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May 2020

May 31, 2020

राजस्थान में जनजाति आंदोलन – Tribal Movement of Rajasthan

राजस्थान में जनजाति आंदो

:- राजस्थान में मुख्य रूप से तीन जनजातीय या आदिवासी आंदोलन हुए इनमें प्रमुख आंदोलन निम्न है।

  • भील जनजातीय आंदोलन
  • मीणा जनजातीय आंदोलन
  • मेव जनजातीय आंदोलन

• राजस्थान में जनजाति या आदिवासी आंदोलनों में इन आंदोलनों के अलावा और भी बहुत छोटे-छोटे आंदोलन हुए हैं। तथा राजस्थान में प्रमुख जन आंदोलन एवं क्रांतिकारी घटनाएं भी हुई हैं। इन आंदोलन और घटनाओं के बारे में हम विस्तार से आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे इसलिए आप ध्यान से इस लेख को पढ़ें।

राजस्थान के जनजातीय या आदिवासी आंदो

भील आंदोलन या विद्रोह (Bhil Movement or Rebellion)

  • भील समाज के 2 वर्ग होते थे।
  • पहला वर्ग :- ये प्राचीन भील थे व जंगलों में निवास करते थे।
  • दूसरा वर्ग :- दूसरे वर्ग के अंतर्गत गरासिया जनजाति आती थी। इन्हें मेवाड़ केेेे शासकों के द्वारा भूमि का ग्रास तथा टुकड़ा प्रदान कियाा गया तथा ये कृषि के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते थे।

• 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने मेवाड़ के शासक भीम सिंह से सहायक संधि की व जेम्स टॉड को मेवाड़ का पोलिटिकल एजेंट नियुक्त किया गया।

  • भोमिया भील व्यापारी के सामान जंगलों के रास्तों में सुरक्षा प्रदान करते थे इसके बदले में बोलाई नामक कर वसूला जाता था। इसे जेम्स टॉड समाप्त कर दिया।
  • गरासिया भील पहाड़ की ढलानो व मैदानी भागों में चिमता व र दजिया प्रकार की स्थानांतरण कृषि करते थे।

  • इसमें जंगलों को जलाकर साफ किया जाता था क्योंकि पेड़ों की राख अच्छे उर्वरक का कार्य करती थी। परंतु अंग्रेजों का मानना था कि वन संसाधन उनकी संपत्ति है अतः जेम्स टॉड इस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • भील महुआ के वृक्ष के फूल से शराब का उत्पादन करते थे इस पर भी जेम्स टॉड के द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • 1813 के चार्टर में ईसाई प्रचार को भारत में ईसाई धर्म फैलाने की स्वतंत्रता या अनुमति दी गई ज्यादा से ज्यादा भील ईसाई धर्म को ग्रहण करने लगे।

• सुरजी भगत को इस बात का श्रेय दिया गया है कि उसने भील जनजाति के द्वारा ईसाई धर्म को अपनाया जा रहा था उस पर सुरजी भगत ने रोक लगाई। सुरजी भगत को ही भीलो का प्रथम समाज सुधारक माना गया है।

2. भील आंदोलन अथवा भगत आंदो(Bhil movement or Bhagat movement)

  • भगत आंदोलन का नेतृत्व स्वामी गोविंद गिरी ने किया था।

• स्वामी गोविंद गिरी के बारे में

  • जन्म – 1858
  • कहां पर हुआ – डूंगरपुर जिले के बांसिया गांव में बंजारा परिवार में हुआ।
  • गुरु – राजगिरी

• 1881 में दयानंद सरस्वती उदयपुर की यात्रा पर आए थे। गोविंद गिरी ने उनसे मुलाकात की व इनसे प्रेरित होकर 1883 में सिरोही में सम्प सभा की स्थापना की।

  • इस सभा के कुल 10 नियम थे जिनकी पालना गोविंद गिरी की अनुयायियों को करनी होगी इसलिए गोविंद गिरी के संप्रदाय को दशनामी संप्रदाय का गया।
  • सम्प गुजराती भाषा का शब्द है जिसका अर्थ एक समान बंधुत्व अथवा भाईचारा होता है।
  • 1903 में सम्प का पहला अधिवेशन मानगढ़ पहाड़ी (बांसवाड़ा) मैं आयोजित किया गया।
  • इसके बाद गोविंदगिरी पर बागड़ रियासत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया तथा गोविंदगिरी सूथ व ईडर (गुजरात) में चले गए। व सूथ के उकरेली गांव में एक हाली के रूप में काम किया।
  • 1908 में गोविंद गिरी लौटे और बेडसा गांव में भगत पंथ की स्थापना की। इसके बाद पुनः गोविंद गिरी पर प्रतिबंध लगाया गया अक्टूबर 1913 में गोविंद गिरी लौटे व मानगढ़ पहाड़ी पर अपनी धूनी स्थापित की।

• सभी भील इस पहाड़ी पर एकत्रित होने लगे।

  • सरकार ने इनकी गतिविधियों की जांच हेतु गुल मोहम्मद नामक सिपाही को भेजा जिसकी भीलो ने हत्या कर दी। अतः 10 नवंबर 1913 को मेवाड़ भील कोर 34 वी राजपूत बटालियन व वेलेजली राइफल के सैनिकों ने इस पहाड़ी को घेर लिया।
  • 17 नवंबर के दिन गोलाबारी की गई। इसमें 1500 से 2000 भील मारे गए।
  • सर्वप्रथम पूंजा भील ने आत्मसमर्पण किया इसी ने गोविंद गिरी को आत्मसमर्पण के लिए राजी किया था।
  • अहमदाबाद न्यायालय में इन पर मुकदमा चलाया गया व 15 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।
  • गोविंद गिरी ने अपना शेष जीवन गुजरात के कंबोई नामक स्थान पर व्यतीत किया।

3. सम्प सभा आंदोलन का इतिहास एक नजर में (History of Samp Sabha movement at a glance )

  • स्थापना – 1883 में
  • संस्थापक – स्वामी गोविंद गिरी
  • प्रथम अध्यक्ष – स्वामी दयानंद सरस्वती
  • समकालीन जागीरदार – राव अभय सिंह के काल की घटना
  • अधिवेशन केंद्र – मानगढ़ पहाड़ी (बांसवाड़ा)
  • घटना चक्र – 17 नवंबर 1913
  • उपस्थिति गाण – 15000 लोग (भील समाज के)
  • गोलीकांड – सार्जेंट नामक अंग्रेज ने
  • क्षतिग्रस्त – 1500 भील मारे गए
  • घटना नामित – 1913-1920 तक मानगढ़ कांड

• note :- 1. 1889 मैं अजमेर शहर से जारी राजस्थान समाचार पत्र (प्रथम हिंदी राजनीतिक दैनिक) के संपादक मुंशी समर्थनाथ चारण ने 1920 के अंत में मानगढ़ कांड को प्रथम जलियांवाला कांड नामित किया है।

2. 2012 को मानगढ़ कांड का शताब्दी वर्ष अशोक गहलोत की अध्यक्षता में मनाया गया जिसमें 12 करोड़ रुपए की लागत जनजातीय विकास के खर्चे करने का ऐलान किया।

3. मानगढ़ धाम में प्रतिवर्ष अश्विन पूर्णिमा के दिन इन शहीदों की याद में विशाल मेला लगता है।

4. एकी आंदोलन अथवा भोमट (Eki movement or Bhomat movement )

  • नेतृत्व – मोतीलाल तेजावत (आदिवासियों का मसीहा)
  • आंदोलन का प्रारंभ – 1. 1920 मातृकुंडिया चित्तौड़ से। 2. 1921 झामरकोटडा उदयपुर से।
  • आंदोलन की विषय वस्तु/कारण – 1. 1893 का अफीम राइफ एक्ट 2. झूमिंग खेती पर प्रतिबंध
  • झूमिंग खेती के उपनाम – 1. वालर कृषि 2. चिमाता कृषि
  • कृषि का उपयोग करने वाले भील व गरासिया जाति के लोग थे।
  • मोतीलाल तेजावत का दृष्टिकोण – गांधीवादी दृष्टिकोण

• सामान्य जनता की मांगों को सरकार के सामने रखने के लिए पत्र जारी किया गया- मेवाड़ की पुकार जो कि मेवाड़ी भाषा में लिखा गया।

  • आंदोलन में योगदान देने वाली संस्था :- मेवाड़ भील कोर संघ
  • स्थान – चित्तौड़
  • संस्था का समय – 1841
  • संस्थापक – धीर भाई भील
  • समकालीन गवर्नर जनरल – लॉर्ड डलहौजी (आधुनिक भारत का निर्माता)
  • संगठन को संरक्षण – 1853 में जे. सी. बुकर के द्वारा।

नोट :- 1. उपरोक्त संगठन को सहयोग मोतीलाल तेजावत आंदोलन के तहत प्राप्त होने लगा।

2. मोतीलाल तेजावत 1929 से 1936 तक ईडर पुलिस के पास बंधक रहा। अतः 12 मार्च 1930 को गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग नहीं ले सका।

3. 1944 में लॉर्ड वेवेल को तेजावत ने ज्ञापन दिया लॉर्ड वेवेल ने प्रतिबंध हटा लिए तथा मोतीलाल तेजावत ने इस आंदोलन की समाप्ति की घोषणा की।

एकी या भोमट आंदोलन का इतिहास

  • मोतीलाल तेजावत के आंदोलन को एकी इसलिए कहा गया है कि उन्होंने भीलो के दोनों वर्ग भोमिया व गरासिया को एक करने के लिए यह आंदोलन चलाया।
  • 1921 में तेजावत के नेतृत्व में भील चित्तौड़ की राशमी तहसील मातृकुंडिया नामक स्थान पर एकत्रित हुए
  • सरकार के समक्ष 21 मांगे प्रस्तुत की जिन्हें मेवाड़ की पुकार कहा गया। इनमें से तीन मांगे अस्वीकार कर दी गई फिर भी तेजावत ने अपना आंदोलन जारी रखा।
  • इसलिए तेजावत पर मेवाड़ रियासत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसलिए तेजावत गुजरात चले गए।
  • 7 March 1922 को मोतीलाल तेजावत के कहने पर भील किसान नींमडा गांव में एकत्रित हुए जहां स्थानीय जागीरदारों ने इस सम्मेलन पर गोली चलवाई इस गोलीकांड में 1220 भील मारे गए। इसके बाद तेजावत सिरोही रियासत आ गए

• 7 April 1922 को सिरोही के रोहिड़ा गांव में रुके हुए थे दत्त अंग्रेज अधिकारी सेटरन ने गांव को घेर कर गोलीबारी की इससे तेजावत घायल हो गए। बाद में गांधी के कहने पर तेजावत ने खेडब्रह्मा नामक स्थान पर समर्पण कर दिया था

  • तेजावत को कुंभलगढ़ के दुर्ग में नजर बंद करके रखा गया।
  • भील तेजावत को बड़े पिता के नाम से पुकारते थे।
  • मोतीलाल तेजावत को आदिवासियों का मसीहा कहां गया।

5. मीणा आंदोलन (meena protest)

  • नेतृत्व – ठक्कर बप्पा
  • प्रारंभ क्षेत्र – 1. जयपुर 2. सीकर 3. सवाई माधोपुर
  • आंदोलन का कारण – 1. जयराम पेशवा कानून 1918 2. क्रिमिनल एक्ट 1923-24
  • मीणा समाज का जन नेता – पंडित बंशीधर शर्मा
  • संगठन – मीणा क्षेत्रीय सभा (1920)
  • स्थान – जयपुर में
  • उद्देशय – मीणा समाज का नेतृत्व करना

प्रथम सत्याग्रह – 1933 में जयपुर में विफल रहा।

दूसरा सत्याग्रह – 1944 में नीम का थाना सीकर

  • आयोजक – पंडित बंशीधर शर्मा
  • नेतृत्व – जैन मुनि मगन सागर ने
  • ज्ञापन दिया – 1944 में जैन मुनि ने लॉर्ड वेवेल को
  • लॉर्ड वेवेल ने जयराम पेशवा कानून के अंतर्गत मीणा समाज के स्त्री व बच्चों को छूट दी।

नोट :- 1. 1952 में पंडित नेहरू के आदेश पर राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल ने जयराम पेशवा कानून का अंत कर दिया था।

2. जैन मुनि मगन सागर ने मीणा समाज पर आदि मीन पुराण साहित्य लिखा जिसमें मीणा जाति की 5200 शाखाओं का उल्लेख है।

मीणा आंदोलन का इतिहास

  • जैन मुनि मगन सागर जी के द्वारा मीणा पुराण नामक पुस्तक लिखी गई इसमें लिखा गया कि मीणा प्रारंभ में शासक हुए तथा इनका राज्य ढूंढाड मैं था।
  • मीणा ने दोसा के बड़ गुर्जरों के विरुद्ध आमंत्रण देकर नरवर (मध्य प्रदेश) से कच्छावा वंश के शासक तेजकरण या दूल्हे राय को बुलाया।
  • प्रारंभ में उन्होंने बड़ गुर्जरों को पराजित किया परंतु बाद में कछवाहो ने मीणा को ही पराजित कर दिया।
  • जिन मीणाओं की खेती योग भूमि थी उन्हें जमीदार मीणा कहा गया। तथा जिनको रियासत की सुरक्षा सौंपी उन्हें चौकीदार मीणा कहा गया
  • रियासत में कोई भी चोरी होने पर उसका भुगतान चौकीदार मीणाओं को ही करना होता था। बाद में चौकीदार मीणाओं ने चोरी करना प्रारंभ कर दिया था।

• 1924 में क्रिमिनल tribal act लागू हुआ

• 1920 में जयपुर रियासत के द्वारा जयराम पेशा कानून लागू किया गया इसके तहत 12 वर्ष से अधिक आयु के सभी मीणाओं को आपने निकटवर्ती स्थानों सुबह शाम उपस्थित होकर हाजिरी देनी होती थी।

  • इसके विरोध में 1933 में मीणा क्षेत्रीय सभा गठित की गई अप्रैल 1944 को चौकीदार मीणा का सम्मेलन नीमकाथाना सीकर में आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता मुनि मगन सागर जी ने की थी।
  • इसी सम्मेलन में जयपुर राज्य मीणा सुधार समिति गठित की गई जिसके अध्यक्ष पंडित बंशीधर शर्मा बनाए गए।
  • 31 दिसंबर 1945 व 1 जनवरी 1946 को उदयपुर में अखिल भारतीय देसी राज्य लोक परिषद का अधिवेशन आयोजित हुआ। इसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
  • पिछड़ी जातियों के मसीहा के नाम से प्रसिद्ध ठक्कर बाप्पा ने नेहरू से मुलाकात की व इस एक्ट के बारे में बताया
  • नेहरू ने जयपुर के प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल को पत्र लिखा।
  • 1946 में बच्चे व महिलाओं को इस एक्ट के तहत उपस्थित होने से छूट प्रदान की गई तथा 1952 में इसे पूरे एक्ट को समाप्त कर दिया गया।

6. मेव आंदोलन(Meo Movement)

  • औरंगजेब के समय हिंदुओं को इस्लाम धर्म में परिवर्तित किया गया तथा यह परिवर्तित मुसलमान मेल कहलाए।
  • मत्स्य क्षेत्र में शासक शिकार के लिए जंगली सूअरों को पालते थे ये सूअर मेवों की फसल को बर्बाद करते थे। इसी कारण से मेवों के द्वारा सूअर का शिकार किया जाता था।
  • जिस पर 1927 में अलवर के शासक जयसिंह ने प्रतिबंध लगा दिया।
  • करौली के युवक मदन पाल ने इसके लिए भूख हड़ताल भी रखी।
  • 1932 में मोहम्मद हादी ने भरतपुर में अंजुमन खालिद अल इस्लाम नामक संस्था बनाई इसके बाद इसका नेतृत्व गुड़गांव के नेता चौधरी यासीन खान के द्वारा किया गया।
  • जिस कारण से यह हिंदू व मेव के मध्य सांप्रदायिक दंगों में बदल गया।
  • 1933 में तिजारा (अलवर) मैं सांप्रदायिक दंगे भड़के जिन्हें रोकने के लिए जयसिंह नाकाम रहा इसलिए इसे भारत से निष्कासित कर दिया गया।

राजस्थान में प्रमुख जन आंदोलन एवं क्रांतिकारी घटनाएं

  1. तोल आंदोलन( tol movement)
  • यह आंदोलन जोधपुर रियासत में चांदमल सुराणा के नेतृत्व में चलाया गया था।
  • यह आंदोलन 1920-21 ईसवी में जोधपुर रियासत द्वारा 100 तोल के सेर को 80 तोल के सेर में बदलने के विरोध में चलाया गया था।

2. शुद्धि आंदो लन(Purification movement)

  • संबंध – भरतपुर (1928)
  • नेतृत्व – गोकुल जी वर्मा के द्वारा
  • घटना – 1. जबरन धर्म परिवर्तन की घटना 2. मानव तस्करी को प्राथमिकता 3. मांस व्यापार को प्राथमिकता
  • घटना के समय समकालीन जागीरदार – राव कृष्ण सिंह
  • शुद्धिकरण के लिए आमंत्रण – स्वामी दयानंद सरस्वती को

नोट :- भारत में शुद्धि आंदोलन के प्रणेता स्वामी दयानंद सरस्वती थे जिन्होंने 1881-82 में शुद्धि आंदोलन को प्रारंभ किया।

  • 1921 ईसवी में महाराजा कृष्ण सिंह द्वारा राजस्थान में यह आंदोलन चलाया गया।

3. मेयो कॉलेज बम कांड(Mayo College Bomb Scandal)

  • 1934 ईस्वी में भारत के वायसराय लोड वेलिंगटन की अजमेर यात्रा के दौरान ज्वाला प्रसाद और फतेह चंद जैसे क्रांतिकारी ने उनकी हत्या की योजना बनाई परंतु पुलिस की सक्रियता के कारण या योजना असफल हो गई।
  • मेयो कॉलेज की स्थापना 1875 ईसवी में अजमेर में की गई थी जिसका मुख्य उद्देश्य राजकुमारों को अंग्रेजी शिक्षा देकर उन्हें अंग्रेजों को प्रति स्वामी भक्त बनाना था।
  • मेयो कॉलेज में सर्वप्रथम अलवर महाराजा मंगल सिंह ने प्रवेश लिया था।

4. तसिमो कांड(Tasimo scandal)

  • 11 अप्रैल 1946 के दिन धौलपुर रियासत के तसिमो गांव मैं कांग्रेस के एक सभा के दौरान तिरंगे की रक्षा के लिए ठाकुर छतर सिंह और ठाकुर पंचम सिंह रियासती पुलिस की गोले का शिकार हुए।

5. नीमेजआरा हत्याकांड

  • 1914 ईस्वी में केसरी सिंह बारहठ, अर्जुन लाल सेठी तथा मोती चंद्र ने मिलकर निमेजआरा मैं डकैती की योजना बनाई।
  • इस डकैती के दौरान महंत की हत्या कर दी गई।
  • इस हत्याकांड के आरोप में मोतीचंद को फांसी की सजा सुनाई गई तथा अर्जुन लाल सेठी को 7 वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई।

6. डाबड़ा कांड(Dabra scandal)

  • 13 मार्च 1947 को डाबड़ा गांव में मारवाड़ लोक परिषद द्वारा एक किसान सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • डाबड़ा के जागीरदारों ने इस सम्मेलन पर गोली चलवाई इस गोलीकांड में चुन्नीलाल शर्मा सहित 4 किसान मारे गए।

7. पूनावाड़ा कांड

  • मई 1947 ईस्वी में डूंगरपुर रियासत के पुनवाड़ा गांव में पाठशाला की इमारत को रियासती सैनिक द्वारा नष्ट कर दिया गया तथा इस पाठशाला के अध्यापक शिवराम भील को बुरी तरह से पीटा गया।

8. रास्तापाल कांड

  • घटना – 19 जून 1947 की
  • प्रमुख – काली बाई भील

काली बाई भील के बारे में

  • गांव – रास्तापाल
  • पंचायत समिति – सीमलवाडा
  • तहसील – सागवाड़ा
  • जिला – डूंगरपुर
  • काली बाई के आदर्श – नाना भाई भील
  • काली बाई के शिक्षक – सेंगा भाई

• समकालीन जागीरदार – राव अभय सिंह के काल की घटना

  • घटना का विषय – सेंगा भाई को जमीदार के आदेश से सेहू गांव डूंगरपुर में लाया गया और गाड़ी के बांधकर कठोर यातनाएं दी गई
  • काली बाई भील ने रस्सी काट कर अपने गुरु की जान बचाई परंतु खुद शहीद हो गई और उन्हें बचाते हुए नाना भाई भील भी शहीद हो गए।
  • दोनों के स्मारक के गैप सागर झील के किनारे बनाए गए हैं। स्मारक का उद्घाटन 1956 में मोहनलाल सुखाड़िया के द्वारा किया गया
  • उपरोक्त घटना के समय डूंगरपुर रियासत के शासक रावल लक्ष्मण सिंह थे।

9. हार्डिग बम कांड

  • 23 दिसंबर 1912 को भारतीय गवर्नर जनरल लॉर्ड हार्डिंग के जुलूस पर दिल्ली के चांदनी चौक में राजस्थान के क्रांतिकारी जोरावर सिंह बारहठ व प्रताप सिंह बारहठ ने बम फेंका इस बम कांड में लॉर्ड हार्डिंग बच गए परंतु उनका अंगरक्षक मारा गया।
  • प्रताप सिंह बारहठ को गिरफ्तार करके बरेली जेल में रखा गया जहां 27 मई 1918 के दिन जेल में यातना सहते हुए प्रताप सिंह की मृत्यु हो गई
  • अंग्रेज अधिकारी चार्ल्स क्लीवलैंड ने प्रताप से कहा था कि ” तेरी मां तेरे लिए दिन रात रोती है”

राजस्थान के जनजाति आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

Q. 1 किस पंचायत की स्थापना 1916-17 में की गई उस संगठन का नाम था ?

उत्तर – बिजोलिया

Q.2 मेवाड़ का बिजोलिया आंदोलन किसके नेतृत्व में हुआ था ?

उत्तर – विजय सिंह पथिक

Q. 3 बेगू किसान आंदोलन में कौन नेता शहीद हुए ?

उत्तर – कृपा जी

Q. 4 जयपुर में सर्वप्रथम जन चेतना का सूत्रपात किसने किया ?

उत्तर – अर्जुन लाल सेठी

Q. 5 बिजोलिया आंदोलन में कौन से जाति के किसान सर्वाधिक संख्या में थे ?

उत्तर – धाकड़ जाति

Q. 6 मोतीलाल तेजावत का एकी आंदोलन कहां से प्रारंभ हुआ ?

उत्तर – चित्तौड़गढ़ से

Q. 7 रूपा जी व कृपा जी किसान नेता का संबंध किस आंदोलन से है ?

उत्तर- बेगू

Q. 8 नींमडा हत्याकांड किस से संबंधित है?

उत्तर- एक के आंदोलन से

Q. 9 सूअर आंदोलन किस राज्य से संबंधित था ?

उत्तर- अलवर किसान आंदोलन से

Q. 10 राजस्थान में भील आंदोलन के मुख्य कौन थे ?

उत्तर – गुरु गोविंद गिरी

इस लेख के माध्यम से हमने राजस्थान के जनजाति या आदिवासी और राजस्थान के प्रमुख जन आंदोलन एवं क्रांतिकारी घटनाएं के बारे में मैंने आपको बताया है यदि आपको यह लेख और जानकारी अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों को भी शेयर करें और इसे ध्यान से पढ़ें आगे भी आपको और अच्छे से जानकारी दी जाएगी ताकि आपके एग्जाम में आपको फायदा हो सके !धन्यवाद

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May 30, 2020

पर्यावरण संबंधी आंदोलन Environmental Movement

खेजड़ली आंदोलन

वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के विरुद्ध प्रथम जन आंदोलन का उदय राजस्थान के खेजड़ली ग्राम में जो जोधपुर से 25 किलोमीटर दूर है 1731 में हुआ इस ग्राम व उसके आसपास के क्षेत्र में विश्नोई जाति की बहुलता है इस ग्राम की संस्कृति का आधार 20+9 सूत्र है जिनमें से एक महत्वपूर्ण सूत्र वृक्षों की रक्षा करना है

खेजड़ली ग्राम से जलाने की लकड़ी प्राप्त करने के लिए जोधपुर के तत्कालीन महाराजा द्वारा आदेश दिए गए इस आदेश के तहत वृक्षों के काटे जाने के विरोध में एक साहसी महिला अमृता देवी के नेतृत्व में आंदोलन छेड़ा गया

इस आंदो लन में बिश्नोई समुदाय के 363 सदस्य जो कि अपने प्रिय खेजड़ी के वृक्षों को बचाने के लिए इनसे चिपक गए वृक्षों के साथ ही काट दिए गए इन 363 बिश्नोईयों में अमृता देवी के पति रामोजी तथा उनकी तीन पुत्रियां भी सम्मिलित थी राजस्थान के http://खेजड़ली में वृक्षों की कटाई के विरुद्ध हुए इस आंदो लन को प्राकृतिक वनस्पति के संरक्षण की दिशा में एक चिंगारी कह सकते हैं

वर्तमान में राज्य सरकार ने खेजड़ी वृक्ष को राज्य वृक्ष घोषित कर बिश्नोईयों के बलिदान के सम्मान देने का प्रयास किया है

चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन पर्यावरण आंदो लन

उत्तर प्रदेश में टिहरी गढ़वाल के ग्रामीण क्षेत्र में प्राकृतिक वन संपदा के संरक्षण के लिए 1972 में एक आंदो लन आरंभ हुआ क्योंकि इस आंदो लन के अंतर्गत हैं स्थानीय निवासियों द्वारा वृक्षों से चिपक कर उनके काटे जाने के विरुद्ध एक संघर्ष का आह्वान किया गया था अतः इस आंदो लन को http://चिपको_आंदोलन नाम दिया गया है

वर्तमान चिपको आंदो-लन

वर्तमान स्वरूप में चिपको आंदोलन का प्रारंभ नवसृजित उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले के गोपेश्वर नामक नगर की सीमाओं में स्थित मंडल नामक ग्राम में 27 मार्च 1973 को हुआ जब तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक खेलकूद की सामग्री बनाने वाली इलाहाबाद की साइमन कंपनी को अंगू के पेड़ काटने की इजाजत दी गई

वहां के स्थानीय निवासियों ने एक रबर में कहा यदि पेड़ काटने के लिए कोई आएगा तो हम पेड़ों से चिपक कर उनकी रक्षा करेंगे चिपको आंदोलन के प्रेरणा वर्तमान में टिहरी आंदोलन के जनक श्री सुंदरलाल बहुगुणा कथा चंडी प्रसाद भट्ट रहे हैं

हिमालय क्षेत्र में वनों की कटाई को रोकने की दिशा में 1972 में प्रथम संगठित आंदोलन चमोली गढ़वाल क्षेत्र की महिला गौरा देवी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ इनके फल स्वरुप सरकार को अलकनंदा के 1300 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को संवेदनशील घोषित करते हुए 10 वर्षों के लिए वृक्षों की कटाई पर रोक लगानी पड़ी

अतः चिपको आंदोलन जो आज बदलती पारिस्थितिकी है संदर्भ में पर्यावरण की अंतरराष्ट्रीय आवाज बन चुका है चमोली गढ़वाल क्षेत्र की ही देन है

इस प्रकार 1731 की अमृता देवी वह 1972 की गौरा देवी के रूप में चिपको आंदोलन में महिलाओं का योगदान भारत में सर्वोपरि रहा है वह इन्होंने हमारे देश को गौरवान्वित किया है

चिपको आंदोलन के उद्देश्य

  1. वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकना
  2. पारिस्थितिकी असंतुलन बनाने रखने के लिए अत्यधिक वृक्षारोपण करना
  3. वनों की कटाई रोकना

वनों के प्रति लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए विशेष सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता हेतु वृक्षों की भूमिका को जन-जन में फैलाने के लिए चिपको आंदोलन कार्यकर्ताओं द्वारा पद यात्राएं की जाती हैं

तथा शिविर लगाए जाते हैं इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को वनों व पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में बताया जाता है

ग्रामीण विकास हेतु चिपको आंदोलन के मुख्य उद्देश्य

  1. व्यवसायिक महत्व वाले वृक्षों की तुलना में पर्यावरणीय महत्व वाले वृक्षों का अधिक रोपण करना
  2. सामाजिक वानिकी तथा कृषि वानिकी का विकास करना
  3. पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए बड़े बांधों के निर्माण का विरोध करना
  4. आर्थिक विकास के लिए फलदार वृक्षों को उगाना

चिपको आंदोलन की तर्ज पर ही कर्नाटक में यानडुरंग एगडे के नेतृत्व में एपीको आंदोलन प्रारंभ हुआ है कन्नड़ भाषा में एपिको का अर्थ है चिपको

चिपको आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है जनमानस में वृक्षों के संरक्षण के प्रति चेतना का जागृत होना

सन 1977 में चिपको आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने घोषणा की कि वनों के मुख्य उत्पाद लकड़ी नहीं बल्कि मृदा जल व ऑक्सीजन है टिहरी गढ़वाल क्षेत्र की महिलाओं ने एक नारा दिया है जिसे चिपको नारा कहते हैं यह नारा इस प्रकार है

क्या है जंगल के उपचार ? मिट्टी पानी और बयार
मिट्टी पानी और बयार जिंदाा रहने के आधार

उपसंहार

प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर एम एस स्वामीनाथन के शब्दों में चिपको आंदोलन एक प्रत्यक्ष दर्शन है एक जीवंत विचार है

सुंदरलाल बहुगुणा के अनुसार चिपको केवल हिमालय की समस्या नहीं है वरुण समस्त मानव जाति की समस्याओं का उत्तर है

अतः प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह अपने आसपास के पेड़ों की रक्षा करें तथा नए वृक्ष लगाकर पर्यावरण समस्याओं को समाधान करने में अपना समस्त योगदान करें पर्यावरण आंदोलन

महत्वपूर्ण प्रश्न

खेजड़ली के बलिदान से संबंधित है

A बाबा आमटे।

B अमृता देवी

C अरुंधति राय

D उपरोक्त सभी

चिपको आंदोलन से संबंधित है

A सुंदरलाल बहुगुणा

ब मेघा पाटकर

c एम एस स्वामीनाथन

D उपरोक्त सभी

पर्यावरण आंदोलन पर्यावरण आंदोलन

May 29, 2020

राजस्थान में किसान व जनजाति और आदिवासी आंदोलन

  • देखिए साथियों व मित्रों राजस्थान में किसान आंदोलन यह टॉपिक परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए आप ध्यान से इस टॉपिक को पढ़ें देखिए आपको मजा आएगा राजस्थान के बहुत ही महत्वपूर्ण किसान आंदोलन हुए हैं। जिनमें जनजातीय आंदोलन या आदिवासी आंदोलन बहुत ही महत्वपूर्ण है। सबसे पहले राजस्थान में किसान आंदोलन की रूपरेखा देखेंगे किस तरह से यह आंदोलन आगे बढ़ा इसको आप ध्यान से पढ़ें इसमें आपको कंप्लीट जानकारी मिलेगी।

राजस्थान में किसान आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण बातें

  • भारत की रियासत में कृषि योग्य भूमि का मालिक जमीदार को माना गया। परंतु इस जमीन पर उगे अनाज का मालिक शासक को माना गया। इस अनाज पर कर लगाने का व इसे वसूलने का अधिकार शासक को दिया गया है। परंतु शासक सामान्यतः इस कर को जमीदार के माध्यम से वसुलता था।
  • इसलिए शासक व जमीदार के संबंध अच्छे बने रहते थे। परंतु राजपूताना स्टेट काउंसिल इस स्थापना के बाद कंपनी अपने कर्मचारियों के माध्यम से लगान वसूल करने लगी। इसलिए जमीदार का महत्व कम हो गया।
  • इसी कारण से कई जमीदारों ने 1857 की क्रांति में कई जमीदारों ने क्रांतिकारियों को सहयोग प्रदान किया।
  • क्रांति के बाद अंग्रेजों ने जमीदार को किसानों पर लाग-बाग लगाने का अधिकार दे दिया।
  • अंग्रेजों की मौद्रिक नीति के कारण किसानों को अपनी आय का तीन चौथाई पैसा कर के रूप में देना होता था।
  • एक रिपोर्ट के अनुसार बिजोलिया के किसान अपनी कुल आय का 89% पैसा कर के रूप में देते थे। क्योंकि किसानों से प्रत्यक्ष कर की वसूली जमीदारों के द्वारा वसूल की जाती थी इसलिए प्रारंभिक किसान आंदोलन जमीदारों के विरुद्ध हुई ना की राज्य व अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध ।

राजस्थान के प्रमुख व महत्वपूर्ण किसान आंदोलन

राजस्थान के प्रमुख व महत्वपूर्ण किसान आंदोलन निम्नलिखित हैं जोकि सबसे पहले आपको नाम बता देते हैं फिर आपको विस्तार से इन आंदोलनों के बारे में पढ़ेंगे।

  • बिजोलिया किसान आंदोलन
  • बीकानेर किसान आंदोलन
  • बेगू किसान आंदोलन
  • बूंदी का किसान आंदोलन
  • शेखावाटी किसान आंदोलन
  • अलवर किसान आंदोलन
  • दुधवा-खारा किसान आंदोलन
  • सीकर किसान आंदोलन
  • भरतपुर किसान आंदोलन
  • लसाडिया आंदोलन
  • मारवाड़ किसान आंदोलन
  • मातृकुंडिया किसान आंदोलन
  • झुंझुनू किसान आंदोलन
  • सीकर शेखावाटी किसान आंदोलन
  • मंडोर किसान आंदोलन

देखें सबसे पहले इन किसान आंदोलन के बारे में विस्तार से जानेंगे फिर आगे आपको राजस्थान के महत्वपूर्ण जनजाति या आदिवासी और कुछ गोलीकांड व हत्याकांड के बारे में जानेंगे तो आप इस टॉपिक से जुड़े सभी सवाल आपको इसी में मिलेंगे।

1. बिजोलिया किसान आंदोलन

  • संबंधित – गिरधारीपुरा गांव शाहपुरा (भीलवाड़ा)
  • ठिकाना – बिजोलिया
  • नेतृत्व – साधुसीताराम दास ने
  • प्रमुख जागीर – ऊपरमाल जागीर (मेवाड़ की A श्रेणी की जागीर)
  • Note :- 17 March 1527 ईस्वी को मेवाड़ के शासक सांगा ने खानवा का युद्ध के समय यह जागीर सहयोगी अशोक परमार को उपहार स्वरूप भेट कर दी थी।
  • तात्कालिक जागीरदार – राव कृष्ण सिंह परमार (इन्होंने प्रमुख लाग-बाग 84 प्रकार की लगाई थी व 32 कर का उन्मूलन मानिक लाल वर्मा के आदेश पर किया था। )

चर्चित कर

  • चवरी कर (कन्या के विवाह पर)
  • तलवार बंधाई कर।
  • उत्तराधिकार शुल्क।
  • विजय सिंह पथिक को राज्य आने का आमंत्रण सान्याल के निमंत्रण पर।

सामाजिक संगठन

विद्या प्रचारिणी सभा (1914)

  • स्थान – चित्तौड़गढ़
  • संस्थापक – विजय सिंह पथिक
  • उद्देश्य – जन जागृति लाना
  • संरक्षिका – नारायण देवी पथिक (शिक्षिका)
  • Note – विजय सिंह पथिक के दो पत्नी थी। 1. जानकी बाई पथिक 2. नारायण देवी पथिक
  • विजय सिंह पथिक (भूपसिंह) 1916 में बिजोलिया किसान आंदोलन में प्रवेश करते हैं।

क्षेत्रीय संगठन – ऊपरमाल पंच बोर्ड (1917)

  • संस्थापक – विजय सिंह पथिक
  • प्रथम अध्यक्ष – मन्ना पटेल
  • सहयोगी – 1. ब्रहमदत्त चारण 2. फतेहकर्ण चारण 3. नानक जी पटेल 4. ठाकरी जी पटेल
  • उपरोक्त संगठन में हरियाली अमावस को उमाजी का खेड़ा नामक स्थान से आंदोलन प्रारंभ किया।
  • नोट:- 1919 कोई क्षेत्रीय संगठन को समझाने के लिए बिंदुलाल आचार्य का गठन और कार्य किया गया।

राजनीतिक संगठन – राजस्थान सेवा संघ (1919)

  • स्थान – वर्धा (महाराष्ट्र)
  • संस्थापक – हरिभाई किंकर
  • उद्देशय – पत्र-पत्रिकाओं को राजनीतिक संरक्षण देना।
  • संगठन के भामाशाह :-
  • जमुनालाल बजाज
  • विजय सिंह पथिक
  • दामोदर लाल व्यास
  • केसरसिंह बाराहट

संरक्षित पत्र

  • कानपुर से – प्रताप
  • वर्धा (महाराष्ट्र) – राजस्थान केसरी
  • उदयपुर से – राजस्थान संदेश
  • अजमेर से – नवीन राजस्थान
  • 1920 में राजस्थान में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना अजमेर में विजय सिंह पथिक के द्वारा की गई।
  • 1924 में गांधी के आदेश पर नवीन कार्यकर्ताओं के प्रवेश हुए जो निम्न है। :-
  • जमनालाल बजाज
  • हरिभाई उपाध्याय
  • रामनारायण चौधरी
  • 1924 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन बेलगांव में महात्मा गांधी के नेतृत्व में आयोजित हुआ।
  • नोट :- गांधी जी ने 1940 – 41 में कस्तूरबा गांधी के लिए निजी सचिव महादेव देसाई आंदोलन का सर्वेक्षण करने के लिए भेजा और उन्होंने मेवाड़ के शासक महाराणा भूपाल सिंह को ज्ञापन दिया।
  • महाराणा भूपाल सिंह के आदेश पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया
  • यह आंदोलन भारत का सबसे बड़ा अहिंसात्मक आंदोलन कहा जाता है।
  • जॉन स्मिथ के शब्दों में रक्तहीन क्रांति के नाम से चर्चित है।

बिजोलिया किसान आंदोलन का इतिहास

  • मेवाड़ रियासत की ऊपरमाल जागीर का प्रशासनिक अधिकरण बिजोलिया था। बिजोलिया के अंतर्गत 79 गांव आते थे तथा 60% आबादी धाकड़ जाति के किसानों की थी।
  • खानवा के युद्ध के बाद अशोक परमार को सांगा ने ऊपरमाल की जागीर प्रदान की।
  • 1894 में कृष्ण सिंह बिजोलिया के जमीदार बने इनके समय किसानों से 1/2 भू राजस्व व 84 प्रकार की लाग-बाग ली जाती थी।
  • 1897 ईस्वी में बिजोलिया के किसान गिरधरपुरा (भीलवाड़ा) में गंगाराम धाकड़ के पिता के मृत्यु भोज के अवसर पर एकत्रित हुए व बिजोलिया के सरकारी पुस्तकालय कक्ष साधु सीताराम दास की सलाह पर ठाकरे पटेल व नानक पटेल को कृष्णसिंह की शिकायत करने के लिए मेवाड़ के शासक फतेह सिंह के पास भेजा गया।
  • फतेह सिंह ने हामिद हुसैन नामक जांच अधिकारी को बिजोलिया भेजा। जिसने किसानों के पक्ष में रिपोर्ट भेजी परंतु फतेह सिंह ने कृष्ण सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं की।
  • इस कारण से कृष्ण सिंह ने दोनों व्यक्तियों को जागीर से निष्कासित कर दिया।₹5 का जुर्माना वसूलने के बाद में उन्हें जागीर में प्रवेश दिया गया
  • 1903 में कृष्ण सिंह ने किसानों पर चवरी कर लगाया। इसके विरोध में 1905 तक बिजोलिया में किसी की भी शादी नहीं हुई।
  • बिजोलिया के किसान ग्वालियर जाने लगे तथा कृष्ण सिंह ने समझौता करके चवरी कर को आधा कर दिया गया।
  • 1996 में पृथ्वी सिंह बिजोलिया के जमीदार बने। इन्होंने तलवार बंधाई शुल्क का भार किसानों पर लगा दिया।
  • राजस्थान में केवल जैसलमेर रियासत को छोड़कर सभी रियासतों के राजा जमीदारों से यह कर वसूलते थे ।

बिजोलिया किसान आंदोलन का आगे का इतिहास

  • 1913 में बिजोलिया के किसानों ने भूमि को परती रखा।
  • इसके लिए किसानों को प्रेरित करने का कार्य है पंडित भीमदेव शर्मा, फतेहकरण चारण, व सीताराम दास ने किया।
  • 1914 में प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ। इस समय ब्रिटिश सरकार प्रत्येक भारतीय से कर के रूप में ₹14 वसूल कर रही थी। तथा नारायण सिंह पटेल नामक किसान ने यह पैसा देने से इनकार कर दिया इस कारण इसे गिरफ्तार करके बिजोलिया की जेल में रखा गया।
  • लगभग 2000 किसानों ने नारायण सिंह को जेल से रिहा करवाया इसकी रिहाई इस आंदोलन में किसानों की प्रथम विजई मानी गई।
  • 1914 में पृथ्वी सिंह की मृत्यु हुई तथा उसका नन्ना मुन्ना केसरी सिंह जमीदार बना।
  • इस कारण बिजोलिया में (court of wards ) का गठन किया गया।
  • अमर सिंह राणावत को बिजोलिया का प्रशासक बनाया गया तथा डूंगर सिंह भाटी इसके सहायक अधिकारी बनाए गए।

विजयसिंह पथिक का किसान आंदोलन में प्रवेश

  • विजय सिंह पथिक का वास्तविक नाम – भूपसिंह
  • निवासी – उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के गुठावली गांव के निवासी थे।
  • 1857 की क्रांति के 50 साल पूर्ण होने के उपलक्ष में पूरे भारत में क्रांति योजना बनाई गई थी। इसके लिए विजय सिंह पथिक को राजस्थान भेजा गया।
  • 1914 ईस्वी में प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ था तथा रासबिहारी बॉस ने पूरे भारत में विद्रोह की योजना बनाई।
  • राजस्थान में इसका नेतृत्व विजय सिंह पति को सौंपा तथा खेरवा (अजमेर) के जमीदार गोपाल सिंह इनके सहयोगी बनाए गए।

  • परंतु अंग्रेजों को योजना का पता चल गया था तथा पति को खेरवा के जंगलों से गिरफ्तार करके टॉडगढ़ दुर्ग में नजरबंद करके रखा गया । यहां से फरार होकर विजय सिंह पथिक चित्तौड़ की है ओछड़ी गांव में पहुंचे और हरिभाई किंकर के साथ मिलकर विद्या प्रचारिणी सभा बनाई
  • 1916 में इस सभा के सम्मेलन में बिजोलिया के साधु सीतारामदास व मंगल सिंह भाग लेने आए। जिन के आग्रह पर विजय सिंह पथिक इस आंदोलन में शामिल हुए।
  • विजय सिंह पथिक ने बिजोलिया के निकट उमा जी का खेड़ा गांव को अपना मुख्यालय बनाया।
  • 1917 में बारीसाल गांव (भीलवाड़ा) में 13 सदस्यों वाले ऊपरमाल पंच बोर्ड का गठन किया। जिसके अध्यक्ष मन्ना पटेल बनाए गए।
  • इस बोर्ड का कार्य था किसानों को लगान न देने के लिए प्रेरित करना वह किसानों के आपसी मुकदमों की सुनवाई करना।
  • 1918 में विजय सिंह पथिक ने मुंबई जाकर गांधी जी से मुलाकात की गांधी ने विजय सिंह पथिक को राष्ट्रीय पथिक व अपने निजी सचिव महादेव देसाई को बिजोलिया भेजा।
  • महादेव देसाई ने मेवाड़ के प्रधानमंत्री रामाकांत मालवीय से मुलाकात की तथा मालवीय ने अप्रैल 1918 में 3 सदस्य बिंदुलाल भट्टाचार्य आयोजन का गठन किया इसके अन्य सदस्य निम्न है। :-
  • अमर सिंह राणावत
  • हकीम अजमल
  • इन्होंने भी किसानों के पक्ष में रिपोर्ट दी।
  • 1919 में कांग्रेस का अधिवेशन अमृतसर में आयोजित हुआ जिसमें विजय सिंह पथिक ने भाग लिया।
  • तिलक ने इस आंदोलन का मुद्दा उठाया परंतु गांधी व मालवीय को तिलक का समर्थन नहीं किया।
  • 1919 में ही वर्धा (महाराष्ट्र) मैं राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की।
  • 1920 में कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन हुआ इसमें बिजोलिया किसान आंदोलन से संबंधित एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

बिजोलिया किसान आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित करने का श्रेय

  • इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित करने का श्रेय कानपुर से गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा प्रकाशित प्रताप नामक समाचार पत्र के माध्यम से किया इसके अलावा प्रयाग से प्रकाशित व कोलकाता से प्रकाशित भारत मित्र व तिलक ने मराठा नामक समाचार पत्र से इस आंदोलन को प्रकाशित किया था।
  • रामनारायण चौधरी व विजय सिंह पथिक के द्वारा ऊपर माल डंका नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया गया।
  • असहयोग आंदोलन के समय सरकार के दबाव में आकर ए .जी .जी रॉबर्ट हॉलैंड व मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट विलकिंग्सन को बिजोलिया भेजा था। 11 फरवरी 1922 को उन्होंने किसानों के साथ समझौता किया।
  • इस समझौते में किसानों की ओर से रामनारायण चौधरी, माणिक्य लाल वर्मा, व ऊपर माल पंच बोर्ड अध्यक्ष मोतीचंद के द्वारा भाग लिया गया।
  • इस समय 74 लाग- बाग की सूची दी गई जिनमें से 33 को माफ कर दिया गया

बिजोलिया से संबंधित अन्य तथ्य

  • विलियम ट्रेंच को बिजोलिया का भूमि बंदोबस्त अधिकारी बनाया गया।
  • मेवाड़ के जमीदारों ने इस समझौते का विरोध किया।
  • सितंबर 1923 में विजय सिंह पथिक को बेगू किसान आंदोलन में गिरफ्तार किया गया।
  • 1927 में रिहा किया गया था। पथिक रिहा होकर बिजोलिया आने पर बिजोलिया के किसानों को जमीदारों से भूमि किराए पर न लेने की सलाह दी। परंतु इस भूमि को धाकड़ के अलावा अन्य जाति के किसान व ग्वालियर के किसानों ने किराए पर ले लिया

  • विजय सिंह पथिक व चौधरी में मतभेद हो गए।
  • 1929 तक विजय सिंह पथिक इस आंदोलन से पूरी तरह से अलग हो गए।
  • रामनारायण चौधरी की पत्नी अंजना देवी चौधरी सविनय अवज्ञा आंदोलन में गिरफ्तार की गई।
  • राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम में गिरफ्तार होने वाली प्रथम महिला थी।
  • जमनालाल बजाज, हरिभाई उपाध्याय के द्वारा भी इस आंदोलन का नेतृत्व किया गया।
  • उपाध्याय की पत्नी रामादेवी इस आंदोलन में महिलाओं का नेतृत्व प्रदान किया।
  • यह आंदोलन 1941 में समाप्त हुआ। जब मेवाड़ के प्रधानमंत्री T.राघवचारी ने अपने राजस्व अधिकारी मोहन सिंह मेहता को बिजोलिया भेजा।
  • मेहता ने मानिक लाल वर्मा की मध्यस्था से किसानों के साथ समझौता किया।
  • मानिक लाल वर्मा ने इस आंदोलन के दौरान पंछीड़ा नामक गीत लिखा था।
  • इस आंदोलन का जन्मदाता साधु सीताराम दास को माना जाता है।
  • राजस्थान में किसान आंदोलन का जन्मदाता विजय सिंह पथिक को मानते हैं।

विजय सिंह पथिक की पुस्तक

  • विजय सिंह पथिक के निम्नलिखित पुस्तक है जो कि निम्न है। :-
  • What are the Indian states
  • अजमेरू
  • प्रमोदिनी

• गेथेट के अनुसार” यह एशियाई का सर्वाधिक लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन है।

• इस आंदोलन का संदेशवाहक तुलसीभील था।

  • भंवरलाल ने अपने सॉन्ग के माध्यम से इस आंदोलन को रूसी क्रांति के सामान का तथा फतेह सिंह को जार कहा।
  • यह आंदोलन प्रारंभ हुआ उस समय फतेह सिंह मेवाड़ के शासक थे और समाप्ति के समय भुपालसिंह शासक थे।

2. बीकानेर किसान आंदोलन

  • बीकानेर के शासक के गंगासिंह ने 1925 में गंगनहर का निर्माण प्रारंभ करवाया। यह नहर 1927 में बनकर पूर्ण हुई थी।
  • इसके निर्माण पर जितना भी व्यय हुआ पूरा गंगासिंह ने दिया था। परंतु इसके पश्चात सिंचाई हेतु पूरा पानी उपलब्ध नहीं करवाया गया। तथा इस सिंचाई सुविधा के बदले वसूले जाने वाले कर को पूरी शक्ति के साथ वसूल किया जाता था।
  • गंगासिंह जब दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने गए जब चंदनमल बहर ने द्वारा लिखित बीकानेर एक दिग्दर्शिका नामक पुस्तिका के माध्यम से गंगा सिंह की आलोचना की।
  • गंगासिंह गोलमेज सम्मेलन बीच में ही है छोड़ कर लौटे तथा 1932 में सार्वजनिक सुरक्षा कानून लागू किया।

सार्वजनिक सुरक्षा कानून नियम के प्रावधान

  • सार्वजनिक सुरक्षा कानून नियम में निम्नलिखित प्रावधान थे जोकि निम्न प्रकार से :-
  • किसी भी व्यक्ति को यह संदेश हो कि वह राज्य विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो तो उसे रियासत से निष्कासित किया जा सकता था।
  • किसी अपराध में गिरफ्तार होने पर लंबी अवधि तक के जमानत नहीं मिलती थी व कर्ज़ को ना देने पर अपराध मान लिया गया

• इसे काला कानून कहा गया।

  • गांधीजी ने इसकी तुलना रोलेट एक्ट से की है।
  • नेहरू ने कहा कि जिस रियासत में कुमकुम पत्रिका सेंसर होती हो उस रियासत का शासक है इंसान नहीं हैवान है।
  • 1937 में उदासर गांव से जीवन लाल चौधरी के द्वारा प्रथम संगठित किसान आंदोलन प्रारंभ किया गया।
  • 1941 में रघुवर दयाल ने बीकानेर राज्य प्रजा परिषद की स्थापना की।
  • इसके कार्यकर्ताओं के द्वारा 30 जून से 1 जुलाई 1946 को रायसिंहनगर में किसानों का एक सम्मेलन बुलाया गया। जिसकी प्रशासन ने अनुमति दे दी थी।
  • केवल झंडे के प्रयोग को प्रतिबंधित किया गया था परंतु कुछ लोग झंडे ले आए जिस कारण से गोलाबारी में बीरबल सिंह नामक व्यक्ति मारा गया। इसकी स्मृति 6 जुलाई को किसान दिवस व 17 जुलाई को बीरबल दिवस मनाया जाता है।

3. बेगू किसान आंदोलन

  • बेगू किसान आंदोलन के बारे में सबसे पहले महत्वपूर्ण तथ्यों को देखेंगे।

बेगू किसान आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • सम्बन्ध – मेनाल गांव (भीलवाड़ा)
  • नेतृत्व – रामनारायण चौधरी
  • दायित्व देने वाले – विजय सिंह पथिक
  • समर्थन करने वाले – जयनारायण व्यास
  • आंदोलन की विषय वस्तु या कारण – 1. स्थाई कर 2. बंदोबस्त कर
  • किसान नेता – रूपाजी व कृपाजी (बूंदी से)
  • समकालीन जागीरदार – रावअनूप सिंह के काल की घटना
  • सत्याग्रह – 13 जुलाई 1923 को (गोविंदपुरा, चित्तौड़गढ़)
  • नेतृत्व – रूपाजी व कृपाजी (सत्याग्रह का)
  • समझाने के लिए कमीशन – ट्रेंच आयोग कमीशन
  • गोलीकांड – मि. ट्रेंच नामक अंग्रेज ने
  • शहीद – रूपाजी व कृपाजी
  • सरकारी रिपोर्ट के आधार पर – 120 महिला-पुरुष व बच्चे मारे गए
  • घटना को नामित – बोल्शेविक क्रांति
  • नामित करने वाले – 1. महात्मा गांधी 2. मेवाड़ नरेश महाराणा फतेह सिंह

बेगू किसान आंदोलन का इतिहास या घटना

  • बेगू (चित्तौड़) मेवाड़ रियासत की जागीर थी।
  • यहां के अधिकांश किसान धाकड़ जाति के थे व बिजोलिया के किसानों से संबंध थे।
  • बिजोलिया आंदोलन से प्रभावित होकर 1922 में मेनाल (भीलवाड़ा) में एकत्रित हुए व अजमेरा आकर विजय सिंह पथिक से मुलाकात की व आंदोलन का नेतृत्व ग्रहण करने का आग्रह किया।
  • क्योंकि विजय सिंह पथिक का मेवाड़ रियासत में प्रवेश पर प्रतिबंध था इसलिए पथिक ने रामनारायण चौधरी को इन किसानों के साथ चौधरी ने मेवाड़ के दीवान दामोदर लाल व पॉलिटकल एजेंड विलकिंनसन से मुलाकात की परंतु इन दोनों के कानों में जूं तक नहीं रेगी।
  • इस कारण से बेगू में किसानों ने हिंसक विद्रोह कर दिया। दबाव में आकर बेगू का जमीदार अनूपसिंह अजमेर आया।
  • June 1942 को राजस्थान सेवा संघ की अध्यक्ष से किसानों के साथ समझौता किया। परंतु सरकार ने इस समझौते को मानने से इंकार कर दिया। इस समझोते को बोल्शेविक समझौता कहा गया।
  • अनूप सिंह को उसके पद से हटाकर बेगू में मुसरमात का गठन कर दिया गया व अमृतलाल को बेगू का प्रशासनिक किया गया।

• किसानों की समस्या की जांच हेतु ट्रेंच आयोग का गठन किया गया।

•13 July 1923 को बेगू के जमीदार गोविंदपुरा (भीलवाड़ा) गांव में एकत्रित हुए थे व ट्रेंच के आदेश से गोली चलाई गई।

  • इसमें रूपाजी धाकड़ व कृपाजी धाकड़ व्यक्ति मारे गए।
  • सितंबर 1923 में विजय सिंह पथिक इसी आंदोलन में गिरफ्तार हुए थे इसलिए आंदोलन समाप्त हो गया।
  • इस आंदोलन का नेतृत्व रामनारायण चौधरी के द्वारा किया गया।

4. बूंदी का बरड किसान आंदोलन

  • ऊपरमाल से सटे हुए बूंदी के पठारी क्षेत्र को बरड कहा जाता है।
  • इस क्षेत्र की मुख्य आबादी गुर्जर थी जिसकी आजीविका पशुपालन थी।
  • गुर्जरों ने जानवरों को हाका देने की परंपरा जब भी क्षेत्र में अंग्रेज अधिकारी या शासक शिकार के लिए आते थे गुर्जर जानवरों को घेरकर एक ही स्थान पर इकट्ठा हो जाते थे इसमें गुर्जरों की स्वयं के पशु भी मारे जाते थे।
  • पठारी भूभाग होने के कारण कृषि कम होती थी तथा वह भी इस शिकार में नष्ट हो जाती थी।
  • 1921 में साधु सीताराम दास की सलाह पर बरड किसान सभा का गठन किया गया इसके अध्यक्ष हरला भड़क को बनाया गया।
  • प्रारंभ में केवल हाका देने का विरोध हुआ परंतु बिजोलिया में हुए समझौते के बाद भू राजस्व या लागबाग देने से मना कर दिया गया।
  • गुर्जरों का नेतृत्व पंडित नयनू शर्मा व महिलाओं का नेतृत्व सत्यभामा के द्वारा किया गया।
  • सत्यभामा को गांधी का मानस पुत्री कहा जाता है।

डाबी (बूंदी) की घटना

  • 2 अप्रैल 1923 को गुर्जर डाबी (बूंदी) में एकत्रित हुए व पुलिस अधिकारी इकराम हुसैन के आदेश से गोली चलाई गई। इसमें देव गुर्जर व नानक भील मारे गए।
  • नानक भील की स्मृति में माणिक्य लाल वर्मा ने अर्जीवन नामक कविता लिखी थी जिसे इनके दाह संस्कार पर भंवरलाल प्रज्ञाच के द्वारा पढ़कर सुनाया गया।
  • 1936 में सरकार पशु गणना करवा रही थी तथा गुर्जरों को लगा कि पशुओं पर कोई लाख बाग लगाई जाएगी अतः ये गुर्जर हिंडोली के हूंडेश्वर महादेव मंदिर में एकत्रित हुए परंतु प्रजामंडल आंदोलन सक्रिय होने के कारण गुर्जरों को उचित नेतृत्व नहीं मिल पाया।
  • स्त्रियों का सर्वाधिक योगदान इसी आंदोलन में था।

5. शेखावाटी किसान आंदोलन

  • शेखावाटी में एकमात्र रियासत सीकर थी परंतु यह जयपुर की अर्द स्वायत्त रियासत थी। अर्थात कुछ ही मामलों में स्वतंत्रता थी बाकी मामलों में उसे जयपुर पर निर्भर रहना पड़ता था।
  • सीकर के अंतर्गत 436 गांव आते थे। यहां के किसान जाट जाति से थे व जमीदार राजपूत थे।
  • इनका प्रारंभ एक किसान आंदोलन के रूप में प्रारंभ हुआ परंतु बाद में यह वर्गों की जातीय श्रेष्ठता में परिवर्तित हो गया। बाकी जातियों ने जाटों को सहयोग किया इसलिए छुआछूत शेखावाटी में सर्वप्रथम समाप्त माना गया।
  • 1922 में कल्याण सिंह सीकर के शासक बने तथा इन्होंने लगान में 25 से 50 परसेंट वृद्धि कर दी थी।
  • सीकर के किसानों ने अजमेर जाकर रामनारायण चौधरी को इस समस्या के बारे में बताया।
  • चौधरी ने लंदन से प्रकाशित हेराल्ड नामक समाचार पत्र में सीकर के किसानों पर मुद्दा उठाया।
  • जयपुर के शासक सवाई मानसिंह -ll ने बेब नामक अधिकारी को सीकर भेजा जिसने सीकर को भूमि बंदोबस्त करके लगान की दरें निश्चित की। परंतु बेब के जयपुर लौटते ही कल्याण सिंह ने बढ़ा हुआ लगान वसूलना शुरू कर दिया।

कटराथल (सीकर) की घटना

  • 25 April 1924 को कटराथल (सीकर) मैं जाट महिलाओं का सम्मेलन बुलाया गया।
  • धारा 144 लगे होने के बावजूद भी 10,000 महिलाएं इस सम्मेलन में शामिल हुई।
  • इस सम्मेलन की अध्यक्षता किशोरी देवी के द्वारा की गई व प्रमुख वक्ता उत्तमा देवी थी।
  • इस सम्मेलन को कोलकाता से प्रकाशित विश्वमित्र व भारतमित्र में प्रकाशित किया गया।

डूंडलोद (झुंझुनू) की घटना

  • 21 जून 1934 को डूंडलोद (झुंझुनू) के जमीदार हरनाथ सिंह के भाई ईश्वरसिंह ने जयसिंहपुरा गांव में खेत में काम कर रहे चारों किसानों को गोली मारकर हत्या कर दी गई इस कारण से उन पर मुकदमा चलाया गया।
  • सजा पाने वालों में प्रथम राजपूत जमीदार थे।
  • इस हत्याकांड को मंदसौर से प्रकाशित अर्जुन नामक समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया।
  • कुंदन, वलथाना, खूड इस आंदोलन के प्रमुख केंद्र थे।
  • House of commons के सदस्य पेथिक लॉरेंस के द्वारा भी इस आंदोलन का मुद्दा उठाया गया।
  • राजस्थान के अंतिम ए .जी .जी ए.सी लेथियन ने भी इस आंदोलन के बारे में लिखा है।

6. अलवर किसान आंदोलन

  • अलवर में जमींदार प्रथा कम थी। अलवर की 80% भूमि खालसा थी अर्थात सीधे राज्य के नियंत्रण में थी।
  • मात्र 20% भूमि पर ही जमीदारों को प्रभाव था इन जमीदारों को विश्वेश्वरदास कहते थे।
  • किसान खालसा भूमि को किराए पर लेते और कृषि करता था
  • खालसा भूमि पर से लगान की वसूली जमीदार करके राज्य को देता था।
  • 1921 में अलवर के शासक जयसिंह ने लगान की दरों में वृद्धि कर दी थी। किसानों ने बढ़ा हुआ लगान देने से इनकार कर दिया।
  • 14 मई 1925 को अलवर के बानसूर तहसील की नींमुचण गांव में किसान व जमीदार एकत्रित हुए।
  • पुलिस अधिकारी गोपाल सिंह व कमांडर छज्जू सिंह (राजस्थान का जनरल डायर) के आदेश पर गोली चलाई गई। इसमें कुल 156 व्यक्ति मारे गए।
  • गोलीबारी के समय सीता देवी नामक महिला भाषण दे रही थी।
  • लाहौर से प्रकाशित रियासत नामक अखबार में इसकी तुलना जलियांवाला बाग से की है।
  • गांधी ने यंग इंडिया नामक समाचार पत्र जिसे डबल डायिरीजम डीस्टीलड अर्थात दोहरी डायर शाही कहां गया।

नींमुचण(अलवर) की घटना

  • कालक्रम – 14 मई 1925 से 24 मई 1925 के मध्य
  • संबंधित क्षेत्र – बानसूर तहसील (अलवर)
  • नेतृत्व – महेश मेव
  • समकालीन जागीरदार – राव अनूप सिंह
  • आंदोलन के रचनात्मक कारण – 1. मादा पशुओं के क्रय विक्रय पर प्रतिबंध। 2. जंगल से लकड़ी प्राप्त करने पर प्रतिबंध 3. मांस व्यापार पर प्रतिबंध 4. जंगली पशुओं के शिकार पर प्रतिबंध

सूअर विरोधी गतिविधि (अलवर)

  • सूअर विरोधी अभियान के तहत पुलिस निरीक्षक छाजू सिंह ने मेव किसान वर्ग पर गोली कांड किया जिसमें सीता देवी मेव शहीद हुई और 60 अन्य कार्यकर्ता मारे गए।
  • महात्मा गांधी ने इस घटना को दोहरी डायर नीति अर्थात डबल डायर नीति व राजस्थान का दूसरा जलियांवाला कांड कहा।
  • महात्मा गांधी ने इस घटना का जिक्र न्यू इंडिया नामक पत्र में उजागर किया।

7. मातृकुंडिया किसान आंदोलन (चित्तौड़गढ़)

  • यह आंदोलन 22 जून 1980 में हुआ था जोकि एक जाट किसान आंदोलन था। इसका मुख्य उद्देश्य नई भू राजस्व व्यवस्था थी। इस समय मेवाड़ के शासक महाराणा फतेहसिंह था।

8. दुधवा-खारा किसान आंदोलन

  • यह आंदोलन बीकानेर रियासत के चूरू में हुआ था। यहां के किसानों ने जागीरदारों के अत्याचार व शोषण के विरुद्ध आंदोलन किया इस समय बीकानेर का शासक सार्दुल सिंह जी थे।
  • इस आंदोलन का नेतृत्व रघुवर दयाल गोयल, हनुमान सिंह आर्य के द्वारा किया गया।

9. मारवाड़ में किसान आंदोलन

  • मारवाड़ की किसानों पर बहुत ही अत्याचार हुए थे। 1923 ईस्वी में जयनारायण व्यास ने मारवाड़ में हितकारी सभा का गठन किया और किसानों को आंदोलन के लिए प्रेरित किया परंतु सरकार ने इस सभा को गैर कानूनी संस्था घोषित कर दिया सरकार ने इस आंदोलन को ध्यान में रखते हुए मारवाड़ किसान सभा नामक संस्था का गठन किया परंतु इसमें सफलता प्राप्त नहीं हुई।
  • आजादी के बाद भी जागीरदार किसानों पर अत्याचार करते रहे परंतु राज्य में लोकप्रिय सरकार के गठन के बाद किसानों को भूमि के अधिकार मिल गए।

किसान आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

Q.1 राजस्थान के किस क्षेत्र में कृषक आंदोलन प्रारंभ करने की पहल की ?

उत्तर – मेवाड़

Q. 2 राजस्थान का प्रथम किसान आंदोलन कौन सा था ?

उत्तर – बिजोलिया

Q.3 बेगू किसान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था ?

उत्तर – रामनारायण चौधरी

Q. 4 रूपाजी व कृपाजी किसान नेताओं का संबंध किस आंदोलन से है ?

उत्तर – बेगू किसान आंदोलन से

Q. 5 बूंदी किसान आंदोलन की शुरुआत कब हुई ?

उत्तर – 1926-27

Q.6 मेवाड़ का वर्तमान शासन नामक पुस्तक किसने लिखी ?

उत्तर – माणिक्य लाल वर्मा

Q. 7 पूर्व मेवाड़ परिषद की स्थापना की गई ?

उत्तर – 1922

Q.8 कांगड़ा कांड किस प्रजामंडल में गठित हुआ

उत्तर – बीकानेर प्रजामंडल

Q. 9 बोल्शेविक समझौता किस आंदोलन से है ?

उत्तर – बेगू आंदोलन से

Q.10 जोधपुर में लिजियन का गठन कब हुआ ?

उत्तर – 1836

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राजस्थान में किसान आंदोलन

राजस्थान में किसान आंदोलन

राजस्थान में किसान आंदोलन

May 28, 2020

सामाजिक व धार्मिक पुनर्जागरण व आंदोलन के बारे में कंप्लीट जानकारी

  • भारत में लगभग 18वीं शताब्दी में राष्ट्रीय पतन के समय आर्थिक व धार्मिक रूप से भारतीय समाज प्राचीन रूढ़िवादी में जकड़ा हुआ था। देश में महिलाओं की दयनीय स्थिति थी, कठोर जाति प्रथा, आधारहीन सामाजिक रीति रिवाज तथा बाल विवाह, बाल हत्या, विधवाओं के साथ अत्याचार आधी कुप्रथाओं में आमूलचूल परिवर्तन हुआ। पुनर्जागरण के द्वारा हमारे देश में भी सुधार प्रारंभ करने की प्रेरणा दी अतः इसी समय 19वी व 20 वीं सदी में धर्म सुधार आंदोलन प्रारंभ हुआ। इस समय महान समाज व धर्म सुधारकों ने हमारे समाज की कमियां में बुराइयों का विश्लेषण करके उन्हें दूर करने के प्रयास किए गए इनके द्वारा किए गए प्रयास ही सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन के नाम से जाने जाते हैं।

सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन के प्रमुख कारण

  • ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा बहुत अधिक देश का आर्थिक शोषण किया गया।
  • अंग्रेजों के समय भारत में नए मध्यम वर्ग का उदय हुआ- बुद्धिजीवी, डॉक्टर, शिक्षक, वकील, पत्रकार आदि।
  • अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार के माध्यम से शिक्षित भारतीय अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, फ्रांस की राज्य क्रांति वहां की बढ़ती हुई राष्ट्र भावना से परिचित हुए।
  • भारत में इस नवजागरण के द्वारा भारतीय समाज एवं धार्मिक विचारधारा क्रांतिकारी परिवर्तन हुए।
  • परिवर्तनों का श्रेय-राजा राममोहन राय एवं उनके ब्रह्म समाज, दयानंद सरस्वती एवं आर्य समाज, स्वामी विवेकानंद एवं रामकृष्ण मिशन, थियोसोफिकल सोसायटी तथा अलीगढ़ आंदोलन को है।
  • भारतीय समाज में ईश्वरचंद्र विद्यासागर का भी पर्याप्त योगदान रहा है। इन्होंने स्त्री शिक्षा, स्त्रियों के उद्धार एवं बाल विवाह पर रोक लगाने के प्रयास किए गए।

देखिए साथियों इस टॉपिक को आपको पूरा ध्यान से और अच्छे से पढ़ना है देखिए इस टॉपिक में आगे पढ़ेंगे जिन जिन व्यक्तियों का धार्मिक व सामाजिक सुधार आंदोलन में योगदान रहा है उनका विस्तार से अध्ययन करेंगे।

भारत में सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन से संबंधित प्रमुख व्यक्ति

  • शासन में स्थायित्व इस प्रकार के आंदोलनों को चलाने की स्थाई शर्त होती है। क्योंकि समाज नये परिवर्तन को आसानी से स्वीकार कर लेता है।

राजा राममोहन राय – ब्रह्म समाज

राजा राममोहन राय धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म (date of birth) – 22 मई 1772
  • जन्म स्थान (birth of palace) – बंगाल के हुगली जिले के राधानगर स्थान पर हुआ।
  • पिता का नाम – राधाकांत देव
  • माता का नाम – तारिणी देवी
  • भाई का नाम – जगमोहन राय
  • कुल विवाह – 3
  • प्रारंभिक शिक्षा – कोलकाता (बंगाली भाषा में)
  • राजा राममोहन राय ने कुल 3 विवाह किए। जिनमें से प्रथम दो कि जल्दी मृत्यु हो गई।
  • राम मोहनराय को प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में बंगाली भाषा में दी गई।
  • अरबी व फारसी की शिक्षा उन्होंने पटना के मदरसा में प्राप्त की थी।
  • वाराणसी में उन्होंने संस्कृत का अध्ययन किया था।
  • अंग्रेजी शिक्षा के लिए मुर्शिदाबाद के डिप्टी मजिस्ट्रेट जॉन बुडरोक डिप्टी के पास क्लर्क के पद पर कार्य किया।
  • राममोहन राय भारत की तुरंत स्वतंत्रता के पक्ष में नहीं थे। बल्कि वे चाहते थे कि अंग्रेज भारतीयों को प्रशासन में शामिल करके उन्हें शिक्षा प्रदान करें।
  • राममोहन राय ईसाई धर्म की नीति शास्त्र, इस्लाम धर्म के एकेश्वरवाद, सूफी धर्म के रहस्यवाद से प्रभावित थे।

राजा राम मोहन राय द्वारा किए गए प्रयास

  • 1807 ईस्वी में फारसी भाषा में मूर्ति पूजा के विरुद्ध तुहफाल उल मुवाहिदीन अर्थात एकेश्वरवादियों नामक लेख लिखा था।
  • 1811 ईसवी में इनके भाई जगमोहन की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी को सती किया गया। इस दृश्य को देखकर राजा राममोहन राय सती प्रथा के विरोधी हो गए।
  • 1814 ईसवी में कोलकाता में”आत्मीय सभा ” की स्थापना की ।
  • 1817 इसवी में डेविड हेयर को कोलकाता में हिंदू कॉलेज की स्थापना में सहयोग प्रदान किया।
  • 1821 में बंगाली भाषा में “संवाद कौमुदी” नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया। यह किसी भारतीय द्वारा देसी भाषा में प्रकाशित प्रथम समाचार पत्र था।
  • इसके अलावा 1822 में फारसी भाषा में “मिराततुल दर्पण” नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया।
  • राजा राममोहन राय को भारतीय पत्रकारिता का अग्रदूत कहा जाता है।

ब्रह्म समाज :-

  • 20 August 1828 को कोलकाता में कमल घोष के घर पर ब्राह्मण वर्ण की संस्था ब्रह्म समाज की स्थापना की स्थापना की।

ब्रह्म समाज के प्रमुख उद्देश्य

  • हिंदू समाज की बुराइयों को दूर करना।
  • ईसाई धर्म के भारत में बढ़ते प्रभाव को रोकना।
  • सभी धर्मों में आपसी एकता स्थापित करना।

ब्रह्म समाज के मूल सिद्धांत

  • ईश्वर एक है। वह सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक और सर्वगुण संपन्न है।
  • ईश्वर कभी भी शरीर धारण नहीं करता। इसलिए मूर्ति पूजा से ईश्वर नहीं मिलता है।
  • ईश्वर की प्रार्थना का अधिकार सभी जाति और वर्ग के लोगों को है। ईश्वर की पूजा के लिए मंदिर, मस्जिद आदि की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • सच्चे दिल से की गई प्रार्थना ईश्वर अवश्य सुनता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना आवश्यक है।
  • आत्मा अजर और अमर है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।
  • सभी धर्मों और धर्म ग्रंथों के प्रति आदर की भावना रखनी चाहिए।

मोहनराय के आगे के प्रयास

  • राजा राममोहन राय के प्रयासों से बंगाल के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिंग ने 4 दिसंबर 1829 को एक कानून लागू किया। जिसकी धारा 17 के तहत ब्रिटिश भारत को सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया गया।
  • 1833 के चार्टर में इसे संपूर्ण भारत में लागू कर दिया गया
  • राजा राममोहन राय के ही सहयोगी रहे राधाकांत देव 1830 में “धर्म सभा”की स्थापना कर दी। इसका विरोध किया गया।
  • 1830 में मुगल शासक अकबर द्वितीय ने अपनी पेंशन बढ़ाने के लिए राजा राममोहन राय को इंग्लैंड के साथ साथ विलियम चतुर्थ के पास भेजा। इस अवसर पर राजा की उपाधि दी गई।
  • बंगाल के नवाबों के द्वारा राजा राममोहन राय के पूर्वजों को राय की उपाधि दी गई।
  • यूरोप जाने वाले यह प्रथम भारतीय थे 27 सितंबर 1833 को इंग्लैंड के ब्रिस्टल शहर में डॉक्टर कारपेटर के निवास स्थान पर राजा राममोहन राय की मृत्यु हुई।
  • ब्रिस्टल में इनकी समाधि है क्योंकि उस समय इंग्लैंड में अग्नि दाह संस्कार की अनुमति नहीं होती थी।
  • उनकी समाधि पर अजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ के द्वारा लिखित ” हरीकेली नाटक”की पंक्तियों को भी लिखा गया है।

राजा राममोहन राय की पुस्तकें

राजा राममोहन राय के द्वारा निम्न पुस्तकें लिखी गई:-

  • The precepts of Jesus the Guide to peace and happiness
  • Precept of Jesus
  • तूहफात- उल-मुवाहेदिन

सुभाष चंद्र बोस ने राजा राम मोहन राय को युगदूत की उपाधि दी। इसके अलावा पुनर्जागरण का तारा अतीत तथा भविष्य के मध्य सेतु तथा राष्ट्रवाद का जनक कहा जाता है।

  • राजा राममोहन राय के बाद द्वारिका नाथ टैगोर ने ब्रह्म समाज का नेतृत्व किया।
  • 1843 में उन्होंने अपने बेटे देवेंद्रनाथ टैगोर को ब्रह्म समाज का नेतृत्व सौंपा।
  • 1857 में केशव चंद्र सेन ब्रह्म समाज के सदस्य बने व 1862 में आचार्य के पद पर नियुक्त हुए।

केशव चंद्र सेन

  • केशव चंद्र सेन के कारण ब्रह्म समाज को पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया था क्योंकि केशव चंद्र सेन ने कोलकाता से बाहर प्रसार किया सभी वर्णो धर्मों के लोगों को इसका सदस्य बनाया।
  • इस कारण से देवेंद्र नाथ से इनका विवाद हो गया।
  • 1865 में केशव चंद्र सेन को ब्रह्म समाज से निष्कासित किया गया था।
  • 1866 में केशव चंद्र सेन ने भारतीय ब्रह्म समाज की स्थापना की जो समाज देवेंद्र नाथ के नेतृत्व में रह गया उसे आदि ब्रह्म समाज कहां गया।
  • भारतीय ब्रह्म समाज के कारण 1872 में अंतर्जातीय व विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लागू हुआ जिसमें की बाल विवाह को अपराध घोषित किया गया था
  • परंतु स्वयं केशव चंद्र सेन ने 1878 में अपनी 12 वर्षीय पुत्री सुनीति देवी का विवाह कूचबिहार (पश्चिम बंगाल) के युवराज निपेंद्र नारायण से कर दिया।
  • इसी कारण भारतीय ब्रह्म समाज में फूट पड़ी जिन लोगों ने केशव चंद्र सेन का साथ छोड़ा उनको समाज को साधारण ब्रह्म समाज कहां गया जिसका नेतृत्व आनंद मोहन गोष व सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने किया।

प्रार्थना समाज

  • प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 ईसवी में मुंबई में आत्माराम पांडुरंग ने की थी।
  • एमजी रानाडे, आरजी भंडारकर भी इससे जुड़ गए।
  • इन्होंने भी जाति प्रथा का विरोध किया व अंतरजातीय विवाह एवं विधवा विवाह का पुरजोर समर्थन किया
  • इन्होंने विधवा पुनर्विवाह एसोसिएशन की स्थापना की।

स्वामी दयानंद सरस्वती – आर्य समाज

स्वामी दयानंद सरस्वती

  • जन्म – 12 फरवरी 1824
  • जन्म स्थान – गुजरात के मोरवी जिले के टंकारा नामक गांव में हुआ।
  • बाल्यावस्था का नाम – मूलशंकर
  • 24 साल की आयु में दंडस्वामी पूर्णानंद से शिक्षा प्राप्त की।
  • इसके बाद इन्हें दयानंद सरस्वती नाम दिया गया।
  • 1860 में मथुरा के आचार्य विरजानंद से इन्होंने वेदों की शिक्षा ली जिसके बाद नारा दिया था-वेदो की ओर लोटो
  • इन्हें दयानंद नाम अपने गुरु विरजानंद ने दिया था।

शुद्धि आंदोलन

  • स्वामी दयानंद सरस्वती ने भारत में शुद्धि आंदोलन चलाया क्योंकि यह डलहौजी के 1850 ईसवी के लागू किए गए धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम की धारा 21 की प्रतिक्रिया के वादी के कारण चलाया।
  • इन्होंने वैदिक धर्म में व्याप्त बुराइयों के विरुद्ध पाखंड खाउनि पताका को फहराया
  • उन्होंने स्वराज्य शब्द का प्रथम बार प्रयोग किया।

स्वामी दयानंद सरस्वती का कथन

  • इनका कथन था” बुरे से बुरा देसी राज्य अच्छे से अच्छे विदेशी राज्य की तुलना में बेहतर होगा”

एनीबेसेंट का कथन

एनीबेसेंट

  • एनी बेसेंट का कथन था “भारत भारतीयों का है। यह लिखने वाले दयानंद सरस्वती प्रथम भारतीय थे।

आर्य समाज

  • 10 April 1875 को उन्होंने मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की।
  • 1877 में इसके मुख्यालय को लाहौर में स्थानांतरित किया गया।
  • केशव चंद्र सेन के कहने पर इन्होंने आर्य समाज की पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश का लेखन कार्य हिंदी भाषा में किया गया। इसे मुंबई में लिखना प्रारंभ किया गया।
  • इसका अधिकांश भाग उदयपुर में लिखा गया व अजमेर में इसका प्रारंभिक प्रकाशन है।
  • राजस्थान में 4 शासक इनके शिष्य थे :-
  • मदनपाल – करौली
  • नारसिंह – शाहपुरा
  • सज्जन सिंह – उदयपुर
  • जसवंतसिंह -ll – जोधपुर

दयानंद सरस्वती के बारे में

  • जसवंत सिंह-ll तथा इनके प्रधानमंत्री प्रताप सिंह नए-नए आमंत्रण देकर जोधपुर बुलाया था।
  • जसवंत सिंह-ll की प्रेमिका नन्ही जान ने बड़ा काम करते हुए दयानंद सरस्वती को भोजन में कांच पीसकर या जहर मिलाकर खिला दिया।
  • इलाज के लिए इन्हें माउंट आबू ले जाए ले जाया गया।
  • 30 अक्टूबर 1883 को अजमेर में इनकी मृत्यु हो गई।
  • वेलेंटाइन शिरोल ने अपने पुस्तकें unrest india मैं तिलक व आर्य समाज को भारतीय अशांति का जन्मदाता कहा गया।
  • दयानंद सरस्वती के बाद शिक्षा को लेकर आर्य समाज के दो गुट बन गए थे।

आर्य समाज के दो गुट

  • प्राच्य अर्थात देसी शिक्षा के समर्थक लाला मुंशी राम थे।
  • इन्होंने 1901- 02 में हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की।
  • इसमें वैदिक शिक्षा दी जाती थी।
  • मुंशी राम स्वामी श्रद्धानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए इन्हीं के द्वारा महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में 1500 रुपए का मनी ऑर्डर किया था। इन्हीं के पैसों की टिकट खरीद कर महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत आए।
  • पाश्चात्य शिक्षा के समर्थक लाला हंसराज व लाला लाजपत राय थे। इन्होंने 1886 में दयानंद एंग्लो वैदिक स्कूल की स्थापना की। तथा इसमें 1889 में कॉलेज बनाया गया।

स्वामी विवेकानंद

धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म – 12 जनवरी 1863
  • जन्म स्थान – कोलकाता
  • बाल्यावस्था का नाम – नरेंद्र नाथ दत्त
  • पिता का नाम – विश्वनाथ
  • माता का नाम – भुनेश्वरी देवी
  • कोलकाता में स्थित काली माता के मंदिर (दक्षिणेश्वर) के पुजारी गजाधर आचार्य या रामकृष्ण परमहंस से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की।
  • खेतड़ी के शासक अजीत सिंह विवेकानंद के मित्र थे। दोनों की प्रथम मुलाकात मुंबई में जोधपुर के प्रधानमंत्री प्रताप सिंह ने करवाई।
  • विवेकानंद तीन बार खेतड़ी आए:-
  • 1891
  • 1893
  • 1897
  • जब यह दूसरी बार आए थे तब अजीत सिंह ने इनको विवेकानंद नाम दिया व पगड़ी प्रदान की।

अजीत सिंह

  • अजीत सिंह ने इनके लिए नृत्य का आयोजन रखा। परंतु नृत्यांगना मैणा बाई ने जैसे ही नृत्य प्रारंभ किया विवेकानंद उठकर जाने लगे और मैणा बाई ने सूरदास का भजन सुनाया, विवेकानंद ने इनको मां बोलकर संबोधित किया।

1893 में शिकागो में प्रथम विश्व धर्म संसद जनवरी का आयोजन किया गया।

  • रामानंद रियासत (तमिलनाडु) के शासक भास्कर सेथूपल्ली ने विवेकानंद के लिए तृतीय श्रेणी के टिकट करवा कर दी। इसको पता चलने पर अजीत सिंह ने अपने मुंशी जगमोहन लाल को भेजा।
  • जगमोहन लाल ने ओरियंट कंपनी पेनिनशूना जहाज के प्रथम श्रेणी के टिकट करवा दी।
  • ग्यारह सितंबर 1893 में शिकागो में आयोजित प्रथम विश्व धर्म संसद में भाषण दिया था।
  • इस संसद के अध्यक्ष जॉन हैरास बोरो थे ।

न्यूयॉर्क हेराल्ड

  • अगले दिन अमेरिका के समाचार पत्र न्यूयॉर्क हेराल्ड ने लिखा था इस युवा तूफानी प्रचारक को सुनने के बाद पश्चिम देशों के द्वारा भारत में धर्म प्रचारक भेजना एक मूर्खतापूर्ण कार्य है।
  • इसके बाद 1895 में उन्होंने न्यूयॉर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना की।
  • इसके बाद में इंग्लैंड आए जहां माग्रेट नोबेल इनकी शिष्य बनी थी। जोकि सिस्टर निवेदिता के नाम से प्रसिद्ध हुई।
  • इसके बाद ये श्रीलंका आए तथा पूर्व में अपना प्रथम सार्वजनिक भाषण उन्होंने कोलंबो में दिया था इसके बाद ये भारत आए।
  • 1 मई 1897 को कोलकाता के बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना हुई।
  • इसके अलावा उत्तराखंड के अल्मोड़ा नामक स्थान पर मायावती मठ स्थापित किया गया।
  • 1899 में यह पुन: अमेरिका गए। 1900 ईसवी में पेरिस में आयोजित विश्व शांति सम्मेलन में भाग लिया।
  • 4 July 1902 वेल्लूर मठ में स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हुई।
  • सुभाष चंद्र बोस ने विवेकानंद को भारत का अध्यात्मिक पिता कहां।

विवेकानंद की प्रसिद्ध पुस्तकें

  • मैं समाजवादी हूं
  • राजयोग
  • ज्ञान योग
  • कर्म योग
  • My master
  • A journey from Colombo to to Almora

स्वामी विवेकानंद के प्रमुख कथन

  • हमारा धर्म केवल रसोई घर तक सीमित हो गया है।
  • मैं ऐसे प्रत्येक शिक्षित भारतीयों को देशद्रोही मानता हूं जिसकी शिक्षा का लाभ निम्न वर्ग के लोगों तक ना पहुंचे।
  • उठो जागृति हो वह तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए।

रामकृष्ण परमहंस

रामकृष्ण परमहंस धार्मिक पुनर्जागरण

  • जन्म – 18 फरवरी 1836
  • जन्म स्थान – बंगाल के कमरपुकर
  • पिता का नाम – शुदीराम
  • माता का नाम – चंद्रा देवी
  • असली नाम – गदाधर चट्टोपाध्याय
  • रामकृष्ण मठ की स्थापना रामकृष्ण ने की
  • रामकृष्ण परमहंस के सर्वाधिक प्रिय शिष्य नरेंद्र नाथ दत्त थे।

थियोसोफिकल सोसाइटी

  • स्थापना – 1875
  • कहां पर की गई – अमेरिका में
  • किसके द्वारा की गई – मैडम एच. पी. ब्लावेटस्की और हेनरी स्टील आलकॉट
  • इस सोसाइटी के द्वारा हिंदू धर्म को विश्व का सबसे अध्यात्मिक धार्मिक माना है।
  • 1882 में मद्रास के समीप अंतरराष्ट्रीय कार्यालय स्थापित किया गया ।
  • भारत में इस आंदोलन का श्रेय एक आयरिश महिला श्रीमती एनी बेसेंट को दिया गया जो कि 1893 में भारत आई और इस संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रचार प्रसार में लग गई।
  • श्रीमती एनी बेसेंट ने 1898 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की जो 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयास से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में परिवर्तित हो गया।

मुस्लिम सुधार आंदोलन

हमदिया आंदोलन

मिर्जा गुलाम अहमद

  • इस आंदोलन का प्रारंभ 1889-90 में मिर्जा गुलाम अहमद ने फरीदाकोट में किया
  • इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मुसलमानों में आधुनिक बौद्धिक विकास प्रचार करना था।
  • मिर्जा गुलाम अहमद ने हिंदू देवता कृष्णा और ईशा मसीह के अवतार होने का दावा किया ।

अलीगढ़ आंदोलन

सर सैयद अहमद

  • इस आंदोलन को सर सैयद अहमद के द्वारा चला गया।
  • वो इस आंदोलन के माध्यम से मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा का प्रसार करना चाहता था।
  • इसने 1865 में अलीगढ़ मैं मोमडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की जो कि बाद में 1890 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बन गया।
  • इस आंदोलन के माध्यम से सर सैयद अहमद में मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया।

देवबंद आंदोलन

  • यह आंदोलन रूढ़िवादी मुस्लिमों के द्वारा चलाया गया इसका प्रमुख उद्देश्य विदेशी शासन का विरोध करना और मुसलमानों में कुरान की शिक्षा का प्रचार प्रसार करना
  • यह आंदोलन मोहम्मद कासिम ननौतवी व रशीद अहमद गंगोही के द्वारा 1867 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में इस आंदोलन की स्थापना की
  • यह अलीगढ़ आंदोलन का विरोधी था।
  • देवबंद के नेता भारत में अंग्रेजी शासन के विरोधी थे उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा का विरोध किया।

सिख समुदाय आंदोलन

  • 19वीं सदी में सिक्कों की संस्था सरीन सभा की स्थापना हुई।
  • पंजाब का कुक आंदोलन सामाजिक व धार्मिक आंदोलन से संबंधित था।
  • जवाहर मल और रामसिंह ने कूका आंदोलन का नेतृत्व किया
  • पंजाब के अमृतसर में सिंह सभाआंदोलन चलाए गया।
  • इन आंदोलनों के परिणाम स्वरूप 1922 में सिख गुरुद्वारा अधिनियम पारित किया गया जो कि आज तक भी कार्य कर रही है।

प्रमुख अन्य संस्थाएं और आंदोलन

  • 1861 में शिवदयाल साहिब में आगरा में राधास्वामी आंदोलन चलाया।
  • 1887 में नारायण अग्निहोत्री ने लाहौर में देव समाज की स्थापना की थी।
  • गोपाल कृष्ण गोखले ने सन् 1851 में समाज सुधार के लिए भारतीय सेवा समाज की स्थापना की।
  • सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिबा फुले ने की थी। इन्होंने गुलामगिरी नाम के पुस्तक की रचना भी की थी।
  • केरल के बायकोम मंदिर में अछूतों के प्रवेश हेतु एक आंदोलन चलाया गया जिसका नेतृत्व श्री नारायण गुरु ने किया।
  • एन मुदालियर ने जस्टिस पार्टी की स्थापना की ।
  • 1924 में अखिल भारतीय दलित वर्ग की स्थापना बीआर अंबेडकर ने की थी तथा 1927 में बहिष्कृत भारत के नामा के के पत्रिका का प्रकाशन किया
  • 1932 में हरिजन सेवक संघ की स्थापना महात्मा गांधी के द्वारा की गई।
  • 1942 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के द्वारा अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की स्थापना की गई
  • भारत में महिलाओं के विकास के लिए श्रीमती एनी बेसेंट ने मद्रास में 1917 में भारतीय महिला संघ की स्थापना की ।
  • 1920 में रामास्वामी नायकर दक्षिण भारत में आत्मसम्मान आंदोलन चलाया था।

ठीक है साथियों मुझे आशा है कि आपको यह जानकारी पढ़कर आपको अच्छा लगा होगा और आपकी परीक्षा की दृष्टि से यह टॉपिक सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन बहुत ही उपयोगी साबित होगा इसमें से काफी अच्छे सवाल पूछे जाते हैं जोकि आप इसे पढ़कर अच्छे से उत्तर दे पाएंगे यदि आपको सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन इससे संबंधित जानकारी अच्छी लगी है तो आप मुझे कमेंट करके बताएं और अपने दोस्तों को आगे भी फॉरवर्ड करें धन्यवाद।

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May 27, 2020

मानव एवं वन्य जीव विवाद क्या है? Human And Wildlife Conflicts

मनुष्य की गलत धारणाओं के कारण वन्य प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ा है इसका प्रत्यक्ष प्रभाव समस्त मानव जगत पर पड़ता है प्राचीन काल में वन्य जीव एवं मानव के बीच मित्रता का संबंध था तथा ऋषि-मनियों के आश्रम में वन्य जीव मुक्त रूप से विचरण करते थे हमारी धार्मिक मान्यताओं मैं भी विभिन्न पेड़ पौधे एवं जीव जंतु पूजनीय थे किंतु मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ वन्य जीव एवं मानव के बीच सद्भावना घटने लगी एवं धार्मिक तथा नैतिक मूल्यों में कमी आने लगी जिससे वन्यजवों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न होने लगा वन्य जीवन को नष्ट करने से मानव एवं वन्य जीव जीवन प्रतिस्पर्धा में वृद्धि हुई मानव जहां वन्य जीवन के लिए हानिकारक हुआ है ।

मानव एवं वन्य जीव

वही वन्यजीवी कहीं-कहीं मानव के लिए खतरा साबित हो रहे हैं मानव व वन्य जीवो में विवाद निम्न इस पर अदाओं के कारण बड़े हैं।

  1. आदिवासी समुदाय के साथ वन्य जीवन स्पर्धा
  2. शहरी समुदाय के साथ वन्य जीवन प्रतिस्पर्धा

आदिवासी समुदाय के साथ वन्य जीव प्रतिस्पर्धा

आदिवासी समुदाय अपने संपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वन्य एवं उनके उत्पादों पर सदियों से निर्भर रहते हैं वह इन वन्य संपदा ओं के दोहन के साथ 7 दिन का संरक्षण भी करते थे।

पिछले कुछ वर्षों में वन्य जीव संरक्षण के लिए सरकार द्वारा राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य के लिए सरकार ने वनवासियों को उस क्षेत्र से निष्कासित करना शुरू कर दिया जिसे आदिवासियों के सरकार विद्रोह हुए।

उदाहरण के लिए टिहरी बांध से विस्थापित आदिवासियों तथा केरल के आदिवासियों की समस्याएं भी इसी विवाद की खड़ी है।

शहरी समुदाय साथ जीवन प्रतिस्पर्धा

वन्यजीव आवास तथा भोजन के लिए एवं मानव समुदाय आवाज कृषि उद्योगों के लिए एक दूसरे के प्रति स्पर्धा में हैं कई बार वन्य जीव अपने भोजन की तलाश में भटकते हुए मानव बस्तियों में चले आते हैं एवं काल ग्रास बन जाते हैं।

मनुष्य अपनी जरूरत की पूर्ति के लिए दिन प्रतिदिन वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों पर कुठाराघात करता रहा है बढ़ती हुई जनसंख्या की जट रागनी को शांत करने के लिए कृषि क्षेत्र के विस्तार के कारण वन एवं वन्य जीवन पर दुष्कर परिणाम पढ़ते हैं।

आता इन विवादों से बचने एवं जैव विविधता का संरक्षण करने के लिए भारत सरकार ने पहली बार वन्य जीवन कार्य योजना 1983 को संशोधित करके अब नई बनने जीवन कार्य योजना 2002 से 2016 स्वीकृत की है।

भारतीय वन्य जीवन बोर्ड जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं वन्य जीव संरक्षण की अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी एवं निर्देशन करने वाला शीर्ष सलाहकार निकाय है

वर्तमान में संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत 92 राष्ट्रीय उद्यान और 500 अभ्यारण आते हैं जो देश के सकल भौगोलिक क्षेत्र के 15.67 मिलियन हेक्टेयर भाग पर फैले हैं तथा देश के समस्त भौगोलिक क्षेत्र को यह प्रतिशत पर फैले हैं।

May 26, 2020

वन्यजीवों को खतरा क्या है? Threats to Wildlife

सामान्य अर्थ में वन्य जीव जंतुओं के लिए प्रयुक्त होता है जो प्राकृतिक आवास में निवास करते हैं भारत जैव विविधता में से संपन्न राष्ट्र है यहां जलवायु एवं प्राकृतिक विविधता के कारण लगभग 48 हजार पादप एवं लगभग 80 हजार से अधिक जीव जंतुओं की जातियां पाई जाती हैं

वन्यजीवों के विलुप्ती के कारण

इसके विलुप्ती के कारण दो कारक हैं

  1. प्राकृतिक कारक
  2. मानव जनित कारक

प्राकृतिक कारण (Natural Causes)

भूकंप सूखा ज्वालामुखी के फटने से अथवा धरती पर उल्का पिंडों के गिरने से क्षेत्र विशेष में उपलब्ध जातियां नष्ट होकर विलुप्त हुई पृथ्वी पर अनुवांशिकी रूप से भिन्न भिन्न पादपों की कमी से उपलब्ध पादपों में अंतः प्रजनन की क्रिया के कारण जनन क्षमता में कमी आ जाती है इसे अंतः प्रजनन अब नमन कहते हैं

क्रमागत रूप से अंतः प्रजात वंश क्रम में जन्म क्षमता के हास के कारण जातियां विलुप्त हो जाती हैं

मानव जनित कारण (Anthropological Causes)

  1. आवास का हास
  2. प्रदूषण
  3. वनोन्मूलन
  4. जनसंख्या विस्फोट
  5. औद्योगिकीकरण
  6. अन्य कारक जैसे युद्ध बीमारियां विदेशी प्रजातियों का आक्रमण इत्यादि

आवास का हास (Loss of Habitat)

मनुष्य के विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए वनों का विनाश करने से वन्यजीवों के आवास स्थल निरंतर बढ़ते गए मानव ने उद्योगों बांध निर्माण सड़कों एवं रेल मार्गो आवासीय परिसरों इत्यादि बनाने के लिए जंगलों का सफाया करके प्राकृतिक आवासों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है

इसके अतिरिक्त कृषि क्षेत्र में अत्याधिक रसायन संश्लेषित उर्वरक पिड़क नास्को के उपयोग से भी वन्य जीव जंतुओं एवं वनस्पतियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है

प्रदूषण ( Pollution)

वन्य जीव

बडे बडे उद्योगों कल कारखानों तथा वाहनों से निकलने वाली विषैली गैसों से वायुमंडल प्रदूषित हो चुका है औद्योगिक अपशिष्ट वाहित मल एवं कचरे ने तालाबों झीलों नदियों एवं समुंद्र को प्रदूषित कर दिया है

जल मृदा एवं वायु के प्रदूषित हो जाने से जीव जंतुओं एवं वनस्पतियों का विनाश तीव्र गति से बड़ा है जंगलों में खनन कार्य अम्लीय वर्षा एवं हरित ग्रह प्रभाव से पृथ्वी पर जैव विविधता पर संकट गहराया है

वनोन्मूलन (Deforestation)

वन हमारे पर्यावरण के फेफड़े हैं क्योंकि वातावरण की शुद्धता के लिए यह प्रमुख भूमिका निभाते हैं अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मानव वनों पर शुरुआत से ही निर्भर रहा है भवन निर्माण इंदन फर्नीचर कागज उद्योग आदि के लिए मानव ने अंधाधुंध गति से वनों का दोहन किया है

राष्ट्रीय वन नीति 1952 के अनुसार भारत से संगत विकास के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत वन आवरण होना चाहिए किंतु वर्तमान में यह मात्र 20% के लगभग ही शेष बचे हैं वन्य जीव संरक्षण के लिए वन आरोपण पर समुचित ध्यान देना वर्तमान समय की महती आवश्यकता है

जनसंख्या विस्फोट (Population Blast)

भारत जैसे विकासशील देशों तथा अल्पविकसित राष्ट्रों की प्रमुख समस्या जनसंख्या विस्फोट है यह प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष दोनों रूपों से जैव विविधता में कमी के लिए जिम्मेदार है आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के कारण मृत्यु दर में कमी तथा उच्च जन्म दर के कारण जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई है

वर्ष 2001 के जनसंख्या के अनुसार भारत में जनसंख्या घनत्व 324 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है इस प्रकार मानव अपनी आवासीय परिसरों के लिए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को नष्ट करता जा रहा है जो कि जैव विविधता के लिए दुष्कर साबित हो रहा है

औद्योगिकीकरण (Industrialization)

बड़े-बड़े कल कारखानों एवं उद्योगों से प्रतिवर्ष लाखों टन औद्योगिक कचरा विषैले पदार्थ एवं अपशिष्ट हमारे वातावरण में त्यागी जा रहे हैं खनन उद्योग चर्म उद्योगों सीमेंट उद्योग पैट्रोलियम रिफायनरी आणविक बिजली करो इत्यादि से अत्यधिक जहरीले अपशिष्ट हमारे जल मृदा एवं वायु को निरंतर दूषित कर रहे हैं

वायु में उत्सर्जित इन गैसों के कारण ओजोन क्षरण अम्लीय वर्षा हरित गृह प्रभाव जलवायु परिवर्तन इत्यादि गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं जिनके कारण समस्त पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहे हैं इनका दुष्परिणाम यह है कि कई क्षेत्र विषैली प्रजातियां विलुप्त हो रही है

अन्य कारण ( Other Causes)

उपरोक्त कारणों के अलावा अन्य कारण जैसे विभिन्न राष्ट्रों के मध्य युद्ध एवं सैन्य अभियानों विदेश जातियों के आक्रमण विभिन्न प्रकार की बीमारियों आदि के कारण विजय विविधता प्रभावित हुई है खाड़ी युद्ध के दौरान तेल के कुओं में आग लगने के कारण मध्य एशिया में भी कई पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हुए हैं

हाल ही में वर्ल्ड फ्लू बीमारी के कारण कुक्कुट प्रजातियां एवं अन्य प्रजातियां प्रभावित हुई थी इसके अलावा हमारे देश में विदेशी प्रजातियां जैसे यूकेलिप्टस आर्जीमोन मैक्सी कान्हा जलकुंभी विदेशी बबूल इत्यादि बादलों के कारण यहां की मूल वनस्पति भी अत्यधिक प्रभावित हुई है

अवैध शिकार (Poaching)

वन्यजीवों के संकटग्रस्त एवं विलुप्त होने का एक अन्य मुख्य कारण वन्यजीवों का अवैध शिकार है मानव सदियों से अपने भोजन पदार्थ के रूप में जानवरों का शिकार करता रहा है भोजन के अतिरिक्त मानव जानवरों से सौंदर्य प्रसाधन प्राप्त करने चमड़े की वस्तुएं बनाने फर उन आदि के लिए वन्य जीवों का शिकार करता है

वर्षा पूर्व जहां हिमालय क्षेत्र थार रेगिस्तान उत्तर भारत का मैदान दक्षिण पठारी प्रदेश वन्यजीवों की विलुप्त संपदा से भरे पड़े थे वही वर्तमान स्थिति यह है कि वन्य जीव केवल राष्ट्रीय उद्यानों एवं अभयारण्यों में ही सिमट कर रह गए हैं

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अत्याधिक कीमत मिलने के कारण भी http://वन्यजीवों का अनाधिकृत शिकार किया जाता है

हाथी का शिकार हाथी दांत के लिए शेर बाघ आदि का शिकार उनकी खाल हड्डी नाखूनों के लिए मगरमच्छ कछुआ कोबरा आदि का शिकार उनकी खाल के लिए कस्तूरी मिर्ग का शिकार कस्तूरी प्राप्त करने के लिए किया जाता है इनके उत्पादन से कई तरह की दवाइयां इत्र इत्यादि बनाए जाते हैं

May 25, 2020

भारत में राष्ट्रवाद का उदय और विकास/Rise of Indian Nationalism

राष्ट्रवाद-Nationalism राष्ट्रवाद वह भावना है। जो लोगों को एक साथ एकता के सूत्र में बांधती है व स्वराज के प्रति एक ठोस आधार प्रदान करती है। यह लोगों में चेतना प्रदान करने में समाज सुधार को, राष्ट्रवादी नेताओं, व राजनीतिक संस्थाओं, शिक्षा प्रणाली आदि तत्वों का योग रहा है।

कुछ महत्वपूर्ण शब्द

  • राष्ट्रवाद
  • समाज सुधारक
  • शिक्षा प्रणाली
  • समाचार पत्र
  • राष्ट्रीय आंदोलन

भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण और विकास- CAUSES OF THE RISE OF NATIONALISHM

  • भारत में राष्ट्रीय उदय के कारण और विकास में अनेक कारणों का योग रहा है। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इन कारणों को निम्नलिखित भागों में बांटा गया है जो कि निम्न प्रकार से है। :-

आर्थिक नीतियां

  • 1901 ईस्वी में रमेशचंद्र दत्त ने इकोनॉमिक्स हिस्ट्री ऑफ इंडिया नामक पुस्तक लिखी थी। जिसमें 3 चरणों का उल्लेख किया गया था। इन तीनों चरणों में अंग्रेजों ने भारत का आर्थिक शोषण किया।

(A). सीधी लूट (1757-1813) :-

  • प्लासी के युद्ध में विजय के पश्चात बंगाल में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन स्थापित हो गया था।
  • कंपनी अब बंगाल के नवाब को बनाने लगी थी इसके बदले हमसे अत्यधिक रिश्वत लेने लगी तथा व्यापार में भी हिस्सेदारी मांगने लगी।
  • कंपनी कम कीमत में सूती रेशमी वस्त्र व गर्म मसालों को खरीद कर इंग्लैंड व यूरोप के बाजारों में महंगी कीमत पर बेचने लगी। जिससे कंपनी की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई।
  • इसी चरण में इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति हो चुकी थी। मशीनों से उत्पादन अधिक होने लगा इसलिए वहां के पूंजीपतियों ने वहां की सरकार पर दबाव डाला कि उन्हें भी भारत में व्यापार करने की अनुमति दी जाए।

(B). स्वतंत्र व्यापारिक पूंजीवाद (1813-1858) :-

  • 1813 के चार्टर में ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया था कंपनी को केवल चाय व चीन देश के साथ व्यापार पर एकाधिकार रहा।
  • इस चरण में इंग्लैंड की कई कंपनियां भारत आई। यहा से कच्चा माल इंग्लैंड ले जाकर उत्पाद के रूप में परिवर्तित करती और पुन: भारत लाकर बेच दिया जाता था
  • इसी चरण में भारत का हथकरघा उद्योग समाप्त हो गया। क्योंकि भारतीय बुनकरों के पास कच्चा माल ही उपलब्ध नहीं हो पाया।
  • बंगाल के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिंग ने कहा था कि भारतीय बुनकरों की हड्डियां भारत के मैदानों में बिखरी पड़ी हैं।
  • इसी चरण में 1857 की क्रांति हो चुकी थी।

(C). वित्तीय पूंजीवाद (1858-1940) :-

  • 1 नवंबर 1958 को ईस्ट इंडिया का शासन समाप्त कर दिया गया था।
  • भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन को सौंपा गया तथा इसमें यह भी लिखा गया कि क्राउन भारत का शासन इंग्लैंड की संसद के द्वारा चलाएगा।
  • इसी चरण में इंग्लैंड की सरकार ने वहां के पूंजीपतियों को प्रस्ताव दिया। भारत में निवेश करने पर 5% शुद्ध लाभ की गारंटी दी जाएगी अत: कई निवेशकों ने भारत में निवेश किया।
  • सर्वाधिक निवेश रेलवे में किया गया इसके अलावा निम्न क्षेत्रों में निवेश किया गया :-
  • बीमा
  • बैंकिंग
  • मेडिकल
  • जॉन सुलीववान ने कहा था कि हमारी व्यवस्थाए स्पंज की तरह काम करती है जो गंगा नदी से सभी अच्छी वस्तु को सौंप कर टेम्स (लंदन) के किनारे निचोड़ देती है।

धन निष्कासन का सिद्धांत :-

  • सर्वप्रथम दादा भाई नौरोजी ने 1867-68 में लिखे गए अपने लेख”England Debit to India” मैं धन निष्कासन का सिद्धांत दिया था। तथा इसकी विस्तारित व्याख्या अपनी पुस्तक” पॉवरटी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया”में की थी।
  • इसके अलावा दादा भाई नौरोजी ने ऑन द कॉमर्स ऑफ इंडिया तथा The wants and means rule in India नामक पुस्तक लिखी।
  • रमेशचंद्र दत्त ने इस धन के निष्कासन को”भारतीयों के सीने पर एक बहता हुआ घाव बताया”
  • 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इस धन निष्कासन के सिद्धांत को मान्यता दी गई।

2. कृषि पर प्रभाव

  • भारत में राष्ट्रवाद के उदय और विकास से कृषि पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े जो कि निम्न प्रकार से है आइए इन्हें देखते हैं। :-

(A). स्थाई बंदोबस्त :-

  • 1793 में इसे कार्नवालिस के द्वारा निम्न क्षेत्रों में लागू किया गया। :-
  • बंगाल
  • बिहार
  • उड़ीसा
  • वाराणसी
  • उत्तरी कर्नाटक के जिले
  • यह ब्रिटिश भारत के 19% भूभाग पर विस्तृत थी इसमें 1/11 भाग जमीदार को व 10/11 भाग कंपनी को मिलता था।
  • इस व्यवस्था में सूर्यस्त कानून था। अगर जमीदार समय पर राजस्व जमा नहीं करवा पाता था तो उससे जमीदारी छीन ली जाती थी।
  • सबसे ऊंची बोली लगाने वाले जमीदार को जमीदारी शॉप दी जाती थी।
  • राजा राममोहन राय ने इसका समर्थन किया था।

(B). रैयतवाड़ी :-

  • इसमें रैयत अर्थात किसान के साथ समझौता किया जाता था।
  • ब्रिटिश भारत के 57 परसेंट भूभाग पर विस्तृत थी इसमें उपज का 33 से 55 परसेंट वसूल किया जाता था।
  • सर्वप्रथम 1792 में कैप्टन रीड ने इसे तमिलनाडु के बारामहल जिले में लागू किया था।
  • मुंबई में एलफिंसटन व मद्रास में मुनरो के द्वारा इसे लागू किया गया।

(C) महालवाड़ी :-

  • इसमें गांव के समूह के साथ समझौता किया गया।
  • ब्रिटिश भारत के 30 परसेंट भूभाग पर विस्तृत थी व उपज का 66 परसेंट वसूल किया जाता था।
  • इसे आगरा, अवध, पंजाब के क्षेत्रों में लागू किया गया।
  • उत्तरी भारत की कृषि व्यवस्था का जनक Martin बर्ड को माना जाता है ।

3. प्रशासनिक नीतियां :-

  • 1857 की क्रांति में हिंदुओं तथा मुसलमानों ने समान रूप से भाग लिया।इसके बाद अंग्रेजों ने मुसलमानों के प्रति तुष्टीकरण की नीति अपनाई।
  • William hunter ने अपनी पुस्तक”इंडियन मुसलमान मैं लिखा है कि-अगर अंग्रेजों को भारत में लंबे समय तक राज्य करना है तो मुसलमानों को अपने पक्ष में करना होगा।
  • अंग्रेजों ने सैयद अहमद आगा खां को मुसलमान का नेतृत्व सौंपा
  • इन्होंने 1875 में अलीगढ़ स्कूल खुलवाकर दी तथा 1877 में इसे कॉलेज बना दिया गया।
  • आरचीबोल्ड इसी कॉलेज के प्रिंसिपल थे जिन्होंने पृथक निर्वाचन क्षेत्र का प्रारूप तैयार किया था। इसी प्रारूप को लेकर अक्टूबर 1906 को सैयद अहमद आगा खां के नेतृत्व में कुछ मुस्लिम प्रतिनिधि शिमला गए तथा वायसराय मिंटो-ll से मुलाकात की व मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र मांगा।

मार्ले मिंटो अधिनियम 1909

  • 1909 के मार्ले मिंटो अधिनियम में मुसलमानों को पृथक निर्वाचन क्षेत्र प्रदान कर दिया गया।
  • मार्ले इस समय भारत सचिव था तथा इसने वायसराय मिंटो को पत्र भी लिखा था की हम चांगदल के बीज बो रहे हैं इसके परिणाम अत्यंत घातक होंगे।
  • 1876 के शाही राजसी अधिनियम के तहत इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को भारत की महारानी घोषित किया गया।
  • इस कारण से 1877 में वायसराय लिंटन ने दिल्ली के दरबार का आयोजन किया, जिस पर बहुत अधिक पैसा खर्च किया गया था जबकि इस समय भारत में अकाल की स्थिति थी।

वर्नाकुलर प्रेस एक्ट :-

1878 में लिटन ने वर्नाकुलर प्रेस एक्ट लागू किया जिसके तहत देसी भाषाओं के समाचार पत्रों को सेंसरशिप लागू कर दी गई। अर्थात इस समाचार पत्र को प्रकाशित होने से पहले सरकार के पास भेजा जाता था अगर शासन विरोधी कोई बात लिखी होती तो इसका प्रकाशन नहीं हो पाता था।

  • 1883 में वायसराय रिपन के समय मुख्य न्यायाधीश इल्बर्ट ने एक बिल पारित किया इसके अनुसार कोई भी भारतीय न्यायधीश किसी भी यूरोपीय व्यक्ति के मुकदमे की सुनवाई कर सकता था।
  • इसका संपूर्ण यूरोप में विरोध हुआ और इल्बर्ट को अपना बिल वापस लेना पड़ा।

4. जातीय भेदभाव :-

  • जातीय भेदभाव की भावना ने भारतीयों को राष्ट्रीय रूप में एक होने को प्रेरित किया। जातिभेद के आधार पर अंग्रेज भारतीयों से घृणा करते थे और उनके साथ बुरा व्यवहार करते थे
  • अंग्रेज केवल अपने कोई नहीं बल्कि समस्त यूरोपीय जाति को एशियाई जाति से ऊंचा मानते थे तथा वे चाहते थे कि भारतीय भी इस बात को स्वीकार करें अंग्रेज जातीय और सांस्कृतिक रूप से ऊंचे हैं। इस व्यवहार के कारण ही भारतीयों को एक होने को मजबूत किया था।

महत्वपूर्ण सूचना

ठीक है दोस्तों आपका http://भारतीय राष्ट्रवाद का उदय और विकास से संबंधित टॉपिक कंप्लीट हुआ मैंने आपको अच्छे से बेहतर से बेहतर कंटेंट दिया है

आप ध्यान से पढ़ें और यदि आपको यह कंटेंट अच्छा लगे तो इसे अपने दोस्तों को भी फॉरवर्ड करें धन्यवाद।

भारतीय राष्ट्रवाद

May 25, 2020

Rajasthan Police SI Cut Off & Marks 2018-19 ?

  • Rajasthan Police SI Cut Off Marks
  • 2018-19 RPSC Sub Inspector Cut Off Marks 2019 Download Rajasthan PSC Platoon Commander Exam Cut Off Marks 2019
  • Rajasthan PSC Sub Inspector Category Wise Merit List RPSC SI Cut Off Marks 2018-19 RPSC SI Physical Exam Cut Off Marks 2018-19 RPSC SI Cut Off 2019

Rajasthan Police SI Cut Off Marks 2018

Will Soon Announce the Result of Physical Exam of Sub-Inspector (SI) and Platoon Commander Posts…. Candidates Can Check Result from Below Link

About Recruitment & Advt. No. – 05/SI-PC/परीक्षा/2016-17

RPSC

has recently re-announced the recruitment of Various 330 Posts of Sub-Inspector (SI) and Platoon Commander on behalf of Rajasthan Police. Many Interested & Eligible Aspirates Filled there Online Application form for these Posts. The Process of Submitting Online Application is Started from the Date 07.06.2016 and Conducted till the Date 24.05.2018.

More Details About the Recruitment & Applying Procedure is Provided Below.

About Exam

All the Eligible Candidates Face the Exam on the Date 07.10.2018 for the Posts of Sub-Inspector and Platoon Commander. The Exam was Written Objective Type. The Written Exam was Divided into Two Paper and Each Paper was of Total 200 Marks. The Time Duration for the Written Exam was 02:00 Hours. The Question Paper Was Bilingual i.e. Hindi & English. More Details About the Exam is Provided Below.

Selection Process

  1. First Stage – Written Exam
  2. Second Stage – Physical Exam and Interview.

Cut Off Marks

Rajasthan PSC has not Provided any Cut Off Marks Yet for the Sub Inspector & and Platoon Commander Posts. Soon the Official Department Will Provide the Cut Off Marks & Merit List. Here We are Providing the Expected Cut Off Marks for all the Candidates Based on the Difficulty Level of Questions Paper. Candidates Will be able to Check Category-wise Expected Cut Off Marks from the http://Below Table.

RPSC

Important Link Area

Result
Answer Key
Admit Card
Syllabus Exam Pattern
Recruitment Details
Official Websitehttps://rpsc.rajasthan.gov.in/

All the Candidates who have Any Query Or suggestion  Can Drop In comment Box. Our Expert Panel will try to assist you.

May 25, 2020

ओजोन परत का क्षरण क्या है ? Ozone Layer Depletion

ओजोन परत क्या है-O3

ओजोन ऑक्सीजन का ही एक दूसरा अपररूप है परमाणु संख्या 2 से ऑक्सीजन स्थाई रूप में होती है किंतु ओजोन में 3 परमाणु होते हैं अतः यह अपेक्षाकृत कम स्थाई होती है

यह वायुमंडल के समताप मंडल में पृथ्वी की सतह से 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक सघन वह लगभग 20 किलोमीटर मोटाई का एक गहरा होता है

यह गैस गुरुत्वाकर्षण बल के कारण एक परत के रूप में पृथ्वी के चारों ओर तनी रहती है

इसी ओजोन परत के कारण पृथ्वी को विलक्षण ग्रह होने का दर्जा मिलता है

  • समताप मंडलिय ओजोन लगातार उत्पन्न और नष्ट हो रही है वायुमंडल में इसका निर्माण एक स्वभाविक प्राकृतिक क्रिया है
  • जब सूर्य की किरणें वायुमंडल की ऊपरी सतह से टकराती हैं तो उच्च ऊर्जा विकिरण से आणविक ऑक्सीजन का कुछ भाग ऑक्सीजन परमाणु से मिलकर ओजोन मैं बदल जाता है
  • ऐसा वायुमंडल में विद्युत अपघटन वह मोटर वाहनों के विद्युत स्पार्क से भी होता है

O2——- O+O = PARMANU

O+O2 —– O3 OZONE

ओजोन परत का महत्व

  • ओजोन परत हमारे लिए एक रक्षा कवच का कार्य करती है इसका मुख्य कार्य सूर्य के प्रकाश में उपस्थित हानिकारक पराबैंगनी किरणें को अवशोषित कर पृथ्वी पर पहुंचने से रोक ना है
  • तथा यहां पर रहने वाले जीवो की रक्षा करना है सीधे शब्दों में कहें तो यह फिल्टर का कार्य करती है तथा पृथ्वी के तापमान नियमन में सहायता करती है

ओजोन छिद्र (ozone Hole)

ओजोन

जिसे हम ओजोन छिद्र के नाम से जानते हैं वह वस्तुतः कोई छिद्र नहीं है बल्कि समताप मंडल में उपस्थित ओजोन की सघन व मोटी पर्थ का छीन होना या पतला होना है इसे ओजोन परत छरण या ओजोन छिद्र कहते हैं

सर्वप्रथम 1985 में अंटार्कटिका ध्रुव पर ओजोन स्तर की मोटाई में कमी दिखाई दी एक सर्वेक्षण के अनुसार 1977 से 1984 के मध्य ओजोन में 40% कमी पाई गई

ओजोन परत को छीन के नुकसान

  • ओजोन परत को छीन कर के उसकी मोटाई को कम करने वाले मुख्य कारक मानवीय कारण है
  • वैज्ञानिकों के अनुसार मानव की विभिन्न गतिविधियां एवं क्रियाकलाप जोकि प्रदूषण को बढ़ा रही हैं
  • ओजोन गैस की कमी का मुख्य कारण है आपके लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि दैनिक उपयोग में आने वाले कुछ ऐसे उपकरण हैं
  • जिनकी Ozone लेयर को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका है

जैसे फ्रिज एयर कंडीशनर रूम हीटर परफ्यूम हेयर स्प्रे फॉर्म को पैक करने वाली सामग्री आदि क्योंकि इन उत्पादों को बनाने में एचबीएफसी व सीएफसी गैसों का प्रयोग किया जाता है

  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैज्ञानिकों ने केमिकल्स का एक ऐसा समूह खोजा था
  • जो काफी देर तक ठंडा प्रभाव देता था इस ग्रुप के रसायनों को क्लोरोफ्लोरोकार्बंस नाम दिया गया
  • दूसरा ग्रुप था एलॉन्स जो फायर प्रोटेक्शन या अग्निशमन जहाजों वायुयानो एवं कंप्यूटर कंट्रोल के रूप में काम आता है

तीसरा समूह हाइड्रोफ्लोरोकार्बंस का है जो मुख्यतः रेफ्रिजरेशन फॉम ब्लोइंग वेसीएफसी की जगह प्रयुक्त होता है

  • सीएफसी (CFC) गैस बहुत स्थाई होती हैं यह वी में 25 से 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाती हैं
  • वहां पर उपस्थित पराबैंगनी किरणें इसमें से मुक्त क्लोरीन या ब्रोमीन अलग कर देती हैं
  • यह मुक्त मूलक Ozone से क्रिया कर उसे O2 परमाणु में विभक्त कर देता है
  • सीएफसी का एक अनु अकेला ही Ozone के कई हजार अणुओं को खत्म कर सकता है
  • इस प्रकार Ozone परत का छह होता है

ओजोन परत छय के दुष्प्रभाव और इससे प्रभावित होता जनजीवन

  • Ozone परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों के लिए फिल्टर का काम करती है
  • इस तरह पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित रखती है लेकिन Ozone लेयर में ऑल हो जाने से हानिकारक पराबैंगनी किरणें सीधे पृथ्वी पर पहुंच रही हैं
  • जिससे ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे

मोतियाबिंद त्वचा का कैंसर अल्सर ब्रोक आईटी अस्थमा आदि बीमारियां बढ़ रही हैं

तथा प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है

ओजोन परत की सुरक्षा के उपाय

  • Ozone भारत की हानि के ज्ञान के बाद 1985 में वियना सम्मेलन वे 1987 में कनाडा के मांट्रियल में एक अंतरराष्ट्रीय समझौता पारित किया गया
  • जिस पर लगभग सभी देशों ने हस्ताक्षर किए गए इसमें सीएफसी के उत्पादन और खपत को समाप्त करने तथा इनके विकल्प की खोज करने का निश्चय किया गया
  • किंतु कुछ खामियों के चलते पूरी तरह ऐसा नहीं हो पाया है लंदन सम्मेलन 1990 में विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को सीएफसी रहित तकनीकी वह धन उपलब्ध कराने की बात हुई
  • 1992 में कोपेनहेगन सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि जहां तक सही हो सभी देश http://ओजोन मैत्री कारक पदार्थों के उपयोग को बढ़ाकर सीएफसी का उपयोग समाप्त करेंगे

महत्वपूर्ण प्रश्न

1 सीएफसी क्या होते हैं

2 सीएफसी के मुख्य स्रोत क्या होते हैं

May 24, 2020

वैश्विक ताप वृद्धि क्या है? Global Warming

वैश्विक ताप वृद्धि

मनुष्य द्वारा किए गए प्रकृति से छेड़छाड़ अतीव औद्योगिकीकरण एवं प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण के कारण पृथ्वी के तापमान में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है विश्व का औसतन तापमान पिछले कई वर्षों से तेजी से बढ़ा है यदि तापमान की वृद्धि दर ऐसी ही रही तो अगले 100 वर्षों में पृथ्वी का तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा पृथ्वी का तापमान बढ़ने का प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन है

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण

  1. हरित हरित गृह प्रभाव
  2. हरित गृह गैस
  3. मानव क्रियाकलापों का योगदान

हरित गृह प्रभाव ठंडे प्रदेशों में गर्मी बनाए रखने के कारण एक वरदान है परंतु अब इसमें प्रत्येक क्षण हरित गृह गैसों के जुड़ने से तापमान में वृद्धि होती जा रही है यहां पर बढ़ती हुई हरित गृह गैस से जैसे (CO2 ch4 एन ओ सीएफसी o3 जलवाष्प एवं अन्य गेसे)

ग्लोबल वार्मिंग में 24% तक उत्तरदाई है इसके अतिरिक्त विश्व तापमान में बढ़ोतरी के लिए मानव के क्रियाकलाप भी शामिल है जो समय के साथ-साथ विकास से भी जुड़े हैं और उनके ए दूरदर्शिता पूर्ण प्रक्रियाओं से भी इसका असर बढ़ता है

औद्योगिकीकरण एवं शहरी विकास के लिए जो प्रमुख आधार है वह है ऊर्जा उत्पादन ऊर्जा उत्पादन चाहे नाभिकीय या तापीय हो दोनों ही प्रक्रिया में तापीय एवं वायु प्रदूषण अधिक फेलता है इसका ताप वृद्धि में 49% तक का योगदान होता है

सूर्य समस्त वातावरण को प्रकाश व ताप देता है सूर्य की सतह का तापमान 5800 डिग्री कैल्शियम है एवं इससे 0.4 से 1.0 मीटर की तरंग धैर्य की दृश्य किरणें निकलती हैं अंतरिक्ष में अन्य तारों के समान सूर्य के आकार में परिवर्तन के कारण तरंग धैर्य भी परिवर्तित हो रही है जिसके कारण तापमान में वृद्धि हो रही है

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

तापमान में वृद्धि के कारण हिमनद पिघल रहे हैं एशिया में हिमालय एवं यूरोप के अल्पाइन के तो कुछ भाग 50% तक कम हो गए हैं भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक गंगोत्री उद्गम स्थल प्रत्येक वर्ष पीछे खिसक रहा है अब तो ध्रुवों पर घास जैसी वनस्पति भी दिखाई देने लगी है ध्रुवों पर ताप यह वृद्धि के कारण एवं हिंदुओं के पिघलने से वहां की जैविक संपदा समाप्ति की ओर है

हिमनद ओके पिघलने से शरद ऋतु भी धीरे धीरे कर जिससे मौसम चक्र गड़बड़ा रहा है इससे विभिन्न फसल चक्र और जीव-जंतुओं का जीवन चक्र भी परिवर्तित हो रहा है इस कारण बर्फीले पहाड़ बंजर होते जा रहे हैं जिसका प्रभाव पर्यटन पर भी पड़ रहा है

हिमनद ओके पिघलने के कारण जिन नदियों में वर्ष भर जल का प्रवाह बना रहता था वह अब बरसाती नदियों में बदल चुकी हैं उस कारण नदियों के पानी पर आधारित खेती या या या यातायात में पूर्ति आसानी से नहीं हो पा रही है एवं वहां के सामाजिक तथा आर्थिक वातावरण बदल रहे हैं इसके साथ नदियों में पानी नहीं रहने से उन पर आधारित बिजली घर को समान रूप से आवश्यक पानी नहीं मिलता है

इसके साथ ही वहां के पेयजल में भी प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है जिससे वहां के निवासियों में संक्रमित रोग के फैलने का भय रहता है

तापीय वृद्धि के कारण नम भूमि क्षेत्र कच्छ वनस्पति एवं प्रवाल प्रवाल भित्ति यों के समाप्त होने का खतरा बढ़ रहा है ताप में वृद्धि के कारण वनस्पति एवं प्राणी जगत के जीवन चक्र पर असर पड़ रहा है जिसे पारिस्थितिक तंत्र भी असर पड़ता है

वैश्विक ताप वृद्धि के समाधान

CO2,CH4,CFC,NO  जैसी गैसों की उत्पत्ति एवं प्रयोग की मात्रा कम की जाए

वैश्विक ताप

औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसे संयंत्र लगाए जाएं जिससे हानिकारक उत्पादों की मात्रा विघटित हो सके या उपयोगी पदार्थों में परिवर्तित हो जाए उदाहरण द्वारा हाइड्रोकार्बन एरोमेटिक योगीको में विघटित कर दिए जाते हैं

वनों के विनाश को रोका जाए एवं कृषि योग्य भूमि को बढ़ाया जाए

ईंधन एवं प्रकाश के लिए गैर परंपरागत स्रोतों जैसे पवन एवं सौर ऊर्जा को काम में लिया जाए

जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला पेट्रोलियम पदार्थ आदि का उपयोग नियंत्रित रूप से किया जाना चाहिए

जनसंख्या वृद्धि की दर कम होनी चाहिए वैश्विक ताप

महत्वपूर्ण प्रश्न

1 वैश्विक ताप वृद्धि के लिए http://उत्तरदाई प्रमुख गैसें कौन सी हैं

2 ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण क्या हैं