिसंबर 2016 को ऊर्जा संरक्षण दिवस के समारोह के दौरान नई दिल्ली में दिया गया

2. ऊर्जा संरक्षण में जयपुर डिस्कॉम को राष्ट्रीय पुरस्कार- एनर्जी सेविंग परियोजना में देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार( नेशनल ऊर्जा कंजर्वेशन अवार्ड 2016) दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने प्रदान किया ऊर्जा संरक्षण दिवस पर नई दिल्ली में ऊर्जा मंत्रालय की ओर से 14 दिसंबर 2016 को भी समारोह में जयपुर डिस्कॉम को सामान्य श्रेणी में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिया गया एनर्जी सेविंग परियोजना के तहत देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर राज्य स्तरीय ऊर्जा संरक्षण 2016पुरस्कार स्वायत शासन विभाग को जयपुर में प्रदान किया गया

3. जयपुर में उत्तर पश्चिमी रेलवे को मिले चार पुरस्कार-  14 दिसंबर 2016 को ऊर्जा मंत्रालय राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2016 में उत्तर पश्चिमी रेलवे को चार पुरस्कार प्राप्त हुए हैं

4. मेट्रो को राजस्थान ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार- जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को राजकीय विभाग श्रेणी में बिजली बचत के नए प्रयोग के लिए राजस्थान ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2016 मिला

सडक परिवहन ( Road transport )

राज्य में 1949 में मात्र 13553 किमी लम्बाई की सडकें थी जो मार्च 2017 तक बढकर 226853. 86 किमी हो गयी। राज्य में सडकों का घनत्व मार्च 2017 तक 66.29 प्रति 100 वर्ग किमी है। राज्य में दिसंबर 2017 तक 159.31 लाख मोटर वाहन पंजीकृत है जो पिछले वर्ष से 6.91% ज्यादा है।

2017- 18 मे 4050 करोड राजस्व लक्ष्य के विरुद्ध दिसम्बर 2017 तक 2839.34 करोड का राजस्व अर्जिक किया गया जो लक्ष्य का 70.11% है।

रेलवे ( Railway )

मार्च 2015 में रेलवे मार्ग की कुल लम्बाई 5898 किलोमीटर थी जो कि मार्च 2016 तक 5893 किलोमीटर हो गयी। भारतीय रेल मार्ग का 8.84% रेलमार्ग राजस्थान में है।

डाक एवं दूरसंचार सेवाएं ( Postal and telecommunication services )

मार्च 2017 तक राज्य में कुल डाकघरों की संख्या 10311 और टेलीफोन एक्सचेंजों की संख्या 2057 है।

मानवसं साधन ( Human Resource )

कोई भी व्यक्ति और उसकी विशेष क्षमताओं और कौशल जो संगठन के लिए सबसे बड़ा और सबसे लंबा स्थाई लाभ बनाता है| इसीलिए इसे सबसे महत्वपूर्ण संस्था माना जाता है|

मानव संसाधन ( human resource) वह अवधारणा है जो जनसंख्या को अर्थव्यवस्था पर दायित्व से अधिक परि संपत्ति के रूप में देखती है। शिक्षा प्रशिक्षण और चिकित्सा सेवाओं में निवेश के परिणाम स्वरूप जनसंख्या मानव संसाधन के रूप में बदल जाती है।

मानव संसाधन ( human resource ) उत्पादन में प्रयुक्त हो सकने वाली पूँजी है। यह मानव पूँजी कौशल और उन्में निहित उत्पादन के ज्ञान का भंडार है। यह प्रतिभाशाली और काम पर लगे हुए लोगों और संगठनात्मक सफलता के बीच की कड़ी को पहचानने का सूत्र है।

 यह उद्योग/संगठनात्मक मनोविज्ञान और सिद्धांत प्रणाली संबंधित अवधारणाओं से संबद्ध है। मानव संसाधन की संदर्भ के आधार पर दो व्याख्याएं मिलती हैं।

इसका मूल अर्थराजनीतिक अर्थव्यवस्था और अर्थशास्त्र से लिया गया है जहां पर इसे पारंपरिक रूप से उत्पादन के चार कारको में से एक श्रमिक कहा जाता था यद्धपि यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय स्तर पर नए और योजनाबद्ध तरीकों में अनुसन्धान के चलते बदल रहा है।

[1] पहला तरीका अधिकतर ‘मानव संसाधन विकास (Human Resource Development )‘ शब्द के रूप में प्रयुक्त होता है और यह सिर्फ संगठनों से शुरू हो कर राष्ट्रीय स्तर तक हो सकता है।

पारम्परिक रूप से यह कारपोरेशन व व्यापार के क्षेत्र में व्यक्ति विशेष (जो उस फर्म या एजेन्सी में कार्य करता है) के लिए, तथा कंपनी के उस हिस्से को जो नियुक्ति करने, निकालने, प्रशिक्षण देने तथा दूसरे व्यक्तिगत मुद्दों से सम्बंधित है

जिसे साधारणतयाः “मानव संसाधन प्रबंधन” के नाम से जाना जाता है, के लिए होता प्रयुक्त होता है। यह लेख दोनों परिभाषाओं से सम्बंधित है।

विकास :- मानव संसाधनों के विकास का उद्देश्य मानव संसाधन संपन्नता को प्रबुद्ध और एकजुट नीतियों के माध्यमसे शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और रोजगार के सभीस्तरों को कॉर्पोरेट से ले कर राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ावा देना है।

प्रबंधन :- मानव संसाधन प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य कंपनी के कर्मचारियों पर हुए निवेश से अधिकाधिक लाभ सुनिश्चित करना तथा वित्तीय जोखिम को कम करना है। एक कंपनी के संदर्भ में मानव संसाधन प्रबंधकों की यह जिम्मेदारी है कि वे इन गतिविधियों का संचालन एक प्रभावशाली, वैधानिक, न्यायिक तथा तर्कपूर्ण ढंग से करें।

मुख्य कार्यमानव संसाधन प्रबंधन निम्न महत्वपूर्ण कार्य करता है:

  • नियुक्ति व चयन
  • प्रशिक्षण और विकास (लोग अथवा संगठन)
  • प्रदर्शन का मूल्यांकन तथा प्रबंधन
  • पदोन्नति/ स्थानांतरण
  • फालतू कर्मचारियों को हटाना
  • औद्योगिक और कर्मचारी संबंध
  • सभी व्यक्तिगत आंकड़ों का रिकार्ड रखना
  • वेतन तथा उस से संबंधित मुआवजा, पेंशन, बोनस इत्यादि
  • कार्य से सम्बंधित समस्याओं के बारे में ‘आंतरिक कर्मचारियों’ को गोपनीय सलाह देना
  • कैरियर का विकास
  • योग्यता परखना
  • मानव संसाधन क्रियाओं से संबंधित समय की गति का अध्ययन करना।
  • प्रदर्शन मूल्यांकन आधुनिक विश्लेषण आधुनिक विश्लेषण इस बात पर जोर देता है कि मनुष्य”वस्तु अथवा “संसाधन” नहीं हैं, बल्कि एक उत्पादन संस्था में रचनात्मक और सामाजिक प्राणी हैं।

आईएसओ 9001के 2000 संस्करण का उद्देश्य प्रक्रियाओं के क्रम तथा उनके बीच के संबंधों को पहचानना और उत्तरदायित्वों तथा अधिकारों को परिभाषित करना और बताना है।  सामान्यतया, अधिकतर संघीय देशों जैसे फ्रांस Germany और जर्मनी ने इसे अपनाया और ऐसे कार्य विवरणों को विशेष रूप से ट्रेड यूनिअनों में बढ़ावा दिया।

अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने भी 2001 में फिर से मिलना और मानव संसाधन विकास पर 1975 में धारा 150 को संशोधित करना तय किया

[2] इन प्रवृत्तियों का एक नज़रिया राजनीतिक अर्थ- 

व्यवस्था पर एक मजबूत सामाजिक आम सहमति कायम करना है और एक अच्छी सामाजिक कल्याण प्रणाली,श्रमिकों की गतिशीलता को सुविधाजनक बनाती है और पूरी अर्थव्यवस्था को और अधिक फलदायक बना देती है

क्योंकि इसकी सहायता से श्रमिक कौशल और अनुभव को विभिन्न रूपों में विकसित कर सकते हैं और उन्हें एक इकाई से दूसरी इकाई में जाने अथवा खुद को माहौल के अनुकूल ढालने में कम दिक्कत या परेशानी का सामना करना पड़ता है।

एक और नज़रिया है कि सरकारों को सभी क्षेत्रों में मानव संसाधन विकास को सुविधाजनक बनाने में अपनी राष्ट्रीय भूमिका के प्रति अधिक जागरूक होना चाहिए।

शिक्षा ( Education )

प्रारम्भिक शिक्षा ( Elementary education)– राज्य में 35664 राजकीय प्रारम्भिक विद्यालय, 20744 राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय और 13983 प्रारम्भिक कक्षाओं वाले माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय है जिनमे डाइस रिपोर्ट 2016 – 17 के अनुसार 62. 89 लाख विद्यार्थी नामांकित है।

बालिका शिक्षा को बढावा देने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, मीना मंच, अध्यापिका मंच, शैक्षणिक किशौरी मेले व बालिका शिक्षा हेतु कई नवाचार किये जा रहे है। वर्तमान में 9569 उत्कृष्ट विद्यालय संचालित है।

माध्यमिक शिक्षा (Secondary education )– वर्तमान में 13551 माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं 134 स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल राज्य में संचालित है। 14388 माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय निजी क्षेत्र में संचालित है। जिनमे (राजकीय व निजी) 41.31 लाख विद्यार्थी नामांकित है।

उच्च शिक्षा ( Higher education )– वर्तमान में राज्य में 1850 महाविद्यालय है। जिनमे 209 राजकीय महाविद्यालय, 15 राजकीय विधि महाविद्यालय, 1626 निजी महाविद्यालय, 7 स्ववितपोषित संस्थाएं और 6 निजी सहभागिता से स्थापित महाविद्यालय है। तकनीकी शिक्षा में अभियांत्रिकी हेतु 112 संस्थाएं है जो 12 राजकीय व 100 निजी है।

राज्य में पॉलीटेक्निक शिक्षा हेतु 42 राजकीय व 140 निजी कुल 182 महाविद्यालय स्थापित है। चिकित्सा शिक्षा में 16 महाविद्यालय जिनमे 8 राजकीय व 8 निजी क्षेत्र में है। दंत चिकित्सा में 16 महाविद्यालय जिनमें 1 राजकीय व 15 निजी क्षेत्र में है।

July 31, 2020

Accounting – Use in Concepts, Tools लेखांकन

लेखांकन- अवधारणा, उपकरण एवं प्रशासन में उपयोग

लेखांकन

आधुनिक व्यवसाय का आकार इतना विस्तृत हो गया है कि इसमें सैकड़ों, सहस्त्रों व अरबों व्यावसायिक लेनदेन होते रहते हैं। इन लेन देनों के ब्यौरे को याद रखकर व्यावसायिक उपक्रम का संचालन करना असम्भव है। अतः इन लेनदेनों का क्रमबद्ध अभिलेख (records) रखे जाते हैं उनके क्रमबद्ध ज्ञान व प्रयोग-कला को ही लेखाशास्त्र कहते हैं।

लेखांकन के इतिहास में दोहरा लेखांकन प्रणाली के जन्मदाता लुकास पेसियोली थे जो इटली के वेनिस नगर के रहने वाले थे उन्होंने अपनी पुस्तक de compaset of scripturis1494 में दोहर्क़ लेखा प्रणाली का वर्णन किया।m  Debit शब्द debito Credit शब्द credito से बना है।

Huge old castle ने 1543 में दोहरा लेखा प्रणाली की पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद किया 1795 edward jones ने पुस्तपालन की अंग्रेजी प्रणाली की पुस्तक लिखी। उसे अंग्रेजी प्रणाली की प्रथम पुस्तक कहा जाता है।

लेखाशास्त्र के व्यावहारिक रूप को लेखांकन कह सकते हैं। अमेरिकन इन्स्ट्टीयूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक अकाउन्टैन्ट्स (AICPA) की लेखांकन शब्दावली, बुलेटिन के अनुसार ‘‘लेखांकन उन व्यवहारों और घटनाओं को, जो कि कम से कम अंशतः वित्तीय प्रकृति के है, मुद्रा के रूप में प्रभावपूर्ण तरीके से लिखने, वर्गीकृत करने तथा सारांश निकालने एवं उनके परिणामों की व्याख्या करने की कला है।’’

इस परिभाषा के अनुसार लेखांकन एक कला है, विज्ञान नहीं। इस कला का उपयोग वित्तीय प्रकृति के मुद्रा में मापनीय व्यवहारों और घटनाओं के अभिलेखन, वर्गीकरण, संक्षेपण और निर्वचन के लिए किया जाता है।

लेख एवं अंकन दो शब्दों के मेल से बने लेखांकन में लेख से मतलब लिखने से होता है तथा अंकन से मतलब अंकों से होता है । किसी घटना क्रम को अंकों में लिखे जाने को लेखांकन (Accounting) कहा जाता है  किसी खास उदेश्य को हासिल करने के लिए घटित घटनाओं को अंकों में लिखे जाने के क्रिया को लेखांकन कहा जाता है ।

यहाँ घटनाओं से मतलब उस समस्त क्रियाओं से होता है जिसमे रुपये का आदान-प्रदान होता है ।

उदाहरण

किसी व्यवसाय में बहुत बार वस्तु खरीदी जाती है, बहुत बार बिक्री होती है । खर्च भी होता रहता है आमदनी भी होती रहती है, कुल मिलाकर कितना खर्च हुआ कितनी आमदनी हुई, किन-किन लोगों पर कितना बकाया है तथा लाभ या हानि कितना हुआ, इन समस्त जानकारियों को हासिल करने के लिए व्यवसायी अपने बही में घटित घटनाओं को लिखता रहता है । यही लिखने के क्रिया को लेखांकन कहा जाता है ।

अतः व्यवसाय के वित्तीय लेन-देनों को लिखा जाना ही लेखांकन है । लेखांकन के प्रारंभिक क्रियाओं में निम्नलिखित तीन को शामिल किया जाता है :

1. अभिलेखन (Recording) :

  • लेन-देन को पहली बार बही में लिखे जाने के क्रिया को अभिलेखन कहा जाता है ।
  • अभिलेखन को रोजनामचा कहते हैं अर्थात Journal भी काहा जाता है ।

2. वर्गीकरण (Classification) :

  • अभिलेखित मदों को अलग-अलग भागो में विभाजित कर लिखे जाने के क्रिया को वर्गीकरण कहा जाता है ।
  • वर्गीकरण को खाता (Ledger) भी कहते हैं ।

3. संक्षेपण (Summarising) :

  • वर्गीकृत मदो को एक जगह लिखे जाने के क्रिया को संक्षेपण कहा जाता है ।
  • संक्षेपण को परीक्षा सूची (Trial balance) भी कहते हैं ।

आधुनिक युग में व्यवसाय के आकर में वृद्धि के साथ-साथ व्यवसाय की जटिलताओं में भी वृद्धि हुई है। व्यवसाय का संबंध अनेक ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं तथा कर्मचारियों से रहता है और इसलिए व्यावसायिक जगत में सैकड़ों, हजारों या लाखों लेन-देन हुआ करते हैं। सभी लेन-देन हुआ करते हैं। सभी लेन-देनों को मैखिक रूप से याद रखना कठिन व असम्भव है।

हम व्यवसाय का लाभ जानना चाहते हैं और यह भी जानना चाहते हैं कि उसकी सम्पत्तियाँ कितनी हैं, उसकी देनदारियाँ या देयताएँ कितनी हैं, उसकी पूँजी कितनी है आदि। इन समस्त बातों की जानकारी के लिए लेखांकन की आवश्यकता पड़ती है।

परिभाषाएं 

स्मिथ एवं एशबर्न ने उपर्युक्त परिभाषा को कुछ सुधार के साथ प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार ‘लेखांकन मुख्यतः वित्तीय प्रकृति के व्यावसायिक लेनदेनों और घटनाओं के अभिलेखन तथा वर्गीकरण का विज्ञान है और उन लेनदेनें और घटनाओं का महत्वपूर्ण सारांश बनाने, विश्लेषण तथा व्याख्या करने और परिणामों को उन व्यक्तियों को सम्प्रेषित करने की कला है, जिन्हें निर्णय लेने हैं।’ इस परिभाषा के अनुसार लेखांकन विज्ञान और कला दोनों ही है। किन्तु यह एक पूर्ण निश्चित विज्ञान न होकर लगभग पूर्ण विज्ञान है।

अमेरिकन एकाउन्टिग प्रिन्सिपल्स बोर्ड ने लेखांकन को एक सेवा क्रिया के रूप में परिभाषित किया है। उसके अनुसार, ‘लेखांकन एक सेवा क्रिया है। इसका कार्य आर्थिक इकाइयों के बारे में मुख्यतः वित्तीय प्रकृति की परिणामात्मक सूचना देना है जो कि वैकल्पिक व्यवहार क्रियाओं (alternative course of action) में तर्कयुक्त चयन द्वारा आर्थिक निर्णय लेने में उपयोगी हो।’

उपर्युक्त विवेचन के आधार पर लेखांकन को व्यवसाय के वित्तीय प्रकृति के लेन-देनों को सुनिश्चित, सुगठित एवं सुनियोजित तरीके से लिखने, प्रस्तुत करने, निर्वचन करने और सूचित करने की कला कहा जा सकता है।

सर्वप्रथम प्रारंभिक लेखांकन के रिकॉर्ड प्राचीन बेबीलॉन, असीरिया और सुमेरिया के खंडहरों में पाए गए, जो 7000 वर्षों से भी पहले की तारीख के हैं। तत्कालीन लोग फसलों और मवेशियों की वृद्धि को रिकॉर्ड करने के लिए प्राचीन लेखांकन की पद्धतियों पर भरोसा करते थे। क्योंकि कृषि और पशु पालन के लिए प्राकृतिक ऋतु होती है, अतः अगर फसलों की पैदावार हो चुकी हो या पशुओं ने नए बच्चे पैदा किए हों तो हिसाब-किताब कर अधिशेष को निर्धारित करना आसान हो जाता है।

लेखांकन की अवधारणा ( Concept of accounting )

1 – पृथक अस्तित्व की संकल्पना entity concept ~ इस संकलपना के अंदर व्यवसाय व्यवसाय के स्वामी का अस्तित्व प्रथक प्रथक माना गया है । म कर राशि का स्वामी व्यवसाय में पूंजी लगाता है और जो व्यवसाय के लिए एक दायित्व होता है।

2 – मुद्रा मापन की संकल्पना money measurement concept ~ इस संकल्पना के अंदर लेखांकन में ऐसे व्यवहारों को लिखा जाता है जिन का मापन मुद्रा में किया जा सकता है अर्थात ऐसे व्यवहार या लेन-देन जिनको मुद्रा में मापा नहीं जा सकता है उनको लेखा पुस्तको में दर्द नहीं किया जाता है चाय व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण हो या नहीं

3 – निरंतरता की संकल्पना going concern concept ~ इस संकल्पना के अंतर्गत व्यवसाय की स्थापना यह मानकर की जाती है कि व्यवसाय अनंत वर्षों तक चले अर्थात निरंतर चलता रहे व्यवसाय की स्थापना को एक निश्चित वर्षों में मानकर नहीं की जानी चाहिए।

4 – लेखांकन अवधि संकल्पना accounting peroid concept ~ संकलपना के अंदर लेखांकन आरती 1 वर्ष की होनी चाहिए जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की होती है जिसे वित्तीय वर्ष कहा जाता है ।

5 – लागत संकल्पना cost concept~ कि संकलपना के अंदर सभी संपत्तियों का लेखा उनके लागत मूल्य पर किया जाता है।

6 – द्विपक्षीय संकल्पना dual aspect concept ~ इस संकलपना के अंदर प्रत्येक व्यवहार का प्रभाव दो खातों पर पड़ता है एक नाम पक्ष दूसरा जमा पक्ष व्यवहार का प्रभाव दो खातों पर होने से दोनों हाथों पर राशि का सामान प्रभाव होता है इसी को द्विपक्षीय संकलपना कहा जाता है ।

7 – आगम मान्यता तो संकल्पना revenue recognition concept ~ इस संकलपना के अंदर आ गम अथवा आए को पुस्तकों में सभी दर्ज किया जाएगा जब वह वास्तविक रुप में प्राप्त हो जाए ।

8 – आगम व्यय मिलान संकल्पना matching concept ~ इस संकलपना के अंदर एक वित्तीय वर्ष की अवधि में प्राप्त होने वाली आयोग का मिलान उसी अवधि में भुगतान किए जाने वाले व्यय किया जाना चाहिए ।

9 – उपार्जन संकल्पना accrual concept ~ संकल्पना के अंदर प्रत्येक व्यवहारों का लेखा उनके अधिकृत होने के समय से उपस्थित होने के समय पुस्तकों में दर्ज किया जाता है ।

10 – पूर्ण प्रस्तुतीकरण संकल्पना full disclosure concept ~ इस संकलपना के अंदर सभी सूचनाओं का प्रस्तुतीकरण किया जाना चाहिए एवं जो महत्वपूर्ण सूचनाएं हैं उनको एक अलग शीर्षक बनाकर दर्शाया जाना चाहिए ।

11 – सम अनुरूपता एवं संगतता की संकल्पना consistency concept ~ संकल्पना के अंदर व्यवसाय द्वारा अपनाए जाने वाली लेखांकन नीतियों सिद्धांतों को निरंतर वर्षों तक उपयोग करते रहना चाहिए ।

12 – रुढ़िवादिता की संकल्पना conservation concept ~ इस संकलपना के अंदर व्यवसाय में होने वाले लाभों को अनावश्यक रुप से बढ़ा चढ़ाकर नहीं दिखाना चाहिए जैसे – स्टॉक का मूल्यांकन , डूबत ओर संदिग्ध ऋणों पर आयोजन, मूल्य हास आदि का लेखा इस संकल्पना के अंदर किया जाता है।

13 – सारता की संकल्पना materiality concept ~ इस संकल्पना के अंदर लेखांकन में उन्ही सूचनाओं ओर तथ्यों पर ध्यान दिया जाना चाहिए जो व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण हो।

14 – वस्तुनिष्ठता की संकल्पना objectivity concept ~ इस संकलपना के अंदर व्यवसाय में लिखे जाने वाले प्रत्येक व्यवहार को उसके प्रमाणको के आधार पर लिखा जाना चाहिए एवं प्रमाणक , रसीद , बीजक आदि हो सकते है

लेखांकन की विशेषताएँ ( Accounting Features ) :

  • लेखांकन व्यवसायिक सौदों के लिखने और वर्गीकृत करने की कला है ।
  • विश्लेषण एवं निर्वचन की सूचना उन व्यक्तियों को सम्प्रेषित की जानी चाहिए जिन्हें इनके आधार पर निष्कर्ष या परिणाम निकालने हैं या निर्णय लेने हैं
  • यह सारांश लिखने, विश्लेषण और निर्वचन करने की कला है। सौदे मुद्रा में व्यक्त किये जाते हैं।
  • ये लेन-देन पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तीय प्रकृति के होते हैं ।

लेखांकन के लाभ ( Benefits of accounting ) :

  • कोई भी व्यक्ति कितना भी योग्य क्यों न हो, सभी बातों को स्मरण नहीं रख सकता है।
  • व्यापार में प्रतिदिन सैकड़ों लेन-देन होते हैं, वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है। ये नकद और उधार दोनों हो सकते हैं। मजदूरी, वेतन, कमीशन, आदि के रूप में भुगतान होते हैं। इन सभी को याद रखना कठिन है।
  • लेखांकन इस अभाव को दूर कर देता है।
  • लेखांकन से व्यवसाय से संबंधित कई महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्राप्त होती हैं जैसे :
    लाभ-हानि की जानकारी होना
  •  सम्पत्ति तथा दायित्व की जानकारी होना ।
  •  कितना रुपया लेना है और कितना रुपया देना है । व्यवसाय की आर्थिक स्थिति कैसी है, आदि।
  • अन्य व्यापारियों से झगड़ें होने की स्थिति में लेखांकन अभिलेखों को न्यायालय में प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • न्यायालय प्रस्तुत किये लेखांकन को मान्यता प्रदान करता है।
  • वित्तीय लेखा से कर्मचारियों के वेतन, बोनस, भत्ते, आदि से संबंधित समस्याओं के निर्धारण में मदद मिलती है।

लेखांकन के प्रमुख उद्देश्य (The main objectives of accounting )–

1⃣ क्रय-विक्रय तथा शेष माल की जानकारी –

समय-समय पर व्यापार में कुल क्रय, विक्रय तथा न बिके माल की जानकारी प्राप्त करना स्वामी के लिए आवश्यक होता हैं । लेखांकन द्धारा इस आवश्यकता की पूर्ति सरलता से कर दी जाती हैं ।

2⃣ लेनदारों तथा देनदारों की स्थिति से अवगत करना –

आज का व्यापार साख पर आधारित है । अत: प्रत्येक व्यापारी साहूकारों को भुगतान करने व ग्राहकों से रकम वसूल करने के लिए व्यापार में इनकी स्थिति की जानकारी से सदैव अवगत रहना चाहता है । लेखांकन द्धारा इस उद्देश्य की पूर्ति सम्भव होती हैं ।

3⃣ छल-कपट पर नियंत्रण करना –

व्यवहारों का उचित लेखांकन व उनकी नियमित जाँच करने पर कर्मचारियों तथा ग्राहकों द्धारा की जाने वाली छल-कपट की आशंकाओं को नियंत्रित किया जा सकता हैं

4⃣ व्ययों पर नियंत्रण करना

अनेक छोटे-छोटे व्यय यद्यपि इनकी राशि कम होती हैं, अधिक होने पर व्यापार की बचत घट जाती हैं । प्रत्येक व्यय का लेखा करने पर अनावश्यक व्ययों को नियंत्रित किया जा सकता हैं ।

5⃣ करो का अनुमान लगाना –

विभिन्न प्रकार के करों का निर्धारण व उनकी सम्भावित राशि का अनुमान लगाना व्यवहारों के लेखांकन से ही सम्भव हैं । अत: बहुत से ऐसे व्यापारी हैं, जो करों की भुगतान राशि का अनुमान लगाने के लिए व्यवहारों को लेखा करते हैं ।

7⃣ लाभ-हानि के कारणों को ज्ञात करना –

लेखांकन का उद्देश्य केवल व्यापार के लाभ या हानि को ज्ञात करना ही नहीं हैं, अपितु उन कारणों को भी ज्ञात करना होता हैं, जिनसे व्यापार की लाभ-हानि प्रभावित होती हैं ।

8⃣ व्यापार का सही-सही मूल्यांकन करना –

व्यापार के क्रय-विक्रय के लिए व्यापार की सम्पत्तियों एवं दायित्वों का सही-सही मूल्यांकन आवश्यक होता हैं । अत: इस आवश्यकता को लेखांकन के माध्यम से पूरा किया जा सकता है ।

वितीय लेखों की प्रणालियां ( Systems of financial articles )

लेखांकन की अनेक प्रणलियाँ हैं जिनमें से निम्नलिखित उल्लेखनीय हैं-

  1. नकद लेन-देन
  2. इकहरा लेखा प्रणाली
  3. दोहरा लेखा प्रणाली
  4. भारतीय बहीखाता प्रणाली

1. नकद लेन-देन (रोकड़) प्रणाली ( Cash Transaction (Cash) System )

  • इस प्रणाली का प्रयोग अधिकतर गैर व्यापारिक संस्थाओं जैसे क्लब, अनाथालय, पुस्तकालय तथा अन्य समाज सेवी संस्थाओं द्वारा किया जाता है।
  • इन संस्थाओं का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता और ये पुस्तपालन से केवल यह जानना चाहती है कि उनके पास कितनी रोकड़ आयी तथा कितनी गयी और कितनी शेष है।
  • रोकड़ प्रणाली के अन्तर्गत केवल रोकड़ बही (कैश बुक) बनायी जाती है। इस पुस्तक में सारे नकद लेनदेनों को लिखा जाता है। वर्ष के अन्त में कोई अन्तिम खाता या लाभ-हानि खाता आदि नहीं बनाया जाता।
  • आय-व्यय की स्थिति को समझने के लिए एक आय-व्यय खाता (Income & Expenditure Account) बनाया जाता है।

2. इकहरा लेखा प्रणाली ( Single accounting system )

  • इस पद्धति में नकद लेन-देनों को रोकड पुस्तक में तथा उधार लेन देनों को खाता बही में लिखा जाता है।
  • यह प्रणाली मुख्यतः छोटे फुटकर व्यापारियों द्वारा प्रयोग की जाती है। इस प्रकार पुस्तकें रखने से केवल यह जानकारी होती है कि व्यापारी की रोकड़ की स्थिति कैसी है, अर्थात् कितनी रोकड़ आयी तथा कितनी गयी तथा कितनी शेष है।
  • किसको कितना देना है तथा किससे कितना लेना है, इसकी जानकारी खाता बही से हो जाती है।
  • इस पद्धति से लाभ-हानि खाता व आर्थिक चिट्ठा बनाना संभव नहीं होता जब तक कि इस प्रणाली को दोहरा लेखा प्रणाली में बदल न दिया जाय। इसलिए इस प्रणाली को अपूर्ण प्रणाली माना जाता है।

3. दोहरा लेखा प्रणाली ( Double accounting system )

  • यह पुस्तपालन की सबसे अच्छी प्रणाली मानी जाती है। इस पद्धति में प्रत्येक व्यवहार के दोनों रूपों (डेबिट व क्रेडिट या ऋण व धनी) का लेखा किया जाता है।
  • यह कुछ निश्चित सिद्धान्तों पर आधारित होती है। वर्ष के अन्त में अन्तिम खाते बनाकर व्यवसाय की वास्तविक स्थिति की जानकारी करना इस पद्धति के माध्यम से आसान होता है।

4. भारतीय बहीखाता प्रणाली ( Indian bookkeeping system )

  • यह भारत में अत्यन्त प्राचीनकाल से प्रचलित पद्धति है।
  • अधिकांश भारतीय व्यापारी इस प्रणाली के अनुसार ही अपना हिसाब-किताब रखते हैं। यह भी निश्चित सिद्धान्तों पर आधारित पूर्णतया वैज्ञानिक प्रणाली है।
  • इस प्रणाली के आधार पर भी वर्ष के अन्त में लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा बनाया जाता है।

लेखांकन के कार्य व सीमाएं ( Accounting Functions & Limits )

1. लेखांकन के कार्य ( Accounting Functions )

लेखांकन का कार्य आर्थिक इकाइयों की सूचना उपलब्ध करना है जो मूलत: वित्तीय प्रकृति की होती हैं तथा जिसे आर्थिक निर्णय लेने में उपयोगी माना जाता हैं । वित्तीय लेखांकन निम्नलिखित कार्यों को करता हैं

1⃣ विधिपूर्वक अभिलेखन करना- वित्तीय लेखांकन में व्यावसायिक लेन-देनों का विधिपूर्वक अभिलेखन किया जाता है, उनका वर्गीकरण किया जाता है तथा विभिन्न वित्तीय विवरणों के रूप में संक्षिप्तकरण किया जाता हैं

2⃣ वित्तीय परिणामों को सम्प्रेषण- इसके माध्यम से शुद्ध लाभ (अथवा शुद्ध हानि) परिसम्पत्तियाँ उपयोगकर्ताओं देयताएँ आदि वित्तीय सूचनाओं का इच्छुक को सम्प्रेषण किया जाता हैं ।

3⃣ वैधानिक दायित्वों की पूर्ति करना- विभिन्न अधिनियम जैसेकि कम्पनी अधिनियम, 1956, आयकर एवं विक्रय कर /वैट कर का अधिनियम में प्रावधान है जिनके अनुसार विभिन्न विवरणें को जमा करना आवश्यक है जैसे कि वार्षिक खाते, आयकर विवरणी, वैट आदि की विवरणी ।

4⃣ दायित्व का निर्धारण- यह संगठन के विभिन्न विभागों के लाभ का निर्धारण करने में सहायक होता है । इससे विभागीय अध्यक्ष का दायित्व निश्चित किया जा सकता है ।

5⃣ निर्णय लेना- यह उपयोगकर्ताओं को प्रासंगिक आँकड़े उपलब्ध कराता है जिनकी सहायता से वह व्यवसाय में पूँजी के निवेश तथा माल की उधार आपूर्ति करने अथवा ऋण देने के सम्बन्ध में उपयुक्त निर्णय ले सकते हैं ।

लेखांकन की सीमाएँ ( Limitations of accounting )

1⃣ लेखांकन सूचनाओं को मुद्रा में व्यक्त किया जा सकता हैं: गैर मौद्रिक घटनाओं अथवा लेन-देनों को पूरी तरह से छोड़ दिया जाता हैं ।2⃣ स्थायी परिसम्पतियों का अभिलेखन मूल लागत पर किया जा सकता हैं :  भवन, मशीन आदि परिसम्पत्तियों पर वास्तविक व्यय तथा उस पर आनुसंगिक व्यय का अभिलेखन किया जाता है। अत: मूल्य वृद्धि के लिए कोर्इ पा्रवधान नहीं होता। परिणामस्वरूप स्थिति विवरण व्यवसाय की सही स्थिति को नहीं बताता।

3⃣ लेखांकन सूचना कभी-कभी अनुमुमानों पर आधारित होती है : अनुमान कभी-कभी गलत भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए अवक्षरण निर्धारण के लिए सम्पत्ति के वास्तविक जीवन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता

4⃣ लेखांकन सूचना को केवल लाभ के आधार पर प्रबन्धन निष्पादन को एकमात्र परीक्षण के रूप में प्रयुक्त नहीं की जा सकती :  एक वर्ष के लाभ को कुछ व्यय जैसे कि विज्ञापन, अनुसंधान , विकास अवक्षयण आदि व्ययों को दिखाकर सरलता से हेर-फेर किया जा सकता है अर्थात् दिखाने की संभावना होती हैं।

5⃣ लेखांकन सूचनाएं निष्पक्ष नहीं होती : लेखाकार आय का निर्धारण व्यय पर आगम के आधिक्य के रूप में करते हैं । लेकिन वह व्यवसाय के लाभ को ज्ञात करने के लिए आगम आय एवं व्यय की चुनी हुर्इ मदों को ध्यान में रखते है । वह इसमें सामाजिक लागत जैसे कि जल, ध्वनि एवं वायु प्रदूषण को सम्माहित नही करते । वह स्टाक अथवा अवक्षयण के मूल्याँकन की विभिन्न पद्धतियों को अपनाते है ।

लेखांकन की शाखाएं ( Branches of accounting )

1⃣ वित्तिय लेखांकन financial accounting ~ इसमे वितीय लेनदेनों का लेखा होता है ।एक वर्ष में लाभ हानि की जानकारी व्यापार खाता (trading acnt) ओर लाभ हानि खाता (profit & loss acnt )से प्राप्त होती है

2⃣ लागत लेखांकन cost accounting~ इसमे उत्पादों की लागत का निर्धारण करते है । जिससे उस वस्तु का मूल्य निर्धारित किया जा सके।

3⃣ प्रबंध लेखांकन managment accounting ~ इसमे प्रस्तुत सूचनाऍ प्रबंधक वर्ग को दी जाती है ताकि वे संस्था के हित मे निर्णय ले सके ।

व्यय ~

व्यवसाय में लाभ कमाने हेतु जो लागत लगती है उसे व्यय कहते है प्रकार

1⃣ पूंजीगत व्यय ~ एक वर्ष से अधिक लाभ कमाने हेतु जो खर्च किये जाते है जैसे-मशीनरी,फर्नीचर,बिल्डिंग आदि

2⃣ आयगत व्यय ~ एक वर्ष से कम अवधि में लाभ कमाने हेतु जो खर्च किये जाते है जैसे-सैलरी , कमीशन आदि

छूट Discount )

1⃣ व्यापारिक छूट ( trade discount ) ~ विक्रेता द्वारा क्रेता को वस्तुओ के मूल्य में जो कटौती की जाती है।

2⃣ नकद छूट (cash discount ) ~ भुगतान को जल्दी प्राप्त करने के लिए फि गयी छूट ।

July 30, 2020

Stock Exchange स्टॉक एक्सचेंज क्या हे व इसके कार्य???

स्टॉक एक्सचेंज

स्टॉक एक्सचेंज आधुनिक व्यावसायिक जगत में बडा ही महत्वपूर्ण स्थान रखती है |  किसी भी देश के स्टॉक एक्सचेंज बाज़ार उसके पूँजी बाज़ार में महत्वपूर्ण हिस्से होते है | संसार में इसका विकास संयुक्त पूँजी वाली कम्पनियों के जन्म तथा विकास के साथ प्रारम्भ हुआ लेकिन आधुनिक व्यवसाय प्रधान युग में यह एक अत्यंत महत्यपूर्ण संस्था बन गई है |

यह वह संगठित विपनी है जहाँ कम्पनियाँ निगम अथवा सरकार द्वारा निर्गमित अंश का क्रय विक्रय किया जाता है, जो बेचने के दृष्टी से निर्गमित की गई हो | इस प्रकार आजकल औद्योगिक वित्त के ढ़ाचे को समझाने के लिए स्टॉक एक्सचेंज के कार्य प्रणाली का अध्यन करना आवश्यक है |साधारण शब्दों में स्टॉक एक्सचेंज का आशय एक ऐसे सुसंगठित व स्थायी बाजार से है

जहाँ संयुक्त स्टॉक वाली कंपनियां, सार्वजनिक व्यक्तिगत एवं जनोपयोगी संस्थाओ को शेयर का विक्रय करता है | स्टॉक एक्सचेंज एक प्रकार का वह बाजार है, जहाँ शेयर का क्रय-विक्रय निश्चित नियमों के अनुसार पहले से पंजीकृत शेयरों में ही होता है | स्टॉक एक्सचेंज न तो अपने लिए क्रयकरता है, और ना ही अपने लिए शेयरों का विक्रय करता है | यह बाजार केवल क्रय-विक्रय की क्रियाओ को नियमित करता है |

भारत में स्टॉक एक्सचेंज ( Stock exchanges in India )

भारत में शेयर कारोबार का प्रारंभ 1830 ईस्वी में हुआ था जब मुंबई में कॉटन मील एवं बैंकों के अंशों में लेन-देन करना प्रारंभ हुआ था| 1855 में मुंबई के कुछ गुजराती एवं पारसी दलालों ने मुंबई टाउन हॉल के पास बैठकर शेयर कारोबार प्रारंभ किया| धीरे-धीरे इन दलालों की संख्या बढ़ने लगी| 1874 में यह ^दलाल स्ट्रीट^ में बैठकर शेयर का कारोबार करने लगे|

1875 में इन्होंने “The Native Share & Stock Broker’s Association’ नाम से मुंबई में एशिया के पहले स्टॉक एक्सचेंज “बंबई स्टॉक एक्सचेंज” का विधिवत रूप से पंजीयन करवाया।

1887 में इस एक्सचेंज ने अपने अंतर नियम एवं सीमा नियमों का पंजीकरण करवाया। 2002 में स्टॉक एक्सचेंज का नाम परिवर्तित कर “बम्बई स्टॉक एक्सचेंज” (BSE) कर दिया गया| यह वर्तमान में एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत हैं|

वर्तमान में यह देश का सबसे बड़ा तथा विश्व का 11वां सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है| विश्व में पहला संगठित शेयर बाजार एम्स्टर्डम (नीदरलैंड) में 1602 में स्थापित हुआ था|  वर्तमान में भारत में कुल 36 स्टॉक एक्सचेंज है|

इनमें से वर्तमान में सेबी से मान्यता प्राप्त 19 स्टॉक एक्सचेंज है तथा 17 स्टॉक एक्सचेंज को सेबी द्वारा मान्यता सूची से बाहर कर दिया गया है|

भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों की सूची ( List of recognized stock exchanges in India )

स्टॉक एक्सचेंज एक ऐसी जगह है जहां निवेशक कंपनियों में शेयरों को खरीदते हैं और बेचते हैं. अब तक देश में 23 सेबी के स्वीकृत स्टॉक एक्सचेंज हैं।

  1. उत्तर प्रदेश स्टॉक एक्सचेंज, कानपुर
  2. वड़ोदरा स्टॉक एक्सचेंज, वडोदरा
  3. कोयंबटूर स्टॉक एक्सचेंज, कोयम्बटूर
  4. मेरठ स्टॉक एक्सचेंज, मेरठ
  5. मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई
  6. ओवर द काउंटर एक्सचेंज, मुंबई
  7. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई
  8. अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंज, अहमदाबाद
  9. बैंगलुरू स्टॉक एक्सचेंज, बैंगलुरू
  10. भुवनेश्वर स्टॉक एक्सचेंज, भुवनेश्वर
  11. कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज, कोलकाता
  12. कोचीन स्टॉक एक्सचेंज, कोचीन
  13. दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज, दिल्ली
  14. गुवाहाटी स्टॉक एक्सचेंज, गुवाहाटी
  15. हैदराबाद स्टॉक एक्सचेंज, हैदराबाद
  16. जयपुर स्टॉक एक्सचेंज, जयपुर
  17. केनरा स्टॉक एक्सचेंज, मैंगलोर
  18. लुधियाना स्टॉक एक्सचेंज, लुधियाना
  19. चेन्नई स्टॉक एक्सचेंज, चेन्नई
  20. मध्य प्रदेश स्टॉक एक्सचेंज, इंदौर
  21. मगध स्टॉक एक्सचेंज, पटना
  22. पुणे स्टॉक एक्सचेंज, पुणे
  23. कैपिटल स्टॉक एक्सचेंज केरल लिमिटेड, तिरुवनंतपुरम, केरल

जुलाई 9, 2007 को सेबी ने सुस्त कामकाज के कारण सौराष्ट्र स्टॉक एक्सचेंज, राजकोट की मान्यता रद्द कर दी है जिसके कारण अब सक्रीय स्टॉक एक्सचेंज की संख्या घटकर 23 हो गई है।

स्टॉक एक्सचेंज के कार्य ( Work of stock exchanges ):-

1. पूँजी रचना:- स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर के भाव सम्बन्धी बातो का प्रकाशन नागरिकों को बचत के लिए प्रोत्साहित करता है,  जिनके पास बचत है, उनको शेयरों में लगाने के लिएप्रेरित करता है | इसका प्रभाव यह होता है की पूँजी की व्यवस्थित रचना होती है |

2.पूँजी की तरलता तथा गतिशीलता :- स्टॉक एक्सचेंज का दूसरा महत्यपूर्ण कार्य एक और पूँजी को तरलता प्रदान करना तथा दूसरी ओर गतिशीलता लाना है | स्टॉक एक्सचेंज में शेयर का क्रय-विक्रय किसी भी समय किया जा सकता है, जिससे स्टॉक में तरलता आ जाती है अर्थात विनियोजक(शेयर होल्डर) किसी भी समय अपनी लगाई हुई पूँजी को वापस निकाल सकता है | यदि कोई शेयर कम कीमत वाली है, या कम लाभप्रद शेयर ख़रीदी जा सकती है, इस प्रकार शेयरों में गतिशीलता आ जाती है |

3. तैयार एवं निरंतर बाज़ार :-

1. स्टॉक एक्सचेंज का तीसरा कार्य बाजार तैयार करना एवं निरंतर उपलब्ध कराना है | इनबाजारों में हर समय क्रेता-विक्रेता पाये जाते हैं, जिससे बाजार में निरंतरता बनी रहती है |

2. मूल्य निर्धारण :-मूल्य निर्धारण स्टॉक एक्सचेंज का चौथा महत्यपूर्ण कार्य है | स्टॉक एक्सचेंज परे शेयरों के मूल्यों का निर्धारण राजनैतिक, सामाजिक, रास्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पहलुओं कोध्यान में रखकार किया जाता है  ताकि उचित मूल्य निर्धारित हो सके क्योंकिशेयर लेने वाले अपने धन को उन्हीं शेयरों में लगाते हैं, जो उनके लिये अधिक लाभदायक हों

3. व्यवहार में सुरक्षा :-स्टॉक एक्सचेंज निश्चित नियमों के अंतर्गत कार्य करते हैं | जिससे जाली शेयरों के क्रय-विक्रय का भय ख़त्म हो जाता है, तथा साथ ही क्रय-विक्रय का ढंग तथा कमिशन भी उचित तारिके से निश्चितहो जाता है, ताकि उपभोक्ताओं में भी विश्वास पैदा हो |

यदि कोई सदस्य स्टॉक एक्सचेंज के नियमो का पालन नहीं करता है, तो उसे दण्डित किया जा सकता है, तथा समय आने पर स्टॉक एक्सचेंज से निकाला जा सकता है | इस प्रकार स्टॉक एक्सचेंज नियोजक को सुरक्षा प्रदान करता है |

4. अनुसूचित कंपनियों के बारे में पूर्ण जानकारी :-स्टॉक एक्सचेंज का एक कार्य अनुसुचित कम्पनी के बारे में आर्थिक सूचनायें एकत्रित करके उसका प्रकाशन करना है, ताकि सदस्यों को उस कंपनी के बारे में विस्तृत जानकारी हो सके | जो सूचनायें प्रकाशित न हुआ हो उनको भी अगर कोई सदस्य मांगे तो वह उसको दे दी जाती है|

5. नयी पूँजी प्राप्ति में सहायक:- प्रायः कम्पनियाँ अपने विकास के लिए नयी पूँजी की आवश्यकता महसूस करती है| इसके लिए कम्पनियाँ जनता से नए आॅफर निर्गमन करती है ऐसा निर्गमन करकेपूँजी एकत्रित करने में स्टॉक एक्सचेंज ‌‌बड़ी सहायता करते हैं |

6. अर्थिक प्रगति का माप :-स्टॉक एक्सचेंज किसी भी देश की अर्थिक प्रगति का बैरोमीटर कहलाता है क्योकि देश की अर्थिक प्रगती का अनुमान उस देश के स्टॉक एक्सचेंज को देखकर लगाया जा सकता है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ( Bombay Stock Exchange- BSE )

स्टॉक एक्सचेंज

विश्व में सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज न्यूजीलैंड में स्थित है भारत और एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज BSE है। इसकी स्थापना 9 July, 1875 में हुई थी। इस एक्सचेंज की पहुंच 417 शहरों तक है, 5000 से अधिक भारतीय कंपनियां पंजीकृत हैं सेंसेक्स का आधार वर्ष 1978-79 है सेंसेक्स में 30 कंपनियों को समाहित किया गया है, जिसकी गणना मार्केट कैपिटलाइजेशन-वेटेज मेथाडोलाजी के आधार पर की जाती है।

सेंसेक्स में 30 कंपनियों को समाहित किया गया है, जिसकी गणना मार्केट कैपिटलाइजेशन-वेटेज मेथाडोलाजी के आधार पर की जाती है।भारत में शेयर बाजार का मापक मुंबई शेयर बाजार (बीएसई) का संवेदी सूचकांक है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारतीय शेयर बाज़ार के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है। दूसरा एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है।

भारत को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजार में अपना श्रेष्ठ स्थान दिलाने में बीएसई की अहम भूमिका है। एशिया के सबसे प्राचीन और देश के प्रथम स्टॉक एक्सचेंज को – बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज सिक्युरिटीज कांट्रेक्ट रेग्युलेशन एक्ट 1956 के तहत स्थाई मान्यता मिली है। इसका लक्ष्य ‘वैश्विक कीर्ति की पताका फहराकर प्रमुख भारतीय स्टाक एक्सचेंज के रूप में उभरना’

भारतीय पूंजी बाजार के विकास में इस एक्सचेंज की व्यापक भूमिका रही है और इसका सूचकांक विश्वविख्यात है। मैनेजिंग डायरेक्टर के नेतृत्व में डायरेक्टर्स बोर्ड द्वारा एक्सचेंज का संचालन होता है। इस बोर्ड में प्रतिष्ठित प्रोफेशनल्स, ट्रेडिंग सदस्यों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक प्रतिनिधियों का समावेश है।

एक्सचेंज भारत के छोटे – बड़े शहरों में अपनी उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। बीएसई की सिस्टम और प्रक्रिया ऐसी है कि बाजार की पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहे।

वैश्विक कीर्तिमान स्थापित कर, सर्वोच्च स्टाक एक्सचेंज के रूप में उभरने वाले इस एक्सचेंज के पास सवा सौ से अधिक वर्षों के भव्य इतिहास की समृद्ध विरासत है।

एक्सचेंज में `ट्रेडिंग राइट’ और `ओनरशिप राइट’ एक दूसरे से अलग है। ऐसी परिस्थिती में निवेशकों के हितों पर विशेष सावधानी बरती जाती है। एक्सचेंज इक्विटी, डेब्ट तथा प्युचर्स और ऑप्शन के व्यापार के लिए ढांचा एवं पारदर्शक ट्रेडिंग सिस्टम सुनिश्चित करता है। बीएसई की आनलाइन ट्रेडिंग प्रणाली बेहतरीन गुणवत्तावाली है।

आजकल संवेदी सूचकांक के 30 शेयर बीएसई के कुल पूंजीकरण का लगभग 15वां हिस्सा है।

वर्तमान में BSC के अंतर्गत 5 शेयर सूचकांक कार्य कर रहे हैं

1.सेंसेक्स( Sensex )– इसे संवेदी सूचकांक द्वारा मापा जाता है ।

2.बीएसई 500 ( BSE 500 )- इस नए सूचकांक का परिचालन वर्ष 1999में BSE द्वारा किया गया यह इसका सबसे बड़े आधार वाला सूचकांक है।

3. बीएसई 200(BSE 200 )- 200 बड़े आधार वाली कंपनियों का शेयर सूचकांक है इसमें शेयर का मूल्य अमेरिकी डॉलर में भी दर्शाया जाता है इसलिए इसे डॉलेक्स भी कहा जाता है।

4. राष्ट्रीय सूचकांक (National indices ) – इस सूचकांक में 100 कंपनियां है तथा इसे देश के महत्वपूर्ण प्रादेशिक शेयर बाजारों में कोट किया जाता है

5. इंडो नेक्स्ट (Indo Next ) इसकी स्थापना BSE तथा LFISE द्वारा छोटी कंपनियों के शेयरों की तरलता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संयुक्त रूप से की गई है ।

BSC सम्बन्धित कुछ तथ्य ( Some BSC related facts )

  • इक्विटी डेरीवेटिव्स शुरू करनेवाला भारत का पहला एक्सचेंज
  • फ्री प्लोट इंडेक्स शुरू करनेवाला भारत में पहला एक्सचेंज
  • यूएस डॉलर आधारित सेन्सेक्स प्रस्तुत करनेवाला भारत का पहला एक्सचेंज
  • एक्सचेंज आधारित इंटरनेट ट्रेडिंग प्लेटफार्म स्थापित करनेवाला भारत का पहला एक्सचेंज
  • सर्वेलंस, क्लियरिंग और सेटलमेंट के वास्ते आईएसओ प्रमाणपत्र हासिल करनेवाला देश का पहला एक्सचेंज
  • फाइनेंशियल ट्रेनिंग के लिए अलग विशेष सुविधा की व्यवस्था करने वाला पहला एक्सचेंज
  • यहां वर्तमान में भारत के सकल स्टॉक का 75% कारोबार इसी से होता है ।

नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज ( National Stock Exchange – NSE )

फेरवानी कमेटी की सिफारिशों से शेयर बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने हेतु इसकी स्थापना NSE को 1992 में 25 करोड़ की समता पूंजी के साथ देश में पहली डिम्यूट्यूलाइज्ड इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज ( Demutualized Electronic Exchange ) के रूप में स्थापित किया गया था|  इसे 1993 में स्टॉक_एक्सचेंज की मान्यता प्रदान की गई और यह पूरी तरह से परिचालन में 1994 में आया।

इसका मुख्यालय वर्ली (दक्षिणी मुंबई) को बनाया गया। प्रवर्तक IDBI है। इसमें भारत की कंपनियां रजिस्टर्ड है। इसका सूचकांक निफ्टी 500 अग्रिम कंपनियों के शेयरों पर आधारित है। नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज भारत का सबसे बडा़ और तकनीकी रुप से अग्रणी स्टाॅक एक्सचेंज हैं।

इस स्टॉक एक्सचेंज में दो सूचकांक है

  • S&P CNX 500
  • S&P CNX 50

मुंबई स्टॉक एक्सचेंज द्वारा 22 फरवरी 2012 से पर्यावरण अनुकूल इक्विटी सूचकांक भी जारी करना शुरू किया है जिसे ग्रीन एक्स नाम दिया गया है जिसका उद्देश्य देश में हरित निवेश को बढ़ावा देना है

भारतीय पूंजी बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए भारत सरकार के इशारे पर प्रमुख भारतीय वित्तीय संस्थानों के एक समूह द्वारा एनएसई की स्थापना की गई थी| कारोबार के लिहाज से यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टॉक_एक्सचेंज है|

भारतीय अर्थव्यवस्था / जीडीपी का लगभग 4% भारत में स्टॉक_एक्सचेंजों से प्राप्त होता है|

National Stock Exchange – NSE के प्रमुख घरेलू निवेशक

  • भारतीय जीवन बीमा निगम
  • भारतीय स्टेट बैंक
  • आईएफसीआई लिमिटेड
  • आईडीएफसी लिमिटेड
  • स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड

NSE के प्रमुख वैश्विक निवेशक

  • गैगिल एफडीआई लिमिटेड (
  • जीएस स्ट्रैटेजिक इनवेस्टमेंट्स लिमिटेड
  • एसएआईएफ II एसई इनवेस्टमेंट्स मॉरीशस लिमिटेड (
  • एरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) पीटीई लिमिटेड
  • पीआई ऑपर्च्यूनिटीज फंड आई

SEBI(सेबी)-Security and exchange board of india

शेयर कारोबार को विनियमित और नियंत्रित करने तथा निवेशकों के हितों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 12 अप्रैल 1988 को सेबी की स्थापना की गई 30 जनवरी 1993 को एक अध्यादेश पारित करके इसे कानूनी दर्जा दिया गया यह एक गैर संवैधानिक संस्था है इसका मुख्यालय मुंबई है

सेबी गाइडलाइंस 1999 में संशोधन- सेबी ने 17 जनवरी 2013 को एंप्लोई stock option scheme ESOS तथा एंप्लोई स्टॉक पर्चेज स्कीम ESPS गाइडलाइंस मैं संशोधन किए हैं। कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए चलाई जा रही बेनिफिट योजनाओं की जानकारी सभी को देना अनिवार्य बना दिया गया है सेबी की सेवाएं 13 भाषाओं में है वेबसाइट पर 13 भारतीय भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराने का फैसला 2 सितंबर 2012 को लिया

केंद्र सरकार ने 23 मई 2012 को खाड़ी देशों और यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों के निवासियों को भी भारतीय सुपर बाजार में सीधे निवेश करने की अनुमति दी सरकार ने योग्य विदेशी निवेशकों को कॉरपोरेट बॉन्ड और म्यूचुअल फंडों की डेट मे एक अरब डॉलर तक निवेश करने की अनुमति दी।

सेबी की स्थापना ( Establishment of SEBI )

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के अनुसार 12 अप्रैल, 1992 को हुई थी ।

सेबी की उद्देश्य (Purpose of SEBI )

  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की उद्देशिका में सेबी के मूल कार्यों का उल्लेख इस प्रकार है—
  • प्रतिभूतियों (सिक्यूरिटीज़) में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का संरक्षण करना|
  • प्रतिभूति बाजार (सिक्यूरिटीज़ मार्केट) के विकास का उन्नयन करना तथा उसे विनियमित करना और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का प्रावधान करना ।

इसके निर्धारित कार्य निम्नलिखित हैं

  • प्रतिभूति बाजार (सेक्योरिटीज मार्केट) में निवेशको के हितों का संरक्षण तथा प्रतिभूति बाजार को उचित उपायों के माध्यम से विनियमित एवं विकसित करना।
  • स्टॉक एक्सचेंजो तथा किसी भी अन्य प्रतिभूति बाजार के व्यवसाय का नियमन करना।
  • स्टॉक ब्रोकर्स, सब-ब्रोकर्स, शेयर ट्रान्सफर एजेंट्स, ट्रस्टीज, मर्चेंट बैंकर्स, अंडर-रायटर्स, पोर्टफोलियो मैनेजर आदि के कार्यो का नियमन करना एवं उन्हें पंजीकृत करना।
  • म्यूचुअल फण्ड की सामूहिक निवेश योजनाओ को पंजीकृत करना तथा उनका नियमन करना।
  • प्रतिभूतियों के बाजार से सम्बंधित अनुचित व्यापार व्यवहारों को समाप्त करना।
  • प्रतिभूति बाजार से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित करना तथा निवेशकों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
  • प्रतिभूतियों की इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक लगाना।

IDBI (Industrial Development Bank of India)

  • इसकी स्थापना 1964 में आरबीआई द्वारा मुंबई में की गई।
  • आईडीबीआई बैंक भारत में वित्तीय सेवा कंपनी है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक के एक अन्य सार्वजनिक क्षेत्र बैंक के रूप मेंप आईडीबीआई वर्गीकृत की गई।
  • भारतीय उद्योग के विकास के लिए ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संसद के एक अधिनियम द्वारा 1964 में इसे स्थापित किया गया।
  • इसकी एक शाखा दुबई में, सिंगापुर और बीजिंग में दो विदेशी केंद्र स्थित है।
  • वर्तमान में दुनिया में दसवीं सबसे बड़ी बैंक आईडीबीआई बैंक है।
  • भारत सरकार के स्वामित्व वाले 26 वाणिज्यिक बैंकों में से एक हैं।

SIDBI (small industrial development Bank of India)

  • भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना अप्रैल 1990 में की गई थी।
  • यह बैंक भारतीय उद्योग विकास बैंक के पूर्ण स्वामित्व में एक सहायक बैंक के रूप में स्थापित किया गया।
  • यह बैंक छोटे पैमाने के उद्योगों की स्थापना हेतु धन उपलब्ध करवाता है।
  • 2 अप्रैल 1990 से कार्य प्रारंभ कर दिया था। इसका मुख्यालय लखनऊ में।
  • इस बैंक की स्थापना हो जाने पर लघु उद्योगों के लिए जो कार्य IDBI करता था। वह सभी कार्य SIDBI स्थानांतरित कर दिए गए।
  • भारतीय मुद्रा के साथ-साथ विदेशी मुद्रा ऋण भी उपलब्ध कराता है।

उपभोक्ता कीमत सूचकांक ( Consumer Price Index – CPI )

अर्थव्यवस्था में कीमतों में परिवर्तन की माप करने की एक विधि है। यह वस्तुओं की दी गई टोकरी, जिनका क्रय प्रतिनिधि उपभोक्ता करते हैं, का कीमत सूचकांक है। उपभोक्ता कीमत सूचकांक को प्रायः प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।

हम दो वर्षों पर विचार करते हैं-एक आधार वर्ष होता है तथा दूसरा चालू वर्ष। हम आधार वर्ष में वस्तुओं की दी हुई टोकरी के क्रय की लागत की गणना करते हैं। फिर हम परवर्ती को पूर्ववर्ती के प्रतिशत के रूप में व्यक्त करते हैं।

इससे हमें आधार वर्ष से संबंधित चालू वर्ष का उपभोक्ता कीमत सूचकांक प्राप्त होता है।

सकल राष्ट्रीय उत्पाद ( Gross National Product- GNP)

सकल घरेलू उत्पाद (+) शेष विश्व में नियुक्त उत्पादन के घरेलू कारकों द्वारा अर्जित कारक आय (-) घरेलू अर्थव्यवस्था में नियोजित शेष विश्व के उत्पादन के कारकों द्वारा अर्जित आय। दूसरे शब्दों में सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) किसी देश के नागरिकों द्वारा (देश के भीतर या बाहर) एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य से विदेशियों के स्वामित्व वाले उत्पादन के कारकों को की गई अदायगी को घटाने से प्राप्त होता है।

☸उदाहरण के लिये कोरियाई स्वामित्व की हुंडई कार फैक्ट्री के द्वारा अर्जित लाभ को भारत के सकल घरेलू उत्पाद से घटाना होगा।

राष्ट्रीय शेयर बाजार में की रेफरेंस दरें ( Reference rates of national stock market )

मी बोर एवं मिबिड अंतर बैंक कॉल मनी मार्केट के ऋणों के लिए राष्ट्रीय शेयर बाजार एनएसई में दो नई दरें 15 जून 1998 को प्रारंभ की थी। mibor ( मुंबई इंटर बैंक ऑफर रेट ) तथा mibid (मुंबई इंटर बैंक विद रेट)। mibor डर ऋणों के लिए उधार दर की सूचक है। जबकि mibid प्राप्तियों के लिए उधारदर की सूचक है।

BSE ग्रीन एक्स

इसका उद्घाटन कंपनी मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली ने 22 फरवरी 2012 को स्टॉक एक्सचेंज में घंटी बजा कर किया।

विदेशी मुद्रा का फ्यूचर ट्रेडिंग ( Forex trading of foreign currency )

भारत में सर्वप्रथम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मुंबई में 29 अगस्त 2008 से विदेशी मुद्रा का वायदा कारोबार शुरू किया गया इसके बाद बीएसई MCX तथाUSEIL को भी विदेशी मुद्रा वायदा कारोबार की आज्ञा दी गई। भारतीय रिजर्व बैंक की आज्ञा के अनुसार प्रारंभ में डॉलर का वायदा कारोबार किया जाता था बाद में सेबी द्वारा यूरो पाउंड तथा येन में भी वायदा कारोबार की अनुमति प्रदान कर दी ।

क्रेडिट रेटिंग (Credit rating )

क्रेडिट रेटिंग ऋणी या उधार लेने वाली की साख क्षमता या उधार लौटाने की क्षमता का निर्धारण है। क्रेडिट रेटिंग का मुख्य उद्देश्य उधार देने वाले को उधार लेने वाले की भुगतान क्षमता का मूल्यांकन प्रस्तुत करना है

भारत में प्रमुख क्रेडिट एजेंसी (Major Credit Agency in India )

  1. CRISIL क्रेडिट रेटिंग इंफॉर्मेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड
  2. ICAR इन्वेस्टमेंट इनफार्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लिमिटड़।
  3. CARE क्रेडिट एनालिसिस एंड रिसर्च लिमिटेड।

विश्व की तीन प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है

  1. स्टैंडर्ड एंड पुअर्स
  2. मूडीज
  3. फिच CRIB

वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद ( Financial sustainability and development council )

वित्तीय स्थिरता बनाए रखने, अंतर्विनियामक समन्वय को बढ़ाने और वित्तीय क्षेत्रक विकास के उत्थान के लिए तंत्र के सुदृढ़ीकरण तथा संस्थानीकरण के उद्देश्य, सरकार ने जी 20 पहल की रूपरेखा पर, दिसंबर 2010 में एक स्तरीय वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद की स्थापना की।

परिषद के अध्यक्ष वित्त मंत्री है और क्षेत्र विनियामक प्राधिकरण के प्रमुख ,वित्त सचिव या सचिव आर्थिक कार्य विभाग, सचिव वित्तीय सेवाएं विभाग और मुख्य आर्थिक सलाहकार इसके सदस्य है ।परिषद अर्थव्यवस्था के वृहत विवेकाधीन पर्यवेक्षण को मॉनिटर करती है यह वित्तीय शिक्षा तथा वित्तीय समावेशन पर भी ध्यान देती है ।

राजीव गांधी इक्विटी योजना ( Rajiv Gandhi Equity Scheme )

सरकार ने 3 नवंबर 2012 को राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना नामक एक नई कर योजना अधिसूचित की जो अन्य रूप से प्रतिभूति बाजार में नए खुदरा निवेशकों के लिए है। यह योजना नए निवेशक जो 50000 तक निवेश करते हैं और जिनकी वार्षिक आय 1000000 से कम है का उस वर्ष के लिए कर योग्य आय में निवेशीत राशि की 50% कर छूट उपलब्ध कराती है। सेबी द्वारा परिचालन दिशा निर्देश 6 नवंबर 2012 को जारी किए गए

राजीव गांधी इक्विटी योजना के प्रमुख बिंदु
अनुमत कर छूट आयकर अधिनियम की धारा 80(ग) के तहत स्वीकृत अनुमत रुपए एक लाख की सीमा से अतिरिक्त होगी। निवेशकों के लिए 50% कर छूट के अलावा लाभांश भी कर मुक्त

Stock Exchange Important Facts –

  • भारत की GDP की गणना के दौरान विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की आय की गणना भारत की GDP में नहीं की जाती है।
  • इस आय को हम उसी देश के GDP में गणना करेंगे जहाँ वह काम कर रहा होता है, जबकि विधिक रूप से वह भारतीय है।

July 28, 2020

Stock Market Glossary शेयर बाजार की पारिभाषिक शब्दावली

शेयर बाजार की पारिभाषिक शब्दावली

शेयर बाजार

1.आउटलुक ( Outlook ) :

रेटिग के साथ जुड़ा हुआ यह शब्द भी भावी संभावनाओं को दर्शाता है। कंपनी/संस्था या देश का भविष्य क्या है अथवा इसकी क्या संभावना है। जैसे सवाल पूछते समय आउटलुक शब्द का उपयोग किया जाता है। आउटलुक के आधार पर ही निवेश करने का निर्णय कम्पनी को लिया जाता है क्योंकि आउटलुक पॉजिटिव, निगेटिव या फिर स्टेबल (स्थिर) हो सकता है।

2. ऑर्डर बुक( Order book) :

कंपनी की ऑर्डर बुक में कितने ऑर्डर बकाया पड़े हैं। इसकी जानकारी के आधार पर कंपनी के कार्य परिणाम, भविष्य एवं स्थिरता का अनुमान लगाया जा सकता है।

3. आर्बिट्रेज (Arbitrage ):

एक शेयर बाजार से निर्धारित शेयरों की कम भाव पर खरीदारी करके उसे दूसरे बाजार में ऊंचे भाव पर बेच देने की प्रवृत्ति को आर्बिट्रेज कहा जाता है।
उदाहरण स्वरूप बीएसई पर एबीसी कंपनी के शेयर 145.20 रू. के भाव पर खरीद कर उसी समय एनएसई पर 145.30 रू. पर बेच देने की प्रक्रिया को आर्बिट्रेज कहते हैं।
इस प्रकार आपको 10 पैसे का अंतर मिलता है। ये सौदे एक ही समय किये जाते हैं तथा इसमें बड़ी संख्या में सौदे किये जाते हैं। ….पुराने समय में एक ही समय पर एक ही स्क्रिप के अलग-अलग भाव हुआ करते थे परंतु अब ऑन लाइन ट्रेडिंग सुविधा होने से इसकी मात्रा काफी घट गयी है।

…अब इस प्रकार के सौदों में भाव का अंतर काफी कम होता है, परंतु भारी मात्रा में सौदे होने से इनमें भरपूर लाभ अर्जित होता है। इस प्रकार का कारोबार करने वालों को आर्बिट्रेजर कहा जाता है।
कई बार एक ही कमोडिटी, करेंसी या सिक्युरिटीज के तीन चार एक्सचेंज पर अलग-अलग भाव अंतर पर सौदे होते हैं, जिसमें एक बाजार से नीचे भाव में खरीद कर दूसरे बाजार में ऊंचे भाव पर बेचा जाता है। यहां महत्वपूर्ण यह है कि ये सौदे दोनों एक्सचेंजों पर एक ही समय पर किये जाते हैं। ब्रोकर इस काम के लिए विशेष स्टॉफ रखते हैं, जो बीएसई और एनएसई दोनों पर भरपूर मात्रा में सौदे करते रहते हैं।

4.आर्बिट्रेशन (Arbitration ):

इस शब्द का अर्थ आर्बिट्रेज से काफी अलग है। आर्बिट्रेशन का अर्थ है विवादों का निपटान। जब ब्रोकर और ब्रोकर के बीच या ब्रोकर और ग्राहक के बीच कोई विवाद हो जाता है तो इस प्रकार के विवाद को निपटाने के लिए मध्यस्थ की नियुक्ति की जाती है, जिसे आर्बिट्रेटर कहा जाता है और उसके निपटान की प्रक्रिया को आर्बिट्रेशन प्रोसेस कहा जाता है। शेयर बाजार में ऐसे विवादों के निपटान के लिए एक खास विभाग एक्सचेंज के नियमों एवं उपनियमों के तहत कार्य करता है।

इस प्रकार के मामलों में आर्बिट्रेटर की नियुक्ति एक्सचेंज के नियमों के अनुसार होती है और उसके द्वारा दिये गये निर्णय ब्रोकर और ग्राहकों पर लागू होते हैं। इस प्रक्रिया में आर्बिट्रेटर दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना निर्णय देता है।

5. नीलाम ( Auction ) :

शेयर बाजार में जब कोई निवेशक शेयर बेच देता है, परंतु समय पर उसकी डिलिवरी देने में विफल हो जाता है तो एक्सचेंज की कार्य पद्धति के तहत निवेशक के शेयर डिलिवरी दायित्व को उतारने के लिए उतने ही शेयरों का आवश्यक रूप से ऑक्शन (नीलाम) किया जाता है। इस प्रक्रिया में ऑक्शन के जरिए उतनी संख्या के शेयर बाजार के वर्तमान भाव पर ब्रोकर के द्वारा खरीदे जाते हैं और इसके भाव अंतर का बोझा निवेशक से वसूला जाता है।

इसका कारण यह है कि निवेशक ने अपने पास शेयर हुए बिना भी उनको बेच दिया था। हमने इसके पहले शार्ट सेल्स (खोटी बिक्री) की चर्चा की थी। उसमें भी शार्ट सेल्स करने वाले निवेशक को बाजार भाव पर शेयर खरीद कर डिलिवरी देनी होती है, परंतु जब कोई निवेशक स्वेच्छा से ऐसा नहीं करता है तो बाजार के नियमों के तहत स्टॉक एक्सचेंज द्वारा आवश्यक रूप से नीलामी के मार्फत उस सौदे का निपटान किया जाता है।

6. आवंटन (Allotment ) :

कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के दौरान निवेशकों द्वारा किये गये आवेदन पर मिले हुए शेयरों को शेयर एलॉटमेंट कहा जाता है।

7. एसटीटी ( STT ) :

सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टेक्स को सारांश में एसटीटी कहते हैं। सरकार के `कर नियम` के अनुसार शेयर सिक्युरिटीज के प्रत्येक सौदे पर एसटीटी लागू होता है। सरकार को इस मार्ग से प्रतिदिन भारी राजस्व मिलता है। यह `कर` ब्रोकरों को भरना होता है हालांकि ब्रोकर इसे अपने ग्राहकों से वसूल लेते हैं। प्रत्येक कांट्रेक्ट नोट या बिल में ब्रोकरेज के साथ-साथ एसटीटी भी वसूला जाता है।

8. एफआईआई (FII ):

शेयर बाजार को नचाने वाला, बाजार की चाल निर्धारित करने वाला यह शब्द बाजार से संबंधित समाचारों में बार-बार सुनने को मिलता है। प्रायः इस बात पर आप अपना ध्यान देते हैं कि एफआईआई की लिवाली या बिकवाली के कारण बाजार का यह हाल हुआ। एफआईआई, यानि की फॉरेन इंस्टिट्युशनल इन्वेस्टर अर्थात विदेशी संस्थागत निवेशक। ये संस्थागत निवेशक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होते हैं।

ये अपने स्वयं के देश के लोगों से बड़ी मात्रा में निवेश के लिए धन एकत्रित करते हैं और उनका अनेक देशों के शेयर बाजार में निवेश करते हैं। इन संस्थागत निवेशकों के ग्राहकों की सूची में सामान्य निवेश से लेकर बड़े निवेशक – पेंशन फंड आदि होते हैं, जिसका एकत्रित धन एफआईआई अपनी व्यूहरचना के अनुसार विविध शेयर बाजारों की प्रतिभूतियों में निवेश करके उस पर लाभ कमाते हैं और उसका हिस्सा अपने ग्राहकों को पहुंचाते हैं।

9. अनावरण ( Exposure):

साधारण शब्दों में इसे जोखिम कहा जा सकता है। जब कोई निवेशक किसी कंपनी में निवेश करता है तो यह कहा जाता है कि उक्त निवेशक ने कंपनी में एक्सपोजर लिया है। एक्सपोजर मात्र कंपनी में ही नहीं बल्कि संपूर्ण उद्योग या अर्थतंत्र में भी लिया जाता है। जब कोई निवेशक अन्य देश में निवेश करता है तो कहा जाता है कि उसने उस देश के अर्थ तंत्र में या उस देश की कंपनियों, उद्योगों में एक्सपोजर अर्थात जोखिम ली है।

वायदे के सौदों में यह शब्द काफी उपयोग में लाया जाता है क्योंकि जब कोई ट्रेडर प्युचर कांट्रेक्ट करता है तब वह भविष्य की जोखिम लेता है। व्यक्ति जब भी कोई निवेश करता है तब उसके मूल्य में घट-बढ़ की संभावना होने से उस निवेश का एक्सपोजर कहा जाता है।

10. बेस्ट बाई ( Best bai ):

जो शेयर खरीदने के लिए उत्तम माने जाते हैं या जिन शेयरों का खरीदारी के लिए उत्तम भाव माना जाता है उन्हें “बेस्ट बाई“ कहा जाता है। ये कंपनियां श्रेष्ठ हैं अथवा भविष्य में उनका भाव अपने वर्तमान भाव से बढ़ने की संभावना होती है ऐसी स्क्रिप या शेयर को बेस्ट बाई के रूप में गिना जाता है। अनेक बार एनालिस्ट विद्यमान स्थित के आधार पर किसी शेयर को बेस्ट बाई कहते हैं, उस समय उन कंपनियों का शेयर भाव बढ़ने की प्रबल संभावनाएं रहती हैं।

11 ब्लू चिप ( Blue chip ):

शेयर बाजार की श्रेष्ठ – मजबूत कंपनियों के लिए यह शब्द उपयोग में लाया जाता है। किसी कंपनी का ब्लू चिप होने का अभिप्राय यह है कि उसके शेयर निवेशकों के लिए पसंदीदा शेयर हैं। इस प्रकार की कंपनियों में सौदे भी काफी होते हैं, उतार-चढ़ाव भी काफी होता है और उनमें निवेशकों का आकर्षण भी खूब बना रहता है।

12. व्यापार ( Trading ) :

बोल्ट अर्थात प्रतिभूतियों की ऑनलाइन स्क्रीन आधारित ट्रेडिंग सुविधा उपलब्ध कराने वाला टर्मिनल। बीएसई के सदस्यों को एक्सचेंज की तरफ से इस टर्मिनल की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है।

13. बबल (Bubble) :

पिछले कुछ वर्षों से यह शब्द भी संपूर्ण विश्व में चर्चित है। विशेषकर बाजार में जब कोई भी प्रकरण खुलता है तो उसे “बबल बस्र्ट“ हुआ है ऐसा कहा जाता है। बबल अर्थात बुलबुला और बस्र्ट अर्थात फटना। जब किसी शेयर का भाव बुलबुले की तरह फूलता रहे और एक सीमा पर आने के बाद धड़ाम से गिर जाये तो इसे बुलबुला फूटना कहा जाता है।

14.सक्रिय शेयर ( Active share)

बाजार के वो शेयर जिनका क्रय-विक्रय ( Buy-Sell ) नियमित रूप से प्रतिदिन शेयर बाजार ( Share Market ) में होता हैं, उसे एक्टिव शेयर कहते हैं

15 राईट शेयर

किसी कम्पनी द्वारा जारी नये शेयरों को क्रय करने का पहला अधिकार वर्तमान शेयर होल्डर ( Current Shareholder ) का होता हैं. वर्तमान शेयर होल्डर के इस अधिकार को पूर्ण क्रय का अधिकार कहा जाता हैं और इस के कारण उनको जो शेयर प्राप्त होते हैं. उसे राईट शेयर कहा जाता हैं

16. बोनस शेयर

जब किसी कम्पनी द्वारा अपने अर्जित लाभों में से रखे नये रिजर्व को शेयर के रूप में वर्तमान शेयर होल्डरों के मध्य आनुपातिक रूप से बाँट दिया जाता हैं तो उसे बोनस शेयर कहते हैं

17. पूर्वाधिकार शेयर

वैसे शेयरों को पूर्वाधिकार शेयर कहा जाता हैं जिनको सामान्यतः दो पूर्वाधिकार प्राप्त होते है. कंपनी द्वारा सर्वप्रथम इनको लाभांश का भुगतान किया जाता हैं तथा लाभांश की दर निश्चित होती हैं. यदि भविष्य में कम्पनी का समापन होता हैं तो लेनदारों का भुगतान करने के बाद कम्पनी की संपत्तियों से वसूल की गयी राशि में से इस श्रेणी की शेयर होल्डर को अपनी पूँजी एनी शेयर होल्डर की तुलना में पहले प्राप्त करने का अधिकार होता हैं

18. कंट्रेरियन शेयर

इस श्रेणी में उन शेयरों को सम्मिलित किया जाता हैं जो बाजार के रूख से अलग दिशा में चलते हैं अर्थात बाज़ार में शेयरों के भाव में वृद्धि हो रही हैं तो इन शेयरों के भाव कम हो जाते हैं और यदि बाजार का रूख गिरावट का हैं तो इन शेयरों का मूल्य बढ़ जाता हैं

19. डिफेंसिव शेयर

जिन शेयरों के मूल्यों में भारी उतार चढ़ाव नहीं होते हैं उनको डिफेंसिव शेयर कहा जाता हैं. इन शेयरों पर वर्तमान लाभ तथा पूँजीगत लाभ सामान्य दर से बढ़ता हैं

20.  ए. डी. इंडेक्स

इन सूचकांक का प्रयोग शेयर बाजार की तेजी या मंदी के रूख का पता लगाने के लिए किया जाता हैं. इसकी गणना के लिए एक दिन में जिन शेयरों के मूल्य बढ़ते हैं, उनकी संख्या में उन शेयरों को भाग दिया जाता हैं जिनके मूल्य उस दिन गिरे होते हैं. यदि इंडेक्स 1 से अधिक होता हैं तो बाज़ार में तेजी का रुख़ होता हैं और इंडेक्स 1 से कम होता हैं तो बाज़ार में मंदी का रूख होता हैं

21. ब्लो आउट

जब कोई कम्पनी अपना नया इश्यू जारी करती हैं और उसका सब्सक्रिप्शन पहले ही दिन पूरा होकर बंद हो जाता हैं तो उसे ब्लो आउट ( Blow Out ) या आउट ऑफ़ विंडो ( Out of Window ) कहा जाता हैं

22. इनसाइडर ट्रेडिंग

यह एक अवैध कार्य हैं. जब उन व्यक्तियों द्वारा भारी मात्रा में शेयरों का क्रय-विक्रय करके लाभ कमाया जाता हैं, जिनके पास कम्पनी की गुप्त सूचनाएँ रहती हैं तो इस प्रकार के शेयरों के क्रय-विक्रय को इनसाइडर ट्रेडिंग कहा जाता हैं

23. कैश ट्रेडिंग

कैश ट्रेडिंग के अंतर्गत शेयर सर्टिफिकेट ( Share Certificate ) तथा नकद धन राशि ( Cash Money ) का लेन-देन अगली समायोजन तिथि से पहले ही हो जाना चाहिए. अब दलालों के सभी कैश ट्रेडिंग के लेन-देनों का समायोजन हो जाता हैं तो इसको समायोजन तिथि ( Adjustment Date ) कहा जाता है पर यह 14 दिन से अधिक नही हो सकती हैं

24. कर्ब ट्रेडिंग

जब शेयर बाजार के निर्धारित ट्रेडिंग समय के बाद अलग से सौदे किये जाते हैं तो इसको कर्ब ट्रेडिंग कहा जाता हैं. यद्यपि सौदे दलालों के द्वारा किये जाते हैं, परन्तु इनको वैधानिक नही माना जाता हैं. इस प्रकार किये गए सौदों का विवरण शेयर बाजार में उपलब्ध नही रहता हैं. वर्तमान में यह सेबी द्वारा प्रतिबंधित हैं

25. स्टैग

स्टैग उन व्यक्तियों को कहते है जो नई कम्पनियों के इश्युओ में भारी मात्रा में शेयरों के आवेदन पत्र प्रेरित करते हैं. इनको यह आशा रहती हैं कि जब कुछ व्यक्तियों को शेयर नही मिलेंगे तो वे इन शेयरों को बढ़े मूल्य पर ख़रीदने को तैयार हो जायेंगे. यह व्यक्ति केवल आवेदन पत्र की राशि प्रेषित करते हैं तथा शेयर आवंटित होते ही बेच देते हैं

26. वोलेटाइल शेयर

जिन शेयरों की कीमतों में बहुत अधिक परिवर्तन होते है, उन्हें वोलेटाइल शेयर कहा जाता हैं

27. फ्लोटिंग स्टॉक

किसी कंपनी की चुकता पूँजी का वह भाग फ्लोटिंग स्टॉक कहलाता हैं जो शेयर बाजार में क्रय-विक्रय के लिए उपलब्ध रहता हैं

28. शेयर सर्टिफिकेट

यह एक ऐसा प्रमाण पत्र है जो कम्पनी के मोहर के अधीन शेयर धारक के नाम जारी किया जाता हैं तथा इसमें उन शेयरों इसमें उन शेयरों के नंबर दिए रहते हैं, जिनके लिए यह जारी किया जाता हैं. उसमे शेयर भुगतान की गयी धनराशि का विवरण होता हैं

29. बेयरर डिबेंचर

ऐसा डिबेंचर जिसका हस्तांतरण केवल सुपुर्दगी के द्वारा हो जाता हैं, उनको डिबेंचर कहा जाता है. डिबेंचर के साथ लगे कूपन को प्रस्तुत करने पर ब्याज तथा डिबेंचर को प्रस्तुत करने पर मूलधन का भुगतान प्रस्तुतकर्त्ता को प्राप्त हो जाता हैं. खो जाने तथा चोरी हो जाने पर इस प्रकार के डिबेंचर के पूर्ण जोख़िम होते हैं

30. बंधक डिबेंचर

इस प्रकार के डिबेंचर कम्पनी के सम्पत्ति पर प्रभार रखते हैं. अतः इनका भुगतान सुरक्षित होता हैं. बंधक दो प्रकार के होते हैं – एक चल प्रभाव और दूसरा निश्चित प्रभाव. चल प्रभाव की स्थिति में किसी निश्चित सम्पत्ति पर प्रभाव नही होता हैं. केवल कम्पनी के समापन की स्थिति में इन डिबेंचरों को भुगतान में प्राथमिकता मिल जाती हैं. निश्चित प्रभाव की स्थिति में डिबेंचरों का कम्पनी की किसी निश्चित सम्पत्ति में प्रभाव होता हैं. ऐसी सम्पत्ति को कम्पनी न तो बेच सकती हैं और न ही हस्तांतरित कर सकती हैं

31. परिवर्तनशील डिबेंचर

ये ऐसे ऋण पत्र होते हैं जिनके धारको को कम्पनी यह विकल्प देती हैं कि वे किसी निश्चित अवधि के अंदर अपने ऋण पत्र को कम्पनी के शेयर में बदलवा सकते हैं. परिवर्तन की शर्ते सामान्यतः निर्गमन के समय ही तय कर दी जाती हैं, परन्तु ये शर्ते कम्पनी में अलग-अलग हो सकती हैं

32. हंग अप

जब किसी शेयर का भाव किसी निवेशक द्वारा क्रय किये गये भाव से काफी नीचे चला जाता हैं तथा ऐसी स्थिति में अधिक घाटा उठाकर शेयर बेचने के बदले वह निवेशक भविष्य में उसके भाव बढ़ने की आशा में अपने शेयरों को रखे रहे तो ऐसी स्थिति को हंग अप कहा जाता हैं

33. स्नोबालिंग

जब किसी शेयर के मूल्य एक निश्चित सीमा में पहुँच जाते हैं, तब क्रय-विक्रय के अनेक स्टॉप आर्डर होने लगते हैं. इन आर्डर के कारण पुनः बाजार में दबाव बनता हैं तथा पुनः आर्डर मिलने लगते हैं तो उस स्थिति को स्नोबालिग़ कहा जाता हैं

34. ग्रे मार्किट

यह अनाधिकृत बाजार होता हैं जहाँ नयी तथा अभी शेयर बाजार में सूचीबद्ध न हुई प्रतिभूतियों का प्रीमियम पर लेन-देन होता हैं. ये सौदे भी अनाधिकृत होते हैं. इन सौदों को शेयर बाजार का संरक्षण नही होते हैं

35. ट्रेडिंग लॉट

शेयरों की वह न्यूनतम संख्या या गुणांक को ट्रेडिंग लॉट कहा जाता हैं, जिसे शेयर बाजार में एक बार में बेचा या क्रय किया जा सकता हैं. सामान्यतः 10 रूपये मूल्य वाले शेयरों की न्यूनतम संख्या 50 या 100 निर्धारित की जाती हैं जबकि 100 रूपये मूल्य वाले शेयरों की संख्या 5 या 10निर्धारित की जाती हैं

36. शार्ट सेलिंग

जब किसी दलाल द्वारा इतने शेयरों की बिक्री की जाती हैं, जितने उसके पास शेयर नही होते हैं तो इसे शार्ट सेलिंग कहा जाता हैं. अनुबंध पूरा करने के लिए दलाल द्वारा नीलामी में शेयर क्रय किये जाते हैं

37. 24- पी. ई. अनुपात

किसी कम्पनी के प्रति शेयर बाजार भाव में प्रति शेयर आय से भाग देकर पी. ई. अनुपात ज्ञात किया जाता हैं

July 24, 2020

Fiscal Policies राजकोषीय नीतियाँ क्या है???

राजकोषीय नीतियाँ

राजकोषीय नीतियाँ

Fiscal Policy Economics  

राजकोषीय नीति का संबंध राजस्व से है, जो कि सार्वजनिक आय, सार्वजनिक व्यय एवं सार्वजनिक ऋण से संबंधित है। मंदी के समय घाटे का बजट वांछित होता है, जबकि स्फीतिक दशाओं में आधिक्य बजट अपनाया जाना चाहिए। मंदी के समय आर्थिक क्रियाओं को गति देने के लिए समुद्दीपन व्ययअपनाया जाना चाहिए ।

मौद्रिक एवं राजकोषीय नीति या वस्तुतः प्रतिस्पर्धी न होकर पूरक है ,जिनके उचित समन्वय द्वारा ही पूर्ण रोजगार आर्थिक स्थायित्व के उद्देश्य प्राप्त किए जा सकते हैं क्षतिपूरक राजकोषीय नीति का आशय ऐसी नीति से है, जिसमें कर एवं व्यय में समायोजन करके अर्थव्यवस्था की मुद्रा स्फीति एवं मुद्रा संकुचन के दुष्परिणामों से बचाया जा सके

कीन्स और लर्नर राजकोषीय नीति को सक्रिय एवं प्रभावी मानते हैं और मौद्रिक नीति को अप्रभावी और निष्क्रिय। राजकोषीय नीति अर्थव्यवस्था की संवृद्धि निष्पादन को सुधारना तथा लोगों को सामाजिक न्याय प्रदान करने से है।

यह राजकोषीय नीति सरकार के सार्वजनिक व्यय, सार्वजनिक आय ,सार्वजनिक ऋण तथा उसके प्रबंधन से संबंधित है राजकोषीय नीति के द्वारा सरकार अर्थव्यवस्था में रोजगार ,राष्ट्रीय उत्पादन, आंतरिक एवं बाह्य आर्थिक स्थिति इत्यादि उद्देश्यों को प्राप्त करती है

राजकोषीय नीति अर्थव्यवस्था की संवृद्धि को दो प्रकार से प्रभावित करती है, विकास के लिए साधनों का एकत्रण करना तथा दूसरा साधनोंके आवंटन द्वारा कार्यकुशलता में सुधार करना।

अर्थनीति के सन्दर्भ में, सरकार के राजस्व संग्रह (करा रोपण) तथा व्यय के समुचित नियमन द्वारा अर्थव्यवस्था को वांछित दिशा देना राजकोषीय नीति(fiscal policy) कहलाता है। अतः राजकोषीय नीति के दो मुख्य औजार हैं -कर स्तर एवं ढांचे में परिवर्तन तथा विभिन्न मदों में सरकार द्वारा व्ययमें परिवर्तन।

राष्ट्रीय स्तर पर सोच समझ कर ऐसे उपाय करना जो अर्थव्यवस्था और उसके क्षेत्रों की कार्यकारी प्रणाली और विकास पर प्रभाव डालते है।

भारत की राजकोषीय नीति: उद्येश्य और प्रभाव ( India’s fiscal policy: entrepreneurship and impact )

राजकोषीय नीति का अर्थ है- स्थिरीकरण या विकास के लिए सरकार द्वारा कराधान और सार्वजनिक व्यय का उपयोग है।

कुलबर्सटॉन के अनुसार, “राजकोषीय नीति का अर्थ सरकारी कार्रवाई द्वारा इसकी प्राप्तियों और व्यय को प्रभावित करना है जिसे आमतौर पर सरकार की प्राप्तियों के रूप में मापा जाता है, यह अधिशेष या घाटे के रूप में होती है।

सरकार सार्वजनिक व्यय और करों के द्वारा व्यक्तिगत आय के स्तर और सम्पूर्ण आय को भी प्रभावित कर सकती है राजकोषीय नीति, आर्थिक आंकड़ों और प्रभावों मौद्रिक नीति को भी प्रभावित करती है।

जब सरकार अपने खर्च की तुलना में अधिक आय प्राप्त करती है तो इसे अधिशेष के रूप में जाना जाता है। जब सरकार अपनी आमदनी से ज्यादा खर्च करती है तो इसे घाटे की स्थिति कहा जाता है। इस अतिरिक्त व्यय को पूरा करने के लिए सरकार, घरेलू या विदेशी स्रोतों से उधार लेती है, बांड जारी करती है और नयी मुद्रा को भी प्रिंट करती है

एक व्यापक परिदृश्य में देखा जाए तो पैसे का अत्यधिक मुद्रण, अर्थव्यस्था में मुद्रास्फीति को बढ़ाने में मदद करता है। यदि सरकार विदेशों से ज्यादा मात्रा में उधार लेती है, तो यह देश को एक ऋण संकट की ओर ले जाता है। ज्यादा मात्र में विदेशों से उधार लेने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है, और देश का भुगतान संतुलन बिगड़ सकता है

अतः राजकोषीय नीति एक दुधारी तलवार है, जिसे बहुत ही सावधानी से चलाने की जरूरत है।

भारत में राजकोषीय नीति का मुख्य उद्देश्य ( Objective of the fiscal policy in India ) :-

किसी भी देश की राजकोषीय नीति का मुख्य उद्देश्य सैद्धान्तिक रूप से, क्रियात्मक वित्त प्रबन्धन (Functional Finance Managemnat)तथा कार्यशील वित्त प्रबन्धन की व्यवस्था करना है।दूसरे शब्दों में आर्थिक विकास के लिए आवश्यक एवं पर्याप्त मात्रा में धन की व्यवस्था करना राजकोषीय नीति का मुख्य कार्य है।

द्यपि राजकोषीय नीति के उद्देश्य किसी राष्ट्र विकास के लिए उसकी परिस्थितियों, विकास सम्बन्धी आवश्यकताओं और विकास की अवस्था के आधार पर निर्धारित किये जाते है फिर भी सामान्य दृष्टि से अल्प-विकसित एवं विकासशील देशों की राजकोषीय नीतिके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित कहे जा सकते हैं

राजकोषीय नीति के सामान्य उद्देश्यों नीचे दिए गए हैं :-

  1. पूर्ण रोजगार की स्थिति को बनाए रखना।
  2. मूल्य स्तर को स्थिर रखना।
  3. अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को स्थिर रखना।
  4. भुगतान संतुलन को संतुलित बनाए रखना।
  5. अविकसित देशों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।

भारत की राजकोषीय नीति के हमेशा दो उद्देश्य रहे हैं— अर्थव्यवस्था के विकास के प्रदर्शन में सुधार करना और लोगों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।

राजकोषीय उतरदायित्व और बजटीय प्रबंधन अधिनियम 2003 ( Fiscal responsibility )

यह अधिनियम सन 2000 में संसद में प्रस्तुत किया गया। लोकसभा में पारित तिथि 7 मई 2003 हुआ, 5 जुलाई 2004 लागू किया गया

महत्वपूर्ण पक्ष –

  • इसमे राजस्व घाटे व राजकोषीय घाटे को चरणबद्ध तरीके से इस प्रकार कम करना था कि 2008 – 09 में राजकोषीय घाटा 3 % के स्तर पर तथा राजस्व घाटा 0% स्तर पर लाया जाये।
  • इसका उद्देश्य वित्तीय अनुशासन को संस्थागत रूप देना, वित्तीय घाटे को कम करना व लघु आर्थिक प्रबंधन को बढ़ावा देने के साथ ही बैलेंस और पेमेंट को व्यवस्थित करना है।

महत्वपूर्ण तथ्य ( Important facts ) 

  • अतीत में एफआरबीएम अधिनियम की उपयोगियता अत्यधिक सार्वजनिक खर्च निरोधक, राजस्व घाटा को समाप्त करने और राजकोषीय घाटे को कम करने का एक उपाय के रूप में देखी गयी थी।
  • एफआरबीएम अधिनियम का इतिहास मिश्रित रहा है जिसके द्वारा अतीत में सफलताएं और विफलताएं दोनों हासिल हुई हैं।
  • वर्तमान में सरकार ने इस अधिनियम की समीक्षा करने और इसमें सुधार करने हेतु एक पैनल का गठन करने का प्रस्ताव दिया है जो सुझाव भी प्रदान करेगा।2003 में इसके गठन के बाद से ही भारत सरकार इस अधिनियम का पालन कर रही है।
  • वित्त वर्ष 2004 से लेकर वित्त वर्ष 2008 तक इसका कड़ाई से पालन किया गया। उस समय, राजकोषीय घाटे में तेजी से कमी हुई थी और राजस्व घाटे में सकल घरेलू उत्पाद की 2% की कमी आई थी।

  • वर्ष 2009 में आम चुनाव और वैश्विक आर्थिक संकट की वजह से एफआरबीएम अधिनियम का काफी उल्लंघन किया गया था और राजकोषीय घाटे में सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले 6% तक वृद्धि हुई है।
  • राजकोषीय घाटा अगले दो साल के लिए अनावश्यक रूप से बढ़ना जारी रहा। इसके बाद, एफआरबीएम को 1 साल के लिए निलंबित कर दिया गया था और यह केवल वित्तीय साल 2012 में इस फिर से लागू किया गया था।
  • 2014 के बाद राजग सरकार सत्ता पर काबिज हुई जिसने समझदारी से इस एक्ट को जारी रखा, लेकिन वर्ष 2015 के चालू वित्त वर्ष में यह लक्ष्य को प्राप्त करने में नाकाम रहा। इस अवधि में 0.4 फीसदी वेतन वृद्धि के कारण सकल घरेलू उत्पाद में सार्वजनिक निवेश के राजकोषीय समायोजन में देरी हुई।
  • वित्त वर्ष 2016 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 3.5% से बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद के 3.9% पर पहुंच गया था। राजकोषीय घाटे में वृद्धि के बावजूद, केन्द्र सरकार के सार्वजनिक निवेश में सकल घरेलू उत्पाद का योगदान बेहद ही कम 2% का रहा क्योंकि कुल सार्वजनिक निवेश और उद्यमों तथा राज्य एवं  स्थानीय सरकारों द्वारा किया गया कुल सार्वजनिक निवेश सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 8-9 % तक रहा।

एफआरबीएम अधिनियम में समस्याएं और उनका समाधान ( Problems and their solutions in the FRBM Act )

तीन प्रमुख समस्याओं के साथ इस अधिनियम की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है-

1⃣ सबसे पहले, एफआरबीएम अधिनियम का फोकस केवल केंद्रीय बजट है जबकि सरकार को केंद्र, राज्यों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के उधार लेने की आवश्यकता (PSBR) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

भारत का पीएसबीआर राजकोषीय घाटे की तुलना में बहुत अधिक है। हाल के वर्षों में ये दोनों अलग अलग दिशाओं में शिफ्ट हुए हैं। भारत का राजकोषीय घाटा कम हो गया है, लेकिन पीएसबीआर बढ़ोत्तरी हो रही है।

2⃣ दूसरा, अतीत में भी केंद्र सरकार का राजस्व घाटा काफी ऊंचे स्तर तक पहुंचा है। एफआरबीएम अधिनियम का लक्ष्य राजस्व घाटे को कम करना होता है, लेकिन 1998- 2003 की संक्षिप्त अवधि को छोड़कर पिछले 25 वर्षों से भी अधिक तक इसके सार्वजनिक क्षेत्र के राजस्व में कोई पूर्ति नहीं हुई।

नतीजतन, केंद्र सरकार को उपभोग व्यय की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए उधार लेना पड़ा। और सार्वजनिक क्षेत्र ने भी समग्र उधार लेने की तुलना में भी अधिक का निवेश किया है। इसलिए यह एकमात्र तथ्य केंद्र सरकार के वित्त की एक गलत तस्वीर पेश करता है।

भारत को न केवल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा अधिक निवेश की आवश्यकता है, बल्कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए परिवहन, सिंचाई, ऊर्जा और सामाजिक बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा भी अधिक निवेश की जरूरत है।

इसलिए, यह कहा जा सकता है कि, यदि केंद्र सरकार द्वारा उपरोक्त तथ्यों को लागू किया जाता है तो इससे केंद्र को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से ज्यादा लाभांश मिल सकता है और इन उपक्रमों को अपना रणनीतिक निवेश कोष का आवंटन भी करना होगा।

3⃣ तीसरा, राजकोषीय नीति की प्रकृति में विपरीत चक्रीय होनी चाहिए, ताकि एफआरबीएम स्वत: नियमों का निर्माण कर उनको लागू कर सके। चक्रीय लचीलेपन से इससे सुधार होगा और भविष्य के लिए उम्मीद भी बनेगी।

वर्तमान अधिनियम में इस तरह का चक्रीय लचीलापन शामिल नहीं है। इसी का परिणाम था कि वैश्विक संकट के समय में सरकार के पास एफआरबीएम के नियमों का उल्लंघन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

नतीजतन, राजकोषीय घाटा में सकल घरेलू उत्पाद के 6.5% तक वृद्धि हुई है और पीएबीआर सकल घरेलू उत्पाद का 8% से भी अधिक था।

राजकोषीय नीति में सुधार के उपाय ( Measures to improve fiscal policy )

  1. भारत की राजकोषीय नीति में सुधार के लिए निम्नलिखित कुछ सुझाव दिये जा सकते हैं-
  2. काले धन के कारण देश में दाहे री अर्थव्यवस्था की लगातार वृद्धि हो रही है। इससे देश को भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है। अत: इसे रोकने के उपाय खोजे जायें।
  3. प्रत्यक्ष करों की दर में वृद्धिकी जाय, साथ ही परोक्ष करों का विस्तार किया जाय।
  4. गैर-योजनागत व्ययों में कमी की जानी चाहिए।
  5. सार्वजनिक उपक्रमों की व्यवस्था में सुधार लाया जाय।
  6. विदेशी ऋणों पर निर्भरता को कम किया जाना चाहिए।
  7. बढ़ते हुए राजस्व घाटे को कम किया जाय।
  8. राजकोषीय_घाटा उस वर्ष की अनुमानित जीडीपी के 2 प्रतिशत सेअधिक नहीं होना चाहिए।
  9. राजकोषीय_नीति व मौद्रिक नीति में आपसी तालमले बैठाया जाय।

राजकोषीय_संकेतक ( Fiscal indicators )

अग्रिम अनुमान (2017-18)

  1. सकल घरेलू उत्पाद- 12985363 करोड रु
  2. आर्थिक विकास दर- 6.5%
  3. प्रतिव्यक्ति आय – 111782 रु
  4. विदेशी मुद्रा भंडार – 409.4 अमेरिकी बिलियन डॉलर
  5. राजकोषीय घाटा –GDP का 3.2% (2016-17 में – 3.5%)
  6. राजस्व घाटा – 1.9% (2016-17 में – 2.1%)
  7. प्राथमिक घाटा – 0.1% (2016- 17 में – 0.4%)

निष्कर्ष ( Conclusion ):

तकनीकी विशेषज्ञों के साथ एक राजकोषीय परिषद की स्थापना करना उपयोगी होगा और प्रत्येक बजट की राजकोषीय स्थिरता को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। यह एफआरबीएम अधिनियम एक लंबी अवधि के तहत वित्तीय वर्ष के प्रक्षेप वक्र की कल्पना करने के लिए उपयोगी साबित होगा।

इसके परिणाम स्वरूप इससे निश्चित रूप से संसदीय अंतर्दृष्टि की गुणवत्ता में सुधार होगा और इससे एक उपयोगात्मक सार्वजनिक बहस को भी बढ़ावा मिलेगा। आदर्श रूप में यह कहना उचित होगा कि एफआरबीएम अधिनियम को विभिन्न संख्याओं के साथ निर्धारित नहीं करना चाहिए। सरकार से यह कहा जाना चाहिए कि सरकारी कर्ज-जीडीपी अनुपात निहितार्थ और अधिक संख्या के निहितार्थ का एक स्पष्ट विश्लेषण पेश करे।

सरकार से एक अर्थव्यवस्था के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में भी पूछा जाना चाहिए, जैसे- मंहगाई और कम से कम हर पांच साल तक वित्त वर्ष प्रक्षेप वक्र के बारे में पूछा जाना चाहिए। इससे लक्ष्य प्राप्ति के लिए और अधिक स्पष्टता होगी तथा एक स्वस्थ्य बहस भी हो सकेगी।

राजकोषीय नीतियाँ राजकोषीय नीतियाँ राजकोषीय नीतियाँ राजकोषीय नीतियाँ राजकोषीय नीतियाँ राजकोषीय नीतियाँ राजकोषीय नीतियाँ

July 23, 2020

What Is Subsidy – अनुदान क्या है व इसके कार्य???

Subsidy ( अनुदान )

अनुदान

सब्सिडी से तात्पर्य ( subsidy meaning ) – सब्सिडी एक प्रकार की वित्तीय मदद है,जो कि सरकार द्वारा किसानों, उद्योगों, उपभोक्ताओं (मुख्यतः गरीबों) को उपलब्ध करायी जाती है। जिसके कारण वांछित लोगों के लिए जरूरी चीजों के दाम नीचे आ जाते हैं।

or

किसी आर्थिक क्षेत्र, संस्था, व्यवसाय, या व्यक्ति को वित्तीय समर्थन देना है। यह आम तौर पर आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों को लाभ पहुँचाने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से दी जाती है।

यदि किसी वस्तु लागत सीमा से कम पर उपलब्ध करवाते हैं तो अतिरिक्त वित्तीय बोझ को सरकार खुद वहन करती है   उदाहरण के लिए सरकारी शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी, फ़र्टिलाइज़र, इलेक्ट्रिसिटी, किसानों को दिए जाने वाले ॠण, एलपीजी पर सब्सिडी बजट, यह सब्सिडी जिसका बजट में प्रावधान होता है इसे दृश्य सब्सिडी भी कहते हैं

नान बजटीय सब्सिडी जिसका बजट में प्रावधान नहीं होता है अर्थात सब्सिडी के नाम से जाना जाता है

प्रत्यक्ष अनुदान केश उपभोक्ता के खाते में डालते हैं अप्रत्यक्ष अनुदान जिसमें रियायत दरों पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाई जाती है
वर्तमान में सरकार अप्रत्यक्ष अनुदान को प्रत्यक्ष अनुदान में परिवर्तित कर रही है प्रत्यक्ष लाभ स्थानांतरण डीबीटी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण 01 जनवरी 2013 को भारत सरकार द्वारा शुरू की गरीबी विरोधी कार्यक्रम है इस कार्यक्रम के गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को सीधे सब्सिडी हस्तांतरण करना है

सब्सिडी के प्रकार ( Types of Subsidy )

1⃣ Food Subsidy ( खाद्य सब्सिडी )

Food Subsidy में सरकार गरीबों के लिए सस्ते दामों पर खाद्यान्न (चावल, गेहूं, चीनी) इत्यादि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से उपलब्ध कराती है।

2⃣ Farmer Subsidy ( किसान सब्सिडी )

Farmer Subsidy में उर्वरक सब्सिडी, कैश सब्सिडी, ब्याज माफ़ी, वाहन और अन्य उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी आदि शामिल किये जाते हैं।

3⃣ Petroleum Subsidy ( पेट्रोलियम सब्सिडी )

तेल ईंधन सब्सिडी में गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले लोगों को सरकार सस्ते दामों पर मिट्टी का तेल उपलब्ध कराती है। इसके अलावा रसोई गैस, डीजल और पेट्रोल के दामों में भी सब्सिडी सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जाती है।

4⃣ Tax Subsidy ( कर सब्सिडी )

टैक्स सब्सिडी मुख्य रूप से बड़े-बड़े उद्योग घरानों को प्रदान की जाती है। ताकि ये लोग अधिक लागत की हालत में उत्पादन करना बंद ना करें और देश में बेरोजगारी न फैले। कई बार सरकार आयात और निर्यात पर लगने वाले कर में सब्सिडी भी उद्योग घरानों को उपलब्ध कराती है।

5⃣ Religious Subsidy ( धार्मिक सब्सिडी )

यह सब्सिडी मुस्लिम समुदाय के लोगों को हज यात्रा करने के लिए और हिन्दुओं को अमरनाथ यात्रा करने के लिए सरकार द्वारा दी जाती है।अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने हिन्दू लोगों को अमरनाथ यात्रा करने के लिए 1 लाख रुपये तक की आर्थिक सब्सिडी देने की घोषणा की है।

6⃣ Interest Subsidy ( ब्याज सब्सिडी )

ब्याज सब्सिडी के अंतर्गत शिक्षा ऋण पर लगने वाले ब्याज का भुगतान सरकार करती है। साथ ही किसानों और उद्योगपतियों का ब्याज भी सरकार द्वारा माफ़ किया जाता है।

सब्सिडी_के_उद्देश्य

सब्सिडी_का मुख्य उद्देश्य लागत और मूल्य के बीच के अंतर को कम करना होता है। जिसके माध्यम से जरुरतमंदों को लागत से भी कम दामों पर वस्तुएं उपलब्ध करायी जातीं हैं।

सब्सिडी_के कुछ अन्य उद्देश्य

  • 1⃣ देश में उच्च खपत / उत्पादन को प्रेरित करना
  • 2⃣कमजोर वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा करना
  • 3⃣सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण या DBT ( Direct Benefit Transfer )

  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण या डीबीटी भारत सरकार का एक नया तंत्र है जिसके माध्यम से लोगों बैंक खातों में सीधे सब्सिडी हस्तांतरण की जाती है।
  • बैंक खातों में सब्सिडी जमा करने से लीकेज, देरी आदि कमियां खत्म हो जाएँगी।
  • प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण योजना (डीबीटी) का उल्‍लेख पहली बार तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2011-12 में अपने केन्‍द्रीय बजट भाषण में किया था।
  • उस समय उन्‍होंने कहा था कि सरकार केरोसीन, एलपीजी और उर्वरकों के लिए नकद सब्सिडी का सीधे भुगतान करना चाहती है।
  • इन वस्‍तुओं के लिए सीधे नकद भुगतान करने के तौर-तरीकों पर विचार करने के लिए नंदन-नीलेकणी की अध्‍यक्षता में एक कार्यदल बनाया गया, जिसने फरवरी 2012 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण या डीबीटी भारत सरकार का एक नया तंत्र है जिसके माध्यम से लोगों बैंक खातों में सीधे सब्सिडी हस्तांतरण की जाती है।

2017-18 के बजट में सब्सिडी ( 2017-18 budget subsidy )

  • वित्त वर्ष 2016-17 के लिए कुल सब्सिडी बिल 2,32,704.68 करोड़ रुपये था जो कि 2017-18 में 2,40,338.6 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
  • 2017 के बजट प्रस्तावों के मुताबिक, 2017-18 वित्त वर्ष के लिए सब्सिडी का मुख्य खर्च भोजन, पेट्रोलियम और उर्वरक पर होगा।
  • सरकार ने अगले वित्त वर्ष में खाद्यान्न सब्सिडी के लिए 1, 45,338.60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है,जो कि वर्तमान वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में 1,35,172.96 करोड़ रुपये है।
  • खाद्य सब्सिडी बिल अगले वित्त वर्ष में अधिक होने की संभावना है क्योंकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, जिसके तहत सरकार 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को ज्यादा सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्रदान करती है, इसे पूरे देश में नवंबर 2016 से शुरू किया गया है।
  • 2017-18 वित्त वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी को 70,000 करोड़ रुपये पर अपरिवर्तित रखा गया है। जो कि 2015 में 72,437.58 करोड़ रुपये थी।
  • वित्त वर्ष 2017-18 में पेट्रोलियम सब्सिडी को पिछले वर्ष के 27,531.71 करोड़ रुपये से घटाकर इस वित्त वर्ष के लिए घटाकर 25,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस 25,000 करोड़ रुपये में एलपीजी सब्सिडी के लिए 16,076.13 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं और बाकी केरोसिन के लिए है।
  • स्पष्ट है कि वित्त वर्ष 2017-18 में सब्सिडी का कुल बजट 2,40,338.6 करोड़ रुपये पहुँच गया है। उम्मीद की जाती है कि अगले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा और भी ज्यादा हो जायेगा।

कुछ अर्थशास्त्री सब्सिडी के इस बढ़ते बोझ को अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त बोझ मान रहे हैं जो कि ठीक नही है क्योंकि यह अतिरिक्त खर्च देश में सभी वर्गों के कल्याण पर खर्च हो रहा और इससे सबसे ज्यादा फायदा किसानों और समाज के गरीब लोगों को हो रहा है।