मौर्योत्तर काल

मौर्योत्तर काल Mauryottar Period 

1. यवन

मौर्योत्तर काल में भारत पर सबसे पहला विदेशी आक्रमण बैक्ट्रिया के ग्रीको ने किया इन्हें हिंद- यवन या इंडोग्रीक के नाम से जाना जाता है इनके शासकों में मिनांडर सर्वाधिक महत्वपूर्ण रहा है उसकी राजधानी साकाल थी

प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक नागसेन के साथ मिनांडर (मिलिंद)के द्वारा की गई वाद विवाद का विस्तृत विवरण मिलिंदपन्हो नामक ग्रंथ पर मिलता है इंडो-ग्रीक शासकों ने भारत में सर्वप्रथम सोने के सिक्के तथा लेखयुक्त सिक्के जारी किए थे   विभिन्न ग्रहों के नाम, नक्षत्रों के आधार पर भविष्य बताने की कला, संवत तथा सप्ताह के 7 दिनों का विभाजन यूनानियों ने भारत को सिखाया था

दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण है।

मौर्योत्तर कालमौर्योत्तर काल

यवन शासक मेनान्डर 

भारत में अपने शासन एवं प्रभाव की जुड़े जमाने वाले यवन शासकों में मेनान्डर का (180 -145 ई. पूर्व ) नाम उल्लेखनीय है  मेनान्डर शक्तिशाली, न्यायपरायण, उदार और सहिष्णु  शासक था मेनान्डर के साम्राज्य का विस्तार उत्तर -पश्चिम सीमा प्रान्त, पंजाब, सौराष्ट्र और सुदूर पश्चिम तक था 

मेनान्डर ने पाटलिपुत्र पर अधिकार करने के उद्देश्य से राजपूताना और उसके बाद मथुरा पर पर तीव्र आक्रमण किया  मेनान्डर ने नागसेन बौद्ध भिक्षु के प्रभाव से बौद्ध धर्म ग्रहण किया था मिलिन्दपण्हो जो बौद्ध भिक्षु नागसेन व मेनान्डर के बीच वार्तालाप से संबंधित ग्रन्थ है इसका चीनी भाषा में अनुवाद (317 -420 ई. )नागसेनसूत्रनाम से हुआ था 

मिलिन्दपण्हो का महत्व बौद्ध धर्म दर्शन, साहित्य तथा इतिहास की दृष्टि से है सीमाप्रान्त में प्राप्त खरोष्ठी भाषा के अभिलेखों में मेनान्डर का नाम मिनद्र मिलता है  मेनान्डर के सिक्के काबुल से दक्षिण भारत तथा पश्चिम से मथुरा, कौशांबी और वाराणसी आदि अनेक अंचलों से मिले हैं 

2. शक

प्रथम शक राजा मौस अथवा मोग था 57 या 58 ई.पू में उज्जैन के एक शासक विक्रमादित्य ने शकों को हराया जिसके उपलक्ष्य मे विक्रम संवत शुरू किया

शक मूलतः एशिया के निवासी थे भारत में सबसे प्रसिद्ध शक शासक रुद्रदामन था वह उज्जैन का क्षत्रप था जूनागढ़ से प्राप्त उन का अभिलेख संस्कृत भाषा का पहला अभिलेख है रुद्रदामन प्रथम ने चंद्रगुप्त मौर्य के समय निर्मित सुदर्शन झील का पुनरुद्धार करवाया था रुद्रदामन के समय दूसरी बार ठीक कराई गयी. तीसरी मरम्मत स्कंदगुप्त के समय में हुयी

3. पहलव (पार्थियन )

पहलव मूर्ति पार्थिया के निवासी थे पहलवो का सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक गोंदोफ़र्निस था उस के शासनकाल में ईसाई धर्म -प्रचारक सेंट टॉमस भारत आया था

4. कुषाण

कुषाण यू-ची जनजाति से संबंधित है वे पश्चिमी चीन से भारत आए थे  कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक था जिसने 78ई में शक संवत को प्रचलित किया इसने पुरुषपुर (पेशावर) को अपनी राजधानी बनाया मथुरा कनिष्क की द्वितीय राजधानी थी

कश्मीर में कनिष्क ने कनिष्कपुर नामक नगर की स्थापना इसके शासनकाल में चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन कुंडल वन कश्मीर में हुआ