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August 14, 2020

क्रिया क्या होती है व कितने प्रकार की होती है What Is Kriya???

क्रिया

क्रिया का अर्थ है करना

क्रिया के बिना कोई वाक्य पूर्ण नहीं होता किसी वाक्य में कर्ता कर्म तथा काल की जानकारी भी क्रियापद के माध्यम से ही होती है

तथा संस्कृत में क्रिया रूप को धातु कहते हैं जैसे :- खाना , नाचना , खेलना , पढना , मारना , पीना , जाना , सोना , लिखना , जागना , रहना , गाना , दौड़ना आदि।

धातु – हिंदीक्रिया पदों का मूल रूप ही धातु है धातु में ना जोड़ने से हिंदी के क्रियापद बनते हैं

परिभाषा – जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध …

August 11, 2020

History of Mevad : मेवाड़ या गुहिल वंश का इतिहास जाने??

Mevad में गुहिल वंश की स्थापना

उधर Mevad में गुहिल वंश की स्थापना 566 ई. में गुहिलादित्य ने की थी।

गुहिलादित्य ने अपनी राजधानी नागदा (उदयपुर) को बनाया था।

गुहिलादित्य के सिक्के सांभर संग्रहालय में स्थित हैं।

गुहिलादित्य का वंशज महेन्द्र द्वितीय का पुत्र कालभोज/मालभोज था।

कालभोज हारित ऋषि की गायें चराता था। हारित ऋषि ने कालभोज को आशिर्वाद व बप्पारावल की उपाधि दी और कहा जा रे जा बप्पा रावल मानमोरी को हरा डाल।

हारित ऋषि एकलिंग जी की उपासना करते थे। एकलिंग को गुहिलवंश के शासक अपना कुलदेवता मानते हैं।

मुहणौत नैणसी ने गुहिलों की 24 शाखाओं का …

August 11, 2020

जयपुर का कच्छवाह वंश के इतिहास के बारे में जाने?

आमेर का कच्छवाह वंश (ढूंढाड़ राज्य)

आमेर के कच्छवाह स्वयं को श्रीराम के पुत्र कुश की सन्तान मानते है, आमेर से प्राप्त शिलालेख में भी इन्हें रघुकुल तिलक  के नाम से जाना गया है।

दूल्हेराय नामक व्यक्ति ने सर्वप्रथम कच्छवाह वंश की स्थापना की थी।

1137 ई. में बड़गूजरों को हराकर दूल्हेराय ने ढूंढाड राज्य को बसाया था,

दूल्हेराय ने सर्वप्रथम दौसा को अपनी राजधानी बनाया

जो इस राज्य की सबसे प्राचीन राजधानी थी,

दूल्हेराय ने इस राजधानी को मीणाओं से प्राप्त किया था.

दूल्हेराय ने रामगढ़ नामक स्थान पर जमुवामाता के मंदिर का निर्माण कराया

 जमूवा माता को कच्छवाह वंश की कुलदेवी के रूप में स्थापित भी किया था,

ढूंढाड़ …

August 11, 2020

History of marwad : मारवाड़ का इतिहास

Marwad के जानकारी के श्रोत

उमा के अनुसार राठौड़ शब्द राष्ट्रकूट से बना है अतः यह राष्ट्रकूट कुटो वंशज थे

गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने इनको बदायूं का राठौड़ों का वंशज बताया है

राज रत्नाकर नामक ग्रंथ में राठौड़ों को हिरण्यकश्यप की संतान बताया है

कर्नल जेम्स टॉड ने इनका संबंध कन्नौज के गढ़वाल वंश से बताया है

जेमस टॉड ने राव सिया को जयचंद गढ़वाल का पोत्र बताया है

जोधपुर राज्य की ख्यात के अनुसार इनको विश्वत मान के पुत्र बृहद वल की संतान माना गया है

रास्ट्रोड वंश महाकाव्य के अनुसार शेत राम का पुत्र और बरदाई सेन का …

August 10, 2020

राजस्थान का एकीकरण-Rajasthan ka Ekikaran

राजस्थान का एकीकरण (Rajasthan ka Ekikaran)

  • राजस्थान का एकीकरण की शुरुआत 18 मार्च 1948 ईसवी से शुरू हुआ जो 1 नवंबर 1956 ईस्वी को समाप्त हुआ। राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पूरा हुआ। इसको पूरा होने में 8 वर्ष 7 महीना 14 दिन का समय लगा। उस समय राजस्थान में 19 रियासत व 3 ठिकाने और 1 केंद्र शासित प्रदेश था।
  • 3 ठिकाने :- 1. नीमराणा (अलवर) 2. लावा (टोंक) 3. कुशलगढ़ (बांसवाड़ा)
  • केंद्र शासित प्रदेश :- 1 (अजमेर मेरवाड़ा)
  • राजस्थान में एकीकरण का श्रेय सरदार बल्लभ भाई पटेल को दिया जाता है।

राजस्थान का एकीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण