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April 2020

April 30, 2020

noun संज्ञा के बारे में जाने Learn about noun ?

हेलो दोस्तो नमस्कार हमने इस बार तीनों संज्ञान और उसके प्रकार पूरे लिख दिए हैं कृपया इसे अंत तक पढ़े

संज्ञा

इसका शाब्दिक अर्थ होता है नाम

नाम का दूसरा नाम संज्ञा है

किसी व्यक्ति वस्तु स्थान पदार्थ अर्थात भाव के नाम को संज्ञा कहा जाता है

उदाहरण सोहन गीता पंखा पेड़ आम आदि

संज्ञा तीन प्रकार की होती हैLearn about nounLearn about noun

संज्ञा http://संज्ञा

1 व्यक्तिवाचक संज्ञा Noun

जिस संज्ञा Noun के माध्यम से व्यक्ति विशेष के नाम का बोध होता है उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं

उदाहरण राम सीमा नरेश आदि

पहचान कैसे करें

1 मार्गों के नाम — विकास पथ राजपथ

2 व्यक्तियों के नाम — राम सीता मोहन गीता

3 नदियों के नाम — गंगा जमुना सरस्वती माही

4 दिनों के नाम — सोमवार मंगलवार बुधवार

5 त्योहारों के नाम — दिवाली होली ईदूलफित्र

6 संवतो के नाम — विक्रम संवत हज संवत

7 नक्षत्रों के नाम — सोम मंगल शनि

8 शहरों के नाम — जयपुर अमृतसर श्रीनगर

9 गांव के नाम — रूपबास मालखेड़ा

10 समाचार पत्रों के नाम — दैनिक भास्कर राजस्थान पत्रिका

11 मैगज़ीनों के नाम — हंस पत्रिका इंडिया टुडे

12 युद्धों के नाम — खानवा का युद्ध प्रथम विश्व युद्ध

2 जातिवाचक संज्ञा Noun

जिस संज्ञा Noun के माध्यम से जाति का बोध होता है अर्थात किसी व्यक्तितित वस्तु स्थान की संपूर्ण जाति का पता लगता है उसे जातिवाचक संज्ञा कहा जाता है

उदाहरण — नदी पर्वत आदमी शहर अध्यापक छात्र आदि

पहचान

1 पदों के नाम पटवारी मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति

2 फलों के नाम आम सेव अमरूद

3 पशुओं के नाम गाय भैंस ऊंट

4 वाहनों के नाम स्कुटी कार ट्रैक

5 फसलों के नाम बाजरा सरसों गेहूं

(१) समूहवाचक संज्ञा

जातिवाचक संज्ञा के कुछ नाम जो समूह गत होते हैं उन्हें समूहवाचक संज्ञा Noun कहा जाता है जैसे कक्षा बीड़ मंडल गुच्छा समिति पुंज सेना अक्षत आदि

(२) द्रव्यवाचक संज्ञा

जिस संज्ञा के माध्यम से नाप माफ तोर वाली वस्तुओं के नामों का पता चलता है उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहा जाता है जैसे कपड़ा तेल सोना दूध ऑक्सीजन आदि

3 भाव वाचक संज्ञा

भागवत नामों का बोध कराने वाली संज्ञा को भाववाचक कहते हैं जैसे सहनशीलता गुस्सा आंसू लड़ाई पढ़ाई चटाई लिखाई बचपन गर्व आदि

April 30, 2020

ग़ुलाम वंश में कुतुबुद्दीन ऐबक के बारे में पूरी जानकारी भाग – 1

1 कुतुबुद्दीन ऐबक 1206-1210

दिल्ली सल्तनत ग़ुलाम वंश के शासकों के लिए मामलुक शब्द का प्रयोग किया गया है

मामलुक से तात्पर्य ऐसे गुलाम शासक जो स्वतंत्र माता-पिता से उत्पन्न हुए दिल्ली सल्तनत ग़ुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक को माना जाता है

ऐबक तुर्की भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है चंद्रमा का देवता

उपाधि (Tital)

1 क़ुरान खावा

2 लाख बख्श

3 पिल बख्श

ऐबक ने लाहौर को अपनी राजधानी के रूप में स्थापित किया था ऐबक के द्वारा सुल्तान की उपाधि नहीं ली गई उसके स्थान पर मलिक व सिपहसालार की उपाधि ली गई ऐबक ने हसन निजामी तथा फक्र ए मुदवीर नामक विद्वानों को शरण दी फक्र ए मुदवीर द्वारा आदाब उल हरब नामक पुस्तक और हसन निजामी के द्वारा ताज उल मासिर नामक पुस्तक की रचना की गई

कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के सम्मान मैं क़तुब मीनार का निर्माण कराया गया

इल्तुतमिश के काल में इसे पूरा बनवाया गया

कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली में पिथौरागढ़ के स्थान पर कूवत उल इस्लाम मस्जिद का निर्माण कराया इस्लामी शैली पर निर्मित यह पहली मस्जिद भारत में मानी जाती है कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा सरस्वती कंठ भरण नामक संस्कृत पाठशाला के स्थान पर अराई दिन के झोपड़े का निर्माण कराया गया वर्तमान में यहां पंजाब शाह नामक पीर का ढाई दिन का उर्स आयोजित किया जाता हैआयोजित किया जाता है

ग़ुलाम वंश में कुतुबुद्दीन ऐबकग़ुलाम वंश में कुतुबुद्दीन ऐबक

भाग 2 को देखने के लिए यहां क्लिक करे

१ २ ३ ४ ५ ६ ७ 8 ९ १० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ 19 २०

२१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९ 30 ३१ ३२ ३३ ३४ 35 ३६ ३७ ३८ ३९ ४० ४१ १२ ४३ ४४ ४५ ४६ ४७ ४८ ४९ 50 अ बी च ड इ फ ग ह इ ज क ल म ण ओ प

April 30, 2020

हर्यक वंश व विदेशी आक्रमण कब कब हुए??

हर्यक वंश और विदेशी आक्रमण

हर्यक वंश 544-412 ईसा पूर्व तक रहा

राजधानी — गिरिव्रज

बिंबिसार को हर्यक वंश का

संस्थापक माना जाता है

बिंबिसार के काल में अवंतिका शासक

चंड प्रद्योत था

बिंबिसार ने अपने राज वैद्य जीवक को चंड प्रद्योत के दरबार में भेजा था

बिंबिसार की हत्या उसके पुत्र अजातशत्रु के द्वारा की गई

अजातशत्रु के काल में पहली बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया

अजातशत्रु की हत्या उसके पुत्र उद यीनी ने कि

उदयिन ने गंगा व सोन नदी के संगम पर पाटलिपुत्र की स्थापना की थी

शिशुनाग वंश 412-344 BC

से सुना को इस वंश का संस्थापक माना जाता है इसने वैशाली को अपनी राजधानी के रूप में स्थापित किया

कालाशोक ऐसी वंश का शासक था कालाशोक के काल में ही दूसरी बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया

नंद वंश 344-324 BC

संस्थापक — महापदम नंद

महापदम नंद के द्वारा पहली बार कलिंग आक्रमण किया गया जिसमें महापदम नंद को सफलता मिली इस आक्रमण की जानकारी कलिंग के शासक खारवेल के हाथी गुफा अभिलेख से मिलती है

घनानंद को नंद वंश का अंतिम शासक माना गया

मौर्य वंश की स्थापना से पहले भारत में ईरानी हक मनी वंश के शासकों ने आक्रमण किया

भारत में पहला आक्रमण साइरस दित्य के द्वारा किया गया ईरानी आक्र,मण के बाद ही भारत में खरोष्ठी लिपि का प्रचलन हुआ

दूसरा शासक डेरियस प्रथम या दारा प्रथम

यूनानी आक्रमण

सिकंदर यूनान के मकदूनिया का निवासी था

सिकंदर ने 326 ईसा पूर्व में भारत पर आक्रमण किया

जेलम नदी के किनारे सिकंदर ने पोरस के साथ युद्ध किया था

सिकंदर के आक्रमण के समय तक चला का शासक आंबी थ सिकंदर ने भारत में 2 नगरों की स्थापना की

हर्यक वंश और विदेशी आक्रमण हर्यक वंश और विदेशी आक्रमण

1 निकेया

2 बुकाफेला

323 ईसा पूर्व में बेबीलोन में सिकंदर की मृत्यु हो गई सिकंदर का उत्तराधिकारी सेल्यूकस निकेटर था

हर्यक वंश १ २ ३ ४ ५ ६ ७ 8 ९ ० हर्यक वंश

April 30, 2020

जैन धर्म क्या होता हें व् इसके बारे में जाने ?

जैन जिन शब्द से बना है जिसका अर्थ है इंद्रियों पर नियंत्रण करना

तीर्थंकर

तीर्थंकर से तात्पर्य है ऐसा व्यक्ति जो अपने ज्ञान के माध्यम से मानव को

इस संसार रूपी भवसागर से पार करने में मदद करें

कुल तीर्थंकर 24 माने गए हैं

1 ऋषभदेव

2 (22) अरिष्ट नेमी

3 (23) पार्श्वनाथ

महावीर स्वामी

महावीर

स्वामी की फोटो http://www.goldenclasses.com/जैन-धर्म/

चार महाव्रत

1 सत्य

2 अहिंसा

3 अस्तेय — चोरी नहीं करना

4 अपरिग्रह — जरूरत से ज्यादा संग्रह नहीं करना

महावीर स्वामी के द्वारा पांचवा महाव्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा गया

महावीर स्वामी

जन्म – 540 ईसा पूर्व

स्थान – वैशाली के कुंड ग्राम नामक स्थान पर

पिता – सिद्धार्थ

माता – त्रिशला

पत्नी – यशोदा

पुत्री – प्रियदर्शना

महावीर स्वामी को जुंमबिक ग्राम के समीप रिजुपालिका नदी के किनारे

साल वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई इसके बाद महावीर स्वामी निम्न नामों से जाने गए

1 अर्ह – योग्य

2 निर्ग्रन्थ – बंधन रहित

3 जिन – विजेता

468 ईसा पूर्व में पावा में महावीर स्वामी की मृत्यु हुई जो मल्ल महाजनपद की राजधानी थी

जैनधर्म की शिक्षाएं

जैन धर्म ईश्वर व आत्मा दोनों में विश्वास करता है

परंतु इन दोनों का स्थान 24 तर्थंकरों के नीचे रखा गया

जैनधर्म स्यादवाद में विश्वास करता है

जैनधर्म के त्रि रत्न

1 सम्यक श्रद्धा

2 सम्यक के ज्ञान

3 सम्यक आचरण

आश्रव

कर्म का जीव की और प्रवाह आश्रव कहलाता है

सर्वर

कर्म का प्रवाह जीव की और रुक जाना सर्वर कहलाता है

बंधन

कर्म का जीव में संयुक्त हो जाना बंधन कहलाता है

निर्जरा

जीव मै से जब बुरे कर्मों का नाश हो जाए तब यह स्थिति निर्जरा कहलाती है

निर्जरा के बाद जीव को अनंत चतुष्टय की प्राप्ति होती है जिसमें अनंत ज्ञान

अनंत दर्शन अनंत वीर्य (तेज) व अनंत सुख शामिल है

सल्लेखना

सल्लेखना से तात्पर्य है सत्य का लेखा जोखा जैन धर्म में जलन को त्याग कर

अपनी जीवन लीला समाप्त करना इसको सल्लेखना कहा गया

चंद्रगुप्त मौर्य ने कर्नाटक के श्रवणबेलगोला नामक स्थान पर सल्लेखना पद्धति के द्वारा अपने प्राणों का त्याग किया था

जैन धर्म में अहिंसा पर विशेष बल दिया गया है

जैन संगीति

चंद्रगुप्त मौर्य के काल में 300 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र के नेतृत्व में

पहली जैन संगीति का आयोजन किया गया

यहां जैन धर्म दो भागों में बट गया

1 श्वेतांबर

2 दिगंबर

दूसरी जैन संगीति

इस संगीति का आयोजन 513 ईस्वी में गुजरात के बल्लवी नामक स्थान पर किया गया

इस जैन संगीति का नेतृत्व देवरदीक्षमाश्रमण के द्वारा किया गया यहां जैन साहित्य की रचना हुई जिन्हें आगम कहा गया

सभी सभी परीक्षाओं में इसमें से सवाल आता है इसलिए पढ़ें और आगे शेयर करें

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April 30, 2020

वैदिक सभ्यता 1500-600BC भाग – 3

वैदिक सभ्यता कि सामाजिक न्याय व्यवस्था

रिग वैदिक काल में राजा न्याय का प्रमुख होता था

छोटे स्तर पर होने वाले विवादों का निपटारा मध्यस्थ के द्वारा किया जाता था

रिग वैदिक काल में गाय को सबसे प्रमुख वस्तु माना गया है

पुलिस कर्मचारियों के लिए उम्र व न्यायाधीश के लिए प्रश्न विनायक शब्द का प्रयोग किया गया है

अपराधियों के लिए जीवगर्व शब्द का प्रयोग किया गया है

सामाजिक व्यवस्था

रिग वैदिक कालीन समाज पितृसत्तात्मक थे परिवार के मुखिया को ग्रहपति कहा जाता था

संयुक्त परिवार की प्रथा मौजूद थी विवाह को एक संस्कार माना गय

विवाह के प्रकार

अनुलोम प्रतिलोम दोनों होते थे

स्त्रियों की स्थिति

रिग वैदिक काल में परिवार के सभीरिग वैदिक काल में परिवार के सभी सदस्य एक साथ निवास करते थे

जिन्हें सम्मिलित रूप से नरपत कहा

1 कन्याओं का उपनयन संस्कार होता था

2 महिलाओं को शिक्षा दी जाती थी

3 बाल विवाह में पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था

4 अंतरजातीय विवाह विनियोग प्रथा का प्रचलन था

5 महिलाओं को राजनीति में भाग लेने का अधिकार था

अमाजू

आजीवन अविवाहित रहने वाली महिलाओं को अमाजु कहा जाता था

व्हतू

विवाह के अवसर पर कन्या को दिया जाने वाला उपहार

वैदिक सभ्यता वैदिकhttp://वैदिक-सभ्यता-1500-600bc-भाग-4

वस्त्र

1 निवी

कमर के नीचे पहनने जाने वाला वस्त्र

2 वास

शरीर के ऊपरी भाग में पहनने जाने वाला वस्त्र

3अधिवास

यह भी शरीर के ऊपरी भाग में पहने जाने वाले वस्त्र

4 उसनि

पगड़ी

चमड़े को भी वस्त्र के रूप में प्रयोग लिया जाता था

5 आभूषण

स्त्री व पुरुष दोनों आभूषणों का प्रयोग करते थे

सोने के आभूषणों के लिए निष्क शब्द का प्रयोग किया गया है

मनोरंजन

1 रथ दौड़,

2 पासा पशु

3 पक्षियों की लड़ाई

कृषि व्यवस्था

कृषि कार्य के लिए चर्सिनी शब्द का प्रयोग किया गया है

ऋग्वेद के चौथे मंडल से कृषि के बारे में जानकारी मिलती है

रिग वैदिक कालीन लोगों का प्राथमिक कार्य कृषि था इस काल में पशु पालन किया जाता था

गाय को प्रमुख पशु माना गया है और गाय के लिए अघन्य शब्द का प्रयोग किया गया है

जिस से तात्पर्य है न मारने योग्य

दूसरा प्रमुख पशु घोड़ा था

क्षेत्र— इसका तात्पर्य जूता हुआ खेत

उर्वरा —उपजाऊ भूमि

पर्जन्य —बादल

लागल — हल

रिग वैदिक काल में कृषि कार्य अच्छी अवस्था में था खेती करने वालों की स्थिति उन्नत थी

खेती के अलावा शिल्प जैसे कार्य भी संपन्न किए जाते थे

गोबर की खाद को करिसू कहते थे

हाल से बनी नालियां सीता कहलाती थी

धार्मिक जीवन

रिग वैदिक कालीन लोग बहू देव आदि थे हालांकि इनके द्वारा एक देवता की भी पूजा की जाती थी

April 30, 2020

वैदिक सभ्यता 1500-600BC भाग – 2

वैदिक सभ्यता की राजनीतिक व्यवस्था

रिग वैदिक कालीन राजनीतिक जीवन कबीलाई पद्धति पर आधारित तथा

इस समय प्रमुख रूप से पांच काबिले ते जिन्हें पंचजन्य कहा गया है जो निम्नलिखित हैं

1 अनु

2 धुह

3 यदु

4 तुर्वस

5 पुरू

राजनीतिक इकाई

1 परिवार

2 ग्राम

3 जन

4 जनपद

5 महाजनपद

6 साम्राज्य

कबीले के प्रमुख को जन्नस्य गोप कहा गया है जन्नस्य गोप युद्ध का स्वामी होता था

इस समय राजा पर नियंत्रण रखने के लिए सभा समिति विधत गण जैसी राजनीतिक इकाइयां मौजूद थी

नाम ऋग्वेद में उल्लेख

इंद्र 250

अग्नि। 200

गाय 176

सभा। 8

समिति। 9

गंगा 1

यमुना। 3

बलि

यह रिग वैदिक कालीन धार्मिक कर था जोकि जनसाधारण के द्वारा स्वेच्छा से राजा को दिया जाता था

उत्तर वैदिक काल में यह एक नियमित कर हो गया

दसराग्य युद्ध

ऋग्वेद के सातवें मंडल से इस युद्ध की जानकारी मिलती है परूश्नी नदी के किनारे लड़े गए

इस युद्ध में भारतवंशी राजा सुधांश की विजय हुई थी

प्रमुख अधिकारी

1 purohit

यह राजा का मित्र अध्यापक दार्शनिक में प्रधानमंत्री होता था

2 सेनानी

यह सेना प्रमुख होता था

3 ग्रामीणी

ग्रामीणी अधिकारी होता था

4 शुत

रथ चलाने वाला

5 पूरप

दुर्ग से संबंधित अधिकारी

6 स्पेस

गुप्तचर विभाग से संबंधित अधिकारी

7 कर्मरा

धातु कार्य से संबंधित अधिकारी

सामाजिक न्याय

रिग वैदिक काल में राजा न्याय का प्रमुख होता था

छोटे स्तर पर होने वाले विवादों का निपटारा मध्यस्थ के द्वारा किया जाता था

रिग वैदिक काल में गाय को सबसे प्रमुख वस्तु माना गया है

पुलिस कर्मचारियों के लिए उम्र व न्यायाधीश के लिए प्रश्न विनायक शब्द का प्रयोग किया गया है

अपराधियों के लिए जीवगर्व शब्द का प्रयोग किया गया है

सामाजिक व्यवस्था

रिग वैदिक कालीन समाज पितृसत्तात्मक थे परिवार के मुखिया को ग्रहपति कहा जाता था

संयुक्त परिवार की प्रथा मौजूद थी विवाह को एक संस्कार माना गय

विवाह के प्रकार

अनुलोम प्रतिलोम दोनों होते थे

स्त्रियों की स्थिति

रिग वैदिक काल में परिवार के सभीरिग वैदिक काल में परिवार के सभी सदस्य एक साथ निवास करते थे

जिन्हें सम्मिलित रूप से नरपत कहा

1 कन्याओं का उपनयन संस्कार होता था

2 महिलाओं को शिक्षा दी जाती थी

3 बाल विवाह में पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था

4 अंतरजातीय विवाह विनियोग प्रथा का प्रचलन था

5 महिलाओं को राजनीति में भाग लेने का अधिकार था

अमाजू

आजीवन अविवाहित रहने वाली महिलाओं को अमाजु कहा जाता था

व्हतू

विवाह के अवसर पर कन्या को दिया जाने वाला उपहार

वस्त्र

1 निवी

कमर के नीचे पहनने जाने वाला वस्त्र

2 वास

शरीर के ऊपरी भाग में पहनने जाने वाला वस्त्र

3अधिवास

यह भी शरीर के ऊपरी भाग में पहने जाने वाले वस्त्र

4 उसनि

पगड़ी

चमड़े को भी वस्त्र के रूप में प्रयोग लिया जाता था

5 आभूषण

स्त्री व पुरुष दोनों आभूषणों का प्रयोग करते थे

सोने के आभूषणों के लिए निष्क शब्द का प्रयोग किया गया है

मनोरंजन

1 रथ दौड़,

2 पासा पशु

3 पक्षियों की लड़ाई

कृषि व्यवस्था

कृषि कार्य के लिए चर्सिनी शब्द का प्रयोग किया गया है

ऋग्वेद के चौथे मंडल से कृषि के बारे में जानकारी मिलती है

रिग वैदिक कालीन लोगों का प्राथमिक कार्य कृषि था इस काल में पशु पालन किया जाता था

गाय को प्रमुख पशु माना गया है और गाय के लिए अघन्य शब्द का प्रयोग किया गया है

जिस से तात्पर्य है न मारने योग्य

वैदिक सभ्यतावैदिक सभ्यता की फोटो http://www.goldenclasses.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-1500-600bc-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-4/

दूसरा प्रमुख पशु घोड़ा था

क्षेत्र— इसका तात्पर्य जूता हुआ खेत

उर्वरा —उपजाऊ भूमि

पर्जन्य —बादल

लागल — हल

रिग वैदिक काल में कृषि कार्य अच्छी अवस्था में था खेती करने वालों की स्थिति उन्नत थी

खेती के अलावा शिल्प जैसे कार्य भी संपन्न किए जाते थे

गोबर की खाद को करिसू कहते थे

हाल से बनी नालियां सीता कहलाती थी

धार्मिक जीवन

रिग वैदिक कालीन लोग बहू देव आदि थे हालांकि इनके द्वारा एक देवता की भी पूजा की जाती थी

April 30, 2020

वैदिक सभ्यता 1500-600BC भाग – 1

वैदिक वेद से बना है जिसका अर्थ है ज्ञान वेद को अपोरुस्य कहा जाता है

क्योंकि ऐसा माना जाता है कि वेदों की रचना मानव के द्वारा नहीं की गई है

वैदिक सभ्यता के निवासी आर्य के लाए आर्य शब्द से तात्पर्य है श्रेष्ठ अभी जाते और कुलीन

आर्य जाति का सूचक नहीं है आर्यों की भाषा संस्कृति आर्यों को लिपि का ज्ञान नहीं था

आर्यों ने सुनकर अपने ज्ञान को आगे बढ़ाया इसलिए वैदिक साहित्य को श्रुति साहित्य भी कहा जाता है

बोगाज़कोई अभिलेख (1400) BC

वर्तमान तुर्की से प्राप्त इस अभिलेख से रिग वैदिक कालीन 4 देवताओं के नामों का उल्लेख मिलता है

1 इंद्र

2 मित्र

3 वरुण

4 नासत्य

आर्यों का मूल निवास स्थान

विद्वान मत

1 गंगानाथ झा ब्रहम ऋषि देश

2 तिलक उत्तरी ध्रुव इन्होंने अपनी पुस्तक द आर्कटिक होम ऑफ द आर्यन मैं बताया है

3 दयानंद सरस्वती तिब्बत (सत्यार्थ प्रकाश)

4 मैक्स मुलर। मध्य एशिया

आर्यों का भौगोलिक क्षेत्र

यह सप्त सिंधु प्रदेश में रहते थे यह निम्नलिखित नदियों के पास में रहते थे

1 सिंधु

2सरस्वती

3 रावी (परुस्नी)

4चिनाब (असिकिनी)

5 जेलम (विस्तास)

6 सतलज (शतुद्री)

7 व्यास (बिपाशा)

सिंधु रिग वैदिक कालीन प्रमुख नदी थी जबकि सरस्वती को सबसे पवित्र नदी माना गया है

सरस्वती के लिए नदीतमा शब्द का प्रयोग किया गया है

वैदिक सभ्यतावैदिक सभ्यता की फोटो

वैदिक साहित्य चार प्रकार के है

1 वेद चार हैं जो निम्नलिखित हैं

ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अर्थ वेद

2 ब्राह्मण ग्रंथ

वेदों को समझाने के लिए रचना

3 आरण्यक ग्रंथ

जंगल में लिखे गए ग्रंथ

4 उपनिषद या वेदांत

ब्रह्मा व आत्मा के चर्चा

1 ऋग्वेद – 1500-1000BC

रचना क्षेत्र- सप्त सेंधव प्रदेश

1028 सूक्त (अच्छी उक्ति)

भाग 10

तीसरा भाग में गायत्री मंत्र है

चौथा भाग में कृषि से संबंधित जानकारी है

सातवां भाग में दसराज्ञा युद्ध की जानकारी मिलती है

नवभाग में सोम को समर्पित है

दसवां भाग में पुरुष सूक्त चार वर्णों की उत्पत्ति मिलती है जो निम्नलिखित हैं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र

ऋग्वेद का पुरोहित होत्र होता कहलाता है

2 सामवेद

सामवेद को संगीत का सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है सामवेद का पुरोहित उदगाता कहलाता है

3 यजुर्वेद

यज्ञ की विधियों का उल्लेख मिलता है

यजुर्वेद का पुरोहित अदर्वेयू कहलाता है

http://ब्राह्मण ग्रंथ शतपथ

4 अर्थववेद

जादू टोने से संबंधित

पुरोहित ब्रह्मा

ब्राह्मण ग्रन्थ गोपथ

वेदाग 6 होते है

1 शिक्षा

2 निरुक्त

3 कल्प

4 छंद

5 ज्योतिषी

6 व्याकरण

April 30, 2020

श्रमिक दिवस मनाने का क्या कारण हें ?

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस या मई दिन मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है

जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय श्रमिक

8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। श्रमिक

मौजूदा समय भारत और अन्य मुल्कों में मज़दूरों( श्रमिक ) के 8 घंटे काम करने से संबंधित क़ानून लागू है।

यह 1मई को लगभग 80 देशों में मनाया जाता हैं|

मजदूरों( श्रमिक ) द्वारा की गयी कड़ी मेहनत का सम्मान करने के

साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ने वालों को सम्मान देने के लिए Labour Day (मजदूर दिवस) मनाया जाता हैं|

तो आइए जानते हैं Labour Day (मजदूर दिवस)

पर उन महान पुरुषों के अनमोल विचारों को जो कुछ इस प्रकार हैं-

अनमोल विचार-1

परिश्रम के बिना कुछ भी फलता-फूलता नहीं हैं|

सोफोक्लास

अनमोल विचार-2

काम पर बुरा एक दिन नरक में एक अच्छे दिन की तुलना में बेहतर हैं|

स्कॉट जॉनसन

अनमोल विचार-3

आदमी कुछ  ऐसा बना हैं कि उसे एक काम से आराम सिर्फ दूसरे काम को करके मिलता हैं|

अनातोले फ्रांस

अनमोल विचार- 4

हर एक काम को जो मानवता को ऊपर ले जाने का काम करता हैं,उसमें गरिमा एवं महत्तवता होती हैं

और उसे श्रमसाध्य उत्कृष्टता के साथ किया जाना चाहिए|

मार्टिन लूथर किंग

अनमोल विचार-5

परिश्रम के प्रार्थना हैं जिसका उत्तर प्रकृति देती हैं|

रोबर्ट ग्रीन इंगरसोल

अनमोल विचार- 6

भगवान परिश्रम की कीमत पर हमें सभी चीजों को बेचता हैं|

लियोनार्डो डा विंसी

अनमोल विचार- 7

यदि कोई कहता हैं कि वो अमेरिका से प्यार करता हैं

पर उसे काम करने से नफरत हैं तो वो झूठा हैं|
यदि कोई कहता हैं कि वो अमेरिका पर भरोसा करता हैं तो वो बेवकूफ हैं|

अब्राहम लिंकन

अनमोल विचार-9

श्रम का अंत फुर्सत के पल पाना हैं|

अरस्तु

यह 1मई को लगभग 80 देशों में मनाया जाता हैं| मजदूरों द्वारा की गयी कड़ी मेहनत का सम्मान करने के

April 30, 2020

चन्हूदड़ो से लिपिस्टिक के साक्ष्य मिले है

चन्हूदड़ो व् धोलावीरा सभ्यता

पाकिस्तान में सिंधु नदी के किनारे विकसित इस स्थल की खोज 1931 में एनजी मजूमदार के द्वारा की गई

चन्हूदरो एक औद्योगिक नगरी थी

अर्नेस्टमेके ने यहां से मनके बनाने का कारखाना खोजा था

चन्हूदड़ो से लिपिस्टिक के साक्ष्य मिले है

चन्हूदड़ो से प्राप्त एक इट से बिल्ली व कुता के पैर के निशान प्राप्त हुए है

धोलावीरा सभ्यता

1967 में जगपति जोशी के द्वारा इस स्थान की खोज की गई

R S विस्त के द्वारा यहां खुदाई का कार्य करवाया गया

धोलावीरा का शाब्दिक अर्थ — सफेद कुआं

धोलावीरा से 3 टीलों के साक्ष्य मिले हैं

1 पश्चिमी टीला

2 मध्य टीला

3 पूर्वी टीला

अन्य साक्ष्य

स्टेडियम के साक्ष्य

धोलावीरा से एक बोर्ड भी मिला है जिस पर तत्कालीन लिपि में कुछ लिखा हुआ है इसे इतिहासकार अभी तक पढ़ नहीं पाए हैं

लिपि

सिंधु सभ्यता में भाव चित्रात्मक लिपि का प्रयोग किया गया है जिसे बूस्टॉफेदन भी कहा जाता है इस लिपि में 400 से 500 तक अक्षर थे इनमें अंग्रेजी के U अक्षर का चित्र तथा मछली की आकृति का चित्र बना हुआ है

ब्राह्मी लिपि L TO R

खरोष्ठी लिपि R TO L

अन्य स्थल

1 नोसारो

पाकिस्तान के नोसारों नामक स्थान से महिला मरण मूर्तियां प्राप्त हुई है जिनकी मांग में सिंदूर भरा हुआ है

2 बालाकोट

पाकिस्तान में स्थित यह एक बंदरगाह स्थल था जो कि शिप उद्योग के लिए प्रसिद्ध था

3 सुत्कागेंडोर

पाकिस्तान में बंदरगाह नगर स्थित

4 रोपड़

पंजाब में सतलज नदी के किनारे विकसित इस स्थल की खोज 1953 में यज्ञ दत्त शर्मा के द्वारा की गई

रोपड़ से मनुष्य के साथ पालतू कुत्ते का दफनाने के साक्ष्य मिले हैं

5 सुरकोटड़ा

1964 में जगपति जोशी के द्वारा इस स्थान की खोज की गई यहां से घोड़े की अस्थियों के साक्ष्य मिले हैं

चन्हूदड़ो व् धोलावीरा सभ्यताचन्हूदड़ो व् धोलावीरा सभ्यता

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April 30, 2020

कालीबंगा और मोहनजोदड़ो सभ्यता क्या हें ?

कालीबंगा और मोहनजोदड़ो सभ्यता

अन्य नाम

1 दीन हीन बस्ती(कच्ची इटो से निर्मित मकान)

2 काली चूड़ियां

स्थिति– हनुमानगढ़ राजस्थान घग्गर नदी के किनारे

जानकारी– एल पी तेसितोरी

खोजकर्ता –अमला नंद घोष 1952

उत्खनन कर्ता –बृजवासी लाल और बालकृष्ण थापर 1961

कालीबंगा से त्रिस्तरीय संस्कृति के साक्ष्य मिले हैं

1 प्रागैतिहासिक काल

2 आध ऐतिहासिक काल

3 ऐतिहासिक काल

साक्ष्य

1 जूते हुए खेत के साक्ष्य

2 अग्नि वेदिका के साक्ष्य

3 खोपड़ी की शल्य चिकित्सा के साक्ष्य

4 भूकम के

कालीबंगा में सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती हुई बनाई गई जिसे ऑक्सफोर्ड या ग्रेड प्रणाली कहा गया है

कालीबंगा में तीन प्रकार के सवाधान पद्धति मौजूद थे

1 पूर्ण समाधिकरण कालीबंगा और मोहनजोदड़ो  सभ्यताकालीबंगा और मोहनजोदड़ो सभ्यता

2 आंशिक समाधिकरण

3 दाह संस्कार

मोहनजोदड़ो

अन्य नाम मृतकों का टीला

पाकिस्तान के लरकान प्रांत में सिंधु नदी के किनारे इस स्थल का विकास हुआ

1922 में राखल दास बनर्जी के द्वारा मोहनजोदड़ो की खोज की गई

मोहनजोदड़ो से भी दो टीमों के साक्ष्य मिले हैं

पश्चिमी टीला

पूर्वी टीला

मोहनजोदड़ो के पश्चिमी टीलों को स्तूप टीला भी कहा गया है क्योंकि यहां पर कुषाण काल में स्तूप का निर्माण किया गया था

स्तूप क्या होता है

स्तूप से तात्पर्य है राख का ढेर अर्थात एक प्रकार का समाधि स्थल ऋग्वेद में जलती हुई चिता के लिए चैत्य शब्द का प्रयोग किया गया है

महात्मा बुध की मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों को जिन स्थानों पर रखा गया भाई स्थान समाधि स्थल कहलाया और इन्हीं समाधि स्थलों के स्तूप का गया

स्तूप का सबसे पवित्र भाग हर्मिका का कहलाता है

मोहनजोदड़ो से प्राप्त अन्य साक्ष्य

स्नानागार

स्नानागार धार्मिक अनुष्ठान के लिए प्रयोग में लिया जाता था स्नानागार के फर्श में पक्की ईंटों का प्रयोग किया गया है

मार्शल ने इस स्नानागार के लिए कहा है कि यह मोहनजोदड़ो का एक आश्चर्यजनक निर्माण है

2 अन्नागार

मार्टिमर वहिलान ने मोहनजोदड़ो से प्राप्त नगर को मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी इमारत कहां है

3 सभाभवन

4 पुरोहित आवास