वैश्विक ताप वृद्धि

मनुष्य द्वारा किए गए प्रकृति से छेड़छाड़ अतीव औद्योगिकीकरण एवं प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण के कारण पृथ्वी के तापमान में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है विश्व का औसतन तापमान पिछले कई वर्षों से तेजी से बढ़ा है यदि तापमान की वृद्धि दर ऐसी ही रही तो अगले 100 वर्षों में पृथ्वी का तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा पृथ्वी का तापमान बढ़ने का प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन है

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण

  1. हरित हरित गृह प्रभाव
  2. हरित गृह गैस
  3. मानव क्रियाकलापों का योगदान

हरित गृह प्रभाव ठंडे प्रदेशों में गर्मी बनाए रखने के कारण एक वरदान है परंतु अब इसमें प्रत्येक क्षण हरित गृह गैसों के जुड़ने से तापमान में वृद्धि होती जा रही है यहां पर बढ़ती हुई हरित गृह गैस से जैसे (CO2 ch4 एन ओ सीएफसी o3 जलवाष्प एवं अन्य गेसे)

ग्लोबल वार्मिंग में 24% तक उत्तरदाई है इसके अतिरिक्त विश्व तापमान में बढ़ोतरी के लिए मानव के क्रियाकलाप भी शामिल है जो समय के साथ-साथ विकास से भी जुड़े हैं और उनके ए दूरदर्शिता पूर्ण प्रक्रियाओं से भी इसका असर बढ़ता है

औद्योगिकीकरण एवं शहरी विकास के लिए जो प्रमुख आधार है वह है ऊर्जा उत्पादन ऊर्जा उत्पादन चाहे नाभिकीय या तापीय हो दोनों ही प्रक्रिया में तापीय एवं वायु प्रदूषण अधिक फेलता है इसका ताप वृद्धि में 49% तक का योगदान होता है

सूर्य समस्त वातावरण को प्रकाश व ताप देता है सूर्य की सतह का तापमान 5800 डिग्री कैल्शियम है एवं इससे 0.4 से 1.0 मीटर की तरंग धैर्य की दृश्य किरणें निकलती हैं अंतरिक्ष में अन्य तारों के समान सूर्य के आकार में परिवर्तन के कारण तरंग धैर्य भी परिवर्तित हो रही है जिसके कारण तापमान में वृद्धि हो रही है

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

तापमान में वृद्धि के कारण हिमनद पिघल रहे हैं एशिया में हिमालय एवं यूरोप के अल्पाइन के तो कुछ भाग 50% तक कम हो गए हैं भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक गंगोत्री उद्गम स्थल प्रत्येक वर्ष पीछे खिसक रहा है अब तो ध्रुवों पर घास जैसी वनस्पति भी दिखाई देने लगी है ध्रुवों पर ताप यह वृद्धि के कारण एवं हिंदुओं के पिघलने से वहां की जैविक संपदा समाप्ति की ओर है

हिमनद ओके पिघलने से शरद ऋतु भी धीरे धीरे कर जिससे मौसम चक्र गड़बड़ा रहा है इससे विभिन्न फसल चक्र और जीव-जंतुओं का जीवन चक्र भी परिवर्तित हो रहा है इस कारण बर्फीले पहाड़ बंजर होते जा रहे हैं जिसका प्रभाव पर्यटन पर भी पड़ रहा है

हिमनद ओके पिघलने के कारण जिन नदियों में वर्ष भर जल का प्रवाह बना रहता था वह अब बरसाती नदियों में बदल चुकी हैं उस कारण नदियों के पानी पर आधारित खेती या या या यातायात में पूर्ति आसानी से नहीं हो पा रही है एवं वहां के सामाजिक तथा आर्थिक वातावरण बदल रहे हैं इसके साथ नदियों में पानी नहीं रहने से उन पर आधारित बिजली घर को समान रूप से आवश्यक पानी नहीं मिलता है

इसके साथ ही वहां के पेयजल में भी प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है जिससे वहां के निवासियों में संक्रमित रोग के फैलने का भय रहता है

तापीय वृद्धि के कारण नम भूमि क्षेत्र कच्छ वनस्पति एवं प्रवाल प्रवाल भित्ति यों के समाप्त होने का खतरा बढ़ रहा है ताप में वृद्धि के कारण वनस्पति एवं प्राणी जगत के जीवन चक्र पर असर पड़ रहा है जिसे पारिस्थितिक तंत्र भी असर पड़ता है

वैश्विक ताप वृद्धि के समाधान

CO2,CH4,CFC,NO  जैसी गैसों की उत्पत्ति एवं प्रयोग की मात्रा कम की जाए

वैश्विक ताप

औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसे संयंत्र लगाए जाएं जिससे हानिकारक उत्पादों की मात्रा विघटित हो सके या उपयोगी पदार्थों में परिवर्तित हो जाए उदाहरण द्वारा हाइड्रोकार्बन एरोमेटिक योगीको में विघटित कर दिए जाते हैं

वनों के विनाश को रोका जाए एवं कृषि योग्य भूमि को बढ़ाया जाए

ईंधन एवं प्रकाश के लिए गैर परंपरागत स्रोतों जैसे पवन एवं सौर ऊर्जा को काम में लिया जाए

जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला पेट्रोलियम पदार्थ आदि का उपयोग नियंत्रित रूप से किया जाना चाहिए

जनसंख्या वृद्धि की दर कम होनी चाहिए वैश्विक ताप

महत्वपूर्ण प्रश्न

1 वैश्विक ताप वृद्धि के लिए http://उत्तरदाई प्रमुख गैसें कौन सी हैं

2 ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण क्या हैं