मुगलकालीन साहित्य

आइए जानते हैं सबसे पहले मुगलकालीन साहित्य के बारे में जो कि निम्न शासको के काल में साहित्य की रचना हुई जो कि निम्न प्रकार से है

1. बाबर

  • बाबर ने तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा तुजुक- ए – बाबरी लिखी थी !
  • एलफिनसटन ने इसे मध्य एशिया में लिखी गई इतिहास की सबसे प्रमाणित पुस्तक माना है !
  • मुगल काल में इसका चार बार तुर्की से फारसी में अनुवाद किया गया !
  • इसके फारसी अनुवाद को बाबरनामा कहते हैं !
  • हुमायूं के समय जैन खा व पायदा खा ने अकबर के समय अब्दुल रहीम खान-ए-खाना तथा शाहजहां के समय मीर अंबु तालिब तुरवीती ने इसका अनुवाद किया था !
  • लीउन एरीस्टन व किग ने फारसी से अंग्रेजी में अनुवाद किया तथा श्रीमती चार्ल्स बेबरीज ने इसका तुर्की से अंग्रेजी में अनुवाद किया !
  • इसी को अंग्रेजी का सबसे प्रमाणित अनुवाद मानते हैं !
  • बाबर की कविताओं के संग्रह को दीवान का जाता है !
  • बाबर ने पद्य शैली में इस्लाम के कानून लिखे हैं इस शैली को मुबइयान कहा जाता है !
  • बाबर के द्वारा अपने अधिकारियों वह शासको को भेजे गए पत्र व प्राप्त पत्रों के संग्रह को रिसाल-ए-उसज या खत-ए-बाबरी कहते हैं !

2. हुमायूं

  • हुमायूं के समय दवादा मीर ने कानून-ए-हुमायूंनी की रचना की !
  • इसमें हुमायूं का खगोल, ज्योतिष वह संगीत के प्रति लगाव बताया गया है !

3. अकबर

मुगलकालीन साहित्य

  • अकबर के समय हुमायूं के नौकर जोहर आफताबची ने तारीख-ए-हुमायूं की रचना की, इसे तजकिरात-उल-बाकियात भी कहते हैं !
  • हुमायूं की बहन गुलबदन बेगम ने हुमायूंनामा की रचना की परंतु यह दोनों पुस्तकें हुमायूं के निजी जीवन पर लिखी गई हैं !
  • अकबर के शासन काल में लिखित प्रथम ऐतिहासिक पुस्तक अलाऊदोला कजविनी की नफाइस उल मआसिर है !
  • अबुल फजल : – अबुल फजल अकबर के समय सरकारी इतिहासकार के पद पर था !
  • इसने अकबरनामा की रचना की जिस के कुल 3 भाग हैं तीसरे भाग को आइन-ए-अकबरी कहते हैं इसके भी कुल 5 भाग है !
  • इनायत उल्लाह :- 1602 से 1605 तक इनायत उल्लाह सरकारी इतिहासकार के पद पर रहा जिसने लकमील -ए-अकबरनामा की रचना की !
  • बदायूंनी ने मुतखत-उत-तवारीख की रचना की ! इसमें हल्दीघाटी युद्ध का उल्लेख किया गया है !
  • मिर्जा रोशन दौलगत ने तारीख-ए-रसीदो की रचना की है !
  • मोहसीन फनी ने दाविस्तान-ए -महाजिब की रचना की इसमें इबादतखाने में हुए वाद विवादो को लिखा गया है !

मुगलकाल में धर्म से संबंधित साहित्यकार

  • हिंदू धर्म से – पुरुषोत्तम व देवी
  • ईसाई धर्म से – मोसरोल, एक्वाबीव
  • जैन धर्म से – जिनचंद्र सूरी, हीर विजय सूरी
  • पारसी धर्म से – दस्तूर जी मेंहर राणा
  • राजस्थान से निर्गुण संप्रदाय के संत दादू दयाल जी ने भाग लिया !

आइए देखते हैं अकबर के शासन काल में और कौन-कौन से साहित्य लिखे गए गए हैं

  • अकबर के शासन काल में लिखित एकमात्र पुस्तक के मीर निजामुद्दीन अहमद की तवकात-ए-अकबरी है !
  • अबुल फजल के भाई फैजी को अकबर ने अनुवाद विभाग का अध्यक्ष बनाया ! फैजी की पुस्तक का नाम अकबरनामा था !
  • अबुल फजल ने पंचतंत्र का अरबी और फारसी भाषा में अनुवाद किया था !
  • इसके फारसी अनुवाद को अनवर-ए-सुहली अरबी अनुवाद को कलीला-दमन या अयार-ए-दानिश कहते हैं
  • गिजाली को अकबर के समय का श्रेष्ठ कवि माना गया इसने मसनवी नल एवं दमयत की रचना की
  • अकबर ने मुल्ला हुसैन कश्मीर को जरी कलम की उपाधि प्रदान की !

4. जहांगीर

  • जहांगीर ने अपनी आत्मकथा जहांगीरनामा लिखी इसके आरंभिक 16 सालों का इतिहास जहांगीर ने स्वयं अपने हाथों से लिखा और अगले 3 सालों का इतिहास मोतमिद खा ने लिखा !

5. शाहजहां

  • शाहजहां के द्वारा आमीन कजविनी को अपना इतिहासकार बनाया जिसने बादशाहनामा पुस्तक लिखना शुरू किया परंतु शाहजहां ने कजवीनी के स्थान अब्दुल हमीद लाहोरी को इतिहासकार नियुक्त किया !
  • इसी के द्वारा बादशाहनामा आदिशेष भाग का लेखन कार्य किया गया !
  • पंडित जगन्नाथ ने गंगाधर व गंगालहरी नामक पुस्तक लिखी !
  • शाहजहां के बेटे दाराशिकोह ने 52 उपनिषदों का सिर -ए-अकबर के नाम से फारसी में अनुवाद किया
  • दाराशिकोह ने मजम – उल- बहरीन (दो समुंदरों का संगम) नामक पुस्तक लिखी है !
  • इसके अलावा सकीनत – उल-ओलिया ने विभिन्न सूफी संतों की जीवनी लिखी है !
  • सकीनत उल औलिया ने कादरी संप्रदाय के संतों की जीवनी लिखी है !
  • शाहजहां की पुत्री जहांआरा ने साहिंबिया नामक पुस्तक लिखी है !
  • इसमें कादरी संप्रदाय के संत मुल्ला शाह की जीवनी लिखी थी !

6. औरंगजेब

  • औरंगजेब ने मिर्जा मुहम्मद कासिम को सरकारी इतिहासकार बनाया !
  • इसने आलमगीरनामा नामक पुस्तक लिखना शुरू की परंतु बाद में औरंगजेब ने सरकारी इतिहास के लेख पर प्रतिबंध लगा दिया !
  • फिर भी औरंगजेब के समय का इतिहास हाशिम मुंनतव उल लुबान पुस्तक में लिखा है परंतु औरंगजेब के डर के कारण इसे छिपा कर रखा गया
  • मुहम्मद शाह रंगीला (1719-1748) के समय से मुहम्मद शाह को दिया गया
  • मुहम्मद शाह ने हाशिम को खाफी खा की उपाधि प्रदान की !
  • पंडित भीमसेन ने नुस्खा -ए- दिलकुशा नामक पुस्तक लिखी जिसमें औरंगजेब को मराठों के विरुद्ध किए गए अभियानों को लिखा गया !
  • ईश्वरदास नागर ने फुतूहात-ए-आलमगीर नामक पुस्तक लिखी है !
  • इसने औरंगजेब का मेवाड़ के शासक राजसिंह व मारवाड़ के शासक अजीत सिंह के साथ संबंधों को लिखा है !
  • मिर्जा मोहम्मद साकी ने महासिरे आलमगिरी नामक पुस्तक लिखी है जिसे डॉक्टर जदुनाथ सरकार ने मुगल काल साहित्य का गिजेटीयर कहां है !
  • औरंगजेब की पुत्री जेब्लूनिस्सा ने दीवान ए मरूफी की रचना की है

मुगलकालीन चित्रकला

आइए मुगलकालीन चित्रकला के बारे में जानते हैं जो कि निम्न शासकों के काल में निम्न चित्रकला विकसित हुई है जो कि निम्न प्रकार से है !

1. बाबर

  • बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुक ए बाबरी में विहजाद नामक चित्रकार का उल्लेख किया गया है जिसे पूर्व का राफेल कहा गया है है !

2. हुमायूं

  • हुमायूं ने अपना निर्वासन कॉल ईरान के शासक तहमास्प के पास व्यतीत किया था !
  • ईरान से भारत लौटते समय हुमायूं दो चित्रकारों मीर सैयद अली वह अब्दुल समद को अपने साथ भारत ले आया !
  • इन दोनों ने हुमायूं के पास दास्तान -ए -अमीर हमज़ा या हमजनामा नामक ग्रंथ चित्रित करना शुरू किया !
  • अलाऊदोला कजवीनी ने अपनी पुस्तक नफाइस उल – मआसिर ने हम्ज़नामा को हुमायूं के मस्तिष्क की उपज का है ! परंतु हुमायूं जब भारत का शासक बना तथा उसके 6 महीने के बाद मृत्यु हो गई !

3. अकबर

  • हम्ज़नामा का अधिकांश चित्रण अकबर के शासनकाल में हुआ इसमें पैगंबर मोहम्मद के चाचा हमजा की अरब देशों में प्रचलित वीरता की कथाओं को कपड़ों पर चित्रित किया गया है !
  • 100 चित्रों के 12 खंडों सहित कुल 1200 चित्र बनाए गए !
  • हमजनमा मीर सैयद अली के निर्देशन में बनकर पूर्ण हुई !
  • अब्दुस समद को अकबर ने टकसाल का अधिकारी व मुल्तान का दीवान नियुक्त किया था !
  • अब्दुस समद ने चावल के दाने पर चौगान खेलते हुए व्यक्ति का चित्र बनाया था इसलिए अकबर ने अब्दुस समद को शीरी कलम की उपाधि प्रदान की थी !
  • अकबर के समय महाभारत को रज्जनामा के नाम से चित्रित किया गया !
  • रज्जनामा का शाब्दिक अर्थ- युद्धों की पुस्तक होता है !
  • फारुख बेग को छोड़कर अकबर के समकालीन सभी चित्रकारों ने रज्जनामा के चित्र बनाएं !
  • दसवंत अकबर के समय का उभरता हुआ चित्रकार था ! इसके चित्र केवल रज्जनामा में मिले बाद में दसवंत ने मानसिक रूप से विक्षिप्त होकर आत्महत्या कर ली !
  • रज्जनामा अब्दुस समद के के पुत्र मोहम्मद शरीफ के निर्देशन में बनकर पूर्ण हुई !
  • बसावन अकबर के समय का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार माना गया है !
  • बसावन भूदृश्य, व्यंग चित्रकारी वछवि चित्रकारी में निपुण था ! एक क्रशकाय घोड़े के साथ जंगल में भटकते हुए मजनू का चित्र बसावन का सर्वश्रेष्ठ चित्र है !
  • अकबर चित्रकला को देवी देवताओं की कृपा प्राप्त करने का माध्यम मानता था !
  • अकबर के समय फारूक बेग ने कपड़े की बजाए कागज पर चित्रकारी को प्रारंभ किया था !
  • मिशकिन यूरोपीय शैली से प्रभावित चित्रकार था !
  • अकबर का कथन था” मैं ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को हेय की दृष्टि से देखता हूं जो चित्रकारी से घृणा करते हैं

4. जहांगीर

  • जहांगीर के समय के काल को मुगल चित्रकला का स्वर्ण काल कहा जाता है !
  • अकबर के समय ईरान से आये आका – रिजा- खा ने जहांगीर के समय आगरा में एक चित्रशाला की स्थापना की !
  • जहांगीर के समय से ही चित्रकारों को उस्ताद कहा जाने लगा !
  • उस्ताद मंसूर पशु पक्षियों की चित्रकारी में निपुण था इसे जहांगीर ने नादिर- उल- अस्त्र (संसार में आदित्य) की उपाधि प्रदान की !
  • इसके बनाए गए चित्रों में साइबेरियन सारस वह बंगाल के अनोखा पुष्प का चित्र प्रसिद्ध है !
  • अब्दुल हसन व्यक्तियों की छवि चित्रकारी में निपुणता इसे जहांगीर ने नादिर – उल – जमा (संसार में अतुल्य) की उपाधि प्रदान की ! यह व्यक्ति छवि चित्रकारी में निपुण था !
  • इसने ईसाई संत जान पाल व जहांगीरनामा मुखपृष्ठ भाग का चित्र बनाया था जिसमें जहांगीर का आगरा में हुआ राज्य अभिषेक है !
  • फारुख बेग ने बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह का चित्र बनाया था !
  • फारुख बेग के शिष्य दौलत ने अपने साथी चित्रकारों गोवर्धन , विशन दास, अबुल हसन व अपने स्वयं का चित्र बनाया !
  • जहांगीर ने विशनदास को ईरान के राज परिवार का चित्र बनाने भेजा था !
  • जहांगीर ने अपनी आत्मकथा बसावन के पुत्र मनोहर के नाम का उल्लेख नहीं किया है !
  • पर्सी ब्राउन ने लिखा है ” जहांगीर की मृत्यु के साथ ही मुगल काल की चित्रकला का पतन हो गया !

5. शाहजहां

  • शाहजहां के समय चित्रों में आभामंडल बनने लगे !
  • साहिबा शाहजहां के समय की एक महिला चित्रकार थी !

6. औरंगजेब

  • औरंगजेब ने चित्रकला को प्रतिबंधित कर दिया था !

मुगलकालीन संगीत

आइए दोस्तों मुगलकालीन संगीत के बारे में जानते हैं जो कि निम्न प्रकार से –

1. बाबर

  • बाबर ने तुजुक -ए- बाबरी में लिखा है – दिनभर युद्धाभ्यास में व्यस्त होने के बाद भी दिन का एक पहर संगीत के लिए अवश्य निकालना चाहिए !

2. हुमायूं

  • हुमायूं का संगीत के प्रति लगाव” कानून- ए -हुमायूंनी नामक पुस्तक में लिखा गया है !

3. अकबर

  • अकबर के समय ध्रुवपद गायक कि 4 शेलिया प्रचलन थी !
  • गौरहागिरी
  • खंडारी
  • अंगूरी
  • नौहारी
  • इनका विकास ग्वालियर के शासक के मानसिंह तोमर के दरबार में हुआ था !
  • तानसेन अकबर के समय का प्रमुख संगीतकार था इसका वास्तविक नाम रामतनु पांडे था !
  • तानसेन पहले रीवा के शासक के रामचंद्र राव (मध्य प्रदेश ) के दरबार में कार्य करते थे !
  • अकबर ने तानसेन को रामचंद्र राव से मांगा था !
  • तानसेन सारंगी वादन में निपुण था जो दोपहर से शाम तक किया जाता था !
  • अबुल फजल ने लिखा है कि तानसेन जैसा गायक पिछले 1000 वर्षों में भी पैदा नहीं हुआ है !
  • अबुल फजल ने मालवा के शासक के बाज बहादुर को हिंदी गायन शैली का श्रेष्ठ संगीतकार कहां है !
  • बैजू बावरा अकबर के समकालीन था लेकिन कभी भी अकबर के दरबार में उपस्थित नहीं हुआ ! स्वयं अकबर इसका संगीत सुनने के लिए वृंदावन गया !
  • बैजू बावरा ने कहा था कि मेरा संगीत मेरे ईश्वर का है !

4. जहांगीर

  • जहांगीर के समय तानसेन का पुत्र विलास खा श्रेष्ठ संगीतकार था !
  • जहांगीर ने गजल गायक शैली को आनंद खां की उपाधि प्रदान की !

5. शाहजहां

  • शाहजहां के समय विलास खा का दामाद लाल खा श्रेष्ठ संगीतकार था जिसे शाहजहां ने गुण समुंद्र की उपाधि प्रदान की !

6. औरंगजेब

  • औरंगजेब ने संगीत कला पर भी प्रतिबंध लगा दिया फिर भी संगीत शास्त्र की सर्वा पुस्तकें औरंगजेब के समय से ही लिखी गई !
  • संगीतकारों के द्वारा वाद्य यंत्रों का जनाजा निकाला गया तक औरंगजेब ने कहा कि इन्हें इतनी गहराई में दफन कर दो ताकि इनका शोर बार सुनाई ना दे
  • खाफी खा ने औरंगजेब को कुशल वीणा वादक कहा !
  • मनूची ने लिखा कि प्रतिबंध के बावजूद राजमहल में राजकुमारियों की संगीत शिक्षा का अच्छा प्रबंध किया गया था !
  • मोहम्मद शाह रंगीला :- मोहम्मद शाह रंगीला के समय सुखरो खा ने तबले का अविष्कार किया था !

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