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September 1, 2020

September 1, 2020

राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग National Child Rights Commission

राष्ट्रीय बाल अधिकार_आयोग

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग बाल अधिकार संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसी- पीसीआर) सार्व भौमिकता और बाल अधिकारों की पवित्रता के सिद्धांत पर जोर देता है

और देश की नीतियों संबंधित सभी बच्चे में तात्कालिकता के स्वर को पहचानता है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एन- सी- पी- सी- आर-) की स्थापना

संसद के एक अधिनियम (दिसम्बर 2005) बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के अंतर्गत मार्च 2007 में की गई थी

आयोग के लिए, 0 से 18 वर्ष आयु समूह के सभी बच्चों की सुरक्षा को समान महत्व का है। आयोग के लिए, बच्चे को भी आनंद मिलता है हर सही पारस्परिक रूप से मजबूत और दूसरे पर आश्रित के रूप में देखा जाता है। इसलिए अधिकार के उन्नयन का मुद्दा ही नहीं उठता।

उसे 18 साल में उसके सभी अधिकारों का आनंद ले रहे एक बच्चे को वह पैदा होता है समय से उसके सारे हकों के लिए उपयोग पर निर्भर है।इस प्रकार की नीतियों उपायों सभी चरणों में महत्व ग्रहण. आयोग के लिए, बच्चों के सभी अधिकार बराबर महत्व के हैं। 

जनादेश बाल मजदूरी उन्मूलन हेतु आयोग की रणनीति व सिफारिशें शारीरिक दंड पर प्रतिबंध अधिनियम के अंतर्गत आयोग के निम्नलिखित दायित्व हैं -:

(क) किसी विधि के अधीन बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए सुझाये गये उपायों की निगरानी व जांच करना जो उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए वर्तमान केंद्र सरकार को सुझाव देते हैं|

(ख) उन सभी कारकों की जांच करना जो आतंकवाद, सांप्रदायिक हिंसा, दंगों, प्राकृतिक आपदा, घरेलू हिंसा, एचआईवी /एड्स, तस्करी, दुर्व्यवहार, यातना और शोषण, वेश्यावृत्ति और अश्लील साहित्य से प्रभावित बच्चों के खुशी के अधिकार व अवसर को कम करती है और उसके लिए उपचारात्मक उपायों का सुझाव देना|

(ग) ऐसे संकटग्रस्त, वंचित और हाशिये पर खड़े बच्चे जो बिना परिवार के रहते हों और कैदियों के बच्चों से संबंधित मामलों पर विचार करना और उसके लिए उपचारात्मक उपायों का सुझाव देना|

(घ) समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बाल अधिकार साक्षरता का प्रसार करना और बच्चों के लिए उपलब्ध सुरक्षा उपाय के बारे में जागरूकता फैलाना|

(ङ) केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी सहित किसी भी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक संस्थान जहां बच्चों को हिरासत में या उपचार के उद्देश्य से या सुधार व संरक्षण के लिए रखा गया हो, वैसे बाल सुधार गृह या किसी अन्य स्थान पर जहाँ बच्चों का निवास हो या उससे जुड़ी संस्था का निरीक्षण करना।

(च) बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की जाँच कर ऐसे मामलों में कार्यवाही प्रारम्भ करना और निम्न मामलों में स्वतः संज्ञान लेना, जहाँ :

  • बाल अधिकारों का उल्लंघन व उपेक्षा होता हो
  • बच्चों के विकास और संरक्षण के लिए बनाये गये कानून का क्रियान्वयन नहीं किया गया हो बच्चों के कल्याण और उसे राहत प्रदान करने के लिए दिये गये नीति निर्णयों , दिशा-निर्देशों या निर्देश का अनुपालन नहीं किया जाता हो जहाँ ऐसे मामले पूर्ण प्राधिकार के साथ उठाये गये हों
  • बाल अधिकार को प्रभावी बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संधियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय उपकरणों की आवधिक समीक्षा और मौजूदा नीतियों, कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों का अध्ययन कर बच्चों के हित में उसे प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के लिए सिफारिश करना
  • बाल अधिकार पर बने अभिसमयों के अनुपालन का मूल्यांकन करने के लिए बाल अधिकार से जुड़े मौजूदा कानून, नीति एवं प्रचलन या व्यवहार का विश्लेषण व मूल्यांकन करना और नीति के किसी भी पहलू पर जाँच कर प्रतिवेदन देना जो बच्चों को प्रभावित कर रहा हो और उसके समाधान के लिए नये नियम बनाने का सुक्षाव देना
  • सरकारी विभागों और संस्थाओं में कार्य के दौरान व स्थल पर बच्चों के विचारों के सम्मान को बढ़ावा देना और उसे गंभीरता से लेना
  • बाल अधिकारों के बारे में सूचना उत्पन्न करना और उसका प्रचार-प्रसार करना
  • बच्चों से जुड़े आँकड़े का विश्लेषण व संकलन करना
  • बच्चों के स्कूली पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और बच्चों की देखभाल करने वाले प्रशिक्षण कर्मियों के प्रशिक्षण पुस्तिका में बाल अधिकार को बढ़ावा देना और उसे शामिल करना

September 1, 2020

विधि आयोग Law commission

विधि आयोग

भारत का विधि आयोग एक गैर-वैधानिक परामर्शदायी निकाय है। इसका गठन समय-समय पर केंद्र सरकार के आदेश द्वारा एक निश्चित कार्यकाल के लिए किया जाता है। भारत के प्रथम विधि आयोग का गठन 1834 ई. में लार्ड मैकाले की अध्यक्षता में तत्कालीन वायसराय लार्ड विलियम बैंटिक ने की थी।

स्वतंत्रता पश्चात् सन् 1955 में एम.सी. सीतलवाड़ की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग का गठन किया गया। ब्रिटिश शासन के दौरान 19वीं शताब्दी में 4 विधि आयोग गठित किए गए थे।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद-372 यह प्रावधान करता है कि संविधान से पहले के कानून तब तक लागू बने रहेंगे जब तक कि उन्हें संशोधित या निरसित न कर दिया जाए। विधि आयोग का मूल कार्य कानूनों का समेकन और संहिता करण के उद्देश्य से विधायी उपायों की अनुशंसा करना है।

 विधि आयोग की संरचना प्रत्येक आयोग के लिए भिन्न-भिन्न है।  इस आयोग में एक अध्यक्ष, कुछ पूर्णकालिक सदस्य और एक सदस्य सचिव होता है। इसके अध्यक्ष और पूर्णकालिक सदस्य उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश, वैधानिक विशेषज्ञ या किसी भारतीय विश्वविद्यालय में कानून के प्रोफेसर होते हैं।

20 वां विधि_आयोग उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश श्री डी. के. जैन भारत के 20वें विधि_आयोग की अध्यक्ष है । 20वां विधि_आयोग 1 सितंबर, 2012 को एक सरकारी आदेश के जरिए गठित किया गया था।

15 मार्च, 2016 को केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति डॉ. बलवीर सिंह चौहान को 21 वें विधि_आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया यह पद सितंबर, 2015 से रिक्त था इस समय वह कावेरी नदी जल विवाद न्यायाधिकरण के अध्यक्ष हैं।  वे मई, 2009 से जुलाई, 2014 के मध्य उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश रहे।

आयोग का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा और यह 31 अगस्त,2015 को समाप्त होगा। 20वें विधि_आयोग के कार्यपुराने कानूनों की समीक्षा करना या रद्द करना

ऐसे कानूनों का पता लगाना जिनकी अब आवश्यकता नहीं है अथवा प्रासंगिक नहीं रहे और जिन्हें तत्काल रद्द किया जा सकता है।उन कानूनों का पता लगाना जो आर्थिक उदारीकरण की वर्तमान परिस्थितियों से सुसंगत नहीं हैं और उनमें परिवर्तन की आवश्यकता है।

उन कानूनों का पता लगाना जिनमें अन्यथा परिवर्तन अथवा संशोधन की आवश्यकता है और उनके संशोधन हेतु सुझाव देना। विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के विशेज्ञ दलों द्वारा सुझाव/संशोधन के लिए किए गए सुझावों पर व्यापक दृष्टि से विचार करना, ताकि उनमें समन्वय स्थापित किया जा सके।

एक से अधिक मंत्रालयों/विभागों के कामकाज पर प्रभाव डालने वाले कानूनों के बारे में मंत्रालयों विभागों द्वारा की गई टिप्पणियों पर विचार करना। कानून के क्षेत्र में नागरिकों की शिकायतों के शीघ्र निपटारे के लिए उपयुक्त उपाय सुझाना।

September 1, 2020

अनंत चतुर्दशी गणेश विसर्जन के अलावा भगवान अनंत की पूजा

वर्ष में 24 चतुर्दशी होती है। मूलत: तीन चतुर्दशियों का महत्व है- अनंत, नरक और बैकुण्ठ। अनंत चतुर्दशी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में आती है। डोल ग्यारस के बाद अनंत चतुर्दशी और उसके बाद पूर्णिमा।

अनंत चतुर्दशी


विष्णु की पूजा

परंतु अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान अनंत (विष्णु) की पूजा का विधान होता है। इस दिन अनंत सूत्र बांधने का विशेष महत्व होता है। इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के बाद बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। भगवान विष्णु के सेवक भगवान शेषनाग का नाम अनंत है। अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है।

श्रीकृष्ण बताया था इसका महत्व

भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों द्वारा जुए में अपना राजपाट हार जाने के बाद श्रीकृष्ण से पूछा था कि दोबारा राजपाट प्राप्त हो और इस कष्ट से छुटकारा मिले इसका उपाय बताएं तो श्रीकृष्‍ण ने उन्हें सपरिवार सहित अनंत चतुर्दशी का व्रत बताया था।

 उन्होंने कहा था कि चतुर्मास में भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर अनंत शयन में रहते हैं। अनंत भगवान ने ही वामन अवतार में दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया था। इनके ना तो आदि का पता है न अंत का इसलिए भी यह अनंत कहलाते हैं अत: इनके पूजन से आपके सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे।

कैसे करें पूजा

प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल पर कलश स्थापित किया जाता है। कलश पर अष्टदल कमल की तरह बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करने के पश्चात एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र तैयार करें, इसमें चौदह गांठें लगी होनी चाहिए। इसे भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखकर भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की षोडशोपचार विधि से पूजा शुरू करें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें। इसके बाद विधिवत पूजन के बाद अनंत सूत्र को बाजू में बांध लें। पुरुष दांये हाथ में और महिलाएं बांये हाथ में बांधे। 

अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।। 

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है। 

 गणेश प्रतीमा विसर्जन

अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है। इस दिन गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। इस बार यह तिथि 1 सितंबर 2020 को पड़ रही है। गणेश चतुर्थी से लेकर दस दिनों तक गणेशजी का पूजन किया जाता है और ग्याहरवें दिन पूरे विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाता है।  

चतुर्दशी तिथि

चतुर्दशी के देवता हैं शंकर। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने और व्रत रखने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर बहुत से पुत्रों एवं प्रभूत धन से संपन्न हो जाता है। यह उग्र अर्थात आक्रामकता देने वाली तिथि हैं। चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। यह रिक्ता संज्ञक है एवं इसे क्रूरा भी कहते हैं। इसीलिए इसमें समस्त शुभ कार्य वर्जित है। इसकी दिशा पश्‍चिम है। यह तिथि चन्द्रमा ग्रह की जन्म तिथि भी है। चतुर्दशी तिथि को मूल रूप से शिवरात्रि होती है, जिसे मासिक शिवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का व्रत और पूजन करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. जीवन में आने वाले बुरे समय और विपत्तियों को भी यह दूर करता है।

September 1, 2020

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो Central Investigation Bureau

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो

सी.बी.आई. (CBI ) की स्थापना 1963 में गृह मंत्रालय के एक संकल्प द्वारा हुई थी बाद में इसे कार्मिक मंत्रालय को स्थानांतरित कर दिया गया और उसकी स्थिति वह एक सम्बल कार्यालय के रूप में रही बाद में स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट का केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो में विलय कर दिया गया।

सी.बी.आई.की स्थापना की अनुशंसा भरष्टाचार की रोकथाम में लिए गठित संथानम आयोग(1962-64) ने की थी ,सी बी आई कोई वैधानिक संस्था नही है इसे शक्ति दिल्ली विशेष पुलिस अधिष्ठान अधिनियम,1946 से मिलती है। सी.बी.आई.केंद्र सरकार की मुख्य अनुसन्धान एजेंसी है

आदर्श वाक्य,उद्देश्य एवं दृष्टि :-

आदर्श वाक्य :- उद्यम, निष्पक्षता एवं ईमानदारी।

उद्देश्य :- संविधान तथा देश के कानून की रक्षा करना और इसके लिए गहराई से अनुसन्धान करना तथा अपराधों के सफल विफल अभियोग दायर करना; पुलिस बल नेतृत्व व दिशा निर्देश देना तथा कानून लागू करने में अंतर-राज्यीय तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए नोडल एजेंशी के रूप में कार्य करना

दृष्टि :- अपने आदर्श वाक्य ,उद्देश्य तथा व्यावसायिक्तता की जरूरत,पारदर्शीता ,परिवर्तन के प्रति अनुकूल तथा अपनी कार्यप्रणाली में विज्ञान और प्रोधोगिकी के उपयोग के द्वारा सी.बी.आई.अपने प्रयशो को निम्नलिखित पर केंद्रित करेगी

  • सार्वजनिक जीवन मे भरष्टाचार से संघर्ष,आर्थिक एवं हिंसक अपराधों से सविस्तार अनुसन्धान एवं अभियोग द्वारा कमी लाना
  • साइबर तथा उच्च-प्रोधोगिकी अपराधों से लड़ने में सहायता करना
  • राष्ट्रीय व अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर संघटित अपराध लडाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना आदि

सी.बी.आई.का संघटन ( Organization of CBI )

वर्तमान में (2013) सी.बी.आई. की निम्नलिखित शाखाएं है

  1. भरष्टाचार निरोधक शाखा
  2. आर्थिक अपराध शाखा
  3. विशेष अपराध शाखा
  4. नीतिगत एवं अंतराष्ट्रीय पुलिस सहयोग शाखा
  5. प्रशासनिक शाखा
  6. अभियोग निदेशालय
  7. केंद्रीय-फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला