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May 22, 2020

May 22, 2020

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार क्या है जाने ?

ग्रामीण रोजगार (Rural Employment)

जनता शासन के पतन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में http://रोजगार वृद्धि तथा गरीबी निवारण का यह कार्यक्रम काम के बदले अनाज की कमियों को दूर करने के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी ने शुरू किया

छठी योजना में 1834 करार रुपए व्यय कर 177.5 करोड़ मानव दिवसों का रोजगार बढ़ाया गया

सातवीं योजना के 4 वर्षों 1986 से 89 में 3600 करोड रुपए व्यय कर लगभग 148 करोड मानव दिवसों का http://रोजगार सृजन किया गया

जो लक्ष्य से अधिक था ग्रामीण क्षेत्रों में

वृक्षारोपण,तालाब,पेयजल व सिंचाई के कुआं भूमि व जल संरक्षण

नई भूमि को खेती के लायक बनाने सड़क व स्कूल निर्माण आदि कार्यक्रम संपन्न किए गए

अप्रैल 1989 से इस कार्यक्रम तथा RLEGP कार्यक्रम को जवाहर रोजगार योजना में मिला दिया गया

ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम (Rural Landless Employment Guarantee Programme-RLEGP

यह कार्यक्रम 1983 से प्रारंभ किया गया था इसके मुख्य उद्देश्य इस प्रकार रखे गए 1 भूमिहीनों के लिए http://रोजगार के अवसर बढ़ाना

ताकि प्रत्येक भूमिहीन श्रमिक परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को वर्ष में 100 दिन तक काम मिल सके 2

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करने के लिए टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना

यह कार्यक्रम पूर्णतया केंद्रीय सहायता प्राप्त कार्यक्रम था 1985 से 89 तक के 4 वर्षों में इस कार्य पर 2412 करोड रुपए व्यय हुए और

कुल 115 करोड मानव दिवस http://रोजगार उत्पन्न किया गया

जवाहर ग्राम समृद्धि योजना ( Jawahar Smridhi Yojana- JGSY)

  • जवाहर रोजगार योजना अप्रैल 1989 से प्रारंभ की गई तथा
  • जवाहर ग्राम समृद्धि योजना नवीन रूप से एक अप्रैल 1999 से प्रारंभ की गई सितंबर 2001 से इसे संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में मिला दिया
  • गया इस योजना का मौलिक उद्देश्य गांव में मांग आधारित सामुदायिक असरचना का सृजन करना है
  • जिसमें टिकाऊ सामुदायिक एवं सामाजिक परिसंपत्तियों का सृजन सम्मिलित है
  • इसका प्रथम उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगार एवं अल्प बेरोजगार व्यक्तियों के लिए लाभकारी रोजगार अवसरों का सृजन करना भी है
  • इस योजना को दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़ समग्र देश के सभी ग्राम पंचायतों में लागू किया गया।

सूखा राहत क्षेत्र कार्यक्रम (Drought Prone Area Programme- DPAP)

  • सूखे की संभावना वाले चुनिंदा क्षेत्रों में यह राष्ट्रीय कार्यक्रम 1973 में प्रारंभ किया गया
  • कार्यक्रम का उद्देश्य इन क्षेत्रों में भूमि जल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का अनुकूलतम विकास करके पर्यावरण संतुलन को बहाल करना है
  • यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहा है
  • योजना आयोग के सदस्य डॉक्टर जयंत पाटिल की अध्यक्षता में सूखा क्षेत्रों के लिए 25 वर्षीय भावी योजना तैयार करने के निमित्त
  • एक उच्च शक्ति प्राप्त समिति का गठन किया गया

न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम (Minimum Needs Programme-MNP)

  • यह कार्यक्रम भी अप्रत्यक्ष रूप से गरीबी दूर करने में सहायक है
  • क्योंकि इसके अंतर्गत ग्रामीण सड़कें पेयजल विद्युतीकरण आदि कार्य संपादन करने में गरीबों को रोजगार एवं आय के अवसर मिलते हैं

20 सूत्री कार्यक्रम (20 Point Programme- TPD)

  • ”गरीबी हटाओ” नारे के अंतर्गत वर्ष 1975 से 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा है
  • यह भी गरीबी निवारण का एक महत्वपूर्ण अंग है और इसमें गरीबी मिटाने के कई तत्वों का समावेश है

नेहरू रोजगार योजना (Nehru Rojgar Yojana- NRY)

  • नगरीय क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन की इस योजना का श्रीगणेश अक्टूबर 1989 में किया गया
  • इस योजना को संशोधित कर इसमें प्रशिक्षण रोजगार तथा गरीबों को लाभान्वित करने की व्यवस्था है
  • इसके कार्यक्रमों में जहां 1991 से 92 में 1.59 लाख गरीब परिवारों को लाभान्वित किया गया
  • वहां 1994 से 95 में 1.25 लाख गरीब परिवार लाभान्वित हुए आठवीं योजना में लगभग 615 लाख मानव दिवसों का रोजगार दिया गया
  • इस योजना को अब “स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना” में मिला दिया गया

शिक्षित बेरोजगार युवक स्वरोजगार योजना ( Scheme of self Employment for Education Unemployment Youth- SEEUY)

  • ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बेरोजगार शिक्षित युवाओं को लाभप्रद स्वरोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना 1983 से 84 में लागू की गई
  • इस योजना के अंतर्गत बैंकों से ऋण उपलब्ध कराकर बेरोजगारी युवकों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाता है
  • बैंक ऋण का 25% केंद्र सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है
  • 1994 से 95 से ही इस योजना को नई प्रधानमंत्री रोजगार योजना में मिला दिया गया

प्रधानमंत्री रोजगार योजना (Prime Minster Rojgar Yojana- PMRY)

  • यह योजना गरीबी निवारण तथा स्वरोजगार की योजना है
  • जो 1993-94 से लागू की गई 1993-94 में इस योजना के अंतर्गत 32 हजार लोगों को लाभान्वित किया गया
  • जबकि आठवीं योजना के अंत तक लगभग 10 लाख शिक्षित बेरोजगार युवकों को रोजगार प्रदान करने का लक्ष्य था
  • 1997-98 में 3.1 लाख को रोजगार दिया गया
  • इस योजना में इसी वर्ष से चालू शिक्षित बेरोजगार युवक स्वरोजगार योजना को भी समन्वित कर लिया गया
  • इसमें 18-35 वर्ष के आयु वर्ग के प्रत्याशियों को प्रोजेक्ट लागत के 5% के साधन स्वयं जुटाने होंगे
  • जबकि केंद्रीय सरकार को अनुदान 15% तथा अधिकतम 7500 रुपए तथा बैंक ऋण की राशि अधिकतम एक लाख रुपए तक हो सकेगी

रोजगार आश्वासन योजना (Employment Assurance Scheme- EAS)

  • यह योजना भी 1993 94 में घोषित की गई है तथा इसे देश के 1752 पिछड़े विकास खंडों में लागू किया गया था
  • अब इसमें 3206 पिछड़े विकासखंड शामिल हैं
  • इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के रोजगार चाहने वाले गरीबों को वर्ष में प्रति व्यक्ति 100 दिनों का एक कुशल श्रम रोजगार प्रदान करने का प्रावधान है
  • इस योजना की वित्त व्यवस्था केंद्र तथा राज्य सरकारें 80:20 प्रतिशत के अनुपात में करेंगी।

स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना ( Swarna Jayanti Sahari Rojgar Yojana- SJSRY)

  • स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती वर्ष में केंद्र सरकार ने शहरी क्षेत्रों में निर्धनता निवारण की एक नई योजना प्रारंभ की गई।
  • स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के नाम से प्रारंभ की गई यह योजना 1 दिसंबर 1997 से लागू की गई ।
  • इस योजना में शहरी क्षेत्रों में पहले से कार्यान्वित की जा रही तीन योजनाओं नेहरू रोजगार योजना
  • निर्धनों के लिए शहरी बुनियादी सेवाएं तथा प्रधानमंत्री की समन्वित शहरी गरीबी उन्मूलन योजना को शामिल किया गया।
  • इन योजनाओं के तहत चल रहे कार्यों का 30 नवंबर 1997 तक पूरा करने के निर्देश सभी राज्यों को दे दिए गए थे ।
  • नई प्रारंभ की गई स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना का उद्देश्य शहरी निर्धनों को स्वरोजगार
  • उपक्रम स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान तथा से वेतन रोजगार सृजन हेतु उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण करना है ।
  • स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के लिए धन की व्यवस्था केंद्र तथा राज्यों के मध्य 75:25 के अनुपात में की गई इस योजना की दो विशेषता में है

(A) शहरी स्वरोजगार कार्यक्रम (Urban Self Employment Programme-YSEP)

(B) शहरी मजदूरी रोजगार कार्यक्रम (Urban Employment Programme – YSEP)-इसके तीन अलग-अलग भाग हैं

१ प्रत्येक शहरी गरीब लाभार्थी को लाभप्रद स्वरोजगार उद्यम लगाने के लिए सहायता

  • २ शहरी गरीब महिलाओं के समूह को लाभप्रद स्वरोजगार उद्यम लगाने के लिए सहायता देना
  • इस योजना को शहरी क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की विकास योजना कहा जाता है
  • ३ लाभार्थियों संभावित लाभार्थियों और शहरी रोजगार कार्यक्रम से संबंध अन्य व्यक्तियों को व्यवसायिक और उद्यम मूलक कौशल के उन्नयन के लिए प्रशिक्षण देना
  • यह कार्यक्रम भारत के लगभग सभी शहरी नगरों पर लागू होगा तथा
  • इसे शहरी गरीब समूह पर विशेष ध्यान देते हुए समग्र नगर आधार पर कार्यान्वित किया जाएगा

काम के बदले अनाज कार्यक्रम (Food for Work Programme)

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जनवरी 2001 में सूखा प्रभावित राज्यों के ग्रामीण इलाकों में काम के बदले अनाज कार्यक्रम शुरू किया

यह कार्यक्रम रोजगार गारंटी योजना के तहत शुरू किया गया बाद में इस योजना का विस्तार कर इसके केरल और बिहार के बाढ़ भारी वर्षा प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया गया

इस कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त संसाधन के तौर पर अनाज गेहूं और चावल के निशुल्क आवंटन की व्यवस्था है

1 अप्रैल 2002 से कार्यक्रम को समाप्त कर दिया गया था

किंतु इसे संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के विशेष घटक के तौर वर्ष 2002-03 में जारी रखा गया

ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (Rural Employment Generation Programme)

1955 में ग्रामीण इलाकों एवं छोटे शहरों में स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से शुरू किया गया

कार्यक्रम खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है

आरंभ से 31 मई 2004 तक 1 दशमलव 86 लाख परियोजनाओं के वित्तपोषण से 22.75 लाख नौकरी अवसर राजित किए जा चुके हैं

10वीं योजना में 25 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य है

इंदिरा आवास योजना

1999-2000 में शुरू की गई है योजना गरीबों के लिए मुफ्त में मकानों के निर्माण की प्रमुख योजना

वाल्मिकी अंबेडकर आवास योजना

दिसंबर 2001 में शुरू की गई है योजना गंदी बस्तियों में रहने वालों के लिए घरों के निर्माण और उन्नयन को शो साध्य बनाती है

31 दिसंबर 2004 तक भारत सरकार ने 753 करोड रुपए और इतनी ही राशि राज्य सरकारों द्वारा वह कर 3.5 लाख आवासों एवं 49.3 हजार टॉयलेट सीटों का निर्माण किया गया

रोजगार

अंत्योदय अन्न योजना

दिसंबर 2000 में शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत

गरीबी परिवार को ₹2 प्रति किलोग्राम गेहूं तथा ₹3 प्रति किलोग्राम दर पर चावल अत्यधिक सब्सिडी प्राप्त दर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है

खाद्यान्न की मात्रा जो प्रारंभ में 25 किलोग्राम प्रति महा थी उसे एक अप्रैल 2002 से बढ़ाकर 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह कर दिया है

आरंभ में यह योजना एक करोड़ बीपीएल परिवारों के लिए थी

जून 2003 में इसका विस्तार कर इसे 50 लाख बीपीएल परिवार और शामिल किए

1 अगस्त 2004 से 50 लाख बीपीएल परिवार और शामिल किए जाने से अब

यह योजना दो करोड़ बीपीएल परिवारों को लाभान्वित कर रही है

प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY)

  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्थिक सुधारों के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक
  • तथा आर्थिक आधारभूत ढांचे के पांच तत्वों की पहचान की गई है वह मुख्यतः हैं
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • पेयजल
  • आवास
  • सड़कें

इस योजना के तहत 1 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा

2 ग्रामीण आवास कार्यक्रम को शामिल किया गया है

ग्रामीण सड़कों द्वारा गांव को जोड़ने का उद्देश्य ने केवल देश के ग्रामीण विकास में सहायक है

बल्कि इसे गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम में एक प्रभावी घटक स्वीकार किया गया है

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना 25 दिसंबर 2000 से प्रारंभ की गई

May 22, 2020

भारत में निर्धनता के प्रमुख लक्षण Main Cause of Poverty in India

निर्धनता (Poverty)

देश में भारतीय योजना आयोग के मतानुसार निर्धनता के दो कारण अल्प विकास एवं ऐसा मानता है

कुछ लोग निर्धनता के कारणों में बेरोजगारी निम्न उत्पादकता जनसंख्या में विस्फोटक बृद्धि प्राकृतिक प्रकोप पूंजी की कमी प्रेसिकट उत्पादन में धीमी गति से वृद्धि निर्धनों द्वारा खाद्यान्नों के लिए दी जाने वाली कीमतों में वृद्धि कार्यशील जूतों का असमान वितरण अत्यधिक सामाजिक पिछड़ापन तथा सामाजिक बाधाओं का समावेश करते हैं

संक्षेप में भारत में व्यापक गरीबी के प्रमुख कारण इस प्रकार है

1 अल्प विकास

  1. भारत प्राकृतिक साधनों की दृष्टि से संपन्न है किंतु अल्प विकास के कारण उन साधनों का पर्याप्त विदोहन ने होने से उत्पादन आए रोजगार तथा उपभोग का स्तर बहुत नीचा है
  2. और गरीबी का बोलबाला है स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद योजनाबद्ध विकास से भारत स्वयं इस्फुर्ट अर्थव्यवस्था में पहुंच गया है
  3. फिर भी विकास की गति जनसंख्या की विस्फोटक वृद्धि के कारण धीमी है

2 आर्थिक असमानता

  1. भारत में व्याप्त निर्धनता के लिए आर्थिक असमानता भी देश में महत्वपूर्ण कारण है
  2. देश में जो भी विकास हुआ उसका अधिकांश लाभ समृद्ध वर्ग को मिला है
  3. धनी और निर्धनों के मध्य खाई और गहरी हो गई है यद्यपि पिछले कुछ दशकों से 20 सूत्री कार्यक्रम पिछड़े को पहले समन्वित ग्रामीण विकास कार्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास कार्यक्रमों और गरीबी निवारण कार्यक्रमों से आए की निर्धनता ऐसा मानता को कम करके निर्धनता को कम किया गया है
  4. फिर भी धन एवं संपत्ति की समानता अवसर की समानता प्रादेशिक एवं क्षेत्रीय असमानता में निर्धनता बढ़ाने में सहयोग दिया है

3 जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि

  1. भारत की जनसंख्या में 2.5% वार्षिक वृद्धि दर से विस्फोटक वृद्धि ने विकास को बहा दिया है
  2. जनसंख्या में इतनी ऊंची दर से वृद्धि और गरीबों के बड़े परिवार ने उन्हें और अधिक गरीब बनाया है
  3. प्रति व्यक्ति आय एवं उपभोग स्तर बहुत नीचा है यही कारण है
  4. कि लोगों को न्यूनतम जीवन स्तर भी उपलब्ध नहीं हो पाने से वह निर्धनता की रेखा के नीचे जीवन जी रहे हैं

4 बेरोजगारी एवं अर्द्ध बेकारी

  1. भारत में भी बेरोजगारी एवं अर्ध बेकारी प्रमुख कारण है
  2. योजनाबद्ध विकास के अंतर्गत नए रोजगार के लगभग 21.5 करोड अतिरिक्त अवसर बढ़ने के बावजूद देश में निरंतर बढ़ती बेकारी एवं अर्ध बेकारी ने गरीबी को बढ़ाया है
  3. जहां पहली योजना के अंत में रोजगार ओं की संख्या 53लाख थी वहां पांचवी योजना के अंत में बेरोजगारों की संख्या 2.94 करोड़ पहुंच गई
  4. 2000-01 के अंत तक पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या भी लगभग चार करोड़ पहुंच गई थी
  5. 2005-06 तक इसके बढ़कर 6.5 करोड़ होने की अनुमान है ऐसी स्थिति में निर्धनता का बढ़ना एवं बने रहना स्वाभाविक है

5 उत्पादन के निम्न प्रौद्योगिकी

  1. भारत में उत्पादन की परंपरागत और निम्न प्रौद्योगिकी का वर्चस्व भी निर्धनता के लिए उत्तरदाई है
  2. नवीन एवं आधुनिकतम तकनीक के अभाव में उत्पादन और आय में धीमी गति से वृद्धि लोगों को निर्धन बनाए रखने के लिए काफी है
  3. यद्यपि अब योजनाबद्ध विकास के अंतर्गत आधुनिक प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया जा रहा है
  4. किंतु पूंजी विनियोग में कमी श्रमिकों के विरोध तथा विदेशी विनिमय संकट के साथ-साथ कुशल एवं प्रशिक्षक श्रम की कमी इसमें बाधा है

6 पूंजी निर्माण की धीमी गति

  1. देश में पूंजी के अभाव में देश में औद्योगिकीकरण तेजी से नहीं हो पाया और नहीं उत्पादन की नवीन प्रौद्योगिकी को बल मिला उत्पादन के नीचे स्तर आए और रोजगार की कमी ने बच्चों को हतोत्साहित किया है
  2. और पूंजी निर्माण न होने से गरीबी पुख्ता हुई है यद्यपि पिछले तीन दशकों में आर्थिक विकास ने पूंजी निर्माण की गति तेज की है

7 प्रति व्यक्ति निम्न आय एवं निम्न उपयोग स्तर

  1. निर्धनता का मापदंड आय एवं उपभोग का वांछित न्यूनतम स्तर से भी कम होना है
  2. भारत में बेकारी निम्न उत्पादन एवं राष्ट्रीय आय के निम्न स्तर के कारण प्रति व्यक्ति आय कम है
  3. और परिणामस्वरूप देश में कई लोग वंचित न्यूनतम उपभोग स्तर से भी वंचित हैं यही कारण है
  4. कि जहां 1960 61 मैं लगभग 19 करोड व्यक्ति निर्धनता के रेखा से नीचे थे
  5. वहां 1980 में उनकी संख्या बढ़कर 31.7 करोड़ हो गई है सातवीं योजना के आरंभ में भी 97.3 करोड व्यक्ति निर्धनता की रेखा से नीचे माने गए थे
  6. अब भी लगभग 26 करोड व्यक्ति निर्धनता के रेखा से नीचे हैं

8 बढ़ती मुद्रास्फीति एवं आवश्यक वस्तुओं की अपर्याप्त

  1. भारत में बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति में कमी से भी गरीबी को बढ़ावा मिला है
  2. आज आदमी अपनी समिति आए से अपने वांछित न्यूनतम जीवन स्तर को भी प्राप्त करने में असमर्थ है
  3. 1960 के मुकाबले औद्योगिक श्रम उपभोग सूचकांक अक्टूबर 1988 पहुंच गया था
  4. यही नहीं 1970-71 के आधार वर्ष में से 20 सामान्य थोक मूल्यों का सूचकांक लगभग चार गुना है
  5. आजकल डालो खाद्य तेलों आदि में भी भारी तेजी का रुख स्थिर आय वाले लोगों को गरीबी के गर्त में धकेल रहा है
  6. देश में खाद्य तेलों डालो शक्कर जैसी अनिवार्य वस्तुओं की उपलब्धता कम होने से जीवन स्तर में गिरावट रही है

9 सामाजिक बाधाएं

भारत में सामाजिक रूढ़िवादिता एवं धार्मिक अंधविश्वास ने कई कुरीतियों को जन्म दिया है

  • विवाह उत्सव मृत्यु भोज आदि कार्यों पर अनुपा तक फिजूलखर्ची ने भारतीय ग्रामीण जनसंख्या को रिंग रस्ता में डुबोया है
  • बच्चों के जन्म को भगवान की देन मानने से जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि हुई है
  • जातिवाद भाग्यवादी ताने लोगों को अकर्मण्य ने बनाया है
  • संयुक्त परिवार प्रथा ने व्यक्तिवाद को हतोत्साहित कर उन्हें पर आश्रित बनाने में योग दिया है
  • श्रम की गतिशीलता में कमी तथा कार्य कुशलता का नीचे स्तर भारत में निर्धनता को बढ़ाने में सहायक रहे हैं
  • धीरे-धीरे शिक्षा के प्रसार सामाजिक उत्थान एवं बढ़ती जागरूकता से लोग दरिद्रता के कुचक्र से बाहर निकल रहे हैं

10 सामाजिक सेवाओं का अभाव

  • भारत में सार्वजनिक वस्तुओं तथा सेवाओं का वितरण अपर्याप्त है
  • जिसके कारण लोग यह सेवाएं तथा वस्तुएं अधिक मूल्य पर निजी वितरकों से क्रय करते हैं
  • फल स्वरुप इनकी आय का एक बड़ा भाग चिकित्सा पेयजल सफाई शिक्षा आदि के क्रय में चला जाता है
  • तथा यह लोग निर्धन ही बने रहते हैं

May 22, 2020

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन क्या है जाने ? PART-1

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

आइए आज इस टॉपिक पर चर्चा करेंगे महात्मा गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में क्या क्या योगदान रहा और गांधीजी ने कौन कौन से आंदोलन किए व व किन किन आंदोलनों में भाग लिया और इस आंदोलन से क्या क्या प्रभाव पड़ा इसको आज अच्छे से जानेंगे ! सबसे पहले महात्मा गांधी जी की जीवनी के बारे में जानेंगे !

महात्मा गांधी की जीवनी ( Mahatma Gandhi Biography )

भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन

आइए हम आपको महात्मा गांधी के बारे में कुछ जानकारियां सांझा करते हैं जोकि निम्न प्रकार से हैं !

  • नाम – मोहनदास करमचंद गांधी
  • पिता का नाम – करमचंद गांधी
  • माता का नाम – पुतलीबाई
  • जन्म – 2 अक्टूबर, 1869
  • जन्म स्थान – गुजरात के पोरबंदर में
  • राष्ट्रीयता – भारतीय
  • शिक्षा – बैरिस्टर
  • पत्नी – कस्तूरबाई मखजी कपाड़िया (कस्तूरबा गांधी)
  • संतान – चार पुत्र – हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
  • जातीयता – गुजराती
  • राजनीतिक पार्टी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • मृत्यु – 30 जनवरी, 1948

भारतीयराष्ट्रीयआंदोलन में महात्मा गांधी का योगदान या भूमिका

आइए अब राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी की भूमिका और योगदान के बारे में जानेंगे विस्तार से जोकि निम्न प्रकार से हैं :-

  • 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से अरेविया नामक जहाज से मुंबई के अपोलो बंदरगाह पर आए थे ! इस समय प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था (1914-1918)
  • महात्मा गांधी ने भारत के युवाओं को अंग्रेजी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया था ! इसलिए ब्रिटिश सरकार ने गांधी जी को केसर -ए -हिंद की उपाधि प्रदान की !
  • भारतीयों ने गांधीजी का विरोध किया गांधी जी को अंग्रेजों का सार्जेंट (सेना में भर्ती करने वाला) कहा !
  • 1915 में ही गांधी जी ने जीवन लाल देसाई के द्वारा गुजरात के अहमदाबाद जिले में साबरमती नदी के तट पर कोचराव नामक बंगले में एक आश्रम स्थापित किया इसे सत्याग्रह आश्रम नाम दिया गया था !
  • 1917 में गुजरात के व्यवसायी अंबालाल साराभाई ने इस आश्रम की आसपास की भूमि खरीदकर गांधी को भेंट दी तथा इसे साबरमती आश्रम नाम दिया गया !
  • 1930 में गांधी जी ने जब सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया था तब इसे अंतिम रूप से छोड़ दिया था !
  • चार्ल्स कोरियन को इस आश्रम का वास्तुकार माना जाता है !
  • 1916 में गांधी जी ने मदन मोहन मालवीय के द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह में भाग लिया था !
  • 1916 में कांग्रेस का अधिवेशन लखनऊ में अंबिका चरण मजमुदार की अध्यक्षता में आयोजित हुआ !
  • नरम दल और गरम दल तिलक व एनीबेसेंट के प्रयासों से एक हो गए !
  • कांग्रेस के सदस्य जिन्ना के प्रयासों से कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की पृथक निर्वाचन प्रणाली की मांग को मान लिया ! इसी को रमेशचंद्र मजमुदार ने कांग्रेस की प्रथम भूल कहां है !
  • इसी अधिवेशन में राजकुमार शुक्ल ने गांधी से मुलाकात की वह बिहार के चंपारण जिले के प्रचलित नील की तिनकठिया खेती के बारे में बताया फिर महात्मा गांधी 1917 में चंपारण गए !

गांधीजी के प्रमुख आंदोलन

गांधी जी के प्रमुख आंदोलन निम्न प्रकार से हैं :-

  • चंपारण आंदोलन
  • खेड़ा आंदोलन
  • अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन
  • रोलेट सत्याग्रह आंदोलन
  • खिलाफत आंदोलन
  • असहयोग आंदोलन
  • साइमन कमीशन
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन
  • कैबिनेट मिशन

भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन में गांधी जी के यह आंदोलन बहुत ही महत्वपूर्ण थे गांधीजी का इन आंदोलनों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है अब हम इन आंदोलनों के बारे में विस्तार से जानेंगे कि गांधी जी की क्या क्या भूमिका रही है आइए देखते हैं :-

चंपारण किसान आंदोलन

  • चंपारण में अंग्रेज व्यापारी किसानों के खेत को 20 भागों में बांटते थे। जिनमें से तीन भागों में नील की खेती करवाई जाती थी बाकी पूरी भूमि को परती छोड़ दिया जाता है ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे । इसके लिए अंग्रेज व्यापारी किसानों को अग्रिम भुगतान भी करते थे परंतु इस समय जर्मनी में रासायनिक रंग बना लिए थे ! यूरोप में भारतीय नील की मांग में कमी आ गई इसलिए दिए गए अग्रिम भुगतान को ब्याज सहित वसूल किया जा रहा है !
  • लगातार नील की खेती करने से भूमि बंजर हो चुकी थी अतः किसान इस भुगतान को देने में असमर्थ था।
  • चंपारण के जिला कलेक्टर (W.B Hitchcoke) ने गांधी के चंपारण प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • गांधीजी के जाने पर उन्हें मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया था ! और उसे चंपारण की जेल में रखा गया था।
  • गांधी जी ने सत्याग्रह का प्रथम प्रयोग इसी आंदोलन में किया था !
  • सत्याग्रह का अर्थ : – सत्याग्रह का अर्थ अहिंसात्मक तरीके से सरकार के समक्ष अपनी मांग प्रस्तुत करना होता है इसे सत्याग्रह नाम भूलाभाई देसाई के द्वारा दिया गया ।
  • इस आंदोलन में गांधी को निम्न लोगों के द्वारा सहयोग दिया गया जो कि निम्न है:-
  • अनुराग नारायण सिन्हा
  • ब्रजकिशोर शर्मा
  • जे पी कृपलानी
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू
  • अंग्रेज व्यापारियों ने गलत तरीके से वसूली की गई 25% राशि किसानों को वापस लौटा दी थी !
  • इस आंदोलन की सफलता के बाद रविंद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी की उपाधि प्रदान की।
  • जूनीपत ब्राउन ने इस आंदोलन का उल्लेख अपनी पुस्तक Arising the power of Gandhi मैं की है !

खेड़ा किसान आंदोलन

  • खेड़ा (गुजरात) की सूरत जिले की तहसील थी ।
  • 1917-18 के वर्ष में यहां अकाल पड़ा था ! इसके बावजूद लगान में वृद्धि की गई जबकि अकाल संहिता के तहत 3/4 फसल नष्ट होने पर पूरा लगान माफ कर दिया जाता था ।
  • इस आंदोलन में वल्लभ भाई पटेल ने गांधी को सहयोग दिया।
  • 23 मार्च 1918 को सरकार ने एक आदेश लागू किया की किसानों से समर्थ लगान वसूल किया जाएगा

अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के कारण भारत में महंगाई बढ़ चुकी थी अतः मजदूर वेतन में 50% वृद्धि की मांग कर रहे थे जबकि मिल मालिक 20% वेतन वृद्धि को राजी थे।
  • जब मजदूरों का प्लेग बोनस बंद किया गया तब मजदूरों ने अनसूइया बेग पटेल से मुलाकात की जिन्होंने गांधी को बुलाया।
  • 15 March 1918 को गांधी अनशन पर बैठ गए तब मिल मालिकों ने समझौता करके 35% वेतन वृद्धि की।

रोलेट सत्याग्रह आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के समय भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों में तेजी आई
  • रासबिहारी बोस के पूरे भारत में सशस्त्र क्रांति की योजना भी बनाई गई। हालांकि असफल होने पर रासबिहारी बोस जापान चले गए।
  • 1917 में ब्रिटिश सरकार ने इंग्लैंड के किगजू न्यायालय के न्यायाधीश सिडनी रोलैंड की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जिसने मार्च 1919 को रोलेट एक्ट लागू किया।
  • इसमें प्रावधान था कि अगर किसी व्यक्ति पर सरकार विरोधी होने का संदेह हो तो बिना न्यायालय में पेश किए उसे अधिकतम 2 वर्ष तक हिरासत में रख सकते थे। इसे काला कानून कहा गया।
  • संभवत मोतीलाल नेहरू ने इसे बिना अपील बिना दलील और बिना वकील का कानून कहां ।
  • गांधीजी ने इसके विरोध के लिए रौलट सत्याग्रह समिति बनाई इसमें एनीबेसेंट सदस्य थी परंतु बाद में गांधी की विचारधारा से असहमत होकर इस समिति से अलग हुई और गांधी जी को छोटा राजनीतिक बच्चा कहां।
  • 9 अप्रैल 1919 को पंजाब के दो क्रांतिकारी डॉ सत्यपाल व सैफुद्दीन किचलू पंजाब की सीमा पर गिरफ्तार करके अमृतसर की जेल में रखा।
  • 10 अप्रैल 1919 को पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइक ओ डायर ने पंजाब में धारा 144 लगा दी व पंजाब का प्रशासन सेना को सौंपा दिया।
  • 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी का त्यौहार गांव से लोग अमृतसर आए हुए
  • इन दोनों की गिरफ्तारी के विरोध में एक ही स्थान पर इकट्ठा हुए जिसे जलियावालाबाग कहा जाता है
  • यहां पहुंचकर राबर्ट इनफील्ड हेनरी डायर नामक सैन्य अधिकारी के आदेश से गोलीबारी की गई।
  • इस हत्याकांड के विरोध में टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि लौटा दी
  • वायसराय चेम्सफोर्ड की कार्यकारिणी परिषद के भारतीय सदस्य शंकरन नायर ने इस्तीफा दे दिया था।
  • सरकार ने इस हत्याकांड को जांच के लिए 8 सदस्यों वाली हंटर कमेटी बनाई इसमें तीन भारतीय थे इनके निम्न नाम है:-
  • चिमनलाल शीत सितउवाड
  • शायबजादा सुल्तान अहमद
  • जगत नारायण
  • हंटर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 379 व्यक्ति इस हत्याकांड में मारे गए।
  • कांग्रेस ने मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में तहकीकात कमेटी बनाई।
  • इस कमेटी के अन्य सदस्य थे :-
  • मोतीलाल नेहरू
  • चितरंजन दास
  • महात्मा गांधी
  • गांधीजी ने हंटर कमेटी की रिपोर्ट को पन्ने दर पन्ने लीपापोती कहा।
  • इन रिपोर्ट के अनुसार 1000 से भी ज्यादा व्यक्ति हत्याकांड में मारे गए।

खिलाफत आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के विजेता राष्ट्र इंग्लैंड ने पराजित राष्ट्र तुर्की के विवाह जन का निर्णय लिया।
  • तुर्की के सुल्तान को पूरे विश्व के मुसलमान खलीफा के समान मानते थे।
  • इस समय सुल्तान मोहम्मद चतुर्थ थे।
  • मुसलमानों ने इस निर्णय के कारण आक्रोश उत्पन्न हो गया तथा गांधी ने इसे पिछले 100 सालों में आया हुआ हिंदू व मुसलमानों की एकता का स्वर्णिम अवसर कहा था।
  • भारत में यह आंदोलन मोहम्मद अली व शौकत अली दो भाइयों के द्वारा चलाया गया।
  • 17 अक्टूबर 1919 को भारत में खिलाफत दिवस मनाया गया।
  • 24 नवंबर 1919 को दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी की बैठक आयोजित की गई।
  • डॉक्टर अंसारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अंग्रेजी सरकार से बातचीत के लिए लंदन भेजा गया।
  • मार्च 1920 में खिलाफत कमेटी की बैठक इलाहाबाद में आयोजित की गई। इसमें असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया।
  • 1 अगस्त 1920 इसकी तिथि निश्चित की गई परंतु इसी दिन तिलक की मृत्यु हो गई अत: इसे कुछ दिनों के लिए स्थगित किया गया।
  • परंतु 20 अगस्त 1920 को इंग्लैंड व तुर्की के मध्य सेवरस (फ्रांस) की संधि हो गई
  • तुर्की में कमाल पाशा ने सरकार गठित की और इसने सुल्तान के पद को ही समाप्त कर दिया इस कारण से भारत में आंदोलन समाप्त हो गया।
  • कमाल पाशा को अतातुर्क अर्थात तुर्कों का पिता कहते हैं।
  • जिन्ना ने इस आंदोलन में भाग नहीं लिया।

असहयोग आंदोलन

  • गांधी के कहने पर कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय लिया।
  • सितंबर 1920 में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन कोलकाता में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
  • इसमें आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया
  • इसके लेखक महात्मा गांधी थे।
  • स्वयं गांधी ने इसका प्रस्ताव रखा था।
  • चितरंजन दास ने इसका विरोध किया तथा मोतीलाल नेहरु के द्वारा गांधी का समर्थन किया गया।
  • इस समय एनी बेसेंट, मालवीय, मोहम्मद अली जिन्ना, शंकर नायर इत्यादि ने इस्तीफा दे दिया।
  • दिसंबर 1920 में कांग्रेस वार्षिक अधिवेशन नागपुर में राघवाचार्य की अध्यक्षता में आयोजित हुआ इसमें पारित प्रस्ताव की पुष्टि की गई।चितरंजन दास ने इसका प्रस्ताव रखा।
  • इसके प्रस्ताव में लिखा है कि ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर सुशासन की बजाए इसे बाहर जाकर स्वराज्य की प्राप्ति द्वारा लक्ष्य हासिल करना सही है।
  • गांधी ने केसर हिंद की उपाधि तथा ज़ुलु व बोहर पदक सरकार को लौटा दिए थे।
  • सुभाष चंद्र बोस ने आईएएस के पद से त्यागपत्र दिया व कोलकाता के नेशनल कॉलेज के प्रिंसिपल बने।
  • महिलाओं के द्वारा शराब की दुकानों में धरना प्रदर्शन किया गया यह एकमात्र ऐसा कार्य था जो इसके कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था।
  • वक्ताओं की दृष्टि से यह कांग्रेस का सबसे बड़ा अधिवेशन था।
  • December 1920 में नागपुर अधिवेशन में ही कांग्रेस के दैनिक कार्यों के संचालन के लिए 15 सदस्यों वाली कार्य समिति का गठन किया गया इसको बनाने का पहला सुझाव तिलक में 1916 में लखनऊ अधिवेशन में दिया था।
  • इसे सांप्रदायिक सोपान का आंदोलन माना गया।
  • स्वामी श्रद्धानंद को मुसलमानों ने दिल्ली की जामा मस्जिद भाषण देने के लिए आमंत्रित किया।
  • सैफुद्दीन किचलू को शिव सिखो ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की चाबी सौंप दी।
  • गांधी ने अहिंसा की पालना में सर्वाधिक प्रशंसा बिहार की।
  • अंग्रेज शिक्षा की सर्वाधिक बहिष्कार बंगाल में हुआ।
  • मदुरई तमिलनाडु में एक बालक के द्वारा प्रश्न पूछे जाने के बाद गांधी ने आजीवन एक धोती में रहने का निर्णय किया।
  • 5 फरवरी 1922 को यूपी के गोरखपुर जिले के चोरी चोरा नामक गांव में ग्रामीणों ने थाने का घेराव करके आग लगा दी इसमें 22 पुलिस वह एक सब इंस्पेक्टर सहित कुल 23 पुलिसकर्मी व तीन ग्रामीण मारे गए
  • 5 फरवरी 1922 को बारदोली (गुजरात) में कांग्रेस की बैठक हुई उसमें असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
  • 10 March 1922 को ब्रिटिश न्यायाधीश ब्रूमफील्ड ने हिंसा भड़काने के आरोप में गांधी जी को 6 साल की कारावास की सजा सुनाई गई।

1919 के एक्ट के तहत

  • 1919 के एक्ट के तहत भारत की केंद्रीय असेंबली में चुनाव होने दे। इन चुनाव को लेकर कांग्रेस के दो ग्रुप बन गए।
  • परिवर्तनवादी
  • अपरिवर्तनवादी

परिवर्तनवादी

  • यह चुनाव में भाग लेना चाहते थे।
  • इस ग्रुप का नेतृत्व चितरंजन दास व मोतीलाल नेहु कर रहे थे।

अपरिवर्तनवादी

  • यह चुनाव का बहिष्कार कर रहे थे।
  • इनका नेतृत्व विट्ठल भाई पटेल व बल्लभ भाई पटेल कर रहे थे।
  • अपरिवर्तन वादियों के द्वारा नागपुर में झंडा सत्याग्रह चलाया गया ताकि परिवर्तनवादियों को कांग्रेस के झंडे के प्रयोग से रोक सके।
  • जब गांधी जी ने भी चुनाव का बहिष्कार किया तब परिवर्तनवादी कांग्रेस से अलग हुए
  • March 1923 को इलाहाबाद में स्वराज पार्टी की स्थापना की गई। चितरंजन दास इसके अध्यक्ष बने वह मोतीलाल नेहरू इसके सचिव बनाए गए
  • गांधी जी की खराब स्वास्थ्य के कारण जेल से रिहा किया गया।
  • 8 नवंबर 1924 को गांधी जी ने चितरंजन दास को दिल्ली बुलावाया व यह समझौता किया कि जो भी कांग्रेस के सदस्य चुनाव में भाग लेना चाहते हैं स्वराज पार्टी के तहत ले सकते हैं।
  • 1924 में कांग्रेस का अधिवेशन बेलगांव (कर्नाटक ) मैं आयोजित हुआ । इसकी अध्यक्षता गांधीजी ने की इसमें गांधी व दास समझौते की पुष्टि की गई।
  • इसके बाद कांग्रेस के लगभग नेताओं ने स्वराज पार्टी के तहत चुनाव में भाग लिया।
  • विट्ठल भाई पटेल ने केंद्रीय असेंबली के स्पीकर नियुक्त हुए।
  • स्वराज पार्टी के दबाव के कारण 1919 के एक्ट की जांच की गई मुडडीमैन कमेटी का गठन किया गया।

देखिए दोस्तों ! http://भारतीय राष्ट्रीयआंदोलन से संबंधित आगे की जानकारी पार्ट-2 पर जाकर पढ़ें। और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका और सहयोग के बारे में जानकारी आपको अच्छी लगी है तो इसे आगे भी फॉरवर्ड करें अपने दोस्तों को।

May 22, 2020

भारत में बेरोजगारी का स्वरूप? nature of unemployment in India

1 संरचनात्मक बेरोजगारी Structural unemployment

सामाजिक आर्थिक एवं तकनीकी विकास के परिणाम स्वरूप उद्योगों का विस्तार होता है जबकि कुछ अन्य उद्योग धीरे-धीरे संकुचित होते जाते हैं

यदि भौगोलिक एवं तकनीकी दृष्टि से सर में पूर्णता गतिशील हो तो संकुचित होने वाले उद्योगों के श्रमिक नए उद्योगों में ख पाए जा सकते हैं परंतु वास्तव में श्रम इन दृश्यों से पूर्णता गतिशील नहीं होता

जिसके कारण कुछ http://बेरोजगारी उत्पन्न होती है औद्योगिक जगत में इस प्रकार के संरचनात्मक परिवर्तनों के परिणाम स्वरूप उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी संरचनात्मक बेरोजगारी कहलाती है

2 छिपी हुई बेरोजगारी Disguised unemployment

इसके अंतर्गत श्रमिक बाहर से तो काम पर लगे हुए प्रतीत होते हैं किंतु वास्तव में उन श्रमिकों की उस कार्य में आवश्यकता नहीं होती अर्थात उनकी सीमांत उत्पत्ति सुनने या नहीं के बराबर होती है

वास्तव में यदि उन श्रमिकों को उस कार्य से निकाल दिया जाए तो कुल उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि तथा उद्योगों में जनसंख्या के भारी दबाव में रोजगार अवसरों के अभाव में छिपी हुई http://बेरोजगारी चरम सीमा पर है इसको अदृश्य बेकारी भी कहते हैं

3 खुली बेरोजगारी Open Unemployment

इससे तात्पर्य उस बेरोजगारी से है जिसके अंतर्गत श्रमिकों को बिना किसी कामकाज के रहना पड़ता है उन्हें थोड़ा बहुत भी काम नहीं मिलता है

भारत में बहुत से श्रमिक गांव से शहरों की तरफ काम प्राप्त करने के लिए जाते हैं किंतु काम उपलब्ध न होने के कारण वहां बेरोजगार पड़े रहते हैं

इसके अंतर्गत मुख्यतः शिक्षित बेरोजगार तथा साधारण बेरोजगार श्रमिकों को सम्मिलित किया जाता है

4 चक्रीय बेरोजगारी Cyclical unemployment

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में जब मांग और पूर्ति में असंतुलन से तेजी से मंदी का कुचक्र बेकारी का कारण बनता है तो कई लोग बेकार हो जाते हैं तो वह चक्रीय बेकारी है

मंदी काल में वस्तुओं के भावों में कमी तथा उत्पादन अधिक कैसे बेकारी का तांडव नृत्य होता है 1930 की आर्थिक मंदी या युद्ध तत्कालीन मंदी आदि चक्रीय http://बेरोजगारी के उदाहरण हैं

5 मौसमी बेरोजगारी Seasonal unemployment

इसके अंतर्गत किसी विशेष मौसम या अवधि में प्रति वर्ष उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी को सम्मिलित किया जाता है

भारत में रवि और खरीफ की फसलों के बीच की अवधि में मानसून ने आने तक किसानों को बेकार बैठना पड़ता है इस प्रकार चीनी गुड़ आदि उद्योगों में काम केवल मौसम में होता है बाद में बेकार बैठना पड़ता है

लघु एवं कुटीर उद्योगों के पतन से मौसमी बेरोजगारी अधिक कष्टप्रद हुई है सिंचाई के साधनों के विकास बहु फसल योजना तथा राहत कार्यों आदि से समस्या पर कुछ काबू पाया जा सकता है

6 शहरी बेरोजगारी Urban unemployment

शहरी क्षेत्र में प्राय खुले किस्म की बेरोजगारी पाई जाती है इसमें औद्योगिक बेरोजगारी तथा शिक्षित http://बेरोजगारी को सम्मिलित किया जाता है

7 ग्रामीण बेरोजगारी Rural unemployment

इसे कृषि गत बेरोजगारी भी कहा जाता है भारत में ग्रामीण बेरोजगारी एक प्रमुख समस्या बनी हुई है इस प्रकार की बेरोजगारी के सही आंकड़े भी उपलब्ध नहीं है

8 औद्योगिक अथवा तकनीकी बेरोजगारी (Industrial or technological unemployment)

उत्पादन कार्य में विज्ञान और तकनीकी ज्ञान के विस्तार से जब सुधरी तथा स्वचालित मशीनों का प्रयोग होता है तो दो प्रकार से बेकारी बढ़ती है

पहले जो लोग नई मशीनों को चलाने में अयोग्य होते हैं उन्हें काम से हाथ धोना पड़ता है तथा दूसरे स्वचालित मशीनों में श्रमिकों की कम आवश्यकता पड़ती है

कृषि में भी वैज्ञानिक तरीकों से बेकारी की अधिक संभावना बढ़ती है भारत में कृषि तथा उद्योग दोनों में तकनीकी बेरोजगारी का क्षेत्र व्यापक है और

इसलिए उद्योगों में नवीनीकरण विवेकी करण वैज्ञानिक की करण की गति धीमी है ताकि विवेकी कारण बिना आंसुओं के संभव हो सके

बेरोजगारी

9 अस्थाई बेकारी (Sudden unemployment)

बाजार की दशा में परिवर्तन होने से उत्पन्न बेरोजगारी के घटनात्मक बेरोजगारी कहते हैं बाजार की मांग देश में उपलब्ध साधनों पर निर्भर करती है इनकी उपलब्धता में परिवर्तन हो जाने पर मांग पक्ष प्रभावित होता है

कभी-कभी किसी व्यापारिक अथवा औद्योगिक इकाइयां समूचे उद्योग पर अचानक संकट से उद्योग बंद हो जाते हैं तो उसमें नियोजित व्यक्ति जब तक दूसरी जगह काम पर नहीं लग जा पाते अस्थाई रूप से अचानक बेरोजगार हो जाते हैं

ठीक इसी प्रकार कृषि पर आधारित धंधे अकाल से थोड़े समय के लिए ठप हो जाते हैं तो यह बेकार है आस्थाई तथा आत्मिक कही जाती है

इस प्रकार कच्चे माल के अभाव विद्युत शक्ति के अभाव या मशीनों की टूट-फूट हो जाने से भी कुछ समय के लिए कारखाने बंद कर दिए जाते हैं

10 शिक्षित तथा अशिक्षित बेरोजगारी (Educated and uneducated unemployment)

  • जब देश में शिक्षित वर्ग में बेकारी होती है तो उस शिक्षित बेरोज -गारी कहा जाता है
  • और जब अशिक्षित ओं की इच्छा तथा योग्यता होने पर भी वर्तमान वेतन दर रोजगार उपलब्ध नहीं होता है तो ऐसे क्षित बेरोज-गारी कहा जाता है
  • भारत में शिक्षित बेकारी के दो स्वरूप है सामान्य शिक्षा प्राप्त बेकार ओं की संख्या अधिक है
  • जबकि तकनीकी तथा वैज्ञानिक शिक्षा प्राप्त लोगों की बेकारी कम है
  • जब शिक्षित हो में ही बेकारी है तो अशिक्षित की बेकारी तो उनकी पूर्ति बहुत अधिक और मांग कम होने से चरम सीमा पर है यही कारण है
  • कि शिक्षकों में छिपी हुई तथा अदृश्य बेरोजगारी का बोलबाला है

11 अल्प रोजगार

  • इसके अंतर्गत ऐसे श्रमिक आते हैं जिनको थोड़ा बहुत काम मिलता है और
  • जिनके द्वारा वह कुछ अंशों तक उत्पादन में योगदान देते हैं किंतु इनके अपनी क्षमता अनुसार काम नहीं मिलता या पूरा काम नहीं मिलता
  • इसमें कृषि में लगे श्रमिक भी आते हैं जिन्हें करने के लिए कम काम मिलता है
  • भारत में अल्प रोजगार के दो स्वरूप हैं दृश्य और अदृश्य

दृश्य

  • दृश्य अल्प रोजगार को मापा जा सकता है यह सुस्त मौसम में कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों में पाया जाता है
  • इसका विशेष प्रभाव गांव में व रोजगार प्राप्त महिलाओं में देखा जाता है
  • इसका आधार समय होता है अर्थात काम की अवधि कम होती है

अदृश्य

  • अदृश्य अल्प रोजगार का प्रत्यक्ष रूप से माप नहीं हो सकता यह स्वरोजगार में लगे व्यक्तियों में वर्ष भर पाया जा सकता है
  • और अपर्याप्त काम है के कारण यह अल्प उत्पादकता व अल्फा मदनी के रूप में प्रकट होते हैं
  • ऐसे व्यक्ति अपनी आय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त काम या वैकल्पिक काम करना चाहते हैं