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September 4, 2020

September 4, 2020

विधानसभा के कार्य क्या क्या है?? Assembly

विधानसभा

राज्य विधायिका से सम्बंधित अनुच्छेद(अनुच्छेद 168- 213) 

सामान्य अनुच्छेद 

अनू. 168- राज्यों में विधायिकाओं का गठन
अनु. 169- राज्यों में विधान परिषदों का गठन अथवा उन्मूलन
अनु. 170- विधान सभाओं का गठन
अनु. 171- विधान परिषदों का गठन
अनु. 172- राज्य विधायिकाओं का कार्यकाल
अनु. 173- राज्य विधायिका की सदस्यता के लिए योग्यता
अनु. 174- राज्य विधायिका के सत्र, सत्रावसान एवं उनका भंग होना
अनु. 175- राज्यपाल का सदन अथवा सदनों को संबोधित करने तथा उन्हें संदेश देने का अधिकार
अनुच्छेद 176- राज्यपाल द्वारा विशेष संबोधन
अनुच्छेद 177- सदनों से संबंधित मंत्रियों तथा महाधिवक्ता के अधिकार

राज्य विधायिका के पदाधिकारीगण 

अनु. 178- विधानसभा के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष
अनु. 179- विधानसभा अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के पदों से पदत्याग, त्यागपत्र तथा पद से हटाया जाना।
अनु. 180- उपाध्यक्ष अथवा अध्यक्ष का पदभार संभाल रहे व्यक्ति की शक्तियां
अनु. 181- अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष द्वारा उस समय सदन की अध्यक्षता से विरत रहना जबकि उन्हें हटाए जाने संबंधी प्रस्ताव सदन के विचाराधीन हो।
अनु. 182- विधान परिषद के सभापति एवं उपसभापति
अनु. 183- सभापति तथा उपसभापति के पदों से पदत्याग, त्यागपत्र तथा पद से हटाया जाना
अनु. 184- उपसभापति अथवा अन्य व्यक्ति जो कि सभापति का कार्यभार देख रहा हो, को सभापति के रूप में कार्य करने की शक्ति
अनु. 185- सभापति एवं उप-सभापति द्वारा उस समय सदन की अध्यक्षता से विरत रहना जबकि उन्हें हटाए जाने सबंधी प्रस्ताव सदन के विचाराधीन हो।
अनुच्छेद 186- विधानसभा अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष और विधान परिषद सभापति और उपसभापति के वेतन एवं भत्ते
अनुच्छेद 187- राज्य विधायिका का सचिवालय

कार्यवाही का संचालन 

अनुच्छेद 188- सदस्यों द्वारा शपथ ग्रहण
अनुच्छेद 189- सदन में मतदान, सदनों की रिक्तियों एवं कोरम का विचार किए बिना कार्य करने की शक्ति

सदस्यों की अयोग्यता 

अनु. 190- सीटों का रिक्त होना
अनु. 191- सदस्यों के लिए अयोग्यता
अनु. 192- सदस्यों की अयोग्यता संबंधी प्रश्नों पर निर्णय
अनुच्छेद 193- अनुच्छेद 188 के अंतर्गत शपथ ग्रहण के पहले स्थान ग्रहण और मतदान के लिए दंड अथवा उस स्थिति के लिए भी जब की अहर्ता नहीं हो अथवा अयोग्य ठहरा दिया गया हो।

राज्य विधायिकाओं एवं सदस्यों की शक्तियां विशेषाधिकार तथा सुरक्षा 

अनुच्छेद 193- विधायी सदनों तथा इनके सदस्यों एवं समितियों की शक्तियां एवं विशेषाधिकार इत्यादि
अनुच्छेद 193- सदस्यों के वेतन-भत्ते

विधायी प्रकिया 

अनु. 196- विधेयकों की प्रस्तुति एवं उन्हें पारित करने सम्बन्धी प्रावधान
अनु. 197- विधान परिषद के वित्त विधेयकों के अतिरिक्त अन्य विधेयकों के सम्बन्ध में शक्तियों पर प्रतिबंध
अनु. 198- वित्त विधेयकों सम्बन्धी विशेष प्रक्रिया
अनु. 199- वित्त विधेयक की परिभाषा
अनुच्छेद 200- विधेयकों की स्वीकृति
अनुच्छेद 201- बिल विचारार्थ सुरक्षित

वित्तीय मामलों सम्बन्धी प्रक्रिया

अनु. 202- वार्षिक वित्तीय विवरण( Annual financial statement)
अनु. 203- विधायिका में प्राक्कलनों से संबंधित प्रक्रिया
अनु. 204- विनियोग विधेयक(Appropriation bill)
अनु. 205- पूरक, अतिरिक्त अथवा अतिरेक अनुदान
अनु. 206- लेखा, ऋण एवं असाधारण अनुदानों पर मतदान
अनुच्छेद 207- वित्त विधेयक को संबंधी विशेष प्रावधान

 साधारण प्रक्रिया 

अनु. 208- प्रक्रिया सम्बन्धी नियम
अनु. 209- राज्य विधायिका में वित्तीय कार्यवाहियों में सम्बंधित प्रक्रियागत नियम
अनु. 210- विधायिका में प्रयोग की जाने वाली भाषा
अनु. 211- विधायिका में चर्चा पर प्रतिबन्ध
अनु. 212- न्यायालय द्वारा विधायिका की कार्यवाहियों के सम्बन्ध में पूछताछ नही
अनु. 213- विधायिका की अवकाश अवधि में राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति

rajasthan vidhan sabha
RAJASTHAN ASSEMBLY

 राजस्थान विधानसभा ( Rajasthan Assembly )

  • राजस्थान में एक सदनीय विधानमंडल (विधानसभा) है।
  • राज्य की प्रथम विधानसभा के लिए आम चुनाव 4 जनवरी से 24 जनवरी 1952 तक हुए थे।
  • राजस्थान में प्रथम विधानसभा का गठन 29 फरवरी 1952 को हुआ था। राज्य की पहली विधान सभा का चुनाव 1952 में जयनारायण व्यास के नेतृत्व में हुआ इस विधानसभा के लिए 616 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था
  • राजस्थान विधानसभा की प्रथम बैठक 29 मार्च 1952 को राजस्थान की राजधानी *जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में हुई जिसे बाद में विधानसभा भवन का रुप दिया गया।
  • नवीन राजस्थान विधानसभा भवन का लोकार्पण 6 नवंबर 2001 को राष्ट्रपति श्री के. आर. नारायणन ने किया।
  • राज्य विधानसभा को 7 वीं अनुसूची में वर्णित राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।
  • राजस्थान विधानसभा में प्रथम विधानसभा चुनाव में 160 सीटों की संख्या थी।
  • वर्तमान में राजस्थान में 14वीं विधानसभा चल रही है। जिसमें सदस्य संख्या 200 हैं वर्तमान में अध्यक्ष श्री कैलाश मेघवाल व उपाध्यक्ष राव राजेंद्र सिंह है।
  • 14 वीं विधानसभा में महिला सदस्यों की संख्या 27 है
  • सविधान के अनुच्छेद 194 में विधान सभा सदस्यो के विशेषाधिकारो का उल्लेख है

September 4, 2020

उपराष्ट्रपति व इसके कार्य?? Vice President

उपराष्ट्रपति

उप_राष्ट्रपति_ का पद अमेरिका से लिया गया है अनुच्छेद 63 भारत का एक _उप_राष्ट्रपति होगा भारत के वरीयता अनुक्रम में वारंटो ऑफ प्रसिडेंसी में उप_राष्ट्रपति को राष्ट्रपति के बाद दूसरा स्थान दिया गया

अनुच्छेद 64-  उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई पद धारण नहीं करेगा परंतु राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय वह है राज्यसभा का सभापति नहीं होगा और अनुच्छेद-97 के अंतर्गत उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में वेतन भत्ते प्राप्त होते है।

अनुच्छेद 65-  राष्ट्रपति पद की आकस्मिक व्यक्ति या अनुपस्थिति में उप_राष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा. उप_राष्ट्रपति जिस समय कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा उस समय राष्ट्रपति को मिलने वाले विशेषाधिकार और सुविधाएं प्राप्त करेगा

नोट – जून 1960 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की अनुपस्थिति (15 दिवसीय सोवियत संघ की यात्रा तथा जुलाई 1961 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के बीमार होने पर ) तत्कालीन उप_राष्ट्रपति डॉक्टर राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन किया

अनुच्छेद 66 उपराष्ट्रपति का निर्वाचन

(1) उप_राष्ट्रपति का निर्वाचन एक ऐसे निर्वाचक मंडल के माध्यम से किया जाएगा जिसमें संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य भाग लेते हैं तथा निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा किया जाएगा तथा ऐसा मतदान गुप्त होगा

(2) उप राष्ट्रपति संसद या विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा और यदि कोई संसद या विधानमंडल का कोई सदस्य उप राष्ट्रपति निर्वाचित हो जाता है तो यह समझा जायेगा कि उसने उस सदन से अपना स्थान उपराष्ट्रपति के रूप में अपने पद ग्रहण की तारीख से मुक्त कर दिया है

ऐसा कोई व्यक्ति उप राष्ट्रपति निर्वाचन होने का पात्र तभी होगा जब वह है

  • भारत का नागरिक हो
  • उसकी आयु 35 वर्ष हो
  • वह राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो

अनुच्छेद 67 उप राष्ट्रपति की पदावधि

अनुच्छेद-67 के अंतर्गत उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा और इससे पूर्व राष्ट्रपति को संबोधित करके अपना त्यागपत्र सौंप सकता है।

  • (क) उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को संबोधित अपना त्यागपत्र दे सकेगा
  • (ख) उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के संकल्प द्वारा जो राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या के बहुमत से पारित हो और जिस से लोकसभा सहमत हो पद से हटाया जा सकेगा लेकिन ऐसा प्रस्ताव 14 दिन की पूर्व सूचना पर ही लाया जा सकेगा
  • (ग) उपराष्ट्रपति अपना पद कब तक धारण करता रहेगा जब तक कि उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता

अनुच्छेद 68 ( 1) उप राष्ट्रपति की पदावधि पूर्ण होने से पूर्व ही निर्वाचन कर लिया जाएगा

(2) उप राष्ट्रपति की मृत्यु पद त्याग या अन्य आकस्मिकओं में पद रिक्ति की स्थिति में निर्वाचन यथाशीघ्र और किसी भी स्थिति में पद रिक्ति की तारीख से 6 माह के पूर्व कर लिया जाएगा

अनुच्छेद-69 के अंतर्गत उपराष्ट्रपति,राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ ग्रहण करता है। संविधान उपराष्ट्रपति को कोई कर्तव्य नहीं सौंपता है।

अनुच्छेद 70 संसद इस भाग में अन्य आकस्मिकता ों की स्थिति में उपबंध कर सकेगी

नोट-  सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने का कोई उल्लेख संविधान में नहीं है  1969 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर जाकिर हुसैन की मृत्यु हो गई और कार्यवाहक राष्ट्रपति वी वी गिरी (तत्कालीन उपराष्ट्रपति) ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया

दोनों सर्वोच्च संवैधानिक पदों की रिक्ति की स्थिति में अनुच्छेद 70 के तहत संसद में 1969 में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के दोनों पद रिक्त होने की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या इस की अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा

वर्तमान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू कार्यकाल की दृष्टि से 15 तथा व्यक्तिगत दृष्टि से 13वें उपराष्ट्रपति हैं

दो बार उपराष्ट्रपति बनने वाले व्यक्ति

  • एस राधाकृष्णन 1952 से 1966
  • मोहम्मद हामिद अंसारी 2007 से 2017

उपराष्ट्रपति के लिए 20 प्रस्तावक व 20 अनुमोदक होने चाहिए, राष्ट्रपति पद के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को जमानत राशि के रूप में ₹15000 आरबीआई में जमा करवाने होते हैं

भारत के उपराष्ट्रपति

ट्रिक राजा गिरी पाठक बी हिवेश के कृष्ण भैरो से हावे थे

  • 1 डॉ राधाकृष्णन 1952- 62 ( प्रथम उपराष्ट्रपति दो बार चुने )
  • 2 डॉक्टर जाकिर हुसैन 1962 से 67
  • 3 वी वी गिरी 1967 -69
  • 4 GS पाठक 1969 से 74
  • 5 बी डी जत्ती 1974 से 79
  • 6 मोहम्मद हिदायतुल्लाह 1979 से 84
  • 7 विकेट रमन 1984 से 89
  • 8 शंकर दयाल शर्मा 89 -92
  • 9 के आर नारायणन 92-97
  • 10 कृष्णकांत 1997- 2002  ( पद पर रहते हुए मरने वाले )
  • 11 भैरोंसिंह शेखावत 2002 से 2007
  • 12 हामिद अंसारी 2007 से 2017  ( दो बार चुने )
  • 13 वेंकैया नायडू 5 अगस्त 2017  लगातार

September 4, 2020

मूल कर्तव्य क्या है?? What is Original Duties??

मूल कर्तव्य

मूल कर्त्तव्य पहले से संविधान में नहीं थे इन्हें संविधान के 42nd संशोधन द्वारा जोड़ा गया है भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्त्तवय होगा कि वह-

  • (क) संविधान का पालन करे और उस के आदर्शों, राष्ट्रध्वज और राष्ट्र्गान क आदर करे
  • (ख)स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखे व उन क पालन करे
  • (ग)भारत की प्रभुता एकता व अखंड़ता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें
  • (घ)देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् सेवा करें।
  • (ङ)भारत के सभी लोगों समरसता और सम्मान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओंक त्याग करें जो महिलाओं के के सम्मान के विरुद्ध हों।
  • (च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा क महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें
  • (छ)प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।
  • (ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें *
  • (झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें
  • (ञ)व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों सतत उत्कर्ष की ओर बढ़्ने क प्रयास करें जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।
  • (ट) यदि आप् माता-पिता या संरक्षक हैं तो छह वर्ष से चौदह वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।

भारत सरकार ने मौलिक कर्तव्यों के क्रियांवयन हेतु जे.एस. वर्मा समिति का गठन किया  समिति ने अपनी प्रस्तुत रिपोर्ट में मौलिक कर्तव्यों के क्रियान्वयन हेतु प्रचार प्रसार पर बल दिया है

वर्मा समिति की प्रमुख सिफारिशें

जे.एस.वर्मा समिति( 1999) ने कुछ मूल्य कर्तव्यों की पहचान और  क्रियान्वयन के लिए कानूनी प्रावधानों को लागू करने की सिफारिश की है

  • सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 जाति एवं धर्म से संबंधित अपराधों पर दंड की व्यवस्था करता है
  • वन जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 दुर्लभ एवं लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाता है
  • राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 यह भारत के संविधान राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अनादर का निवारण करता है
  • वन अधिनियम 1980 वनों की अनियंत्रित कटाई एवं वन भूमि के गैर वन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल पर रोक लगाता है
  • भारतीय दंड सहिंता( IPC)  घोषणा करती है कि राष्ट्रीय अखंडता के लिए पूर्वाग्रह से प्रेरित अभ्यारोपण और अभिकथन दंडात्मक अपराध होगा

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