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May 18, 2020

May 18, 2020

मौर्यकालीन गुहालेख व स्तूप और मौर्य कालीन साहित्य व सिक्के

मौर्यकालीन गुहालेख

  • अशोक के गया (बिहार) अभिलेख बराबर पहाड़ी पर आजीवक संप्रदाय की गुफाएं दान दी जिन्हें निम्न नामों से पुकारा जाता है !
  • सुदामा
  • विश्व झोपड़ी
  • कर्ण चापर
  • अशोक के पौत्र दशरथ ने भी इसी पहाड़ी पर आजीविका संप्रदाय लोमश ऋषि की गुफा दान की जो सबसे सुंदर गुफा थी !
  • दशरथ ने भी अशोक के समान देवान प्रियदर्शी की उपाधि को धारण किया !
  • दशरथ ने गया जिले में स्थित नागार्जुन पहाड़ी पर ही आजीविका संप्रदाय को गुफा दान दे दी जिन्हें निम्न नामों से जाना जाता है
  • गोपी का गुफा
  • बौद्धिक गुफा
  • वैदिक गुफा
  • व सातों गुफाओं को सम्मिलित रूप से सप्त गुफा कहा जाता है !

मौर्यकालीन स्तूप

  • इसका प्रारंभिक उल्लेख ऋग्वेद में हुआ !
  • ऋग्वेद में धूप नामक शब्द का उल्लेख है जिसका अर्थ है कि उठती हुई जवाला/राख का ढेर
  • महात्मा बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद उनकी अस्थियों पर जो स्थापित बनाया गया उसी को स्तूप का गया है !
  • बुध की अस्थियों को 8 राज्यों में बांट दिया गया था!
  • इन 8 में से वर्तमान में केवल पिपरवा (उत्तर प्रदेश) के स्तूप के अवशेष मिलते हैं !
  • बौद्ध ग्रंथ दिव्या दान के अनुसार अशोक के द्वारा 84000 स्तूपो का निर्माण करवाया गया !
  • अशोक के समय निर्मित स्तूपो में भरहुत (मध्य प्रदेश) का स्तूप सबसे प्राचीन है !
  • इसकी खोज 1872-73 में कनिखम के द्वारा की गई !
  • सर्वप्रथम जातक कथाओं का भरहुत के स्तूप पर किया गया !
  • जातक कथाओं का अर्थ- बुद्ध के जीवन से संबंधित घटनाओं से है !
  • इस स्तूप पर अजातशत्रु महात्मा बुद्ध की वंदना करते हुए दिखाया गया है !
  • मौर्य काल में इस स्तूप की वेदिका लकड़ी की बनी होती थी सुंग काल में इसे पत्थर की बनवाई गई !
  • अशोक के समय निर्मित स्तूपो में सांची का स्तूप सबसे प्रसिद्ध है !
  • इसके निर्माण में अशोक की पत्नी देवी/महादेवी का योगदान माना जाता है !
  • इसकी खोज 1818 में रॉयल ट टेलर के द्वारा की गई !
  • 1920 -30 में जॉन मार्शल इस पहाड़ी को साफ करवा कर इस स्तूप के अन्य अवशेष की खोज की

सांची के स्तूप

:- सांची से कुल 3 स्तूप मिले हैं जो कि निम्न प्रकार से हैं

  • स्तूप A – “बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं” !
  • स्तूप B – इसमें बौद्ध प्रचार को के अवशेष रखे गए हैं !
  • स्तूप C – इसमें बुद्ध के शिष्य सारिपुत्र,
  • के अवशेष मिलते हैं !
  • सारनाथ का धमेख स्तूप अशोक के समय निर्मित था !
  • प्रारंभिक स्तूपो का निर्माण ईटों, लकड़ियों, व पत्थरों से हुआ !
  • चट्टानों को काटकर बनाए गए स्तूपो को चैत्य कहा जाता है तथा बौद्ध भिक्षुओं के पूजा स्थान भी होते हैं !
  • बौद्ध भिक्षुओं के आवास स्थलों को विहार कहा जाता है !

स्तूपो के प्रकार

  • स्तूपो के चार प्रकार होते हैं जोकि निम्नलिखित हैं
  • शारीरिक स्तूप :- जिनमें बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं उनको सबसे पवित्र माना गया है !
  • पारभोगिक स्तूप :- बुद्ध तथा उनके शिष्यों ने अपने जीवन काल में जिन वस्तुओं का उपयोग किया हो जैसे भिक्षा पात्र आदि !
  • उद्ददेसिक स्तूप :- बुद्ध तथा उनके शिष्यों ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के उद्देश्य जिन स्थानों की यात्रा की
  • संकल्पित स्तूप :- राजा व व्यापारियों के द्वारा बनाए गए स्तूप

मौर्य कालीन साहित्य

  • यूनान के शासक सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को अपना दूध बनाकर चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था !
  • मेगस्थनीज 299 ईसवी पूर्व तक चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहा जहां उसने यूनानी भाषा इंडिका नामक पुस्तक लिखी !
  • परंतु यह अभी तक प्राप्त नहीं हुई परंतु कई बाद के लेखकों ने अपनी पुस्तक में लिखा है
  • कि मेगस्थनीज के द्वारा इंडिका लिखी गई जिसमें इन बातों को लिखा गया है
  • एरियन – ए वीसीयस (सिकंदर की जीवनी)
  • स्ट्रेबो – जियोग्राफिक
  • जस्टिन – एपि टाम
  • प्लितार्क – लहिब्स
  • पिलनी – natural storica
  • Talmi – जो ग्राफी
  • मेगास्थनीज ने कहीं पर भी चाणक्य नाम का उल्लेख नहीं किया !
  • मेगास्थनीज ने कई बातें असत्य कही जैसे-
  • भारत में अकाल नहीं पड़ते
  • भारतीयों को लेखन कला का ज्ञान नहीं है
  • भारत में दास प्रथा का प्रचलन नहीं था
  • भारतीय समाज सात वर्गों में विभक्त था
  • जैन आचार्य भद्रबाहु ने कल्पसूत्र की रचना की
  • चंद्रगुप्त के पुरोहित या प्रधानमंत्री चाणक्य (कौटिल्य) विष्णु गुप्त ने संस्कृत भाषा में अर्थशास्त्र की रचना की
  • यह संस्कृत में लिखित एक पांडुलिपि थी
  • इसमें 15 अधिकरण व 180 प्रकरण है
  • 1905 में तंजौर (कर्नाटक) के ब्राह्मण ने इसकी पांडुलिपि तंजौर के सरकारी पुस्तकालय कक्ष श्याम प्रसाद शास्त्री को भेंट की थी !
  • 1902 में इसे पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया !
  • चाणक्य ने अपनी पुस्तक न तो चंद्रगुप्त मौर्य और न ही मेगास्थनीज के नाम का उल्लेख किया है !

मौर्य कालीन सिक्के

  • इन सिक्कों को आहत/पंचमार्क सिक्के कहते हैं !
  • धातु को पिघला कर किसी वस्तु से दबाकर इन सिक्कों का निर्माण किया जाता था !
  • इन पर सूर्य, चंद्रमा, पशु पक्षी, इत्यादि की आकृति बनी होती थी !
  • टकसाल के अधिकारी को कोषाध्यक्ष कहते थे !
  • रूप दर्शक नामक अधिकारी इन सिक्कों की जांच करता था !
  • स्वर्ण सिक्के :- 1 स्वर्ण 2. निसक
  • चांदी के सिक्के :- 1. पण 2. धरण 3. कर्सापन
  • ताम्र सिक्के :- 1. भासक 2. काकनी

महाजनपद और उनकी राजधानी अवंतीमौर्यकालीन गुहालेख http://मौर्यकालीन गुहालेख

May 18, 2020

मौर्यकालीन अशोक के स्तंभ लेख के बारे में जाने ?

अशोक के स्तंभ लेख

  • अशोक के स्तंभ लेख उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चुनार नामक स्थान पर बलुआ पत्थर से निर्मित इन पत्थर को साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगवाया गया !
  • संभवत अशोक को अभिलेख लिखवाने की प्रेरणा ईरान के शासक डेरियस या दारा सिंह परंतु दोनों के स्तंभों में पर्याप्त अंतर नजर आता है !

डेरियस

  • इसके स्तंभों को अलग अलग तराश कर जोड़ा गया है !
  • नीचे से ऊपर तक एक समान है !
  • यह गड़ारीदर स्तंभ है !
  • चौकियों पर निर्मित है !
  • महलों में स्थित व शीर्ष पर पूर्वजों की मूर्ति स्थित है
  • उल्टे कमल के नीचे बने हुए हैं !
  • लेख विहीन व पॉलिसी विहिन है !

अशोक के स्तंभ

  • इसके स्तंभों को एकात्मक अर्थात एक ही पत्थर को काटकर तराशे गए हैं !
  • नीचे से ऊपर तक पतले होते हैं !
  • यह सपाट बने हुए हैं !
  • धरातल पर खड़े हुए हैं !
  • खुले में स्थित वह शीर्ष पर पशुओं की मूर्ति बनी हुई है !
  • उल्टे कमल के शीर्ष पर बने हुए हैं !
  • लेख युक्त व पॉलिश युक्त हैं !
  • अशोक के स्तंभों को इतनी चमकदार पॉलिश की गई है आज भी इनकी चमक फीकी नहीं है !
  • इस पॉलिश के लिए विंसेट अर्थ स्मिथ में लिखा है की इतने विकसित होने पर भी अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए हम इस पॉलिश करने की कला को विलुप्त मान लेते हैं !

स्तंभ लेख के भाग:- स्तंभ लेखों को भी दो भागों में बांटा गया है !

  1. वृहद स्तंभ लेख
  2. लघु स्तंभ लेख

1. वृहद स्तंभ लेख

  • यह 6 स्थानों से प्राप्त हुए हैं
  • जो कि निम्नानुसार है
  • यह मेरठ मैं था फिरोजशाह तुगलक ने इसे लाकर कुशक-ए -शिकार या शिकार महल मैं लगवाया
  • मुगल शासक के समय बारूद खाने में विस्फोट के कारण यह क्षतिग्रस्त हो गया था !
  • अतः 1867 मैं इसे पुन मुद्रित करवाया गया

1. दिल्ली-मेरठ स्तंभ लेख

2. दिल्ली-टोपरा स्तंभ लेख

  • यह हरियाणा के अंबाला जिले के अंबाला गांव में स्थित था !
  • इसे भी फिरोज शाह तुगलक ने दिल्ली लाकर अपने महल में लगवाया इसे मीरान- ए-जरीन (स्वर्ण मनार) भीमलात सुनहरी लाट, या शिवालिक लाट भी कहा जाता है !
  • इस पर अजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ का भी लेख लिखा हुआ है !
  • शम्स -ए-सिराज अफीम की पुस्तक तारीख-ए-फिरोज साईं मैं लिखा गया है कि यह स्तंभ फिरोजशाह के द्वारा दिल्ली लाई गई !
  • मोहम्मद हामिद कुरेशी की पुस्तक सीरत-ए-फिरोजशा ही मैं उस नाव का चित्र बना हां जिस नाव से यह स्तंभ दिल्ली लाए गए !

3 लौरिया नंदनगढ़ (बिहार)

  • यह सबसे सुरक्षित व सुंदर स्तंभ है इस पर मुगल शासक औरंगजेब रिबून बॉर्न नामक अंग्रेज अधिकारी का भी लेख लिखा गया है1792 ईसवी का भी लेख लिखा गया है !
  • इसके शीर्ष पर सिंह की आकृति वह हंस को मोती चुगते हुए दिखाया गया है !

4. अरेराज (बिहार)

5. रामपुरवा (बिहार)

6. प्रयाग/कौशांबी (उत्तर प्रदेश)

  • अशोक ने इसे कौशांबी में लगवाया परंतु अकबर ने इसे लाकर इलाहाबाद दुर्ग में लगवा दिया !
  • इस पर सम समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति तथा जहांगीर बीरबल का लेख भी लिखा हुआ है !
  • प्रत्येक स्थान के स्तंभ पर 6 लेख लिखें हुए हैं तथा एक समान है केवल दिल्ली टोपरा वाले में अलग से सातवा लेख लिखा गया है !

2. लघु स्तंभ लेख

  • लघु स्तंभ लेख निम्न प्रकार से हैं
  1. रमनदेई (नेपाल)
  • शासक के 20 वर्ष में मैंने लुंबिनी की यात्रा की वह बुद्ध की जन्मस्थली होने के कारण है धार्मिक कर (बली) को समाप्त कर दिया वह भू राजस्व कर का भाग 2/6 से घटाकर 1/8 कर दिया !
  • यह अशोक का सबसे छोटा अभिलेख है तथा इसके शीर्ष पर घोड़े की आकृति बनी हुई है !

2. निग्लिवसगर (नेपाल)

  • शासन के 14 वर्ष कनक मुनि के स्तूप का का आकार दुगना कर दिया गया !
  • कनक मुनि पौराणिक के बुद्ध को कहते हैं !

3. सांची का लघु स्तंभ (मध्य प्रदेश), सारनाथ का लघु स्तंभ (उत्तर प्रदेश), कौशांबी का लघु स्तंभ (उत्तर प्रदेश)

  • इनसे जो लघु स्तंभ मिले उनमें अशोक ने चेतावनी दी है अगर किसी ने संघ में फूट डालने का प्रयास किया तो उसे श्वेत वस्त्र पहनाकर संघ से निष्कासित कर दिया जाएगा
  • प्रयाग/कौशांबी के स्तंभ में अशोक की पत्नी कारू वाकी व उसके पुत्र तीवर के नाम का उल्लेख है !
  • इसमें कारू वाकी के द्वारा दान दिए जाने का उल्लेख है इसे रानी का अभिलेख कहते हैं !

नेपाल में स्तंभ लेख http://अशोक के स्तंभ लेख

अशोक के लेख वीहीन स्तंभ

  • अशोक के कुछ ऐसे ही स्तंभ भी हैं जोकि लेख वीहीन
  • सांची स्तंभ (मध्य प्रदेश) – चार सिंह
  • वैशाली स्तंभ (बिहार) -एक सिंह
  • संकिसा स्तंभ (उत्तर प्रदेश) – हाथी
  • रामपुरवा स्तंभ (बिहार) – वृषभ
  • सारनाथ स्तंभ (उत्तर प्रदेश) – चार सिंह
  • लेकिन सबसे प्रसिद्ध सारनाथ का स्तंभ है जिस पर चार सिंह पीठ सटा कर बैठे हुए हैं और इनको मुंडक उपनिषद से लिया गया है !
  • भारत का राष्ट्रीय वाक्य सत्यमेव जयते लिखा हुआ है !
  • इसकी चौकी में स्थिति गोल चक्कर हैं वह 32 तिलिया है !
  • ऊपर की चारों दिशाओं में बड़े चक्रों में 24 तिलिया है जिनमें 4 पशुओं को गतिमान अवस्था में दर्शाया गया है ! 1. हाथी 2. वृषभ 3. अशव 4. सिंह
  • फुशो ने इनका संबंध महात्मा बुध से स्थापित किया है !
  • हाथी – गर्भाधान (Buddh)
  • वृषभ – बुद्ध की राशि/धर्म चक्र प्रवर्तन
  • सिंह – बुद्ध के पराक्रम या शाक्य कुल के राजकीय प्रतीक बताया गया है !
  • अस्व- गृह त्याग http://Jay
  • ब्लॉख ने इनका संबंध हिंदू लोक देवी देवताओं से संबंध स्थापित किया है जो कि निम्न प्रकार से है !
  • हाथी – इंद्र
  • अस्व – सूर्य
  • वृषभ – शिव
  • सिंह – दुर्गा